<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://dainiknavajyoti.com/human-body/tag-3717" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>Dainik Navajyoti Rising Rajasthan RSS Feed Generator</generator>
                <title>Human Body - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
                <link>https://dainiknavajyoti.com/tag/3717/rss</link>
                <description>Human Body RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title> तंबाकू निषेध दिवस  आज : तंबाकू का सेवन मानव शरीर के लिए ही नही, पर्यावरण के लिए भी है कैंसर</title>
                                    <description><![CDATA[तंबाकू उत्पादों के सेवन से देशभर में करीब 13 लाख लोग अकारण ही मौत के शिकार होते हैं। राजस्थान में करीब 65 हजार लोगों की मौत होती है। तंबाकू के सेवन से मुंह, फेफड़े, हार्ट और गले का कैंसर होता है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/jaipur-news-health-no-tobacco-day-today--tobacco-consumption-is-not-only-for-the-human-body--it-is-also-for-the-environment--cancer/article-10857"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-05/world-no-tobacco-day.jpg" alt=""></a><br /><p>अक्सर हम सब सोचते हैं कि बीड़ी, सिगरेट, पान, गुटखा सहित धूम्रपान उत्पादों के सेवन से कैंसर हो सकता है, लेकिन ये उत्पाद हमारे पर्यावरण के लिए भी कैंसर बन रहे हैं। इसकी बड़ी वजह यह है कि उपभोग के बाद इनके रैपर को खुले में फैक दिया जाता है। कुछ ही समय बाद ये सब नालियों में जमा हो जाते हैं। इससे नालियां भी अवरुद्ध होती है और इसके विषैले पदार्थ मिट्टी में या उसके माध्यम से भूमिगत पानी में भी चले जाते हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि तंबाकू उत्पादों में 7 हजार से अधिक विषैले रसायन होते हैं, जो ना केवल मानव स्वास्थ्य, बल्कि पर्यावरण पर भी बड़े खतरे के रूप में उभर रहे हैं ।</p>
<p>सवाई मानसिंह अस्पताल के कान-नाक और गला विभाग के आचार्य डॉ. पवन सिंघल ने बताया कि सिगरेट, बिड़ी के टुकड़े, लोगों द्वारा पान सुपारी, गुटखे की पीक जमीन पर थूकने से जमीन का पानी विषैला हो रहा है। सिगरेट के बट में प्लास्टिक होता है जो कभी गलता नहीं है। सिगरेट बट को बनाने वाले पदार्थ सेल्यूलोज एसीटेट, पेपर और रेयॉन के साथ मिलकर पानी और जमीन को भी प्रदूषित और विषेला बना रहे हैं। </p>
<p><span style="color:#ff0000;"><strong>तंबाकू कैंसर का बड़ा कारण</strong></span></p>
<p>तंबाकू उत्पादों के सेवन से देशभर में करीब 13 लाख लोग अकारण ही मौत के शिकार होते हैं। राजस्थान में करीब 65 हजार लोगों की मौत होती है। तंबाकू के सेवन से मुंह, फेफड़े, हार्ट और गले का कैंसर होता है। <span style="background-color:#ffff99;"><strong>ग्लोबल एडल्ट टोबैको सर्वे 2017 के अनुसार राजस्थान में वर्तमान में 24.7 प्रतिशत लोग किसी न किसी रूप में तंबाकू का उपयोग करते हैं। इसमें 13.2 प्रतिशत लोग धूम्रपान के रूप में सेवन करते हैं, जिसमें 22 प्रतिशत पुरुष, 3.7 प्रतिशत महिलाएं हैं। इनमें से 14.1 प्रतिशत लोग चबाने वाले तंबाकू का प्रयोग करते हैं, जिसमें 22 प्रतिशत पुरुष व 5.8 प्रतिशत महिलाएं है।</strong></span></p>
<p><span style="color:#ff0000;"><strong>हैड-नेक कैंसर के 95 प्रतिशत मामले तंबाकू सेवन से</strong></span></p>
<p>नारायणा मल्टी स्पेशियलिटी हॉस्पिटल जयपुर के कंसल्टेंट ईएनटी, हैड एंड नेक सर्जरी डॉ. दीपांशु गुरनानी ने बताया कि हर साल करीब 2 लाख हेड एवं नेक कैंसर से जुड़े मामले आते हैं, जिसमें से करीब 95 प्रतिशत मामले तंबाकू सेवन के हैं। युवाओं में तंबाकू सेवन को बढ़ावा देने का मुख्य कारण सोशल मीडिया और प्रतिष्ठित व्यक्तियों द्वारा किए विज्ञापन हैं। कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉ. रोहित स्वामी का कहना है कि सैकण्ड हैण्ड स्मोकिंग भी धूम्रपान करने जितना ही खतरनाक है, क्यूंकि ये सीधा फेफड़ों पर असर डालता है, जिससे कई बीमारियां होने का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए धूम्रपान और निष्क्रिय धूम्रपान से बचें। आजकल तंबाकू छोड़ने के लिए दवाइयां और निकोटिन थेरेपी भी उपलब्ध हैं।</p>
<p><span style="background-color:#ffff99;color:#ff0000;"><strong>कैंसर का उपचार संभव</strong></span></p>
<p>मणिपाल हॉस्पिटल जयपुर की रेडिएशन ओन्कोलोजिस्ट डॉ. पूनम गोयल ने बताया कि तम्बाकू को किसी भी रूप व मात्रा में लेना घातक है। आज के युग में समय रहते पता लगने पर कैंसर का उपचार संभव है। कैंसर के मुख्य लक्षणों की बात करे तो सांस फूलना, भूख नहीं लगना, मूंह से खून आना, वजन कम होना, छाती में दर्द होना आदि है। इन सबको महसूस होते ही अच्छे चिकित्सक की सलाह लेकर तुरंत उपचार करवाना चाहिए। निम्स के मनोचिकित्सक डॉ. तुषार जग्गावत ने बताया कि धूम्रपान के मनोवैज्ञानिक पहलू भी हैं। कुछ लोगों के लिए धूम्रपान एक मजा है और यह उन्हें मनोवैज्ञानिक आनंद देता है साथ ही यह आत्म अभिव्यक्ति की एक कला है। कई लोगों के लिए, यह काम के दौरान आराम करने के लिए और खुशी के क्षण को जीने का एक बहाना है। बिहेवियरल थेरेपी और फार्माकोलॉजिकल थैरेपी दोनों उपचारों को मिलाकर उपचार करने पर तम्बाके छोड़ने की सफलता दर अधिक होती है।</p>
<p> </p>
<p> </p>
<p> </p>
<p> </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/jaipur-news-health-no-tobacco-day-today--tobacco-consumption-is-not-only-for-the-human-body--it-is-also-for-the-environment--cancer/article-10857</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/jaipur-news-health-no-tobacco-day-today--tobacco-consumption-is-not-only-for-the-human-body--it-is-also-for-the-environment--cancer/article-10857</guid>
                <pubDate>Tue, 31 May 2022 12:10:26 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2022-05/world-no-tobacco-day.jpg"                         length="37773"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ज्यादा एंटीबॉडीज होना हमेशा बेहतर नहीं, हो सकती है मल्टीपल मायलोमा की समस्या</title>
                                    <description><![CDATA[मल्टीपल मायलोमा एक तरह का ब्लड कैंसर है, जो बोन मैरो से शुरू होकर रक्त से शरीर में फैल जाता है। इस लाइलाज बीमारी में रक्त में प्लाज्मा सेल्स द्वारा बनाई जाने वाली एंटीबॉडीज बढ़ जाती है। अधिक मात्रा में इन एब्नार्मल एंटीबॉडीज के बढ़ने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/health/%E0%A4%9C%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%A6%E0%A4%BE-%E0%A4%8F%E0%A4%82%E0%A4%9F%E0%A5%80%E0%A4%AC%E0%A5%89%E0%A4%A1%E0%A5%80%E0%A4%9C-%E0%A4%B9%E0%A5%8B%E0%A4%A8%E0%A4%BE-%E0%A4%B9%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%B6%E0%A4%BE-%E0%A4%AC%E0%A5%87%E0%A4%B9%E0%A4%A4%E0%A4%B0-%E0%A4%A8%E0%A4%B9%E0%A5%80%E0%A4%82--%E0%A4%B9%E0%A5%8B-%E0%A4%B8%E0%A4%95%E0%A4%A4%E0%A5%80-%E0%A4%B9%E0%A5%88-%E0%A4%AE%E0%A4%B2%E0%A5%8D%E0%A4%9F%E0%A5%80%E0%A4%AA%E0%A4%B2-%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%B2%E0%A5%8B%E0%A4%AE%E0%A4%BE-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%B8%E0%A4%AE%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE/article-1004"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-07/2021-07-05~8mjni_nl.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। मल्टीपल मायलोमा एक तरह का ब्लड कैंसर है जो बोन मैरो से पनपना शुरू हो रक्त के जरिए पूरे शरीर में फैल जाता है। इस लाइलाज बीमारी में रक्त में प्लाज़्मा सेल्स द्वारा बनाई जाने वाली एंटीबॉडीज असामान्य रूप से बढ़ जाती हैं। काफी ज्यादा मात्रा में इन एब्नार्मल एंटीबॉडीज के बढ़ने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ने की बजाय घट जाती है। ऐसे में संक्रमण होने का खतरा बढ़ जाता है और मरीज की हालत खराब होने लगती है। सही समय पर इलाज लेने से मरीज इस बीमारी से बच सकते हैं और अपने जीवन में गुणवत्तापूर्ण वर्षों की वृद्धि कर सकते हैं। <br /> <br /> नारायणा अस्पताल के कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉ. रोहित स्वामी बताते हैं कि श्वेत रक्त कोशिकाएं हमारे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता के लिए जिम्मेदार होती हैं। इन कोशिकाओं में मौजूद एंटीबॉडीज हमें कई तरह के इन्फेक्शन्स और बीमारियों से लड़ने में मदद करती है। मल्टीपल मायलोमा की स्थिति में बोन मैरो में मौजूद प्लाज्मा सेल द्वारा गलत एंटीबॉडीज बनना शुरू हो जाती है, जिस कारण मरीज को कई तरह की बीमारियां जैसे रीनल फेलियर, हड्डियों में दर्द व कमजोरी होना और बार-बार बीमार पड़ना सहनी पड़ती है। लाइलाज बीमारी होने के बावजूद सही समय पर उचित इलाज ले मरीज अपने जीवन में 10 से 12 वर्षों की वृद्धि कर सकते हैं। बाकी कैंसरों के इलाज की तुलना में इसके साइड इफेक्ट्स न के बराबर होते हैं। <br /> <br /> <strong>पहचानें ये लक्षण  </strong><br /> मल्टीप्ल मायलोमा के मरीजों में अक्सर खून की कमी और रोज़मर्रा के काम करने में थकावट महसूस होने की शिकायत रहती है। इसके अलावा रक्त में प्लेटलेट कम होना, वजन का घटना, छाती और रीढ़ की हड्डी में दर्द और बार-बार इन्फेक्शन होना भी इसके लक्षणों में शामिल हैं। मल्टीपल मायलोमा में मरीज को नियमित रूप से इलाज करवाते रहना होता है। इलाज के लिए कीमोथेरेपी, टार्गेटेड थेरेपी और हार्मोन थेरेपी जैसी प्रक्रियाओं का इस्तेमाल होता है, जो काफी कारगर होती हैं। अन्य कैंसरों की तुलना में मल्टीपल मायलोमा के इलाज में दी गई कीमोथेरेपी के साइड इफेक्ट्स न के बराबर होते हैं। आमतौर पर यह बीमारी बुज़ुर्गों में देखी जाती है लेकिन यदि युवा इस बीमारी से ग्रसित हो जाते हैं तो बोन मैरो ट्रांसप्लांट कर इसका इलाज संभव है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/health/%E0%A4%9C%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%A6%E0%A4%BE-%E0%A4%8F%E0%A4%82%E0%A4%9F%E0%A5%80%E0%A4%AC%E0%A5%89%E0%A4%A1%E0%A5%80%E0%A4%9C-%E0%A4%B9%E0%A5%8B%E0%A4%A8%E0%A4%BE-%E0%A4%B9%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%B6%E0%A4%BE-%E0%A4%AC%E0%A5%87%E0%A4%B9%E0%A4%A4%E0%A4%B0-%E0%A4%A8%E0%A4%B9%E0%A5%80%E0%A4%82--%E0%A4%B9%E0%A5%8B-%E0%A4%B8%E0%A4%95%E0%A4%A4%E0%A5%80-%E0%A4%B9%E0%A5%88-%E0%A4%AE%E0%A4%B2%E0%A5%8D%E0%A4%9F%E0%A5%80%E0%A4%AA%E0%A4%B2-%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%B2%E0%A5%8B%E0%A4%AE%E0%A4%BE-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%B8%E0%A4%AE%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE/article-1004</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/health/%E0%A4%9C%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%A6%E0%A4%BE-%E0%A4%8F%E0%A4%82%E0%A4%9F%E0%A5%80%E0%A4%AC%E0%A5%89%E0%A4%A1%E0%A5%80%E0%A4%9C-%E0%A4%B9%E0%A5%8B%E0%A4%A8%E0%A4%BE-%E0%A4%B9%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%B6%E0%A4%BE-%E0%A4%AC%E0%A5%87%E0%A4%B9%E0%A4%A4%E0%A4%B0-%E0%A4%A8%E0%A4%B9%E0%A5%80%E0%A4%82--%E0%A4%B9%E0%A5%8B-%E0%A4%B8%E0%A4%95%E0%A4%A4%E0%A5%80-%E0%A4%B9%E0%A5%88-%E0%A4%AE%E0%A4%B2%E0%A5%8D%E0%A4%9F%E0%A5%80%E0%A4%AA%E0%A4%B2-%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%B2%E0%A5%8B%E0%A4%AE%E0%A4%BE-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%B8%E0%A4%AE%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE/article-1004</guid>
                <pubDate>Mon, 05 Jul 2021 16:39:10 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2021-07/2021-07-05~8mjni_nl.jpg"                         length="44554"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        