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                <title>special session - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>महिला आरक्षण पर यूपी विधानसभा में हंगामा : सत्ता पक्ष-विपक्ष आमने-सामने, जानबूझकर जनता को गुमराह करने लगाया आरोप</title>
                                    <description><![CDATA[उत्तर प्रदेश विधानसभा में महिला आरक्षण को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जोरदार टकराव हुआ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसे महिलाओं के सम्मान की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताया। वहीं, विपक्ष ने इसे केंद्र का मुद्दा बताकर विरोध किया। विधानसभा अध्यक्ष ने चर्चा को संवैधानिक करार देते हुए विपक्ष के हंगामे को दुर्भाग्यपूर्ण कहा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/uproar-in-up-assembly-over-womens-reservation-ruling-party-and/article-152165"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/up.png" alt=""></a><br /><p>लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा के विशेष सत्र में महिला आरक्षण संशोधन विधेयक को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस और टकराव देखने को मिला। नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय ने साफ तौर पर कहा कि यह मुद्दा केंद्र सरकार के अधिकार क्षेत्र का है, इसलिए इस पर राज्य विधानसभा में चर्चा नहीं होनी चाहिए। उन्होंने सरकार के प्रस्ताव का विरोध करते हुए आरोप लगाया कि सरकार जानबूझकर जनता को गुमराह करने का प्रयास कर रही है । उनके इस बयान के बाद सदन में माहौल गरमा गया। वहीं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना ने विपक्ष के रुख पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि महिला सशक्तिकरण को लेकर सरकार पूरी तरह प्रतिबद्ध है और यह मुद्दा पूरे देश व प्रदेश की महिलाओं के सम्मान और अधिकारों से जुड़ा है। विपक्ष द्वारा इस पर सवाल उठाना दुर्भाग्यपूर्ण है।</p>
<p>स्थिति को संभालने के लिए विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने हस्तक्षेप किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी विषय पर सदन में चर्चा कराई जा सकती है और अध्यक्ष को विशेष अधिकार प्राप्त हैं, जिनका प्रयोग करते हुए इस विषय पर चर्चा कराई जा रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि अभी चर्चा शुरू भी नहीं हुई है और विपक्ष पहले से ही उतावला दिखाई दे रहा है। उन्होंने विशेष सत्र के आयोजन के लिए सभी सदस्यों का अभिनंदन किया।</p>
<p>मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि वर्ष 2023 में केंद्र सरकार द्वारा पारित महिला वंदन अधिनियम महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की दिशा में ऐतिहासिक कदम है। उन्होंने कहा कि इस प्रावधान के तहत महिलाओं की हिस्सेदारी 33 प्रतिशत सुनिश्चित की जा रही है, जो अन्य प्रतिनिधित्व को जोड़ने पर लगभग 40 प्रतिशत तक पहुंच सकती है। उन्होंने विपक्ष पर कटाक्ष करते हुए कहा कि आधी आबादी के लिए उठाए जा रहे सकारात्मक कदम भी उन्हें स्वीकार नहीं हैं, जो उनके दृष्टिकोण को दर्शाता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 30 Apr 2026 12:18:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>महिला आरक्षण पर उत्तर प्रदेश में सियासी घमासान : 30 अप्रैल को विधानमंडल का विशेष सत्र बुलाने का फैसला, सीएम योगी ने विपक्ष पर बोला हमला</title>
                                    <description><![CDATA[मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने महिला आरक्षण के मुद्दे पर 30 अप्रैल को विधानमंडल का विशेष सत्र बुलाने का निर्णय लिया है। कैबिनेट की मंजूरी के बाद, सरकार इस सत्र में विपक्ष के 'महिला विरोधी' रुख के खिलाफ निंदा प्रस्ताव ला सकती है। 2027 के चुनावों से पहले यह कदम यूपी की राजनीति में महिला सशक्तिकरण पर आर-पार की जंग छेड़ेगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/political-turmoil-in-uttar-pradesh-over-womens-reservation-decision-to/article-151038"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/cm-yogi.png" alt=""></a><br /><p>लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने 2027 के विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए महिला आरक्षण के मुद्दे पर अपनी राजनीतिक रणनीति तेज कर दी है। इसी क्रम में उत्तर प्रदेश सरकार ने 30 अप्रैल को विधानमंडल का विशेष सत्र बुलाने के प्रस्ताव को रविवार रात कैबिनेट बाई सर्कुलेशन के जरिए मंजूरी दे दी। संसद में नारी शक्ति वंदन संशोधन विधेयक के पारित न हो पाने के बाद इस मुद्दे पर सियासत गरमा गई है। विपक्ष जहां विधेयक की खामियों को गिनाकर अपने विरोध को सही ठहरा रहा है, वहीं भारतीय जनता पार्टी इस मुद्दे को लेकर विपक्ष पर हमलावर है और इसे चुनावी रणनीति का अहम हिस्सा बना रही है।</p>
<p>मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पहले ही इस मामले में विपक्ष पर तीखा हमला बोल चुके हैं। उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस में विपक्ष के रवैये की तुलना ‘द्रौपदी चीरहरण’ से करते हुए इसे महिला सम्मान और लोकतंत्र के लिए दुर्भाग्यपूर्ण बताया था। सरकारी सूत्रों के अनुसार, 30 अप्रैल को होने वाले इस विशेष सत्र में सरकार महिला आरक्षण पर अपनी स्थिति स्पष्ट करेगी और विपक्ष के रुख को लेकर उसे घेरने की रणनीति अपनाएगी। सत्र के दौरान विपक्ष के खिलाफ निंदा प्रस्ताव लाने की भी चर्चा है।</p>
<p>चूंकि सत्र बुलाने के लिए सदस्यों को कम से कम सात दिन पहले सूचना देना जरूरी होता है, इसलिए प्रस्ताव को कैबिनेट बाई सर्कुलेशन के जरिए मंजूरी दी गई। अब इसे राज्यपाल की स्वीकृति के लिए भेजा जाएगा। सरकार का आरोप है कि विपक्ष महिला सशक्तीकरण जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे पर भी राजनीति कर रहा है। वहीं, विपक्ष इस विधेयक को अधूरा और खामियों से भरा बताते हुए सरकार की मंशा पर सवाल उठा रहा है।</p>
<p>ऐसे में 30 अप्रैल को होने वाला यह विशेष सत्र सिर्फ विधायी कार्यवाही तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच सीधी राजनीतिक टकराहट का मंच भी बनेगा, जहां दोनों पक्ष महिला आरक्षण जैसे संवेदनशील मुद्दे पर जनता के सामने अपनी-अपनी रणनीति और संदेश रखने की कोशिश करेंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 20 Apr 2026 13:24:25 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>कांग्रेस ने परिसीमन को लेकर केंद्र पर बोला हमला : प्रतिनिधित्व पर दिए आश्वासनों पर उठाया सवाल, जनता को जानबूझकर धोखा देने का लगाया आरोप</title>
                                    <description><![CDATA[कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने केंद्र सरकार पर परिसीमन मुद्दे पर राष्ट्र को 'धोखा' देने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि दक्षिण और पूर्वी राज्यों का लोकसभा प्रतिनिधित्व कम हो जाएगा, जो संवैधानिक नैतिकता का उल्लंघन है। रमेश ने इसे डॉ. अंबेडकर की विरासत का अपमान बताते हुए सरकार की मंशा पर गंभीर सवाल उठाए हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/congress-attacked-the-center-over-delimitation-raised-questions-on-the/article-150483"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/jairam-ramesh-4.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने बुधवार को केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला और सरकार पर जानबूझकर धोखा देने और संसदीय प्रतिनिधित्व पर पहले दिये गये आश्वासनों को कमजोर करने का आरोप लगाया। सोशल मीडिया साइट ‘एक्स’ पर लिखे एक तीखे पोस्ट में, जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि परिसीमन पर केंद्र सरकार के दावों का आगामी संसद के विशेष सत्र के लिए प्रसारित विधेयकों में खंडन किया गया है।</p>
<p>उन्होंने कहा, “केंद्र सरकार एकमात्र विशिष्ट विशेषता उनकी बेजोड़ भ्रामक नेतृत्व क्षमता वाली पार्टी है। उन्होंने परिसीमन मुद्दे पर राष्ट्र के साथ जानबूझकर छल किया है।” प्रस्तावित परिवर्तनों के संभावित प्रभाव पर चिंता व्यक्त करते हुए, कांग्रेस नेता ने दावा किया कि कई क्षेत्रों के लोकसभा में सापेक्ष प्रतिनिधित्व में कमी आ सकती है। उन्होंने कहा, “दक्षिणी राज्यों के सदस्यों की लोकसभा में संख्या कम हो जाएगी और इसी तरह की स्थिति उत्तर-पश्चिम भारत के छोटे राज्यों और पूर्वी राज्यों की भी है।” उन्होंने सरकार की विफलता पर सवाल उठाया, जो सभी राज्यों में सीटों में एक समान एवं आनुपातिक वृद्धि करने की अपनी पिछली प्रतिबद्धता का सम्मान करने में विफल रही।</p>
<p>जयराम रमेश ने कहा, “सभी राज्यों के लिए लोकसभा में समानुपातिक संख्या में वृद्धि का जो वादा केंद्र सरकार और उनके कुछ सहयोगियों ने किया था, उसका क्या हुआ? ऐसा नहीं हुआ है।” उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार के आश्वासनों पर भरोसा नहीं किया जा सकता।” उन्होंने सरकार पर संवैधानिक सिद्धांतों के बजाय राजनीतिक लाभ को प्राथमिकता देने का आरोप लगाया। जयराम रमेश ने कहा,“वह सत्ता हथियाने की अपनी अशिष्ट प्रवृत्ति से ऊपर उठकर एक राजनेता बनने में असमर्थ हैं यहां तक कि परिसीमन जैसे संवेदनशील मुद्दे पर भी।”</p>
<p>कांग्रेस ने इस कदम के समय पर भी आपत्ति दर्ज की और कहा कि विधेयक की प्रतियां डॉ बी.आर.अंबेडकर की जयंती पर अपलोड किये गये थे। जयराम रमेश ने परिसीमन प्रावधानों को बाबासाहेब की विरासत का अपमान करार दिया और 25 नवंबर, 1949 को संविधान सभा में डॉ अंबेडकर द्वारा संवैधानिक नैतिकता से मुक्त सरकार के खतरों के बारे में दी गयी चेतावनी का हवाला दिया। जनसंख्या परिवर्तन के आधार पर संसद एवं विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं को पुनर्निर्धारित करने की परिसीमन प्रक्रिया लंबे समय से एक राजनीतिक रूप से संवेदनशील मुद्दा रही है। इसका हालांकि उद्देश्य समान प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करना है लेकिन कई विपक्षी दलों, विशेष रूप से दक्षिणी राज्यों के दलों ने चिंता व्यक्त की है कि जनसंख्या आधारित समायोजन से क्षेत्रों के बीच सत्ता संतुलन बिगड़ सकता है। सरकार का हालांकि कहना है कि परिसीमन संबंधी कोई भी प्रक्रिया संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार ही की जाएगी, लेकिन संसद के विशेष सत्र से पहले यह मुद्दा विवाद का विषय बने रहने का अनुमान है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 15 Apr 2026 14:02:07 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>नारी शक्ति वंदन बिल पर सरकार की मंशा संदिग्ध, विपक्ष को मसौदा तक नहीं मिला : सतीश पौल मुंजनी</title>
                                    <description><![CDATA[झारखंड कांग्रेस के मीडिया चेयरमैन सतीश पौल मुंजनी ने नारी शक्ति वंदन बिल की गोपनीयता पर केंद्र को घेरा है। उन्होंने आरोप लगाया कि 16 अप्रैल से सत्र शुरू होने के बावजूद विपक्ष को विधेयक का मसौदा नहीं दिया गया। कांग्रेस ने इसे लोकतांत्रिक परंपराओं के खिलाफ बताते हुए सरकार से राजनीतिक लाभ के बजाय स्वस्थ बहस की मांग की है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/governments-intention-on-nari-shakti-vandan-bill-doubtful-opposition-did/article-150393"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/satish-paul.png" alt=""></a><br /><p>रांची। झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मीडिया चेयरमैन सतीश पौल मुंजनी ने नारी शक्ति वंदन बिल (महिला आरक्षण बिल) को लेकर केंद्र सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। मुंजनी ने कहा कि 16 अप्रैल से शुरू हो रहे तीन दिवसीय विशेष सत्र में जिस महत्वपूर्ण बिल को पारित कराने की बात की जा रही है, उसका मसौदा आज 14 अप्रैल तक भी विपक्षी दलों को उपलब्ध नहीं कराया गया है। मुंजनी ने कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और लोकतांत्रिक परंपराओं के खिलाफ है। इतना महत्वपूर्ण और दूरगामी प्रभाव वाला विधेयक बिना पूर्व सूचना और बिना मसौदा साझा किए लाया जाना यह दर्शाता है कि सरकार स्वस्थ बहस और सार्थक विचार-विमर्श से बचना चाहती है। </p>
<p>उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार केवल दिखावटी तरीके से महिला सशक्तिकरण का संदेश देना चाहती है, जबकि वास्तविकता में वह विपक्ष को बिना तैयारी के सदन में लाकर बहस को सीमित करना चाहती है। मुंजनी ने कहा कि महिला आरक्षण जैसे महत्वपूर्ण विषय पर सभी दलों के बीच व्यापक चर्चा, सुझाव और सहमति आवश्यक है। लेकिन केंद्र सरकार की जल्दबाजी और गोपनीयता यह संकेत देती है कि उसकी प्राथमिकता पारदर्शिता नहीं, बल्कि राजनीतिक लाभ उठाना है।</p>
<p>सरकार की मंशा महिलाओं की हित में है तो तुरंत इस बिल का विस्तृत मसौदा सभी विपक्षी दलों को उपलब्ध कराए, ताकि सदन में सार्थक और ठोस बहस हो सके और देश की महिलाओं के हित में एक मजबूत और प्रभावी कानून बनाया जा सके। मुंजनी ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस पार्टी महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए प्रतिबद्ध है, लेकिन किसी भी महत्वपूर्ण कानून को बिना चर्चा और तैयारी के पारित करना लोकतंत्र की भावना के खिलाफ है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 14 Apr 2026 17:25:09 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>सोनिया गांधी का सरकार पर निशाना : असली चिंता महिला आरक्षण नहीं, बल्कि प्रस्तावित परिसीमन, राजनीतिक लाभ लेने की मंशा का लगाया आरोप</title>
                                    <description><![CDATA[कांग्रेस नेता सोनिया गांधी ने केंद्र सरकार की नीतियों पर तीखा हमला करते हुए प्रस्तावित परिसीमन को "संविधान पर हमला" करार दिया। उन्होंने लेख के जरिए चेतावनी दी कि जनगणना में देरी और महिला आरक्षण को परिसीमन से जोड़ना लोकतांत्रिक संतुलन बिगाड़ सकता है। सोनिया ने जातिगत जनगणना और पारदर्शिता की मांग दोहराई है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/sonia-gandhis-target-on-the-government-is-that-the-real/article-150190"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/sonia-gandhi-issued-notice.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने एक निजी अखबार में लिखे अपने लेख के जरिए केंद्र सरकार पर महिला आरक्षण और परिसीमन के मुद्दे को लेकर हमला बोला है। सोनिया गांधी ने सोमवार को यहां स्पष्ट तौर पर कहा कि मौजूदा समय में असली चिंता महिला आरक्षण नहीं, बल्कि प्रस्तावित परिसीमन है, जिसे उन्होंने "बेहद खतरनाक" और "संविधान पर हमला" करार दिया। अपने लेख में उन्होंने चेतावनी दी कि संसद के विशेष सत्र में जिस तरह परिसीमन का मुद्दा सामने आ रहा है, वह लोकतांत्रिक संतुलन को प्रभावित कर सकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जल्दबाजी में इस विषय को आगे बढ़ा रही है, जिसके पीछे राजनीतिक लाभ लेने की मंशा हो सकती है।</p>
<p>उन्होंने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि विपक्ष से समर्थन तो मांगा जा रहा है लेकिन इस अहम मुद्दे पर पारदर्शिता नहीं बरती जा रही। उन्होंने यह भी कहा कि विपक्ष की ओर से सर्वदलीय बैठक की मांग को लगातार नजरअंदाज किया गया है। सोनिया गांधी ने याद दिलाया कि 2023 में संसद द्वारा पारित नारी शक्ति वंदन अधिनियम के तहत लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान पहले ही किया जा चुका है। हालांकि, इसके क्रियान्वयन के लिए जनगणना और परिसीमन जरूरी है।</p>
<p>उन्होंने सवाल उठाया कि यदि सरकार 2029 से महिला आरक्षण लागू करना चाहती है, तो यह निर्णय पहले क्यों नहीं लिया गया। साथ ही उन्होंने कहा कि लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाने का फैसला केवल गणितीय आधार पर नहीं, बल्कि राजनीतिक संतुलन को ध्यान में रखकर होना चाहिए, ताकि जनसंख्या नियंत्रण में आगे रहे राज्यों को नुकसान न हो। इसके अलावा उन्होंने जातिगत जनगणना में देरी पर भी सरकार की आलोचना की और कहा कि बिहार और तेलंगाना जैसे राज्यों ने कम समय में सर्वे कर यह साबित कर दिया है कि यह कार्य संभव है।</p>
<p>अंत में उन्होंने 2021 की जनगणना टालने के फैसले पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि इससे करोड़ों लोग सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित रह गये। उन्होंने सरकार से अपील की कि ऐसे महत्वपूर्ण फैसलों पर जल्दबाजी के बजाय विपक्ष के साथ व्यापक चर्चा की जाय और पूरी प्रक्रिया को लोकतांत्रिक बनाया जाया। गौरतलब है कि महिला आरक्षण पर 16-18 अप्रैल तक संसद का तीन दिवसीय विशेष सत्र बुलाया गया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 13 Apr 2026 17:36:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>कांग्रेस ने दिया उत्तराखंड के बापूग्राम मुद्दे पर चल रहे धरने को समर्थन, त्वरित निर्णय लेने की उठाई मांग</title>
                                    <description><![CDATA[कांग्रेस नेता जयेंद्र रमोला ने बापूग्राम धरने को समर्थन देते हुए विधायक प्रेमचंद अग्रवाल पर भ्रम फैलाने का आरोप लगाया। उन्होंने जनहित में विधानसभा सत्र या अध्यादेश लाने की मांग की है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/congress-extended-support-to-the-ongoing-strike-on-bapugram-issue/article-143698"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/uttrakhand-conress.png" alt=""></a><br /><p>ऋषिकेश। उत्तराखंड में कांग्रेस ने रिषिकेश के संवेदनशील बापूग्राम मामले को लेकर चल रहे धरने को अपना समर्थन दिया है। बुधवार को आंदोलनकारियों के बीच कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयेंन्द्र रमोला ने पहुंचकर समर्थन व्यक्त किया और सरकार से इस मुद्दे पर त्वरित निर्णय लेने की मांग उठाई गई।</p>
<p>उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय विधायक प्रेमचंद अग्रवाल की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं। कहा कि लंबे समय से चले आ रहे इस विवाद पर विधायक की ओर से ठोस पहल नहीं की गई, जिससे क्षेत्र की जनता में असंतोष बढ़ता जा रहा है।</p>
<p>आरोप लगाया कि विधायक द्वारा एक ही दिन में खिचवाई गई दो तस्वीरों को अलग-अलग दिन की बताकर जनता के बीच भ्रम फैलाया जा रहा है। उनका कहना है कि इस तरह की गतिविधियां जनभावनाओं के साथ खिलवाड़ हैं और इससे समस्या के समाधान की बजाय विवाद और गहरा रहा है।</p>
<p>धरना स्थल पर मौजूद लोगों ने सरकार से मांग की कि मामले की गंभीरता को देखते हुए इसे प्राथमिकता पर लिया जाए। उन्होंने कहा कि ऋषिकेश से जुड़े इस जनहित के मुद्दे पर तत्काल विधानसभा का विशेष सत्र बुलाया जाना चाहिए। साथ ही समस्या के स्थायी समाधान के लिए अध्यादेश लाने की मांग भी जोर-शोर से उठाई गई।</p>
<p>वक्ताओं ने कहा कि जब तक बापूग्राम के निवासियों की समस्याओं का स्पष्ट और स्थायी समाधान नहीं निकलता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने जल्द ठोस कदम नहीं उठाए तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। धरना स्थल पर मौजूद लोगों ने एक स्वर में कहा कि यह केवल स्थानीय मुद्दा नहीं, बल्कि जनविश्वास और प्रशासनिक जवाबदेही से जुड़ा मामला है, जिसका समाधान शीघ्र होना आवश्यक है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 18 Feb 2026 17:01:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>पूर्णिमा यूनिवर्सिटी : डिजिटल युग में बदलती स्टोरी टेलिंग शैली पर चर्चा, ‘फैक्ट्स एंड फ्रेम्स विजुअल एंड डिजिटल स्टोरी टेलिंग’ विषय पर विशेष सेशन </title>
                                    <description><![CDATA[पूर्णिमा यूनिवर्सिटी में ‘फैक्ट्स एंड फ्रेम्स विजुअल एंड डिजिटल स्टोरी टेलिंग’ विषय पर विशेष सेशन आयोजित हुआ। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/special-session-on-facts-and-frames-visual-and-digital-story/article-121446"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-07/gjkf.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। पूर्णिमा यूनिवर्सिटी में ‘फैक्ट्स एंड फ्रेम्स विजुअल एंड डिजिटल स्टोरी टेलिंग’ विषय पर विशेष सेशन आयोजित हुआ। सेशन के मुख्य वक्ता अंतरराष्ट्रीय पत्रकार एवं मीडिया विशेषज्ञ डॉ. डेविड डंकले गाइमा ने जर्नलिज्म एनीमेशन और गेम डिजाइन के स्टूडेंट्स से संवाद करते हुए डिजिटल युग में बदलती हुई स्टोरी टेलिंग की शैली पर प्रकाश डाला।</p>
<p>सेशन फैकल्टी ऑफ डिजाइन एंड आर्ट्स तथा फैकल्टी ऑफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया। पूर्णिमा यूनिवर्सिटी के जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन डिपार्टमेंट की एचओडी डॉ. आस्था सक्सेना ने मुख्य वक्ता डॉ. डेविड का स्वागत किया। डॉ. डेविड ने मल्टीमीडिया प्रजेंटेशन और केस स्टडी के माध्यम से बताया कि एआई, एथिक्स और क्रॉस प्लेटफॉर्म कंटेंट आज के मीडिया परिदृश्य को किस प्रकार प्रभावित कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि आज की डिजिटल दुनिया में मीडिया की जिम्मेदारी पहले से कहीं अधिक बढ़ गई हैं। सच्चाई को किस रूप में प्रस्तुत किया जाए, यह केवल तकनीकी नहीं बल्कि नैतिक निर्णय भी होता है। सेशन में स्टूडेंट्स की उत्साहपूर्वक भागीदारी रही और उन्होंने विशेषज्ञ वक्ता से संवादात्मक शैली में सवाल पूछकर अपनी जिज्ञासा को शांत किया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>शिक्षा जगत</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 24 Jul 2025 10:20:33 +0530</pubDate>
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                <title>Delhi Service Bill : केजरीवाल ने दिल्ली विधानसभा का बुलाया एक दिवसीय विशेष सत्र</title>
                                    <description><![CDATA[ दिल्ली सेवा बिल के दोनो सदनों में पारित हो जाने के बाद दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली विधानसभा का विशेष सत्र बुलाया है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/delhi-service-bill-arvind-kejriwal-special-session-of-delhi-vidhansabha/article-54093"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-08/arvind_kejriwal_22may.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। दिल्ली सेवा बिल के दोनो सदनों में पारित हो जाने के बाद दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली विधानसभा का विशेष सत्र बुलाया है। केजरीवाल इस बिल का विरोध कर रहे थे जिसके लिए उन्होने विपक्षी दलों को अपने साथ लिया। लेकिन वो इस बिल को संसद से पारित होने से रोक नहीं पाए। इस बिल के पारित होने के बाद केजरीवाल ने 16 अगस्त को दिल्ली विधानसभा का विशेष सत्र बुलाया है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 08 Aug 2023 19:51:47 +0530</pubDate>
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