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                <title>Wang Yi - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>Wang Yi RSS Feed</description>
                
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                <title>हम दुश्मन नहीं, दोस्त हैं, मिडिल ईस्ट तनाव के बीच चीन ने भारत को बताया दोस्त</title>
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                        <![CDATA[मिडिल ईस्ट तनाव के बीच चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने भारत की ओर दोस्ती का हाथ बढ़ाते हुए उसे 'अवसर' बताया है। उन्होंने ब्रिक्स (BRICS) अध्यक्षता में आपसी सहयोग और सीमा पर शांति की वकालत की। वांग यी के अनुसार, एशिया के पुनरुत्थान के लिए भारत-चीन का साझा विकास अनिवार्य है, जिससे दोनों देशों के रिश्ते अब सामान्य हो रहे हैं।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/we-are-not-enemies-we-are-friends-amidst-middle-east/article-145764"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/china1.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के कारण वैश्विक समीकरणों में आ रहे बदलाव के बीच चीन ने भारत की ओर दोस्ती का हाथ बढ़ाया है। दरअसल, बीजिंग में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने भारत और चीन के बीच सुधरते संबंधों पर बड़ा बयान दिया है। चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने कहा कि भारत-चीन को एक-दूसरे को प्रतिद्वंद्वी के बजाय साझेदार और खतरे के बजाय अवसर के रूप में देखना चाहिए। चीन और भारत महत्वपूर्ण पड़ोसी हैं और दोनों ग्लोबल साउथ के सदस्य होने के नाते गहरे सांस्कृतिक संबंध तथा व्यापक साझा हित रखते हैं।</p>
<p><strong>भारत महत्वपूर्ण पड़ोसी...</strong></p>
<p>शिन्हुआ न्यूज एजेंसी के अनुसार, वांग यी ने राष्ट्रीय और अंतराष्ट्रीय पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए चीन की विदेश नीति और बाहरी संबंधों पर विस्तार से बात की। इसी दौरान जब भारतीय पत्रकार के एक सवाल का जवाब में कहा, चीन और भारत महत्वपूर्ण पड़ोसी हैं और दोनों ही वैश्विक दक्षिण के हिस्से हैं, जिनके बीच गहरे सांस्कृतिक संबंध और व्यापक साझा हित हैं।</p>
<p><strong>भारत चीन संबंधों के सुधार को लेकर वांग यी ने चार प्वाइंट साझा किए</strong></p>
<p>दोनों देशों को एक-दूसरे को प्रतिद्वंद्वी के बजाय साझेदार और खतरे के बजाय अवसर के रूप में देखना चाहिए। वांग यी ने सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनाए रखने के साथ-साथ अच्छे पड़ोसी के धर्म को निभाने पर जोर दिया। वांग यी ने कहा वांग यी ने भारत और चीन को इस साल और अगले साल ब्रिक्स की बारी-बारी से अध्यक्षता करने में एक-दूसरे का समर्थन करना चाहिए। दोनों देशों को एक-दूसरे की ओर कदम बढ़ाते हुए बाधाओं को दूर करना चाहिए, ताकि अंतरराष्ट्रीय मंच पर जिम्मेदारी का प्रदर्शन किया जा सके।</p>
<p><strong>आपसी सहयोग बहुत फायदेमंद</strong></p>
<p>चीन और भारत के बीच आपसी विश्वास और सहयोग साझा विकास के लिए बहुत फायदेमंद है, जबकि विभाजन और टकराव एशिया के पुनरुत्थान में सही नहीं हैं। भारत को दुश्मन नहीं दोस्त बनाना चाहिए। चीनी विदेश मंत्री ने यह स्पष्ट किया कि दोनों देशों के बीच रिश्ते अब सामान्य हो गए हैं। इसलिए अब भारत-चीन आपसी सहयोग को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। पत्रकारों का सवाल देने के दौरान वांग यी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति शी चिनपिंग की तियानजिन में हुई मुलाकात का भी जिक्र किया।</p>]]>
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                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 09 Mar 2026 11:17:19 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Jaipur NM]]>
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                <title>कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान को अपने सदाबहार दोस्त चीन से झटका, नागरिकों के कल्याण पर दें ध्यान</title>
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                        <![CDATA[बीजिंग में आयोजित 7वीं रणनीतिक वार्ता के बाद चीन ने कश्मीर विवाद को 'इतिहास की देन' बताते हुए इसे भारत-पाकिस्तान के बीच द्विपक्षीय समझौतों और शांतिपूर्ण वार्ता के जरिए सुलझाने पर जोर दिया है।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/pakistan-faces-blow-from-its-all-time-friend-china-on-kashmir/article-138662"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/kashmir-case-paksitan.png" alt=""></a><br /><p>बीजिंग। कश्मीर के मुद्दे पर पाकिस्तान को अपने सदाबहार दोस्त चीन से झटका लगा है। चीन ने इस मुद्दे को द्विपक्षीय समझौतों के आधार पर सुलझाने की बात कही है। चीन के विदेश मंत्री वांग यी और पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री इशाक डार के बीच आयोजित 7वीं रणनीतिक वार्ता के समापन पर जारी संयुक्त बयान में कश्मीर का भी जिक्र है। लेकिन पाकिस्तान के पक्ष में चीन ने कोई एकतरफा बात नहीं कही।</p>
<p>जम्मू और कश्मीर का विवाद इतिहास की देन: इस बयान में कहा गया है कि पाकिस्तानी पक्ष ने जम्मू-कश्मीर पर अपनी स्थिति और नवीनतम घटनाक्रमों के बारे में चीनी पक्ष को जानकारी दी। इस पर चीन ने अपना रुख दोहराया कि जम्मू और कश्मीर का विवाद इतिहास की देन है। उसने कहा कि संघर्ष की सियासत छोड़ कर दोनों देशों को जनता की समृद्धि और आर्थिक विकास पर ध्यान देना चाहिए। इसे संयुक्त राष्ट्र चार्टर, संबंधित संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों और द्विपक्षीय समझौतों के अनुसार उचित और शांतिपूर्ण तरीके से हल किया जाना चाहिए। संयुक्त बयान में दोनों पक्षों ने समानता और पारस्परिक लाभ के सिद्धांत के तहत सीमा पार जल संसाधन सहयोग करने की जरूरत बताई। अंतरराष्ट्रीय कानूनी दायित्वों को पूरा करने की जरूरत पर जोर दिया गया है।</p>
<p><strong>सुरक्षा और स्थिरता बनाए रखना जरूरी</strong></p>
<p>अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता को बनाए रखने के महत्व को दोहराया गया है। लेकिन भारत की ओर से सिंधु जल संधि को स्थगित रखने के निर्णय का कोई जिक्र नहीं किया गया है। पहलगाम हमले के भारत ने इस जल संधि को स्थगित कर दिया था। कुल मिलाकर, चीन ने संतुलित रुख अपनाते हुए पाकिस्तान को कश्मीर पर द्विपक्षीय समाधान का संदेश दिया। चीन ने इस मसले पर पाकिस्तान को समर्थन देने से साफ इनकार कर उस का मनोबल तोड़ा है। चीन ने कहा कि भारत पाकिस्तान के सम्बंध ऐतिहासिक है। इसी तरह कश्मीर समस्या भी इतिहास की देन है। इसे ये दोनों देश ही मिल कर सुलझा सकते हैं। इसमें किसी तीसरे पक्ष की दखलंदाजी का कोई मतलब नहीं है। </p>
<p><strong>सैनिक होड़ से आर्थिक प्रगति बाधित</strong></p>
<p>उसने कहा कि भारत और पाकिस्तान दोनों उसके मित्र हैं और वह चाहता है कि ये देश अपनी क्षमता और संसाधन का उपयोग अपनी जनता की आर्थिक उन्नति एवं आधारभूत ढांचे के विकास पर करें। सैनिक होड़ में अंधाधुंध संसाधन झोंकने से कई बार आर्थिक प्रगति बाधित होती है। अत: उन्हें शांतिपूर्ण उपायों से वार्ता के द्वारा कश्मीर समस्या का हल ढूंढ़ना चाहिए और विवाद एवं संघर्ष से दूर हो जाना चाहिए। </p>]]>
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                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 07 Jan 2026 11:23:59 +0530</pubDate>
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                <title>डोभाल ने की वांग यी से मुलाकात</title>
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                        <![CDATA[ राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने चीन की कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीसी) के राजनीतिक ब्यूरो के सदस्य और सीपीसी में विदेश मामलों के आयोग के कार्यालय के निदेशक वांग यी से मुलाकात की ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/doval-met-wang-yi/article-52730"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-07/ajit-doval.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने चीन की कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीसी) के राजनीतिक ब्यूरो के सदस्य और सीपीसी में विदेश मामलों के आयोग के कार्यालय के निदेशक वांग यी से मुलाकात की और भारत चीन सीमा पर सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति बहाल करने के लिए निरंतर प्रयासों के परिणाम लाने पर जोर दिया।</p>
<p>विदेश मंत्रालय ने बताया कि दक्षिण अफ्रीका के जोहान्सबर्ग में हुई इस मुलाकात में डोभाल ने कहा कि कि 2020 से भारत-चीन सीमा के पश्चिमी क्षेत्र में एलएसी पर स्थिति ने रणनीतिक विश्वास और रिश्ते के सार्वजनिक और राजनीतिक आधार को खत्म कर दिया है।</p>
<p>राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार ने स्थिति को पूरी तरह से हल करने और सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति बहाल करने के लिए निरंतर प्रयासों के महत्व पर जोर दिया ताकि द्विपक्षीय संबंधों में सामान्य स्थिति में आने वाली बाधाओं को दूर किया जा सके। दोनों पक्ष इस बात पर सहमत हुए कि भारत-चीन द्विपक्षीय संबंध न केवल दोनों देशों के लिए बल्कि क्षेत्र और दुनिया के लिए भी महत्वपूर्ण हैं।</p>]]>
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                                                            <category>भारत</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/bharat/doval-met-wang-yi/article-52730</link>
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                <pubDate>Tue, 25 Jul 2023 19:59:13 +0530</pubDate>
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