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                <title>mother milk bank - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>mother milk bank RSS Feed</description>
                
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                <title>असर खबर का - कुपोषित व बिन मां के बच्चों को अब मिलेगा मां का अमृत</title>
                                    <description><![CDATA[पहले दिन पांच माताओं ने किया मिल्क डोनेट।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/effect-of-news---malnourished-and-motherless-children-will-now-get-mother-s-nectar/article-106433"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-03/6622-copy63.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। पौने तीन साल के लंबे इंतजार के बाद आखिरकार जेकेलोन अस्पताल परिसर में बहुप्रतीक्षित मदर मिल्क बैंक मंगलवार को शुरू हो ही गया। नवज्योति मदर मिल्क बैंक शुरू करने को लेकर लगातार खबरे प्रकाशित करता रहा उसकी यह परिणाम है कि 34 माह के बाद मंगलवार को पहली बार कोटा के मदर मिल्क बैंक में पांच माताओं ने दुध का दान करने के साथ ही मदर मिल्क बैंक शुुरुआत हो गई। दैनिक नवज्योति के 4 मार्च के अंक में पेज दो पर आखिरकार 34 माह बाद मदर मिल्क बैंक के ताले खूले शीर्षक से खबर प्रकाशित होने के बाद जेकेलोन प्रशासन ने आनन फानन में मदर मिल्क मंगलवार को शुरू कर दिया। मदर मिल्क बैंक शुरू होने से। मदर मिल्क बैंक के शुरू होने से कोटा संभाग के कुपोषित बच्चों व बिन मां के बच्चों को मां का दूध मिलेगा। उल्लेखनीय है कि बूंदी और बारां की मदर मिल्क के सफल संचालन के बाद अब संभाग के सबसे बड़े जेकेलोन अस्पताल में भी अब मदर मिल्क बैंक की शुरुआत हो गई है। </p>
<p><strong>नवजात बच्चों को कुपोषण से बचाने में मददगार होगा</strong><br />बालपोषण संस्थाओं के अनुसार जन्म के आधे घंटे के भीतर मां का पहला दूध बच्चे के लिए पीना जरूरी है, लेकिन किसी कारणवश देश में 95 प्रतिशत बच्चों को यह दूध नहीं मिल पाता। यही वजह है कि भारत में हर दूसरा बच्चा कुपोषित है। इसी बात को ध्यान में रखते नौ साल पहले राजस्थान के उदयपुर में दिव्य मदर मिल्क बैंक की स्थापना की गई। इसके पीछे सिर्फ एक वजह थी कि नवजात (0-1 साल) बच्चों को कुपोषित होने और दूध के अभाव में मौत के मुंह में समाने से रोकना। उदयपुर के मदर मिल्क की सफलता के बाद प्रदेश में जयपुर, बूंदी, बारां में मदर मिल्क बैंक खोले गए। अब कोटा में खुलने से बढ़ राहत मिलेगी।</p>
<p><strong>प्रदेश में बढ़ रहा मदर मिल्क बैंक का ट्रेंड</strong><br />मदर मिल्क बैंक के नोडल अधिकारी व प्रभारी डॉ. मोहित अजमेरा ने बताया कि यह एक नॉन-प्रॉफिट बैंक है । यहां नवजात शिशुओं के लिए मां का सुरक्षित दूध स्टोर किया जाएगा। इसकी मदद से उन नवजात शिशुओं को मां का दूध उपलब्ध कराया जाएगा जिनकी अपनी मां किसी कारणवश स्तनपान करा पाने में असमर्थ हैं। इस केंद्र में दो तरह की महिलाएं दूध दान कर सकती हैं। पहली स्वैच्छा से और दूसरी वे माताएं जो अपने बच्चों को दूध नहीं पिला सकतीं। जिनके बच्चे दूध नहीं पीते। अगर उनका दूध नहीं निकाला जाए तो मां के रोगी होने की आशंका बढ़ जाती है। उनके लिए दूध दान करना अच्छा विकल्प है। नर्स रुकसाना, ऋतु, आरती शर्मा ने मंगलवार दुध संग्रह किया। </p>
<p><strong>ऐसे लेते है दूध का दान</strong><br />मदर मिल्क बैंक में  दूध दान करने आई मां की पहले एचआईवी, एचबीएसएजी, डब्लूबीआरएल जांच की जाएगी । जांच रिपोर्ट सही आने के बाद महिला से लिखित अनुमति ली जाती है । उसके बाद मदर मिल्क लिया जाएगा।  मदर मिल्क बैंक वो बैंक है जो महिलाओं से न सिर्फ दूध इकट्ठा करती है, बल्कि जरुरतमंद बच्चों तक वो दूध पहुंचाने का काम भी करती है। उत्तर भारत में सबसे पहली मदर मिल्क बैंक 2013 में बनाई गई थी।  राजस्थान में उदयपुर में यह पहली बैंक बनी थी। उसके बाद जयपुर, बूंदी बारां और अब कोटा में बनी है।</p>
<p><strong>स्तनपान प्रबंधन पर रहेगा जोर</strong><br />मदर मिल्क बैंक के साथ स्तनपान प्रबंधन पर मुख्य रूप से फोकस रहेगा। महिलाओं को स्तनपान कराने में आने वाली समस्याओं का समाधान मदर मिल्क बैंक में किया जाएगा। माताओं को मेडिकल व इमोशन प्रॉब्लम का समाधान किया जाएगा। स्तनपान प्रबंधन के तहत दूसरा मुख्य कार्य यह किया जाएगा जिन माताओं के पास अतिरिक्त दूध है वह स्वैच्छा से दान करेंगी। उसका संग्रहण कर कुपोषित व समय से पूर्व हुए बच्चों को दिया जाएगा। यह दूध दवाई के रूप में कार्य करेंगा। माता दूर होने पर उन बच्चों को यह दूध दिया जाएगा। <br /><strong>- डॉ. मोहित अजमेरा, नोडल अधिकारी कोटा</strong></p>
<p>मदर मिल्क बैंक का सात दिन से व्यवस्थाओं का अवलोकन करने के बाद मेडिकल कॉलेज की प्रधानाचार्य के निर्देशन में मंगलवार को इसका संचालन शुरू किया। पहले दिन पांच महिलाओं ने मिल्क डोनेट किया। मदर मिल्क का संचालन के लिए नोडल अधिकारी मोहित अजमेरा को नियुक्त किया गया है। मिल्क बैंक में चार एसी भी लगाए है। <br /><strong>- डॉ. निर्मला शर्मा, अधीक्षक जेकेलोन अस्पताल कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 05 Mar 2025 14:46:58 +0530</pubDate>
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                <title>असर खबर का - 34 माह बाद आखिर मदर मिल्क बैंक का खुला ताला, मदर मिल्क बैंक शुरू करने की कवायद हुई शुरू </title>
                                    <description><![CDATA[बैंक से प्रतिदिन एक दर्जन से अधिक नवजात शिशुओं को लाभ मिलेगा और उन्हें पोषक मां का दूध उपलब्ध कराया जा सकेगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/effect-of-the-news---mother-milk-bank-finally-opened-after-34-months/article-106300"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-03/257rtrer-(1)15.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। लंबे इंतजार के बाद आखिरकार मदर मिल्क बैंक शुरू करने की प्रक्रिया शुरू हो गई। सोमवार को जेकेलोन अधीक्षक डॉ. निर्मला शर्मा ने बैंक की साफ सफाई से लेकर मशीनों की जांच कराकर व्यवस्थाएं जांची और इसको शुरू करने के लिए आवश्यक दिशा निर्देश शिशुरोग विभाग डॉक्टरों को दिए। उल्लेखनीय है कि दैनिक नवज्योति  2 मार्च के अंक में ये कैसा इंतजाम ! बनने के 34 माह बाद भी मदर मिल्क बैंक नहीं हो पा रहा शुरू शीर्षक से खबर प्रकाशित की। उसके बाद सोमवार को अस्पताल प्रशासन हरकत में आया और उसने बंद पड़े मदर मिल्क बैंक सूद ली और उसको चालू करने की कवायद शुरू की। डॉ. निर्मला शर्मा ने बताया कि सभी मशीनों की जांच कर उपकरणों की जांच की है। शीघ्र इसको चालू करने के निर्देश जारी कर दिए है। </p>
<p><strong>कुपोषित बच्चों को मिलेगा लाभ</strong><br />जेकेलोन अस्पताल की अधीक्षक डॉ. निर्मला शर्मा ने बताया कि मदर मिल्क शुरू होने से कुपोषित बच्चों को मां का दूध मिल सकेंगा। प्रसूताएं एक दिन में तीन बार दूध दान कर सकेंगी। यह मिल्क बैंक उन नवजात शिशुओं के लिए वरदान साबित होगा, जिनकी मां नहीं हैं या जिन्हें मां का दूध नहीं मिल पा रहा है। इस बैंक से प्रतिदिन एक दर्जन से अधिक नवजात शिशुओं को लाभ मिलेगा और उन्हें पोषक मां का दूध उपलब्ध कराया जा सकेगा। मदर्स मिल्क बैंक बनने के बाद कोटा, बूंदी, बारां, झालावाड़ ही नहीं, बल्कि मध्य प्रदेश तक के नवजात शिशुओं और उनके परिजनों को फायदा मिलेगा। हालांकि, दूध दान करने वाली महिलाओं के स्वास्थ्य की पूरी जांच की जाएगी, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि उन्हें कोई बीमारी न हो। मदर्स मिल्क बैंक नवजात शिशुओं के लिए मां का दूध स्टोर करने और वितरित करने वाली एक नॉन-प्रॉफिट संस्था है। इन बैंकों में स्वेच्छा से दूध दान किया जाता है, जिससे जरूरतमंद नवजात शिशुओं को मां का दूध उपलब्ध कराया जा सके।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 04 Mar 2025 13:18:53 +0530</pubDate>
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                <title>ये कैसे इंतजाम! बनने के 34 माह बाद भी मदर मिल्क बैंक नहीं हो पाया शुरू</title>
                                    <description><![CDATA[कुपोषित व बिन मां के बच्चों की मां के दूध के इंतजार में पथराई आंखें।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/what-kind-of-arrangement-is-this--mother-milk-bank-could-not-be-started-even-after-34-months-of-its-construction/article-106202"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-03/257rtrer-(5)4.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। संभाग के सबसे बड़े जेकेलोन अस्पताल में पौने तीन साल से मदर मिल्क बैंक बनकर तैयार पड़ा है। सरी मशीने लग गई स्टाफ को प्रशिक्षण भी दिया जा चुका उसके बावजूद अभी तक शुरू नहीं होने से 84 लाख से अधिक से तैयार भवन का उपयोग नहीं हो रहा । इसका खामीयाजा कुपोषित बच्चों को उठाना पड़ रहा है। जेकेलोन अस्पताल प्रशासन के ढीली कार्य शैली कारण कुपोषित व बिन मां के बच्चों को दूध के लिए आंख पथरा गई है। मदर मिल्क बैंक भवन बनकर तैयार हुए 34 माह से अधिक हो गए उसके बावजूद अभी शुरू नहीं हो का। इस दौरान तीन अधीक्षक तक बदल गए लेकिन मदर मिल्क बैंक ताले अभी तक खूले नहीं है।</p>
<p><strong>धूल फांक रहे उपकरण </strong><br />मदर मिल्क बैंक के भवन को हस्तांतरित किए करीब 24 माह से अधिक हो गया है, जिसका कोई उपयोग नहीं हो रहा है । इधर बंद पड़ा भवन मरीजों के परिजनों के कपड़े सुखाने के काम आ रहा है।  वहीं उपकरण अंदर पड़े पडे धूल फांक रहे है। उल्लेखनीय है कि 84 लाख की लागत से तैयार भवन में एसी से लेकर बाकी सभी सुविधाएं लग गई लेकिन इसको शुरू नहीं किया जा रहा है। पौने तीन साल से बेसब्री से इसके शुरू होने इंतजार कर रहे नौनिहालों इंतजार कब खत्म होगा ये यक्ष प्रश्न बना हुआ है।</p>
<p><strong>अस्थाई मदर मिल्क बैंक मूर्तरूप लेता तो आज उसे चले तीन साल हो जाते</strong><br />जेके लोन मातृ एवं शिशु अस्पताल में मार्च 2021 में अस्पताल के दो कमरों में अस्थाई मदर मिल्क बैंक शुरू करने की कवायद शुरू की थी। अप्रैल 2021 में दो कमरे और किचन बनकर तैयार भी हो गया था।  इसकी शुरुआत अप्रैल 2021 में करनी थी, लेकिन कोरोना संक्रमण से अंतरराष्टÑीय विमान सेवाएं बंद होने से मदर मिल्क के लिए आवश्यक मशीनें कोटा नहीं पहुंच सकी। जिससे  मदर मिल्क बैंक मूर्तरूप नहीं ले सका । अगर उस समय ये अस्थाई मदर मिल्क मूर्तरूप ले लेता तो 34 माह का लंबा इंतजार नहीं करना पड़ता 22 अप्रैल 2022 को भवन बन गया था उसमें यह मशीन शिफ्ट हो जाती और बच्चों को मां के दूध से वंचित नहीं रहना पड़ा। </p>
<p><strong>नवजात बच्चों को कुपोषण से बचाने का लंबा हो रहा इंतजार</strong><br />बालपोषण संस्थाओं के अनुसार जन्म के आधे घंटे के भीतर मां का पहला दूध बच्चे के लिए पीना जरूरी है, लेकिन किसी कारणवश देश में 95 प्रतिशत बच्चों को यह दूध नहीं मिल पाता। यही वजह है कि भारत में हर दूसरा बच्चा कुपोषित है। इस बात को ध्यान में रखते हुए कोटा में मदर मिल्क बैंक तैयार करने की कवायद की लेकिन अस्पताल प्रशासन इसको लेकर अभी तक गंभीर नजर नहीं आ रहा है। इसका खामियाजा नवजात शिशुओं को उठाना पड़ रहा है। ये मदर मिल्क बैंक शुरू हो जाता तो नवजात (0-1 साल) बच्चों को कुपोषित होने और दूध के अभाव में मौत के मुंह में समाने से रोका जा सकता है। </p>
<p><strong>रोज मिलेगा एक दर्जन बच्चों को लाभ</strong><br />जेकेलोन अस्पताल अधीक्षक डॉ. निर्मला शर्मा ने बताया कि प्रसूताएं एक दिन में तीन बार दूध दान कर सकेंगी। यह मिल्क बैंक उन नवजात शिशुओं के लिए वरदान साबित होगा, जिनकी मां नहीं हैं या जिन्हें मां का दूध नहीं मिल पा रहा है।  इस बैंक से प्रतिदिन एक दर्जन से अधिक नवजात शिशुओं को लाभ मिलेगा और उन्हें पोषक मां का दूध उपलब्ध कराया जा सकेगा। मदर्स मिल्क बैंक बनने के बाद कोटा, बूंदी, बारां, झालावाड़ ही नहीं, बल्कि मध्य प्रदेश तक के नवजात शिशुओं और उनके परिजनों को फायदा मिलेगा। हालांकि, दूध दान करने वाली महिलाओं के स्वास्थ्य की पूरी जांच की जाएगी, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि उन्हें कोई बीमारी न हो। मदर्स मिल्क बैंक नवजात शिशुओं के लिए मां का दूध स्टोर करने और वितरित करने वाली एक नॉन-प्रॉफिट संस्था है। इन बैंकों में स्वेच्छा से दूध दान किया जाता है, जिससे जरूरतमंद नवजात शिशुओं को मां का दूध उपलब्ध कराया जा सके।</p>
<p><strong>34 माह में कभी उपकरण तो कभी स्टॉफ की कमी की बताई समस्या</strong><br />जेकेलोन अस्पताल पिछले 34 माह से कभी उपकरण तो कभी स्टॉफ नहीं होने तो कभी प्रशिक्षण के नाम पर मदर मिल्क बैंक के संचालन को टाल रहा जिससे कपोषित बच्चों को मां का दूध नहीं मिल पा रहा है। 84 लाख लागत से भवन बनकर तैयार हो गया। कई भामाशाहों ने मशीने भी लगवाई। भवन में कुर्सी, एसी और अन्य उपकरण लगाए भी एक साल से अधिक हो गया। लेकिन हर बार शुरू करने का आश्वासन ही मिलता है। मदर मिल्क चालू नहीं होने से  मासूमों का इंतजार लंबा हो रहा है। 22 अप्रैल 2022 को भवन बनकर तैयार हो गया।  पौने साल इसके शुरू होने का  इंतजार इंतजार ही किया जा रहा है।  <br /><strong>- अब्दूल हामीद गौड़, सर्वोदय नेता </strong></p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />जेकेलोन अस्पताल में मदर मिल्क बैंक में सारे आवश्यक उपकरण लग गए है। शिशुरोग विभाग के स्टॉफ को इसके संचालन का प्रशिक्षण व मशीने चलाने बारे प्रशिक्षण दिया जा चुका है। शिशुरोग विभाध्यक्ष को इसको शुरू करने के लिए निर्देश दिए है। 4 मार्च को इसको शुरू करने के लिए कहा है। <br /><strong>- डॉ. निर्मला शर्मा,  अधीक्षक जेकेलोन अस्पताल कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 03 Mar 2025 15:52:34 +0530</pubDate>
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                <title>अव्यवस्था के घड़े में बंद पड़ा बच्चों का ‘अमृत’</title>
                                    <description><![CDATA[मदर मिल्क बैंक के संचालन के लिए आॅपरेटर और आवश्यक स्टाफ जून माह में आना प्रस्तावित था। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/children-s--amrit--lying-closed-in-the-pot-of-chaos/article-86864"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-08/avyavastha-k-ghde-me-bnd-pda-bachho-ka-amrut...kota-news-05-08-2024.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। जेके लोन अस्पताल में नवजात शिशुओं के लिए बनाए गए मदर मिल्क बैंक को अभी भी चालू नहीं हो सका है। बैंक के संचालन के लिए जरूरी स्टाफ और आॅपरेटर अभी भी उपलब्ध नहीं हो पाए हैं। जिसके चलते लाखों रुपए की लागत से तैयार यह बैंक किसी काम नहीं आ पा रहा है। साथ ही इसमें मौजूद उपकरण भी स्थापित होने के बाद से यूं ही पड़े हैं। ऐसे में नवजात शिशुओं को मां का दूध उपलब्ध कराने के उद्देश्य से बनाए गए इस बैंक का लाभ मिलने में और लंबा इंतजार करना पड़ सकता है।</p>
<p><strong>जून में आना था स्टाफ, अभी भी कागजी कारवाई में</strong><br />मदर मिल्क बैंक के संचालन के लिए आॅपरेटर और आवश्यक स्टाफ जून माह में आना प्रस्तावित था। लेकिन उससे पहले आचार संहिता लगने के कारण प्रक्रिया रुक गई और स्टाफ लगाने का कार्य धीमा पड़ गया। वहीं उसके बाद अस्पताल प्रशासन ने भी अपने स्तर पर स्टाफ को ट्रेनिंग देकर इसके संचालन की कोशिश करने की बात कही थी। जिसमें अभी कोई ट्रेनर नहीं होने से प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पाइ है। बैंक के संचालन के लिए स्टाफ एनएचएम नेशनल हेल्थ मिशन जयपुर से आना था जिसकी प्रक्रिया अभी भी कागजी कारवाई में रुकी पड़ी है। </p>
<p><strong>2017 में बना 2021 में हुई चलाने की कोशिश</strong><br />नेशनल हेल्थ मिशन के तहत प्रदेश के 23 जिलों में मदर मिल्क बैंक की स्थापना की गई थी। वहीं नेशनल हेल्थ मिशन के तहत ही प्रदेश सरकार ने अपने स्तर पर कोटा, बीकानेर, झालावाड़ और जोधपुर में 2017 में मदर मिल्क बैंक की शुरूआत की थी। लेकिन उपकरण नहीं आने के चलते कोटा में इसका संचालन नहीं हो सका था। जिसके बाद इसे अस्पताल में ही अस्थाई रूप से साल 2021 में शुरू करने की कोशिश की गई थी। लेकिन कोरोना काल में अंतराष्ट्रीय प्रतिबंधों के चलते जरूरी उपकरण नहीं आ पाए थे और मामला तब से अटका हुआ था। इस पर जेके लोन पिडियाट्रिक मेडिसिन विभागाध्यक्ष अमृता मंयागर ने बताया कि मदर मिल्क बैंक का भवन 80 लाख रुपए की लागत से बनकर तैयार हुआ है। इसके लिए नेशनल हेल्थ मिशन जयपुर से कुछ संसाधन मंगवाए गए थे जो आ चुके हैं। लेकिन उपकरणों को चलाने के लिए जरूरी स्टाफ नहीं आ पाया है।</p>
<p><strong>500 से 700 बच्चों के लिए तीन माह तक उपलब्ध होगा दूध</strong><br />मदर मिल्क बैंक में एक समय में 500 से 700 नवजातों को दूध उपलब्ध करवाने का स्टोरेज रहेगा। साथ ही यहां पर जो मशीनरी स्थापित की गई और जो डीप फ्रीजर लग हैं, उनमें इस दूध को 3 महीने तक प्रिजर्व रखा जा सकता है। कई बार प्रसव के बाद नवजात की मां को सही से दूध नहीं आ पाता है ऐसे में नवजात को दूध उपलब्ध कराने के लिए इस बैंक को बनाया गया है। जहां जेके लोन अस्पताल में भर्ती शिशुओं को यह दूध प्राथमिकता पर उपलब्ध करवाया जाएगा। वहीं अतिरिक्त मदर मिल्क बचने पर उसे दूसरे अस्पतालों को उपलब्ध कराया जा सकेगा। अस्पताल प्रशासन के अनुसार यह सेवा पूरी तरह से निशुल्क रहेगी जिस पर किसी तरह का कोई शुल्क नहीं वसूला जाएगा।</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />मदर मिल्क बैंक बनकर तैयार है उसके सभी उपकरण भी स्थापित कर दिए गए हैं। केवल स्टाफ और आॅपरेटर की आवश्यकता है। जिसके लिए एनएचएम जयपुर पत्र लिखा हुआ है, बैंक को इसी माह से शुरू करने का पूरा प्रयास कर रहे हैं।<br /><strong>- निर्मला शर्मा, अधीक्षक, जेके लोन अस्पताल</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 05 Aug 2024 17:47:36 +0530</pubDate>
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                <title>ये कैसे इंतजाम! : दस माह में भी मदर मिल्क बैंक के उपकरण नहीं मंगवा सके</title>
                                    <description><![CDATA[पीडब्ल्यूडी द्वारा अस्पताल प्रशासन को भवन हस्तांतरित भी कर दिया लेकिन अभी बच्चे मदर मिल्क के दूध से दूर है। 
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/how-this-arrangement----mother-milk-bank-s-equipment-could-not-be-ordered-even-in-ten-months/article-54601"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-08/ye-kese-intezaam--das-maah-me-bhi-mother-milk-k-upkaran-nhi-mangwa-ske...kota-news-14-08-2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। जेकेलोन अस्पताल प्रशासन के ढीली कार्य शैली का भुगतान कुपोषित व बिन मां के बच्चों को भुगतना पड़ रहा है। मदर मिल्क बैंक भवन बनकर तैयार हुए दस माह से अधिक हो गए उसके बावजूद अभी तक उपकरण पूरे नहीं लगे। अस्पताल प्रशासन ने पहले मार्च मशीन आने और इसके शुरू होने की बात की उसको छह माह बीत गए। मदर मिल्क बैंक में एक एक उपकरण आने और उसको स्टॉल करने में ही समय निकाला जा रहा है। जिसके चलते मासूमों का इंतजार लंबा हो रहा है। दो साल से लंबे इंतजार के बाद तो भवन तैयार हुआ । अब भवन तैयार है तो उपकरण के नाम पर देरी हो रही है। खास बात ये है कि जेकेलोन अस्पताल परिसर में बहुप्रतीक्षित  मदर मिल्क बैंक भवन बनकर हो गया है। पीडब्ल्यूडी द्वारा अस्पताल प्रशासन को भवन हस्तांतरित भी कर दिया लेकिन अभी बच्चे मदर मिल्क के दूध से दूर है। कारण की भवन में कई उपकरण अभी आना बाकी है। </p>
<p><strong>कपड़े सुखाने के काम आ रहा</strong><br />अस्पताल प्रशासन का कहना है कि मदर मिल्क बैंक में कई आवश्यक उपकरण राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत आ रहे जिससे ये देरी हो रही है।  मदर मिल्क बैंक के भवन को हस्तांतरित किए करीब 10 माह से अधिक हो गया है, जिसका कोई उपयोग नहीं हो रहा है । इधर बंद पड़ा भवन मरीजों के परिजनों के कपड़े सुखाने के काम आ रहा है। उल्लेखनीय है कि 84 लाख की लागत से तैयार भवन में एसी से लेकर बाकी सभी सुविधाएं लग गई लेकिन मिल्क को संग्रहण से लेकर अन्य आधुनिक उपकरणों को स्थापित करने में अभी समय लग रहा है। दो साल से बेसब्री इंतजार कर रहे नौनिहालों इंतजार कब खत्म होगा ये यक्ष प्रश्न बना हुआ है।</p>
<p><strong>नवजात बच्चों को कुपोषण से बचाने का लंबा हो रहा इंतजार</strong><br />बालपोषण संस्थाओं के अनुसार जन्म के आधे घंटे के भीतर मां का पहला दूध बच्चे के लिए पीना जरूरी है, लेकिन किसी कारणवश देश में 95 प्रतिशत बच्चों को यह दूध नहीं मिल पाता। यही वजह है कि भारत में हर दूसरा बच्चा कुपोषित है। इस बात को ध्यान में रखते हुए कोटा में मदर मिल्क बैंक तैयार करने की कवायद की लेकिन अस्पताल प्रशासन इसको लेकर अभी तक गंभीर नजर नहीं आ रहा है। इसका खामियाजा नवजात शिशुओं को उठाना पड़ रहा है। ये मदर मिल्क बैंक शुरू हो जाता तो नवजात (0-1 साल) बच्चों को कुपोषित होने और दूध के अभाव में मौत के मुंह में समाने से रोका जा सकता है। </p>
<p><strong>अस्थाई मदर मिल्क बैंक होता तो ये समस्या नहीं आती</strong><br />जेके लोन मातृ एवं शिशु अस्पताल में मार्च 2021 में अस्पताल के दो कमरों में अस्थाई मदर मिल्क बैंक शुरू करने की कवायद शुरू की थी। अप्रैल 2021 में दो कमरे और किचन बनकर तैयार भी हो गया था।  इसकी शुरुआत अप्रैल 2021 में करनी थी, लेकिन कोरोना संक्रमण से अंतरराष्ट्रीय विमान सेवाएं बंद होने से मदर मिल्क के लिए आवश्यक मशीनें कोटा नहीं पहुंच सकी। जिससे  मदर मिल्क बैंक मूर्तरूप नहीं ले सका । अगर उस समय ये अस्थाई मदर मिल्क मूर्तरूप ले लेता तो आज उसमें लगी मशीन शिफ्ट हो जाती और बच्चों को मां के दूध से वंचित नहीं रहना पड़ा। </p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />जेकेलोन अस्पताल में मदर मिल्क बैंक भवन तैयार है उसके कई उपकरण तो आ चुके कुछ बाकी है।  उसके आते ही इसको चालू किया जा रहा है। अभी एक एक उपकरण आ रहे उनको स्टॉल कर रहे है। <br /><strong>- डॉ. आशुतोष शर्मा,  अधीक्षक जेकेलोन अस्पताल</strong> </p>
<p>मदर मिल्क बैंक को शीघ्र शुरू करने का प्रयास किया जा रहा है। कुछ उपकरण स्टॉल होना बाकी है। उसके बाद ही ये शुरू होगा। आवश्यक उपकरण राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत आ रहे है। जिससे समय लग रहा है।<br /><strong>- डॉ. संगीता सक्सेना, प्राचार्य मेडिकल कॉलेज कोटा </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 14 Aug 2023 18:28:51 +0530</pubDate>
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