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                <title>communication - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>डेटा ट्रांसमिशन में मिली चीन को बड़ी कामयाबी, नया संचार उपग्रह सफलतापूर्वक लॉन्च</title>
                                    <description><![CDATA[चीन ने हैनान के वेनचांग स्पेस लॉन्च साइट से संशोधित लॉन्ग मार्च-7 रॉकेट के जरिए एक नया संचार प्रौद्योगिकी परीक्षण उपग्रह सफलतापूर्वक कक्षा में स्थापित किया। यह उपग्रह मुख्य रूप से सैटेलाइट संचार, रेडियो-टीवी प्रसारण, डेटा ट्रांसमिशन सेवाओं और संबंधित तकनीकी परीक्षणों के लिए उपयोग किया जाएगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/china-gets-great-success-in-data-transmission-launches-new-communication/article-157853"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/018.png" alt=""></a><br /><p>बीजिंग। चीन ने मंगलवार को हैनान प्रांत में वेनचांग अंतरिक्ष प्रक्षेपण स्थल से एक नया संचार प्रौद्योगिकी परीक्षण उपग्रह अंतरिक्ष में भेजा। स्थानीय मीडिया के अनुसार, लॉन्ग मार्च-7 रॉकेट के एक संशोधित संस्करण के जरिए प्रक्षेपित किया गया यह उपग्रह सफलतापूर्वक अपनी कक्षा में प्रवेश कर गया है।</p>
<p>इस उपग्रह का उपयोग मुख्य रूप से उपग्रह संचार, रेडियो व टेलीविजन प्रसारण और 'डेटा ट्रांसमिशन' जैसी सेवाओं के साथ-साथ संबंधित प्रौद्योगिकी परीक्षण के लिए किया जाएगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 23 Jun 2026 15:10:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>जहां टावर नहीं पहुंच सके, वहां स्टारलिंक से आसान होगी संचार की राह, साइबर क्राइम के खतरे की भी आशंका </title>
                                    <description><![CDATA[डाढ़ देवी सहित ऊंचे पहाड़ों व दुर्गम स्थानों पर स्थित माता मंदिरों के हो सकते हैं ऑनलाइन दर्शन।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/online-darshan-of-mata-temples-located-on-high-mountains-and-inaccessible-locations--including-dhari-devi--will-be-possible/article-128239"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-09/copy-of-news50.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। डिजिटल इंडिया के दौर में शहरी क्षेत्रों में जहां टेली कम्यूनिकेशन  4जी से 5जी में तब्दील हो गई, वहीं हाड़ौती के दुर्गम पहाड़ी व दूरस्थ क्षेत्रों में आज भी संचार सेवा  निर्बाध रूप से नहीं पहुंच सकी। बारां व झालावाड़ में कई इलाके आदिवासी व वन क्षेत्रों से घिरे हैं, जहां मोबाइल व ब्रॉडबैंड नेटवर्क भी अपनी जड़े मजबूती से नहीं जमा पाए। मसलन कोटा शहर की आराध्या मां डाढ़ देवी के आॅनलाइन करने को सब आतुर हैं। सभी व्यवस्थाएं भी हो चुकी, लेकिन जंगल में इंटरनेट सिग्नल नहीं मिलने से भक्तों को परेशानी हो रही है। ऐसे इलाकों में एलन मस्क स्टारलिंक सैटेलाइट आधारित इंटरनेट टेक्नोलॉजी को बेहतर विकल्प के रूप में देखा जा रहा है।</p>
<p><strong>दुर्गम इलाकों में कनेक्टीविटी व इंटरनेट की पहुंच हो सकेगी आसान</strong><br />विशेषज्ञों के अनुसार, सेटेलाइज आधारित इंटरनेट सेवा डिजिटल क्रांति को नई रफ्तार देने में बड़ा कदम साबित हो सकती है। क्योंकि, यह टेक्नोलॉजी सीधे आसमान से सिग्नल भेजकर उन क्षेत्रों तक पहुंच बनाने में सक्षम हो सकती है जहां अब तक नेटवर्क टावर या ब्रॉडबैंड लाइनों का पहुंचना मुश्किल हो रहा है। दुर्गम पहाड़, घने जंगल और ग्रामीण इलाकों में भी लोग अब बिना रुकावट के इंटरनेट से जुड़ सकेंगे और बातचीत कर पाएंगे। लेकिन, टेक्नोलॉजी से बढ़ती सुविधाओं के पीछे समस्याएं भी जन्म ले सकती है। सरकार को ट्रैकिंग व मॉनिटरिंग पर विशेष ध्यान देना होगा।  </p>
<p><strong>टाइगर रिजर्व व सघन वन क्षेत्रों से सटे इलाकों में मजबूत कम्यूनिकेशन </strong><br />स्टार लिंक की सेटलाइट आधारित इंटरनेट तकनीक टाइगर रिजर्व, पहाड़ी या सघन वनक्षेत्रों से घिरे ग्रामीण इलाकों के लिए वरदान साबित हो सकती है। मुकुंदरा हो रामगढ़ टाइगर रिजर्व  में बसे ग्रामीण क्षेत्रों में मोबाइल नेटवर्क नहीं मिलते। जिसकी वजह से लोगों को आपातकालीन समय में अपनी बात पहुंचाना मुश्किल हो जाता है। वहीं, सघन जंगलोें में ड्यूटी करने वाले वन कर्मियों को भी संदिग्ध गतिविधियों की सूचना तत्काल अपने अधिकारियों तक पहुंचाना आसान हो सकेगा। इन इलाकों में  यह टेक्नॉलोजी संचार सेवा को मजबूत कर सकती है। </p>
<p><strong>सेटेलाइट इंटरनेट सुविधा के फायदे</strong><br />-  दुर्गम क्षेत्रों में फायनेस व बैंकिंग सेक्टर में लाभ : जहां मोबाइल नेटवर्क और ब्रॉडबैंड नहीं पहुंच पहुंच पाते, वहां स्टारलिंक से इंटरनेट मिल सकेगा। साथ ही इन इलाकों में ई-बैंकिंग सुविधाओं का लाभ ले पाएंगे।  <br />-   शिक्षा व स्वास्थ्य सेवाओं को मिलेगी ताकत: इस टेक्नोलॉजी के जरिए दूरदराज गांवों के बच्चों को आॅनलाइन क्लासेस और ई-लर्निंग की सुविधा आसानी से मिल सकेगी। वहीं, ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोग टेलीमेडिसिन के जरिये विशेषज्ञ डॉक्टरों से सीधे परामर्श ले पाएंगे।<br />-  प्राकृतिक आपदा में संचार होगा आसान : भूकंप, बाढ़, तूफान जैसी प्राकृतिक आपदाओं में जब सामान्य नेटवर्क ठप हो जाते हैं, वहां यह टेक्नोलॉजी बेहतर विकल्प के रूप में मिल सकता है। यह राहत और बचाव कार्यों को तेज करने में मदद करेगा।<br />-  व्यापार और रोजगार में अवसर : छोटे गांव-शहरों के लोग आॅनलाइन बिजनेस, फ्रीलांसिंग और डिजिटल सेवाओं से जुड़ सकेंगे।<br />-  तेज और स्थिर इंटरनेट : पारंपरिक नेटवर्क की तुलना में यह बिना रुकावट तेज इंटरनेट उपलब्ध करा सकता है।<br /><strong>टेक्नोलॉजी के नुकसान व चुनौतियां</strong><br />-  उच्च लागत : स्टारलिंक सेटेलाइज आधारित टेक्नोलॉजी है। इसके लिए  एक किट (एंटीना-रिसिवर) लगाना होता है, जिसके खर्चे के साथ मासिक शुल्क ग्रामीण व आम उपभोक्ताओं के लिए महंगा हो सकता है।<br />-  तकनीकी निर्भरता : यह पूरी तरह सैटेलाइट और अंतरराष्ट्रीय कंपनी पर निर्भर सेवा होगी। जिससे आउटपुट व इनपुट डेटा के आदान प्रदान के दौरान कई तरह की संभावित खतरे भी आशंका के साथ विदेशी कम्पनी पर निर्भरता बढ़ सकती है। <br />-  सुरक्षा और डेटा प्राइवेसी : विदेशी कंपनी होने के कारण साइबर सुरक्षा और राष्ट्रीय डेटा की गोपनीयता को लेकर सवाल उठ सकते हैं।<br />-  मौसम की मार : तेज बारिश या खराब मौसम में सिग्नल प्रभावित हो सकता है। जिससे इंटरनेट व संचार सेवा ठप हो सकती है। </p>
<p><strong>क्या कहते हैं लोग</strong><br />ग्रामीण इलाकों की बात छोड़िए शहरी इलाकों में भी संचार सेवा निर्बाध रूप से नहीं मिल रही है। बात करते समय अचानक कॉल कट जाती है। वहीं, सिग्नल डाउन होने से इंटरनेट पर बर्फिंग होने से परेशानी रहती है। यदि, सेटलाइट आधारित इंटरनेट सेवा मिलती है तो कनेक्टीविटी बेहतर हो सकेगी। <br /><strong>- अखिलेश नामा, उपभोक्ता विज्ञान नगर</strong></p>
<p>दाढ़ देवी माता के दर्शन नेटवर्क समस्या के कारण आॅनलाइन  नहीं कर पा रहे। यदि, स्टारलिंक की सेटलाइट आधारित इंटरनेट  सेवा शुरू हो जाती है तो बेहतर कनेक्टीविटी होने से माता के दर्शन आॅनलाइन किए जा सकते हैं।<br /><strong>- राम सिंह, प्रबंधक देवस्थान विभाग </strong></p>
<p>वर्तमान टेलीकॉम कम्पनियां इंटरनेट स्पीड व नेटवर्क को लेकर बड़े-बड़े दावे करती हैं लेकिन स्थिति इसके ठीक विपरित है। किसी को कॉल लगने से पहले ही कॉल ड्रॉप हो जाती है। कहीं का नम्बर कहीं लग जाता है। जिसकी वजह से समय की बर्बादी होती है। ऐसे में स्टारलिंक जैसी सुविधा मिले तो कॉल ड्रॉप जैसी समस्याओं व लो डेटा स्पीड जैसी समस्याओं से निजात मिल सकती है। <br /><strong>- सत्यवीर सिंह, आसीम हुसैन, बजरंग नगर</strong></p>
<p><strong>क्या कहते हैं विशेषज्ञ</strong><br />स्टारलिंक की टेक्नॉलोजी अच्छी है। दुर्गम पहाड़ी व जंगली क्षेत्रों में संचार सेवा का बेहतर विकल्प हो सकती है। लेकिन विदेशी कम्पनी को यह सुविधा देने से पहले सरकार को सिंग्नल आने-जाने का पूरे डेटा पर  कंट्रोल रखना व सिक्योरिटी  सुनिश्चित करनी होगी। देश की स्वतंत्र एजेंसी इसकी मॉनिटरिंग करे।  <br /><strong>- प्रो. अनंत चतुर्वेदी, विगाभागध्यक्ष मैकेनिकल इंजीनियरिंग आरटीयू</strong></p>
<p>इस सुविधा से डेटा यूज करने की फ्रीडम मिलेगी। जहां सुविधाओं  में विस्तार होगा वहीं, अनकंट्रोल डेटा से नेगेटिव एलीमेंट बढ़ने की संभावना भी बनी रहेगी, जो सोसायटी के लिए खतरा है। हालांकि, दुरस्थ इलाकों में बैंकिंग, फाइनेंस, ई-लर्निंग सेक्टर में सुविधाएं बढ़ेंगी। वहीं, साइबर क्राइम का खतरे की भी आशंका रहेगी। ऐसे में सरकार को इस सुविधा पर कंट्रोल व मॉनिटरिंग  करना चाहिए। मल्टीमीडिया के नेगेटिव एलीमेंट को ट्रैक कर सके तो यह टेक्नोलॉजी उपयोगी हो सकती है। <br /><strong>- डॉ. जेबी शर्मा, एसोसिएट प्रोफेसर, इलेक्ट्रोनिक्स इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट आरटीयू</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 29 Sep 2025 15:44:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पूरे गांव का संपर्क नहीं हो ठप, ग्रामीण क्षेत्रों में लोगू होगी रिंग संचार व्यवस्था : सिंधिया</title>
                                    <description><![CDATA[पूरे गांव की संचार व्यवस्था ठप नहीं होगी, बल्कि इस विशेष क्षेत्र की संचार व्यवस्था को सही करने की जरूरत पड़ेगी। इस तकनीकी को देश में सभी गांवों में लागू किया जाएगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/communication-system-will-be-implemented-in-rural-area--facility-is-equipped--sindhiya/article-86438"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-07/6611-copy6.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। सरकार ने कहा कि गांव में संचार व्यवस्था को निरंतर बनाए रखने और मामूली गड़बड़ी के कारण पूरी लाइन के ठप होने की समस्या से निपटने के लिए रिंग संचार व्यवस्था शुरू की जा रही है, ताकि पूरे गांव का संचार संपर्क ठप न हो सके। संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने लोकसभा में एक पूरक प्रश्न के जवाब में कहा कि गांव में हर समय इंजीनियर उपलब्ध नहीं होते हैं और यदि किसी एक लाइन पर कोई गड़बड़ी आती है, तो पूरे गांव में संचार व्यवस्था ठप हो जाती है। ऐसे में लाइन ठीक होने तक लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। सिंधिया ने कहा कि इस समस्या से निपटने के लिए गांव में रिंग संचार व्यवस्था को लागू किया जा रहा है। इससे यदि एक जगह की लाइन गड़बड़ा जाती है, तो भी पूरे गांव की संचार व्यवस्था ठप नहीं होगी, बल्कि इस विशेष क्षेत्र की संचार व्यवस्था को सही करने की जरूरत पड़ेगी। इस तकनीकी को देश में सभी गांवों में लागू किया जाएगा।</p>
<p>महाराष्ट्र में संचार व्यवस्था संबंधी एक सवाल पर उन्होंने कहा कि राज्य के शहरी क्षेत्र में कनेक्टिविटी 100 प्रतिशत है और ग्रामीण क्षेत्रों में भी इसी तरह की व्यवस्था करने पर ध्यान दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि छह लाख से ज्यादा गांव है, जिन्हें संचार सुविधा से लैस किया गया है। सरकार ने 22 हजार करोड़ रुपए का प्रावधान किया है ताकि सभी गांवों में इंटरनेट और संचार की सारी सुविधा उपलब्ध कराई जा सके।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 31 Jul 2024 19:14:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अंतरिक्ष से संचार क्रांति लाने का संदेश दे रहा इसरो</title>
                                    <description><![CDATA[जब लैंडर ने 23 अगस्त 2023 को चंद्र दक्षिणी ध्रुव के निकट एक सफल लैंडिंग की तो यह भारत के लिए एक बहुत ही बड़ा व ऐतिहासिक कदम था।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/isro-is-giving-the-message-of-bringing-communication-revolution-from/article-71913"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-03/transfer-(14).png" alt=""></a><br /><p>वर्ष 2023 भारत के लिए अंतरिक्ष में सफलता प्राप्त करने के उद्देश्य के रूप में बहुत ही महत्वपूर्ण रहा। यह बात सभी को विदित ही है कि 14 जुलाई 2023 को चंद्रयान-3 ने श्रीहरिकोटा में अवस्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से उड़ान भरी थी और भारतीय अंतरिक्ष यान ने 5 अगस्त 2023 को चंद्र कक्षा में निर्बाध रूप से प्रवेश किया। जब लैंडर ने 23 अगस्त 2023 को चंद्र दक्षिणी ध्रुव के निकट एक सफल लैंडिंग की तो यह भारत के लिए एक बहुत ही बड़ा व ऐतिहासिक कदम था। उल्लेखनीय है कि चंद्रयान-3 की चन्द्रमा की सतह पर सुरक्षित लैंडिंग के बाद इसरो द्वारा आदित्य-एल 1 सूर्य मिशन की लॉन्चिंग दुनियाभर में चर्चा का विषय रहे थे। इसी क्रम में अब भारत सरकार ने हाल ही में गगनयान मिशन के तहत अंतरिक्ष में भारत की पहली उड़ान के लिए चयनित एयरफोर्स के चार पायलटों के नाम भी बताए हैं। इनमें क्रमश: ग्र्रुप कैप्टन प्रशांत नायर, ग्रुप कैप्टन अजीत कृष्णन, ग्र्रुप कैप्टन अंगद प्रताप और विंग कमांडर शुभांशु शुक्ला शामिल हैं, जिनके नाम स्वयं देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 27 फरवरी 2024 को केरल के तिरुवनंतपुरम स्थित विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र का दौरा करने एवं गगनयान मिशन की तैयारियों की समीक्षा करने के बाद जारी किए हैं। </p>
<p>इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यह कहा कि ये चार नाम या चार इंसान नहीं हैं। 140 करोड़ आकांक्षाओं को अंतरिक्ष में ले जाने वाली शक्तियां हैं। 40 साल के बाद कोई भारतीय अंतरिक्ष में जाने वाला है। इस बार टाइम भी हमारा है, काउंटडाउन भी हमारा है और रॉकेट भी हमारा है। बहरहाल, जानकारी देना चाहूंगा कि गगनयान भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) का एक मिशन है और इस मिशन के तहत तीन अंतरिक्ष मिशनों को कक्षा में भेजा जाएगा। इन तीन मिशनों में से 2 मानव रहित होंगे, जबकि एक मानव युक्त मिशन होगा। यह भी जानकारी देना चाहूंगा कि अक्तूबर 2023 में अंतरिक्ष एजेंसी इसरो ने गगनयान के पहले टेस्ट व्हीकल एबॉर्ट मिशन-1 (टीवी-डी1) को भी लॉन्च किया था और वर्तमान में इसरो की नजर गगनयान मिशन पर है जिसके तहत भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों को अंतरिक्ष में ले जाया जाएगा। </p>
<p>सच तो यह है कि गगनयान मिशन को कई चरणों के जरिए सफलता के अंजाम तक पहुंचाया जाएगा। दरअसल, गगनयान में क्रू एस्केप सिस्टम (सीईएस) सबसे खास है। इसरो के अनुसार फ्लाइट टेस्ट व्हीकल अबॉर्ट मिशन 1 में किसी अनहोनी की दशा में अंतरिक्ष यात्रियों को बचाने में यह क्रू-एस्केप प्रणाली काम आएगी। उड़ान भरते समय अगर मिशन में कोई भी गड़बड़ी हुई तो यह प्रणाली क्रू मॉड्यूल के साथ यान से अलग हो जाएगी। कुछ समय उड़ेगी और श्रीहरिकोटा से 10 कि.मी. दूर समुद्र में उतरेगी। इसमें मौजूद अंतरिक्ष यात्रियों को नौसेना की ओर से समुद्र से सुरक्षित वापस लाया जाएगा। इसके बाद दूसरा परीक्षण वाहन टीवी-डी2 मिशन और गगनयान (एलवीएम3-जी1) का पहला मानव रहित मिशन होगा। परीक्षण वाहन मिशन (टीवी-डी3 और डी4) की दूसरी श्रृंखला और रोबोटिक पेलोड के साथ एलवीएम3-जी2 मिशन की अगली योजना बनाई गई है। एजेंसी के मुताबिक चालक दल मिशन की योजना सफल परीक्षण वाहन के नतीजे और उन मिशनों के आधार पर बनाई गई है जिनमें कोई चालक दल नहीं है। दरअसल इसरो इस मिशन के लिए लगातार कड़ी मेहनत कर रहा है और किसी भी हाल और परिस्थितियों में अंतरिक्ष यात्रियों को खोना नहीं पड़े, इसके लिए इसरो द्वारा छह परीक्षणों की एक श्रृंखला तैयार की गई है। जानकारी देना चाहूंगा कि पिछले साल अक्टूबर में हुए एक अहम परीक्षण में यह सामने आया है कि रॉकेट में गड़बड़ी होने पर चालक दल सुरक्षित बाहर निकल सकता है। बहरहाल, पाठकों को यह भी विदित हो कि गगनयान देश का पहला मानव अंतरिक्ष उड़ान मिशन है जिसके तहत चार अंतरिक्ष यात्री अंतरिक्ष में भेजे जाएंगे। मीडिया के हवाले से यह सामने आ रहा है और इस मिशन को वर्ष 2024 के आखिर या वर्ष 2025 की शुरुआत तक अंतरिक्ष में भेजा जा सकता है। इसी साल यानी कि वर्ष 2024 में मानव रहित परीक्षण उड़ान भरी जाएगी, जिसमें एक व्योममित्र रोबोट को भेजा जाएगा। बताता चलूं कि गगनयान मिशन तीन दिवसीय मिशन है। मिशन के लिए 400 किलोमीटर की पृथ्वी की निचली कक्षा पर मानव को अंतरिक्ष में भेजा जाएगा और फिर सुरक्षित पृथ्वी पर वापस लाया जाएगा। यहां यह भी जानकारी देना चाहूंगा कि गगनयान मिशन के सफल होने पर भारत उन देशों की श्रेणी में शामिल हो जाएगा, जिन्होंने खुद चालक दल अंतरिक्ष यान लॉन्च किया है। बताता चलूं कि अभी तक अमेरिका, रूस और चीन ही यह काम कर पाए हैं। यहां यह बात कहना गलत नहीं होगा कि आज इसरो सम्पूर्ण विश्व में अंतरिक्ष के क्षेत्र में एक मिसाल बनकर उभर रहा है और अंतरिक्ष मिशनों का लगातार भारतीयकरण (स्वदेशीकरण) हो रहा है। हम अंतरिक्ष के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की ओर लगातार अग्रसर हैं और हमने काफी हद तक मिशन गगनयान का भारतीयकरण कर दिया है। यह इसरो के वैज्ञानिकों की बड़ी सफलता है। इसरो की पूरी टीम इसके लिए बधाई की पात्र हैं।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 06 Mar 2024 09:41:20 +0530</pubDate>
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                <title>स्कूल में छात्रों ने किया पौधारोपण, प्रेरणा का हुआ संचार </title>
                                    <description><![CDATA[पौधारोपण के बाद पर्यावरण चेतना के संबंध में छात्र-छात्राओं से संवाद किया गया, जिसमें लोगों ने बताया कि ऐतिहासिक रूप से पेड़ को बचाने के लिए सैकड़ों महिलाओं ने अपना बलिदान दिया था, जिससे छात्र-छात्राओं में एक प्रेरणा का संचार हुआ।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/students-planted-saplings-in-the-school-communication-of-inspiration/article-51783"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-07/11111.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान विश्वविद्यालय के सामाजिक सरोकारों की जिम्मेदारी के क्रम में लाइव लोंग लर्निंग विभाग द्वारा टांटियावास गांव के महात्मा गांधी सीनियर सेकेंडरी स्कूल में पौधारोपण एवं पर्यावरण चेतना पर संवाद का आयोजन किया गया। कुलाधिपति राजस्थान विश्वविद्यालय कलराज मिश्र के प्रेरणा स्वरूप इस महीने में पौधारोपण गांव की स्कूल की छात्राओं ने किया। </p>
<p>पौधारोपण के बाद पर्यावरण चेतना के संबंध में छात्र-छात्राओं से संवाद किया गया, जिसमें लोगों ने बताया कि ऐतिहासिक रूप से पेड़ को बचाने के लिए सैकड़ों महिलाओं ने अपना बलिदान दिया था, जिससे छात्र-छात्राओं में एक प्रेरणा का संचार हुआ। इसके साथ ही छात्र-छात्राओं को शपथ दिलाई गई कि वह पौधा लगाएंगे। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>शिक्षा जगत</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 14 Jul 2023 15:59:58 +0530</pubDate>
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