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                <title>facing losses - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>फसल अवशेषों में लगाई जा रही आग, खेत हो रहे बंजर</title>
                                    <description><![CDATA[किसानों को फसलों के अवशेषों में आग लगाने के नुकसान के बारे में कोई जानकारी नहीं दी जा रही है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/baran/crop-residues-are-being-set-on-fire--fields-are-becoming-barren/article-59874"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-10/fasal-avshesho-me-lgayi-ja-rhi-aag,-khet-ho-rhe-banjar...rajpur,-baran-news...18-10-2023.jpg" alt=""></a><br /><p>राजपुर। क्षेत्र में किसान खेतों में पड़े फसल के अवशेषों में आग लगा रहे है। जिससे निकलने वाले धुएं से वातावरण तो प्रदूषित हो ही रहा है एवं किसानों के खेत की उर्वरक शक्ति कम हो रही है। आदिवासी अंचल क्षेत्र में इस साल कम बारिश हुई है। इससे नदी तालाब तो खाली पड़े हुए हैं। वहीं जानवरों के लिए भी चारे की किल्लत बनी हुई है। ऐसे में मक्का, तेली सोयाबीन उड़द की फसल की कटाई कर जींस को मंडी में बेच दिया है और खेतों में पड़े फसलों के अवशेषों में अब किसान आग लगाकर अगली फसल की तैयारी करने में लगा हुआ है। ऐसे में कई किसानों को आगजनी की घटना से नुकसान भी झेलना पड़ रहा है। प्रकाशचंद, शिवकुमार, खुश रंजन सहित कई पशुपालकों का कहना है कि इस बार बारिश कम होने के कारण चारे की पहले से ही जानवरों को किल्लत है। ऐसे में अब किसान खेतों में पड़े फसल के अवशेषों में आग लगाने में जुटा हुआ है। इससे आसमान में हर तरफ धुंआ ही धुंआ नजर आ रहा है तथा इससे निकलने वाले धुएं से वातावरण प्रदूषित हो रहा है एवं किसानों के खेत की उर्वरक शक्ति कम हो रही है। फसल मित्र कीट भी जलकर नष्ट हो रहे हैं और धुएं से सांस के मरीजों को भी नुकसान उठाना पड़ रहा है। </p>
<p>ऐसे किसानों के खिलाफ प्रशासन द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। इसके चलते इनके हौसले बुलंद हो रहे हैं और फसलों के अवशेषों में आग लगाने में लगे हुए हैं अगर इनके खिलाफ कोई उचित कार्रवाई प्रशासन द्वारा की जाए तो कहीं ना कहीं किसान फसलों के अवशेषों में आग नहीं लगाएंगे और क्षेत्र में आगजनी की घटना भी नहीं होगी। रविवार को ही कुशियारा गांव के पास एक किसान की मक्का की फसल जलकर आग से नष्ट हो गई थी जिसमें करीब दो ढाई लाख रुपए का नुकसान किसान को झेलना पड़ा था। जिला प्रशासन ऐसे लापरवाह किसानों के खिलाफ उचित कार्रवाई करने के लिए कृषि विभाग के अधिकारियों को दिशा निर्देश भी दे रखे हैं कि कोई भी किसान खेतों में फसलों के अवशेषों में आग लगाता पाया जाता है तो उसके खिलाफ फिर कर जुर्माना किया जाए। किसानों को फसलों के अवशेषों में आग लगाने के नुकसान के बारे में कोई जानकारी दी जा रही है। ऐसे में आदिवासी अंचल क्षेत्र के कई किसानों को फसलों के अवशेषों में खेत में आग लगाने के नफा और नुकसान की भी जानकारी नहीं मिल पा रही है और किसान फसल के अवशेषों में आए दिन आग लगाकर खेतों की सफाई कर दूसरी फसल की बुवाई की तैयारी में जुटा हुआ है।</p>
<p>फसलों के अवशेषों में जो किसान आग लगाकर नष्ट करते हैं। ऐसे किसानों के खिलाफ कार्रवाई होना चाहिए ताकि अवशेषों में आग नहीं लगाई जाए। जानवरों को पर्याप्त मात्रा में चार मिल सके, इसलिए किसानों को चारा अपने खेतों से बाहर डालना चाहिए।<br /><strong>- बसंत कुमार खंगार, पशुपालक।</strong></p>
<p>किसान फसलों के अवशेषों में आग लगाकर खुद को ही नुकसान पहुंचा रहे हैं। जमीन की उर्वरा शक्ति कम होती है। साथ ही किट मित्र जमीन के होते हैं वह भी मर जाते हैं और उक्त किसने की भूमि में फिर उत्पादन की कमी भी आती है। ऐसे में किसान भाइयों को खेतों में आग नहीं लगना चाहिए।<br /><strong>- नंदकुमार भार्गव, जिला महामंत्री, किसान महापंचायत।</strong></p>
<p>फसलों के अवशेषों में लोगों को आग नहीं लगना चाहिए। इससे क्षेत्र में चारे की कमी आएगी। मवेशी परेशान रहेंगे। जमीन को भी नुकसान होगा जमीन का उपजाऊ खत्म हो जाएगा। लोगों को इसके प्रति जागरूक होना चाहिए।<br /><strong>- सुरेश ओझा,  किसान।</strong></p>
<p>खेतों में पड़े फसलों के अवशेषों में अगर कोई भी किसान आग लगाता पाया जाता है और सूचना मिलती है तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है। साथ ही सजा और जुर्मानें का भी प्रावधान है। क्षेत्र में सुपरवाइजरों को निगरानी रखने के निर्देश दे रखे हैं ताकि कोई किसान खेतों में पड़े फसलों के अवशेषों में आग नहीं लगाए।<br /><strong>- नीरज शर्मा, सहायक कृषि अधिकारी, शाहाबाद।    </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बारां</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 18 Oct 2023 15:31:13 +0530</pubDate>
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                <title>किसान को मिल रहे पांच रुपए, बाजार में प्याज 25 रुपए किलो</title>
                                    <description><![CDATA[प्याज के दाम काफी ऊंचे जाने की संभावना के चलते केन्द्र सरकार ने गत 17 अगस्त को प्याज पर 40 फीसदी एक्सपोर्ट ड्यूटी लगा दी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/farmer-is-getting-five-rupees--onion-in-the-market-is-rs-25-per-kg/article-55867"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-08/kisan-ko-mil-rhe-panch-rupay,-bazaar-me-pyaz-25-rupay-kilo...kota-news-30-08-2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। <strong>केस 1 -</strong> झालावाड़ जिले के बकानी निवासी घनश्याम कोटा की थोक सब्जीमंडी में प्याज की उपज लेकर पहुंचा था। यहां जब प्याज की कीमत सुनी तो चौंक गया। मंडी में किसान का प्याज 5 से 8 रुपए किलो तक खरीदा जा रहा था। दाम सुनकर किसान चिंतित हो गया। घनश्याम ने बताया कि मंडी में वर्तमान में जो दाम मिल रहे हैं, उससे तो आधी लागत भी नहीं निकल पा रही है।  कोई चारा नहीं होने के कारण उसे कम दाम में प्याज बेचना पड़ा।</p>
<p><strong>केस 2 -</strong> भवानीमंडी निवासी दूलीचंद मीणा थोक सब्जीमंडी में 10 क्विंटल प्याज लेकर आया था। उसका प्याज अच्छी किस्म का था। इसके बावजूद केवल 8 रुपए किलो के भाव से बोली लग पाई। भाव कम होने से लागत भी नहीं निकल पा रही है। मीणा ने बताया कि एक किलो प्याज को मंडी में लाने तक की लागत 12 से 15 रुपए लग जाती है। इसके बावजूद दाम कम मिल रहे हैं। यहां लाने के बाद माल को वापस नहीं ले जा सकते हैं। इसलिए घाटा उठाना पड़ता है।</p>
<p>प्याज की खेती करने वाले किसानों के यह केस तो बानगी भर हैं। हाड़ौती के ऐसे सैंकड़ों प्याज उत्पादक किसान हैं जो प्याज की खेती करने के बाद नुकसान का दंश झेल रहे हैं। हर साल प्याज की खेती अधिकांश किसानोंं के लिए घाटे का सौदा साबित होती जा रही है। इस साल भी प्याज की खेती करने वाले किसानों को राहत मिलती हुई नजर नहीं आ रही है। पिछले कुछ सालों से लगातार प्याज का किसानों को कम रेट मिल रहा है। किसानों का कहना है कि कुछ दिन पहले प्याज की कीमतों में बढ़ोतरी हुई थी, लेकिन इसका सभी किसानों को फायदा नहीं हुआ। जिन किसानों के पास ज्यादा स्टॉक था उन्हें ही थोड़ी राहत मिली हैं। </p>
<p><strong>फैक्ट फाइल</strong><br />5000 - क्विंटल कुल प्याज की आवक कोटा थोक सब्जीमंडी में <br />2500 - क्विंटल आवक झालावाड़ से <br />2500 - क्विंटल आवक महाराष्टÑ से<br />5-8 - रुपए किलो खरीद का दाम मिल रहा किसानों को<br />12-15 - रुपए किलो थोक भाव <br />20-25 - रुपए किलो  खुदरा भाव</p>
<p><strong>झालावाड़ जिला प्याज उत्पादन में अग्रणी</strong><br />हाड़ौती में सबसे ज्यादा प्याज की खेती झालावाड़ जिले और उससे सटे क्षेत्रों में होती है। कोटा की थोक सब्जीमंडी में इस समय झालावाड़ जिले के किसान प्याज लेकर आ रहे हैं। पिछले कुछ दिनों से झालावाड़ जिले के रायपुर, भवानीमंडी, बकानी, अकलेरा सहित अन्य क्षेत्रों से प्रतिदिन काफी संख्या में किसान प्याज बेचने के लिए कोटा आ रहे हैं। कई किसान स्वयं के वाहन तो कई किराए का वाहन कर मंडी में प्याज बेचने आ रहे हैं, लेकिन यहां पर प्याज के कम दाम सुनकर उनकी मुनाफे की उम्मीद टूट जाती है। </p>
<p><strong>मुनाफे के खेल में किसान फेल</strong><br />किसान अपनी कृषि जिंसें मंडियों के माध्यम से ही बेचते हैं। इसके अलावा उनके पास कोई अन्य माध्यम नहीं हैं। मंडियों में थोक व्यापारी माल की क्वालिटी देखकर उसका भाव लगाते हैं। उसके आधार पर किसान का माल खरीदा जाता है। नीलामी में कई बार प्याज की गुणवत्ता कमजोर होने से काफी कम दाम तक लग जाते हैं। जिससे किसानों को मुनाफा तो दूर लागत भी नहीं निकल पाती है। जैसे कि किसान से 5 से 8 रुपए किलो में प्याज खरीदा जाता है। उसके बाद मंडी आढ़तिया अपनी कमीशन जोड़कर प्याज को सब्जी व्यापारियों को बेचता है। इसके बाद सब्जी विक्रेता अपना मुनाफा देखकर बाजार में इसकी बिक्री करता है। जिससे ग्राहक तक पहुंंचते-पहुंचते प्याज के भाव 20 से 25 रुपए किलो तक हो जाते हैं। जिससे ग्राहक को भी महंगाई का सामना करना पड़ता है। </p>
<p><strong>पहले बढ़े फिर टूटे भाव</strong><br />किसान नेता उमाशंकर मालव ने बताया कि विदेशों में प्याज का निर्यात होने से प्याज के दाम में उछाल आ गया था। इससे किसानों को भी फायदा होने लगा था। प्याज के दाम काफी ऊंचे जाने की संभावना के चलते केन्द्र सरकार ने गत 17 अगस्त को प्याज पर 40 फीसदी एक्सपोर्ट ड्यूटी लगा दी। प्याज पर 40 फीसदी एक्सपोर्ट ड्यूटी लगने के बाद किसानों को बड़ा नुकसान झेलना पड़ रहा है। इस फैसले के बाद प्याज के दाम में भारी गिरावट हुई है। इससे पिछले दो साल में हुए घाटे की भरपाई करने की किसानों की उम्मीदों पर पानी फिर गया है। अब जब दाम बढ़ने लगा था तो सरकार ने 17 अगस्त को 40 फीसदी एक्सपोर्ट डयूटी लगाकर उनकी कमाई की उम्मीदें तोड़ दी।</p>
<p><strong>एक्सपर्ट व्यू</strong><br />इस वक्त प्याज की उत्पादन लागत 15 रुपए किलो है। ऐसे में कम से कम 20 से 25 रुपए किलो का दाम मिलेगा तब किसान फायदे में रहेगा। पिछले दो साल से किसानों को लागत से भी कम भाव मिल रहा है। यदि घाटे की वजह से किसान प्याज उत्पादन बंद कर देंगे तो लोगों को महंगा प्याज मिलेगा। प्याज के गिरते दामों से किसान परेशान हैं। इस मामले में सरकार को हस्तक्षेप करना चाहिए और सीधे ही किसानों से प्याज खरीदना चाहिए। ताकि मंडी व बाजार के बीच का मुनाफा भी किसान को मिल सके। <br /><strong>- डॉ. आशुतोष गुप्ता, कृषि विशेषज्ञ</strong></p>
<p>मंडी में आने वाले प्याज की बोली गुणवत्ता हिसाब के लगाई जाती है। झालावाड़ जिले से आने वाला प्याज मध्यम गुणवत्ता वाला होता है। इस कारण भाव बदलते रहते हैं। किसानों से प्याज की क्वालिटी के हिसाब से खरीद की जाती है। इसके बाद आढ़तिया, व्यापारी व सब्जी विक्रेता अपना मुनाफा बनाकर प्याज की बिक्री करते हैं। बीच में प्याज के दाम बढ़े थे, लेकिन सरकार द्वारा प्याज पर 40 फीसदी एक्सपोर्ट ड्यूटी लगाने किसानों को नुकसान हुआ है।<br /><strong>- शब्बीर वारसी, महासचिव, आदर्श थोक फल सब्जीमंडी यूनियन कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 30 Aug 2023 16:05:44 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>नकली कीटनाशक चट कर रहा धरतीपुत्रों की मेहनत</title>
                                    <description><![CDATA[फसल को बचाने के लिए कीटनाशक का छिड़काव ही किसानों की मेहनत को चट कर रहा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/the-hard-work-of-the-sons-of-the-soil-is-being-licked-by-fake-pesticides/article-53792"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-08/nakli-keetnashak-chat-kr-rha-dhartiputro-ki-mehnat...kota-news-05-08-2023.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। जिले में नकली कीटनाशक की बिक्री पर अब कृषि विभाग ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। जिले में कीटनाशक दुकानों की जांच की जा रही है। इस दौरान नमूने लेकर जांच के लिए लैब में भेजे जा रहे हैं। शुक्रवार को कैथून क्षेत्र में दो कीटनाशक विक्रेता फर्म का लाइसेंस निलम्बित किया गया। बाजारों में नकली कीटनाशक की बिक्री होने से किसानों को नुकसान उठाना पड़ रहा है। इस समय खरीफ फसलों में सिंचाई का दौर चल रहा है। ऐसे फसलों को खरपतवार और कीटों से बचाने के लिए किसान फसलों पर कीटनाशक दवा का छिड़काव कर रहे हैं। फसल को बचाने के लिए कीटनाशक का छिड़काव ही किसानों की मेहनत को चट कर रहा है।</p>
<p><strong>नकली कीटनाशक की पहचान मुश्किल</strong><br />किसानों ने बताया कि इस समय दुकानों पर विभिन्न कम्पनियों के कीटनाशक   मिल रहे हैं। ऐसे में किसान असली और नकली कीटनाशक की पहचान नहीं कर पाते हैं। नकली कीटनाशकों की पैकेजिंग बिलकुल असली कीटनाशक की तरह होती है। किसानों को नकली या एक्सपायरी डेट की दवा होने की समझ तब आती है जब ऐसे कीटनाशकों के छिड़काव के बाद असर प्रभावहीन होता है या फिर फसल को भारी नुकसान हो जाता है।</p>
<p><strong>किसानों को नुकसान</strong><br />जानकारी के अनुसार किसानों के आमतौर पर अनभिज्ञ होने का फायदा कृषि से सम्बंधित सामान बेचने वाले दुकानदार जमकर उठाते हैं। क्षेत्र के किसान उपभोक्ता कानून की जानकारी के अभाव में कीटनाशकों की खरीद के समय दुकानदार से रसीद नहीं लेते हैं। इस कारण जानकारी होने के बावजूद कोई दस्तावेज नहीं होने से कृषि विभाग इन दुकानदारों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं कर पाता है। वहीं दूसरी ओर इन कीटनाशकों के उपयोग के कारण  फसलों के उत्पादन में भारी कमी आ जाती है। इस कारण किसानों को दोहरा नुकसान उठाना पड़ता है।</p>
<p><strong>गड़बड़ी मिली तो की कार्रवाई </strong><br />कृषि विभाग की ओर से शुक्रवार को कैथून क्षेत्र में कीटनाशक विक्रेता फर्मो के उत्पादों की जांच का अभियान चलाया गया। यहां पर दो फर्मो पर कीटनाशक सामग्री से सम्बंधित पर्याप्त दस्तावेज नहीं मिले। वहीं अन्य कई गड़बड़ी मिलने के कारण दोनों फर्मो के लाइसेंस निलम्बित कर दिए गए। विभागीय अधिकारियों ने बताया कि शिकायत मिलने पर टीम बनाकर जांच की जा रही है। वहीं नमूने लेकर जांच के लिए लैब में भेजे जा रहे हैं।</p>
<p><strong>अब सघन जांच अभियान चलाया</strong><br />कृषि विभाग के अधिकारियों के अनुसार जिले में कई स्थानों पर खरपतवारनाशक  सामग्री से फसलों में नुकसान होने की शिकायतें मिली थी। इसके बाद से जिलेभर में कीटनाशक विक्रेतों फर्मो के यहां जांच अभियान चलाया जा रहा है। पहले उन स्थानों पर जांच की जा रही है जहां से शिकायत मिली है। वहां पर टीम भेजकर मौका मुआयना किया जाता है। इसके बाद सम्बंधित फर्म के यहां जाकर कीटनाशक का नमूना लेकर लैब में भेजा जाता है। रिपोर्ट में गड़बड़ी मिलने पर दोषी फर्म का लाइसेंस निलम्बित करने की कार्रवाई की जाती है।</p>
<p>नकली कीटनाशकों के कारण किसानों को काफी नुकसान उठाना पड़ता है।  फसल तैयार करने के लिए काफी मेहनत होती हैं। ऐसे में नकली कीटनाशक से पूरी फसल खराब हो जाती है। इसलिए कीटनाशक फर्मो के पास मौजूद उत्पादों की नियमित रूप से जांच होनी चाहिए।<br /><strong>- नेमीचंद नागर, किसान भीमपुरा</strong></p>
<p>जिले में कीटनाशक फर्मों के यहां लगातार जांच की जा रही है। नमूने लेकर जांच के लिए लैब में भेज रहे हैं। किसानों की शिकायत मिलते ही तुरन्त कार्रवाई की जाती है। शुक्रवार को भी कैथून क्षेत्र में गड़बड़ी मिलने पर दो फर्मो के लाइसेंस निलम्बित किए गए हैं। जांच करने की कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।<br /><strong>- खेमराज शर्मा, संयुक्त निदेशक कृषि विभाग</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 05 Aug 2023 17:54:17 +0530</pubDate>
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