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                <title>lack of maintenance - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>सीवी गार्डन की खूबसूरती पर अब बदहाली की छाया, गार्डन में घूम रहे असामाजिक तत्व, पहले भी कई बार हो चुकी चोरियां</title>
                                    <description><![CDATA[रात में गार्डन की सुंदरता को निखारने वाले फव्वारे व लाइटिंग व्यवस्था पूरी तरह ठप पड़ी है।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/cb-garden-s-beauty-is-now-marred-by-disrepair--with-anti-social-elements-roaming-the-garden-and-numerous-thefts-having-occurred-in-the-past/article-132708"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-11/11128.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। कोटा शहर में अपनी खूबसूरती, हरियाली और शांत वातावरण के लिए पहचान बनाने वाला सीबी गार्डन इन दिनों बदहाली की मार झेल रहा है। एक समय था जब यह गार्डन परिवारों, बच्चों और पर्यटकों की पहली पसंद हुआ करता था। शहर के मंत्री, बड़े अधिकारी और प्रतिष्ठित लोग भी यहां अक्सर सैर करने आते थे, लेकिन आज इसकी दयनीय हालत देखकर हर कोई हैरान है। प्रशासन की अनदेखी और रखरखाव के अभाव ने इस प्रसिद्ध पर्यटन स्थल की सुंदरता पर ग्रहण लगा दिया है। गार्डन में पहले जहां रोजाना चलने वाली जोए ट्रेन बच्चों के लिए आकर्षण का केंद्र थी, अब वह हफ्ते में केवल एक बार ही चलाई जा रही है। इससे बच्चों के साथ आने वाले परिवारों को निराशा का सामना करना पड़ रहा है। वही पार्क में अव्यवस्थाओं की तस्वीर साफ दिखाई देती है। जगह-जगह कचरे के ढेर फैले हुए हैं, जिससे न केवल वातावरण दूषित हो रहा है बल्कि सौंदर्य भी पूरी तरह बिगड़ गया है। </p>
<p><strong>शाम होते ही गार्डन में अंधेरा</strong><br />रात में गार्डन की सुंदरता को निखारने वाले फव्वारे व लाइटिंग व्यवस्था भी पूरी तरह ठप पड़ी है। लाइटें खराब होने से शाम के समय गार्डन में अंधेरा छा जाता है, जिससे सुरक्षा को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। अंधेरा होने पर लोग गार्डन में घूमने से कतराने लगे हैं। वहीं गार्डन में बने दोनों सुविधा घर बदहाली की अव्यवस्था में है। इसमें न तो पानी की व्यवस्था है और नही लाईट की सुविधा है। </p>
<p><strong>लंबे समय से बंद है बोटिंग सुविधा</strong><br />गॉर्डन में वाटर बोटिंग सुविधा भी लंबे समय से बंद पड़ी है। तालाब का पानी दूषित हो चुका है और उसकी देखरेख पूरी तरह ठप नजर आती है। तालाब के चारों ओर का क्षेत्र, जो पहले फोटोग्राफी और घूमने के लिए पसंदीदा स्थान था, अब बदहाल स्थिति में पहुंच चुका है। गंदगी और जलीय काई जमने से तालाब का पानी बदरंग हो चुका है। वहीं गार्डन में लगे बिजली के स्वीच बॉक्स खुले पड़े हुए है, जिससे कभी भी हादसा होने की आशंका बनी रहती है।</p>
<p><strong>जिम्मेदारों की अनदेखी</strong><br />यदि समय रहते गार्डन की मरम्मत और साफ-सफाई पर ध्यान नहीं दिया गया, तो शहर के इस महत्वपूर्ण स्थल की पहचान पूरी तरह मिट जाएगी। सीबी गार्डन को पुन: उसकी पुरानी चमक लौटाने के लिए तत्काल कदम उठाने की जरूरत है। नियमित सफाई, लाइटिंग सुधार, तालाब की साफ-सफाई, जोए ट्रेन और बोटिंग सुविधाओं को फिर से शुरू कर गार्डन को आकर्षक बनाया जा सकता है। यह केवल एक पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि शहर की विरासत है, जिसे बचाना हम सभी की जिम्मेदारी है।<br /><strong>- दीपक नायक, शुभम मेहरा</strong></p>
<p>सीबी गार्डन में मौजूद अव्यवस्थाओं को गंभीरता से लेते हुए प्रशासन जल्द ही आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करेगा। गार्डन में आने वाले पर्यटकों को सभी मूलभूत सुविधाएँ निर्बाध रूप से उपलब्ध हों, इस पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।<br /><strong>- मुकेश चौधरी, केडीए सचिव</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 17 Nov 2025 17:07:34 +0530</pubDate>
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                <title>अंडरपास नाली की महंगी जालियां हुई चोरी</title>
                                    <description><![CDATA[फुटपाथ के पत्थर उखड़े, हादसों का बढ़ा खतरा।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/expensive-nets-of-underpass-drain-stolen/article-121403"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-07/212142roer-(1)1.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर की ट्रैफिक व्यवस्था को सुधारने के लिए तत्कालीन नगर विकास न्यास की ओर से करोड़ों रुपए खर्च कर अंडरपास का निर्माण कराया गया था। देखरेख के अभाव में इसकी दुर्दशा होने लगी है। अंडरपास की नाली पर लगाई गई लोहे की जालियां तक चोरी हो गई है। जिससे यहां के पत्थर उखड़ने के साथ ही हादसों का भी खतरा बना हुआ है। यह स्थिति है झालावाड़ रोड हाइवे पर बने गोबरिया बावड़ी अंडरपास की। न्यास द्वारा करीब 25 करोड़ रुपए की लागत से  गोबरिया  बावड़ी चौराहे पर अंडरपास का निर्माण कराया गया था। जिससे चौराहे पर जाम नहीं लगे और कोटा से झालावाड़ व झालावाड़ से कोटा की तरफ आने वाले वाहन आसानी से निकल सके। अंडरपास के अंदर के हिस्से व दीवारों को आकर्षक रूप से सजाया गया था। वहीं अंडरपास के दोनों तरफ पानी निकासी के लिए फुटपाथ व दीवार के बीच नालियां बनाई गई थी। उन नालियों पर लोहे की जालियों से ढकान किया गया था। जालियां भी काफी मजबूत व भारी भरकम लगाई गई थी। जिससे इन्हें कोई नुकसान नहीं पहुंचा सके। लेकिन हाइवे व 24 घंटे व्यस्त रहने वाले इस अंडरपास को भी चोरों ने नहीं बक्शा। </p>
<p><strong>दोनों तरफ की नालियां बदहाल</strong><br />अंडरपास में एरोड्राम से अनंतपुरा और अनंतपुरा से एरोड्राम की तरफ आने-जाने वाली सड़क के दोनों तरफ नालियां बनी हुई है। इन नालियों के दोनों तरफ की आधी से ’यादा जालियां गायब हो चुकी है। जिससे ये नालियां खुली पड़ी है। चोरों ने जालियों को इस तरह से निकाला जिससे नालियों के पत्थर तक टूट चुके हैं। ये पत्थर नालियों में पड़े होने से पूरी नाली जाम हो रही है। उसमें से पानी निकासी की जगह ही नहीं है। </p>
<p><strong>फुटपाथ के जोड़ भी खुले </strong><br />चोरों ने न केवल नालियों की जालियां चोरी की। वरन. फुटपाथ पर नालियों की सफाई के लिए लोहे की जालियों से जो जोड़ दिया था। उन जोड़ तक की जालियां चोरी की जा चुकी है। जिससे वे खुली पड़ी है। काफी बड़े व चौड़े जोड़ होने से उनमें किसी के भी गिरने या हादसा होने का खतरा बना हुआ है।  इतना ही नहीं करोड़ों की लागत से बना अंडरपास  दुर्दशा का शिकार भी हो रहा है। </p>
<p><strong>दीवार की तरफ मुंह कर चुरा रहे जालियां</strong><br />प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि अक्सर सुबह जल्दी अंडरपास से जाना होता है। उस समय कई बार ऐसा देखा कि कुछ लोग दीवार की तरफ मुंह करके नाली से जाली खोद रहे हैं। उनमें ’यादातर स्मैकची लगे।  उन्हें टोकने का प्रयास भी किया लेकिन डर के कारण हिम्मत नहीं जुटा पाए। </p>
<p><strong>लोग चुराते देख रहे, रोक नहीं रहे</strong><br />जानकारों के अनुसार हाइवे व व्यस्त रोड का अंडरपास होने के बावजूद जहां  की नालियों से लोहे की भारी भरकम व मजबूत जालियां चोरी हो गई। यह एक दो दिन में नहीं काफी समय सो रहा है। लोहे की जालियां चोरी करते हुए कई लोगों ने चोरों को देखा भी होगा लेकिन किसी ने भी उन्हें रोकने व टोकने का प्रयास तक नहीं किया। जिससे चोरों के हौंसले बुलंद होते रहे और धीरे-धीरे-अंडरपास की जालियां गायब होती गई। </p>
<p><strong>सुरक्षा गार्ड तक नहीं</strong><br />कांग्रेस सरकार के समय में विकास कार्य व चौराहों पर सुरक्षा गार्ड तैनात  किए गए थे। जिससे उनकी सुरक्षा हो रही थी और कोई नुकसान भी होता था। लेकिन वर्तमान में अधिकतर जगह पर गार्ड ही नहीं है। जिससे यहां से आए दिन चोरियां हो रही है। </p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />गोबरिया बावड़ी अंडरपास पर पूर्व में सुरक्षा गार्ड लगे हुए थे। लेकिन काफी समय से यहां गार्ड नहीं है। हालांकि समय-समय पर इसकी देखरेख की जाती है। लेकिन हर समय वहां नहीं रह सकते। स्मैकची सुबह जल्दी व रात के समय ऐसा करते हैं। जिससे वे पकड़ में नहीं आ पाते।   <br /><strong>- सतोश तोमर, सहायक अभियंता,  केडीए</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 23 Jul 2025 16:01:25 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>रात में घोड़ा चौराहा हो रहा रोशन व एरोड्राम पर छाया अंधेरा</title>
                                    <description><![CDATA[करीब एक माह से अंधेरे में डूबा है एरोड्राम चौराहा।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/ghoda-square-is-getting-lit-up-at-night-and-darkness-prevails-on-aerodrome/article-121194"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-07/news48.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। कांग्रेस सरकार के समय में करोड़ों रुपए खर्च कर शहर के चौराहों का विकास व सौन्दर्यीकरण कराया गया था। लेकिन देखरेख के अभाव में चौराहों की दुर्दशा होने लगी है। इसका एक उदाहरण हैं एरोड्राम चौराहा। तत्कालीन नगर विकास न्यास(वर्तमान में केडीए) द्वारा करीब 50 करोड़ रुपए की लागत से तो एरोड्राम चौराहे  पर अंडरपास का निर्माण किया गया था। वहीं इसके सौन्दर्यीकरण पर भी 20 करोड़ रुपए से अधिक खर्च किए गए। जिसके तहत यहां टावर्स आॅफ लिबर्टी का निर्माण किया गया था। इन पर मशाल रूप में आकर्षक व रंग बिरंगी लाइटें लगाई गई। ये लाइटें हर बार रंग व डिजाइन बदलती हुई जल रही थी। जिससे शहर के मध्य होने से जो भी यहां से गुजरता उसके लिए यह आकर्षण का केन्द्र था। लेकिन हालत यह है कि पिछले करीब एक माह से यह चौराहा अंधेरे में डूबा हुआ है। इसकी एक भी लाइट नहीं जल रही है। इसका कारण इन लाइटों को रोशन करने वाली बिजली की केबल ही चोरी होना है। जरा से नशे के लिए नशेड़ी महंगी लाइटों व केबल को नुकसान पहुंचा रहे हैं। </p>
<p><strong>अंडरग्राउंड होने से नशेड़ियों के लिए आसान</strong><br />एरोड्राम चौराहे के टावर्स आॅफ लिबर्टी की लाइटों की केबल अंडरपास के नीचे है। जिससे इन तक पहुंचना नशेड़ियों के लिए काफी आसान हो रहा है। यह पहला मौका नहीं है जब यहां के केबल चोरी हुई है। पहले भी कई बार यह चोरी हो चुकी है। केबल के साथ पूर्व में तो पैनल बॉक्स व लाइटें तक चोरी हो गई थी।  जिसे पहले तो समय-समय पर ठीक भी किया गया था। लेकिन अब तो कोई उसे ठीक करने को भी तैयार नहीं है। जिससे यह लम्बे समय से अंधेरे में डूबा हुआ है।  हालांकि संवेदक द्वारा पूर्व में कई बार केबल व लाइटों को पेड़ा बांधकर सही कराया जा चुका है। </p>
<p><strong>सुरक्षा गार्ड होने से घोड़ा चौराहा रोशन</strong><br />एक तरफ जहां एरोड्राम चौराहा अंधेरे में डूबा हुआ है। वहीं दूसरी तरफ इसके नजदीक घोड़े वाला चौराहा रात में रोशन हो रहा है।  जानकारों के अनुसार शुरुआत में सभी चौराहों पर नगर विकास न्यास की ओर से सुरक्षा गार्ड लगाए गए थे। जिससे वहां लगाई गई लाइटों के साथ ही विकास कार्यों की सुरक्षा हो सके। लेकिन समय के साथ कई जगह से सुरक्षा गार्ड हटा दिए गए।  हालांकि वर्तमान में घोड़े वाले बाबा चौराहे पर रात में सुरक्षा गार्ड तैनात रहते हैं। जिससे वहां की लाइटें फिलहाल सुरक्षित होने से रात ें यह चौराहा रोशन हो रहा है। जबकि एरोड्राम चौराहे पर कोई सुरक्षा गार्ड नजर ही नहीं आते। यदि कोई होंगे भी तो वे बाहर की तरफ ही रहते हैं। जबकि नशेडी अंधेरे का फायदा उठाकर अंडरग्राउंड से केबल चोरी कर ले जा रहे हैं। </p>
<p><strong>एक बार केबल चोरी होने पर लाखों का नुकसान</strong><br />केडीए की ओर से वैसे तो हर चौराहे व विकास कार्य का निर्माण करवाने के साथ ही संवेदक के साथ उसका एमओयू भी किया हुआ है। एक निर्धारित अवधि तक उस विकास कार्य  में कोई भी नुकसान होता है या खराबी होती है तो उसे संवेदक द्वारा ही सही कराया जाएगा। उसके लिए केडीए को अलग से खर्चा नहीं करना पड़ेगा। जबकि एमओयू के समय ही मेंटेनेंस के लिए निर्धारित राशि संवेदक को दी गई है।  चौराहों व मेन रोड पर लगाई गई लाइटें काफी महंगी है। एक बार केबल चोरी होने पर उन्हें दोबारा लगाने पर लाखों रुपए का खर्चा होता है। </p>
<p><strong>लाइटें खराब होने की गारंटी, चोरी होने की नहीं</strong><br />एरोड्राम चौराहे की मेंटेनेंस करने वाली फर्म के संवेदक सुनील कुमार गर्ग का कहना है कि केडीए से चौराहे व लाइटों की खराबी व टूटफूट का एमओयू हुआ है। लाइटें चोरी होने का नहीं। उसके बाद भी तीन से चार बार लाइटें व केबल बदली जा चुकी है। एक बार केबल चोरी होने पर 50 हजार से एक लाख रुपए का खर्चा होता है। सुरक्षा गार्ड होने के बाद भी नशेड़ी अंधेरे का फायदा उठाकर अंडरग्राउंड केबल होने से आसानी से चोरी कर ले जाते हैं। इस बार केबल केडीए लाकर देगा तो उसे सही करवा दिया जाएगा। लेकिन लगाने के बाद फिर से क्या गारंटी है कि केबल चोरी नहीं होगी। </p>
<p><strong>नशेड़ियों का कोई इलाज नहीं</strong><br />इधर केडीए अधिकारियों का कहना है कि एरोड्राम चौराहे पर ही सबसे अधिक लाइटें व केबल चोरी हो रही है। संवेदक के माध्यम से इन्हें कई बार सही कराया जा चुका है। लेकिन नशेड़ियों का कोई इलाज नहीं होने से वे बार-बार केबल व लाइटें चोरी कर ले जाते है। अधिकारियों का कहना है कि संवेदक से कहकर लाइटों को चालू करवाने का प्रयास किया जा रहा है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/ghoda-square-is-getting-lit-up-at-night-and-darkness-prevails-on-aerodrome/article-121194</link>
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                <pubDate>Mon, 21 Jul 2025 15:06:15 +0530</pubDate>
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                <title>लकड़ी के पुल के टूटे फंटे व खुले तार बन रहे खतरा, घूमने आने वालों को करना पड़ रहा समस्याओं का सामना</title>
                                    <description><![CDATA[ शहर के मध्य दुनिया के सात अजूबों को एक ही जगह पर दिखाने वाला सेवन वंडर्स पार्क इन दिनों अव्यवस्थाओं का शिकार हो रहा है]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/the-broken-shafts-and-open-wires-of-the-wooden-bridge-are-posing-a-danger/article-116847"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-06/rtroer-(2)26.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर के मध्य दुनिया के सात अजूबों को एक ही जगह पर दिखाने वाला सेवन वंडर्स पार्क इन दिनों अव्यवस्थाओं का शिकार हो रहा है। यहां आमजन के लिए सुविधाएं होना तो दूर खतरा व समस्याएं अधिक हैं। जिससे यहां आने वालों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।  किशोर सागर तालाब के किनारे करीब  12 साल पहले बने इस सेवन वंडर्स पार्क में भारत के ताज महल से लेकर  फ्रांस के एफिल टावर और मिश्र का पिरामिड़, अमरीका का स्टेच्यू आॅफ लिबर्टी और इटली की झुकी मिनार तक एक ही जगह पर देखी जा सकती है।  करीब 7 एकड़ एरिया में 20 करोड़ की लागत से बनाए इस पार्क को दिसम्बर 2013 में आमजन के लिए खोला गया था। उसके बाद से अब तक  12 साल में देशी विदेशी लाखों पर्यटक इसका भ्रमण कर चुके हैं। तालाब के किनारे होने से  रात के समय इसका आकर्षण देखने लायक होता है। लेकिन हालत यह है कि इन दिनों देखरेख के अभाव  में यह दुर्दशा का शिकार हो रहा है। </p>
<p><strong>पीने का पानी तक नहीं</strong><br />पार्क में घूमने आए दादाबाड़ी निवासी मोहम्मद शकील का कहना है कि पार्क का एरिया काफी बड़ा है। इसे देखने  में समय भी काफी अधिक लगता है। पैदल चलने पर महिलाएं व बच्चे थक जाते हैं।  लेकिन इस पार्क में लोगों के पीने के लिए पानी तक की सुविधा नहीं है। पार्क में प्रवेश करने से पहले एक वाटर कूलर लगा है लेकिन उसका पानी अंदर नहीं ले जाने देते। अंदर लास्ट में कैंटीन बनी हुई है। वहां से पानी खरीदकर पीना पड़ता है। लेकिन उस पानी के लिए अंतिम छोर तक जाना पड़ता है। </p>
<p><strong>जन सुविधा भी नहीं</strong><br />महावीर नगर तृरीय निवासी शिवानी सोलंकी का कहना है कि पार्क में घूमने के दौरान लोगों को काफी देर तक वहां रहना पड़ता है।  जिससे लोगों को लघु शंका भी जाना पड़ता है। लेकिन पार्क के अंदर जन सुविधा तक की व्यवस्था नहीं है। खास तौर पर महिलाओं को अधिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। प्रवेश द्वार के बाहर शौचालय बना हुआ है लेकिन वह भी बदहाली का शिकार हो रहा है।  </p>
<p><strong>रात के समय रोशनी तक पर्याप्त नही</strong><br />बनवारी गौतम ने बताया कि पार्क में अधिकतर रात के समय लाइटें तक पर्याप्त नहीं जल पाती। जिससे यहां अंधेरा रहता है। पार्क में सुविधाओं पर अधिकारियों का ध्यान नहीं होने से यहां पहले की तुलना में आने वाले लोगों की संख्या भी कम हुई है। लोग नहीं आने से यहां बोटिंग करने वालों की संख्या भी कम हो गई है। जबकि गर्मी के सीजन में तो लोग बोटिंग का आनंद लेने आने चाहिए। </p>
<p><strong>पुलिया के टूटे फंटे, तार खुले</strong><br />लोगों का कहना है कि तालाब में बोटिंग करवाई जा रही है। यहां तक जाने के लिए पार्क के भीतर लकड़ी की पुलिया बनी हुई है। लेकिन बीच में कई जगह पर इसके फंटे टूटे हुए हैं। रोशनी के लिए लगाई गई लाइटों के लिए बिजली के पैनल बॉक्स खुले हुए हैं। जिससे यहां आने वालों के लिए गिरने व करंट लगने का खतरा बना हुआ है। </p>
<p><strong>गर्मी में बैठने की जगह तक नहीं</strong><br />इन दिनों गर्मी की छुट्टियां होने से बाहर से भी कई लोग इस पार्क में घूमने आ रहे हैं। जयपुर से आए परिवार की सोनिया शर्मा का कहना है कि गर्मी में पार्क  में घूमते हुए थकान हो जाती है। ऐसे में कुछ देर बैठने की जरूरत महसूस होती है। यहां लोगों के बैठने के लिए छतरियां तो बनाई हुई है। लेकिन गर्मी में उनके पत्थर इतने गर्म होते हैं कि उन पर बैठना मुश्किल हो रहा है। उनका होना न होना बराबर है। </p>
<p><strong>फव्वारा बंद, टाइल्स टूटी हुई</strong><br />पार्क के बीच में एक फव्वारा लगा हुआ है। लेकिन वह भी पिछले काफी समय से बंद है। जिससे उसमें जमा पानी भी गंदा हो रहा है। लोग इसका आनंद नहीं ले पा रहे हैं। सैर करने आए लोगों का कहना है कि बच्चों को फव्वारा बहुत अच्छा लगता है लेकिन वही बंद है। साथ ही कई जगह से टाइल्स उखड़ी व टूटी हुई है। </p>
<p><strong>समस्याओं का शीघ्र करवा देंगे समाधान</strong><br />केडीए अधिकारियों का कहना है कि सेवन वंडर्स पार्क में  वैसे तो लोग नियमित रूप से घूमने आ रहे हैं। यहां  समस्याओं के बारे में अभी तक किसी ने कोई जानकारी नहीं दी है। यदि वहां कोई समस्याएं हैं विशेष रूप से टूट फूट व बिजली संबंधी तो उन्हें शीघ्र ही सही करवा दिया जाएगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 09 Jun 2025 16:40:00 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>देखरेख के अभाव में दम तोड़ रहे प्राचीन पेयजल स्रोत, ग्रामीणों ने पालिका प्रशासन से लगाई सफाई की गुहार</title>
                                    <description><![CDATA[
नगर पालिका प्रशासन सुकेत की अनदेखी के कारण किसी जमाने में पानी का स्रोत रही प्राचीन बावड़ी वर्तमान में गंदगी और कचरे के कारण मरणासन्न अवस्था में है]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/ancient-drinking-water-sources-dying-due-to-lack-of-maintenance/article-113886"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-05/rtrer-(3)20.png" alt=""></a><br /><p>सुकेत। नगर पालिका प्रशासन सुकेत की अनदेखी के कारण किसी जमाने में पानी का स्रोत रही प्राचीन बावड़ी वर्तमान में गंदगी और कचरे के कारण मरणासन्न अवस्था में है। पूर्व सरपंच प्रतिनिधि ने बताया कि बावड़ी में गंदगी और कचरे के कारण मच्छरों का प्रकोप बढ़ता जा रहा है। यहां स्थित देवस्थान आने वाले श्रद्धालुओं को भी गंदगी के कारण परेशानी होती है। नगर में दीवारों पर कई जगह स्वच्छता अभियान लिखा हुआ है, लेकिन उस पर अमल नहीं किया जा रहा है। नगर वासियों ने बताया कि यही हाल कस्बे के मुख्य चौराहे और मस्जिद रोड आदि जगह पर नालियों का है। नगर की नालियां कचरे और गंदगी से अटी पड़ी हैं। श्रद्धालुओं ने बताया कि बारिश आने वाली है। लेकिन नालियों की सफाई नहीं होने से कई प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ेगा। कई बार अधिशासी अधिकारी और उच्च अधिकारियों को अवगत कराया, लेकिन कोई ध्यान नहीं दे रहा। नगर वासियों ने बावड़ी और नालियों की साफ-सफाई करने की मांग की। स्थानीय लोगों ने बावड़ी की साफ-सफाई की मांग की है। ताकि इसका पेयजल के स्रोत के रूप में इस्तेमाल किया जा सके।</p>
<p><strong>पेयजल समस्या का हो सकता है समाधान </strong><br />प्राचीन समय से ही बावड़ियां जल प्रबंधन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रही हैं। ये भूमिगत संरचनाएं हैं जो वर्षा जल को इकट्ठा करने और उपयोग करने के लिए बनाई जाती थीं। क्षेत्र में जल संकट की समस्या है। बावड़ी की सफाई होने के बाद इस समस्या का समाधान हो सकता है।स्थानीय लोगों ने प्रशासन से जल्द से जल्द बावड़ी की सफाई करने की मांग की है। </p>
<p><strong>सात साल पहले हुई थी सफाई</strong><br />ग्रामीणों ने बताया कि ग्राम पंचायत समय में करीब 7 साल पहले जब अर्चना राठौर सुकेत की सरपंच थीं, उस वक्त बावड़ी का जीर्णोद्धार और सफाई करवाई गई थी। लेकिन पालिका बनने के बाद बावड़ी की सफाई को अनदेखा किया जाता रहा है। इसकी शिकायत पूर्व में रहे अधिशासी अधिकारी को की गई थी। लेकिन तब से आज तक सफाई नहीं हो सकी। </p>
<p><strong>इनका कहना</strong><br />नगर पालिका क्षेत्र में विवाह स्थलों में नगरवासी बावड़ी स्थित मंदिर में गणेशजी को नोतने जाते हैं। लेकिन बावड़ी में अथाह गंदगी होने के कारण नगर वासी दूर दराज के मंदिर में जाने लगे हैं। <br /><strong>- राजकुमार राठौर, पूर्व सरपंच प्रतिनिधि, सुकेत</strong></p>
<p>एक हफ्ते में इसकी सफाई पालिका द्वारा करवा दी जाएगी। इसकी सूचना पहले भी आ गई थी।<br /><strong>- हेमेंद्र सांखला, अधिशासी अधिकारी, नगर पालिका, सुकेत</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 12 May 2025 17:50:51 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>फीडर की मुख्य लाइन के 11 केवी विद्युत तारों का नीचे की तरफ हो रहा झुकाव </title>
                                    <description><![CDATA[किसानों का कहना है कि इस समय किसानों के खेत खाली हो चुके है। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/the-11-kv-electric-wires-of-the-main-line-of-the-feeder-are-bending-downwards/article-93703"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-10/630400-sizee-(6)2.png" alt=""></a><br /><p>भण्डेड़ा। जयपुर विद्युत वितरण निगम की सादेड़ा फीडर की 11 केवी मुख्य लाइन के विद्युत तारों का रखरखाव नही होने से तारों का झुकाव अधिक नीचे होने से खेतों में किसानों को परेशानी हो रही है। संबंधित विभाग द्वारा समय रहतें दुरूस्त नही किया तो कभी भी किसानों को खतरा हो सकता है। जिम्मेदारों की अनदेखी क्षेत्रीय किसानों पर भारी नहीं पड़ जाएं। जानकारी के अनुसार बांसी जीएसएस से जुडे़ सादेड़ा फीडर की मुख्य लाइन का लंबे समय से रखरखाव नही होने से इस लाइन में भण्डेड़ा के खेतो से गुजर रही 11 केवी विद्युत लाइन के तार बहुत-सी जगहों पर खेतों से गुजर रही लाइन की जगह पर कही पर दस-बारह फीट की ऊंचाई से गुजर रही है। जो खेतो में कृषि कार्य करते मशीनरी को भी खतरा है। वही अधिक ऊंचाई की फसलों को भी खतरा बना हुआ है। संबंधित विभाग समय रहते नही देते इस ओर ध्यान इसका खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ता है। किसानों का कहना है कि इस समय किसानों के खेत खाली हो चुके है। खेतो से गुजर रही 11 केवी लाइन हवा में लहराने से आपस में टकराव होने पर चिंगारियां गिरती है। इस दौरान खेतों में कृषि कार्य करते समय किसानों को इसका खतरा हो सकता है। इस समय विभाग इस समस्या को गंभीरतापूर्वक देखे। एवं समय रहते सुध लेकर लाइन के विद्युत तारों की खिचाई कर टाइट करें तो किसानों को भी राहत मिले।</p>
<p><strong>लाइन के नीचे कई जगह पेड़-पौधों के कारण खतरा </strong><br />इस लाइन पर बहुत सी जगह पर लाइन बंबूलों से गुजर रही है, तो बहुत सी जगहों पर लाइन के नीचे पेड़-पौधे है। जो हवा के साथ ही तारों से टकराने पर चिंगारियां उठती है। क्षेत्र में गन्ने की फसल की जगह पर किसानों को अधिक खतरा बना हुआ है। जिम्मेदारों के अनदेखी क्षेत्रीय किसानों पर भारी नहीं पड़ जाए।</p>
<p><strong>बार-बार होती है बिजली गुल</strong><br />ग्रामीणों  का कहना है कि क्षेत्र में विद्युत लाइन का लंबे समय से मरम्मत का कार्य नही होने से बार-बार लाइन में फाल्ट आता हैं। क्षेत्र के उपभोक्ताओं की विद्युत आपुर्ति बाधित हो जाती है। बार-बार बिजली गुल की समस्या से जुझना पड़ता है। हल्की बूंदाबांदी होते ही लाइन में फाल्ट आ जाता है, जो थ्री फेस बिजली पर निर्भर किसानों को पर्याप्त बिजली भी नही मिल पाती है। बहुत-सी बार विद्युत तार टूटकर नीचे गिर जाते है। जो खेतो व रास्तों पर भी खतरा बढ़ जाता है। समय पर संबंधित विभाग सुध लेकर इस लाइन की मरम्मत करें, तो किसानों सहित घरेलू उपभोक्ताओं को भी राहत मिले। क्षेत्र में अनहोनी घटनाएं घटित होने से भी राहत मिले। </p>
<p><strong>इनका कहना है </strong><br />फीडर की लाइन के तकनीकी कर्मचारी से इस संबंध में मौके की जानकारी लेगें। इसके बाद विभाग का शेड्यूल बनाकर भेज देगें। जब लाइन की मरम्मत का कार्य स्वीकृति होगी। <br /><strong>- मनीष पहाडिया, जेईएन, विद्युत विभाग, नैनवां-देई</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बूंदी</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 23 Oct 2024 15:49:47 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>लापरवाही: सातलखेड़ी तालाब दुर्दशा का शिकार</title>
                                    <description><![CDATA[पानी के सड़ने से बच्चों को पढ़ाई करने में काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/negligence--satalkhedi-pond-is-in-a-bad-state/article-93370"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-10/27rtrer-(2).png" alt=""></a><br /><p>सातलखेड़ी। कस्बे में गांव सातलखेड़ी स्थित तालाब में गंदगी के कारण पानी सड़ने लगा है। बदबू आने से आसपास रहने वाले ग्रामीणों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। रोड तक के दुकानदार को भी अपनी दुकानों पर बैठना तक दुश्वार हो रहा है। तालाब के समीप रह रहे दुकानदारों ने सरपंच शांतिबाई को 6 वर्ष पहले बताया था  कि तालाब के पानी सड़ने से बदबू आने लगी है। सरपंच ने गांव के तालाब का निरीक्षण कर सफाई भी करवाई गई थी। गांव वालों का कहना है कि तालाब करीब सौ साल पुराना है, पर यह तालाब देखरेख के अभाव में अपना अस्तित्व खो रहा है। इस तालाब पर पंचायत का कोई ध्यान नहीं है। तालाब का पानी इतना गंदा हो गया है कि इसकी बदबू धीरे धीरे पूरे गांव को आगोश में ले रही है। यहां तक कि तालाब के पास रहने वाले लोगों को पानी के सड़ने की बदबू से परेशान होकर अपना निजी मकान तक को मजबूर होना पड़ सकता है। ग्रामीणों का यह कहना है कि तालाब के पानी से जानवर के मरने जैसी गंध आने लगी है। गांव में बीमारी फैलने की आशंका भी है। गांव सातलखेड़ी में तालाब से 150 फुट की दूरी पर ही राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय है, जिसमें 500 से अधिक बच्चों की संख्या है। निजी प्राइमरी स्कूल भी चलता है। पानी के सड़ने से बच्चों को पढ़ाई करने में काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। कई बच्चें बदबू के कारण बीमार तक हो जाते हैं। </p>
<p><strong>इनका कहना</strong><br />प्रशासन का इस तालाब पर ध्यान नहीं है, इस गंभीर समस्या पर ध्यान देकर नवीनी करण करवाना चाहिए। <br /><strong>- मनोज श्रृंगी, कस्बेवासी  </strong></p>
<p>यह तालाब सबसे पुराना है और 2022 में इस तालाब में सैकड़ों मछलियां मरी मिली थीं तब भी ऐसी गंभीर समस्या का सामना करना पड़ा था।<br /><strong>- नयन अखंड, पंचायत समिति सदस्य </strong></p>
<p>पिछले कार्यकाल के आखिरी दिनों में कस्बेवासियों ने इस समस्या से अवगत करवाया था। मेरे द्वारा जब तक कागज कार्यवाही पूरी होती उससे पहले ही आचारसहिता लग गई, इस कारण से वह काम पिछले कार्यकाल में पूरा नहीं हो पाया, पर तालाब की सफाई करवाकर दवाई डाली गई थी। <br /><strong>- शांति बाई,  पूर्व सरपंच </strong></p>
<p>ग्रामीणों द्वारा अतिक्रमण और गंदगी फैलाई जा रही हैं। इस कारण से तालाब के तले में प्लास्टिक की पॉलीथिन जाने से तालाब के पानी का निकासी भी नहीं हो रही है। इस कारण से पानी रुके होने से पानी में सड़न और बदबू फैल रही है। इसकी जल्द से जल्द सफाई करवाकर दवाई डाल दी जाएगी।<br /><strong>- सुषमा गोठवाल, सरपंच  ग्राम पंचायत सातलखेड़ी</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 18 Oct 2024 15:46:04 +0530</pubDate>
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                <title>स्कूल मर्ज होने के बाद भवन बना मवेशियों का ठिकाना</title>
                                    <description><![CDATA[ विद्यालयों को मर्ज करने से कही स्थानों पर भवनों की दुर्दशा हो रही है जिससे लाखों रुपए का नुकसान हो रहा है। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/after-the-merger-of-schools--the-building-has-become-a-place-for-cattle/article-91343"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-09/427rtrer-(10)1.png" alt=""></a><br /><p>देई। बच्चों के शोरगुल से गंूजने वाला स्कूल भवन अब मवेशियों का ठिकाना बन गया है। जिम्मेदारों की उदासीनता के चलते क्षेत्र की भजनेरी पंचायत मुख्यालय के राजकीय उच्च प्राथमिक स्कूल का भवन मर्ज होने के बाद इस हालात में पहुंच गया है। बरामदे से लेकर कमरों तक फर्श पर गोबर फैला जमा है। जिससे भवन में गोबर ही गोबर फैला रहता है। स्कूल भवन के कई कमरे के गेट टूटे हुए है जिनको समाजकंटक लेकर चले गये है। इसी तरह के हालात बने रहे तो भवन शीघ्र ही भवन जर्जर अवस्था में पहुंच जायेगा। ग्रामीणों ने शिक्षा विभाग के अधिकारियों को अवगत करवाकर भवन के उचित रखरखाव की मांग उठाई है। नहीं तो भवन पर लोग अतिक्रमण कर सकते है। जानकारी के अनुसार पूर्व में विद्यालय में कक्षा एक से आठ की कक्षाओं का संचालन किया जाता था। स्कूल को राजकीय उच्च माध्यमिक स्कूल भजनेरी में शिफ्ट करने के बाद कक्षाओं का संचालन वहां पर शुरू कर दिया। जिससे अब भवन की देखरेख नही होने से मवेशियों ने अपना आशियाना बना लिया।</p>
<p><strong>ग्रामीणों की यह पीड़ा</strong><br />ग्रामीण महावीर मीणा ने बताया कि इस बारे शिक्षा विभाग के अधिकारियों को अवगत करवाया गया था। मगर कोई ध्यान नही दिए जाने से अब भवन पर अतिक्रमण होने की संभावना है।  ग्रामीण घनश्याम मीना ने बताया कि एक तरफ चीता की झौंपडियां मे नौनिहालों के लिए पढने के लिए कमरों की कमी है वही विद्यालयों को मर्ज करने से कही स्थानों पर भवनों की दुर्दशा हो रही है जिससे लाखों रुपए का नुकसान हो रहा है। </p>
<p>बाबूलाल मीणा ने बताया कि विद्यालय मर्ज होने के बाद भवन की देखभाल नही होने से भवन की दशा खराब हो गई है। लाखों रुपए से बने भवनों का उपयोग नहीं होने से किवाड  टूटने पर आवारा पशुओं का जमावडा रहने लगता है। प्रशासन व शिक्षा विभाग इस भवन में वापस स्कूल का संचालन करे तो भवन की सुरक्षा हो सकेगी। </p>
<p><strong>इनका कहना है </strong><br />बरसात के मौसम मे गेट टूटने से स्कूल परिसर मे सूने मवेशी जाकर बैठ जाते है  शीघ्र ही भवन की मरम्मत का काम किया जायेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बूंदी</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 23 Sep 2024 18:25:34 +0530</pubDate>
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                <title>बदहाली के आंसू बहा रहा ट्रैफिक गार्डन</title>
                                    <description><![CDATA[पार्क में गाजर घासÞ घनी होने के कारण अब लोग यहां घूमने से कतरा रहे है।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/-traffic-garden-shedding-tears-of-misery/article-86192"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-07/64.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर के लोगों के लिए बनाए करीब एक दर्जन से अधिक पार्क इन दिनों रख रखाव के अभाव में अपनी बदहाली के आसू बहा रहे है। शहर के दो सबसे पुराने उद्यान चंबल गार्डन और ट्राफिक पार्क पूरी तरह उजड़ चुके है। इन पार्क में मनोरंजन के संसाधन तो टूटे हैं साथ अव्यवस्थाए इतनी हैं कि कई लोग यहां जाना पसंद नहीं करते हैं। इन पार्कों के रखरखाव की जिम्मेदारी नगर निगम के कर्मचारियों की है लेकिन वो अपनी  जिम्मेदारी सही से नहीं निभा रहे जिसका खामियाजा आमजन को भुगतना पड़ रहा है। वहीं  पार्करोज ब रोज बदहाल होता जा रहा है। शहर का यातायात पार्क रखरखाव के अभाव में अपनी सुंदरता खोता जा रहा हैं, पार्क में लगाए गए कई झूले टूट चुके हैं तो कई टूटने की कगार पर हैं।  झूले, फिसलपट्टी, डायनासोर का स्टेचू, पूरी तरह से क्षत विक्षित हो  चुका है । यहां पर साफ सफाई का ध्यान नहीं रखा जा रहा है। पार्क के अंदर कई स्थानों पर कचरे के ढेर लगे हुए हैं। पार्क में सबसे अधिक लोग अपना समय बिताने के लिए आते हैं। यहां पर सुबह और शाम बच्चों से लेकर बडेÞ तक आते हैं। यहां पर कई वर्ष पहले रोशनी के लाइटें लगाई गई थीं। लेकिन अब वहां पर मात्र पोल खडे हैं। वहां पर लाइट गायब हो चुकी हैं। शहर का ट्राफिक पार्क लम्बे समय से बदहाली का शिकार हो रहा है। यहॉ लगे मनोरंजन के संसाधन पूरी तरह टूट चुके है। यहां तक कि ट्राफिक की जानकारी देने वाले संकेतक भी उखड़ चुके है। सिमेंट के बने घड़ियाल, डायनासोर क्षतिग्रस्त हो गए है। पार्क के रखरखाव के अभाव मे चहुं ओर गाजर घास उग जाने से बैंठने की कुर्सियां नजर तक नहीं आती। पार्क में गाजर घासÞ घनी होने के कारण अब लोग यहां घूमने से कतरा रहे है। पार्क मे खुले तार हादसों को न्यौता दे रहे है।</p>
<p><strong>डायनासोर व हवाई जहाज हुए कंडम, जू  हुआ उजाड़</strong><br />परिजन अपने बच्चों को पार्क मे खेलने के लिए लाते है लेकिन पार्क मे टूटे पड़े झूलो को देखकर बच्चों को मायूसी का सामना करना पड़ रहा है। शहर में गिने चुने ही उद्यान उनकी भी निगम देखभाल ठीक से नहीं कर पा रहा है। यह गार्डन बच्चों के मनोरंजन और यातायात की जानकारी देने के लिए बनाया था लेकिन यहां ट्राफिक के चिन्हों की ठीक से देख भाल नहीं हो रही। ट्रॉफिक जानकारी देने वाला भी कोई नहीं है। <br /><strong>- जसपिंदर सहानी, निवासी गुमानपुरा</strong></p>
<p><strong>टूटे झूले कर बच्चों को चोटिल</strong><br />ट्राफिक गार्डन की लंबे समय से देखभाल नहीं होने से यहां के मनोरंजन के संसाधन टूट चुके है। यहां आकर बच्चे अपने को ठगा ठगा सा महसूस करते है। पार्क में लगे झूले चकरी, और फिसल पट्टी पूरी तरह टूट चुकी है। इस पर हर समय बच्चों के चोटिल होने का खतरा बना रहता है। यहां घास की सफाई नहीं हुई जिससे जहरीले जीव जंतुओं का खतरा बना रहता है। उद्यान की उपेक्षा के चलते यहां लोगों का आना भी कम हो चुका है।<br /><strong>- अभिषेक कुशवाह, बोरखेड़ा</strong></p>
<p><strong>पार्क में लाइट नहीं, खुले पड़े बिजली के पैनल</strong><br />गार्डन में लाइटिंग कि व्यवस्था नहीं होने से शाम के समय पार्क का सौंदर्यकरण दिखाई नहीं देता। पार्क में लगे खम्भों के पैनल खुले होने से गार्डन में आने वाले बच्चों पर खतरा मंडराता रहता है। खुले पड़े तारों से कभी बड़ा हादसा हो सकता है। <br /><strong>- कुशाल सेन, विज्ञान नगर</strong></p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />टैÑफिक गार्डन के साथ -साथ सब पार्को विकसित करने का प्लान है।  जहां जहां मरम्मत और विकास की आवश्यकता है वहां सर्वे कराकर ठीक कराया जाएगा। यह गार्डन कोटा कि पहचान है, चम्बल गार्डन में भी बहुत जल्द वोंटिग चालू करवाई जाएगी।<br /><strong>- राजीव अग्रवाल, महापौर कोटा दक्षिण</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 29 Jul 2024 16:50:13 +0530</pubDate>
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                <title>आजादी के 76 सालों बाद भी हिंडोली के बाजार में आधी आबादी के लिए टॉयलेट तक नहीं</title>
                                    <description><![CDATA[ पुरानी बस स्टैंड पर महिला शौचालय का निर्माण करवाया था लेकिन और सामाजिक तत्वों ने उसको खुर्द बुर्द कर दिया । ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/even-after-76-years-of-independence--there-is-not-even-a-toilet-for-half-the-population-in-hindoli-market/article-59947"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-10/azadi-k-76-saal-bd-bhi-hindoli-k-bazaar-me,-adhi-abadi-k-liye-toilet-tk-nhi...hindoli,-bundi-news-19-10-2023.jpg" alt=""></a><br /><p>हिंडोली। बूंदी जिले की अहम हिंडोली नगर पालिका मुख्यालय पर आजादी के 76 साल बाद भी बाजार में महिलाओं के लिए शौचालय तक नही है। जबकि हिंडोली कस्बे में यह मुख्य बाजार 4 किमी क्षेत्र में फैला है। सब्जी मंडी में एक शौचालय है जो भी बंद पड़ा है। हिंडोली कस्बे की ग्राम पंचायत नगर पालिका बनने से पहले राजस्थान में सबसे बड़ी ग्राम पंचायत का अहोदा हिंडोली के पास था। जहां की आबादी लगभग 15 हजार के लगभग थी  और 9 हजार मतदाता थे। हिंडोली ग्राम पंचायत में 2000 से सन 2005 तक प्रेम बाई सैनी पहली महिला सरपंच होने का गौरव हासिल हुआ था लेकिन वह भी सार्वजनिक स्थान पर महिला शौचालय नहीं बना पाई थी। दूसरी बार मीनू खठोड को 2015 से 2020 तक ग्राम पंचायत की दूसरी महिला सरपंच बनने का गौरव हासिल हुआ था। भाजपा नेता नितेश खटोड़ ने बताया कि मेरी पत्नी जब सरपंच बनी थी तब मैंने हिंडोली कस्बे की पुरानी बस स्टैंड पर छोटे-छोटे दो शौचालय बनवाए थे। एक महिलाओं के लिए था और एक पुरुषों के लिए। लेकिन असामाजिक तत्व महिला शौचालय की किवाड़ को तोड़कर ही ले गए। इसलिए वह महिला शौचालय किसी काम का नहीं रहा। नितेश खटोड़ ने बताया कि ग्राम पंचायत के पास शक्तियों का अभाव रहता है। कोई भी व्यक्ति अपने मकान दुकान के सामने सार्वजनिक शौचालय निर्माण करने पर विवाद खड़ा कर देता है जबकि जगह सरकारी क्यों न हो अब नगर पालिका हिंडोली बन चुकी है लेकिन यह नगर पालिका के लिए भी महिला शौचालय बनाना चुनौती पूर्ण काम है। ग्राम पंचायत हिंडोली की पूर्व सरपंच प्रेम बाई सैनी का कहना है कि सब्जी मंडी हिंडोली में महिला और पुरुष शौचालय बनवाए थे लेकिन समय पर उनका रखरखाव और सफाई नहीं होने से सब्जी मंडी बेचने वाले ने बदबू के कारण उन शौचालयों को बंद कर दिया। पूर्व सरपंच मीनू खटोड़ का कहना था कि आधी आबादी के लिए हिंडोली बाजार में शौचालय होना अति आवश्यक था। बाजार की लंबाई चौड़ाई बहुत अधिक है। कम से कम तीन या चार शौचालय होना जरूरी है। पुरानी बस स्टैंड पर महिला शौचालय का निर्माण करवाया था लेकिन और सामाजिक तत्वों ने उसको खुर्द बुर्द कर दिया । </p>
<p>महिला शौचालय की हिंडोली बाजार में बहुत आवश्यकता है। मेरे भी बर्तन की दुकान है और बर्तन की खरीदारी के लिए दो-चार महिलाएं एक साथ ही आती है। आसपास कहीं शौचालय नहीं है बल्कि हिंडोली के पूरे बाजार में शौचालय ही नहीं है। ऐसी स्थिति में यह बहुत गंभीर समस्या है। अब हिंडोली नगर पालिका बनी है। व्यापार महासंघ की सबसे पहले मांग महिला शौचालय की होगी। <br /><strong>- बलवंत चौधरी, व्यापार महासंघ सेक्रेटरी  हिंडोली</strong></p>
<p>हिंडोली कस्बे के बाजार में आदि आबादी के लिए शौचालय नहीं है। महिलाएं दुकानों पर जब आती हैं तो खरीदारी करने के लिए तो अमूमन घंटा या 2 घंटे बाजार में रुकना ही होता है। तब शौचालय की आवश्यकता पड़ती है। बहुत सी बार महिलाएं पूछने पर हम ही शर्म सी होने लगती है। <br /><strong>- संदीप  झंवर, व्यापार महासंघ अध्यक्ष हिंडोली</strong></p>
<p>हिंडोली नगर पालिका अभी ढंग से अस्तित्व में नहीं आई है। यह पूर्ण रूप से अस्तित्व में आने के बाद बजट की उपलब्धता होते ही बोर्ड की पहली बैठक में इस समस्या की ओर ध्यान आकर्षित किया जाएगा और शीघ्र ही शौचालय बनवाए जाएंगे।<br /><strong>- मंजू ढोली,  नगर पालिका चेयरमैन हिंडोली</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बूंदी</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 19 Oct 2023 18:39:09 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>शिक्षा का मंदिर जर्जर: नौनिहालों की जान जोखिम में</title>
                                    <description><![CDATA[ छतों में आई दरारों के चलते कभी कोई बड़ा हादसा होने का खतरा बना हुआ है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/temple-of-education-dilapidated--lives-of-children-in-danger/article-59375"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-10/k.png" alt=""></a><br /><p>करवर। क्षेत्र में कैथूदा पंचायत के सकतपुरा गांव में स्थित राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय का भवन जर्जर हो रहा है। इसी स्कूल परिसर में आंगनबाड़ी भी संचालित है जिसमें मासूम अध्ययन करते है। मरम्मत के अभाव में भवन जरा सी बारिश में ही छत से पानी टपकने लगता है। दीवारों से पानी रिसकर कमरों में भर जाता है जिससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो जाती हैं। जिम्मेदारों की अनदेखी के चलते बच्चों की जान जोखिम में है।  स्कूल प्रबंधन ने इस समस्या से शिक्षा विभाग के अफसरों को अवगत करवाते हुए स्कूल भवन की मरम्मत की मांग की है। स्कूल प्रबंधन का कहना है स्कूल भवन की मरम्मत की मांग पर सिर्फ आश्वासन ही मिलता है। स्कूल भवन की मरम्मत अभी तक नहीं की गई है। प्रधानाध्यापक ने बताया कि विद्यालय का भवन बहुत पुराना बना हुआ है। जिसके कारण उसकी छतों व दीवारों में दरारें आ गई है। करीब तीन सालों से बरसात के दिनों में छतों से पानी टपकता है। छतों में आई दरारों के चलते कभी कोई बड़ा हादसा होने का खतरा बना हुआ है। पानी टपकने से पढ़ाई बाधित हो जाती है इस कारण अभिभावक बच्चों को बारिश के दौरान स्कूल नहीं भेजते जबकि स्कूल में करीब 80 विद्यार्थी व परिसर में आंगनबाड़ी केंद्र भी संचालित है जिसमें करीबन 121 नौनिहाल अध्ययनरत है। बारिश के दौरान बच्चें स्कूल नहीं आते। मामले में कई बार शिक्षा विभाग एवं ग्राम पंचायत को अवगत करा दिया लेकिन आज तक समस्या का हल नहीं हुआ। </p>
<p><strong>ग्रामीणों का कहना है </strong><br />विद्यालय भवन क्षतिग्रस्त होने से छात्र-छात्राओं को समस्याओं का सामना करना पड़ता है इसलिए विभाग को अविलंब निर्माण करवाकर छात्रों को सुविधा उपलब्ध करवानी चाहिए।<br /><strong>- कैलाश गुर्जर, सकतपुरा ग्रामीण</strong></p>
<p>विद्यालय भवन मरम्मत के अभाव में दीवारें क्षतिग्रस्त हो गई। बरसात में छत टपकती है। एसएमसी द्वारा प्रस्ताव लेकर शिक्षा विभाग को भिजवा रखा है लेकिन अभी तक विद्यालय भवन की मरम्मत कार्य नहीं हो पाया।<br /><strong>- सत्यनारायण प्रजापति, समाजसेवी, सकतपुरा</strong></p>
<p>स्कूल भवन क्षतिग्रस्त है। जल्द ही उच्चाधिकारियों को अवगत करवाकर मरम्मत कार्य करवाया जाएगा।<br /><strong>- गुड्डी रानी गर्ग, पीईईओ कैथूदा</strong></p>
<p>स्कूल भवन क्षतिग्रस्त है। स्कूल परिसर में आंगनबाड़ी केंद्र भी संचालित है जिससे नौनिहालों पर खतरा बना रहता है। इस संदर्भ में स्थानीय विद्यालय प्रबंधन समिति द्वारा प्रस्ताव पत्र उच्च अधिकारियों को भेज रखा है , कार्यालय स्थर पर प्रयास जारी हैं।<br /><strong>- महावीर प्रसाद सैनी,प्रधानाध्यापक उच्च प्राथमिक विद्यालय कैथूदा</strong></p>
<p>विद्यालय भवन क्षतिग्रस्त होने से अनहोनी का खतरा बना रहता है, विद्यालय प्रबंधन समिति द्वारा प्रस्ताव विभाग को भिजवा रखा है और विभाग को जल्द इस भवन की मरम्मत करवानी चाहिए।<br /><strong>- अशोक गुर्जर, एस एम सी अध्यक्ष सकतपुरा</strong></p>
<p>विद्यालय की तरफ से अभी तक प्रस्ताव आया नहीं है। जेईएन को निर्देशित कर दिया है कि स्कूल में जाकर अवलोकन कर प्रस्ताव विभाग को भिजवाए।<br /><strong>- अनिल गोयल, सीबीईओ नैनवां</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बूंदी</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 12 Oct 2023 21:14:08 +0530</pubDate>
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                <title>40 स्थानों पर रखवाए कचरा पात्र 18 महीने में हुए कबाड़ </title>
                                    <description><![CDATA[ग्राम पंचायत की ओर से कचरा डालने के लिए रखे कचरा पात्रों में भरे कचरे का निस्तारण नही किया गया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/baran/garbage-bins-kept-at-40-places-turned-into-junk-in-18-months/article-57276"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-09/gan-(1)2.png" alt=""></a><br /><p>किशनगंज। किशनगंज कस्बे के वार्डों, सरकारी कार्यालयों में कचरा संग्रहण करने के लिए ग्राम पंचायत की ओर से फरवरी 2022 की शुरूआत में स्वच्छ भारत मिशन के तहत 40 जगह कचरा पात्र रखे गए थे। जिसमे कचरा डालने के लिए दो-दो कचरा पात्र का सेट था जिनकी अनुमानित लागत 8000 रुपए थी। यह कचरा पात्र मोहल्ले वासियों के गीले व सूखे कचरा डालने के लिए रखे गए थे ताकि कचरे का निस्तारण किया जा सके। ग्राम पंचायत प्रशासन ने कचरा पात्रों रखवाने के बाद इनकी सुध नहीं लेने के चलते देखरेख के अभाव में कचरा पत्र खुद ही कबाड़ हो गए। जिससे ग्राम पंचायत ने कचरा पात्र योजना में सरकार को लाखो रुपए का चूना लगा दिया।</p>
<p><strong>गुस्साएं मौहल्लेवासियों ने ग्राम पंचायत में रख दिए थे कचरा पात्र</strong><br />ग्राम पंचायत की ओर से कचरा डालने के लिए रखे कचरा पात्रों में भरे कचरे का निस्तारण नही किया गया। जिससे कचरा सड़कों पर फैलने लगा है। कचरे के ढेरों में मवेशी विचरण कर रहे हैं। जिससे मौहल्ले वासियों को परेशानी होने लगी है। शिकायत के बाद भी कई दिनों तक ग्राम पंचायत द्वारा नही करवाया गया तो गुस्साए मौहल्ले वासियो ने कई कचरा पात्र  ग्रामपंचायत में जाकर रख दिए थे। जिसको लेकर ग्राम पंचायत सरपंच राधाकिशन मीणा ने कचरे के निस्तारण के लिए ग्रामीणों को जिम्मेदार ठहराया।</p>
<p><strong>पंचायत ने लगाया सरकार को लाखों का चूना</strong><br />किशनगंज ग्राम पंचायत द्वारा कस्बे में रखवाए गए कचरा पात्रों में भरे कचरे का निस्तारण नहीं करवाने के बाद लोगो ने कई कचरा पात्रों को वापस ग्राम पंचायत में लाकर रख दिया है। तो कई कचरा पात्र सार संभाल के अभाव में कचरे के ढेर पर हो कबाड़ हो गए। जिससे स्वच्छ भारत मिशन योजना के तहत रखे 40 कचरा पत्रों के कबाड़ हो जाने से सरकार को लाखों रुपए का नुकसान पहुंचा है। जिनका एक कचरा पात्र का अनुमानित खर्च 8000 रुपए था।</p>
<p><strong>कचरा पात्र की सुध नहीं ले रही पंचायत</strong><br />वार्ड पंच रामनिवास सुमन ने बताया कि ग्रामपंचायत किशनगंज द्वारा कस्बे के मोहल्लों ,सरकारी कार्यालयों में कचरे के संग्रहण के लिए कचरा पात्र रखवाए गए कचरा पात्रों के भर जाने के बाद शिकायत के बावजूद ग्राम पंचायत की ओर से ध्यान नहीं देने से कचरे से भर पात्र अब कबाड़ हो गए है। कस्बे में जगह-जगह लगे गंदगी के ढेर से आमजन को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। ग्राम पंचायत कबाड़ हुए कचरा पत्रों की भी सुध नहीं ले रही है।</p>
<p><strong>इनका कहना है </strong><br />प्रशासन द्वारा कचरा पात्रों में भरे कचरे का निस्तारण नही किया गया। जिससे कचरा सड़कों पर फैलने लगा था। कचरे के ढेरों में मवेशी विचरण कर रहे थे। जिससे मौहल्लेवासियों को समस्या का सामना करना पड़ रहा था, इसलिए गुस्साएं मौहल्लेवासियों ने कचरा पात्र ग्राम पंचायत में जाकर रख दिए थे। <br /><strong>- रामसिंह, मौहल्लावासी। </strong></p>
<p>ग्राम पंचायत द्वारा किशनगंज कस्बे में सूखे,गीले कचरे का निस्तारण करने के लिए कचरा पात्र रखवाए गए थे,जिनके कचरे का निस्तारण ग्रामीणों द्वारा करना था लेकिन ग्रामीणों ने कचरे का निस्तारण नहीं किया,कस्बे के लोगों ने कई कचरा पात्र ग्राम पंचायत कार्यालय किशनगंज में रखवा दिए। <br /><strong>- राधाकिशन मीणा, सरपंच, किशनगंज। </strong></p>
<p>कस्बे में ग्राम पंचायत द्वारा कचरा निस्तारण को लेकर कचरा पात्र रखवाए जाने,उनका उपयोग नही होने का मामला संज्ञान में आया है। पंचायत से जानकारी लेकर खामी होने पर उचित कार्यवाही की जाएगी।<br /><strong>- सत्यप्रकाश जोरवाल, विकास अधिकारी, किशनगंज। </strong></p>]]></content:encoded>
                
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                                            <category>बारां</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 16 Sep 2023 17:23:33 +0530</pubDate>
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