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                <title>medical college hospital - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>medical college hospital RSS Feed</description>
                
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                <title>इलाज से पहले मरीजों को दर्द दे रहा मेडिकल कॉलेज अस्पताल, प्रवेश द्वार से इमरजेंसी-गेट नंबर 4 तक हो रहे गहरे गड्ढे</title>
                                    <description><![CDATA[यहां हाड़ौती से ही नहीं मध्यप्रदेश से भी बड़ी संख्या में मरीज इलाज को आते हैं। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/the-medical-college-hospital-is-causing-patients-pain-even-before-treatment--with-deep-potholes-from-the-entrance-gate-to-the-emergency-gate-number-4/article-131482"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-11/ews-(5)6.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। हाड़ौती का सबसे बड़ा मेडिकल कॉलेज अस्पताल इलाज से पहले ही मरीजों का दर्द बढ़ा रहा है। राहत की उम्मीद लिए अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों का यहां कदम रखते ही दर्दभरा सफर शुरू हो जाता है। हालात यह हैं, अस्पताल के प्रवेश द्वार से लेकर ओपीडी गेट नंबर 1 और इमरजेंसी गेट नंबर-4 तक की प्रमुख सड़कें उधड़ी पड़ी। जगह-जगह गहरे गड्ढ़े हो रहे हैं। डॉक्टर्स के पास पहुंचने से पहले जख्मी सड़कें मरीजों के साथ तीमारदारों की जान भी खतरे में डाल रही है। जबकि, चिकित्सक भी इन्हीं गड्ढ़ोंभरी राह से गुजरते हैं।  इसके बावजूद अस्पताल  प्रशाासन द्वारा सड़कों की मरम्मत नहीं करवाई जा रही।  </p>
<p><strong>7 माह से उधड़ी सड़कें, दर्द से कहरा रहे मरीज</strong><br />मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल, कोटा संभाग का सबसे बड़ा अस्पताल है। यहां हाड़ौती से ही नहीं मध्यप्रदेश से भी बड़ी संख्या में मरीज इलाज को आते हैं। लेकिन, अस्पताल परिसर की सड़कें पिछले 7 महीने से उधड़ी पड़ी हैं। जगह-जगह गहरे गड्ढ़े हो रहे हैं। जहां से गुजरने के दौरान वाहनों में सवार घायल व प्रसूताएं दर्द से कराह उठते हैं। शिकायतों  के बावजूद अस्पताल प्रशासन क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मत नहीं करवा रहा। जिसका खामियाजा मरीजों व तीमारदारों को भुगतना पड़ रहा है। </p>
<p><strong>आॅथोपेडिक व प्रसूताओं को सबसे ज्यादा खतरा</strong><br />अस्पताल की ओपीडी प्रतिदिन 3 हजार से ज्यादा रहती है। इसका मतलब, हर दिन तीन हजार से अधिक लोग इलाज के लिए मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल पहुंचते हैं। ऐसे में क्षतिग्रस्त सड़कों के कारण सबसे ज्यादा खतरा  प्रसूताओं और आॅथोर्पेडिक मरीजों को रहता है। एंबुलेंस जैसे ही परिसर में घुसती है, गड्ढ़ों से वाहन उछल पड़ते हंै। प्रसूताएं तेज झटकों से कराह उठती हैं। जिससे जच्चा-बच्चा को नुकसान पहुंचने का डर बना रहता है। वहीं, हड्डी रोगियों का हाल बेहाल हो जाता है। गड्ढ़ों के कारण रीढ़, गर्दन, कमर की चोट वाले मरीजों के लिए यह इमरजेंसी तक पहुंचना मुसीबत को मोल लेना जैसा बन जाता है। </p>
<p><strong>तिमारदार बोले-मेन गेट पर ही खतरा, गिरने से बाल-बाल बचे</strong><br />तिमारदार प्रदीप मरोठा, अक्षय और रोहित बताते हैं कि मेडिकल कॉलेज अस्पताल के मुख्य गेट पर ही गहरे गड्ढ़े हो रहे हैं। वहीं, नालियों के ढकान के लिए लगा रही लोहे की जालियां धंस चुकी है। जिससे वाहनों के गुजरने के दौरान हादसे का डर बना रहता है। कुछ दिनों पहले अस्पताल से बाहर निकलते वक्त गड्ढ़ों के कारण बाइक अनियंत्रित हो गई। जिससे बाइक सवार दम्पती गिरने से बाल बाल बचे। </p>
<p><strong>गिट्टियों से फिसल रहे वाहन, चोटिल हो रहे लोग</strong><br />श्रीनाथपुरम निवासी रामजानकी नंदन, आयुष कुमार कहते हैं, ब्लड बैंक से इमरजेंसी गेट तक सीसी सड़क हो रही है, जो उधड़ा पड़ा है। वहीं, गेट नंबर एक की ओपीडी की तरफ डामर सड़क है, जो बरसात में पूरी तरह से छलनी हो गई। सड़क पर गिट्टियां फैली पड़ी रहती है। यहां से गुजरने के दौरान वाहन सवार फिसलकर चोटिल हो जाते हैं।  जब प्रतिदिन हजारों मरीज अस्पताल आते हैं, इसके बावजूद सड़कों की स्थिति सुधरवाने में अस्पताल प्रशासन द्वारा लापरवाही क्यों बरती जा रही है। यह समझ से परे है। </p>
<p><strong>पहली बारिश में ही बहा पेचवर्क</strong><br />अस्पताल प्रशासन ने बारिश से पहले जून माह में गड्ढ़ों पर पेचवर्क करवाया था, जो 15 जून की पहली बारिश में ही बह गया। इसके बाद तीन महीने बारिश का दौर रहा। जिसमें ओपीड़ी गेट नंबर 1 से इमरजेंसी गेट नंबर 4 तक की सभी सड़कें छलनी हो गई। ब्लडबैंक के सामने वाली सड़क पर तो सीवरेज के चैम्बर ही बाहर निकल गए। ऐसे में इमरजेंसी में आने वाले मरीजों का दर्द गड्ढ़ों  के कारण और बढ़ जाता है। </p>
<p><strong>यातना से कम नहीं अस्पताल की सड़कें</strong><br />बारां से आए कमलेश मीणा, अखिलेश मीणा और प्रियंक सलावद ने बताया कि कुछ दिन पहले रिश्तेदार की तबीयत खराब हो गई थी, जिन्हें गत शनिवार रात अस्पताल लेकर पहुंचे थे। प्रवेश द्वारा से लेकर इमरजेंसी  गेट तक पहुंचने तक अनगिनत गड्ढ़ों के कारण कार सवार तीमारदार और मरीज तेज झटकों से हालत खराब हो गई। अस्पताल प्रशासन को क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मत करवानी चाहिए। </p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />सड़कों की मरम्मत का कार्य शुरू हो गया है। मेडिकल कॉलेज  की तरफ नई सड़क बन चुकी है। लगातार बारिश के कारण काम रुक गया था, अब मौसम साफ होने पर काम फिर से शुरू हो गया है। जल्द ही अस्पताल के गेट-नंबर 1 से इमरजेंसी गेट नंबर 4 तक की सड़कों की मरम्मत हो जाएगी। मरीजों को किसी भी तरह की असुविधा न हो इसके लिए पूरी शिद्दत से प्रयास किए जा रहे हैं। <br /><strong>- डॉ. आशुतोष शर्मा, अधीक्षक मेडिकल कॉलेज अस्पताल</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 05 Nov 2025 15:45:37 +0530</pubDate>
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                <title>30 दिन मौत को चकमा देकर मुस्कुराई जिंदगी</title>
                                    <description><![CDATA[स्क्रब टायफस के साथ मल्टीपल बीमारियों के शिकंजे में फंसी थी जान
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/life-smiled-after-dodging-death-for-30-days/article-126443"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-09/copy-of-news13.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। चिकित्सकों को धरती पर यूं ही भगवान का दर्जा नहीं दिया जाता। इसका जीवंत उदारहण कोटा मेडिकल कॉलेज अस्पताल में देखने को मिला।  दरअसल, बारां निवासी 25 वर्षीय विवाहिता स्क्रब टायफस से मरणासन स्थिति में पहुंच गई थी, जिसके बचने की उम्मीद भी न के बराबर थी। लेकिन, चिकित्सकों की मेहनत से जिंदगी और मौत के बीच 30 दिन चले संघर्ष में आखिरकार  सुनीता को नया जीवन मिल गया। </p>
<p><strong>बुखार से वेंटिलेटर तक पहुंची महिला</strong><br />मेडिकल कॉलेज अस्पताल की मेडिसीन यूनिट-बी की एचओडी  डॉ. मीनाक्षी शारदा ने बताया कि बारां जिले के मांगरोल निवासी सुनीता को गत 30 जुलाई से ही तेज बुखार आ रहा था। परिजन स्थानीय स्तर पर ही इलाज करवा रहे थे। लेकिन बुखार नहीं टूटा, उल्टियां होने और सांस लेने में तकलीफ बढ़ गई। बीच-बीच में दौरे भी पड़ने लगे। गंभीर अवस्था में परिजन 5 अगस्त को उसे मेडिकल कॉलेज अस्पताल लेकर पहुंचे। उसका ब्लड प्रेशर भी 50 चल रहा था, शुगर भी बहुत कम था।</p>
<p><strong>ब्लड इंफेक्शन के 20 हजार काउंट बढ़ गए</strong><br />महिला के ब्लड सेल्स इफेक्टेड हो गए थे। प्लेटरेट्स भी डाउन हो गए। लीवर, किडनी और लंग्स  भी डेमेज हो गए। प्रोटोकॉल के तहत महिला का इलाज शुरू किया। लेकिन, स्थिति गंभीर बनी रही। बचने की स्थिति न के बराबर थी। लेकिन, जान बचाने की उम्मीद से न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल की मेडिसीन विभाग-बी के चिकित्सकों की टीम रात-दिन इलाज में जुटी रही। </p>
<p><strong>आॅक्सीजन लेवल घटा, फेफड़ों में निमोनिया बढ़ा</strong><br />उन्होंने बताया कि मरीज के शरीर का आॅक्सीजन लेवल घटकर 80% रह गया था। दोनों फेफड़ों में निमोनिया होने से सांस लेने में मुश्किल हो रही थी। इस पर तुरंत आईसीयू में वेंटिलेशन पर लिया और इमरजेंसी केयर शुरू किया। इसके बाद जांचें करवाई, जिसमें वह स्क्रब टायफस पॉजीटिव मिली। वायरस ने शरीर के अंगों को तेजी से प्रभावित किया।  वह कोमा जैसी अचेतावस्था में थी। </p>
<p><strong>अनंत चतुर्दशी पर मिली मौत पर जिंदगी को फतह</strong><br />लगातार 28 दिन वेंटिलेटर पर रहने के बाद मरीज सुनीता को टी-पीस सपोर्ट पर लाया गया। फिर आॅक्सीजन हटाकर 48 घंटे चिकित्सकों की निगरानी में रखा,जब पूरी तरह आश्वस्त हो गए कि उसे सांस लेने में किसी भी तरह की कोई समस्या नहीं हुई तो फिर ट्रेकियोस्टॉमी बंद की गई। सुनीता पूरी तरह होश में थी और स्वस्थ थी। आखिरकार, 7 सितंबर को अनंत चतुर्दशी पर वह मुस्कुराती हुई परिजनों के साथ अपने घर लौट गई। उसे डिस्चार्ज किया गया। </p>
<p><strong>जान बचाने में इन चिकित्सकों की रही भूमिका  </strong><br />मरीज सुनीता की जान बचाने में मेडिकल कॉलेज अस्पताल के मेडिसिन विभाग-बी के चिकित्सकोें की टीम की अहम भूमिका रही। जिसमें मेडिसिन यूनिट बी-की एचओडी डॉ. मीनाक्षी शारदा, एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. सौरभ चित्तौड़ा, डॉ. असिस्टेंट प्रोफेसर हेमंत विमलानी, रेजिÞडेंट टीम से डॉ. शेर सिंह, डॉ. धीरेज कृष्ण, डॉ. गोकुल बीजी, डॉ. शुभम कुमार, डॉ. आदिश जैन, डॉ. विकास गालव, डॉ. श्याम सुंदर, डॉ. मोनिका तिवारी शामिल रहे। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 10 Sep 2025 17:04:57 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>नए अस्पताल के रेडियो डायग्नोसिस विभाग में महीनों से टपक रही छत </title>
                                    <description><![CDATA[विभाग के आस पास वाले लोगों को इधर उधर बैठने पर मजबूर होना पड़ रहा है। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/-roof-has-been-leaking-in-the-radio-diagnosis-department-of-the-new-hospital-for-months/article-85519"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-07/nye-aspatal-k-radio-diagnosis-vibhag-me-mahino-s-tapak-rhi-chhat...kota-news-22-07-2024.jpeg" alt=""></a><br /><p>कोटा। मेडिकल कॉलेज अस्पताल के रेडियोडायग्नोसिस विभाग के पास कई महीनों से छत से पानी टपक रहा है। जो यहां आने वाले मरीजों और तीमारदारों के लिए मुसीबत बना हुआ है। पानी टपकने से पूरा फर्श फिसलना भरा हो जाता है लगातार पानी टपकने के कारण लोग यहां बैठ तक नहीं पा रहे हैं। लोगों का कहना है कि पहले विभाग की केवल एक्स रे मशीन के सामने ही छत से पानी टपकता था। अब अन्य स्थानों पर भी छत टपकने लगी है। ऐसे में विभाग के आस पास वाले लोगों को इधर उधर बैठने पर मजबूर होना पड़ रहा है। </p>
<p><strong>पहले दो, अब चार जगह लीकेज</strong><br />अस्पताल में पहले रेडियोडायग्नोसिस विभाग के पास ही छत में लीकेज था। वहीं अब श्वास रोग आईसीयू, ट्रोमा वार्ड, एमआरआई, अपातकालीन के पास भी छत से पानी टपक रहा है। इतने स्थानों पर पानी का लीकेज होने से मरीजों को तो परेशानी होती ही है साथ में तीमारदारों को भी खासी परेशानी का सामना करना पड़ता है। पानी गिरने के कारण फर्श गिला होने से लोगों के फिसलकर गिरने की आशंका बनी रहती है। साथ ही पानी के कारण गंदगी हो जाती है, जो बदबू मारती है। वहीं अस्पताल में इससे पहले भी छतों से पानी के लीकेज होने की स्थिति बन चुकी है। तब भी लोगों को परेशानी उठानी पड़ी थी।</p>
<p><strong>लोगों का कहना है</strong><br />रेडियोडायग्नोसिस विभाग के बाहर कई महीनों से छत टपक रही है। जिसका अभी तक कोई समाधान नहीं हुआ है। लेकिन इसके साथ ही दूसरे हिस्सों में भी छतों से पानी टपकने की स्थिति हो रही है। गीला होने के कारण ठीक से बैठ भी नहीं पा रहे हैं। <br /><strong>- महावीर गुर्जर, नयागांव</strong></p>
<p>कल मैं बहन को दिखाकर एक्स रे कराने आया था, लेकिन एक्से रे के बाहर आधी छत से पानी टपक रहा था। ऐसे में बैठना तो दूर वहां खड़ा भी नहीं हुआ जा रहा था। क्योंकि चारों ओर पानी के कारण गंदगी फैली हुई थी।<br /><strong>- दिनेश जाखड़, धाकड़खेड़ी</strong></p>
<p>छत से पानी टपकने की समस्या से अस्पताल प्रशासन को भी अवगत कराया हुआ है। लेकिन अभी तक कोई समाधान नहीं हो सका है। लोग ऐसे ही गीले में बैठने को मजबूर हैं, खाली कचरे की बाल्टी और प्लेट लगाकर पानी को रोका जा रहा है।<br /><strong>- सोनू मीणा (बदला हुआ नाम), नर्सिंग कर्मचारी</strong></p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />छतों से पानी के टपकने की समस्या की जानकारी है, जिसकी मरम्मत के लिए पीडब्लूडी को पत्र लिखा हुआ है। मरम्मत नहीं होने तक अभी वैकल्पिक व्यवस्था की हुई। जल्दी लीकेज को दूर किया जाएगा।<br /><strong>- आर पी मीणा, अधीक्षक, मेडिकल कॉलेज अस्पताल, कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 22 Jul 2024 16:42:57 +0530</pubDate>
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                <title>अस्पताल की मरीजों वाली एकमात्र लिफ्ट भी खराब </title>
                                    <description><![CDATA[यही लिफ्ट इससे पहले भी खराब हो चुकी है, उस समय भी ठीक होने में दो से तीन दिन का समय लग गया था। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/the-only-lift-for-patients-in-the-hospital-is-also-out-of-order/article-84380"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-07/aspatal-ki-marizo-wali-ekmatra-lift-bhi-khrab...kota-news-11-07-2024.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। कोटा मेडिकल कॉलेज अस्पताल में बुधवार को एकमात्र चालू लिफ्ट खराब हो गई। जिसके चलते अस्पताल में आने वाले मरीजों को दिनभर रैंप का इस्तेमाल करने पर मजबूर रहे। लिफ्ट सुबह ओपीडी के समय ही खराब हो गई थी। जिसके बाद से ही भर्ती मरीजों को ऊपर से नीचे तक आने में रैंप का रास्ता लेना पड़ा। वहीं अस्पताल में मरीजों के लिए केवल एक ही लिफ्ट संचालित हो रही है। ऐसे में परेशानी और ज्यादा बढ़ जाती है। </p>
<p><strong>पहले भी हो चुकी लिफ्ट खराब</strong><br />यही लिफ्ट इससे पहले भी खराब हो चुकी है, उस समय भी ठीक होने में दो से तीन दिन का समय लग गया था। वहीं अस्पताल में केवल यही लिफ्ट संचालन करने की स्थिति में है, जिससे इस पर भार अधिक हो जाता है। ओपीडी के साथ ही आपातकालीन और भर्ती मरीज तीनों ही स्थिति में इसी लिफ्ट का उपयोग होता है। बुधवार को भी लिफ्ट बंद हो जाने से सभी मरीज लिफ्ट की जगह रैंप और सीढ़ियों पर निर्भर रहे। पहले भी खराब होने की स्थिति में मरीज कई दिनों तक परेशानी उठा चुके हैं। चार में से एक ही लिफ्ट संचालित मेडिकल कॉलेज अस्पताल में चार कुल लिफ्ट मौजूद हैं। जिसमें से एक गेट नंबर 1 पर, एक रेडयोडायग्नोसिस विभाग के पास, एक ब्लड बैंक के पास और एक लिफ्ट गेट नंबर 2 के पास मौजूद है। लेकिन चारों लिफ्ट में से केवल ब्लड बैंक के पास मौजूद लिफ्ट ही मरीजों के लिए संचालित है। अन्य तीनों लिफ्ट में से दो लिफ्ट सालों से खराब पड़ी हैं। वहीं गेट नंबर 1 वाली लिफ्ट केवल डॉक्टर और स्टाफ के लिए संचालित है। ऐसे में भर्ती मरीजों को ऊपर नीचे आने जाने में काफी दिक्कत का सामना करना होता है।</p>
<p><strong>लोगों का कहना है</strong><br />अस्पताल में एक ही लिफ्ट चालू अवस्था में है, जिस पर भी दिनभर भीड़ रहती है। जबकि अस्पताल में चार लिफ्ट मौजूद हैं फिर भी लोगों को बेवजह परेशानी उठानी पड़ती है।<br /><strong>- सुभाष राठी, सुभाष नगर</strong></p>
<p>मेरा भाई अस्पताल के मेडिसिन वार्ड में भर्ती है, दिन में उसकी जांच करवानी थी तो नीचे लाना पड़ा। लिफ्ट खराब होने के कारण रैंप से गए जिससे समय भी लगा और उसे भी परेशानी हुई। दुसरी लिफ्ट चालू रहती तो परेशान नहीं आती।<br /><strong>- इंद्र कुमार, रायुपरा</strong></p>
<p>अस्पताल की चारों में से तीन लिफ्ट तो चालू अवस्था में रहनी चाहिए है। क्योंकि गेट नंबर 2 के बाहर वाल लिफ्ट भी सालों से खराब पड़ी है। जिससे गायनिक, पोस्ट गायनिक और अस्थि रोग वार्ड जुड़े हैं। इनके मरीजों को चक्कर लगाकर दुसरी ओर जाना होता है।<br /><strong>- कौशल राज, केबल नगर</strong></p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />कुछ तकनीकी समस्या के कारण लिफ्ट खराब हो गई है। जिसके ठीक कराने के लिए मेंटिनेंस टीम बुला ली है। आज कल में लिफ्ट ठीक हो जाएगी। अन्य लिफ्टों को ठीक कराने के लिए पीडब्लूडी और चिकित्सा विभाग को पत्र लिखा हुआ है।<br /><strong>- डॉ. आर पी मीणा, अधीक्षक, मेडिकल कॉलेज अस्पताल</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 11 Jul 2024 17:23:13 +0530</pubDate>
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                <title>रेडियोलॉजी के विभाग में टपक रहा पानी</title>
                                    <description><![CDATA[अस्पताल में इससे पहले भी पानी के पाइप के लीकेज होने और छत से पानी के टपकने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/water-dripping-in-the-radiology-department/article-84058"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-07/131.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। मेडिकल कॉलेज अस्पताल में रेडियोलॉजी विभाग और श्वास रोग वार्ड के पास छत से पानी टपक रहा है। जिसके चलते ओपीडी में जांच कराने वाले और वार्ड में भर्ती मरीजों के परिजनों को परेशानी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। रेडियोलॉजी विभाग के एक्स रे मशीन के पंजीकरण केंद्र, एमआरआई जांच के पीछे गेट के पास और श्वास रोड वार्ड के पास छत से पानी टपक रहा है। जो नीचे फर्श पर फैलकर लोगों के लिए मुसीबत खड़ी कर रहा है। </p>
<p><strong>कई महीनों से टपक रही है छत</strong><br />रेडियोलॉजी विभाग के बाहर की छत कई महीनों से टपक रही है। जिससे बचाव के लिए कोई उपाय मौजूद नहीं है। केवल जहां से छत टपकती है उस स्थान पर कचरे की बाल्टी रखी हुई है। जबकि शनिवार को तो बाल्टी भरकर उसका पानी फर्श पर फैल रहा था। इतना ही नहीं ये लीकेज उस स्थान के उपर है जहां पंजीकरण और एक्स रे की जांच दोनों कराने के लिए लाइन लगती है। छत से पानी टपकने के कारण मरीज यहां न ता बैठ पाते हैं और न ही खड़े हो पाते हैं। इसी तरह श्वास रोग के वार्ड के बाहर भी अस्पताल के पानी के पाइप में लीकेज है। जहां से पूरे समय पानी टपकता रहता है, ऐसे में भर्ती मरीजों के परिजनों को बैठने में परेशानी का सामना करना पड़ता है।</p>
<p><strong>पहले भी हो चुकी ऐसी परेशानी</strong><br />अस्पताल में इससे पहले भी पानी के पाइप के लीकेज होने और छत से पानी के टपकने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। पहले भी रेडियोलॉजी विभाग, केंद्रीय प्रयोगशाला और अन्य वार्डों में छत के टपकने की शिकायत मिल चुकी है। हालांकि इन्हें समय रहते ठीक भी कर दिया गया। लेकिन बार बार छतों से पानी के टपकने की घटनाएं अस्पताल के मरम्मत कार्य और इसके निर्माण पर सवाल खड़ा करते हैं। क्योंकि अस्पताल में हर बार बारिश के समय छतों से पानी का टपकना या पाइपों का लीकेज होना आम हो गया है। </p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />रेडियोलॉजी विभाग के बाहर छत कई महीनों से लीकेज है, जहां दिन भर पानी टपकने के कारण पूरा फर्श गीला रहता है। ऐसे में वहां न तो खड़े हो पाते हैं और ना ही बैठ पाते हैं। प्रशासन को इसे ठीक करवाना चाहिए।<br /><strong>- मुकेश नागर, रंगबाड़ी</strong></p>
<p>छत से पानी टपकने के कारण नीचे फर्श पर पानी ता होता ही है साथ ही पूरा फर्श फिसलन भरा हो जाता है, जिस पर चलने में भी परेशानी होती है। कई बार लोग यहां फिसलकर गिर चुके हैं, लेकिन व्यवस्था के नाम पर केवल बाल्टी लगाई हुई है।<br /><strong>- प्रतीक जांगिड़, अनंतपुरा </strong></p>
<p>अस्पताल में परिसर में छत से पानी टपकने की जानकारी है, जिसकी मरम्मत के लिए सार्वजनिक निर्माण विभाग को पत्र लिखा हÞुआ है। जिस पर जल्द कारवाई की उम्मीद है। वर्तमान में स्टाफ को वैकल्पिक व्यवस्था करने के लिए निर्देशित किया हुआ है।<br /><strong>- आर पी मीणा, अधीक्षक मेडिकल कॉलेज अस्पताल</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 08 Jul 2024 16:33:53 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>मेडिकल कॉलेज अस्पताल के मेन गेट का काऊ कैचर सालों से खराब</title>
                                    <description><![CDATA[अस्पताल परिसर में घूम रहे आवारा मवेशीयों को रोकने वाला कोई नहीं। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/the-cow-catcher-of-the-main-gate-of-the-medical-college-hospital-is-broken-since-years/article-83626"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-07/2.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। रंगबाड़ी स्थित मेडिकल कॉलेज के मेन गेट पर जानवर पकड़ने के लिए लगाया हुआ काउ कैचर पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया है। साथ ही काउ कैचर पूरी तरह से मिट्टी से भी भर चुका है। ऐसे में जानवरों को पकड़ने के लिए लगाया गया काउ कैचर जानवरों को ही रोकने में असफल हो रहा है। मेडिकल कॉलेज परिसर में आए दिन गाय और अन्य जानवर घुमते हुए मिल जाते हैं। इन जानवरों के परिसर के अंदर खुला घूमने से अस्पताल में आने वाले लोगों को भी इनके हमले का डर रहता है। </p>
<p><strong>लोग हो चुके हमले के शिकार</strong><br />काऊ कैचर टूटा होने के चलते अस्पताल परिसर के अंदर कई बार गाय और अन्य जानवर घुस जाते हैं। जो परिसर में आने वाले मरीजों और उनके परिजनों पर हमला कर देते हैं। तीन दिन पहले भी ओपीडी में दिखाने आई संतोष देवी पर भी गाय ने हमला कर दिया था। किस्मत से उन्हें किसी तरह की चोट नहीं आई। इसी तरह पहले भी कई बार परिसर के भीतर लोगों पर जानवरों के हमले की खबरें आ चुकी हैं। लेकिन काऊ कैचर को अभी तक ठीक नहीं करवाया गया है। इसी तरह बुधवार को भी आवारा मवेशी अस्पताल परिसर में घुम रहे थे जिन्हें रोकने वाला कोई मौजूद नहीं था। </p>
<p><strong>लोगों का कहना है </strong><br />मेडिकल कॉलेज परिसर में काऊ कैचर कई सालों से खराब है, इसके सरियों में मिट्टी भर चुकी है। जिससे जानवर आसानी से जाली को पार कर कॉलेज परिसर में घुस जाते हैं। अस्पताल में दिखाने आने वाले लोगों पर हमला कर देते हैं।<br /><strong>- दिनेश नागर, रंगबाड़ी</strong></p>
<p>अस्पताल के मेन गेट पर काऊ कैचर में मिट्टी भर चुकी है और गेट भी खराब है। आवारा मवेशी और जानवर परिसर में घुस जाते हैं। जिससे लोगों को भी काफी परेशानी होती है, जबकि ये स्थान ही भीड़ भाड़ वाला है। <br /><strong>- मोहम्मद आसिफ, विज्ञान नगर</strong></p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />मेन गेट पर स्थित काऊ कैचर सहित पूरा गेट क्षतिग्रस्त है जिसके निर्माण के लिए सार्वजनिक निर्माण विभाग को पत्र लिखा हुआ है। वहां से कोई जवाब आने पर ही कुछ कह पाएंगे। फिलहाल आवारा जानवरों को रोकने के लिए अस्थाई व्यवस्था की जाएगी।<br /><strong>- आर. पी. मीणा, अधीक्षक, मेडिकल कॉलेज अस्पताल</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 04 Jul 2024 16:49:18 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>तीसरी आंख में धूल झौंक कर चोर ले रहे मौज</title>
                                    <description><![CDATA[अस्पताल के भीतर मरिजों व तीमारदारों के लिए सुरक्षा की कोई ठोस व्यवस्था मौजूद नहीं हैं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/thieves-are-enjoying-by-throwing-dust-in-the-third-eye/article-71366"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-02/transfer-(4)16.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर के मेउिकल कॉलेज अस्पताल में आए दिन चोरी की घटनाएं सामने आती हैं। जहां पर्ची व दवा काउंटर के अलावा वार्डों से भी तीमारदारों के मोबाइल से लेकर पर्स तक चोरी हो रहे हैं। बढ़ती चोरी की घटनाओं को लेकर अस्पताल प्रशासन कितना गंभीर है इसी की नवज्योति ने सोमवार को पड़ताल की जिसमें अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था में कई खामियां मिली। नवज्योति ने पड़ताल में पाया कि अस्पताल के एक दो वार्ड को छोड़कर किसी भी वार्ड में गार्ड या चेकिंग करने वाला स्टॉफ नहीं है। नतीजन वार्डों में कोई भी इंसान अंदर जा सकता है और चोरी के साथ किसी भी वारदात को अंजाम दे सकता है। वहीं गायनिक वार्ड के भीतर सिर्फ महिलाओं का प्रवेश वर्जित है लेकिन वहीं भी पुरुष घुमते हुए नजर आ जाते हैं। ऐसे में अस्पताल के भीतर मरिजों व तीमारदारों के लिए सुरक्षा की कोई ठोस व्यवस्था मौजूद नहीं हैं। </p>
<p><strong>पोस्ट गायनिक को छोड़कर कहीं रोकने वाला नहीं</strong><br />अस्पताल में कई वार्ड बने हुए हैं जिनमें सैकडों मरीज भर्ती रहते हैं। जिससे अस्पताल के भीतर और बाहर मरीजों के परिजनों की आवाजाही बढ़ जाती है। ऐसे में अस्पताल के अंदर वार्डों में भीड़ बढ़ने से सुरक्षा में चूक का खतरा भी बढ़ जाता है। लेकिन अस्पताल के पोस्ट गायनिक वार्ड को छोड़कर अन्य किसी वार्ड को छोड़कर कहीं सुरक्षा कर्मी या जांचने वाला मौजूद नहीं है। इसके अलावा एमआईसीयू, गायनिक, ओर्थो यूनिट बी, मेडिसिन डी, सर्जिकल वार्ड बी और सायकेट्रिक वार्ड सहित कई वार्डों के बाहर ना तो सुरक्षा कर्मी मौजूद है जो आने जाने लोगों की जांच करे।</p>
<p><strong>पहले थी पास व्यवस्था कोविड के बाद वापस नहीं हुई</strong><br />अस्पताल में कोराना से पहले हर वार्ड में मरीजों के तीमारदारों के लिए पास की व्यवस्था मौजूद थी जिसमें एक मरीज पर सिर्फ दो ही पास जारी होते थे। ऐसे में पास की व्यवस्था होने पर किसी अनजान व्यक्ति के अंदर प्रवेश करने की संभावना न के बराबर होती थी लेकिन कोरोना के बाद जब अस्पताल सामान्य रुप से चलने लगा तो अन्य व्यवस्थाएं तो चालू हो गई लेकिन पास व्यवस्था बंद कर दी गई। जिससे कोई आसानी से अंदर जा सकता है। ऐसे में सुरक्षा के कड़े इंतजाम नहीं होने से चोरी की वारदातों में भी इजाफा हुआ है। वहीं अस्पताल प्रशासन का कहना है कि मरीजों के परिजनों के विरोध के चलते पास की व्यवस्था हटाई गई थी। </p>
<p><strong>बाहर लिखा प्रवेश मना, अंदर घूम रहे पुरुष</strong><br />अस्पताल के गर्भवती महिलाओं के लिए बनाए गए वार्ड गायानिक और पोस्ट गायनिक में पुरुषों का प्रवेश बंद है। जिसके लिए प्रशासन ने बाहन नोटिस बोर्ड भी लगाया हुआ है। लेकिन नोटिस बोर्ड के सामने ही पुरुष गायनिक और पोस्ट गायनिक वार्ड में प्रवेश कर रहे हैं। जिनकी रोक टोक करने वाला कोई मौजूद नहीं था।</p>
<p><strong>चोरी की बढ़ती वारदातों से भी नहीं लिया सबक</strong><br />अस्पताल से आए दिन कहीं न कहीं से चोरी की वारदात की घटना सामने आती रहती है। कई बार तो वार्ड के अंदर से भी मोबाइल और पर्स चारी हो चुके हैं। जिसकी जानकारी अस्पताल प्रशासन को भी है लेकिन अस्पताल प्रशासन ने इसके लिए कोई ठोस कदम उठाए हैं। वहीं अस्पताल में सीसीटीवी कैमरा भी कुछ वार्डों के बाहर ही मौजूद हैं। अस्पताल में ओर्थो यूनिट बी, मेडिसिन डी वार्ड के सीसीटीवी कैमरा तक मौजूद नहीं है।</p>
<p><strong>लोगों का कहना है</strong><br />गायनिक वार्ड में पुरुष कई बार अंदर तक आ जाते हैं, महिलाओं का वार्ड होने के बाद भी कोई रोकने वाला नहीं है, वार्ड के बाहर भी हर समय भीड़ रहती है। प्रशासन को सुरक्षा के कड़े इंतजाम करने चाहिए।<br /><strong>- कौशल्या बाई, तीमारदार</strong></p>
<p>कई बार यहां से मोबाइल और पर्स चोरी की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। फिर भी अस्पताल में वार्डों के भीतर सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं हैं।<br /><strong>- चंद्रप्रकाश गुर्जर, तीमारदार</strong></p>
<p>अस्पताल में चोरी की घटना होने पर उचित कारवाई की जाती है, सुरक्षा के लिए सभी सीसीटीवी कैमरा चालू हैं। वार्ड में भी स्टॉफ को अर्लट रहने लिए बोला हुआ है, तीमारदारों के विरोध पर ही पास व्यवस्था बंद की थी, जिसे वापस चालू कराने का प्रयास करेंंगे। <br /><strong>- आरपी मीणा, अधीक्षक, नवीन चिकित्सालय कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 28 Feb 2024 19:26:24 +0530</pubDate>
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                <title>मास्क में आग की नहीं मिली जांच रिपोर्ट</title>
                                    <description><![CDATA[रिपोर्ट आने पर ही आगे की कार्रवाई की जाएगी। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/investigation-report-of-fire-not-found-in-mask/article-52206"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-07/mask-me-aag-ki-nhi-mili-jaanch-repor...kota-news-19-07-2023.jpeg" alt=""></a><br /><p>कोटा। मेटिकल कॉलेज अस्पताल में गत दिनों आॅक्सीजन मास्क में लगी आग से एक मरीज की मौत के मामले में अभी तक भी कमेटी ने जांच रिपोर्ट नहीं दी है। 30 वर्षीय वैभव शर्मा को आंतों में पानी भरने पर उपचार के लिए मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती कराया गया था। जहां गत दिनों उसे डीसी मास्क लगाते समय उसमें अचानक आग लगने से मरीज की मौत हो गई थी। इस मामले में परिजनों ने डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप लगाया था।  इस घटना के बाद मामले की जांच के लिए डॉक्टरों की एक कमेटी गठित की गई थी।  कमेटी को24 घंटे में रिपोर्ट देनी थी। लेकिन उसमें अन्य डॉक्टरों को शामिल करने से कमेटी ने दो दिन का समय चाहा था। वह समय भी रविवार को पूरा हो गया। लेकिन अभी तक भी जांच पूरी नहीं हुई है। </p>
<p>मेडिकल कॉलेज की प्रिंसीपल डॉ. संगीता सक्सेना ने बताया कि अभी तक उनके पास रिपोर्ट नहींÞ आई है। जब तक रिपोर्ट नहीं आ जाती तब तक वे इस मामले में कुछ भी नहीं कह सकती है। रिपोर्ट आने पर ही आगे की कार्रवाई की जाएगी। </p>
<p>गौरतलब है कि मरीज की मौत के बाद पोस्ट मार्टम रिपोर्ट में मरीज की मौत आॅक्सीजन मास्क में आग लगने से पहले ही होना बताया जा रहा है। जबकि मरीज के शरीर पर झुलसने के निशान उसकी मौत के बाद के बताए जा रहे हैं। </p>
<p>वहीं परिजनों ने आरोप लगाया था कि मास्क में आग लगने पर वहां से स्टाफ गायब हो गया था। जबकि हाल ही में वायरल हो रहे वेीडियो में आग लगना तो दिख रहा है। लेकिन वहां मेडिकल व नर्सिंग स्टाफ भी आग बुझाते हुए नजर आ रहा है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 19 Jul 2023 20:59:48 +0530</pubDate>
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