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                <title>Blood Cancer - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>Blood Cancer RSS Feed</description>
                
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                <title>विश्व रक्त कैंसर दिवस : हर मरीज में अलग होते हैं ब्लड कैंसर के लक्षण, समय पर उपचार की शुरूआत जरूरी </title>
                                    <description><![CDATA[ब्लड कैंसर का नाम सुनते ही अक्सर होश उड़ जाते हैं। अब तक यह माना जाता रहा है कि ब्लड कैंसर का कोई इलाज नहीं है, लेकिन अब समय पर पहचान और आधुनिक उपचार से ब्लड कैंसर को हराना संभव हो पाया है। बार-बार बुखार का आना, शरीर में कमजोरी आना, शरीर में खून की कमी होना, हाथ-पांव में कमजोरी महसूस होना। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/world-blood-cancer-day-symptoms-of-blood-cancer-are-different/article-155227"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/1111200-x-600-px)-(5)40.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। ब्लड कैंसर का नाम सुनते ही अक्सर होश उड़ जाते हैं। अब तक यह माना जाता रहा है कि ब्लड कैंसर का कोई इलाज नहीं है, लेकिन अब समय पर पहचान और आधुनिक उपचार से ब्लड कैंसर को हराना संभव हो पाया है। बार-बार बुखार का आना, शरीर में कमजोरी आना, शरीर में खून की कमी होना, हाथ-पांव में कमजोरी महसूस होना। यह सभी लक्षण सामान्य नजर आते है। अगर उपचार के बाद भी यह लक्षण ठीक ना हो तो यह शरीर के रक्त में कैंसर सेल की शुरूआत का संकेत भी हो सकते है। भगवान महावीर कैंसर हॉस्पिटल के ब्लड कैंसर एवं बीएमटी विशेषज्ञ डॉ. प्रकाश सिंह शेखावत ने बताया कि आधुनिक चिकित्सा में कार-टी सेल थेरेपी और बोन मैरो ट्रांसप्लांट जैसी अत्याधुनिक तकनीकें ब्लड कैंसर और गंभीर रक्त रोगों के उपचार में नई उम्मीद हैं।</p>
<p>बीएमसीएच में ब्लड कैंसर से जुड़ी दो परीयोजनाएं चलाई जा रही है, जिसके तहत रोगियों को निशुल्क उपचार किया जाता है। परियोजना में लो रिस्क वाले तीन तरह के ब्लड कैंसर एक्यूट लिम्फोब्लॉस्टिक ल्यूकीमियां, एक्यूट प्रोमाईलोसाईिटक ल्यूकीमियां, होजकिन्स लिम्फोमा शामिल है। अगस्त 2014 से मार्च 2026 तक इस योजना में 11.03 करोड़ रुपए की लागत से 176 बच्चों को उपचार देकर कैंसर मुक्त किया। योजना में अगस्त 2015 से मार्च 2026 तक 2.47 करोड़ रुपए की लागत से 340 रोगियों को उपचार से कैंसर मुक्त किया।</p>
<p><strong>समय पर उपचार की शुरूआत जरूरी </strong><br />बाल रक्त एवं कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉ. शिवानी माथुर ने बताया कि बच्च्चों में कई तरह के ब्लड कैंसर होते हैं, जिसकी शुरूआती स्तर में उपचार की शुरूआत करके उन्हें पूर्ण रूप से स्वस्थ किया जा सकता है।   </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 28 May 2026 11:42:25 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur PS]]></dc:creator>
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                <title>ज्यादा एंटीबॉडीज होना हमेशा बेहतर नहीं, हो सकती है मल्टीपल मायलोमा की समस्या</title>
                                    <description><![CDATA[मल्टीपल मायलोमा एक तरह का ब्लड कैंसर है, जो बोन मैरो से शुरू होकर रक्त से शरीर में फैल जाता है। इस लाइलाज बीमारी में रक्त में प्लाज्मा सेल्स द्वारा बनाई जाने वाली एंटीबॉडीज बढ़ जाती है। अधिक मात्रा में इन एब्नार्मल एंटीबॉडीज के बढ़ने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/health/%E0%A4%9C%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%A6%E0%A4%BE-%E0%A4%8F%E0%A4%82%E0%A4%9F%E0%A5%80%E0%A4%AC%E0%A5%89%E0%A4%A1%E0%A5%80%E0%A4%9C-%E0%A4%B9%E0%A5%8B%E0%A4%A8%E0%A4%BE-%E0%A4%B9%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%B6%E0%A4%BE-%E0%A4%AC%E0%A5%87%E0%A4%B9%E0%A4%A4%E0%A4%B0-%E0%A4%A8%E0%A4%B9%E0%A5%80%E0%A4%82--%E0%A4%B9%E0%A5%8B-%E0%A4%B8%E0%A4%95%E0%A4%A4%E0%A5%80-%E0%A4%B9%E0%A5%88-%E0%A4%AE%E0%A4%B2%E0%A5%8D%E0%A4%9F%E0%A5%80%E0%A4%AA%E0%A4%B2-%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%B2%E0%A5%8B%E0%A4%AE%E0%A4%BE-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%B8%E0%A4%AE%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE/article-1004"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-07/2021-07-05~8mjni_nl.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। मल्टीपल मायलोमा एक तरह का ब्लड कैंसर है जो बोन मैरो से पनपना शुरू हो रक्त के जरिए पूरे शरीर में फैल जाता है। इस लाइलाज बीमारी में रक्त में प्लाज़्मा सेल्स द्वारा बनाई जाने वाली एंटीबॉडीज असामान्य रूप से बढ़ जाती हैं। काफी ज्यादा मात्रा में इन एब्नार्मल एंटीबॉडीज के बढ़ने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ने की बजाय घट जाती है। ऐसे में संक्रमण होने का खतरा बढ़ जाता है और मरीज की हालत खराब होने लगती है। सही समय पर इलाज लेने से मरीज इस बीमारी से बच सकते हैं और अपने जीवन में गुणवत्तापूर्ण वर्षों की वृद्धि कर सकते हैं। <br /> <br /> नारायणा अस्पताल के कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉ. रोहित स्वामी बताते हैं कि श्वेत रक्त कोशिकाएं हमारे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता के लिए जिम्मेदार होती हैं। इन कोशिकाओं में मौजूद एंटीबॉडीज हमें कई तरह के इन्फेक्शन्स और बीमारियों से लड़ने में मदद करती है। मल्टीपल मायलोमा की स्थिति में बोन मैरो में मौजूद प्लाज्मा सेल द्वारा गलत एंटीबॉडीज बनना शुरू हो जाती है, जिस कारण मरीज को कई तरह की बीमारियां जैसे रीनल फेलियर, हड्डियों में दर्द व कमजोरी होना और बार-बार बीमार पड़ना सहनी पड़ती है। लाइलाज बीमारी होने के बावजूद सही समय पर उचित इलाज ले मरीज अपने जीवन में 10 से 12 वर्षों की वृद्धि कर सकते हैं। बाकी कैंसरों के इलाज की तुलना में इसके साइड इफेक्ट्स न के बराबर होते हैं। <br /> <br /> <strong>पहचानें ये लक्षण  </strong><br /> मल्टीप्ल मायलोमा के मरीजों में अक्सर खून की कमी और रोज़मर्रा के काम करने में थकावट महसूस होने की शिकायत रहती है। इसके अलावा रक्त में प्लेटलेट कम होना, वजन का घटना, छाती और रीढ़ की हड्डी में दर्द और बार-बार इन्फेक्शन होना भी इसके लक्षणों में शामिल हैं। मल्टीपल मायलोमा में मरीज को नियमित रूप से इलाज करवाते रहना होता है। इलाज के लिए कीमोथेरेपी, टार्गेटेड थेरेपी और हार्मोन थेरेपी जैसी प्रक्रियाओं का इस्तेमाल होता है, जो काफी कारगर होती हैं। अन्य कैंसरों की तुलना में मल्टीपल मायलोमा के इलाज में दी गई कीमोथेरेपी के साइड इफेक्ट्स न के बराबर होते हैं। आमतौर पर यह बीमारी बुज़ुर्गों में देखी जाती है लेकिन यदि युवा इस बीमारी से ग्रसित हो जाते हैं तो बोन मैरो ट्रांसप्लांट कर इसका इलाज संभव है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 05 Jul 2021 16:39:10 +0530</pubDate>
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