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                <title>असम CM हिमंता की पत्नी पर विवादित टिप्पणी मामला : सुप्रीम कोर्ट से पवन खेड़ा को बड़ा झटका, अंतरिम जमानत पर स्टे</title>
                                    <description><![CDATA[असम के मुख्यमंत्री की पत्नी पर विवादित टिप्पणी मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस नेता पवन खेड़ा की अंतरिम जमानत पर रोक लगा दी है। अदालत ने उन्हें राहत के लिए असम कोर्ट जाने का निर्देश दिया है। इस फैसले से खेड़ा की कानूनी मुश्किलें बढ़ गई हैं, जिससे राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/controversial-comment-on-assam-cm-himantas-wife-case-big-blow/article-150487"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/pawan-kheraa1.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली।  उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को ट्रांजिट अग्रिम जमानत देने के तेलंगाना उच्च न्यायालय के फैसले पर रोक लगा दी। यह मामला असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी रिंकी भुइयां सरमा की एक शिकायत से संबंधित है। न्यायालय का यह आदेश असम पुलिस की एक अपील पर आया है। इसमें असम पुलिस ने कहा था कि तेलंगाना उच्च न्यायालय के पास इस मामले में सुनवाई का क्षेत्राधिकार नहीं है। न्यायमूर्ति जे.के. माहेश्वरी और न्यायमूर्ति अतुल एस. चांदुरकर की पीठ ने यह अंतरिम आदेश पारित करते हुए स्पष्ट किया कि श्री खेड़ा असम की उचित अदालत से राहत मांगने के लिए स्वतंत्र हैं। पीठ ने कहा कि अगर श्री खेड़ा असम की अदालत में अग्रिम जमानत के लिए आवेदन करते हैं, तो उच्चतम न्यायालय के इस आदेश का उस आवेदन पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा।</p>
<p>गौरतलब है कि यह पूरा मामला गत पांच अप्रैल को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान श्री खेड़ा के लगाए उन आरोपों से जुड़ा है, जिसमें उन्होंने दावा किया था कि श्रीमती सरमा के पास कई पासपोर्ट हैं और उन्होंने विदेशी संपत्तियों का खुलासा नहीं किया है। इससे पहले 10 अप्रैल को तेलंगाना उच्च न्यायालय ने खेड़ा को एक सप्ताह की अग्रिम जमानत देते हुए गुवाहाटी उच्च न्यायालय जाने का निर्देश दिया था। अब उच्चतम न्यायालय के इस पर रोक लगाए जाने के बाद श्री खेड़ा को असम की संबंधित अदालत से ही राहत लेनी होगी। फिलहाल उच्चतम न्यायालय ने इस याचिका पर नोटिस जारी कर दिया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 15 Apr 2026 13:03:58 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>नीरजा मोदी स्कूल की संबद्धता वापस लेने वाला आदेश स्थगित: हाईकोर्ट ने कहा-स्कूल दस दिन में पांच लाख रुपए सीबीएसई में जमा कराए</title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान हाईकोर्ट ने नीरजा मोदी स्कूल की कक्षा 11-12 की संबद्धता समाप्त करने वाले CBSE के आदेश पर सशर्त रोक लगा दी है। अदालत ने स्कूल को ₹5 लाख जमा कराने और एक माह में कमियां सुधारने का निर्देश दिया। छात्रा की आत्महत्या के बाद उपजे विवाद के बीच, छात्रों के भविष्य को देखते हुए यह अंतरिम राहत दी गई है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/order-withdrawing-affiliation-of-neerja-modi-school-postponed-high-court/article-147125"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-02/high-courat-3.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने नीरजा मोदी स्कूल में कक्षा चार की छात्रा के आत्महत्या करने से जुडेÞ मामले में सीबीएसई के गत 23 फरवरी के उस आदेश को सशर्त स्थगित कर दिया है, जिसके तहत बोर्ड ने स्कूल की कक्षा 11 व 12 की संबद्धता को दो साल के लिए वापस ले लिया था। अदालत ने कहा है कि इसके लिए स्कूल दस दिन में पांच लाख रुपए सीबीएसई में जमा कराए। इसके साथ ही स्कूल प्रशासन बोर्ड की ओर से गत 3 नवंबर को बताई सभी कमियों को एक माह में दुरुस्त करेगा। </p>
<p>अदालत ने कहा कि बोर्ड 45 दिन बाद स्कूल का निरीक्षण करेगा और यदि कोई कमी पाई जाती है तो अदालत में उसके खिलाफ प्रार्थना पत्र पेश किया जा सकता है। जस्टिस गणेश राम मीणा की एकलपीठ ने यह आदेश नीरजा मोदी स्कूल की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए। अदालत ने बोर्ड को कहा है कि वह आगामी सुनवाई पर उन स्कूलों की सूची पेश करें, जिनमें वह याचिकाकर्ता के छात्रों को शिफ्ट करना चाहता है। इसके साथ ही इन संस्थानों की सत्यापन रिपोर्ट पेश कर बताया जाए कि इनमें बोर्ड की ओर से निर्धारित मापदंडों के अनुसार कोई कमी नहीं है। </p>
<p>याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता एके शर्मा और अधिवक्ता रचित शर्मा ने कहा कि घटना के बाद संबंधित शिक्षक को हटा दिया गया है। सीबीएसई की ओर से बताई कमियों को भी दूर कर लिया गया है। शेष कमियों को एक माह में ठीक कर लिया जाएगा। याचिका में कहा गया कि सीबीएसई के आदेश से छात्रों के बीच अनिश्चितता पैदा हो गई है, जबकि इसमें उनकी कोई गलती नहीं है। सीबीएसई ने साल 2024 में स्कूल की मान्यता को मार्च, 2029 तक बढ़ाया था। </p>
<p>इसका विरोध करते हुए सीबीएसई के वकील एमएस राघव ने कहा कि स्कूल ने मान्यता संबंधी प्रावधानों की अवहेलना की है। ऐसे बोर्ड की कार्रवाई सही है। मृतक छात्रा के परिजनों की ओर से अधिवक्ता एसएस होरा ने कहा कि प्रावधानों की अवहेलना पर सीबीएसई को कार्रवाई का अधिकार है। याचिकाकर्ता स्कूल तय दिशा-निर्देशों की पालना नहीं कर रही है। सभी पक्षों की बहस सुनने के बाद अदालत ने सीबीएसई के गत 23 फरवरी के आदेश को सशर्त स्थगित कर दिया है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 20 Mar 2026 11:31:01 +0530</pubDate>
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                <title>मानहानि केस में राहुल गांधी को राहत, झारखंड उच्च न्यायालय ने सशरीर हाजिर होने के आदेश पर लगाई रोक</title>
                                    <description><![CDATA[झारखंड में रांची एमपी - एमएल कोर्ट द्वारा कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी को सशरीर उपस्थित होने के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर झारखंड उच्च न्यायालय में आज सुनवाई हुई।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/relief-to-rahul-gandhi-in-defamation-case-jharkhand-high-court/article-50830"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-07/rahul_1.jpg" alt=""></a><br /><p>रांची। झारखंड में रांची एमपी - एमएल कोर्ट द्वारा कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी को सशरीर उपस्थित होने के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर झारखंड उच्च न्यायालय में आज सुनवाई हुई। एकल पीठ के न्यायाधीश संजय कुमार द्विवेदी ने सुनवाई के बाद निकली अदालत के आदेश पर रोक लगा दी। इसके साथ ही न्यायालय ने राहुल गांधी के खिलाफ किसी भी तरह की पीड़क कार्रवाई पर भी रोक लगा दी है।</p>
<p>अब राहुल गांधी से जुड़े मामले की सुनवाई 16 अगस्त  को होगी। झारखंड उच्च न्यायालय के इस आदेश से राहुल गांधी को बड़ी राहत मिली है और अब उन्हें रांची सिविल कोर्ट में सशरीर हाजिरी नहीं लगानी पड़ेगी। राहुल गांधी की ओर से उच्च न्यायालय  के अधिवक्ता पीयूष चित्रेश और दीपांकर रॉय ने पक्ष रखा था।</p>
<p>उल्लेखनीय है कि रांची के रहने वाले प्रदीप मोदी ने राहुल गांधी के खिलाफ मोदी सरनेम पर टिप्पणी को लेकर मानहानि का केस किया था जिसपर रांची एमपी-एमएलए कोर्ट में सुनवाई चल रही है। राहुल गांधी ने सीआरपीसी(कोड ऑफ क्रिमिनल प्रोसीजर) की धारा 205 के तहत सशरीर पेशी से छूट मांगी थी जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया था। इसके बाद इस मामले को लेकर राहुल गांधी झारखंड उच्च न्यायालय पहुंचे थे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Tue, 04 Jul 2023 14:33:45 +0530</pubDate>
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