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                <title>transformers - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>मानसून की मोहलत कह रही सावधान, बारिश तेज हुई तो सड़क से लेकर बिजली तक बढ़ेगा खतरा</title>
                                    <description><![CDATA[मानसून में करंट से पहले सुरक्षा का इंतजाम जरूरी, खुले ट्रांसफार्मर बन सकते हैं जानलेवा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/the-monsoon-s-delayed-arrival-serves-as-a-warning--if-rainfall-intensifies--risks-ranging-from-road-hazards-to-electrical-dangers-will-escalate/article-160025"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-07/1200-x-600-px)-(1)52.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर में मानसून दस्तक दे चुका है। आसमान में बादल छा रहे हैं, बारिश का मौसम भी बन रहा है, लेकिन अभी झमाझम बारिश का दौर शुरू नहीं हुआ है। मौसम की यह मोहलत प्रशासन और संबंधित विभागों के लिए शहर की व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने का आखिरी अवसर साबित हो सकती है। आने वाले दिनों में बारिश का दौर तेज हुआ तो शहर की कुछ बदहाल सड़कें, ब्रिजों के नीचे जलभराव और खुले विद्युत ट्रांसफार्मर लोगों के लिए बड़ी परेशानी खड़ी कर सकते हैं। शहर के कई प्रमुख मार्गों पर अभी से सड़क की स्थिति चिंता बढ़ा रही है। कहीं गिट्टी बिखरी पड़ी है तो कहीं छोटे-बड़े गड्ढे वाहन चालकों की राह मुश्किल कर रहे हैं। फिलहाल बारिश नहीं होने के कारण इन रास्तों से आवागमन हो रहा है, लेकिन लगातार बारिश शुरू होते ही यही छोटी खामियां बड़ी समस्या में बदल सकती हैं। गड्ढों में पानी भरने के बाद उनकी गहराई का अंदाजा नहीं रहता और दोपहिया वाहन चालकों के लिए दुर्घटना का खतरा बढ़ जाता है।</p>
<p><strong>बारिश से पहले भरें गड्ढे, वरना पानी छिपा देगा खतरा</strong><br />मोहन टॉकीज रोड, नयापुरा से एरोड्रम जाने वाले मार्ग और छावनी से नयापुरा की ओर आने वाले रास्ते सहित शहर के कुछ प्रमुख मार्गों पर कहीं गिट्टी फैली हुई है तो कहीं सड़क पर गड्ढे नजर आ रहे हैं। इन मार्गों से प्रतिदिन बड़ी संख्या में दोपहिया, चारपहिया और अन्य वाहन गुजरते हैं। अभी इन स्थानों की मरम्मत कर दी जाए तो लोगों को राहत मिल सकती है, लेकिन बारिश तेज होने के बाद मरम्मत कार्य करना भी मुश्किल हो सकता है।</p>
<p><strong>ब्रिज के नीचे पानी भरा तो थमेगी रफ्तार</strong><br />शहर में बने कुछ ब्रिजों के अंडरपास के नीचे बारिश के दौरान जलभराव की समस्या भी सामने आती रही है। तेज बारिश के बाद यदि पानी की निकासी समय पर नहीं हो तो कुछ ही देर में सड़क पर पानी जमा हो जाता है। इससे वाहन चालकों को रास्ता बदलना पड़ता है और यातायात व्यवस्था प्रभावित होती है। । नतीजा यह होता है कि कुछ घंटों की बारिश लोगों के लिए घंटों की परेशानी बन जाती है। यदि बारिश रात के समय हो तो स्थिति और गंभीर हो सकती है। ऐसे में पंपिंग व्यवस्था, ड्रेनेज की सफाई और आपात स्थिति में तत्काल कार्रवाई के इंतजाम पहले से तैयार रखना जरूरी है।</p>
<p><strong>खुले ट्रांसफार्मर पर सुरक्षा घेरा जरूरी, बारिश में बढ़ सकता है करंट का खतरा</strong><br />सड़कों और जलभराव के साथ शहर में खुले विद्युत ट्रांसफार्मर भी चिंता का विषय हैं। कई स्थानों पर ट्रांसफार्मर और विद्युत उपकरण खुले क्षेत्र में लगे हुए हैं। बारिश के दौरान आसपास पानी भरने या बिजली के तारों और उपकरणों में तकनीकी खराबी आने पर करंट का खतरा बढ़ सकता है। विशेष रूप से ऐसे स्थान जहां बच्चों, राहगीरों और पशुओं की आवाजाही अधिक रहती है, वहां सुरक्षा व्यवस्था जरूरी है। सड़क के गड्ढे भरना, बिखरी गिट्टी हटाना, जल निकासी व्यवस्था दुरुस्त करना और खुले ट्रांसफार्मरों को सुरक्षित करना ऐसे काम हैं जिन्हें तेज बारिश से पहले पूरा किया जाना चाहिए।</p>
<p><strong>बारिश से पहले हो काम, बाद में केवल खानापूर्ति नहीं</strong><br />गड्ढे अभी दिखाई दे रहे हैं, बारिश में इनमें पानी भर जाएगा। तब वाहन चालक को पता ही नहीं चलेगा कि गड्ढा कितना गहरा है। प्रशासन को बारिश से पहले ही सड़कों की मरम्मत करनी चाहिए। सड़क पर फैली गिट्टी दोपहिया वाहन चालकों के लिए सबसे ज्यादा खतरनाक है। बारिश में सड़क गीली होने पर वाहन फिसलने का डर रहता है। इसे समय रहते हटाया जाना चाहिए। हर साल तेज बारिश के बाद कई स्थानों पर जलभराव की समस्या सामने आती है। यदि नालियों और ड्रेनेज की सफाई पहले ही हो जाए तो लोगों को काफी राहत मिल सकती है। खुले ट्रांसफार्मर बारिश के दिनों में बड़ा खतरा बन सकते हैं। विद्युत विभाग को ऐसे स्थानों की पहचान कर सुरक्षा जाली और अन्य इंतजाम करने चाहिए।”<br /><strong>-राहुल शर्मा, वाहन चालक</strong></p>
<p><strong>बारिश का इंतजार क्यों?</strong><br />मानसून आ चुका है और तेज बारिश का दौर कभी भी शुरू हो सकता है। विभागों के सामने सवाल साफ हैं—क्या सड़कों के गड्ढे बारिश से पहले भरे जाएंगे? क्या बिखरी गिट्टी हटेगी? क्या ब्रिजों के नीचे जल निकासी की जांच होगी? क्या खुले ट्रांसफार्मरों को सुरक्षित किया जाएगा? अभी कार्रवाई हुई तो शहर को बड़ी परेशानी से बचाया जा सकता है। यदि इंतजार तेज बारिश और शिकायतों का किया गया तो लोगों को परेशानी झेलनी पड़ेगी और विभागों को फिर आपातकालीन मरम्मत में जुटना होगा। बारिश कब होगी, यह मौसम तय करेगा, लेकिन शहर बारिश के लिए कितना तैयार होगा, यह जिम्मेदार विभागों को तय करना है।<br /><strong>-हरपाल सिंह राणा, शहरवासी</strong></p>
<p>बारिश के मौसम को देखते हुए नगर निगम प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। अधिकारियों के साथ बैठक कर व्यवस्थाओं की समीक्षा की गई और संभावित जलभराव व आपात स्थितियों से निपटने के लिए अलग-अलग टीमों का गठन किया गया है। निगम व केडीए प्रशासन ने संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को अलर्ट मोड पर रहते हुए त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।<br /><strong>-पीयूष समारिया, जिला कलक्टर कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
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                <pubDate>Thu, 16 Jul 2026 15:09:13 +0530</pubDate>
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                <title>कोटा दक्षिण वार्ड 52 - पार्क में सुविधाओं का अभाव, खुले विद्युत ट्रांसफार्मर से हादसों का खतरा, खाली प्लॉट बन रहे कचरा प्वॉइंट</title>
                                    <description><![CDATA[वार्ड में प्रतिदिन कचरा गाड़ी आती है पर नालियों की सफाई रोज नहीं होती।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/kota-south-ward-52---parks-lack-amenities--open-electrical-transformers-pose-a-risk-of-accidents--and-vacant-plots-are-becoming-garbage-dumps/article-128612"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-10/copy-of-news-(6)3.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर के नगर निगम दक्षिण के वार्ड 52 में पार्षद द्वारा वार्ड के हिसाब से विकास करवाया गया व समय-समय पर वार्ड में विकास कार्य करवाने के लिए निगम की बैठकों में आवाज भी मुखर की गई। वार्ड की वीरसावरकर नगर, नारकोटिक्स कॉलोनी सहित अन्य जगहों पर प्रतिदिन सफाई होती है, साथ ही कचरा गाड़ी भी आती है। पार्षद द्वारा समय-समय पर वार्ड का निरीक्षण भी किया जाता है। कच्ची बस्ती के लोगों ने बताया कि हमारी तरफ नालियों की सफाई प्रतिदिन नहीं होती है। विद्युत लाइनों के तार मकानों के पास से गुजर रहे हैं, जिससे कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। वीरसावरकर नगर स्थित पार्क बदहाली का शिकार होने के चलते वहां पर रहने वाले लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।</p>
<p><strong>पार्क बदहाली के शिकार</strong><br />वार्ड के वीरसावरकर नगर स्थित पार्कों का जीर्णोद्धार नहीं होने के कारण लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। अमन कुमार व दिनेश ने बताया कि हमारे मकान के सामने पार्क होने के बावजूद भी हम पार्क में घूमने नहीं जा सकते हैं, क्योंकि इनमें सुविधाओं का अभाव है। पार्क में बच्चों के लिए झूले, चकरी सहित अन्य मनोरंजन के साधन नहीं होने के कारण बच्चों को मजबूरन दूसरे पार्कों में ले जाना पड़ता है।</p>
<p><strong>खाली प्लॉट व खुले में पड़ा कचरा बना मुसीबत</strong><br />वार्ड में स्थित खाली प्लॉट लोगों के लिए मुसीबत का कारण बने हुए हैं। वार्डवासी धनराज व मुकेश ने बताया कि हमारे घर के पास खाली प्लॉट में लोगों द्वारा कचरा डाला जाता है, जिससे बारिश के समय पर जलीय जंतु निकलते हैं। इससे डर बना रहता है और लोग डर के साये में जीने को मजबूर हो रहे हैं।</p>
<p><strong>वार्ड का एरिया</strong><br />हरिराम नगर कच्ची बस्ती, वीरसावरकर नगर, नारकोटिक्स कॉलोनी, लोहार बस्ती, पावर हाउस, पीएचईडी आॅफिस, मदर टेरेसा स्कूल, गर्वमेंट वीरसावरकर नगर स्कूल इत्यादि क्षेत्र।</p>
<p><strong>खुले विद्युत पैनल दे रहे दुर्घटनाओं को न्यौता</strong><br />वार्ड की हरिराम नगर कच्ची बस्ती स्थित साईं मंदिर के पास खुले में लगा विद्युत ट्रांसफार्मर रोजाना लोगों के लिए खतरा बना हुआ है। यहां से बस्ती वाले प्रतिदिन गुजरते हैं, जिससे कभी भी हादसा हो सकता है। साथ ही इसके आसपास सुरक्षा दीवार व जाली नहीं होने के चलते लोगों में डर बना रहता है।</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />वार्ड में प्रतिदिन कचरा गाड़ी आती है पर नालियों की सफाई नहीं होने के चलते परेशानी का सामना करना पड़ता है।<br /><strong>- रामस्वरूप</strong></p>
<p>कच्ची बस्ती में ट्रांसफार्मर खुले में लगा होने के चलते परेशानी का सामना करना पड़ता है। बारिश के समय दुर्घटना होने का डर बना रहता है।<br /><strong>- सांवरिया</strong></p>
<p>खुले ट्रांसफार्मर पर सुरक्षा करने के लिए संबंधित अधिकारियों को बोल रखा है। वीरसावरकर नगर के पार्कों का जीर्णोद्धार वार्डवासी नहीं करने देते हैं।<br /><strong>- भगवती कुमारी महावर, पार्षद वार्ड 52</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 03 Oct 2025 13:01:31 +0530</pubDate>
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                <title>ट्रांसफार्मर के नीचे पड़ा सूखा कचरा, आग का बढ़ा रहे खतरा</title>
                                    <description><![CDATA[सभी जगह पर ऐसा लगता है मानो ट्रांसफार्मर के नीचे ही कचरा पाइट बना हुआ है। जिसे देखो वहां कचरा डालकर जा रहा है। उससे होने वाले खतरे के बारे में किसी को परवाह ही नहीं है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/dry-garbage-lying-under-the-transformer--increasing-the-danger-of-fire/article-79522"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-05/transformer-k--neche-pada-sokha-kachara-aag-ka-badh-rahe-khatara...kota-news-27.05.2024.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा।  शहर में पड़ रही भीषण गर्मी में आग लगने की घटनाएं भी अधिक हो रही है। सबसे अधिक घटनाएं कचरे के कारण ट्रांसफार्मरों में लगने की हो रही है। उसके बाद भी वहां से कचरा साफ नहीं किया जा रहा है। शहर के अधिकतर क्षेत्रों में ट्रांसफार्मर मेन रोड पर ही लगे हुए हैं। ये लोगों की सुविधा के लिए लगाए गए हैं जिससे संबंधित क्षेत्र में बिजली की सप्लाई सुचारू की जा सके। लेकिन हालत यह है कि इन ट्रांसफार्मर के आस-पास व नीचे कचरे का अम्बार लगा हुआ है। जिससे भीषण गर्मी में पारा अधिक होने से कचरे में आग लगने से ट्रांसफार्मर व उनकी केबल जल रही हैं। ट्रांसफार्मर में आग के चलते क्षेत्र की बिजली बंद करनी पड़ रही है। जिससे आग बुझाने और स्थिति सामान्य होने तक बिजली बंद रहने से लोगों को गर्मी में परेशान होना पड़ रहा है। </p>
<p><strong>हर जगह है यह हालात</strong><br />शहर में अधिकतर जगह पर ट्रांसफार्मरों के नीचे कचरे के ढेर लगे हुए हैं। न्यू कॉलोनी गुमानपुरा मोड पर, मल्टीपरपज स्कूल गुमानपुरा के मुख्य द्वार के पास, एलआईडी बिल्ड़िग के पास छावनी चौराहा समेत कई ऐसी जगह हैं जहां इसी तरह के हालात देखे जा सकते हैं।  सभी जगह पर ऐसा लगता है मानो ट्रांसफार्मर के नीचे ही कचरा पाइट बना हुआ है। जिसे देखो वहां कचरा डालकर जा रहा है। उससे होने वाले खतरे के बारे में किसी को परवाह ही नहीं है। </p>
<p><strong>आए दिन हो रही आग लगने की घटनाएं</strong><br />ट्रांसफार्मर के नीचे व आस-पास कचरा पड़ा होने से आग लगने की घटनाएं आए दिन हो रही है। नगर निगम कोटा दक्षिण के सीएफओ राकेश व्यास ने बताया कि ट्रांसफार्मर में आग लगने का  अधिकतर कारण तो वहां पड़ा कचरा है। गर्मी में कचरा जल्अी आग पकड़ता है। जिससे वह ट्रांसफार्मर की केबल व आॅयल होने से आग तेजी से फेलती है। ट्रांसफार्मर की आग बुझाने के लिए बिजली बंद करनी पड़ती है। जिससे लोगों को परेशानी होती है।  व्यास ने बताया कि तलवंडी, छावनी व नयापुार बस स्टैंड समेत कई जगह पर हाल ही में इस तरह के मामले हो चुके हैं। </p>
<p><strong>सुरक्षा के लिए लगाई जालियां</strong><br />इधर निजी बिजली कम्पनी के अधिकारियों का कहना है कि ट्रांसफार्मरों की सुरक्षा के लिए अधिकतर जगह पर उन्हें ऊनाई पर रखा गया है। साथ ही जो ट्रांसफार्मर में जमीन पर हैं उनकी सुरक्षा के लिए चारों तरफ जाली व रैलिंग से कवर किया हुआ है। उसके बाद भी लोग यहां कचरा डाल जाते हैं। उस कचरे को भी साफ करवाते हैं लेकिन सभी जगह पर कचरा कम्पनी के लिए साफ करवाना संभव नहीं हो पाता। ट्रांसफार्मर के आस-पास व नीचे कचरा डालना गलत है। इससे आग लगने का खतरा अधिक रहता है। आग बुझाने के दौरान लाइन बनद करने पर लोगों को परेशानी है तो लोग कम्पनी के खिलाफ नाराजगी जाहिर करते हैं। </p>
<p><strong>नियमित होती सफाई</strong><br />नगर निगम कोटा दक्षिण वार्ड 21 के पार्षद नरेश शर्मा का कहना है कि न्यू कॉलोनी व मल्टीपरपज स्कूल के बाहर निगम के कचरा पाइंट हैं। वहा’ं कचरा डलता है लेकिन रोजाना उठता भी है। ट्रांसफार्मर के आस-पास कचरा नहीं डाला जाता। यदि कोई गलती से डाल भी जाता है तो उसे भी साफ करवाया जाता है। ट्रांसफार्मर के पास कचरा डालना गलत है।  </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 27 May 2024 16:00:05 +0530</pubDate>
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                <title>कहीं ट्रांसफारमरों में लगी आग तो कहीं लोगों ने ताला जड़ा</title>
                                    <description><![CDATA[कई जीएसएस फेल होने से लोगों में पनपा आक्रोश, बत्ती गुल की शिकायतों का लगा अंबार]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/somewhere-transformers-caught-fire-and-somewhere-people-locked-them/article-79465"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-05/electricity-5.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। प्रदेश में भीषण गर्मी के बीच बिजली की अघोषित कटौती से राजधानी सहित सभी जिलों में लोगों की परेशानी कम होने का नाम नहीं ले रही है। डिमांड और सप्लाई में बने 500 लाख यूनिट से ज्यादा अंतर के बीच कई जिलों में जीएसएस फेल होने से बत्ती गुल की शिकायतों का अंबार लगने लगा है। नागौर एवं आसपास के जिलों में कई ट्रांसफार्मर जल गए। धौलपुर के सैंपऊ में आक्रोशित लोगों ने जीएसएस पर ताला ही जड़ दिया तो जयपुर में सिरसी जीएसएस बंद हो गया। लूणकरणसर में जीएसएस में लगी आग पर दमकलों से काबू पाया गया। तीनों डिस्कॉम के अफसरों की रोज मॉनिटरिंग के बावजूद हालात काबू में नहीं आ पा रहे।बिजली संकट को लेकर सभी जिला कलक्टरों ने क्षेत्रों में कमान संभाल रखी है, लेकिन हालात सुधर नहीं रहे।</p>
<p><strong>कई विधायकों ने जताई नाराजगी</strong> <br />अधिक तापमान वाले जिलों में लोगों की परेशानी अधिक बनी हुई है। कई विधायकों ने भी बार-बार बिजली कटौती पर ऊर्जा विभाग के स्तर पर अपनी नाराजगी जाहिर की है। बेंगू विधायक सुरेश धाकड़ ने लोगों की परेशानी देखते हुए बिजली विभाग के अफसरों को तीन दिन का अल्टीमेटम दिया है। ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर के गृह जिले कोटा में नाराज लोगों ने निजी बिजली कंपनी केईडीएल के खिलाफ आक्रोश जताया है।  राजधानी जयपुर में एक बार फिर आरवीपीएनएल का सिस्टम फाल्ट हुआ। फुलेरा 220 केवी लाइन ट्रिप होने से 132 केवी जीएसएस सिरसी बंद हो गया। सिरसी बिंदायिका समेत आसपास के बड़े इलाकों में बिजली आपूर्ति बाधित हुई तो लोग खासे परेशान हो गए। जयपुर डिस्कॉम के कॉल सेंटर पर उपभोक्ताओं ने शिकायतें दर्ज कराई। हालांकि जयपुर में कई जीएसएस पर नए ट्रांसफॉर्मर लगाकर लोगों को कुछ हद तक राहत दी। </p>
<p><strong>समीक्षा जारी, डिमांड सप्लाई में अंतर से कटौती </strong><br />ऊर्जा विभाग के अफसरों का दावा है कि तीनों डिस्कॉम में लगातार निर्बाध बिजली आपूर्ति की समीक्षा जारी है। डिमांड सप्लाई में अंतर बने रहने से कुछ जगह कटौती करनी पड़ रही है, लेकिन लोगों को जल्दी ही निर्बाध बिजली आपूर्ति होगी। लोग भी बिजली संकट देखते हुए एसी जैसे साधनों को कम उपयोग में लें, ताकि अन्य लोगों को बिजली उपलब्ध हो सके। ऊर्जा विभाग बाहरी स्रोतों से भी बिजली खरीदकर सप्लाई देने में जुटा हुआ है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 27 May 2024 09:53:19 +0530</pubDate>
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                <title>हर गली मौहल्ले में ट्रांसफार्मर्स के नीचे बैठा काल</title>
                                    <description><![CDATA[यह स्थिति किसी एक या दो जगह पर नहीं है वरन् पुराने शहर से लेकर नए कोटा क्षेत्र के अधिकतर इलाकों में देखने को मिलेगी। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/kaal-sitting-under-transformers-in-every-street/article-74789"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-04/hr-gali-mohalle-me-tranformers-k-niche-betha-kaal...kota-news-09-04-2024.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। <strong>केस1 - </strong>मक बरा थाना क्षेत्र में दो दिन पहले घंटाघर पुलिस चौकी के पास भीड़भाड़ वाले इलाके में एक ट्रांसफार्मर में अचानक आग लग गई थी। आग अधिक होने से वहां अफरा-तफरी का माहौल हो गया था। ट्रांसफार्मर में आग लगने का कारण वहां पड़ा कचरे का ढेर बताया जा रहा है। </p>
<p><strong>केस 2 -</strong> नयापुरा थाना क्षेत्र में करीब 15 दिन पहले  अंटाघर चौराहे के पास एक निजी स्कूल के नजदीक ट्रांसफार्मर में आग लग गई थी। आग शाम के समय लगी ली जिसे तुरंत काबू कर लिया था। यहां भी आग लगने का कारण कचरे का ढेर ही बताया जा रहा है। </p>
<p><strong>केस 3 - </strong>जवाहर नगर थाना क्षेत्र में गत दिनों तलवंडी मेन रोड पर एक ट्रांसफार्मर में आग लग गई थी।  आस-पाह रिहायशी इलाका होने से लोग घबरा गए थे। सरस बूथ के पास ट्रांसफार्मर में आग लगने का कारण वहां लगे कचरे को ढेर को बताया जा रहा है। </p>
<p>ये तो उदाहरण मात्र हैं उस भयावयता को बताने के जो गर्मी में हर साल देखने को मिलती है। गर्मी का सीजन शुरू हो गया है। ऐसे में आग लगने की घटनाएं भी अधिक होती है। वैसे तो आग की घटना किसी भी जगह और कभी भी हो सकती है। लेकिन पिछले कुछ समय से शहर के हर क्षेत्र में ही आए दिन ट्रांसफार्मर में आग लगने की मामले सामने आ रहे हैं।</p>
<p><strong>ट्रांसफार्मर में हमेशा नीचे से आग</strong><br />शहर में अभी तक जितने भी ट्रांसफार्मर में आग लगी वह अधिकतर जमीनी सतह से ही लगी है। इसका कारण वहां लगे कचरे के ढेर हैं। गर्मी में कई बार तापमान अधिक होने से वहां कचरे में कागज, सूखे पत्ते व अन्य ज्वलनशील पदार्थ डालने से वह तुरंत आग पकड़ लेती है। जिससे आग ट्रांसफार्मर की केबल में लगती है और वह ट्रांसफार्मर में आॅयल होने से आग तेजी से फेलने लगती है। ऐसे मामले आए दिन हो रहे हैं। शरारती तत्वों या नशा करने के आदि लोग अक्सर बीड़ी, सिगरेट  का उपयोग करने के बाद बचा हुआ जलता हिस्सा या माचिक की तीली कचरे में डाल देते हैं। जिससे आग अधिक लगने की घटनाएं हो रही हैं। </p>
<p><strong>करीब 10 से 15 फीसदी ट्रांसफार्मर के चारों तरफ कचरे के ढेर</strong><br />जानकारों के अनुसार कोटा शहर में बिजली विभाग के करीब डेढ़ से दो हजार ट्रांसफार्मर होंगे। हालांकि सुरक्षा की दृष्टि से अधिकतर ट्रांसफार्मर ऊचाई पर रखे हुए हैं। उनके आस-पास लोहे की जालियां, फेंसिंग की हुई है। जिससे  ट्रांसफार्मर में करंट होने के कारण लोगों को खतरे से बचाया जा  सके। लेकिन उसके बाद भी करीब 10 से 15 फीसदी 150 से 200 ट्रांसफार्मर ऐसे हैं जिनके आस-पास कचरे के ढेर लगे हुए हैं। यह स्थिति किसी एक या दो जगह पर नहीं है वरन् पुराने शहर से लेकर नए कोटा क्षेत्र के अधिकतर इलाकों में देखने को मिलेगी। </p>
<p><strong>जनता को परेशानी, घंटों लाइट गुल</strong><br />ट्रांसफार्मर में आग लगने पर  या तो उसकी केबल जलने से लाइट स्वत: ही बनद हो जाती है। लेकिन अग्निशमन विभाग की दमकलें आग बुझाने आती हैं तो सबसे पहले लाइट बंद करवाती हैं।  बिजली विभाग की तरफ से लाइट बंद की जाती है और जली हुई केबलों को सही करने या बदलने में समय लगता है। जिससे घंटो लाइट गुल रहने से लोगों को ही परेशानी का सामना करना पड़ता है। गर्मी में यह समस्या अधिक देखने को मिलती है। </p>
<p>कम्पनी की ओर से ट्रांसफार्मर को सुरक्षित रखा गया है। जिससे आमजन को किसी तरह का कोई खतरा नहीं हो। ट्रांसफार्मर के चारों तरफ फेंसिंग व जाली लगाई गई है। लेकिन लोग उन जालियों में कचरा डाल देते हैं। उस कचरे में जलती बीड़ी, सिगरेट, माचिस डालने से वह कचरा आग पकड़ लेता है। जिसके ट्रांसफार्मर के केबल जलती है। ट्रांसफार्मर नहीं। घंटाघर वाले ट्रांसफार्मर में भी ऐसा ही हुआ। ट्रांसफार्मर को कोई नुकसान नहीं हुआ लेकिन केबल जल गई थी। समय-समय पर उस कचरे को भी साफ करवाते रहते हैं लेकिन सभी जगह पर ऐसा कर पाना भी संभव नहीं हो पाता। गर्मी में आग लगने की घटनाएं अधिक होती हैं। <br /><strong>- अनोमित्रो  डॉली,  हैड टैक्नीकल, केईडीएल </strong></p>
<p>गर्मी में तापमान अधिक होने पर ’वलनशील पदार्थ तेजी से आग पकड़ते हैं। पिछले कुछ समय से ट्रांसफार्मर में आग लगने की घटनाएं अधिक हुई हैं। इसका कारण वहां लगा कचरे का ढेर है। शॉर्ट सर्किट की चिंगारी या कोई जलती चीज डालने से ट्रांसफार्मर का आॅयल आग जल्दी पकड़ता है। ट्रांसफार्मर में आग लगने की अधिकतर घटनाएं वहां लगे कचरे के ढेर के कारण हुई है। समय रहे आग पर काबू नहीं पाने पर वहां करंट फेलने का भी खतरा रहता है। <br /><strong>- राकेश व्यास, सीएफओ नगर निगम कोटा दक्षिण </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 09 Apr 2024 16:40:48 +0530</pubDate>
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                <title>कचरे के ढेर में ट्रांसफार्मर, लपलपा रहा खतरा </title>
                                    <description><![CDATA[जानकारी के अनुसार शहर में सैकड़ों की संख्या में ट्रांसफार्मर के आस-पास कचरे के ढेर लगे हुए हैं।  ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/transformer-in-the-garbage-heap--lurking-danger/article-52017"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-07/kachre-k-dher-me-tranformer,-laplpa-rha-khatra...kota-news-17-07-2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर में जगह जगह जमीन पर रखे ट्रांसफार्मरों के आस-पास  कबाड़ व कचरे के ढेर से लग गए हैं। बरसात में यह कचरा  करंट लगने का खतरा बना हुआ है। शहरवासियों को घरों और प्रतिष्ठानों तक बिजली सुचारू रूप से पहुंचाने के लिए बिजली विभाग की ओर से जगह-जगह पर ट्रांसफार्मर लगाए हुए हैं। थोड़ी-थोड़ी दूरी पर शहर में सैकड़ों की संख्या में ट्रांसफार्मर तो लगे हुए हैं। लेकिन हालत यह है कि अधिकतर ट्रांसफार्मर सड़क किनारे जमीन पर ही रखे हुए हैं। जिससे उनके आस-पास बड़ी मात्रा में कचरा डाला जा रहा है। कहीं घास उगी हुई है तो कहीं कबाड़ पड़ा हुआ है। </p>
<p><strong>गर्मी में आग और बरसात से करंट का खतरा</strong><br />गर्मी के मौसम में शॉर्ट सर्किट से चिंगारीे गिरने या किसी व्यक्ति द्वारा ज्वलनशील वस्तु कचरे पर डालने से ट्रांसफार्मर के आस-पास आग लगने की कई घटनाएं हुई थी। जिससे वहां की केबल जलने पर क्षेत्र की बिजली व्यवस्था बाधित हुई। केबल ठीक करने के लिए बिजली कम्पनी के कर्मचारियों को मौके पर पहुंचकर बिजली व्यवस्था सुचारू करने में जितना समय लगा। उतनी देर बिजली बंद रहने से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। इस तरह की घटनाएं शहर के हर क्षेत्र में कई जगह पर हुई थी।  वहीं अब बरसात का सीजन शुरू हो चुका है। ऐसे में वहां कचरा व खाद्य पदार्थ होने से मवेशी उसे खाने के लिए जा रहे हैं जिससे करंट लगने पर गत दिनों कई मवेशियों की मौत हो चुकी है। वहीं स्मैकची या चोर सामान चोरी करने जाने के दौरान उन्हें भी करंट लगने का खतरा बना हुआ है। पूर्व में शहर में इस तरह की कई घटनाएं हो चुकी हैं। इस बार भी बरसात में यह खतरा बना हुआ है। </p>
<p><strong>हर जगह यही हालात</strong><br />जानकारी के अनुसार शहर में सैकड़ों की संख्या में ट्रांसफार्मर लगे हुए हैं। जिनमें से डीसीएम रोड हो या वल्लभ नगर, नई धानमंडी हो या बंगाली कॉलोनी। इतना ही नहीं गुमानपुरा मेन रोड से लेकर पूरे शहर में किसी भी जगह पर देखने पर यही हालत है कि हर ट्रांसफार्मर के आस-पास कचरे के ढेर लगे हुए हैं।  </p>
<p><strong>खतरे से सुरक्षा जरूरी</strong><br />नयापुरा निवासी अब्दुल हसन का कहना है कि शहर में निजी बिजली कम्पनी काम कर रही है। उसकी जिम्मेदारी है कि बिजली के ट्रांसफार्मर के आस-पास से कचरा साफ करवाकर लोगों को खतरे से बचाए। बजरंग नगर निवासी राहुल राहुरे का कहना है कि बरसात में हर साल करंट लगने का खतरा रहता है। ऐसे में बिजली विभाग को समय से पहले ही इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए सुरक्षा के इंतजाम करने चाहिए। </p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />शहर में अधिकतर ट्रांसफार्मर बरसों पहले लगे हुए हैं। सुरक्षा के लिए अधिकतर को जमीन से ऊंचा किया गया है। जिससे उनमें बरसात का पानी नहीं भरे। साथ ही उनके आस-पास फेंसिग भी करवाई गई है। लोगों को वहां कचरा नहीं डालने के लिए कई बार समझाइश की जा चुकी है। लेकिन उसके बाद भी वहां कचरा व खाद्य पदार्थ डाले जा रहे हैं। जिससे आग लगने पर केबल जलने व मवेशी व लोगों को करंट लगने का खतरा बना हुआ है। कम्पनी की ओर से सभी ट्रांसफार्मर पर सुरक्षा के लिए तारबंदी की गई है। फिर भी जो ट्रांसफार्मर जमीन पर रखे हैं उन्हें भी ऊंचा करने का प्रयास किया जाएगा। <br /><strong>- अनोमित्रो डॉली, तकनीकी हैड, केईडीएल </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 17 Jul 2023 18:53:48 +0530</pubDate>
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