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                <title>financial fraud - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>financial fraud RSS Feed</description>
                
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                <title>बीसी के नाम पर सैकड़ों लोगों से 8 से 10 करोड़ की ठगी , मुकदमा दर्ज</title>
                                    <description><![CDATA[लोगों को गिफ्ट और लाभ का लालच देकर हर महीने 2 से 5 हजार रुपए जमा करवाता था।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/case-registered-for-swindling-%E2%82%B98%EF%82%9610-crore-from-hundreds-of-people-under-the-guise-of-a--bc---chit-fund--scheme/article-165875"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-09/1200-x-60-px)-(youtube-thumbnail)31.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। बीसी (कमेटी) चलाने के नाम पर सैकड़ों लोगों से करीब 8 से 10 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी किए जाने का मामला सामने आया है। आरके पुरम थाना पुलिस ने परिवादी जितेन्द्र पालीवाल की रिपोर्ट पर आरोपी कृष्ण मुरारी माहेश्वरी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4) और 316(2) के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। मामले की जांच एसआई जगदीशराम को सौंपी गई है। <br /> मामले में  परिवादी जितेन्द्र पालीवाल निवासी केशवपुरा ने पुलिस को दी रिपोर्ट में बताया कि आरोपी कृष्ण मुरारी माहेश्वरी निवासी आरके पुरम, मुक्तिधाम के पीछे, अलग-अलग बीसी कमेटियां चलाता था। वह लोगों को विभिन्न लाभ और गिफ्ट देने का लालच देकर हर महीने 2 से 5 हजार रुपए तक जमा करवाता था। बीसी पूरी होने पर नियमानुसार राशि लौटाने का आश्वासन दिया जाता था। मामले में गुरुवार को तरुण गोयल के साथ अन्य 17 लाेगों ने थाने पर शिकायत दी । अब तक थाने पर 18 पीड़ित लोग शिकायत दर्ज करवा चुके हैं। पुलिस ने सभी शिकायतों पर अनुसंधान शुरू कर दिया है। बताया जा रहा है कि आरोपी मुकदमा दर्ज होने के बाद से फरार चल रहा है। आरोपी को तलाश किया जा रहा है। </p>
<p><strong>तीन साल से राशि वापस लेने के लिए परेशान</strong><br />परिवादी ने रिपोर्ट में बताया कि  बीसी पूरी होने के बाद कई लोगों को उनकी जमा राशि वापस नहीं मिली। उसने भी अपनी रकम वापस मांगी तो आरोपी टालमटोल करने लगा। बाद में फोन उठाना और मिलने से भी इनकार कर दिया। कुछ लोगों को डायरियां वापस लेकर चेक दिए गए, लेकिन बैंक खाते में पर्याप्त राशि नहीं होने से चेक बाउंस हो गए।</p>
<p><strong>कार्रवाई करने पर धमकाने का आरोप</strong><br />रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि आरोपी के घर जाकर राशि मांगने वाले लोगों को कानूनी कार्रवाई करने पर अंजाम भुगतने की धमकी दी गई। इसके चलते कई पीड़ित कार्रवाई करने से डर रहे हैं। परिवादी ने बताया कि उसे पिछले करीब तीन साल से आर्थिक और मानसिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।</p>
<p><strong>बैंक लेन-देन और दस्तावेजों की जांच की मांग </strong><br />परिवादी के मुताबिक, आरोपी ने करीब 500 से 1000 लोगों से 8 से 10 करोड़ रुपए तक जमा किए जाने की आशंका है। वास्तविक राशि और पीड़ितों की संख्या जांच में सामने आएगी। उसने पुलिस से आरोपी के बैंक खातों, लेन-देन, मोबाइल नंबर, बीसी योजनाओं और दस्तावेजों की जांच कर पीड़ितों की राशि वापस दिलाने की मांग की है। परिवादी ने आरोपी की डायरियों की फोटो प्रतियां, चेक की फोटो कॉपी, बीसी स्कीम के दस्तावेज और अन्य पीड़ितों की सूची पुलिस को उपलब्ध कराई है।  </p>
<p><strong> इनका कहना है </strong><br /> मामले में अनुसंधान किया जा रहा है, अभी बयान लिए जा रहे हैं। पैसे जमा करवाने की रसीद,पर्चियों सहित दस्तावेज एकत्रित किए जा रहे हैं। आरोपी के खिलाफ धोखाधड़ी जालसाजी सहित अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज किया जा रहा है। <br /><strong>- जगदीशराम विश्नोई , एसआई एवं अनुसंधान अधिकारी थाना आरकेपुरम कोटा शहर</strong></p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 17 Sep 2026 17:04:52 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>PNB की करेंसी चेस्ट में मिले 17 करोड़ के नकली नोट: भारी लापरवाही आई सामने, पार्ट टाइम हाउस कीपर को सौंप रखी थी जिम्मेदारी</title>
                                    <description><![CDATA[उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में पंजाब नेशनल बैंक (PNB) के करेंसी चेस्ट में ऑडिट के दौरान करीब 17 करोड़ रुपये के जाली नोट मिलने से हड़कंप मच गया है। इस मामले में तीन बैंक अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया है तथा एक हाउसकीपर के खिलाफ केस दर्ज कर पुलिस जांच में जुटी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/fake-notes-worth-rs-17-crore-found-in-pnbs-currency/article-164436"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-09/fake-note.png" alt=""></a><br /><p>सहारनपुर। उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में पंजाब नेशनल बैंक की सोफिया मार्केट स्थित शाखा के करेंसी चेस्ट में ऑडिट के दौरान 17 करोड़ रुपए के नकली नोट मिले हैं। जांच में तीन अधिकारियों की भूमिका सामने आने के बाद उन्हें निलंबित कर दिया गया और उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया है। साथ ही कम नकदी मिलने के मामले में पार्ट टाइम हाउस कीपर के खिलाफ चोरी का मुकदमा दर्ज कराया गया है। मामला सामने आने के बाद बैंक अधिकारियों की जांच के साथ ही पुलिस भी अपनी जांच में जुटी है। कुछ दिनों पहले पार्ट टाइम हाउस कीपर विशाल कुमार को करेंसी चेस्ट में नोटों की गड्डियां लगाने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। इनमें गले, कटे व अन्य नोट थे। यहां से साढ़े 11 करोड़ रुपए के नोटों को पांच अगस्त को आरबीआई जयपुर भेजा गया। वहां गिनती होने के बाद इनमें चार लाख 30 हजार 900 रुपए कम मिले।</p>
<p><strong>गड्डियों से नोट निकालता दिखा विशाल</strong></p>
<p>मामला सामने आने के बाद मेरठ से मुख्य प्रबंधक अरुण कुमार चौबे को मामले की जांच के लिए सहारनपुर भेजा गया। जांच की तो पता चला कि विशाल कुमार ने गड्डियों से नोट निकाले हैं। वह नोट निकालता हुआ सीसीटीवी में दिख रहा है। नौ अगस्त से गड़बड़ी को लेकर आडिट शुरू किया गया और जांच की तो पता चला कि साढ़े 11 करोड़ रुपए की नकली करेंसी बैंक में रखी हुई है।</p>
<p><strong>ऊपर-नीचे असली, बीच में नकली नोट</strong></p>
<p>ऑडिट के दौरान जांच टीम ने जब नोटों की गड्डियों की जांच की तो सामने आया कि उसमें एक असली नोट ऊपर तो एक नोट नीचे लगाया गया था। शुरुआती जांच में साढ़े 11 करोड़ के जाली नोट ही पकड़े गए थे। ऑडिट टीम के अधिकारी अरुण कुमार चौबे ने सोमवार रात नौ बजे थाने में शिकायत देकर बताया कि जांच में 17 करोड़ रुपए के नकली नोट मिले हैं।</p>
<p><strong>और बढ़ सकती है रकम</strong></p>
<p>करेंसी चेस्ट का ऑडिट अभी चल रहा है। फिलहाल संदिग्ध लेनदेन और संबंधित रिकार्ड की जांच की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि नकली नोटों की संख्या कितनी है। मैनेजर निशा सिंह ने बताया कि बैंक अधिकारी जांच में जुटे हुए हैं। अभी और भी नकली नोट करेंसी चेस्ट में निकलकर सामने आ सकते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 02 Sep 2026 09:37:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>राम मंदिर कर्मियों के लिए दिया 4 करोड़ का चेक बाउंस, खाते में मिले महज 3 रुपये; अब होगी कानूनी कार्रवाई</title>
                                    <description><![CDATA[अयोध्या के राम मंदिर ट्रस्ट को चेन्नई की महिला श्रद्धालु द्वारा कर्मचारियों की सुविधाओं के लिए दिया गया ₹4 करोड़ का चेक बाउंस हो गया है। बैंक जांच में खाते में मात्र ₹3 पाए गए। बैंक अब महिला को नोटिस जारी करने की तैयारी कर रहा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/check-of-rs-4-crore-given-for-ram-temple-workers/article-164255"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-08/ayodhya-ram-mandir.png" alt=""></a><br /><p>अयोध्या। राम मंदिर के कर्मचारियों की सुविधाओं के लिए चेन्नई की एक महिला श्रद्धालु की ओर से दिया गया चार करोड़ रुपये का चेक बैंक में जमा होने के बाद बाउंस हो गया। जांच में संबंधित बैंक खाते में महज तीन रुपये की राशि होने की जानकारी सामने आई है। इतनी बड़ी रकम का चेक बाउंस होने के बाद बैंक अब चेक जारी करने वाली महिला को नोटिस भेजने की तैयारी में है।</p>
<p>जानकारी के मुताबिक, चेन्नई निवासी महिला श्रद्धालु एस. नागलक्ष्मी ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को चार करोड़ रुपये का चेक दिया था। उन्होंने यह राशि मंदिर के कर्मचारियों के वेतन और उनकी सुविधाओं पर खर्च किए जाने की इच्छा जताई थी। इसके लिए उन्होंने ट्रस्ट से लिखित आश्वासन भी मांगा था। हालांकि, ट्रस्ट की ओर से ऐसा कोई आश्वासन नहीं दिया गया।</p>
<p>महिला ने राम मंदिर के लिए अलग से 10 हजार रुपये का दान भी दिया था, जिसकी रसीद ली गई थी। चार करोड़ रुपये का चेक बैंक में लगाने पर खाते में पर्याप्त राशि नहीं मिली। कानूनी जानकारों के अनुसार, पर्याप्त राशि के बिना चेक बाउंस होने पर नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट की धारा 138 के तहत कार्रवाई का प्रावधान है। इसमें कानूनी नोटिस और भुगतान के लिए निर्धारित समयसीमा जैसी प्रक्रिया अपनाई जाती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 31 Aug 2026 12:39:43 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>शेयर बाजार में मुनाफे का लालच देकर लोगों को लगाया चूना! 3.90 लाख की धोखाधड़ी, iPhone फाइनेंस कराकर बेचने का आरोप</title>
                                    <description><![CDATA[रायपुर में शेयर ट्रेडिंग से भारी मुनाफे का झांसा देकर लोगों से महंगे आईफोन और अन्य मोबाइल फोन फाइनेंस कराने और फिर उन्हें बेच देने की धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। देवेंद्र नगर पुलिस ने चार लोगों से करीब 3.91 लाख रुपये की ठगी के आरोप में आरोपी हिमांशु शर्मा के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/people-were-defrauded-by-luring-profits-in-the-stock-market/article-162711"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-08/पचीवदम.png" alt=""></a><br /><p>रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में शेयर ट्रेडिंग से भारी मुनाफा दिलाने का लालच देकर लोगों के नाम पर महंगे मोबाइल फोन फाइनेंस कराने और बाद में उन्हें बेच देने का मामला आज सामने आया है। देवेंद्र नगर पुलिस ने आज बात की, जांच के बाद आरोपी हिमांशु शर्मा के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4) के तहत धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर विवेचना शुरू कर दी है। पुलिस के अनुसार इस मामले में चार लोगों से कुल 3 लाख 90 हजार 960 रुपए की धोखाधड़ी सामने आई है। पुलिस कमिश्नर रायपुर के समक्ष शिकायत प्रस्तुत किए जाने के बाद मामले की जांच सहायक पुलिस आयुक्त सिविल लाइन रायपुर को सौंपी गई थी। जांच में प्रथम दृष्टया धोखाधड़ी का अपराध पाए जाने पर देवेंद्र नगर थाने में प्रकरण दर्ज किया गया।</p>
<p>शिकायतकर्ता तेजस्वी पाण्डेय निवासी मैत्री नगर, महादेव घाट रोड रायपुर और अन्य लोगों ने हिमांशु शर्मा के खिलाफ शिकायत की थी। शिकायत के मुताबिक तेजस्वी पाण्डेय की करीब दो वर्ष पहले टेक्नो टास्क कंपनी में काम करने के दौरान हिमांशु शर्मा से दोस्ती हुई थी और इसके बाद दोनों के बीच संपर्क बना रहा। आरोप है कि 28 अगस्त 2025 को हिमांशु शर्मा ने तेजस्वी को शेयर ट्रेडिंग के जरिए कमाई का लालच दिया। तेजस्वी ने खुद ट्रेडिंग करने से इनकार किया तो आरोपी ने घर बैठे मुनाफा दिलाने की बात कही। साथ ही अपने नाम पर मोबाइल फाइनेंस नहीं हो पाने का हवाला देते हुए तेजस्वी से मोबाइल फोन फाइनेंस कराने को कहा।</p>
<p>शिकायत के अनुसार तेजस्वी ने भरोसा कर करीब 29 हजार रुपए का वीवो मोबाइल फाइनेंस कराया और हिमांशु को दे दिया। अगले दिन हिमांशु ने इस मोबाइल से शेयर ट्रेडिंग नहीं हो पाने और इसके लिए iPhone की जरूरत होने की बात कही। इसके बाद तेजस्वी से करीब 64,900 रुपए का आईफोन भी फाइनेंस कराया गया। आरोप है कि दोनों मोबाइल के मूल बिल और डिब्बे भी हिमांशु ने अपने पास रख लिए। </p>
<p>कुछ समय बाद मोबाइल की किस्तों का भुगतान बंद हो गया। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि हिमांशु ने तेजस्वी पर एक और आईफोन फाइनेंस कराने का दबाव बनाया और ऐसा नहीं करने पर पहले लिए गए मोबाइल की किस्त नहीं भरने तथा फाइनेंस की जानकारी उसके माता-पिता को बताने की धमकी दी। इसके बाद तेजस्वी से करीब 64,501 रुपये का आईफोन 16 भी फाइनेंस कराया गया। अप्रैल 2026 में फाइनेंस कंपनी की ओर से किस्त बकाया होने की जानकारी मिलने पर तेजस्वी आरोपी के कटोरा तालाब स्थित घर पहुंचा, जहां ताला लगा मिला। इसके बाद संपर्क करने पर आरोपी के मोबाइल बंद या पहुंच से बाहर मिले। शिकायतकर्ता का आरोप है कि बाद में उसे पता चला कि उसके नाम पर फाइनेंस कराए गए मोबाइल किसी अन्य व्यक्ति को बेच दिए गए हैं।</p>
<p>पुलिस जांच में तेजस्वी पाण्डेय के अलावा अन्य लोगों के साथ भी इसी तरह मोबाइल फाइनेंस कराकर धोखाधड़ी किए जाने की बात सामने आई है। जांच के अनुसार तेजस्वी पाण्डेय से 1 लाख 10 हजार रुपए, ऐश्वर्य शर्मा से 1 लाख 20 हजार रुपए, रश्मि सोरी से 1 लाख 30 हजार 960 रुपए और कपिल साहू से 30 हजार रुपए की राशि से संबंधित धोखाधड़ी सामने आई है। इस प्रकार चार लोगों से कुल 3 लाख 90 हजार 960 रुपए की धोखाधड़ी का आरोप है। पुलिस ने आरोपी हिमांशु शर्मा के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4) के तहत अपराध दर्ज कर मामले की विस्तृत विवेचना शुरू कर दी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 12 Aug 2026 16:29:59 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>भारतमाला मुआवजा अनियमितता: ईडी ने 12.78 करोड़ की 62 संपत्तियां कुर्क की, आरोपियों के खिलाफ पूरक अभियोजन शिकायत प्रस्तुत </title>
                                    <description><![CDATA[छत्तीसगढ़ में रायपुर-विशाखापट्टनम भारतमाला परियोजना के भूमि अधिग्रहण घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बड़ी कार्रवाई की है। एजेंसी ने अवैध रूप से अधिक मुआवजा लेने के मामले में गांधी-तिवारी परिवार की 12.78 करोड़ रुपये की 62 संपत्तियां अस्थायी रूप से कुर्क की हैं। इस प्रकरण में अब तक कुल 36.14 करोड़ रुपये की संपत्ति अटैच हो चुकी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/bharatmala-compensation-irregularities-ed-attaches-62-properties-worth-rs-1278/article-161803"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-07/ed1.png" alt=""></a><br /><p>रायपुर। छत्तीसगढ़ में रायपुर-विशाखापट्टनम राष्ट्रीय राजमार्ग की भारतमाला परियोजना के भूमि अधिग्रहण मुआवजा अनियमितता मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए गांधी-तिवारी परिवार से संबंधित 12.78 करोड़ रुपये मूल्य की 62 चल एवं अचल संपत्तियां अस्थायी रूप से कुर्क कर ली हैं। एजेंसी ने 4.69 करोड़ रुपये के शेयर और म्यूचुअल फंड भी अटैच किए हैं तथा जय प्रकाश गांधी सहित 14 आरोपियों के विरुद्ध विशेष न्यायालय में पूरक अभियोजन शिकायत प्रस्तुत की है।</p>
<p>ईडी के रायपुर जोनल कार्यालय द्वारा बीती रात जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार 31 जुलाई 2026 को प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर क्रमांक -17/2026 जारी किया गया। जांच में पाया गया कि भूमि अधिग्रहण की अधिसूचना जारी होने के बाद कुछ भूमि स्वामियों, भूमि दलालों और राजस्व अधिकारियों ने कथित रूप से आपसी साजिश कर अधिक मुआवजा प्राप्त करने के उद्देश्य से जमीनों का कृत्रिम विभाजन कराया। जांच एजेंसी के अनुसार अधिक मुआवजा हासिल करने के लिए बिक्री व गिफ्ट डीड के माध्यम से भूमि परिवार के विभिन्न सदस्यों के नाम स्थानांतरित की गई। इसके बाद भूमि को छोटे-छोटे हिस्सों में विभाजित कर मुआवजा पात्रता बढ़ाई गई, जिससे करोड़ों रुपये का अतिरिक्त भुगतान प्राप्त किया गया। ईडी का कहना है कि इस पूरी प्रक्रिया में राजस्व अधिकारियों और भूमि दलालों की कथित मिलीभगत सामने आई है।</p>
<p>यह जांच आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (ईओडब्ल्यू) और भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) , छत्तीसगढ़ द्वारा 23 अप्रैल 2025 को दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की गई। यह एफआईआर तत्कालीन एसडीओ (राजस्व) एवं सक्षम भूमि अधिग्रहण अधिकारी अभनपुर, निरभय साहू सहित अन्य आरोपियों के विरुद्ध दर्ज की गई थी। बाद में मामले का आरोप पत्र विशेष न्यायालय, रायपुर में प्रस्तुत किया गया। ईडी की जांच में यह भी सामने आया कि जय प्रकाश गांधी एवं उनके परिवार को वास्तविक पात्रता के अनुसार 56.76 लाख रुपये का मुआवजा मिलना था, जबकि उन्हें लगभग 9.83 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया। एजेंसी के अनुसार इस प्रकार लगभग 9.27 करोड़ रुपये की कथित अवैध आय अर्जित की गई, जिसे अचल संपत्तियों, शेयर, म्यूचुअल फंड तथा अन्य वित्तीय निवेशों में लगाने का प्रयास किया गया।</p>
<p>जांच में उगेतरा गांव की उमा तिवारी की भूमिका भी सामने आई है। ईडी के अनुसार उन्होंने स्वयं को मृत भूमि स्वामी की दत्तक पुत्री बताते हुए कथित फर्जी राजस्व अभिलेखों के आधार पर लगभग 2.13 करोड़ रुपये का मुआवजा प्राप्त किया। इसके अतिरिक्त ग्राम नायकबांधा के अन्य लाभार्थियों द्वारा भी खसरों का विभाजन कर निर्धारित पात्रता से अधिक मुआवजा लेने के आरोप सामने आए हैं। ईडी ने बताया कि जय प्रकाश गांधी को तीन जून 2026 को गिरफ्तार किया गया था। इससे पूर्व 29 दिसंबर 2025 और 27 अप्रैल 2026 को की गई तलाशी कार्रवाई में 49 लाख रुपये की बेहिसाबी नकदी तथा 89.80 लाख रुपये मूल्य की 37,133 ग्राम चांदी जब्त की गई थी। एजेंसी इससे पहले भूमि दलाल गिरोह की लगभग 23.35 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्तियां भी कुर्क कर चुकी है।</p>
<p>ईडी के अनुसार ताजा कार्रवाई के बाद भारतमाला भूमि अधिग्रहण मुआवजा अनियमितता प्रकरण में अब तक कुल 36.14 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्तियां कुर्क की जा चुकी हैं। एजेंसी ने कहा है कि मामले की जांच जारी है और आगे भी आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी। राजस्व विभाग के अनुसार अभनपुर के ग्राम नायकबांधा और उरला में भूमि को छोटे-छोटे हिस्सों में विभाजित कर 159 खसरों में बांटा गया तथा मुआवजा दावों के लिए 80 नए नाम राजस्व अभिलेखों में दर्ज किए गए। विभाग के मुताबिक 559 मीटर भूमि का अनुमानित मुआवजा, जो लगभग 29.5 करोड़ रुपये होना था, कथित हेरफेर के बाद 70 करोड़ रुपये से अधिक तक पहुंच गया। अभनपुर बेल्ट में 9.38 किलोमीटर के लिए 324 करोड़ रुपये की मुआवजा राशि निर्धारित की गई थी, जिसमें से 246 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है, जबकि 78 करोड़ रुपये का भुगतान फिलहाल रोक दिया गया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 03 Aug 2026 14:05:05 +0530</pubDate>
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                <title>पश्चिम बंगाल में वोटिंग से पहले 'मनी ट्रेल' पर वार: मर्लिन ग्रुप के खिलाफ ईडी की बड़ी छापेमारी, कई अहम दस्तावेज जब्त</title>
                                    <description><![CDATA[प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कोलकाता में रियल एस्टेट दिग्गज मर्लिन ग्रुप के कई ठिकानों पर छापेमारी की। जांच एजेंसी को फर्जी दस्तावेजों के जरिए जमीन हड़पने और मनी लॉन्ड्रिंग का संदेह है। साल्ट लेक और मिडलटन स्ट्रीट सहित विभिन्न स्थानों पर डिजिटल रिकॉर्ड और वित्तीय लेन-देन की गहन जांच जारी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/war-on-money-trail-before-voting-in-west-bengal-big/article-150783"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/merlin-group.png" alt=""></a><br /><p>कोलकाता। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने शुक्रवार तड़के कोलकाता स्थित रियल एस्टेट डेवलपर मर्लिन ग्रुप की कई जगहों पर समन्वित छापेमारी की। माना जा रहा है कि ईडी की यह कार्रवाई, कंपनी की कुछ कथित वित्तीय अनियमितताओं की चल रही जांच का हिस्सा है। आशंका है कि कंपनी ने धन शोधन कानूनों का उल्लंघन किया है। अधिकारियों के अनुसार, ईडी की टीमें शहर और आसपास के इलाकों में कई स्थानों पर तैनात की गईं। जिन ठिकानों पर तलाशी ली गई, उनमें मिडलटन स्ट्रीट और साल्ट लेक के सीएफ ब्लॉक स्थित मर्लिन ग्रुप की संपत्तियां शामिल हैं।</p>
<p>जांच एजेंसी ने डीसी पाल ग्रुप के एक कार्यालय में भी तलाशी अभियान चलाया, जिससे संकेत मिलता है कि जांच अब संबंधित संस्थाओं और कारोबारी संबंधों तक भी फैल सकती है। अधिकारियों ने हालांकि अभी तक कोई विस्तृत आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है लेकिन तलाशी से जुड़े ईडी अधिकारियों का कहना है कि मामला भूमि सौदों और स्वामित्व रिकॉर्ड से जुड़े गंभीर आरोपों से संबंधित है। मर्लिन ग्रुप के प्रमोटरों और कंपनी पर आरोप है कि उन्होंने "फर्जी" दस्तावेजों का उपयोग कर स्वामित्व की "झूठी" कड़ी तैयार की और भूमि हड़प ली। ईडी का यह भी आरोप है कि आरोपियों ने कथित रूप से कब्जाई गई जमीन का व्यावसायिक "शोषण" करते हुए बड़े पैमाने पर रियल एस्टेट परियोजनाएं शुरू कीं। एजेंसी के अनुसार, "फर्जी" दस्तावेजों के जरिए खुद को वैध मालिक दिखाकर आरोपियों ने आम जनता को इन परियोजनाओं में "बड़ी" रकम निवेश करने के लिए प्रेरित किया।</p>
<p>फिलहाल, यह अभी कुछ भी स्पष्ट नहीं है कि इस कार्रवाई के दौरान कोई जब्ती या गिरफ्तारी हुई है या नहीं। एक अन्य अधिकारी ने बताया कि जांचकर्ता दस्तावेजों, डिजिटल रिकॉर्ड और वित्तीय लेन-देन की जांच कर रहे हैं, जिसके कारण छापेमारी अगले कुछ दिनों तक जारी रह सकती है। मर्लिन ग्रुप और डीसी पाल ग्रुप के प्रतिनिधियों ने अब तक इस मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। जांच आगे बढ़ने के साथ और जानकारी मिल पायेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 17 Apr 2026 15:35:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>जल जीवन मिशन घोटाला: पूर्व आईएएस सुबोध अग्रवाल दो दिन की पुलिस रिमांड़ पर, विशेष अदालत में होंगे पेश </title>
                                    <description><![CDATA[जयपुर की विशेष अदालत ने ₹960 करोड़ के जल जीवन मिशन घोटाले में पूर्व आईएएस सुबोध अग्रवाल की रिमांड 2 दिन और बढ़ा दी है। भगोड़ा घोषित होने के बाद गिरफ्तार हुए अग्रवाल से एसीबी अब भ्रष्टाचार के गहरे राज उगलवाएगी। जांच एजेंसी ने पूछताछ के लिए और समय की मांग की थी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/jal-jeevan-mission-scam-former-ias-subodh-aggarwal-sent-on/article-150180"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/ias.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। एसीबी मामलों की विशेष अदालत क्रम-1 ने जल जीवन मिशन में हुए करीब 960 करोड रुपए के घोटाले से जुडे मामले में पूर्व आईएएस और तत्कालीन अतिरिक्त जलदाय सचिव सुबोध अग्रवाल का रिमांड 2 दिन के लिए बढ़ा दिया है।</p>
<p>एसीबी की ओर से रिमांड पूरा होने के बाद सुबोध अग्रवाल को विशेष अदालत में पेश किया गया। इस दौरान एसीबी ने रिमांड अवधि 3 दिन बढ़ाने की गुहार की।  हाल ही में, अदालत की ओर से आरोपी सुबोध अग्रवाल को भगोड़ा घोषित करने के बाद एसीबी ने उसे गिरफ्तार किया था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 13 Apr 2026 13:10:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>जल जीवन मिशन घोटाला : पूर्व आईएएस सुबोध अग्रवाल 13 अप्रैल तक रिमांड पर, देखें वायरल वीडियो </title>
                                    <description><![CDATA[जयपुर की विशेष अदालत ने जल जीवन मिशन में ₹960 करोड़ के घोटाले के आरोपी पूर्व आईएएस सुबोध अग्रवाल को 13 अप्रैल तक रिमांड पर भेज दिया है। भगोड़ा घोषित होने के बाद गिरफ्तार हुए अग्रवाल से एसीबी अब भ्रष्टाचार के नेटवर्क और अन्य शामिल लोगों के बारे में पूछताछ करेगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/jal-jeevan-mission-scam-former-ias-subodh-aggarwal-on-remand/article-149888"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/acb.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। एसीबी मामलों की विशेष अदालत क्रम-1 ने जल जीवन मिशन में हुए करीब 960 करोड रुपए के घोटाले से जुडे मामले में पूर्व आईएएस और तत्कालीन अतिरिक्त जलदाय सचिव सुबोध अग्रवाल को 13 अप्रैल तक रिमांड पर एसीबी को सौंप दिया है। हाल ही में अदालत की ओर से आरोपी सुबोध अग्रवाल को भगोड़ा घोषित करने के बाद एसीबी ने उसे गिरफ्तार किया था।</p>
<p></p><video style="width:496px;height:280px;" src="https://dainiknavajyoti.com/media/2026-04/whatsapp-video-2026-04-10-at-15.45.34.mp4" controls=""></video>
<p>एसीबी की ओर से आरोपी सुबोध अग्रवाल को अदालत में पेश कर 14 अप्रैल तक रिमांड मांगा। एसीबी की ओर से कहा गया कि आरोपी से प्रकरण को लेकर पूछताछ करनी है। वहीं यह भी जानकारी हासिल की जाएगी की इस घोटाले में और कौन-कौन लोग शामिल हैं। वहीं सुबोध अग्रवाल के वकील ने पुलिस रिमांड का विरोध किया। दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद अदालत ने आरोपी को पुलिस रिमांड पर सौंप दिया है। वहीं सुबोध अग्रवाल ने अदालत कक्ष के बाहर कहा कि उन्हें न्याय व्यवस्था पर पूरा भरोसा है। उन्हें उम्मीद है कि न्याय होगा, सत्यमेव जयते।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 10 Apr 2026 15:52:32 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>ईडी ने किया भूमि हड़पने और जालसाजी रैकेट का पर्दाफाश : कोलकाता में मर्लिन ग्रुप पर छापेमारी, कई अहम दस्तावेज जब्त</title>
                                    <description><![CDATA[प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कोलकाता में मर्लिन प्रोजेक्ट्स के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग मामले में छापेमारी की। जांच में सामने आया कि सुशील और साकेत मोहता ने जाली दस्तावेजों के जरिए सरकारी जमीन हड़पी और अवैध रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स बनाए। इस घोटाले में प्रभावशाली नेताओं और अधिकारियों की मिलीभगत की भी गहन जांच जारी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/ed-busts-land-grab-and-fraud-racket-raids-on-merlin/article-149735"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/ed.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के कोलकाता क्षेत्रीय कार्यालय ने सुशील मोहता और साकेत मोहता द्वारा प्रवर्तित मर्लिन प्रोजेक्ट्स लिमिटेड के खिलाफ चल रही धन शोधन (मनी लॉन्ड्रिंग) जांच के सिलसिले में सात परिसरों पर छापेमारी की। छापेमारी में पता चला कि आरोपियों और उनसे जुड़ी संस्थाओं ने कथित तौर पर जाली दस्तावेज बनाकर सार्वजनिक भूमि सहित कई भूखंडों पर धोखाधड़ी से कब्जा किया था। ईडी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि जांच में पता चला है कि सुशील मोहता, साकेत मोहता और उनसे जुड़ी संस्थाओं ने विभिन्न भूखंडों को अवैध रूप से हासिल करने के लिए जाली दस्तावेज बनाए। आरोपियों ने बाद में इन जमीनों का व्यावसायिक रूप से बड़े पैमाने पर रियल एस्टेट परियोजनाओं को शुरू करके फायदा उठाया।</p>
<p>जाली दस्तावेजों के आधार पर खुद को वैध मालिक बताकर, उन्होंने कथित तौर पर आम जनता को इन परियोजनाओं में बड़ी रकम निवेश करने के लिए प्रेरित किया। अधिकारी ने बताया, "आगे की जांच में मर्लिन समूह और वरिष्ठ राजनीतिक नेताओं के साथ-साथ राज्य सरकार के सार्वजनिक अधिकारियों के बीच संबंध सामने आए हैं। समूह और उसके प्रमोटरों के साथ उनकी भूमिका और वित्तीय लेन-देन की वर्तमान में जांच की जा रही है।" ईडी ने बताया कि छापेमारी वाले परिसरों से आपत्तिजनक डिजिटल उपकरण और दस्तावेज जब्त किए गए हैं और मामले की जांच जारी है ।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/bharat/ed-busts-land-grab-and-fraud-racket-raids-on-merlin/article-149735</link>
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                <pubDate>Thu, 09 Apr 2026 18:14:51 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>तेलंगाना पुलिस की बड़ी कामयाबी : ऑनलाइन धोख़ाधड़ी के 17 मामलों में कई राज्यों से 19 आरोपी गिरफ़्तार, पूछताछ जारी</title>
                                    <description><![CDATA[साइबराबाद पुलिस ने देशव्यापी छापेमारी कर 17 साइबर अपराधों का पर्दाफाश किया। गिरफ्तार 19 आरोपियों में ट्रेडिंग और डिजिटल अरेस्ट के जालसाज शामिल हैं। पुलिस ने पीड़ितों को 4.35 करोड़ रुपये वापस दिलाने के अदालती आदेश भी प्राप्त किए। व्हाट्सएप निवेश समूहों से सावधान रहने की चेतावनी देते हुए हेल्पलाइन 1930 जारी की गई है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/big-success-of-telangana-police-19-accused-arrested-from-many/article-148857"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/arrestedd.png" alt=""></a><br /><p>हैदराबाद। तेलंगाना के साइबराबाद की साइबर अपराध पुलिस ने 25 से 31 मार्च के बीच कई राज्यों में छापेमारी की और 17 साइबर अपराध के मामलों का खुलासा कर 19 अपराधियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस की ओर से गुरुवार को जारी एक बयान के अनुसार, पकड़े गए मामलों में सबसे ज्यादा धोखाधड़ी 'ट्रेडिंग' से जुड़ी थी। ट्रेडिंग धोख़ाधड़ी के 11 मामलों में 12 गिरफ्तारियां की गईं। इसके अलावा डिजिटल अरेस्ट के दो मामलों में तीन, पार्ट-टाइम जॉब धोख़ाधड़ी के दो मामलों में दो और नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी के दो मामलों में दो आरोपियों को पकड़ा गया है।</p>
<p>पुलिस को एक बड़ी सफलता यह भी मिली है कि उन्होंने 125 मामलों में अदालतों से 884 'रिफंड' आदेश प्राप्त किए हैं। इसके जरिए पीड़ितों को 4.35 करोड़ रुपये वापस दिलाने की प्रक्रिया आसान हुई है। इस सप्ताह के दौरान एक बड़े मामले में पुलिस ने उस ट्रेडिंग धोखाधड़ी का भंडाफोड़ किया, जिसमें एक पीड़ित से व्हाट्सएप ग्रुप के जरिए 2.93 करोड़ रुपये की ठगी की गई थी। जालसाजों ने निवेश सलाहकार बनकर और मुनाफे के फर्जी स्क्रीनशॉट दिखाकर पीड़ित को झांसे में लिया और भारी मुनाफे के नाम पर कई बैंक खातों में पैसे ट्रांसफर करवा लिए। इस मामले में तेलंगाना के रहने वाले दो आरोपियों शेखर और तिनेश कुमार प्रजापति को गिरफ्तार किया गया है। इन पर ठगी की रकम को इधर-उधर करने के लिए बैंक खाते उपलब्ध कराने का आरोप है।</p>
<p>पुलिस ने जनता को चेतावनी दी है कि वे भारी मुनाफे का वादा करने वाले ऑनलाइन निवेश समूहों पर भरोसा न करें और निवेश करने से पहले प्लेटफॉर्म की अच्छी तरह जांच कर लें। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर 1930 या नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर दें।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 02 Apr 2026 15:12:59 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>नेपाल में राजनीतिक भूचाल:  धन शोधन मामले में नेपाल के पूर्व ऊर्जा, जल संसाधन और सिंचाई मंत्री दीपक खड़का गिरफ्तार, सात दिनों की हिरासत में भेजा</title>
                                    <description><![CDATA[नेपाल के धन शोधन विभाग (DMLI) ने पूर्व पीएम देउबा, ओली और प्रचंड के खिलाफ वित्तीय अनियमितताओं की जांच तेज कर दी है। विरोध प्रदर्शनों के दौरान नेताओं के घरों से जले हुए नोट मिलने के बाद यह कार्रवाई शुरू हुई। पूर्व मंत्री दीपक खड़का को गिरफ्तार किया गया है, जबकि कई दिग्गज नेता फिलहाल देश से बाहर हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/nepals-former-energy-water-resources-and-irrigation-minister-deepak-khadka/article-148445"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/deepak-khadaka.png" alt=""></a><br /><p>नेपाल। नेपाल के धन शोधन जांच विभाग (डीएमएलआई) के अधिकारियों ने तीन पूर्व प्रधानमंत्रियों और दो पूर्व मंत्रियों से जुड़े धन शोधन के मामले की जांच तेज कर दी है। 'द काठमांडू पोस्ट' की एक रिपोर्ट के अनुसार यह कार्रवाई प्रारंभिक पूछताछ में उनके वित्तीय रिकॉर्ड और संपत्तियों में विसंगतियां पाए जाने के बाद की गई है। डीएमएलआई ने नेपाल पुलिस के केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीआईबी) के सहयोग से पूर्व प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा, केपी शर्मा ओली और पुष्प कमल दहल के साथ-साथ पूर्व मंत्री आरज़ू राणा देउबा और दीपक खड़का के खिलाफ विस्तृत जांच शुरू की है।</p>
<p>दीपक खड़का पहले ऊर्जा, जल संसाधन और सिंचाई मंत्री के रूप में कार्य कर चुके हैं, उन्हें अदालत की अनुमति के बाद सात दिनों की हिरासत में भेज दिया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, विभाग ने हाल ही में जांच को आगे बढ़ाने के लिए पुलिस मुख्यालय से सहायता मांगी थी। इस अनुरोध पर कार्रवाई करते हुए पुलिस ने रविवार को नेपाली कांग्रेस के नेता खड़का को बुधानिलकंठ स्थित उनके आवास से गिरफ्तार कर लिया।</p>
<p>यह जांच 9 सितंबर 2025 को हुई तोड़फोड़ और आगजनी की घटनाओं के बाद कई राजनीतिक हस्तियों के आवासों से जले हुए करेंसी नोटों के टुकड़े बरामद होने के बाद शुरू हुई थी। ये घटनाएं 'जेन-जेड' (युवा पीढ़ी) के नेतृत्व वाले विरोध प्रदर्शनों के एक दिन बाद हुई थीं। बाद में सामने आए दृश्यों में देउबा, खड़का और दहल के घरों पर जले हुए नोट देखे गए थे, जिनकी प्रयोगशाला विश्लेषण के माध्यम से असली मुद्रा के रूप में पुष्टि की गई थी। चल और अचल दोनों संपत्तियों के बारे में प्रारंभिक जानकारी एकत्र करने और घटनास्थलों का दौरा करने के बाद, अधिकारियों ने इस मामले को सीआईबी अधिकारियों के नेतृत्व में एक व्यापक जांच में बदल दिया है।</p>
<p>सूत्रों का संकेत है कि खड़का और जांच के दायरे में आए अन्य व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई एक साथ आगे बढ़ रही है। देउबा 1991 से सार्वजनिक पद पर हैं, लेकिन उन्होंने 5 मार्च को हुए प्रतिनिधि सभा के चुनाव में भाग नहीं लिया था। चुनावों से ठीक पहले, 25 फरवरी को वे चिकित्सा उपचार के लिए सिंगापुर चले गए थे। उनकी पत्नी आरज़ू राणा देउबा, जिन्होंने सितंबर के विरोध प्रदर्शनों तक विदेश मंत्री के रूप में कार्य किया था, 5 जनवरी को नई दिल्ली के लिए रवाना हुईं और तब से वापस नहीं लौटी हैं। इस दंपति के वर्तमान ठिकाने के बारे में अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 30 Mar 2026 16:32:21 +0530</pubDate>
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                <title>मध्य प्रदेश के पूर्व स्वास्थ्य अधिकारी के खिलाफ 9.78 करोड़ रूपये के धन शोधन का मामला दर्ज, जांच जारी</title>
                                    <description><![CDATA[प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मध्य प्रदेश के पूर्व स्वास्थ्य सेवा निदेशक डॉ. अमरनाथ मित्तल के खिलाफ भोपाल कोर्ट में शिकायत दर्ज की है। लोकायुक्त की प्राथमिकी के आधार पर हुई जांच में ₹2.38 करोड़ की आय से अधिक संपत्ति का खुलासा हुआ। आरोपी ने कथित तौर पर भ्रष्टाचार की कमाई को भोपाल और रायसेन की अचल संपत्तियों में निवेश कर मनी लॉन्ड्रिंग की।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/money-laundering-case-of-rs-978-crore-registered-against-former/article-148319"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/ed1.png" alt=""></a><br /><p>मध्य प्रदेश। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मध्य प्रदेश सरकार के पूर्व स्वास्थ्य सेवा निदेशक डॉ. अमरनाथ मित्तल और अन्य के खिलाफ घन शोधन रोकथाम अधिनियम के प्रावधानों के तहत भोपाल की विशेष अदालत (पीएमएलए) में शिकायत दर्ज की है। ईडी के सूत्रों ने बताया कि लोकायुक्त भोपाल द्वारा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (संशोधित) की धारा 13(1)(ई) और 13(2) के तहत दर्ज प्राथमिकी के आधार पर अपनी जांच शुरू की थी। यह प्राथमिकी उन आरोपों से संबंधित है जिसमें डॉ. अमरनाथ मित्तल ने लोक सेवक के रूप में काम करते हुए अपनी आय के ज्ञात स्रोतों से कहीं अधिक संपत्ति अर्जित की, जिसकी कीमत लगभग 2.38 करोड़ रूपये थी।</p>
<p>पीएमएलए जांच के दौरान पता चला कि आरोपी ने कथित तौर पर भ्रष्टाचार के तरीकों से हासिल अपराध की कमाई को भोपाल और रायसेन जिलों में स्थित चल और अचल संपत्तियों में निवेश करके धन शोधन किया था। इस मामले में आगे की कार्रवाई जारी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 29 Mar 2026 12:32:49 +0530</pubDate>
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