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                <title>kota coaching - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>Allen Coaching के छात्र ने फांसी लगाकर की आत्महत्या, सात दिन पहले ही आया था कोटा</title>
                                    <description><![CDATA[अप्रेल से अब तक एलन के आठ कोचिंग विद्यार्थियों की हो चुकी मौत]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/allen-coaching-student-committed-suicide-by-hanging-himself-had-come/article-89729"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-09/pze-(3)8.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। कोचिंग नगरी में कोचिंग छात्रों की आत्महत्या करने का सिलसिला थम नहीं रहा है। अप्रैल 2024 से अब तक एलन कोचिंग के आठ  विद्यार्थियों की मौत हो चुकी है। इनमें से सात ने खुदकुशी कर ली जब कि एक स्टूडेंट की मौत से अब तक पर्दा नहीं उठा है। जवाहर नगर थाना क्षेत्र में एलन कोचिंग के छात्र परशुराम पुत्र खचेरमल निवासी मानपुर बरसाना जिला मथुरा ने फांसी का फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली।</p>
<p>पुलिस ने छात्र को एमबीएस पहुंचाया। वहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।  गुरुवार को छात्र के पिता के कोटा आने के बाद पोस्टमार्टम कराया जाएगा। परशुराम ने सात दिन पहले ही एलन कोचिंग इंस्ट्टीयूट में एडमिशन लिया था। वह नीट की तैयारी कर रहा था। इससे पूर्व वह वर्ष 2022 में भी एलन कोचिंग से नीट की तैयारी कर चुका था।</p>
<p>पुलिस निरीक्षक हरिनारायण शर्मा ने बताया कि रात करीब 12 बजे कंट्रोल रूम से सूचना मिली थी। सूचना पर डिप्टी एसपी राजेश टेलर तथा वह स्वयं पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे थे और कोचिंग छात्र को फंदे से नीचे उतार कर एमबीएस लेकर गए थे। उसके पिता को  रात को साढ़े 12 बजे सूचना दी गई। </p>
<p><strong>ऐसा पता होता तो उसे कभी कोटा नहीं भेजता</strong><br />पिता खचेरमल ने बताया कि उनका पुत्र  वर्ष 2022-23 में भी कोटा में रह कर ही एलन से नीट की तैयारी कर चुका था। 28 अगस्त 2024 को फिर से एलन में नीट के लिए एडमिशन करवाया था। मुझे क्या पता था कि उसका पुत्र सुसाइड कर लेगा, ऐसा पता होता तो उसे कभी कोटा नहीं भेजता। </p>
<p><strong>एलन संस्थान के निदेशकों ने नहीं ली सुध </strong><br />पिता से रोते बिलखते बताया कि उनके पुत्र ने रात को ही सुसाइड किया था, इसके बाद वह कोटा अपने परिजन के साथ आए, लेकिन कोचिंग के किसी कर्मचारी तथा निदेशकों ने कोई सुध नहीं ली है। अपने पुत्र के एडमिशन के समय एक लाख बीस हजार रुपए तथा मकान किराया सहित खाने पीने के रुपए दे चुका हूं। </p>
<p><strong>फिर मौन रहा संस्थान</strong><br />मामले में एलन कोचिंग संस्थान के निदेशक गोविंद माहेश्वरी, नवीन माहेश्वरी तथा नितेश शर्मा को फोन लगाकर उनका पक्ष जानने की कोशिश की। उन्हें साधारण मैसेज के साथ वाट्सअप मैसेज भी किया लेकिन उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 06 Sep 2024 10:08:30 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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                <title>कोटा कोचिंग में इस वर्ष अब तक 26 छात्रों ने की आत्महत्या, पास होने का था दबाव: सुशील मोदी</title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान के कोटा में स्थित कोचिंग संस्थानों के कई छात्रों ने आत्महत्या की है। राज्यसभा में मंगलवार को भाजपा सांसद सुशील मोदी ने कहा कि कोटा में इस वर्ष अभी तक 26 छात्रों ने आत्महत्या की है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/26-students-have-committed-suicide-in-kota-coaching-so-far/article-63510"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-12/sushil-mosd.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। राजस्थान के कोटा में स्थित कोचिंग संस्थानों के कई छात्रों ने आत्महत्या की है। राज्यसभा में मंगलवार को भाजपा सांसद सुशील मोदी ने कहा कि कोटा में इस वर्ष अभी तक 26 छात्रों ने आत्महत्या की है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि आईआईटी, आईआईएम, एनआईटी में भी बड़ी संख्या में नौजवान आत्महत्या कर रहे हैं। उन्होंने केंद्र सरकार से एक आयोग बनाने की मांग की, जो पता लगाए कि इतनी बड़ी संख्या में छात्र आत्महत्या क्यों कर रहे हैं। </p>
<p><strong>शिक्षण संस्थानों में मेंटल हेल्थ क्लिनिक बनाए जाएं :</strong> उन्होंने राज्यसभा में कहा गया कि उच्च शिक्षण संस्थानों में मेंटल हेल्थ क्लिनिक की स्थापना की जाए। डिप्रेशन में गए छात्र या किसी प्रकार का प्रेशर में जी रहे छात्र, इन मेंटल हेल्थ क्लीनिक में जाकर अपना इलाज कर सकें या फिर काउंसलिंग प्राप्त कर सकें। मोदी ने बताया कि बीते 5 वर्षों में प्रतिवर्ष लगभग 25-30 छात्रों ने यहां कोटा में आत्महत्या की है। यह वे छात्र थे जो कोटा के विभिन्न कोचिंग इंस्टिट्यूट में मेडिकल या फिर इंजीनियरिंग जैसी प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करने आए थे। </p>
<p><strong>इंस्टिट्यूट में काउंसलर और एक्सपर्ट्स लगाएं</strong><br />उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षण संस्थान और कोचिंग इंस्टिट्यूट में काउंसलर और एक्सपर्ट्स की बहाली की जाए। ये काउंसलर और एक्सपर्ट उन छात्रों की काउंसलिंग और मदद कर सकेंगे जो पढ़ाई या किसी अन्य प्रेशर के कारण डिप्रेशन में चले गए हैं।</p>
<p><strong>कोर्सेज कठिन, इन पर पुनर्विचार किया जाए<br /></strong>सुशील मोदी ने कहा कि कोचिंग सेंटर में पढ़ाई जा रहे आईआईटी और आईआईएम के जो कठिन कोर्सेज हैं, उनके बारे में पुनर्विचार किया जाए। इतना प्रेशर है और इस प्रकार का कठिन सिलेबस है कि उसमें उतीर्ण होना छात्रों के लिए बहुत कठिन हो जाता है। सरकार को उसके पूरे सिलेबस को रिडिजाइन करने के बारे में विचार करना चाहिए। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 06 Dec 2023 10:17:44 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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                <title>स्टूडेंट्स कोटा की आर्थिकी की धुरी, इनका ध्यान रखना हम सब की जिम्मेदारी</title>
                                    <description><![CDATA[नवज्योति ने उठाया था सेल्फ स्टडी करने वाले विद्यार्थियों की सुरक्षा का मामला]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/death-of-student-in-kota-due-to-dengue-hindi-news/article-56244"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-09/students-kota-k-arthiki-ki-dhuri,-inka-dhyan-rkhna-hm-sb-ki-zimmedari...kota-news-04-09-2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। डेंगू और स्क्रब टायफस से एक कोचिंग छात्रा की मौत के बाद यह मामला तूल पकड़ता जा रहा है कि कोटा में आकर स्टडी करने वाले छात्र-छात्राओं का आखिर कौन धणी धोरी है। वह किसके सहारे की आस लेकर कोचिंग सिटी में आ रहे हैं। शुक्रवार को झारखंड निवासी छात्रा स्नेहा भारती की कोटा के निजी अस्पताल में स्क्रब टायफस से मौत हो गई थी। इस मामले को लेकर छात्रा के पिता ने जिला प्रशासन पर आरोप लगाए थे कि उन्होंने छात्रा की  किसी प्रकार की मदद नहीं की। जब कि जिला प्रशासन का कहना है कि कोटा में रहने वाले हर नागरिक  की सुरक्षा और उसकी हरसंभव मदद प्रशासन की जिम्मेदारी है। </p>
<p><strong>क्या है मामला</strong><br />तलबंडी स्थित अपने परिचितों के पास रहकर आईआईटी की तैयारी कर रही छात्रा स्नेहा भारती की शुक्रवार को स्क्रब टायफस से मौत हो गई थी। उसे डेंगू भी हुआ था। भारती के माता पिता उसके डेंगू होने के तीन चार दिन पहले ही कोटा आए थे। उन्होंने बुधवार को ही उसे अस्पताल में भर्ती कराया था और शुक्रवार को भारती की मल्टी आर्गन फेल होने से मौत हो गई थी। भारती की मौत के बाद उसके पिता नीलकंठ मंडल ने भावुक अपील करते कहा था कि कोटा में बाहर से आकर पढ़ाई करने वाले अभिभावक अपने बच्चों का ध्यान रखें। </p>
<p><strong>नवज्योति ने उठाया था सेल्फ स्टडी करने वाले विद्यार्थियों की सुरक्षा का मामला</strong><br />इसी वर्ष जनवरी माह में कोटा में रहकर सेल्फ स्टडी करने वाले एक छात्र द्वारा आत्मदाह का प्रयास करने के बाद यह सवाल उठने लगा था कि कोचिंग संस्थानों के स्टूडेंट को तो काउंसलिंग, मोटिवेशन, हेल्प लाइन जैसी सुविधाएं स्वत: मिल जाती हैं लेकिन सेल्फ स्टडी करने वाले छात्रों की जिम्मेदारी किसकी है। इसके बाद जिला स्तर पर गठित समिति के अध्यक्ष व अतिरिक्त  जिला कलक्टर राज कुमार सिंह ने कहा था कि कोटा में सेल्फ स्टडी करने वाले ही नहीं यहां निवास करने वाले हर व्यक्ति की सुरक्षा की जिम्मेदारी प्रशासन की है। प्रशासन को जानकारी मिलती तो छात्र की मदद प्रशासन अवश्य करता। </p>
<p><strong>जिला कलक्टर ओपी बुनकर से बातचीत</strong><br /><strong>नवज्योति : </strong>स्क्रब टायफस से कोचिंग छात्रा की मौत के मामले को लेकर छात्रा के पिता ने आरोप लगाया है कि प्रशासन ने उनकी कोई मदद नहीं की। <br /><strong>जिला कलक्टर :</strong> यह आरोप गलत है। प्रशासन कोचिंग छात्रों को लेकर बहुत संवेदनशील है। खासकर मैं खुद बच्चों के मामले को लेकर संवेदनशीलता के साथ मामलों को मोनिटर कर रहा हूं। यह बच्ची चार पांच दिनों से बीमार थी। हमसे मदद मांगी जाती तो प्रशासन हर संभव मदद करता।  हाल ही एक कोचिंग छात्र जो बंगाल का निवासी है। उसकी तबीयत बिगड़ी और वह अस्पताल में भर्ती नहीं हो रहा था। वह केवल बंगाली ही समझता है। हॉस्टल मालिक ने हमें सूचित किया। हमने उसके परिजनों को सूचित कर उसे तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया। उसकी देखरेख की भी जिम्मेदारी ली। <br /><strong>नवज्योति :</strong> कोचिंग छात्र तो कोटा के लिए ब्रेड एंड बटर हैं। इनकी वजह से कोटा की आर्थिकी चलती है। फिर इनकी जिम्मेदारी आखिर किसकी है।<br /><strong>जिला कलक्टर : </strong>कोटा की आर्थिक स्थिति की धुरी आज कोचिंग स्टूडेंट ही हैं। इनका ध्यान रखना प्रशासन की ही नहीं हम सब की जिम्मेदारी है।  हम सब को मिलकर इनके अभिभावकों जैसी जिम्मेदारी निभानी पड़ेगी। तभी कोटा और समृ्िदद की ओर बढ़ेगा। यदि स्टूडेंट का आना कम होता है तो उससे पूरा कोटा प्रभावित होगा। <br /><strong>नवज्योति : </strong>कोटा में स्क्रब टायफस से छात्रा की मौत हुई है, यह कैसे हो रहा है <br /><strong>जिला कलक्टर : </strong>छात्रा की मौत मल्टी आर्गन फैल होने से हुई है। यह मामला गंभीर है। मल्टी आॅर्गन फेल्योर होना वह भी इतनी जल्दी होना इसकी गंभीरता को इंगित करता है। हमने छात्रा के सैम्पल पूणे भेजे हैं। हो सकता है कोई नया स्ट्रेन आया हो। स्क्रब टायफस पिस्सू के काटने से होता है। पिस्सू जानवरों के आसपास रहने अथवा घास आदि में रहते काटने से होता है। यह छात्रा कैसे पिस्सू के संपर्क में आई इसकी भी मेडिकल विभाग हिस्ट्री खंगाल रहा है।<br /><strong>नवज्योति : </strong>डेंगू भी लगातार बढ़ रहा है। इसे रोकने के क्या प्रयास कर रहे हैं। <br /><strong>जिला कलक्टर :</strong> डेंगू के मामलों में पहले की अपेक्षा अब कमी आई है। 2017 में भी ऐसी ही स्थिति बन गई थी।  डेंगू के इलाज में डिहाइड्रेशन को कंट्रोल करना जरूरी होता है। इसका इलाज भी यही है। हमने डेंगू की रोकथाम के लिए हर इलाके में फोगिंग करवाने के साथ-साथ मच्छर पनपने के इलाकों को टार्गेट किया है। चिकित्सा विभाग की टीमें काम कर रही हैं। अब स्थिति कंट्रोल में है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 04 Sep 2023 15:41:21 +0530</pubDate>
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                <title>कोटा कोचिंग का जलवा पड़ रहा फीका</title>
                                    <description><![CDATA[कोचिंग अब पैसा कमाने की फैक्ट्री बन गए हैं, ऐसे में एक-एक स्टूडेंट पर व्यक्तिगत ध्यान नहीं दिया जा रहा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/kota-coaching-fades-away/article-50551"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-07/630-400-size-की-कॉपी-(2).png" alt=""></a><br /><p>कोटा। मेडिकल व इंजीनियरिग की प्रतियोगी परीक्षाओं में प्रवेश दिलाने के लिए देश भर में विख्यात शिक्षानगरी की कोटा कोचिंग का जलवा अब फीका पड़ता नजर आ रहा है। जेईई एडवांस्ड व नीट के पिछले कुछ वर्षों में जहां कोटा कोचिंग के चार से पांच स्टूडेंट टॉप टेन में स्थान बनाते थे वहीं पिछले तीन साल की  परीक्षा के परिणाम की तुलना करें तो यह हालात काफी कमजोर नजर आते हैं। दूसरी तरफ  तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, कर्नाटक जैसे राज्यों के छात्र टॉप टेन मैरिट में ज्यादा नजर आ रहे हैं। जेईई एडवास्ड और नीट दोनों ही परीक्षाओं में पिछले तीन वर्ष में कोटा कोचिंग के स्टूडेंट टॉप टेन में केवल एक से दो स्थान ही बना सके हैं। हाल ही जारी नीट परीक्षा में टॉप टेन में कोटा कोचिंग के केवल एक छात्र को स्थान मिला है वह भी सबसे अंतिम दसवां। विशेषज्ञों का मानना है कि कोचिंग अब पैसा कमाने की फैक्ट्री बन गए हैं। ऐसे में एक-एक स्टूडेंट पर व्यक्तिगत ध्यान नहीं दिया जा रहा। कोचिंग का छात्रों के प्रति समर्पण कम औैर रुपए के प्रति ज्यादा हो गया है। </p>
<p><strong>नीट में ऐसे गिर रहा स्तर</strong><br />नीट 2021 में  हैदराबाद के मृणाल कुट्टी ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। इस वर्ष कोटा कोचिंग को केवल एक स्थान अमन को फोर्थ रैंक के रूप में मिला। इसी प्रकार 2022 में भी तनिष्का के रूप में एक ही स्थान मिला। वर्ष 2023 में  टॉप टेन की सूची में सबसे अंतिम स्थान पर जयपुर का पार्थ खंडेलवाल रहा। जब कि इस सूची में आंध्र प्रदेश,तमिलनाडु, कर्नाटक, दिल्ली के छात्रों का दबदबा नजर आ रहा है।</p>
<p><strong>जेईई एडवांस्ड में भी हालात जस के तस</strong><br />इसी प्रकार जेईई एडवांस्ड 2021 में प्रथम स्थान कोटा कोचिंग के मृदुल अग्रवाल को  मिला इसके साथ नौै वें स्थान पर अर्जन आदित्य सिंह रहे। 2022 में केवल मयंक मोटवानी को पांचवा स्थान मिला, 2023 में जरूर चार और छह रैंक कोटा कोचिंग के हिस्से में आई। ऐसे में देखा जाए तो पिछले वर्षों में कोटा कोचिंग ने जो साख बनाई थी वह अब सुस्त होती नजर आ रही है। जब कि देश भर से बच्चों के अभिभावक अपने बच्चों को उज्जवल भविष्य के  लिए कोटा भेजते हैं लेकिन कोचिंग उस साख को कायम रखने में कामयाब नहीं हो पा रही है।  उल्टा लगातार छात्रों द्वारा की जा रही आत्म हत्याओं के चलते अभिभावक भयग्रस्त होने लगे हैं।</p>
<p><strong>टापर्स में छात्राओं का बिगड़ रहा गणित</strong><br />नीट में छात्राओं की बात करें तो 2023 में टॉप 10 में केवल एक छात्रा है, जब कि पिछले दो वर्ष में कोई छात्रा टॉप टेन में स्थान ही नहीं बना पाई। नीट 2023 में टॉप 50 में से मात्र दस छात्राएं ही शामिल हैं। खड़गपुर आईआईटी द्वारा आयोजित जेईई एडवांस्ड 2021 परीक्षा में काव्या चौपड़ा गर्ल्स केटेगरी में प्रथम रही लेकिन इसकी एआईआर 98 थी। 2022 में मुंबई आईआईटी द्वारा आयोजित  2022 परीक्षा में तनिष्का काबरा ने गर्ल्स केटेगरी ने प्रथम स्थान प्राप्त किया लेकिन इसकी सीएलआर 16  वीं थी। गुवाहाटी आईआईटी द्वारा आयोजित  2023 परीक्षा में भी नौंवा स्थान प्राप्त करने वाली छात्रा डिस्टेंस लर्निंग की बताई जा रही है। </p>
<p><strong>समर्पण का भाव कमजोर हुआ</strong><br />कोचिंग के लिए कोटा आने वाले बच्चों की संख्या अब बढ़ गई है। क्वालिटी के स्थान पर क्वांटिटी पर कोचिंग का जोर है। कोचिंग पैसा कमाने का जरिया बन गया है। वास्तव में शिक्षक और कोचिंग संचालकों का समर्पण का भाव कम हो गया है। जब तक समर्पण था कोई परेशानी नहीं थी। अब शिक्षकों को बच्चे की स्ट्रेंथ तो क्या नाम तक पता नहीं होता। बच्चों ने शिक्षकों का भविष्य तो बना दिया लेकिन शिक्षक बच्चों का भविष्य नहीं बना पा रहे।  <br /><strong>-देव शर्मा, एजुकेशन एक्सपर्ट</strong></p>
<p><strong>नियामक संस्था बनानी चाहिए</strong><br />कोचिंग संस्थानों के लिए सरकार को नियामक संस्था बनानी चाहिए ताकि  गाइड लाइन के अनुसार काम हो सके। वर्तमान में कोचिंग क्लासों में शिक्षक और विद्यार्थियों का अनुपात ठीक नहीं है। बच्चों पर पूरा फोकस नहीं हो पाता है। आदर्श रूप से चालीस बच्चों की क्लॉस होनी चाहिए। लेकिन सौ से ज्यादा बच्चों की क्लास लगाई जा रही है। एडमिशन देने से पहले अभिभावकों के सामने बच्चे का मनो वैज्ञानिक टेस्ट भी लिया जाना चाहिए जिससे बच्चे की अभिरुचि जानी जा सके। इससे आत्महत्या जैसे प्रकरण भी रुकेंगे और रिजल्ट में सुधार आएगा। <br /><strong>-प्रोफेसर भोपाल सिंह, पूर्व निदेशक शौध कोटा यूनिवर्सिटी </strong></p>
<p><strong>हर बच्चे को बनाना होगा टॉपर</strong><br />यहां रिजल्ट ओरियंटेड टॉपर बच्चों पर अधिक फोकस किया जा रहा है।  अधिकांश बच्चे अपने घर से दूर आकर कोचिंग कर रहे हैं। वे अपने यहां के टॉपर हैं लेकिन कोचिंग में जब दूसरे टॉपर से उनकी तुलना होती है तो वे स्वयं को कमजोर मानने लगते हैं। जिससे वे तनाव में आ जाते हैं और उनका रिजल्ट डाउन होने लगता है।  कोचिंग संस्थानों में भी उन बच्चों की  संख्या अधिक है उन पर ध्यान नहीं दिया जाता। संस्थानों को बच्चों की कॉउंसलिंग कर उनका तनाव कम करने के प्रयास करने चाहिए।। यदि कमजोर बच्चों पर ध्यान देकर उन्हें टॉपर बनाया जाएगा तो रिजल्ट की संख्या बढ़ सकती है।  कोचिंग संस्थानों को भी बच्चे को पैसे कमाने की फैक्ट्री नहीं समझना चाहिए। <br /><strong>-स्नेहलता साहनी,रिटायर्ट प्रिंसीपल, जेडीबी कॉलेज कोटा </strong></p>]]></content:encoded>
                
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                                            <category>कोटा</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 01 Jul 2023 12:04:49 +0530</pubDate>
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