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                <title>शुद्ध आहार–मिलावट पर वार: 650 किलोग्राम मिलावटी पनीर मौके पर नष्ट, खाद्य सुरक्षा दल की कार्रवाई</title>
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                        <![CDATA[खाद्य सुरक्षा विभाग ने मदीना डेयरी पर छापा मारकर 650 किलो मिलावटी पनीर नष्ट किया, नमूने लिए गए, फर्म को नोटिस जारी होगा।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/pure-food-%E2%80%93-attack-on-adulteration-650-kg-of-adulterated/article-142513"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/11-(700-x-400-px)-(630-x-400-px)-(21)1.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। शुद्ध आहार – मिलावट पर वार अभियान के अंतर्गत आयुक्त खाद्य सुरक्षा एवं औषधि नियंत्रण, राजस्थान डॉ. टी. शुभमंगला के निर्देशानुसार एवं अभिहित अधिकारी खाद्य सुरक्षा डॉ. रवि शेखावत के नेतृत्व में प्राप्त सूचना के आधार पर खाद्य सुरक्षा अधिकारी दल, जयपुर प्रथम द्वारा मदीना डेयरी एंड बेकर्स, बालाजी की कोठी, चौकड़ी तोपखाना, हजूरी घाट गेट, जयपुर पर निरीक्षण की कार्रवाई की गई।</p>
<p>निरीक्षण के दौरान मौके पर रखे गए लगभग 650 किलोग्राम पनीर के संबंध में खाद्य कारोबारकर्ता एवं फर्म मालिक मुस्तफा खान से जांच-पड़ताल की गई। पूछताछ में फर्म मालिक द्वारा पनीर को 200 रुपए प्रति किलोग्राम की दर से रामगढ़, अलवर से मंगवाना बताया गया। साथ ही यह भी स्वीकार किया गया कि उक्त पनीर तेल, मिल्क पाउडर आदि से तैयार किया गया है।</p>
<p>खाद्य सुरक्षा अधिकारी दल द्वारा खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के प्रावधानों के तहत मौके से पनीर का नमूना संग्रहित किया गया तथा जनस्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए शेष लगभग 650 किलोग्राम मिलावटी पनीर को मौके पर ही नष्ट करवाया गया।</p>
<p>इस संबंध में अभिहित अधिकारी खाद्य सुरक्षा डॉ. रवि शेखावत ने बताया कि निरीक्षण के दौरान पाई गई कमियों के क्रम में संबंधित फर्म को नोटिस जारी किया जाएगा एवं नमूना जांच रिपोर्ट प्राप्त होने पर खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के अंतर्गत आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी।</p>
<p>खाद्य सुरक्षा विभाग द्वारा आमजन से अपील की गई है कि वे संदिग्ध एवं मिलावटी खाद्य पदार्थों की सूचना विभाग को दें, ताकि समय रहते कार्रवाई कर जनस्वास्थ्य की रक्षा सुनिश्चित की जा सके।</p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 09 Feb 2026 18:04:08 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Jaipur NM]]>
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                <title>मुंबई के अंधेरी में मिलावटी दूध बनाने वाले गिरोह का भंडाफोड़, सात आरोपी गिरफ्तार</title>
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                        <![CDATA[मुंबई पुलिस ने अंधेरी में नामी ब्रांडों के पैकेटों में सिंथेटिक दूध बेचने वाले गिरोह को पकड़ा। 1,000 लीटर मिलावटी दूध जब्त कर सात आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/gang-making-adulterated-milk-busted-in-mumbais-andheri-seven-accused/article-138108"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/milk.png" alt=""></a><br /><p>मुंबई। महाराष्ट्र में मुंबई पुलिस ने शुक्रवार को अंधेरी उपनगर में नामी ब्रांड के पैकेटों में मिलावटी और सिंथेटिक दूध भरकर बेचने वाले एक गिरोह का पर्दाफाश करते हुए सात लोगों को गिरफ्तार कर लिया। वर्सोवा पुलिस और खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) की संयुक्त टीम ने महाकाली गुफा रोड स्थित एक गोदाम पर छापेमारी कर आरोपियों को रंगे हाथों पकड़ा। कार्रवाई के दौरान मौके से 1,000 लीटर सिंथेटिक दूध, विभिन्न ब्रांड के 2,000 खाली पैकेट, पैकिंग मशीनरी और 50 हजार रुपये नकद बरामद किए गए हैं।</p>
<p>जांच में सामने आया कि गिरोह के सदस्य अमूल और गोकुल जैसे प्रतिष्ठित ब्रांड के असली पैकेटों से सिरिंज के जरिए दूध निकाल लेते थे और उसमें गंदा पानी व सिंथेटिक दूध मिलाकर दोबारा पैकिंग करते थे। आरोपी गलत मंशा से पैसा कमाने के लिए उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ कर रहे थे। वे असली दूध को निकालकर उसे अमूल ताजा, अमूल गोल्ड, अमूल ए2 और गोकुल के विभिन्न उत्पादों के खाली पैकेटों में भर देते थे।</p>
<p> </p>]]>
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                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 02 Jan 2026 13:16:21 +0530</pubDate>
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                <title>मिलावटखोरी में कोटा प्रदेश में पहले नंबर पर 375 नमूनों में 149 नमूने निकले अमानक</title>
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                        <![CDATA[कोटा में मिलावट वालों पर अंकुश लगाने के लिए पूरे साल लगातार सैंपलिंग की गई। 
]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/kota-ranks-first-in-the-state-in-adulteration--149-out-of-375-samples-were-found-to-be-substandard/article-96455"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-12/milawatkhori-me-kota-pradesh-me-phle-number-pr-375-namoono-me-149-namoone-nikle-amanak...kota-news-02-12-2024.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। दीपावली पर चलाए गए शुद्ध के लिए युद्ध अभियान में लिए गए प्रदेश भगर में खाद्य पदार्थो के नूमनों की रिपोर्ट आने लगी है। कोटा में 375 नमूने लिए जिसमें 149 नमूने अमानक पाए गए है। दीपावली पर मावा, तेल, मिठाईयों, पनीर, तेल, नमकीन,रसगुल्ले सहित कई खाद्य पदार्थो के नमूने लिए थे। जिसमें 149 नमून अमानक स्तर के पाए गए। है। विभाग की ओर से इस पर सख्त कार्रवाई की तैयारी की जा रही है। वहीं प्रदेश की बात करें तो कोटा के सैंपल सबसे अधिक अमानक स्तर के पाए गए है। कोटा पहले नंबर है। </p>
<p><strong>नमूने फेल में कोटा अव्वल, धौलपुर सबसे पीछे </strong><br />कोटा जिले में लिए गए नमूनों में से 39.73 फीसदी दिन नमूने फेल हुए हैं, यानी कि लिए गए 375 में से 149 नमूने अप्रैल से अक्टूबर के बीच फेल हो गए हैं।  प्रदेश में सबसे ज्यादा फीसदी नमूने फेल होने का रिकॉर्ड कोटा के नाम ही है। दूसरे नंबर पर हाड़ौती का दूसरा जिला बारां है, जहां पर 36.46 फीसदी नमूने फेल हो गए हैं।  इसके बाद राजसमंद, डूंगरपुर और टोंक तीनों जिले 33 फीसदी नमूने फेल होने के रिकॉर्ड के आसपास हैं। जबकि धौलपुर जिले में  सब से कम 6.47, करौली में 6.53, भरतपुर में 11.7, जैसलमेर में 12.23 और चूरू में 12.86 फीसदी ही नमूने फेल हुए हैं। </p>
<p><strong>प्रदेश में 23 फीसदी नमूने हुए फेल</strong><br />खाद्य सुरक्षा विभाग ने प्रदेश में अप्रैल से अक्टूबर तक कुल 9100 लिए हैं।  इनमें से 2076 नमूने फेल हुए हैं।  यहां तक कि 302 नमूने अमानक पाए गए हैं। यह पूरी तरह से अनसेफ और हानिकारक थे, जिन्हें खाने से लोगों को सेहत पर नुकसान हो सकता था।  जबकि 1705 नमूने सब स्टैंडर्ड कैटेगरी में हैं और 69 नमूने मिस ब्रांड हैं। प्रदेश के लिए गए 23 फीसदी नमूने फेल हुए हैं। </p>
<p><strong>लगातार नमूने लेने से  लगा अंकुश</strong><br />कोटा में मिलावट वालों पर अंकुश लगाने के लिए पूरे साल लगातार सैंपलिंग की गई। बड़ी संख्या में नमूने फेल आए है।  विभाग की ओर से मिलावट खोरी रोकने के लिए केवल वही नमूने ज्यादा लिए जाते हैं, जहां पर मिलावटखोरी की आशंका ज्यादा थी। जिससे कारण ही इतने नमूने फेल आए।   जयपुर में दो जिले बने हुए हैं।  दोनों का मिलाकर 835 नमूने लिए हैं।  इनमें से 216 फेल हुए हैं फेलियर प्रतिशत 25.87 है, लेकिन प्रदेश में सर्वाधिक नमूने लेने और फेल होने का रिकॉर्ड जयपुर के नाम ही है।  दूसरे नंबर पर अलवर में 587 नमूने लिए हैं और इनमें 30.49 फीसदी 179 नमूने फेल हो गए हैं।  नमूने फेल होने की संख्या में सबसे नीचे धौलपुर है।  यहां पर 139 नमूने लिए हैं, जिनमें से 9 नमूने फेल हुए हैं।  इसके बाद करौली में 153 में से 10 फेल हुए हैं। </p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />मिलावटखोरों के खिलाफ नियमित और सख्त एक्शन लिए गए।  इसलिए भी मिलावट के केस ज्यादा आ रहे हैं और लोगों में जागरूकता भी बढ़ रही है।  इसके बाद उनके खिलाफ एडीएम और सीजेएम कोर्ट में मामले को पहुंचा कर सजा दिला रहे हैं।     <br /><strong>- संदीप अग्रवाल, खाद्य सुरक्षा अधिकारी कोटा</strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 02 Dec 2024 15:43:17 +0530</pubDate>
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                <title>सरसों के तेल में मिलावट का खेल</title>
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                        <![CDATA[ कई कंपनियां शुद्ध और सात्विक विधि से तेल बनाकर बेचने का दावा भी करती हैं,जबकि यह दावा अधिकतर मामलों में झूठा निकलता है। ]]>
                    </description>
                
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/mustard-oil-adulteration-game/article-85169"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-07/111u1rer-(12)2.png" alt=""></a><br /><p>इन दिनों सरसों के तेल में मिलावट के लगातार मामले सामने आ रहे हैं। मिलावटी तेल की वजह से कई बार तो लोगों के बीमार होने और यहां तक कि मौत होने तक की घटना घट जाती है। सरसों के तेल में मिलावट की वजह से होने वाले रोगों को ड्रॉप्सी कहा जाता है। ड्रॉप्सी का पहला मामला सन 1877 में पश्चिम बंगाल में सामने आया था। हालांकि यह रोग उत्तर भारत में प्रचलित था,जहां सरसों के तेल का प्रमुख रूप से सेवन किया जाता है। दक्षिण भारतीय राज्यों ने ड्रॉप्सी के किसी भी मामले की रिपोर्ट नहीं की,जो बड़े पैमाने पर मूंगफली या नारियल के तेल का सेवन करते हैं। देश के कुछ हिस्सों में साल 1998 में भी सरसों के तेल में मिलावट की घटनाएं सामने आई थीं। </p>
<p>सरसों के तेल में  निम्न गुणवत्ता वाले तेलों की मिलावट की जाती है, जिससे इसकी शुद्धता, पौष्टिकता और गुणवत्ता खराब हो जाती है। आर्जीमोन तेल की पहचान प्राथमिक मिलावट के रूप में की गई, क्योंकि कुछ व्यावसायिक तेल के नमूनों और खुले नमूनों में इसकी सांद्रता कच्चे तेल की तुलना में लगभग आठ गुना अधिक थी। अरंडी के तेल को सरसों के तेल में दूसरा सबसे आम मिलावटखोर पाया गया। विशेषज्ञों का कहना है कि अब 80 फीसदी सरसों तेल राइस ब्रान मिलाकर बनाया जा रहा है। धान की खेती पंजाब में अधिक होती है,इसलिए वहां से सस्ती कीमत पर राइस ब्रान के टैंकर लाए जाते हैं। सरसों तेल गाढ़ा होता है, इसलिए राइस ब्रान को गाढ़ा करने के लिए उसमें सरसों तेल के रंग का कलर और सुगंध लाने के लिए एसेंस मिलाया जाता है। लेबोरेटरी जांच के बिना इनकी पहचान नहीं हो पाती है। इसमें मिलाया जाने वाला कलर और एसेंस लोगों में कैंसर का कारण बनता है। सरसों का तेल अमेरिका सहित कई देशों में प्रतिबंधित है। अमेरिकी खाद्य एवं औषधि प्रशासन के अनुसार, सरसों के तेल में इरुसिक एसिड की मात्रा काफी अधिक होती है। यह एक प्रकार का फैटी एसिड है और स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। यह ठीक से मेटाबोलाइज्ड नहीं होता है और मस्तिष्क की कोशिकाओं को भी नुकसान पहुंचाता है। इरुसिक एसिड कई मानसिक विकारों जैसे याददाश्त कमजोर होने से भी जुड़ा हुआ है। यह शरीर में वसा के संचय को भी बढ़ाता है। इन उद्देश्यों को ध्यान में रखते हुए अमेरिका,कनाडा और यूरोप ने सरसों के तेल के सेवन पर प्रतिबंध लगाया हुआ है। इरुसिक एसिड एक प्रकार का मोनोअनसैचुरेटेड ओमेगा-9 फैटी एसिड है, जो आमतौर पर सरसों के तेल, रेपसीड तेल और वॉलफ्लावर सीड ऑयल जैसे तेलों में पाया जाता है। इस एसिड के अत्यधिक सेवन से लिवर बढ़ सकता है और फैटी लिवर रोग विकसित हो सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि पहले सरसों के तेल में धान की भूसी का तेल बहुतायत में मिलाया जाता था,लेकिन अब पाम ऑयल मिलाया जाने लगा है। पाम ऑयल सस्ता होने के कारण दुकानदार को अधिक मुनाफा होता है। राइस ब्रान ऑयल का भी नकली सरसों का तेल बनाने के लिए उपयोग किया जाता है। इन तेलों में रंग, खुशबू और मिर्च का अर्क, सिंथेटिक एलिल आइसोथियोसाइनेट, प्याज का रस और फैटी एसिड की मिलावट की जाती है। त्योहारों और शादियों के सीजन में मांग बढ़ने से मिलावटखोरी और बढ़ जाती है। इस दौरान सबसे ज्यादा रिफाइंड एवं सरसों के तेल की मांग होती है। महंगाई की वजह से सरसों के तेल में मिलावट की जड़ें देश में मजबूती से फैली हुई हैं। बाजार में नकली सरसों का तेल भी खूब बिक रहा है। बैरोमीटर के जरिए भी असली सरसों के तेल की शुद्धता का पता लगता है। बैरोमीटर की रीडिंग 58 से 60.5 है, लेकिन अगर सरसों तेल की रीडिंग तय मानक से ज्यादा है तो तेल नकली है। तेल का रंग बदलने का मतलब है कि इसमें मिलावट की गई है। इस प्रकार के तेल में एक जहरीला पॉलीसाइक्लिक नमक पाया जाता है,  जिसे सेंगुइनारिन कहा जाता है। सरसों के तेल को जांचने के लिए अपने हाथों में थोड़ा सा तेल लें और उसे अच्छे से मलें। अगर तेल से कोई रंग निकलता है या किसी केमिकल की गंध आती है तो तेल नकली है।</p>
<p>काफी हद तक तेल के बाजार का खेल विज्ञापन का भी है। कई कंपनियां शुद्ध और सात्विक विधि से तेल बनाकर बेचने का दावा भी करती हैं,जबकि यह दावा अधिकतर मामलों में झूठा निकलता है। आपको किसी भी तरह का तेल खरीदते समय बेहद सावधानी बरतने की जरूरत है। किसी भी कंपनी के दावों के झांसों में आकर तेल मत खरीदिए। किसी भी ब्रांड का तेल अधिक मात्रा में खरीदने से पहले थोड़ा सा लीजिए और स्वाद तथा गुणवत्ता जांचने के बाद ही अधिक मात्रा में खरीद कीजिए। तेल खरीदने से पहले सतर्कता बरतने से ही मिलावटी तेलों से बचा जा सकता है। मिलावटी तेल आपके परिवार के स्वास्थ्य को गंभीर नुकसान पहुंचाते हैं, इसलिए चिंता करना जरूरी है। अच्छा चुनिए, अच्छा खाइए। इस तरह आप खुद को और अपने परिवार को तेल में मिलावट के खेल से बचा पाएंगे। </p>
<p><strong>-अमित बैजनाथ गर्ग</strong><br /><strong>(ये लेखक के अपने विचार हैं)</strong></p>]]>
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                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 19 Jul 2024 11:21:12 +0530</pubDate>
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                <title>मिलावट के दौर में बस दर्द खालिस है...</title>
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                        <![CDATA[रासायनिक कीटनाशकों से हो रही खेती के कारण पंजाब में कैंसर रोगियों की संख्या बढ़ी। ये पीड़ित कुछ समय पहले तक  अपने इलाज के लिए बठिंडा से बीकानेर जिस ट्रेन से जाते थे, उसे कैंसर एक्सप्रेस के नाम से पुकारा जाने लगा था।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/in-times-of-adulteration-only-pain-is-pure/article-82514"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-06/uu11rer-(17)6.png" alt=""></a><br /><p>यह गीत 1968 में आई फिल्म ‘नील कमल’ का है। इसे अभिनेता महमूद पर फिल्माया गया था। मिलावट पर केंद्रित, यह गीत इस बात की तस्दीक करता है कि खाद्य पदार्थों की मिलावट का खेल बरसों पुराना है। किसी भी तरह से, किसी भी ऐसे पदार्थ को मिलाना, जो भोजन की गुणवत्ता को बदल देता है, खाद्य मिलावट है। जो पदार्थ मिलाया जाता है, उसे मिलावट कहते हैं। भारत में मिलावटी पदार्थों की शुरुआत कब हुई, निश्चित रूप से तो कुछ नहीं कहा जा सकता। लेकिन यह निश्चित है, इसकी दिखाई पड़ने वाली शुरुआत व उसकी बढ़ोतरी स्वतंत्रता के बाद, विकास के बढ़ते दौर के साथ हुई है। जनसंख्या, विज्ञान और व्यापारिक गतिविधियों में वृद्धि के साथ जैसे-जैसे वस्तुओं की मांग बढ़ी, वैसे-वैसे मिलावट में भी वृद्धि हुई है। नकली-सस्ती चीजों को मिलाकर बेचने वाले मुनाफा भी अधिक कमाते हैं। एफएसएसएआई की रिपोर्ट से ये साफ हो चुका है कि भारत में 13 फीसदी खाना गुणवत्ता के मानक स्तर से नीचे है। आज मिलावट का स्वरूप बदल चुका है। कोई भी खाद्य पदार्थ, इससे अछूता नहीं है। आईआईटी बॉम्बे की एक रिसर्च रिपोर्ट के अनुसार, अब नमक भी सुरक्षित नहीं रहा। बड़ी-बड़ी कंपनियां नमक में प्लास्टिक मिलाती हैं। खाद्य पदार्थ फल, सब्जी, औषधि पदार्थ, चॉकलेट आइसक्रीम, सौंदर्य प्रसाधन आदि में घातक कृत्रिम रसायन और कीटनाशक मिले हैं। नवजात शिशु दूध भी शुद्ध पी रहा है, इसकी कोई गारंटी नहीं है। यह मिलावटी उत्पाद हमारे जीवन में क्या-क्या उत्पात मचा सकते हैं, यह जानकर हमारी रूह कांप सकती है। अनेक मिलावटी सामग्रियों में से ज्यादातर पदार्थों में केमिकलों की मिलावट की जाती है। ये केमिकल मानव स्वास्थ्य पर अल्पकालीन से लेकर दीर्घकालीन प्रभाव तक छोड़ते हैं। खाद्य पदार्थो की मिलावट का बुरा प्रभाव डायरिया, पेट दर्द, मितली, उल्टी, आंखों की समस्या, सिर दर्द, कैंसर, खून की कमी, नींद न आना, लकवा और मस्तिष्क को क्षति, पेट के विकार, जोड़ों के दर्द, लिवर विकार, ड्राप्सी, आंत्रशोथीय समस्याओं, श्वसन संबंधी परेशानियों, कैंसर, कार्डियक अरेस्ट, ग्लूकोमा, गुर्दों में खराबी,पाचन तंत्र के विकारों आदि के रूप में सामने आते हैं। नए-नए रोगों के चलते डॉक्टरों के यहां लगी रोगियों की कतारें, काफी हद तक मिलावटी खाद्य पदार्थों का ही नतीजा हैं। ऐसा माना जाता है, दिन-भर के भोजन में सबसे ज्यादा और संतुलित पोषण किसी चीज से मिलता है, तो वो सब्जियां हैं। भारत की खाद्य सुरक्षा एवं मानक अथॉरिटी की एक रिपोर्ट के मुताबिक, देश भर के बाजारों में बेची जा रही सब्जियों में से कम से कम 9.5 फीसदी खाने लायक नहीं पाई गई हैं।</p>
<p>रासायनिक कीटनाशकों से हो रही खेती के कारण पंजाब में कैंसर रोगियों की संख्या बढ़ी। ये पीड़ित कुछ समय पहले तक  अपने इलाज के लिए बठिंडा से बीकानेर जिस ट्रेन से जाते थे, उसे कैंसर एक्सप्रेस के नाम से पुकारा जाने लगा था। लोग इस ट्रेन का असली नाम तक भूल गए थे। कृषि वैज्ञानिक बताते हैं, कीड़े-मकोड़ों और बीमारियों की रोकथाम के लिए आजकल अनाज, फल, सब्जियों आदि पर अंधाधुंध पेस्टीसाइडों का प्रयोग किया जाता है, जिनमें से कई का असर पदार्थों को धोने पर भी नहीं जाता। ये बचे हुए पेस्टीसाइड शरीर के प्रमुख अंगों पर जहरीला असर डालते हैं। भारत में दूध में मिलावट एक चुनौती है। बीस फीसदी से ज्यादा दूध मिलावट करके तैयार किया जाता है। भारत में खुले मसालों की बिक्री अभी भी थमी नहीं है, जबकि 2018 में बने कानून के अनुसार ऐसा करना गैर कानूनी है। अनेक डिब्बाबंद खाद्य पदार्थों में कृत्रिम फ्लेवर डाला जाता है। सौंदर्य प्रसाधनों में प्रिजर्वेटिव के हानिकारक प्रभावों से कोई नहीं बचा है। बात दवाओं की करें, तो इसमें मिलावट कोई नया विषय नहीं। दवाओं की मिलावट अच्छे या बुरे स्वास्थ्य को नहीं, बल्कि जिंदगी और मौत को निर्धारित करती है। जीवन रक्षक दवाइयों के मामलों में दवा बदलने का मौका नहीं होता है, यहां मिलावट आपको सीधा मौत देती है। हाल ही में दिल्ली पुलिस ने कैंसर की नकली दवा बनाने वाले गैंग का भंडाफोड़ किया है। पकड़े गए आरोपी अस्पताल से खाली शीशियां लेते थे, फिर उनमें नकली दवाई भर उसे बेच देते थे। अब सवाल उठता है कि जिन लोगों ने ये नकली दवाएं खाई हैं, उनका क्या हश्र हुआ होगा। खाने-पीने की वस्तुओं के अलावा अनेक ऐसी वस्तुएं हैं, जो आम आदमी इस्तेमाल करता है और अनजाने में ही उनके इस्तेमाल से होने वाले नुकसानों का खमियाजा भुगतता  है। शोध बताते हैं, हम लोग मिलावटी खाद्य पदार्थों का इस्तेमाल करते-करते उनके रूप-रंग को देखने के इतने आदी हो गए हैं कि असली चीजें देखने या प्रयोग करने पर नकली जैसी लगने लगती हैं। सबसे विकट स्थिति उपभोक्ता के सामने होती है, जो ज्यादातर मामलों में असली सामान की पहचान करने की बुद्धिमत्ता नहीं रखते। यद्यपि मिलावट रोकने के लिए सरकार ने अनेक उपाय किए हैं। समय-समय पर कमजोर नियमों में सुधार भी किए जाते रहे हैं, फिर भी मिलावट का कहर कम नहीं हो पा रहा है।</p>
<p>इस बारे में अतिरिक्त आयुक्त खाद्य सुरक्षा एवं औषधि नियंत्रण, राजस्थान, जयपुर के पंकज ओझा का कहना है, आमजन को शुद्ध खाद्य पदार्थ उपलब्ध करवाने के लिए विभाग की ओर से मिलावट की रोकथाम के लिए निरंतर अभियान चलाया जा रहा है। आप देख सकते हैं, त्योहारों का सीजन शुरू होने पर व्यापारियों के साथ ही विभाग भी चौकन्ना हो जाता है और छापेमारी की गतिविधियां बढ़ जाती हैं। क्योंकि दुकानदारों द्वारा लंबे समय से रखे गए स्टॉक को त्योहारों पर उसकी मिठाइयां बनाकर खपाने की प्रवृत्ति होती है। त्योहार ऐसा मौका होता है, जब जनता द्वारा अधिक मिठाइयां खरीदी जाती हैं। इसलिए व्यापारियों की सोच भी यही होती है कि जनता त्योहार पर अवश्य ही उनसे मिठाइयां खरीदेगी। इसलिए लाभ कमाने के लालच में अधिक मिलावट की जाती है। खाद्य सुरक्षा मानकों को लेकर हम समय-समय पर व्यापारियों को जागरूक भी करते रहते हैं। हाल में हमने ' शुद्ध आहार मिलावट पर वारझ् अभियान के तहत  एक सेमिनार का आयोजन भी किया था, जिसमें बड़ी संख्या में फूड व्यापारी शामिल हुए थे। हमारी टीम द्वारा उन्हें खाद्य पदार्थों में जले हुए तेल के प्रयोग को रोके जाने और फोर्टिफाइड चावल, नमक, तेल, दूध, आटा आदि के उपयोग और उत्पादन के साथ अन्य सुरक्षा मानकों को लेकर जागरूक भी किया गया था। अगर आम आदमी चाहे तो मिलावट का संदेह होने पर मुखबिर योजना के तहत शिकायत दर्ज करवा सकता है। शिकायत दर्ज करवाने के लिए 181 टोल फ्री नंबर पर कॉल कर सकता है। व्हाट्सएप नंबर 9462819999 पर मैसेज कर सकता है, संपर्क पोर्टल पर शिकायत कर सकता है, जिला कलेक्टर कंट्रोल रूम और जिला मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कंट्रोल रूम में शिकायत दर्ज कर सकता है। आम आदमी मिलावट की जांच के लिए मोबाइल चल खाद्य प्रयोगशाला पर तुरंत जांच करवा सकता है। मेरा मानना है, आमजन को सचेत करने के लिए जागरूकता कार्यक्रम चलाया जाना बेहद जरूरी है। जिसमें नुक्कड़ नाटक, मिलेट्स मेले आदि चलाए जाने चाहिए। इसके अलावा बाजार मूल्य से कम मूल्य पर बेची जाने वाली वस्तुओं पर संदेहात्मक फोकस किया जाना चाहिए। आईई सी की गतिविधियां बढ़ाई जानी चाहिए, आदतन मिलावटखोरों पर विशेष निगरानी रखी जानी चाहिए। मुझे लगता है, अभियान की असफलता का एक कारण स्थाई अभिहित अधिकारी और खाद्य सुरक्षा अधिकारियों का न होना भी है। इसके अलावा आम जनता में जागरूकता की कमी और मिलावट के प्रति सही सूचनाओं का प्राप्त न होना भी मुहिम की प्रगति की दिशा में बाधक है। साथ ही माननीय न्यायालय में दोषियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्यवाही का अभाव होना और निर्धारित अवधि में लगाए गए केस का निर्णय न होना और नवीनीकरण की प्रक्रिया का सही ना होना भी एक बड़ा कारण माना जा सकता है। मेरा मानना है, एक आम आदमी मिलावट से पूरी तरह तो नहीं बच सकता। लेकिन थोड़ी जागरूकता और सावधानी से कुछ हद तक इससे बचा जा सकता है।</p>
<p>अफसोस मिलावट रोकने के लिए प्रभावी कानून भी बनाए गए हैं। लेकिन मिलावट जैसा जघन्य कृत्य केवल कानूनों से नहीं थम सकता। इस पर प्रभावी रोक के लिए निमार्ताओं, खुदरा व्यापारियों, सरकार और उपभोक्ताओं को सामने आना होगा। जनता को जागरूक बनकर व्यापारियों को यह बताना होगा कि मिलावट जैसा आपराधिक कृत्य किसी भी कीमत पर स्वीकार्य नहीं होगा। समाज को इस जुर्म के अपराधी व्यापारियों को बहिष्कृत भी करना होगा। इससे अन्य व्यापारियों को भी सीख मिलेगी। ध्यान रहे, मिलावट करने वाले या ऐसा सामान बेचने वालों के विरुद्ध हत्या के प्रयास जैसी सख्त धाराओं के तहत कार्रवाई होनी बहुत जरूरी है, तभी सही मायनों में मिलावटखोरों पर नकेल कसी जा सकेगी।<br /><br /><strong>-गीता यादव</strong><br /><strong>(ये लेखक के अपने विचार हैं)</strong></p>
<p> </p>
<p> </p>
<p> </p>]]>
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                <pubDate>Mon, 24 Jun 2024 12:30:19 +0530</pubDate>
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                <title>पनीर में मिलावट के मामले में आरोपी को कैद</title>
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                        <![CDATA[निरीक्षण के दौरान संस्थान पर पनीर विक्रय हेतु रखा था।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/imprisonment-of-the-accused-in-case-of-cheese-adulteration/article-53793"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-08/court-hammer01.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर की अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट क्रम संख्या 1 ने पनीर में मिलावट करने के मामले में आरोपी को दोषी करार देते हुए एक साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही न्यायालय ने आरोपी पर, 2000 रुपए का जुर्माना भी लगाया है। अभियोजन अधिकारी रेखा खींची ने बताया कि खाद्य निरीक्षक चौथमल शर्मा ने 11 अप्रैल 2010 को मेसर्स कृष्ण मुरारी डेयरी कैथूनीपोल कोटा का अचानक निरीक्षण किया था। निरीक्षण के दौरान संस्थान पर पनीर विक्रय हेतु रखा हुआ था। मिलावट का शक होने पर नियमानुसार उसके नमूने खाद्य निरीक्षक द्वारा लिए गए तथा जांच करवाई गई, तो सैंपल पनीर में मिलावट पाई गई। इस पर मोखापाड़ा निवासी डेयरी संचालक जयपाल वासवानी पुत्र केशवदास वासवानी को दोषी मानते हुए उसके खिलाफ धारा 7/16 खाद्य अपमिश्रण निवारण अधिनियम 1954 के तहत कार्रवाई के लिए न्यायालय में 31 जुलाई 2010 को आरोप पत्र पेश किया था। न्यायालय ने प्रसंज्ञान लेते हुए 8 सितंबर 2010 को मामला दर्ज किया तथा आरोपी जयपाल वासवानी को न्यायालय में तलब किया गया। न्यायालय में सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से चार गवाहों के बयान दर्ज कराए गए और 15 दस्तावेज पेश किए गए। इस पर पीठासीन अधिकारी विभा आर्य ने दोनों पक्षों की बहस को सुनने के बाद आरोपी को दोषी करार देते हुए फैसले में लिखा कि आरोपी धारा 7/16 खाद्य अपमिश्रण निवारण अधिनियम 1954 के आरोप में आने पर दंडनीय अपराध प्रमाणित पाया जाता है, जिससे लोक स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव पड़ रहा है। खाद्य पदार्थों में की जाने वाली मिलावट के परिणाम स्वरूप ही आजकल नई-नई बीमारियां पैदा हो रही है। इस प्रकरण के तथ्य और परिस्थितियों एवं अपराध की गंभीरता को मद्देनजर रखते हुए आरोपी को दंडित किया जाना न्यायोचित होगा, इसलिए आरोपी जयपाल वासवानी को एक साल के कठोर कारावास और 2000 रूपए के अर्थदंड से दंडित किया जाता है।</p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 05 Aug 2023 15:36:21 +0530</pubDate>
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