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                <title>श्रीलंका सरकार का बड़ा फैसला, नाबालिगों के सोशल मीडिया उपयोग पर लग सकता है बैन</title>
                                    <description><![CDATA[ऑनलाइन कंटेंट से बढ़ती चिंताओं के बीच श्रीलंका सरकार नाबालिगों की सोशल मीडिया पहुंच सीमित करने पर विचार कर रही है। अंतिम निर्णय नीति तय होने के बाद होगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/big-decision-of-sri-lankan-government/article-141069"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/1200-x-600-px)-(6)3.png" alt=""></a><br /><p>कोलंबो। श्रीलंका की सरकार ऑनलाइन कंटेंट के हानिकारक प्रभावों से जुड़ी चिंताओं में वृद्धि के बीच सोशल मीडिया तक नाबालिग बच्चों की पहुंच सीमित करने पर विचार कर रही है। स्थानीय मीडिया ने बुधवार को एक वरिष्ठ अधिकारी के हवाले से यह जानकारी दी। डिजिटल अर्थव्यवस्था के उप मंत्री एरंगा वीरारत्ने ने कहा कि डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़ी दुर्घटनाओं में वृद्धि के बाद विद्यार्थियों और नाबालिगों के सोशल मीडिया के उपयोग पर संभावित सीमाओं का पता लगाने के लिए चर्चा चल रही है। उन्होंने कहा कि प्रतिबंध लगाने का निर्णय जनसंचार मंत्रालय या शिक्षा मंत्रालय के तहत आएगा। एक बार नीति को अंतिम रूप देने के बाद, अधिकारी कार्यान्वयन के लिए आवश्यक तकनीकी सहायता प्रदान करेंगे। </p>
<p>डिजिटल अर्थव्यवस्था के उप मंत्री एरंगा वीरारत्ने ने कहा कि सरकार अभी तक किसी अंतिम निर्णय पर नहीं पहुंची है, लेकिन देश को सोशल मीडिया कंटेंट से नाबालिग बच्चों के दिमाग को होने वाले नुकसान को संज्ञान में लेना जरूरी है। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया कंपनियां नियंत्रण लागू करने के लिए स्थानीय दूरसंचार प्रदाताओं के साथ काम कर सकती हैं। डिजिटल अर्थव्यवस्था के उप मंत्री एरंगा वीरारत्ने ने कहा कि इसी तरह के उपाय पहले ही कई देशों में अपनाये जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि आवश्यक तकनीकी क्षमता पहले से मौजूद है और इसे श्रीलंका में लागू किया जा सकता है। </p>
<p>मंत्री ने कहा कि किसी भी प्रतिबंध के लिए लागू करने से पहले एक औपचारिक सरकारी नीति और एक व्यापक योजना की आवश्यकता होगी। विश्व स्तर पर सरकारें साइबरबुलिंग, नाबालिगों के हानिकारक कंटेंट के संपर्क में आने और बिगड़ते मानसिक स्वास्थ्य के बारे में ङ्क्षचताओं के कारण बच्चों की सोशल मीडिया मौजूदगी पर निगरानी बढ़ा रही हैं। इसका एक प्रमुख उदाहरण ऑस्ट्रेलिया है, जहां दिसंबर 2025 में नाबालिगों के लिए दुनिया का पहला सोशल मीडिया प्रतिबंध लागू हुआ। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 28 Jan 2026 16:27:56 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>नाबालिगों से दुष्कर्म करने के आदतन अभियुक्त जीवाणु को फिर उम्रकैद</title>
                                    <description><![CDATA[ रिपोर्ट में कहा गया कि उसकी चार साल की भतीजी रात करीब दस बजे खेलती-खेलती घर से बाहर निकल गई थी। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/bacteria-habitually-accused-of-raping-minors-gets-life-imprisonment-again/article-83953"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-12/jaill.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। पॉक्सो मामलों की विशेष अदालत क्रम-3 महानगर द्वितीय ने नाबालिगों से दुष्कर्म करने के आदतन अभियुक्त सिकंदर उर्फ जीवाणु को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने अभियुक्त पर एक लाख तीन हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया है। यह प्रकरण चार साल की बच्ची से दुष्कर्म कर जीभ काटने से जुड़ा है। अभियुक्त सात साल की नाबालिग से दुष्कर्म करने के मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहा है।</p>
<p>अभियोजन पक्ष की ओर से विशेष लोक अभियोजक महावीर सिंह किशनावत ने अदालत को बताया कि 23 जून, 2019 को पीड़िता के चाचा ने शास्त्रीनगर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। रिपोर्ट में कहा गया कि उसकी चार साल की भतीजी रात करीब दस बजे खेलती-खेलती घर से बाहर निकल गई थी। पुलिस और परिजनों के काफी तलाश करने के बाद भी उसका पता नहीं लगा। वहीं रात करीब दो बजे कोई उसे घर के थोडी दूरी पर छोड़कर चला गया। अस्पताल जाने पर पता चला कि उसके साथ दुष्कर्म हुआ है और जीभ काटी गई है। रिपोर्ट पर कार्रवाई करते हुए पुलिस ने अभियुक्त को कोटा से गिरफ्तार किया। सुनवाई के दौरान पीड़िता ने अदालत को बताया कि अभियुक्त उसे मोटर साइकिल पर बैठाकर नाले में ले गया था और उसके साथ गलत काम किया। जब वह चिल्लाई को अभियुक्त ने चाकू से उसकी जीभ काट दी। जिस पर सुनवाई करते अदालत ने अभियुक्त को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 07 Jul 2024 12:45:24 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>सड़कों पर मौत बनकर बेखौफ वाहन दौड़ा रहे नाबालिग</title>
                                    <description><![CDATA[नाबालिग किसकी अनुमति से सड़क पर वाहन दौड़ा रहे हैं, इस प्रश्न पर पुलिस, परिवहन अधिकारी, यातायात विभाग सभी चुप्पी साधे हैं, ट्रैफिक पुलिस को बच्चों के भविष्य की कोई चिंता नहीं है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/minors-are-fearlessly-driving-as-death-on-the-roads/article-64547"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-12/सड़कों-पर-मौत-बनकर-बेखौफ-वाहन-दौड़ा-रहे-नाबालिग.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर के प्रमुख चौराहों पर नाबालिग खुलेआम यातायात नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं। ट्रैफिक पुलिस की आंखों के सामने न केवल वाहन दौड़ा रहे बल्कि मोटरयान नियमों का भी मखौल उड़ा रहे हैं। जिम्मेदारों की घोर लापरवाही के कारण नाबालिग खुद के साथ अन्य वाहन चालकों की जान भी खतरे में डाल रहे हैं। जबकि, कुछ माह पहले ही गुमानपुरा फ्लाईओवर से गिरकर नाबालिग बाइक चालक की दर्दनाक मौत हो चुकी है। इसके बावजूद न ट्रैफिक पुलिस और न ही अभिभावकों ने सबक लिया। नतीजन, चौराहों पर हर दिन हादसे हो रहे हैं। इसका ताजा उदारहण हाल ही में नाबालिग वाहन चालक द्वारा कार को टक्कर मारने के बाद कार सवार युवकों द्वारा अपहरण कर पिता से पैसे मांगने का मामला भी सामने आ चुका है। फिर भी पुलिस प्रशासन मूक दर्शक बना हुआ है।  शहरवासियों की लगातार मिल रही शिकायतों पर दैनिक नवज्योति ने सोमवार को शहर के व्यस्तम चौराहों का जायजा लिया तो चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई। पेश हैं खबर के प्रमुख अंश...</p>
<p><strong>स्कूटी-बाइक से स्कूल जा रहे नाबालिग</strong><br />शहर के स्कूलों में नाबालिग छात्र बाइक और छात्राएं स्कूटी लेकर स्कूल पहुंच रहे हैं। दोपहर को छुट्टी होने के बाद मुख्य चौराहों पर बेखौफ फर्राटे भर रहे हैं। जबकि, नाबालिगों का वाहन चलाना कानूनन अपराध की श्रेणी में आता है, फिर भी न तो अभिभावकों को परवाह है और न ही शिक्षकों को। यही वजह है शहर के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में भी नाबालिग वाहन चालकों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है। </p>
<p><strong>जिम्मेदारों की चुप्पी बर्बाद कर रही भविष्य</strong><br />नाबालिगों के वाहन चलाने के कारण दुर्घटना का खतरा बना रहता है।  किशोर बगैर हेलमेट के तेज गति से बाइक चलाते सड़कों पर दिख रहे हैं लेकिन इन्हें रोकने वाला कोई नहीं है। ये नाबालिग किसकी अनुमति से सड़क पर वाहन दौड़ा रहे हैं, इस प्रश्न पर पुलिस, परिवहन अधिकारी, यातायात विभाग सभी चुप्पी साधे हैं। ट्रैफिक पुलिस को बच्चों के भविष्य की कोई चिंता नहीं है।</p>
<p><strong>हादसों का कारण बन रहे नाबालिग</strong><br />शहर के विभिन्न इलाकों नाबालिग छात्र पावर बाइक स्पीड से दौड़ा रहे हैं। आगे चल रहे वाहनों को ओवरटेक कर रोंग साइड आ जाते हैं। ऐसे में अपनी लेन में चल रहे वाहनों से टकरा जाते हैं। सड़कों पर आए दिन हादसे हो रहे हैं। अधिकतर मामले समझाइश के कारण थाने तक नहीं पहुंचते। हालात यह है कि अभिभावकों ने 16 साल से कम उम्र के बच्चों के हाथों में बाइक व रेसिंग स्कूटर थमा दिए हैं। पिछले 9 माह पहले ही गुमानपुरा पुलिया से 40 फीट नीचे गिरने से 9वीं कक्षा के छात्र अंशु की दर्दनाक मौत हो चुकी है। इसके बावजूद जिम्मेदार प्रशासनिक अधिकारी, अभिभावक व स्कूल संचालक बेपरवाह बने हुए हैं। </p>
<p><strong>सीएडी से घोड़ा सर्किल तक बाइक दौड़ा रहे छात्र</strong><br />नवज्योति टीम दोपहर डेढ़ बजे सीएडी व घोड़ा सर्किल पर पहुंची। जहां कॉन्वेंट स्कूलों की छुट्टी होने के बाद बड़ी संख्या में नाबालिग वाहन चालक सीएडी से घोड़ा सर्किल तक बाइक दौड़ाते हुए नजर आए। जबकि,  यहां सर्किल पर ट्रैफिक पुलिस के जवान मौजूद थे। इसके बावजूद न तो उन्हें पाबंद किया और न ही स्कूल संचालकों से समझाइश की। </p>
<p><strong>स्कूल प्रबंधन भी लापरवाह </strong><br />शहर के अधिकतर निजी स्कूलों में बाइक व स्कूटी से छात्र-छात्राओं के स्कूल पहुंचने के नजारे आम है। निजी और सरकारी सभी स्कूल के साइकिल स्टैंड पर छात्र-छात्राओं की बाइक व स्कूटी खड़ी रहती हैं। हायर सेकेंडरी तक में पढ़ने वाले सभी बच्चे 18 से कम उम्र के रहते हैं। स्कूल प्रबंधन को यह भी पता होता है कि जो बच्चे बाइक या स्कूटी से आ रहे हैं, वे नाबालिग हैं इसके बावजूद एक्शन नहीं लिया जाता। </p>
<p><strong>समझाइश के बाद भी नहीं माने तो कार्रवाई</strong><br />नाबालिग बच्चों को स्कूल जाने के लिए बाइक का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। अभिभावकों को भी इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि बच्चे बाइक लेकर बाहन न जाएं। अभियान चलाकर नियमों का उल्लंघन करने वालों की समझाइश करेंगे। साथ ही स्कूलों में जाकर जागरूक करेंगे, संचालकोें को नाबालिग छात्रों को बाइक लेकर स्कूल न आने देने के लिए पाबंद करेंगे। इसके बावजूद नाबालिग वाहन चलाते मिले तो उनके अभिभावकों के खिलाफ उचित कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। <br /><strong>- राजेश ढाका, पुलिस उपाधीक्षक, यातायात </strong></p>
<p><strong>बैठक में उठाएंगे मामला</strong><br />स्कूली छात्रों का वाहन चलाना चिंताजनक है। स्कूल एसोसिएशन की बैठक में यह मामला उठाएंगे। शाला संचालकों के साथ मिलकर प्रार्थना सभा में बच्चों को मोटर यान नियमों की जानकारी देकर जागरूक करने की पहल करेंगे। वहीं, पीटीएम में अभिभावकों की भी समझाइश करेंग कि वे अपने बच्चों को बाइक-स्कूटी देकर स्कूल न भेजे। <br /><strong>- जमना शंकर प्रजापति, जिलाध्यक्ष, निजी स्कूल संचालक संघ कोटा </strong></p>
<p><strong>एक्सपर्ट व्यू वाहन स्वामी पर 25 हजार तक का जुर्माना</strong><br />किसी भी सार्वजनिक स्थान पर 16 वर्ष की उम्र पूरी कर चुका किशोर 50सीसी  क्षमता तक का वाहन चला सकता है लेकिन इस सीसी के वाहन अब बंद हो चुके वहीं, 18 वर्ष से अधिक के युवक वाहन चलाने के लिए अनुज्ञा पत्र प्राप्त करके अधिकृत हो जाता है। यदि, इस उम्र के व्यक्ति के पास अनुज्ञा पत्र नहीं है तो उसे 3 माह तक का कारावास या 5000 तक का जुर्माना या दोनों से दंडित किया जा सकेगा। लेकिन कोई भी किशोर मोटरयान अधिनियम के किसी भी प्रावधान का उल्लंघन करता है तो ऐसी स्थिति में अपराध की गंभीरता बढ़ जाती है और वाहन स्वामी को 3 वर्ष तक का कारावास या 25000 तक का जुर्माना या दोनों से दंडित किया जा सकेगा। साथ ही ऐसा किशोर 25 वर्ष की उम्र से पहले लाइसेंस प्राप्त करने का अधिकार खो देगा और 12 माह की अवधि के लिए वाहन की आरसी भी रदद की जा सकती है। ट्रांसपोर्ट व्हीकल के लिए न्यूनतम उग्र 20 वर्ष है। <br /><strong>- विवेक नंदवाना, वरिष्ठ अधिवक्ता</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 19 Dec 2023 18:05:46 +0530</pubDate>
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                <title>कलम के स्थान पर हथियार थाम रहे बच्चे, फिर भी पुलिस के पास डाटा नहीं </title>
                                    <description><![CDATA[कोटा शहर में बच्चे खुलेआम चाकू, तलवार, रिवाल्वर चला रहे हैं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/children-holding-weapons-instead-of-pens--yet-the-police-do-not-have-the-data/article-51105"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-07/kalam-k-sthaan-pr-hathiyar-tham-rhe-bachhe,-fr-hi-police-k-pas-data-nhi...kota-news-07-07-2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा । <strong>केस</strong><strong> नंबर-1 - </strong>गुमानपुरा थाना क्षेत्र में 21 जून को दिन दहाड़े एक्टिवा से जा रहे स्क्रेप व्यापारी के कर्मचारी के साथ आधा दर्जन बाइक सवार बदमाशों ने चाकू से ताबड़तोड़ हवाला  31 लाख रुपयों से भरा बैग लूट लिया था। इस लूट में भी आरोपियों के साथ दो बाल अपचारी निरुद्ध किए गए थे। </p>
<p><strong>केस नंबर-2</strong><br />कोतवाली थाना क्षेत्र में घर से बाहर दोस्त के साथ घूम रहे युवक पर चाकू से हमला करने वाले भी दो बाल अपचारी थे। बाद में पुलिस ने केस नंबर तीन विज्ञान नगर में तीन जुलाई को जायका रेस्टोरेंअ के संचालक पर फायरिंग के मामले में भी दो बाल अपचारियों को पुलिस ने निरुद्ध किया है। दोनों बाल अपवारियों ने बदमाश हुंडा के साथ मिलकर खुलेआम सड़क के बीच फायरिंग की थी। इसके बाद अपना प्रभाव जमाने के लिए वाट्एसप कॉल से उससे रंगदारी की भी मांग की थी। पुलिस ने मामले में पूरी जानकारी जुटाई और दो बाल अपचारियों को निर्द्ध किया। </p>
<p> आज जिन बच्चों के हाथ में कलम व किताब होनी चाहिए। उन हाथों ने हथियार थाम लिए हैं, जो कि एक चिंता का विषय है। आने वाला भविष्य अंधकार में जाता दिखाई दे रहा है। इसके बावजूद कोटा पुलिस के पास बाल अपचारियों के आंकड़े नहीं है। कोटा शहर में बच्चे खुलेआम चाकू, तलवार, रिवाल्वर चला रहे हैं। बाल अपचारी जिले में हत्या, लूट, दुष्कर्म तथा छेड़छाड़ और चाकूबाजी जैसे संगीन अपराधों में लिप्त होते जा रहे हैं। विज्ञान नगर में तीन दिन पूर्व हुई रेस्टोंरेंट संचालक पर  फायरिंग की घटना में भी  दो नाबालिग का ही हाथ था। बच्चों ने ही रंगदारी तथा शहर में खौफ पैदा करने के लिए फायरिंग की थी। हालांकि इनको घटना के लिए प्रेरित करने वाला बदमाश बालिग था। </p>
<p><strong>बड़ा होकर हत्या का आरोपी बन गया </strong><br />विगत दिनों से जेल मेें हत्या के जुर्म में सजा काट रहे अमन बच्चा ने भी बचपन से ही कलम दबात के स्थान पर चाकू, तलवार तथा रिवाल्वर चलाना सीख लिया और पहले संप्रेषण गृह में रहा बाद में बड़ा होकर हत्या का आरोपी बन गया और अब जेल में है। अगर ऐसे ही घटनाओं पर नजर डाले तो कोट सिटी में पिछले दस साल में सैकड़ों बच्चे बाल अपराध के इस दलदल मेंं फंसकर बडेÞ बदमाश बन गए। बचपन में बच्चों को कुछ नहीं पता होता है कि वह क्या सही कर रहे हैं और क्या गलत। उनको तो यह भी नहीं पता होता है कि उन्होंने जो कार्य किया है वह कितना बड़ा अपराध है। कई बच्चे शौक मौज तथा कई बच्चे बड़े बदमाशों के द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे हैं। किशोरपुरा पुलिस ने अभी हाल में हत्या के आरोप मेेंं एक बाल अपचारी को पकड़ा था। बाद में उसके माध्यम से दो बदमाशों और पकड़ा गया था। हालांकि कोटा पुलिस नाबालिग बच्चों को हर सप्ताह में पकड़ रही है, लेकिन उनके पास अभी तक कोई आंकड़ा नहीं है। </p>
<p>बच्चे अलग-अलग परिस्थियों में अपराध करतें हैंं। पहले जो शिक्षा से नहीं जुडेÞ और परिवार जनों का बचपन से ही उन पर कोई कंट्रोल नहीं रहता है। दूसरे वे जो बाल अवस्था में ही गलत संगत में पड़ जाते हैं तथा शोक मौज के आदी होने के कारण अपराध करने के लिए गलम रास्ते चल देते हैं। इसमें कही ना कही हद तक माता-पिता व परिवार के संस्कार शामिल होते हैं। अगर बचपन से ही बच्चे को कोई गलत कार्य करने पर टोक दिया जाए तो फिर वह दोबारा नहीं करता है। ऐसे ही टीवी सीरियल बच्चों को बिगाड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। <br /><strong>- भुवनेश कुमार शर्मा, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण कोटा लीगल एडवाइजर, वरिष्ठ अधिवक्ता </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 07 Jul 2023 18:03:10 +0530</pubDate>
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