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                <title>हाड़ौती का ‘मिनी गोवा’ बेजार, बारिश की आस में पिकनिक स्पॉट</title>
                                    <description><![CDATA[सूखे कुंड और झरनों से पर्यटन स्थलों पर पसरा सन्नाटा ।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/hadauti%E2%80%99s-%E2%80%98mini-goa%E2%80%99-wears-a-desolate-look--picnic-spot-awaits-rain/article-162534"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-08/111200-x-600-px)-(2)31.png" alt=""></a><br /><p>कोटा ।  हाड़ौती अंचल में इस बार मानसून की रफ्तार धीमी रहने और इंद्रदेव की मेहरबानी न होने से कोटा और आसपास के प्रसिद्ध लोकल पिकनिक स्थल वीरान नजर आ रहे हैं। जिन पर्यटन स्थलों पर अगस्त के इन दिनों में सैलानियों का जमावड़ा रहता था और पैर रखने तक की जगह नहीं मिलती थी, वे स्थल अब पर्यटकों की राह तक रहे हैं । जिन रास्तों और चट्टानों पर कभी सैलानियों की आवाजाही से रौनक बनी रहती थी, वहाँ अब सन्नाटा पसरा है। कर्णेश्वर महादेव के शांत परिसर से लेकर आलनिया के प्रागैतिहासिक शैलचित्रों वाले क्षेत्र तक, मानसून का वह जादुई अहसास गायब है जो हर साल हजारों लोगों को अपनी ओर खींच लाता था। स्थानीय लोगों से लेकर दूर से आने वाले पर्यटकों तक, हर किसी की निगाहें अब केवल आसमान की ओर हैं कि मेघ मेहरबान हों तों ये खूबसूरत ठिकाने फिर से खिल उठें।</p>
<p><strong>बरधा डेम : 'मिनी गोवा' में छाया सन्नाटा</strong><br />सवा सौ साल पुराना बरधा बांध, जिसे 'हाड़ौती का मिनी गोवा' भी कहा जाता है, इस समय पानी की आवक कम होने से खाली पड़ा है। ब्रिटिश गवर्नर रॉबर्टसन द्वारा निर्मित 21 फीट भराव क्षमता वाले इस बांध पर सामान्य दिनों में अब तक पानी की चादर (ओवरफ्लो) चलने लगती थी। कोटा से मात्र 25 किलोमीटर की दुरी पर होने के कारण यहां हर वर्ष यहाँ वीकेंड पर हजारों लोगों का आना रहता है। पिछले साल इन दिनो यहां रोजाना हजारों लोग पहुंच रहे थे जबकि विकेण्ड पर यहां 5 हजार से अधिक पर्यटक जलक्रीड़ा करते नजर आये थे।</p>
<p><strong>16 फीट के उपर मुसलाधार बारिश जरूरी</strong><br />21 फीट भराव क्षमता वाले इस बांध में अभी केवल 13 फीट ही पानी भरा है। स्थानीय निवासीयों ने बताय कि इसे 17 फीट से ज्यादा भरने के लिए मुसलाधार बारिश की जरूरत रहती है। </p>
<p><strong>धार्मिक व प्राकृतिक स्थलों पर भी कम रौनक</strong><br />कर्णेश्वर महादेव: अपनी प्राचीनता, दिव्यता और मानसूनी हरियाली के लिए मशहूर कर्णेश्वर महादेव मंदिर में आध्यात्मिक शांति तो है, लेकिन बारिश के अभाव में यहां बहने वाले प्राकृतिक झरना और हरियाली में वैसी रंगत नजर नहीं आ रही है। यहां के प्राकृतिक बहाव के उपर बनाए गए एनीकट के उपर से बहता पानी लोगो के लिए वाटर फाल का आनन्द देता है। कोटा के समीप व होने के कारण यहां पर इन दिनों खासी भीड़ रहती थी। यहां पास ही बसी बस्ती के लोगों के लिए भी अस्थाई रोजगार का साधन बन जाता है। ऐसे में क्षेत्र के लोग और ठेले के उपर व्यापार करने वाले स्थानीय लोग अब केवल तेज बारिश की उम्मीद लगाए बैठे हैं, ताकि नदियां-बांध लबालब हों और हाड़ौती के ये खूबसूरत मुकाम फिर से गुलजार हो सकें।</p>
<p><strong>चट्टानेश्वर महादेव आलनिया</strong><br />आलनिया बांध के पास पहाड़ों के बीच स्थित यह स्थल अपने 3600 साल पुराने प्रागैतिहासिक शैलचित्रों और मानसूनी झरनों के लिए जाना जाता है। बारिश न होने के कारण यहाँ भी सैलानियों की आवाजाही थम सी गई है। आलनिया डेम में पानी की आवक नही होने से यहां बहने वाला पानी अभी बंद है। ऐसे में पिकनिक स्पॉट पर जलक्रीड़ा का आनंद लेने वाले लोग अच्छे मानसून होने का इंतजार कर रहे है। महावीर नगर निवासी गोविन्द बताते है कि अगस्त के पहले तक तो हर बार दो तीन बार बाहर पिकनीक हो जाती थी इस बार बाहर जाने की तो हिम्मत ही नहीं हो रही।</p>
<p><strong>मौसम की बेरुखी और खाली पड़े पिकनिक स्पॉट</strong><br />आषाढ़ बीतकर सावन का महीना आधा ढल चुका है, लेकिन कोटा और आसपास के इलाकों में बदरा झूमकर नहीं बरसे। आसमान में घुमड़ते काले बादलों को देख चेहरे खिलते तो हैं, लेकिन बिन बरसे गुजर जाने से आस टूट जाती है। मानसून की इस बेरुखी का सीधा असर स्थानीय पर्यटन पर पड़ा है। बरधा बांध की पथरीली चट्टानों से लेकर चट्टानेश्वर के प्राकृतिक झरनों तक—जहाँ पानी की छलांग और कलकल बहती धाराएं देखने को मिलती थीं, वहाँ अब सिर्फ सन्नाटा पसरा हुआ है।</p>
<p><strong>पिछले साल मनाई थी पिकनिक इस बार मायूसी</strong><br />वीकेंड पर दूर-दराज और शहर से आने वाले सैलानी जब पूरे उत्साह के साथ पिकनिक मनाने पहुँचते हैं, तो पानी न मिलने पर उनकी उम्मीदें अधूरी रह जाती हैं। कर्नेश्वर पहुंचे श्रीनाथपुरम-सी निवासी रविन्द्र बताते है कि पिछले साल पुरे परिवार के साथ यहां जमकर पिकनिक मनाई थी आज यहां आया तो मन में मायूसी आई है। साथ आई पुजा ने बताया कि गर्मी के कारण केवल भोलेनाथ के दर्शन करके वापस जा रहे है। जो पानी में उतरकर नहाने और मस्ती करने का मन बनाकर आते हैं, सूखे पड़े कुंड और खाली बांध देखकर मायूस हो जाते हैं। हरियाली और छांव के अभाव में सैलानियों को मानसून के मौसम में भी गर्मी और उमस से दो-चार होना पड़ रहा है।</p>
<p> यहां स्थित प्राचीन कुण्ड़ लगभग खाली ही पड़ा है आस-पास से चलने वाले सारे झरने पूरी तरह सुखे है। सावन के महीने में बाबा कनेश्वर के दर्शन करने वाले भक्तों की अपार भीड़ इस बार नदारद है हांलाकि बाबा के लिए सोमवार को फिर भी भक्त आ रहे है लकिन पहले वाला माहौल नही बन पा रहा।<br /><strong>-ब्रजेश आसोपा,सेवादार समिति कर्णेश्वर महादेव मंदिर</strong></p>
<p> इस बार बरधा बांध में पानी की आवक ज्यादा नहीं होने के कारण यहां पर पर्यटकों का आना न के बराबर है। पिछले साल यहां इन दिनों सैकडों गाडियां प्रतिदिन आया करती थी। यहां का सड़क केवल 15 फीट की हाेने के कारण यातायात व सुरक्षा के लिए तालेडा थाने से अतिरिक्त जाप्ता लगाना पड़ता था। अभी केवल सामान्य गस्त से ही काम हो रहा है। आसपास के ग्रामीणाे को छोटा-मोटा रोजगार मिलने के कारण उनमें भी पर्यटकों के प्रति रूझान रहता है।<br /><strong>-राजेश रायपुरिया प्रधान तालेडा</strong></p>
<p>बरसात की स्थितियों को देखते हुए सभी संभावित स्थनों पर अतिरिक्त जाप्ता लगाया जाता है। डूब क्षेत्रों में सभी थाना क्षेत्रों में हमारी गाडियां रूटीन गस्त कर रही है। हांलाकि अभी तक किसी भी पिकनिक स्थल पर भारी भीड नहीं जुटने के कारण अलग से जाप्ता नहीं लगाया गया है ।<br /><strong>-मनीष शर्मा वृत्ताधिकारी चतुर्थ  कोटा पुलिस</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 10 Aug 2026 16:07:37 +0530</pubDate>
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                <title>ताकि पिकनिक पैनिक न बनें, रील्स से बनाएं दूरी</title>
                                    <description><![CDATA[ वन विभाग की चेतावनी: प्रतिबंधित क्षेत्रों में बिना अनुमति गए तो लगेगा 25 हजार का फटका।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/don-t-let-a-picnic-turn-into-a-panic--steer-clear-of-making--reels/article-159323"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-07/1200-x-600-px)27.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। मानसून की पहली फुहारों के साथ ही कोटा और पूरे हाड़ौती अंचल के प्राकृतिक पर्यटन स्थलों पर पर्यटकों और पिकनिक प्रेमियों की भीड़ उमड़ने लगी है। हालांकि हाडौती में मानसून अभी पुरी तरह से सक्रिय नहीं हुआ है लेकिन लोग वीकेंड पर परिवार और दोस्तों के साथ प्रकृति के बीच समय बिताने और पिकनिक की तैयारियों में जुट गए हैं। इस मस्ती के बीच जरा सी लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है।अक्सर देखा जाता है कि लोग सेल्फी, इंस्टाग्राम रील्स और लाइव वीडियो बनाने के चक्कर में इतने मशगूल हो जाते हैं कि अपनी सुरक्षा और एहतियात पूरी तरह भूल बैठते हैं। रील्स का यह नशा हादसों का सबसे बड़ा कारण बन रहा है।</p>
<p>सुरक्षा के लिहाज से वन विभाग और स्थानीय प्रशासन ने कई खतरनाक और संवेदनशील प्राकृतिक स्थलों को पूरी तरह से प्रतिबंधित (नो-एंट्री ज़ोन) घोषित कर दिया है। वन विभाग ने इस मानसून सीजन में अवैध एंट्री करने वालों के खिलाफ सख्त कदम उठाए हैं। किसी भी प्रतिबंधित वन क्षेत्र में बिना अनुमति अवैध प्रवेश करने पर 25 हजार तक का जुर्माना वसूला जाएगा। शाम 6 बजे के बाद या अंधेरा होने पर यदि कोई इन प्रतिबंधित क्षेत्रों में घूमता हुआ पाया गया, तो उसे गिरफ्तार कर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।</p>
<p><strong>'तीसरी आंख' (कैमरा ट्रैप) से निगरानी</strong><br />वन विभाग ने जंगल के संकरे और गुप्त रास्तों पर कैमरा ट्रैप और गश्ती दल तैनात किए हैं। जैसे ही कोई व्यक्ति अवैध रूप से प्रवेश करता है, उसकी तस्वीर कैमरे में कैद हो जाती है।</p>
<p><strong>पूरी तरह प्रतिबंधित स्थल</strong><br />भंवरकुंज: वन विभाग ने यहाँ पौधारोपण कर इसे पूरी तरह बंद कर दिया है।<br />गेपरनाथ: यहाँ वन विभाग की चौकी है; यह आम दिनों में बंद रहता है और केवल सावन में दर्शनार्थियों के लिए सशर्त खोला जाता है।<br />नाहरसिंह माताजी: रावतभाटा रोड स्थित इस क्षेत्र में बाघों (टाइगर) का मूवमेंट होने और सुरक्षा कारणों से प्रवेश वर्जित है।</p>
<p><strong>इन पिकनिक स्थलों पर लौटेगी रौनक</strong><br /><strong>1. पाड़ाझर वॉटरफॉल (भैंसरोड़गढ़)</strong><br />कोटा से लगभग 65 किमी दूर स्थित भैंसरोड़गढ़ अभयारण्य के जंगलों में स्थित 35 मीटर ऊँचा प्राकृतिक झरना और प्राचीन पाड़ाझर महादेव मंदिर जानेे के लिए भैंसरोड़गढ़ अभयारण्य क्षेत्र होकर जाया जाता है। यह स्थान एडवेंचर और आउटरीच केम्पेन के लिये ज्यादा फैमस है। यहां केवल निजी साधन से ही पहुचां जा सकता है।<br /><strong>सुविधाएं व सावधानी</strong><br />यहाँ कोई दुकानें नहीं हैं, खाना-पानी साथ लाएँ। रास्ता कच्चा व फिसलन भरा है। यहां ज्यादा बरसात के दिनों मे रास्तें में बाईक खराब होने के अलावा छिपने की कोई जगह नहीं होना भी बड़ी परेशानी का कारण हो सकता है।<br />जंगली जानवरों का आवास होने से दिन के समय समूह में ही जाना सुरक्षित है।<br /><strong>2. चट्टानेश्वर महादेव</strong><br />कोटा से लगभग 25 किमी दूर केबलनगर के पास अरावली पहाड़ियों के बीच बहता झरने के पास स्थित है। प्राचीन शिव प्रतिमा और लगभग 3600 वर्ष पुराने प्रागैतिहासिक शैलचित्रों काे देखने के लिये यहां वर्षपर्यन्त लोग आते है। लेकिन बरसात के मौसम में यह स्थल पुरी तरह पिकनिक स्पाॅट बन जाता है।<br /><strong>सुविधाएं व सावधानी</strong><br />एनीकट पर काई जमने से भारी फिसलन रहती है। यहाँ घुटनों तक दलदल व कीचड़ होने से हादसे होते हैं, इसलिए पानी में गहराई तक जाने से बचें।<br /><strong>3. आलनिया डैम</strong><br />कोटा-झालावाड़ रोड़ पर शहर से 25 किमी की दूरी पर शांत जलराशि, शानदार सूर्यास्त (सनसेट) और मानसून में बांध पर चलने वाली चादर प्रकृति प्रेमियाें के साथ साथ परिवार के साथ पिकनिक मनाने वाले लोगों के लिये मुफीद स्थान है।<br /><strong>4. बरधा बांध</strong><br />कोटा से बूंदी मार्ग पर स्थित लगभग 35 किमी की सडक दुरी पर स्थित 'हाड़ौती का मिनी गोवा' के नाम से जाने जाने वाला यह स्थल मानसून में हाडौती के लोगों के लिये किसी बीच से कम नहीं । बांध की 4 फीट चौड़ी दीवार पर चढ़कर लोग वहां से गिरते पानी के बीच खडे होकर फोटाे खिंचवाते है। 22 फीट की ऊंचाई से गिरते पानी के नीचे नहाने का आनन्द लेने की हाेड़ में उमडता लोगों का हुजुम किसी समुद्री किनारें जमा हुई भीड़ का नजारा बन जाता है।<br /><strong>सुविधाएं व सावधानियां</strong><br />यहां आसपास गांव होने से खाने पीने की दुकाने मिल जाती है। दीवार पर फिसलन और कीचड़ के कारण बहने का खतरा रहता है। यहाँ सुरक्षा के लिए एसडीआरएफ की टीम तैनात रहती है।<br /><strong>5. रामेश्वरम् महादेव (बूंदी)</strong><br />शहर से 60 कि. मी. दुर रामेश्वरम् महादेव पहाड़ों की कंदरा में स्थित प्राकृतिक गुफा मंदिर है। जहाँ स्वयंभू शिवलिंग पर निरंतर जलधारा से साक्षात जलाभिषेक होता है।<br /><strong>सुविधाएं व सावधानी</strong><br />धार्मिक आस्था का बड़ा केंद्र। गुफा और सीढ़ियों में नमी व फिसलन से सतर्क रहें।</p>
<p><strong>आपात स्थिति में काम आएगा मोबाइल</strong><br />मानसून में पिकनिक पर जाते समय मोबाइल आपदा के समय मदद बुलाने में बहुत काम आता है, बशर्ते इसका इस्तेमाल रील्स बनाने की जगह सतर्कता के लिए किया जाए। हाड़ौती के अधिकांश पिकनिक स्पॉट्स घने जंगलों या घाटियों में स्थित हैं, जहाँ नेटवर्क गायब हो जाता है। ऐसे में पिकनिक पर निकलते समय अपने साथ इमरजेंसी किट और एहतियात अवश्य रखें। पिछले दिनों देखने में आया है कि लोग ऐसी जगहों पर जहां खड़े रहना तक मुश्किल हो वहां जाकर रील्स बना रहे है। फिसलन वाली जगहों पर या पीछे गहरा पानी, झरना, या बैकग्राउण्ड़ दिखानेे के चक्कर में लोगों ने खतरें को कई गुणा बढ़ा दिया था। रील्स बनाते समय व्यक्ति में एकाग्रता व संतुलन के साथ साथ सुरक्षा के प्रति भारी उपेक्षा ही हादसों का कारण बनती है।<br /><strong>-विष्णु श्रृंगी, गोताखाेर नगर निगम कोटा</strong></p>
<p><strong>आपदा प्रबंधन और रेस्क्यू टीमें मुस्तैद</strong><br />सिविल डिफेंस और एसडीआरएफ (SDRF) की टीमों को मानसून के दौरान भंवरकुंज, गेपरनाथ, अलनिया और बरधा डैम जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में मुस्तैद किया गया है। प्रशासन ने आमजन से अपील की है कि वे केवल अधिकृत व सुरक्षित स्थानों पर ही पर्यटन का आनंद लें और मानसून की मस्ती में अपनी सुरक्षा का ध्यान प्राथमिकता से रखें।<br /><strong>- राकेश व्यास, उपायुक्त, नगर निगम</strong></p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />हमारे द्वारा सभी संभावित खतरें वाले स्थानों काे चिन्हित करके वहां लगातार निगरानी की जाती है। पिकनिक सींजन में सभी एंट्री पर आधुनिक ट्रेकिंग सिस्टम एक्टिव रहता है। आमजन से अपील है कि केवल स्वीकृति प्राप्त स्थानों पर ही जायें व रील्स व आदि के लिये खतरे व पानी से दुरी बनाये रखें।<br /><strong>-मुथू एस, डीसीएफ मुकून्दरा हिल्स एण्ड़ टाईगर रिजर्व</strong></p>
<p>पिकनिक के दौरान बरसात या बाहर के पानी में नहाने से आपके शरीर को इन्फेक्शन हो सकता है। इसलिये घर पर आकर दौबारा से साफ पानी से नहायें ध्यान रहे पानी साफ ही पियें जिससे पानी जनित बिमारी न हो। मेडिकल फर्स्ट एड के अलावा जरूरी दवाईया अवश्य साथ रखें।<br /><strong>- डॉ. चन्द्रप्रकाश कलवार, चिकित्सा प्रभारी (क्रिटिकल केयर) सीएचसी कुन्हाड़ी</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
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                <pubDate>Thu, 09 Jul 2026 14:15:31 +0530</pubDate>
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                <title>सावधान: पिकनिक पर जाएं तो सेल्फी और रोमांच के चक्कर में जान से न करें खिलवाड़</title>
                                    <description><![CDATA[ शहर के चट्टानेश्वर, पाडाझर, भंवरकुंज पर खड़ा है खतरा। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/beware--if-you-go-on-a-picnic--do-not-risk-your-life-in-pursuit-of-selfies-and-adventure/article-83628"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-07/1.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। मानसून के सक्रिय होने से कोटा का मौसम भी सुहाना हो चुका है। ऐसे में वीकेंड या छुट्टी के दौरान शहर से लगे कोटा के चंबल नदी किनारे और प्राकृतिक झरने वाले स्पॉट्स लोगों की पहली पसंद हैं। मौसम का लुत्फ जरूर उठाएं लेकिन सेल्फी और रोमांच के चक्कर में अपनी और अपने परिवार की जान से खिलवाड़ न करें, क्योंकि लगातार हो रही बारिश के कारण कब, कहां से पानी का बहाव तेज हो जाए, ये किसी को नहीं पता। शहर में मानसून सक्रिय होने के साथ ही कई पयर्टन स्थल इन दिन झरने चलने से गुलजार हो गए है। लेकिन प्रशासन की ओर से यहां सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं करने से हर समय हादसे का खतरा बना रहता है। कोटा के समीप में सबसे लोक प्रिय स्थल चटनेश्वनर क्षेत्र में रविवार को ही चार मजदूर पिकनिक मनाने गए जिसमें एक श्रमिक गहरे पानी में जाने से डूब गया। यहां हर बारिश में डूबने से लोगों की जान जाती है उसके बावजूद यहां सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं है। पर्यटन स्थलों पर गार्ड तैनात नहीं होने से लोग नदी, झरनों और बांधो की डाउन स्ट्रीम क्षेत्र में नहाने चले जाते वहां डूबने का खतरा रहता है। चट्टानेश्वर महादेव, पाडाझर भंवरकुंंज पर्यटन स्थल पर ना तो चेतावनी बोर्ड ना ही गार्ड तैनात है। </p>
<p><strong>सावधानी नहीं रखी तो जान जोखिम में</strong><br />कोटा में चट्टानेश्वर महादेव, भंवरकुंज, पाड़ाझर फॉल के साथ कई ऐसे पिकनिक स्पॉट्स हैं, जहां बारिश के दौरान लोग पिकनिक मनाने या भ्रमण के लिए पहुंचते हैं। इन पर्यटन स्थनों पर सुरक्षा के इंतजाम नहीं होने हर बारिश  में यहां हादसे होते रहते है। चट्टानेश्वर, पाडाझर फॉल में भी कई लोग सेल्फी लेने या अतिउत्साह में अपनी जान गंवा चुके हैं। यहां सावधानी के बोर्ड लगे होने पर भी लोग खुद ही खतरे की तरफ जाते हैं और हादसे का शिकार होते हैं। </p>
<p><strong>भंवरकुंज में बचाव के संसाधन नहीं</strong><br />मानसून ने दस्तक देने के साथ ही नदी-नाले व झरने बहने लगे हैं। पिकनिक स्पॉट पर शौकीनों की चहल-पहल बढ़ गई है, लेकिन प्रकृति की गोद में स्थित यह पिकनिक स्पॉट मौज-मस्ती व मनोरंजन में खलल पैदा कर सकते हैं, क्योंकि यहां सुरक्षा के इंतजाम नाकाफी हैं। डायवर्जन चैनल, गेपरनाथ, भंवरकुंज  पिकनिक स्पॉट पर सुरक्षा इंतजाम नहीं है। बारिश के दौरान पठारी क्षेत्र का पानी डायवर्जन चैनल से होते हुए भंवरकुंज पहुंचता है। इस बीच चट्टानी क्षेत्र है, जहां लोग पिकनिक मनाने व नहाने आते हैं। कुछ लोग चट्टान पर बैठे थे। बच्चे नहाते है, लेकिन सुरक्षा के नाम पर कोई गार्ड तैनात नहीं था। गौरतलब है कि यहां सबसे ज्यादा खतरा रहता है। यहां अचानक पानी का बहाव आता है, जिससे कभी भी हादसा हो सकता है।  भंवरकुंज पिकनिक स्थल सबसे खतरनाक है। यहां हर साल पानी में डूबने से हादसे होते रहते हैं। बावजूद इसके प्रशासन सुरक्षा को लेकर गंभीर नहीं है।पुलिस-प्रशासन आपको समझाइश और अलर्ट कर सकता है, लेकिन अंतिम निर्णय आपकी समझदारी पर ही निर्भर होगा। </p>
<p><strong>पाड़ाझर झरने पर नहाना हो प्रतिबंधित</strong><br />पाडाझर झरने पर सबसे अधिक खतरा है। स्थानीय लोगों कहना है कि यहां नहाने पर प्रतिबंध लगाना चाहिए। यहां सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं है। थोड़ी सी बारिश होते ही पहाड़ों से झरने के रूप में धीरे-धीरे गिरता पानी एक बडी धार का रूप ले लेता है जो अपने वेग से किसी को भी बहाकर ले जाने की क्षमता रखता है। जलाशयों पर लोग सैर-सपाटे के लिए पहुंचते हैं और वहां पानी के साथ सेल्फी लेते हैं। इस दौरान भी घटनाओं का अंदेशा बना रहता है। पुलिस व प्रशासन को इन जलाशय व नदियों पर साइन बोर्ड लगवाना चाहिए और लगातार पैट्रोलिंग भी करवाई जाना चाहिए।</p>
<p><strong>चटनेश्वर महादेव झरने पर रहता है खतरा</strong><br />शहर से 25 किमी दूर केबल नगर के पास चट्टनेश्वर महादेव पर्यटन स्थल पर रविवार को दूरदराज से सैलानी संडे मनाने के लिए पहुंचे। यहां काफी संख्या में परिवार पिकनिक मनाने के लिए आते है।  यहां लोग गोठ कर लोगों ने झरनों में नहाने का आनंद लेते लेकिन पानी गहरा होने से यहां बारिश में सबसे ज्यादा हादसे होते है। रविवार को एक युवक डूब गया। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 04 Jul 2024 17:07:30 +0530</pubDate>
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                <title>पिकनिक मनाने गये प्रेमी युगल ने खाया जहर, प्रेमिका की मौत</title>
                                    <description><![CDATA[ मध्यप्रदेश के सीहोर जिले में जहर सेवन करने से प्रेमिका की मौत हो गयी, वहीं प्रेमी की हालत गंभीर बनी हुई है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/lover-couple-went-for-picnic-ate-poison-girlfriend-died/article-53442"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-08/vouple.png" alt=""></a><br /><p>सीहोर। मध्यप्रदेश के सीहोर जिले में जहर सेवन करने से प्रेमिका की मौत हो गयी, वहीं प्रेमी की हालत गंभीर बनी हुई है। </p>
<p>पुलिस सूत्रों ने आज बताया कि काजल नामक एक युवती वह अपने प्रेमी के रितिक के साथ कल मिडघाट पर पिकनिक मनाने गए थे। किसी बात को लेकर दोनों ने जहर सेवन कर लिया। 108 एम्बूलेंस से दोनों को बुधनी अस्पताल में भर्ती कराया गया। हालत नाजुक होने पर दोनों को नर्मदापुरम रेफर किया गया। जहाँ इलाज के दौरान रात में युवती ने दम तोड़ दिया, वहीं युवक की हालत अभी भी गंभीर बनी हुई है। मामला प्रेम प्रसंग का बताया जा रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 02 Aug 2023 15:06:29 +0530</pubDate>
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