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                <title>digital fraud - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>digital fraud RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>व्हाट्सएप पर एक मार्च से लागू हो जाएगा सिम बाइंडिंग: पहले की तरह नहीं काम करेगा ऐप, सिम कार्ड के बिना नहीं चलेगा व्हाट्सएप</title>
                                    <description><![CDATA[1 मार्च 2026 से व्हाट्सएप और टेलीग्राम जैसे ऐप्स के लिए सिम बाइंडिंग अनिवार्य। मोबाइल सिम के बिना ऐप्स नहीं करेंगे काम। साइबर धोखाधड़ी रोकने के लिए व्हाट्सएप वेब को हर 6 घंटे में करना होगा पुनः लॉगिन। डिजिटल सुरक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने के लिए उठाया गया ये कदम। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/business/gadgets/sim-binding-will-be-implemented-on-whatsapp-from-march-1/article-144778"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/whatsapp.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। 1 मार्च 2026 से देश में एक नया नियम लागू होने वाला है जो व्हाट्सएप, टेलीग्राम, सिग्नल, स्नैपचैट, शेयरचैट, जियोचैट, अराटाई और जोश जैसे मैसेजिंग ऐप्स को सिम से जोड़कर चलाने को मैंडेटरी कर देगा। मतलब अब आप बिना अपने असली मोबाइल सिम के इन ऐप्स को नहीं चला पाएंगे। रिपोर्ट्स के मुताबिक सरकार ने साफ कहा है कि इस नियम में कोई छूट नहीं मिलेगी और जिस किसी ऐप ने इसे लागू नहीं किया, उस पर कड़ी कार्रवाई होगी। इससे व्हाट्सएप यूजर्स में चिंता साफ नजर आ रही है।</p>
<p><strong>व्हाट्सएप वेब यूजर्स ध्यान दें</strong></p>
<p>नए नियम के अनुसार अगर आप  WhatsApp Web और Telegram Web का इस्तेमाल करते हैं तो हर 6 घंटे में दफ कोड स्कैन करते हुए फिर से लॉग-इन करना होगा। वरना आपका वेब सेशन बंद हो जाएगा। सरकार ने कहा है कि यह कदम साइबर धोखाधड़ी और नकली अकाउंट रोकने के लिए जरूरी है। अब ऐप केवल उसी नंबर से काम करेगा, जिसका सिम आपके फोन में असली रूप से मौजूद है।</p>
<p><strong>नियम क्यों लागू हो रहा है?</strong></p>
<p>मोबाइल नंबर और ऐप के बीच नकली कनेक्शन से होने वाले फ्रॉड, फर्जी लोगों के प्रोफाइल, फोन-घोटालों में इस नियम को जरूरी बताया जा रहा है। Department of Telecommunications ने दिशा-निर्देश जारी किए हैं कि व्हाटसएप प्लेटफॉर्म्स को यह नियम 90 दिनों के भीतर लागू करना होगा। 28 फरवरी इसके आखिरी दिन के रूप में तय किया गया है। सरकार का कहना है कि इससे डिजिटल अपराध को ट्रेस करना आसान होगा तथा राष्ट्रीय सुरक्षा मजबूत होगी।</p>
<p><strong>मानने होंगे नियम </strong></p>
<p>WhatsApp पेरेंट कंपनी मेटा पहले से जेडीवी-बाइंडिंग फीचर पर काम कर रही है। कुछ बीटा वर्ज़न्स में यह फीचर दिखना भी शुरू हो गया है जो यूजर से पूछता है कि क्या फोन में वही एक्टिव रकट मौजूद है जिसके साथ WhatsApp रजिस्टर्ड किया हुआ है। अगर एक्टिव सिम मौजूद नहीं मिलता है तो ऐप लिमिटेड मोड में चलेगा या बंद हो जाएगा जब तक आप सही सिम डालकर उसे वेरिफाई नहीं कर लेते। इसी तरह टेलीग्राम और सिग्नल को भी अपने सिस्टम में यह चेक जोड़ना होगा।</p>
<p><strong>यूजर्स में डर क्यों है?</strong></p>
<ul>
<li>यह नियम यूजर्स के लिए नया है। इससे कई लोगों को परेशानी हो सकती है:</li>
<li>अगर फोन का सिम हट जाता है, तो व्हाट्सएप काम करना बंद कर सकता है।</li>
<li>यह नियम विदेश में रहने वाले यूजर्स को भी प्रभावित करेगा क्योंकि उन्हें हर बार भारतीय सिम फोन में लगाना पड़ेगा।</li>
<li>व्हाट्सएप वेब हर 6 घंटे में दोबारा लॉग-इन मांगेगा, जो रोजाना काम में मुश्किल खड़ी कर सकता है।</li>
<li>कई लोग सिम बदलकर ऐप इस्तेमाल करते थे, अब यह संभव नहीं रहेगा।</li>
</ul>
<p><strong>सुरक्षा या प्राइवेसी? एक्सपर्ट्स की राय</strong></p>
<p>सरकार का कहना है कि यह कदम डिजिटल सुरक्षा बढ़ाने के लिए है। नकली अकाउंट, फेक नम्बर और फ्रॉड मामलों में इससे मदद मिलेगी। बहुत से साइबर एक्सपर्ट भी यह बताते हैं कि सिम-बाइंडिंग सुरक्षा का एक एक्स्ट्रा लेयर देगा। लेकिन कुछ प्राइवेसी एक्सपर्ट्स का यह भी मानना है कि इससे यूजर की प्राइवेसी पर असर भी पड़ सकता है। खासकर विदेश में काम या यात्रा करते समय। पर सरकार ने स्पष्ट किया है कि नियम सुरक्षा को प्राथमिकता देता है।</p>
<p><strong>यूजर्स को क्या करना चाहिए?</strong></p>
<ul>
<li>अगर आप WhatsApp का रोजाना इस्तेमाल करते हैं, तो 1 मार्च से पहले यह सुनिश्चित कर लें:</li>
<li>आपका वही सिम फोन में लगे रहे, जिस नंबर से आपने ऐप रजिस्टर्ड किया है।</li>
<li>अगर आपने सिम ज्यादा बदलते हैं, तो अब प्रमाणीकरण हर बार करना पड़ेगा।</li>
</ul>
<p>1 मार्च के बाद यह सिस्टम लागू होने की खबर है। अगर ऐप कंपनियां इसे समय पर लागू नहीं करती हैं, तो उनके ऊपर कानूनी कार्रवाई, जुर्माना और टेक्निकल ब्लॉक भी हो सकता है। सरकार की तरफ से कहा गया है कि यह डिजिटल धोखाधड़ी और फ्रॉड से लड़ने की दिशा में एक बड़ा कदम है, लेकिन इसका असर यूजर्स की रोजमर्रा की जिंदगी पर भी पड़ेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>बिजनेस</category>
                                            <category>गैजेट्स</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 27 Feb 2026 12:18:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह करेंगे सीबीआई की साइबर अपराध डैशबोर्ड का शुभारंभ, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डेटा एनालिटिक्स के उपयोग पर होगी चर्चा</title>
                                    <description><![CDATA[गृह मंत्री अमित शाह ने सीबीआई की नई साइबर अपराध शाखा और राष्ट्रीय साइबर डैशबोर्ड लॉन्च किया, साइबर धोखाधड़ी से निपटने की क्षमता मजबूत करने पर जोर दिया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/union-home-minister-amit-shah-will-launch-cbis-cyber-crime/article-142618"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-04/amit-shah.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह मंगलवार को केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की एक नई साइबर अपराध शाखा का उद्घाटन और एक प्रमुख राष्ट्रीय साइबर अपराध डैशबोर्ड का शुभारंभ करने वाले हैं। गृह मंत्री भारत मंडपम में साइबर-सक्षम धोखाधड़ी से निपटना और इकोसिस्टम को खत्म करना विषय पर आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में मुख्य भाषण देंगे। यहाँ वह सीबीआई अधिकारियों के लिए एक अलंकरण समारोह की अध्यक्षता करेंगे और नई सीबीआई साइबर अपराध शाखा का उद्घाटन करेंगे तथा भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (आई4सी) का एस4सी डैशबोर्ड का भी शुभारंभ करेंगे।</p>
<p>इस कार्यक्रम से पहले, गृह मंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा, साइबर अपराध आज दुनिया के लिए एक बड़ा खतरा है। हमारी सरकार नागरिकों को इससे सुरक्षित रखने के लिए संकल्पित है। आज, भारत की साइबर अपराध से लडऩे की क्षमता को मजबूत करने के लिए सीबीआई द्वारा आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित करूँगा।</p>
<p>गृह मंत्रालय के तहत आई सी के सहयोग से सीबीआई द्वारा आयोजित यह दो दिवसीय सम्मेलन ऐसे समय में हो रहा है जब भारत में तेजी से बढ़ते डिजिटल उपयोग के साथ-साथ नये जोखिम भी पैदा हुए हैं, जिनका अपराधी फायदा उठा रहे हैं। इसका उद्देश्य रोकथाम, जांच और समन्वय को मजबूत करके एक एकीकृत राष्ट्रीय रणनीति बनाना है।</p>
<p>इस कार्यक्रम में केंद्र और राज्य की एजेंसियों के वरिष्ठ कानून प्रवर्तन अधिकारी, दूरसंचार और वित्तीय क्षेत्रों के नियामक, सार्वजनिक और निजी बैंक, फिनटेक कंपनियां, दूरसंचार सेवा प्रदाता और साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों सहित विभिन्न हितधारक भाग लेंगे। इसके प्राथमिक उद्देश्यों में साइबर धोखाधड़ी के प्रति एक साझा समझ बनाना, धोखाधड़ी इकोसिस्टम के महत्वपूर्ण स्तंभों (वित्तीय,दूरसंचार और मानव संसाधन) की जांच करना और अंतर-एजेंसी सहयोग को मजबूत करना शामिल है। सम्मेलन में जांच और पीड़ित सुरक्षा तंत्र को बढ़ाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डेटा एनालिटिक्स के उपयोग पर भी चर्चा की जाएगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 10 Feb 2026 16:25:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>कमजोर पासवर्ड के रास्ते आती है डिजिटल धोखाधड़ी की सूनामी</title>
                                    <description><![CDATA[दुनिया में साइबर अपराध पर सबसे ज्यादा नजर रखने वाला डिजिटल संस्थान नार्डपास लोगों को सुझाव देता है कि कम से कम 12 अंकों का अपना जटिल पासवर्ड चुनें, जिसमें कई जटिल खासियतें हों।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/comes-from-weak-passwords-tsunami-of-digital-fraud/article-51296"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-07/rj-(13).png" alt=""></a><br /><p>अपने पासवर्ड को ज्यादा से ज्यादा मजबूत बनाएं। नार्डवीपीएन साइबर प्रबंधन के विशेषज्ञ कहते हैं सुनिश्चित करें कि आपका पासवर्ड कमजोर पासवर्डों की सूची का हिस्सा नहीं है। अगर आपका पासवर्ड मजबूत है तो आपके लिए साइबर अपराधों से बचने के चांस 90 फीसदी से ज्यादा हैं। इस छोटे से काम की बदौलत आप हर तरह के साइबर अपराधों से बचे रहेंगे। साल 2022 में नार्डवीपीएन ने 200 से ज्यादा ऐसे आम पासवर्डों की सूची जारी की थी, जो पिछले 20 सालों में सबसे ज्यादा बार धोखाधड़ी का शिकार हुए है और हैरानी की बात यह है कि ये कमजोर पासवर्ड ज्यादातर लोगों की चाहत बने हुए हैं। साइबर एक्सपर्ट कहते हैं कि साइबर अपराधों की शुरूआत से आजतक दुनिया में कम से कम दो खरब डॉलर से ज्यादा की रकम साइबर अपराधियों द्वारा लूटी जा चुकी है। यह रकम साइबर अपराधों की के शुरूआत से लेकर आजतक है। इस लूट में 50 फीसदी से ज्यादा बार कारण यही कमजोर पासवर्ड रहे हैं।<br /><br /><strong>बचत के लिए क्या करें</strong><br />दुनिया में साइबर अपराध पर सबसे ज्यादा नजर रखने वाला डिजिटल संस्थान नार्डपास लोगों को सुझाव देता है कि कम से कम 12 अंकों का अपना जटिल पासवर्ड चुनें, जिसमें कई जटिल खासियतें हों। संख्याएं, ऊपरी और निचले क्रम में हों। इन पासवर्ड में अक्षरों, प्रतीकों और संख्याओं का एक जटिल सेट हो। जब तक हम अपना पासवर्ड बनाने में इस तरह की समझदारी नहीं दिखाएंगे,तब तक डिजिटल धोखाधड़ी या साइबर अपराधों से कभी नहीं बच पाएंगे। क्योंकि अगर हम सोशल मीडिया के उपभोगकर्ता हैं तो हमारी तमाम डिजिटल सुरक्षा इन्हीं अपने द्वारा बनाये गये पासवर्डों पर ही टिकी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 09 Jul 2023 12:42:07 +0530</pubDate>
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