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                <title>saplings - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>नरेगा पौधारोपण विवाद : मौके पर न काम मिला न जिन्दा पौधे, 2.77 लाख व्यय</title>
                                    <description><![CDATA[सरपंच बोली पौधे जानवर खा गए, अधिकारी बोले हमने मस्टररोल का भुगतान किया सुरक्षा का नहीं ।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/mnrega-plantation-dispute--no-work-or-surviving-saplings-found-on-site-despite-%E2%82%B92-77-lakh-expenditure/article-163723"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-08/111200-x-600-px)-(2)61.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। सुल्तानपुर पंचायत समिति क्षेत्र की अमरपुरा (उमरपुरा) ग्राम पंचायत में मनरेगा के तहत हुए वृक्षारोपण कार्य को लेकर विवाद गहरा गया है। लोकपाल द्वारा जारी अवार्ड में पीडब्लयूडी अधिकारियों पर वित्तीय अनियमितता के आरोप लगाते हुए वसूली के आदेश दिए गए थे। इसके जवाब में जयपुर में आयोजित उच्चस्तरीय सुनवाई के दौरान पीडब्ल्यूडी के सहायक अभियंता, और ग्राम पंचायत सरपंच ने पेश होकर अपना-अपना पक्ष रखा। मामले की अगली सुनवाई 1 सितम्बर को होगी। 18 अगस्त को जयपुर में अपीलेट अथॉरिटी के समक्ष ढहऊ अधिकारियों व पंचायत प्रतिनिधियों ने एस्टीमेट, ॠढर साक्ष्य एवं संबंधित दस्तावेज जमा करा दिए हैं। फिलहाल अंतिम निर्णय लंबित है और अगली सुनवाई की तिथि नियत की गई है।</p>
<p><strong>लोकपाल ने जारी किया था वसूली अवार्ड</strong><br />लोकपाल जगदीश शर्मा ने 30 अप्रैल 2026 को सुरेला से खेड़ली घाटा तक वृक्षारोपण कार्य (कार्य कोड: ऊढ/112908987839) का औचक निरीक्षण किया गया था। इस कार्य की स्वीकृत राशि13.87 लाख रुपये में से 2.77 लाख रुपये व्यय होने के बावजूद मौके पर कार्य शून्य मिला और एक भी पौधा जीवित नहीं पाया गया। लोकपाल ने इसे वित्तीय अनियमितता मानते हुए 2 जून 2026 को जारी अवार्ड कर दिया जिसमें ढहऊ दीगोद के अएल्ल मोनू खंगार से राशि वसूली, तथा समय पर जवाब न देने व अनुशासनात्मक कार्रवाई के1,000 रुपये शास्ति का आदेश दिया था।</p>
<p><strong>पौधे जानवर खा गए, केवल लेबर उपलब्ध करवाई,हमें घसीटा जा रहा</strong><br />पुरे मामले पर नवज्योति ने अमरपुरा सरपंच गायत्री देवी से पक्ष जाना तो उन्होनें कहा कि पौधारोपण की मुख्य कार्यदायी एजेंसी पीडब्ल्यूडी थी। पंचायत का काम केवल नियमानुसार श्रमिक उपलब्ध कराना था, जिनका लगभग 2 लाख रुपये का भुगतान पीडब्ल्यूडी द्वारा सीधे किया गया। 3 मस्टरोल चले करीब 45दिनों की हाजरी भरी गई थी। मस्टररोल केवल रिकॉर्ड सुरक्षा हेतु पंचायत में रखी गई थी। सरपंच ने कहा कि पंचायत का वित्तीय लेन-देन या सुरक्षा से कोई सरोकार नहीं था, अतः पीडब्ल्यूडी के मामले में पंचायत को घसीटना अनुचित है। 3 साल बाद आप देखोगे तो क्या मिलेगा वहां पर? ऑन द रोड पर पौधे लगाओगे, जानवर ऐसे ही खा जाते हैं।<br /><strong>आरोप तथ्यहीन, ॠढर साक्ष्य उपलब्ध</strong></p>
<p>पीडब्ल्यूडी अएल्ल मोनू खंगार ने आरोपों को नकारते हुए कहा कि एस्टीमेट के तहत 300 पौधों का रोपण कराया गया था, जिसके ॠढर फोटो व प्रशासनिक दस्तावेज मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि लोकपाल टीम ने बिना पूर्व सूचना निरीक्षण किया था, जिससे भ्रम की स्थिति बनी। ट्री-गार्ड का कोई बजट स्वीकृत नहीं था। विभाग ने 30 दिवस की सीमा में अपीलेट अथॉरिटी के समक्ष अपील दर्ज करा दी थी।</p>
<p>लोक कल्याण व पौधारोपण के लिए सरकार पैसा खर्च करती है। हमारा काम लोकहित के कार्यो में खर्च धन की मोनिटरिंग व कार्यो की समीक्षा करने का है। मैने जो मौके पर देखा उसी आधार पर अवार्ड जारी किया है।<br /><strong>-जगदीश शर्मा लोकपाल जिला परिषद कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 24 Aug 2026 15:16:09 +0530</pubDate>
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                <title>बिलों में फर्जीवाड़ा: जुलाई में पौधे लगाने के एक माह बाद अगस्त में खोदे 5500 गड्ढ़े ? </title>
                                    <description><![CDATA[वन अधिकारियों का कारनामा-न गड्ढ़े न मिट्टी हवा में कर दिया पौधरोपण।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/fraud-in-bills--5500-pits-dug-in-august--a-month-after-planting-saplings-in-july/article-98654"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-12/257rtrer52.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। लखावा प्लांटेशन-8 में भ्रष्टाचार  के नित नए चौंकाने वाले मामले सामने आ रहे हैं। 50 हैक्टेयर के प्लांटेशन में वन मंडल के अधिकारियों ने गड्ढ़े किए बिना ही पौधे लगाने का कारनामा कर दिखाया। अधिकारियों ने जुलाई में एक साथ हजारों पौधे लगाए लेकिन उनके लिए खड्ढ़े एक महीने बाद अगस्त में किए। जब गड्ढ़े ही अगस्त में किए तो जुलाई में पौधे कैसे लग गए। बगैर गड्ढ़ों के पौधे लगाने का फर्जीवाड़ा एपीसीसीएफ के प्लांटेशन जनरल और बिलों के अवलोकन से हुआ।</p>
<p><strong>एपीसीसीएफ ने यूं पकड़ा फर्जीवाड़ा</strong><br />अतिरिक्त प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन सुरक्षा) केसी मीना ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि लखावा-8 प्लांटेशन में बहुत ही गड़बड़झाला है। प्लांटेशन जनरल में यहां वर्ष 2022 में 15 से 25 जुलाई के बीच 8000 पौधे लगाना बताया गया है। जबकि, इसी कार्य के बिल में 5500 खडढ़े ही 16 से 31 अगस्त के बीच खोदा जाना बताया है। जब खड्ढ़े ही अगस्त में खुदे हैं तो जुलाई में पौधे कैसे लग गए। इससे यह प्रतित होता है कि 5500 खडढ़े खुदे बिना ही 8000 पौधे लगा दिए गए।</p>
<p><strong>निरीक्षण पथ बना नहीं, उठ गए 77 हजार</strong><br />16 नवम्बर 2022 तक 2500 रनिंग मीटर लंबा और 3 मीटर चौड़ा निरीक्षण पथ बनाना बताकर 54 हजार 500 रुपए का बिल उठा। इसके बाद 2 अगस्त 2023 को 1 किमी निरीक्षण पथ के संधारण के नाम पर 22 हजार 400 का बिल बनाकर भुगतान उठा लिया। जबकि, मौके पर निरीक्षण पथ मिला ही नहीं। जब निरीक्षण पथ बना ही नहीं तो संधारण किसका कर रहे थे। </p>
<p><strong>न खडढ़े खुदे न थांवले बने, उठ गए 3.45 लाख</strong><br />रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2022 में 16 अगस्त से 31 अक्टूबर की कार्य अवधि के बिलों में अधिकारियों ने 5500 खडढ़े खोदना बताया। प्रति खड्ढ़े के 54 रुपए चार्ज किए। जबकि, हकीकत में 5500 खडढ़े यहां खुदे ही नहीं। क्योंकि, यह चटटानी क्षेत्र है, जहां जेसीबी से भी एक फीट गहरा खड्ढ़ा नहीं खोदा जा सकता। वहां श्रमिकों द्वारा हाथों से खडढ़े खोदना बताकर 3 लाख 2 हजार 60 रुपए का भुगतान उठा लिया गया। इसी तरह यहां किसी भी पौधे के थांवले नहीं बने हुए हैं। जबकि, बिल में 5500 पौधों के जल संरक्षण के लिए प्रति थांवला 7 रुपए की दर से चार्ज किया गया। जिसका 42 हजार 900 रुपए का बिल उठाया गया। जबकि, निरीक्षण के दौरान मौके पर न खड्ढ़े मिले और न ही थांवले। </p>
<p><strong>दीवारों की मरम्मत तो हुई नहीं, उठा लिए 95 हजार का भुगतान</strong><br />एपीसीसीएफ ने रिपोर्ट में बताया कि वर्ष 2024 में 18 से 27 मार्च तक कार्य अवधि के बिल में 115 मीटर लंबी  दीवार की मरम्मत कार्य करना बताया गया, जबकि, 27 मई को निरीक्षण के दौरान मौके पर दीवार मरम्मत कार्य नजर आया। इसके बावजूद 27 मार्च को दीवार मरम्मत के नाम पर 95 हजार 734 रुपए का बिल पास कर भुगतान उठा लिया गया। अत: यह सभी बिल काफी हद तक फर्जी ही प्रतित होते हैं।</p>
<p><strong>कागजों में खुदी 5000 मीटर वी-डिच, मौके पर नदारद </strong><br />बिलों में 5000 रनिंग मीटर वी-डिच खोदना बताया है, जो मौके पर नजर नहीं आई। वहीं, प्लांटेशन जनरल में जानकारी आधी-अधूरी मिली। वर्ष 2022 में 1 अप्रेल से 15 अगस्त कार्य अवधि के बिल में 5000 मीटर वी-डिच पर बीजारोपण करने के 3100 रुपए तथा 16 अगस्त से 31 अक्टूबर के बिल में वी-डिच में पौधों की निराई गुडाई के लिए 11,900 रुपए का भुगतान उठाया गया। जबकि, निरीक्षण में वी-डिच नजर आई। </p>
<p><strong>10.78 लाख से किसका किया संधारण </strong><br />जांच रिपोर्ट के अनुसार, लखावा प्लांटेशन-8 के प्रथम वर्ष 2022-23 में पौधे लगाने व संधारण के लिए सरकार से 12.76 लाख रुपए का बजट आवंटित हुआ था। जिसमें से 10.78 लाख रुपए खर्च किए गए। जबकि मौके पर पौधे न के बराबर मिले। ऐसे में उक्त अवधि में जब पौधे ही नहीं थे तो किनके संधारण पर लाखों रुपयों के बिल बनाकर भुगतान उठाया गया। वहीं, किसकी सुरक्षा निगरानी की जा रही थी। इस तरह गत 24 मई को दैनिक नवज्योति में छपी खबर के तथ्य बिलकुल सही है। </p>
<p><strong>क्या कहते हैं वाइल्ड लाइफर</strong><br /><strong>डीएफओ के इशारे पर रेंजरों ने बनाए फर्जी बिल</strong><br />पौधों के संधारण के नाम पर डीएफओ के इशारे पर लाडपुरा रेंजरों ने फर्जी बिल बनाकर भुगतान उठाया और सरकारी धन का गबन किया। 1 नवम्बर 2022 से जून 2024 तक लगातार बिल उठाते रहे, जबकि मौके पर काम हुए ही नहीं। नतीजन, 30% सरवाइवल रेट के साथ प्लांटेशन फेल हो गया। मेटिगेटिव मैजर्स में नेशनल हाइवे आॅथोरिटी आॅफ इंडिया ने हाइवे के सहारे हरितिमा पट्टी विकसित करने के लिए वन विभाग को लाखों रुपए कैम्पा के जरिए वन विभाग को दिया था, जिसमें इन अधिकारियों ने गबन कर लिया। तत्कालीन व वर्तमान डीएफओ एवं रेंजरों ने मिलीभगत से जमकर सरकारी धन का दुरुपयोग कर भ्रष्टाचार किया। ऐसे अधिकारियों व फिल्ड स्टाफ के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए।<br /><strong>- तपेश्वर सिंह भाटी, एडवोकेट एवं पर्यावरणविद् </strong></p>
<p><strong>रिपोर्ट सौंपने के 5 माह बाद भी कार्रवाई नहीं</strong><br />अतिरिक्त प्रधान मुख्य वन संरक्षक केसी मीना ने गत 27 मई को मामले की जांच शुरू की थी, जो सवा महीने चली। गत 10 जुलाई को उन्होंने रिपोर्ट प्रधान मुख्य वनसंरक्षक (हॉफ)को सौंप दी थी। इसके बावजूद फर्जी बिल बनाकर भुगतान उठाने वाले फिल्ड अधिकारियों व कर्मचारियां के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई। जिससे न केवल वन अपराध को बढ़ावा मिल रहा बल्कि भ्रष्टाचार करने वाले अधिकारियों व कर्मचारियों में उच्चाधिकारियों का भय खत्म हो रहा है। साथ ही जवाबदारी व जिम्मेदारी खत्म हो रही है।  <br /><strong>- बाबूलाल जाजू, प्रदेशाध्यक्ष, पीपुल्स फॉर एनिमल </strong></p>
<p><strong>कड़ा संदेश देने की जरूरत</strong><br />जिन पर पर्यावरण संरक्षण,वन  रक्षा की जिम्मेदारी है, वहीं भक्षक बन भ्रष्टाचार में लिप्त हो गए हैं। जांच में जब फर्जीवाड़े का खुलासा हो गया तो सरकार सख्त कार्रवाई कर कड़ा संदेश दें। <br /><strong>- रवि कुमार, बायोलॉजिस्ट</strong></p>
<p><strong>डीएफओ ने नहीं दिया जवाब </strong><br />मामले की जांच रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को रिपोर्ट भेज चुके हैं, जिसमें जांच के सभी प्वाइंट कवर किए हैं।<br /><strong>- रामकरण खैरवा, संभागीय मुख्य वन संरक्षक एवं क्षेत्र निदेशक, वन विभाग </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 25 Dec 2024 17:05:53 +0530</pubDate>
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                <title>निगम को मिला लाखों पौधे लगाने का लक्ष्य, जगह का टोटा</title>
                                    <description><![CDATA[दोनों नगर निगमों की ओर से अभी तक मात्र 15 से 20 हजार ही पौधे लगाए गए हैं।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/corporation-got-the-target-of-planting-lakhs-of-saplings--lack-of-space/article-85511"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-07/nigam-ko-mila-lakho-podhe-lgane-kla-lkshya,-jgh-ka-tota...kota-news-22-07-2024.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। बरसात के सीजन में शहर को हरा भरा बनाने के लिए राज्य सरकार द्वारा पौधारोपण अभियान चलाया जा रहा है। जिसमें सभी सरकारी विभागों को पौधे लगाने का लक्ष्य दिया गया है। नगर निगम को भी लाखों पौधे लगाने का लक्ष्य तो दे दिया लेकिन उनके पास पौधे लगाने की जगह ही नहीं है। ऐसे में अब निगम वन विभाग की जमीन पर पौधे लगाएगा। शहर में हर साल बरसात के सीजन में पौधारोपण अभियान चलाया जाता है। जिसके तहत सभी सरकारी विभाग, स्वयंसेवी संस्थाएं व सामाजिक संगठन मिलकर लाखों पौधे लगाते हैं। उसी तरह इस बार भी शहर में लाखों पौधे लगाने का लक्ष्य रखा गया है। </p>
<p><strong>इंदिरा गांधी शहरी रोजगार योजना के श्रमिक लगाएंगे पौधे</strong><br />नगर निगम द्वारा जहां नर्सरी के माध्यम से हजारों पौधे नि:शुल्क वितरित किए जाएंगे। वहीं निगम को अपने स्तर पर खुद भी पौधे लगाने हैं। ऐसे में निगम पौधे लगाने का अधिकतर काम इंदिरा गांधी शहरी रोजगार योजना के श्रमिकों से कराया जाएगा। जिससे उन्हें रोजगार भी मिल जाएगा और निगम का काम भी आसान हो जाएगा। वैसे निगम के उद्यान व अन्य अनुभाग भी पौधे लगाएंगे। </p>
<p><strong>नगर निगम को दिया 4.40 लाख पौधों का लक्ष्य</strong><br />शहर में नगर निगम उत्तर व दक्षिण को भी पौधे लगाने का लक्ष्य दिया है। जिसमें से उत्तर व दक्षिण को कुल 4.40 लाख पौधे लगाने है। निगम ने अपने स्तर पर इसकी तैयारी व पौधे लगाना भी शुरू कर दिया है। दोनों नगर निगमों की ओर से अभी तक मात्र 15 से 20 हजार ही पौधे लगाए गए हैं।</p>
<p><strong>निगम के पास जगह ही नहीं</strong><br />हालत यह है कि नगर निगम को इतने अधिक पौधे लगाने का लक्ष्य तो दे दिया लेकिन इनके  पास कोई ऐसी जगह ही नहीं हैं जहां इतने अधिक पौधे लगाए जा सकेें। ऐसे में अब विशेष रूप से नगर निगम कोटा उत्तर वन विभाग की जमीन पर पौधे लगाएगा। जिनमें देवली अरब रोड स्थित स्मृति वन, अभेड़ा स्थित बायोलोजिकल पार्क व  नांता स्थित बोटनीकल पार्क में पौधे लगाए जाएंगे। </p>
<p>कोटा उत्तर निगम को 2.20 लाख पौधे लगान का लक्ष्य दिया गया है। लेकिन निगम के पास इतने पौधे लगाने की जगह ही नहीं है। ऐसे में सरकार के आदेश के तहत वन विभाग से जमीन लेकर वहां पौधे लगाए जा सकते हैं। निगम की ओर से देवली अरब रोड, बायो लोजिकल पार्क व बोटनीकल पार्क में पौधे लगाए जाएंगे। शहरी रोजगार गारंटी योजना के श्रमिकों से पौधे लगवाने के लिए गड्ढ़े खुदवाए जा रहे हैं। अभी तक 3 से 4 हजार पौधे लगाए गए हैं। सघन वृक्षारोपण के तहत कुछ ही दिन में अधिक से अधिक पौधे लगाए जाएंगे। <br /><strong>- प्रकाश चंद शर्मा, एक्सईएन, नगर निगम कोटा उत्तर </strong></p>
<p>कोटा दक्षिण निगम को 2.20 लाख पौधे लगाने का लक्ष्य है।  पौधे लेने के लिए वन विभाग को राशि भी जमा करवाई जा चुकी है। अब तक करीब 15 हजार पौधे लगाए जा चुके हैं।  आने वाले समय में पौधा रोपण में तेजी लाई जाएगी। <br /><strong>- ए.क्यू कुरैशी, एक्सईएन, नगर निगम कोटा दक्षिण</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 22 Jul 2024 16:56:31 +0530</pubDate>
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                <title>पौधारोपण अभियान: वन विभाग ने आखिर कहां लगा दिए पांच लाख से ज्यादा पौधे</title>
                                    <description><![CDATA[ कई विभागों ने अभी तक शुरू नहीं किया पौधारोपण। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/plantation-campaign--where-did-the-forest-department-plant-more-than-five-lakh-saplings/article-85092"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-07/46.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। प्रदेश सरकार की ओर से चलाए जा रहे सघन पौधारोपण महाअभियान की रफ्तार धीमी चल रही है। एक ओर कई विभाग अपने लक्ष्य से बहुत पीछे चल रहे हैं वहीं दूसरी ओर कुछ विभाग ऐसे हैं जिन्होंने अभी तक पौधारोपण की शुरूआत भी नहीं की। सरकारी विभागों द्वारा पौधारोपण को लेकर गंभीरता की कमी और शिथिलता से अभियान पिछड़ रहा है। वहीं कोटा जिले में पौधे लगाने के बाद उनकी देखभाल के लिए कोई पुख्ता इंतजाम भी नहीं किए गए हैं। ऐसे में सरकार की ओर से विभागों को दिए गए बड़े बड़े लक्ष्यों को कैसे पूरा किया जाएगा या हर बार की तरह इस बार कागजों में ही अभियान को खत्म कर दिया जाएगा। कुछ विभागों ने अभी तक शुरू नहीं किया पौधारोपण: प्रदेश भर में पौधारोपण अभियान 1 जुलाई से शुरू हो गया है। लेकिन कुछ विभाग ऐसे हैं जिन्होंने अभी तक एक भी पौधारोपण नहीं किया है। पौधारोपण के लिए जिले में जिला परिषद विभाग को नोडल विभाग बनाया था। जिसके आंकड़ों अनुसार कोटा में सार्वजनिक निर्माण विभाग, सिंचित क्षेत्र विकास विभाग (सीएडी), महिला एवं बाल विकास विभाग और नगर निकाय ने अभी तक पौधारोपण की शुरूआत नहीं की है। इन सभी विभागों को मिलाकर कुल 60 हजार से ज्यादा पौधारोपण का लक्ष्य है। वहीं कुछ विभागों के पौधारोपण की स्थिति बहुत धीमी है।</p>
<p>ये है पौधारोपण की स्थिति<br /><strong>विभाग                           लक्ष्य              अभी तक लगाए गए</strong><br />चिकित्सा विभाग             17875           5300<br />खान व भू विज्ञान             15000          4050<br />राजीविका                       50000           37470<br />जल ग्रहण भू संरक्षण        20000           1250<br />पीडब्लूडी                         20000           0<br />उद्यानिकी                        10000           3300<br />सीएडी                            2825            0<br />वन विभाग                     655300        500000<br />जल संसाधन                  2030            150<br />महिला बाल विकास         2490            0<br />कृषि विभाग                   10000          4000<br />शिक्षा विभाग                 757162         115312<br />नगरीय निकाय              32000           0</p>
<p><strong>वन विभाग ने लगाए 5 लाख से ज्यादा पौधे</strong><br />इस पौधारोपण अभियान के दौरान अब तक सबसे ज्यादा पौधे वन विभाग की ओर से लगाए गए हैं। विभाग अब तक 5 लाख से ज्यादा पौधारोपण कर चुका है। लेकिन इस पौधारोपण में भी आंकड़ों का खेल नजर आता है, क्योंकि वन विभाग की ओर से लगाए गए 5 लाख पौधे कहीं नजर नहीं आते। साथ ही इतनी संख्या में पौधे लगाने के लिए इतने गड्ढे करने की आवश्यकता है, जो बिना मैनपावर के संभव नहीं। ऐसे में वन विभाग की ओर से जारी किए गए आंकडों की माने तो इन पौधों को ना ठीक से लगाया गया है ना इनकी सुरक्षा के लिए कोई पुख्ता व्यवस्था की गई है। सवाल है कि आखिर कहां लगा दिए पांच लाख पौधे।</p>
<p><strong>पौधारोपण की मॉनिटरिंग के लिए बनाई है जिओ टेगिंग</strong><br />राज्सथान सरकार की ओर से फर्जी आंकड़ों और पौधारोपण से बचने के लिए जिओ टैगिंग की व्यवस्था की गई है। जिसके तहत हर पौधे की जानकारी जिओ टैगिंग के साथ सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की ओर से बनाए मुख्यमंत्री वृक्षारोपण महाभियान पोर्टल पर डालनी होती है। वहीं इस व्यवस्था में एक कोर्डिनेशन पर एक ही पौधा लगाया जा सकता है। उसी कोर्डिनेट पर दूसरा पौधा लगाने पर पोर्टल जानकारी नहीं लेगा।</p>
<p><strong>उत्तर निगम और केडीए में लक्ष्य और स्थान तय नहीं</strong><br />कोटा जिला परिषद के तहत केवल ग्रामीण क्षेत्र और सरकारी विभागों को जिम्मा है। नगर निगम और कोटा विकास प्राधिकरण अपने स्तर पर पौधारोपण का कार्य करना है। इस अभियान में कोटा विकास प्राधिकरण और नगर निगम उत्तर की ओर से अभी तक कोई लक्ष्य नहीं रखा गया है। हालांकि दक्षिण नगर निगम ने अपनी ओर से करीब 2.5 लाख पौधे लगाने का लक्ष्य रखा है। जिसमें से भी अभी तक केवल 15 हजार पौधे ही लग पाए हैं। इस मसले पर अधिकारियों से बात करने की कोशिश की गई लेकिन कोई जवाब नहीं मिल पाया।</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />पौधारोपण के लिए सभी विभागों को लक्ष्य निर्धारित हैं, किसी विभाग को समस्या होती है तो समाधान करते हैं। कुछ विभागों के आंकड़ें प्राप्त नहीं हुए हैं। अब उन विभागों ने पौधारोपण शुरू किया है या नहीं इसकी जनकारी नहीं है।<br /><strong>- अशोक त्यागी, मुख्य कार्यकारी अधिकारी, जिला परिषद कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 18 Jul 2024 15:41:45 +0530</pubDate>
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                <title>पौधारोपण के नाम कागज हो रहे हरे,जमीन अब भी सूखी</title>
                                    <description><![CDATA[कोटा में इस साल वन क्षेत्र के बाहर करीब 13 लाख और वन क्षेत्र में 6 लाख 2 हजार पौधे लगाए जाने का लक्ष्य है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/the-paper-is-getting-green-in-the-name-of-plantation--the-land-is-still-dry/article-52362"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-07/podharopan-k-naam-kagaz-ho-rhe-hare,-zameen-ab-bhi-sukhi...kota-news-21-07-2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। कोटा शहर में हर साल मानसून के सीजन में लाखों पौधे लगाए जा रहे हैं। इस साल भी करीब 20 लाख से अधिक पौधे लगाने का लक्ष्य है। उसके बाद भी शहर में उतनी हरियाली नहीं है जितनी होनी चाहिए। आखिर यह पौधे जाते किधर हैं। पिछले वर्ष  ही निगम के माध्यम से 13.50 लाख पौधे घर घर वितरित कराए गए थे।  इसके अलावा वन विभाग व अन्य संस्थाओं ने भी भारी मात्रा में पौधारोपण किया था। वर्ष 2021 में भी लगभग दस लाख के पौधे लगाए गए थे। तीन वर्ष का आकलन करें तो पचास लाख पौधे लोग लगा चुके हैं। फिर भी हरियाली जमीन पर कम और जेबों में ज्यादा नजर आ रही है।  </p>
<p>बरसात का सीजन शुरू होते ही हर तरफ पौधारोपण अभियान शुरू हो जाता है। नगर निगम हो या नगर विकास न्यास। वन विभाग हो या अन्य सरकारी विभाग। स्वयंसेवी संस्थाओं से लेकर सामाजिक संगठन तक पौधे लगाने में जुट जाते हैं। हर संगठन की ओर से पौधे लगाने का दावा किया जाता है। लेकिन वास्तव में अगर देखा जाए तो कुछ समय बाद उनमें से गिनती के ही पौधे नजर आते हैं। कई बार तो ऐसा देखा गया है कि जहां एक ही जगह पर बार-बार पौधे लगाए जा रहे हैं। उसके बाद भी वहां पौधे नजर नहीं आ रहे। इसका उदाहरण है नगर निगम का पुराना पशु मेला स्थल और नगर निगम कार्यालय के सामने डिवाइडर रोड। जहां निगम की ओर से पौधे लगाने के बाद उनकी सुरक्षा के लिए ट्री गार्ड भी लगाए गए थे। लेकिन वर्तमान में वहां एक भी पौधे नहीं हैं। सभी पौधे सूख चुके हैं या नष्ट हो चुके हैं। </p>
<p><strong>पुराने कोटा में हरियाली, नए में नहीं</strong><br />कोटा  में पुराने शहर के नयापुरा से स्टेशन तक चारों तरफ हरियाली छायी हुई है। सड़क किनारे भी बड़े-बड़े पेड़ देखे जा सकते हैं। जबकि नए कोटा के दादाबाड़ी से लेकर अन्य इलाकों तक में पौधे लगाने के बाद भी पुराने व बड़े पेड़ नजर नहीं आ रहे हैं और न ही हरियाली दिख रही है। </p>
<p><strong>वन विभाग बांटेगा पौधे</strong><br />शहर में पौधारोपण के लिए वन विभाग द्वारा पौधों का वितरण किया जाता है। इस साल भी विभाग की नर्सरी में तैयार पौधे सरकारी विभागों, स्वयंसवी संस्थाओं व आमजन को दिए जाएंगे। जानकारी के अनुसार मुख्यमंत्री बजट घोषणा के तहत कोटा में इस साल वन क्षेत्र के बाहर करीब 13 लाख और वन क्षेत्र में 6 लाख 2 हजार पौधे लगाए जाने का लक्ष्य है। विभाग द्वारा उनकी शहर में चार नर्सरी समेत जिले की कुल 11 नर्सरियों में तैयार लाखों पौधे जिनमें छाया दार से लेकर फलदार व औषधीय पौधे शामिल हैं लोगों को लगाने के लिए दिए जाएंगे। </p>
<p><strong>निगम भी बांटेगा पौधे</strong><br />निगम द्वारा इस बार भी हजारों पौधे नि:शुल्क बांटे जाएंगे। नगर निगम कोटा उत्तर व दक्षिण में नर्सरी से सभी तरह के पौधे बांटे जा रहे हैं। इसके अलावा नगर निगम कोटा दक्षिण में हर वार्ड में पार्कों से पौधे आमजन को बांटे जाएंगे। </p>
<p><strong>पौधे लगाएं तो देखभाल भी हो</strong><br />पर्यावरण प्रेमी श्याम नाहर ने बताया कि पौधे लगाने के बाद उनकी देखभाल भी उसी तरह होनी चाहिए। एक तो पौधे लगाने का सही तरीका हो और दूसरे कुछ समय तक उनकी बच्चे की तरफ देखभाल करने पर ही वे पनपते हैं। लोग पौधे लगा तो रहे हैं लेकिन उनकी देखभाल नहीं करने से अधिकतर पौधे सूखकर नष्ट हो रहे हैं। जिससे लाखों पौधे लगाने के बाद भी हरियाली नहीं दिख रही है। </p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />नगर निगम हर साल पौधों का नि:शुल्क वितरण करता है। इस बार भी प्रदूषण नियंत्रण मंडल से मिले बजट से पौधे लगाने व वितरण का कार्य किया जाएगा। नर्सरी के अलावा कोटा दक्षिण के हर पार्क में पौधे बांटने की व्यवस्था की जाएगी। साथ ही पौधों की सुरक्षा के लिए इस बार ट्रीगार्ड भी अधिक बनवाए जा रहे हैं। पौधे लगाने के बाद इस बार  उनकी देखभाल की जिम्मेदारी भी दी जाएगी। <br /><strong>- ए.क्यू कुरैशी, उद्यान प्रभारी नगर निगम कोटा दक्षिण</strong></p>
<p>विभाग द्वारा पिछले साल एक लाख पौधे लगाए थे। इस बार इनकी संख्या बढ़ी है। मुख्यमंत्री बजट घोषणा के तहत वन क्षेत्र में 6 लाख 2 हजार के अलावा 13 लाख पौधे लगाने का लक्ष्य रखा है। जिसमें सरकारी विभागों, स्वयंसेवी संस्थाओं व आमजन के लिए अलग-अलग लक्ष्य तय किए हैं। अब तक वन क्षेत्र में 5 लाख और वन क्षेत्र के बाहर 3 लाख पौधे लगाए जा चुके हैं। वन क्षेत्र के बाहर लगाए पौधों की मॉनिटरिंग नहीं होने से उनकी सर्वाइवर दर बता पाना मुश्किल है। जबकि वन क्षेत्र में बिना पानी की सुविधा के लिए 5 साल तक करीब 40 फीसदी पौधे सर्वाइव करना माना जाता है। इसके लिए विभाग के अधिकारी व कर्मचारी की जिम्मेदारी तय होती है। पौधे नहीं चलने पर संबंधित के खिलाफ कार्रवाई करने व पौधारोपण का खर्चा वसूलने तक का प्रावधान है। इस मामले में कई कर्मचारियों के खिलाफ जांच चल रही है।<br /><strong>- जयराम पांडे, डीएफओवन मंडल </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 21 Jul 2023 15:45:11 +0530</pubDate>
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