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                <title>NCLT - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>NCLT RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>सुभाष चंद्रा की निजी दिवालिया प्रक्रिया में नया ट्विस्ट, NCLT ने 25 अगस्त का फैसला रोका; 6.25 करोड़ की योजना पर फिर सुनवाई</title>
                                    <description><![CDATA[जी ग्रुप के संस्थापक सुभाष चंद्रा के निजी दिवालिया मामले में एनसीएलटी (NCLT) की पांच सदस्यीय पीठ ने 25 अगस्त के फैसले पर रोक लगा दी है। पीठ ने बहुमत का स्पष्ट फैसला न बनने के कारण मामले की नए सिरे से सुनवाई करने और चंद्रा द्वारा संपत्तियों के हस्तांतरण पर रोक लगाने का आदेश दिया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/new-twist-in-the-personal-bankruptcy-process-of-subhash-chandra/article-164347"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-09/111200-x-600-px)-(10).png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। जी ग्रुप के संस्थापक सुभाष चंद्रा की निजी दिवालिया प्रक्रिया से जुड़े मामले में नया मोड़ आ गया है। नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) की पांच सदस्यीय पीठ ने 25 अगस्त को दिए गए फैसले पर रोक लगा दी है। पीठ ने कहा कि मामले में स्पष्ट बहुमत नहीं बन पाया, इसलिए अब इसकी नए सिरे से सुनवाई होगी। साथ ही चंद्रा को अपनी किसी भी संपत्ति को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से हस्तांतरित करने या उससे अलग करने पर रोक लगा दी गई है। </p>
<p>यह विवाद चंद्रा की 6.25 करोड़ रुपये के रीपेमेंट प्लान से जुड़ा है, जबकि लेनदारों के स्वीकार किए गए दावों की कुल राशि 22,006.57 करोड़ रुपये है। शुरुआती दो सदस्यीय पीठ के सदस्यों की राय अलग थी। तीसरे सदस्य ने बाद में रीपेमेंट प्लान को मंजूरी देने के पक्ष में फैसला दिया, लेकिन तीनों राय में सहमति नहीं बनी। इसके बाद मामला पांच सदस्यीय पीठ के पास भेजा गया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 01 Sep 2026 12:39:51 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>ओडिशा में कथित भूमि घोटाला: गरीब ग्रामीणों ने JSW, सैफ्रन और लैंको सौदे की SEBI जांच की मांग की, निवेशकों को गुमराह करने और भारी सार्वजनिक नुकसान की चेतावनी</title>
                                    <description><![CDATA[ढेंकानाल के ग्रामीणों ने जेएसडब्ल्यू स्टील से जुड़े कथित भूमि हस्तांतरण घोटाले की जांच हेतु सेबी से गुहार लगाई, किसान अधिकार, निवेशक संरक्षण और बाजार पारदर्शिता पर सवाल उठे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/alleged-land-scam-in-odisha-poor-villagers-demand-sebi-probe/article-140599"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/1200-x-600-px)-(7).png" alt=""></a><br /><p>भुवनेश्वर। निवेशक संरक्षण, नियामक निगरानी और हाशिये पर खड़े किसानों के न्याय से जुड़े गंभीर सार्वजनिक हित के एक मामले में, ओडिशा के ढेंकानाल ज़िले के खड़गप्रसाद और खुरुंटी गांवों के हजारों ग्रामीणों ने प्रतिष्ठित सूचीबद्ध कंपनी जेएसडब्ल्यू स्टील लिमिटेड, दिवालिया लैंको समूह और सैफ्रन रिसोर्सेज प्राइवेट लिमिटेड (जिसकी पिछले कई वर्षों से कोई आय नहीं है) से जुड़े कथित बड़े पैमाने पर भूमि हस्तांतरण में अनियमितताओं की तत्काल जांच के लिए भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) का रुख किया है।</p>
<p>ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि इस मामले के दूरगामी परिणाम केवल बेदखल किसानों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि निवेशकों के भरोसे और भारत के पूंजी बाजारों की विश्वसनीयता पर भी गहरा असर डालते हैं।</p>
<p>यह प्रतिवेदन आंचलिका शिल्पांचल क्षतिग्रस्त प्रजासंघ के उपाध्यक्ष तथा मूल भूमिधर किसानों के निर्वाचित प्रतिनिधि श्री नरेंद्र कुमार साहू द्वारा प्रस्तुत किया गया है। उनका कहना है कि हजारों गरीब ग्रामीणों की लगभग 900 से 1,000 एकड़ उपजाऊ कृषि भूमि को योजनाबद्ध तरीके से डायवर्ट किया गया, अत्यंत कम मूल्यांकन किया गया और ऐसे संरचित लेनदेन के जरिए हस्तांतरित किया गया, जो भूमि वापसी कानूनों को दरकिनार करता है, किसानों के अधिकारों की अनदेखी करता है और ग्रामीणों व सार्वजनिक राजकोष की कीमत पर अनुचित लाभ पहुंचाता है।</p>
<p>2008 से 2010 के बीच, ओडिशा इंडस्ट्रियल इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (IDCO) ने हैदराबाद स्थित लैंको समूह द्वारा प्रस्तावित 1,320 मेगावाट के सुपरक्रिटिकल कोयला आधारित ताप विद्युत संयंत्र के लिए खड़गप्रसाद और खुरुंटी गांवों के किसानों से लगभग 1,000 एकड़ कृषि भूमि का अधिग्रहण किया। किसानों को प्रति एकड़ मात्र ₹3 लाख से ₹6 लाख का मुआवजा दिया गया, वह भी स्थायी रोजगार, व्यावसायिक अवसरों और दीर्घकालिक आर्थिक सुरक्षा के वादों के आधार पर। इन आश्वासनों पर भरोसा कर गरीब किसानों ने अपनी आजीविका का एकमात्र साधन—पैतृक भूमि—सौंप दी।</p>
<p>निर्माण कार्य शुरू हुआ और कई ग्रामीणों ने ठेकेदार, कच्चा माल आपूर्तिकर्ता और परिवहनकर्ता बनने के लिए अपनी बचत निवेश की। हालांकि आंशिक निर्माण के बावजूद परियोजना कभी चालू नहीं हो सकी। बाद में लैंको दिवालिया हो गया और उसने हैदराबाद स्थित राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण (NCLT) में परिसमापन के लिए आवेदन किया। परियोजना परित्यक्त हो गई, ग्रामीण बेरोजगार रह गए और स्थानीय ठेकेदारों व आपूर्तिकर्ताओं पर सैकड़ों करोड़ रुपये के बकाया का बोझ आ गया। जिला प्रशासन, लैंको प्रतिनिधियों और आधिकारिक परिसमापक की उपस्थिति में दिए गए आश्वासनों के बावजूद कोई राहत नहीं मिली।</p>
<p>भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और पुनर्स्थापन में निष्पक्ष मुआवजा एवं पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम की धारा 101 के तहत, पांच वर्षों तक अनुपयोगी रहने वाली भूमि मूल मालिकों या उनके कानूनी उत्तराधिकारियों को लौटाई जानी चाहिए। एक दशक से अधिक समय तक भूमि के उपयोग न होने और ग्रामीणों के बार-बार निवेदनों के बावजूद भूमि वापस नहीं की गई। इसके विपरीत, वित्त वर्ष 2023–24 में NCLT ने इस भूमि को सैफ्रन रिसोर्सेज प्राइवेट लिमिटेड को लगभग ₹10 लाख प्रति एकड़ की चौंकाने वाली कम दर पर हस्तांतरित करने की मंजूरी दी—कुल मिलाकर लगभग ₹92 करोड़—जबकि उसी क्षेत्र में तुलनीय औद्योगिक भूमि ₹80 लाख से ₹1 करोड़ प्रति एकड़ के बीच लेनदेन हो रही थी।</p>
<p>किसी भी स्तर पर प्रभावित ग्रामीणों, IDCO या ओडिशा राज्य सरकार को विश्वास में नहीं लिया गया। कोई पारदर्शी बेंचमार्किंग या स्वतंत्र मूल्यांकन प्रक्रिया दिखाई नहीं देती, जिससे ग्रामीणों को यह विश्वास है कि भूमि मूल्य दबाने और उनके वैध अधिकारों से वंचित करने के लिए लेनदेन को योजनाबद्ध किया गया। इसके तुरंत बाद, कथित तौर पर जेएसडब्ल्यू समूह ने सैफ्रन रिसोर्सेज प्राइवेट लिमिटेड का अधिग्रहण या विलय कर लिया, जिससे उसे लगभग 900 एकड़ प्रमुख औद्योगिक भूमि पर अप्रत्यक्ष नियंत्रण मिल गया।</p>
<p>सार्वजनिक खुलासों और फाइलिंग्स के अनुसार, विलय के बाद उसी भूमि का मूल्यांकन लगभग ₹680 करोड़ किया गया, जो अल्प समय में भारी मूल्यांकन अंतर को उजागर करता है। ग्रामीणों का आरोप है कि यह क्रम भूमि वापसी कानूनों को दरकिनार करने, परिसंपत्ति मूल्यों को गलत तरीके से दर्शाने, निवेशकों को गुमराह करने और अनुचित लाभ सुनिश्चित करने के लिए बनाए गए एक दिखावटी लेनदेन ढांचे की ओर इशारा करता है। यदि यह सिद्ध होता है, तो यह कॉरपोरेट गवर्नेंस और बाज़ार पारदर्शिता की बुनियाद पर सीधा प्रहार होगा।</p>
<p>इस लेनदेन से सार्वजनिक राजकोष और स्थानीय अर्थव्यवस्था को कथित तौर पर भारी नुकसान हुआ है। माना जाता है कि ओडिशा राज्य सरकार को लगभग ₹56 करोड़ की स्टांप ड्यूटी का नुकसान हुआ, जबकि केंद्र सरकार को लगभग ₹200 करोड़ के पूंजीगत लाभ कर का नुकसान हुआ। इसके अतिरिक्त, स्थानीय ठेकेदारों, श्रमिकों, आपूर्तिकर्ताओं और परिवहनकर्ताओं के लगभग ₹250 से ₹300 करोड़ के बकाया अब भी लैंको परियोजना के ध्वस्त होने के बाद से अटके हुए हैं।</p>
<p>वित्तीय और नियामकीय चिंताओं से परे, ग्रामीणों ने गंभीर पर्यावरणीय आशंकाएं भी व्यक्त की हैं। ढेंकानाल क्षेत्र पहले से ही अत्यधिक प्रदूषित है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) अक्सर 400 से ऊपर रहता है। ब्राह्मणी नदी औद्योगिक अपशिष्ट के लिए डंपिंग ग्राउंड बन चुकी है और यह इलाका हाथियों के गलियारों तथा पर्यावरण की दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्रों को समेटे हुए है। उसी भूमि पर किसी भी नई औद्योगिक गतिविधि से दो जिलों में सार्वजनिक स्वास्थ्य, जैव विविधता और पर्यावरणीय संतुलन को अपूरणीय क्षति पहुंचेगी।</p>
<p>अपने आग्रह में, ग्रामीणों ने SEBI से अनुरोध किया है कि वह सैफ्रन रिसोर्सेज से संबंधित जेएसडब्ल्यू स्टील द्वारा BSE और NSE में किए गए खुलासों, फाइलिंग्स और मूल्यांकन वक्तव्यों की जांच करे; यह परखे कि क्या यह लेनदेन गलत प्रस्तुति, नियामकीय आर्बिट्राज, धोखाधड़ी या निवेशक धोखे के दायरे में आता है; और NSE, आयकर विभाग, IDCO तथा राज्य राजस्व प्राधिकरणों के साथ समन्वय कर वैधानिक और वित्तीय उल्लंघनों की पूरी सीमा का पता लगाए। उन्होंने लेनदेन की समीक्षा, निलंबन या रद्दीकरण की मांग भी की है तथा यह भी कहा है कि या तो भूमि मूल किसानों को लौटाई जाए या फिर बाजार दर के अनुरूप मूल्यवृद्धि सहित उचित मुआवजा दिया जाए।</p>
<p>श्री नरेंद्र कुमार साहू ने कहा, “जिसे औद्योगिक विकास के रूप में प्रस्तुत किया गया, उसने पंद्रह वर्षों से अधिक समय तक बेदखली, पीड़ा और वैध अधिकारों से वंचित किए जाने का परिणाम दिया है। यह मामला केवल किसानों की भूमि का नहीं है—यह भारत की नियामक संस्थाओं, निवेशक संरक्षण ढांचे और कानून के शासन की परीक्षा है। यदि ऐसे लेनदेन पर रोक नहीं लगी, तो बाजारों और शासन दोनों में जनता का भरोसा गंभीर रूप से कमजोर होगा।”</p>
<p>इस अपील की प्रतियां भारत के माननीय प्रधानमंत्री, केंद्रीय वित्त मंत्री, कॉर्पोरेट कार्य मंत्री, NSE और BSE के नेतृत्व, भारत के मुख्य सतर्कता आयुक्त तथा ओडिशा के मुख्य सचिव को भेजी गई हैं। ढेंकानाल के किसानों का कहना है कि अब उनकी अंतिम उम्मीद संवैधानिक और नियामक प्राधिकरणों से है कि वे निर्णायक हस्तक्षेप कर नागरिकों, निवेशकों और सार्वजनिक राजकोष को उस लेनदेन से बचाएं, जिसे वे गहराई से अन्यायपूर्ण और शोषणकारी बताते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 23 Jan 2026 14:02:08 +0530</pubDate>
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                <title>ZEE और SONY के मर्जर को एनसीएलटी की मंजूरी, 10 जुलाई को हो गई थी सुनवाई पूरी</title>
                                    <description><![CDATA[जी एंटरटेनमेंट एंटप्राइजेज लिमिटेड  और सोनी पिक्चर्स नेटवर्क्स इंडिया कंपनियों के मर्जर को नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल की मुंबई बेंच से मंजूरी मिल गई है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/nclt-approval-for-merger-of-zee-and-sony-was-completed/article-54262"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-08/sony-zee.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। जी एंटरटेनमेंट एंटप्राइजेज लिमिटेड  और सोनी पिक्चर्स नेटवर्क्स इंडिया कंपनियों के मर्जर को नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल की मुंबई बेंच से मंजूरी मिल गई है। इस डील में पहले बहुत सारी आपत्तियां आ रही थी लेकिन इन सभी आपत्तियों को एनसीएलटी ने खारिज कर दी हैं।</p>
<p>जी और सोनी कंपनियों ने दिसंबर 2021 को मर्जर पर सहमति जताई थी जिसके बाद मामला डील को लेकर एनसीएलटी के पास पर चला गया था। इस मामले में 10 जुलाई को सुनाई पूरी हो गई थी जिसके बाद फैसला सुरक्षित रख लिया गया था। आज एनसीएलटी ने फैसला सुनाते हुए दोनों कंपनियों के मर्जर को मंजूरी थी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>बिजनेस</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 10 Aug 2023 16:21:47 +0530</pubDate>
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