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                <title>पीएम मोदी ने दी भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को श्रद्धांजलि, बोले-राष्ट्र के लिए उनकी शहादत हमारी सामूहिक स्मृति में हमेशा के लिए अंकित</title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शहीद दिवस पर वीर सपूतों—भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव—को नमन किया। 23 मार्च 1931 को देश के लिए उनके सर्वोच्च बलिदान को याद करते हुए पीएम ने कहा कि उनका साहस और देशभक्ति आज भी पीढ़ियों को प्रेरित करती है। राष्ट्र के प्रति उनका समर्पण भारतीय इतिहास में हमेशा अमर रहेगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/pm-modi-paid-tribute-to-bhagat-singh-rajguru-and-sukhdev/article-147478"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/1200-x-60-px)-(6)9.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को स्वतंत्रता सेनानियों भगत सिंह, शिवराम राजगुरु और सुखदेव थापर को श्रद्धांजलि दी और भारत की स्वतंत्रता की लड़ाई में उनकी शहादत को एक निर्णायक पल के रूप में याद किया। प्रधानमंत्री ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, "आज, हम भारत माता के वीर सपूतों - भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव - के सामने श्रद्धा से नतमस्तक हैं। राष्ट्र के लिए उनकी शहादत हमारी सामूहिक स्मृति में हमेशा के लिए अंकित है।"</p>
<p>पीएम मोदी ने कम उम्र में ही उनके साहस और समर्पण को रेखांकित करते हुए कहा कि इन तीनों का बलिदान आज भी कई पीढ़ियों को प्रेरित करता है। उन्होंने कहा, "कम उम्र में ही उन्होंने असाधारण साहस और भारत की स्वतंत्रता के उद्देश्य के प्रति अटूट प्रतिबद्धता का प्रदर्शन किया। औपनिवेशिक शासन की ताकत से बिना डरे, उन्होंने पूरे दृढ़ विश्वास के साथ बलिदान का मार्ग चुना, और राष्ट्र को अपने जीवन से भी ऊपर रखा।"</p>
<p>उन्होंने उनके आदर्शों की चिरस्थायी प्रासंगिकता पर भी जोर दिया। उन्होंने आगे कहा, "न्याय, देशभक्ति और निडर प्रतिरोध के उनके आदर्श आज भी अनगिनत भारतीयों के मन में जोश भरते हैं।" भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव देश के स्वतंत्रता आंदोलन के सबसे सम्मानित क्रांतिकारियों में से हैं। ब्रिटिश अधिकारी जे.पी. सॉन्डर्स की हत्या में उनकी भूमिका के लिए ब्रिटिश औपनिवेशिक सरकार द्वारा 23 मार्च, 1931 को उन्हें फांसी दे दी गई थी। यह हत्या राष्ट्रवादी नेता लाला लाजपत राय की मृत्यु के प्रतिशोध में की गई थी। इस दिन को भारत में शहीद दिवस के रूप में मनाया जाता है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Mon, 23 Mar 2026 11:26:08 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>पीएम मोदी ने दांडी मार्च में हिस्सा लेने वालों को नमन करते हुए दी श्रद्धांजलि, सच्चाई और नेकी के विचारों को किया याद </title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऐतिहासिक दांडी मार्च की वर्षगांठ पर महात्मा गांधी और वीर सत्याग्रहियों को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने 1930 के नमक आंदोलन की अटूट हिम्मत को याद करते हुए 'सत्यमेव जयते' का संदेश साझा किया। साबरमती से दांडी तक की यह 390 किमी की यात्रा भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के लिए आज भी प्रेरणा का प्रतीक है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/pm-modi-paid-tribute-to-the-participants-of-dandi-march/article-146192"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/pm-modi2.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऐतिहासिक दांडी मार्च की वर्षगांठ पर उसमें हिस्सा लेने वाले लोगों को नमन करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की है। पीएम मोदी ने गुरुवार को एक्स पर पोस्ट किए गए एक संदेश में उन नेताओं और स्वयंसेवकों को याद किया जिन्होंने 1930 में महात्मा गांधी के नेतृत्व में ब्रिटिश शासन के खिलाफ बड़े सविनय अवज्ञा आंदोलन के हिस्से के तौर पर मार्च में हिस्सा लिया था।    </p>
<p>प्रधानमंत्री ने लिखा, सन 1930 में आज ही के दिन दांडी मार्च की शुरुआत हुई थी। इसमें शामिल सभी विभूतियों का श्रद्धापूर्व स्मरण। उन्होंने उन लोगों की हिम्मत और कुर्बानी को याद किया जो नमक कानूनों के खिलाफ मार्च में शामिल हुए थे। पीएम मोदी ने सच्चाई और नेकी के विचार से जुड़े एक संस्कृत श्लोक का भी जिक्र करते हुए लिखा, सत्यमेव जयते नानृतं सत्येन पन्था विततो देवयान:, येन आक्रमंति ऋषयो ह्याप्तकाम यत्र तत् सत्यस्य परमं निधनम्।</p>
<p>उल्लेखनीय है कि, दांडी मार्च 12 मार्च, 1930 को शुरू हुआ, जब महात्मा गांधी और उनके समर्थकों का एक समूह अहमदाबाद के साबरमती आश्रम से गुजरात के तटीय गांव दांडी तक 24 दिन, लगभग 390 किलोमीटर की यात्रा पर निकला था। इस मार्च का मकसद नमक उत्पादन और कर पर ब्रिटिश एकाधिकार को चुनौती देना था। छह अप्रैल, 1930 को गांधीजी ने दांडी में समुद्र के पानी से नमक बनाकर सांकेतिक रूप से नमक कानून तोड़ा। इससे पूरे देश में बड़े पैमाने पर सविनय अवज्ञा आंदोलन शुरू हुआ और भारत के स्वतंत्रता आंदोलन की ओर दुनिया का ध्यान गया। </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Thu, 12 Mar 2026 12:06:24 +0530</pubDate>
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                <title>स्वतंत्रता संग्राम के वीरों से प्रेरणा लेने का आह्वाहन</title>
                                    <description><![CDATA[ स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की वीरगाथा को आम जनता के सामने लाने के उद्देश्य से देश में आयोजित किए जा रहे क्रान्तितीर्थ समारोह की कड़ी में उत्तराखंड के कुमांयू अंचल में स्थित काशीपुर और हल्द्वानी में क्रांतितीर्थ समारोह का आयोजन किया गया। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/call-to-take-inspiration-from-the-heroes-of-the-freedom/article-54620"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-08/kolhapur.jpg" alt=""></a><br /><p>काशीपुरI स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की वीरगाथा को आम जनता के सामने लाने के उद्देश्य से देश में आयोजित किए जा रहे क्रान्तितीर्थ समारोह की कड़ी में उत्तराखंड के कुमांयू अंचल में स्थित काशीपुर और हल्द्वानी में क्रांतितीर्थ समारोह का आयोजन किया गया। समारोह में स्वतंत्रता संग्राम के वीर सेनानियों के वंशजों ने हिस्सा लिया, जिन्हें सम्मानित किया गया I <br />बाजपुर रोड स्थित एक रिसोर्ट में आयोजित क्रांतितीर्थ समारोह की अध्यक्षता केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री अजय भट्ट ने की, जबकि पीएनजी समूह के प्रबंध निदेशक योगेश जिंदल मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहे I दीप प्रज्ज्वलन के साथ प्रारम्भ हुए समारोह में स्वतंत्रता संग्राम सेनानी किशोरी लाल गुड़िया, रघुनन्दन प्रसाद लोहिया, बाल मुकुंद माहेश्वरी, धर्मानंद त्रिपाठी, बैजनाथ, बच्ची सिंह बंगारी, पिताम्बर दत्त शास्त्री, नन्द किशोर कश्यप, जय सिंह शाह, आनंद सिंह रावत, चौ. हरज्ञान सिंह, ठाकुर नैन सिंह, श्याम लाल चतुर्वेदी, जय राम गुप्ता एवं मिट्ठन लाल के परिजनों का सम्मान किया गया I <br />समारोह में केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री अजय भट्ट ने स्वतंत्रता के लिए अपने प्राण देने वाले बलिदानियों को श्रद्धांजलि दी I मुख्य वक्ता एवं जम्मू-कश्मीर अध्ययन केंद्र के निदेशक आशुतोष भटनागर ने क्रांतितीर्थ श्रृंखला के अंतर्गत आयोजित किए जा रहे समारोह के विषय में चर्चा करते हुए कहा कि भारत के स्वतंत्रता संग्राम में हजारों वीरों ने अपनी प्राण न्यौछावर कर दिए और देश को स्वतन्त्र कराकर ही दम लिया I दुर्भाग्य यह है कि इतिहास में सैकड़ों वीरों की वीरता को या तो स्थान ही मिला या फिर वह अल्पज्ञात ही रहे I ऐसे अनाम एवं अल्पज्ञात वीरों एवं बलिदानियों की गाथा से देशवाशियों को परिचित कराने के लिए क्रांतितीर्थ समारोह का आयोजन देश भर में किया जा रहा है I <br />काशीपुर में क्रांतितीर्थ समारोह का आयोजन क्रांतितीर्थ आयोजन समिति (काशीपुर) एवं सेंटर फॉर एडवांस्ड रिसर्च ऑन डेवलपमेंट एंड चेंज द्वारा संयुक्त रूप से किया गया I काशीपुर में आयोजित क्रांतितीर्थ समारोह के संयोजक गुरुविंदर चंडोक, संरक्षक अरविन्द राव, गुंजन सुखीजा, राजीव कौशिक, विधायक त्रिलोक सिंह,  अरविन्द पांडेय, पूर्व विधायक हरभजन सिंह चीमा, डॉ. शैलेन्द्र सिंह सिंघल, मेयर श्रीमती उषा चौधरी, सर्वेश शर्मा, विकास राणा, सुरेंद्र सिंह जीना, अमित मित्तल सहित बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक मौजूद रहे I <br />उधर रविवार सायंकाल हल्द्वानी में क्रांतितीर्थ समारोह का आयोजन श्रीश्याम गार्डन में हुआ, जहां स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के परिवार जनों को सम्मानित किया गया। समारोह के मुख्य अतिथि प्रदीप जोशी, विशिष्ट अतिथि नीरज शारदा एवं मुख्य वक्ता जम्मू-कश्मीर अध्ययन केंद्र के निदेशक थे, जबकि समारोह की अध्यक्षता जिला पंचायत अध्यक्ष बेला तौलिया ने की I समारोह का शुभारम्भ दीप प्रज्ज्वलित करके हुआ I <br />मुख्य वक्ता आशुतोष भटनागर ने कहा कि इतिहास के पृष्ठों में अनाम, अज्ञात और अल्पज्ञात बलिदानी, जिन्होंने अपना सर्वस्व देश की स्वतंत्रता, स्वराज और स्वधर्म के लिए समर्पित कर दिया, उन्हें सदैव याद रखना और उनके प्रति अपनी कृतज्ञता ज्ञापित करना, हर भारतीय का धर्म है। देश के लिए शहीदों के योगदान पर चर्चा करते हुए उन्होंने शहीदों के बलिदान से प्रेरणा लेने का आह्वान करते हुए कहा कि प्रेरणा शहीदों से अगर हम नहीं लेंगे, आजादी ढलती हुई सांझ हो जाएगी, वीरों की पूजा हम नहीं करेंगे तो वीरता बांझ हो जाएगी। स्वतंत्रता का आंदोलन 1857 से प्रारम्भ होकर 1947 तक ही नहीं चला, बल्कि आजादी का आंदोलन इस्लामी आक्रमणकारीयों के भारत में प्रवेश से प्रारम्भ हो गया था। ऐसे में बच्चों को वास्तविक व पूर्ण इतिहास पढ़ाया जाना आवश्यक हैं, ताकि उन्हें भारत के वास्तविक नायकों का पता चल सके। <br />समारोह में देश की स्वतंत्रता में अपना अमूल्य योगदान देने वाले महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी भूपाल सिंह खाती, कमला पति दुमका, हरी दत्त गर्जोला, नंदन सिंह बिष्ट, शिव नारायण सिंह नेगी, दान सिंह बिष्ट , लोकमणि शर्मा, दुर्गा दत्त दुर्गापाल, लक्ष्मी दत्त पांडे, जोगा राम आर्य, मोहन सिंह मेहता, संत राम शर्मा, शंकर दत्त पंत, केशर सिंह नेगी , रामदत्त डाल, ब्रज मोहन पांडे, तारा दत्त पांडे, सीतावर पंत, गंगादत्त पांडे, शिवराज सिंह फर्त्याल, लक्ष्मी दत्त गुणवंत एवं गौरी दत्त पांडे के स्वजनों को सम्मानित किया गया। <br />समारोह में विधायक हल्द्वानी सुमित हृदयेश, मेयर डॉ. जोगेन्दर पाल सिंह रौतेला, जिला पंचायत उपाध्यक्ष आनंद दरमवाल, क्रांतितीर्थ आयोजन समिति (हल्द्वानी) के संरक्षक डॉक्टर नीलांबर भट्ट, संयोजक भगवान सहाय अग्रवाल, सह संयोजक विवेक कश्यप, सुरेश पांडे, श्रीमती विमला भट्ट, कृष्ण चंद्र बेलवाल, समरपाल, अमरनाथ जोशी, उमेश शाह, अतुल अग्रवाल, प्रदीप लोहनी, विनीत अग्रवाल सहित मोहन पाठक, नवीन दुम्का, दिनेश खुल्वे, हेमंत द्विवेदी, गोधन सिंह धोनी, सूरज प्रकाश तिवारी, कमलेश त्रिपाठी, सहित अनेक गण्यमान्य लोगों ने हिस्सा लिया I <br />जानकारी हो कि भारत को अंग्रेजों की गुलामी से मुक्त कराने के लिए हजारों वीर सिपाहियों और क्रांतिकारियों ने अपने प्राणों की भेंट चढ़ा दी I लेकिन उनकी गाथाओं को इतिहास के पृष्ठों में स्थान नहीं मिला I स्वतंत्रता संग्राम के ऐसे गुमनाम एवं अल्पज्ञात सेनानियों की वीरगाथा को आम जनता के सामने लाने का बीड़ा उठाया है-केंद्र सरकार के संस्कृति मंत्रालय और सेंटर फॉर एडवांस्ड रिसर्च ऑन डेवलपमेंट एंड चेंज (सीएआरडीसी) ने और इसमें संस्कार भारती सहयोगी की भूमिका में है I 'आजादी के अमृत महोत्सव' के अवसर पर क्रान्तितीर्थ श्रृंखला का आयोजन संस्कृति मंत्रालय एवं सीएआरडीसी द्वारा गुमनाम एवं अल्पज्ञात स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान को सामने लाने के लिए पूरे देश में किया जा रहा है I</p>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Mon, 14 Aug 2023 19:02:22 +0530</pubDate>
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