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                <title>Bombay High Court - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>Bombay High Court RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>बॉम्बे हाई कोर्ट की FDA को फटकार, सरकारी कैंटीनों और मंत्रियों के प्रतिष्ठानों की जांच के आदेश</title>
                                    <description><![CDATA[बॉम्बे हाई कोर्ट ने खाद्य सुरक्षा मामलों में समान कार्रवाई पर जोर देते हुए सरकारी और अर्धसरकारी भोजनालयों की भी जांच कराने का निर्देश दिया। अदालत ने कहा कि निरीक्षण निष्पक्ष और एकसमान होना चाहिए। साथ ही कार्रवाई करते समय स्वच्छता मानकों के साथ कर्मचारियों के रोजगार पर प्रभाव का भी ध्यान रखने की बात कही।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/bombay-high-court-reprimands-fda-orders-investigation-into-government-canteens/article-161390"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-07/इवउइंल-ीब.png" alt=""></a><br /><p>मुंबई। महाराष्ट्र में खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) की कार्रवाई पर बॉम्बे हाई कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए जांच के दायरे को केवल निजी प्रतिष्ठानों तक सीमित नहीं रखने का निर्देश दिया है। नवी मुंबई के एक पांच सितारा होटल का फूड लाइसेंस रद्द किए जाने के मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने पूछा कि क्या सरकारी संस्थानों और मंत्रियों से जुड़े प्रतिष्ठानों की भी इसी तरह जांच की जाती है। कोर्ट ने मंत्रालय, सरकारी और अर्धसरकारी कार्यालयों की कैंटीनों, हाई कोर्ट परिसर और अन्य सरकारी भोजनालयों का निरीक्षण कर रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया। </p>
<p>अदालत ने यह भी कहा कि एक-दो कॉकरोच मिलने मात्र से किसी होटल का लाइसेंस रद्द करना उचित नहीं माना जा सकता। सुनवाई में सामने आया कि संबंधित होटल में 95 प्रतिशत स्वच्छता पाई गई थी, जबकि निर्धारित मानक 79 प्रतिशत है। कोर्ट ने कार्रवाई के दौरान कर्मचारियों के रोजगार पर पड़ने वाले प्रभाव का भी ध्यान रखने की बात कही। वहीं, महाराष्ट्र FDA ने स्कूलों के आसपास जंक फूड की बिक्री पर भी सख्ती बढ़ाते हुए पौष्टिक भोजन सुनिश्चित करने के निर्देश जारी किए हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 30 Jul 2026 13:03:27 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>पायलट ने फ्लाइट में कृपाण ले जाने की अनुमति के लिए किया बॉम्बे हाईकोर्ट का रूख</title>
                                    <description><![CDATA[संविधान के अनुच्छेद 25 से जुड़ा मामले में धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार में सिख धर्म में कृपाण रखने की छूट से जुड़ा मामला सामने आया है जिसके तहत इंडिगो फ्लाइट के एक पायलट ने बॉम्बे हाईकोर्ट से फ्लाइट में कृपाण ले जाने की अनुमति मांगी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/pilot-approaches-bombay-high-court-for-permission-to-carry-saber/article-64049"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-12/kripan.png" alt=""></a><br /><p>मुम्बई। संविधान के अनुच्छेद 25 से जुड़ा मामले में धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार में सिख धर्म में कृपाण रखने की छूट से जुड़ा मामला सामने आया है जिसके तहत इंडिगो फ्लाइट के एक पायलट ने बॉम्बे हाईकोर्ट से फ्लाइट में कृपाण ले जाने की अनुमति मांगी है। इस मामले में सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट के जस्टिस नितिन सामब्रे और जस्टिस अभय मंत्री ने नागरिक उड्डयन मंत्रालय से नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। <br />बता दे कि सिख धर्म से जुड़े धार्मिक प्रतीक को हवाई यात्रा के दौरान ले जाने की अनुमति पहले से है लेकिन पायलट से इस प्रकार की मांग पहली सामने आई है। भारत के संविधान के अनुच्छेद 25 सभी नागरिकों को धार्मिक स्वतंत्रता की गारंटी देता है जिसके तहत सिख धर्म में एक घुमावदार खंजर  जिसे खालसा सिख अपने धार्मिक कपड़े के हिस्से के रूप में रखते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 13 Dec 2023 11:23:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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                <title>Rahul Gandhi के मोदी को कमांडर इन थीफ बोलने वाले बयान पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने अंतरिम राहत बढ़ाई</title>
                                    <description><![CDATA[ बॉम्बे उच्च न्यायालय ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी को भिवंडी की एक मजिस्ट्रेट अदालत के समक्ष पेश होने के लिए दी गई अंतरिम राहत 26 सितंबर तक बढ़ा दी। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/bombay-high-court-rahul-gandhi-relief-on-statement-of-commandar-of-thief-hindi-news/article-54186"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-08/rahul-gandhi-bombay-high-court.png" alt=""></a><br /><p>मुंबई। बॉम्बे उच्च न्यायालय ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी को भिवंडी की एक मजिस्ट्रेट अदालत के समक्ष पेश होने के लिए दी गई अंतरिम राहत 26 सितंबर तक बढ़ा दी। यह मामला भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के एक सदस्य द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को कमांडर इन थीफ कहने के बयान पर दायर मानहानि के मुकदमे से संबंधित है।</p>
<p>न्यायमूर्ति एस.वी. कोतवाल की एकल पीठ ने मामले की सुनवाई नहीं की लेकिन नवंबर 2021 में गांधी को दी गई अंतरिम राहत 26 सितंबर तक बढ़ा दी। गांधी ने मामले में एक मजिस्ट्रेट अदालत द्वारा उन्हें जारी किए गए समन को चुनौती दी है। शिकायत 20 सितंबर 2018 को भाजपा महाराष्ट्र राज्य समिति के सदस्य महेश श्रीमाल (43) द्वारा दर्ज की गई थी।</p>
<p>इसमें कहा गया है कि राफेल विमान सौदे के संबंध में, पहले जयपुर और फिर अमेठी में एक सार्वजनिक रैली को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा पार्टी के सदस्यों को चौकीदार चोर है टिप्पणी से सम्बोधित किया। इस अपमानजनक टिप्पणियों से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रधानमन्त्री की छवि खराब हुई है। उक्त टिप्पणी और संबंधित समाचार विभिन्न समाचार चैनलों, समाचार पत्रों और सोशल मीडिया पर प्रसारित किए गए जिससे मानहानि हुई।</p>
<p>मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट अदालत ने 28 अगस्त, 2019 को आरोपी को समन जारी किया था और कहा था कि जबकि, भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 500 (मानहानि की सजा) के आरोप का जवाब देने के लिए आपकी (गांधी) उपस्थिति आवश्यक है। आपको तीन अक्टूबर, 2019 को मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट अदालत के समक्ष मामले में व्यक्तिगत रूप से या किसी नेता द्वारा उपस्थित होना आवश्यक है।</p>
<p>आदेश में कहा गया था कि शिकायत पर गौर करने पर ऐसा प्रतीत होता है कि शिकायतकर्ता को भाजपा का सदस्य होने के नाते वर्तमान शिकायत दर्ज करने का अधिकार है। शिकायतकर्ता द्वारा शपथपूर्वक बताए गए तथ्य से पता चलता है कि कथित मानहानि न केवल प्रधानमंत्री की बल्कि उनकी पार्टी के सदस्यों की भी हुई है।</p>
<p>शिकायतकर्ता ने आईपीसी की धारा 500 के तहत आरोपी के खिलाफ प्रक्रिया जारी करने के लिए प्रत्यक्ष मामला बनाया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Wed, 09 Aug 2023 18:24:34 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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                <title>बॉम्बे उच्च न्यायालय ने पुलिस को समलैंगिक जोड़े को सुरक्षा प्रदान करने का दिया निर्देश</title>
                                    <description><![CDATA[ बॉम्बे उच्च न्यायालय ने पुलिस को जरूरत पडऩे पर एक समलैंगिक जोड़े को सुरक्षा प्रदान करने का निर्देश दिया है। सूत्रों ने गुरुवार को यह जानकारी दी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/bombay-high-court-directs-police-to-provide-security-to-gay/article-51058"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-07/445.png" alt=""></a><br /><p>मुंबई। बॉम्बे उच्च न्यायालय ने पुलिस को जरूरत पडऩे पर एक समलैंगिक जोड़े को सुरक्षा प्रदान करने का निर्देश दिया है। सूत्रों ने गुरुवार को यह जानकारी दी।  न्यायमूर्ति रेवती मोहिते-डेरे और न्यायमूर्ति गौरी गोडसे की खंडपीठ एक समलैंगिक जोड़े की याचिका पर सुनवाई कर रही हैं, जिसमें से पहले याचिकाकर्ता के परिवार से खतरा की आशंका जताई गई है, इसलिए उन्हें उचित सुरक्षा प्रदान करने के लिए अधिकारियों को निर्देश देने की मांग की गयी। इसके अलावा, याचिका में मांग की गई कि याचिकाकर्ता के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाए।</p>
<p> सुनवाई के दौरान पीठ ने यह भी टिप्पणी की कि ऐसे मामलों से निपटने के लिए पुलिस को संवेदनशील होने की जरूरत है। याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता विजय हीरेमथ ने कहा कि याचिकाकर्ता 18 वर्ष से अधिक उम्र का वयस्क है, जो एक साथ रहना चाहते हैं और ऑनलाइन मिलने के बाद उन्हें प्यार हो गया। याचिकाकर्ताओं में से एक, जो महाराष्ट्र के बाहर रहता था, वह घर से भागकर यहां दूसरी महिला के घर आया, जिसके परिवार ने जोड़े को स्वीकार कर लिया। पहले हालाँकि याचिकाकर्ता को बाद में एक पुलिस थाने बुलाया गया था और उसका बयान दर्ज किया गया था, क्योंकि उसके माता-पिता ने गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई थी।</p>
<p>   दूसरी याचिकाकर्ता को धमकी मिलने के बाद पहली याचिकाकर्ता अपने घर लौट गया, लेकिन कुछ दिनों बाद उसने फिर से घर छोड़ दिया और महिला आयोग को मिलने वाली धमकियों और हिंसा से अवगत कराया। इसके अलावा, उन्होंने उचित दिशा-निर्देश के लिए उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। पीठ ने अधिवक्ता हीरेमथ के अनुरोध पर दंपति को दो अधिकारियों के फोन नंबर उपलब्ध कराने का निर्देश दिया। अतिरिक्त लोक अभियोजक प्राजक्ता शिंदे ने अदालत को आश्वासन दिया कि वह आवश्यकता पडऩे पर जोड़े को संपर्क नंबर और सुरक्षा प्रदान करेंगे।</p>
<p> पुलिस को निर्देश दिया गया कि यदि दूसरी महिला के परिवार द्वारा गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई जाती है, तो जोड़े के ठिकाने का खुलासा न करें। इसके अलावा, यदि वे दस्तावेजों सहित अपना सामान लेने के लिए अपने घर जाना चाहते हैं तो पुलिस को उन्हें सुरक्षा प्रदान करने के लिए कहा गया है। न्यायधीशों ने मामले को दो सप्ताह बाद सुनवाई के लिए रखा है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 06 Jul 2023 19:59:43 +0530</pubDate>
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