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                <title>Lander - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>Lander RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>चंद्रयान-3 के &quot;हॉप&quot; प्रयोग ने चंद्रमा के छिपे रहस्यों को किया उजागर, वैज्ञानिकों को दक्षिणी ध्रुव पर मिली 'रेगोलिथ हेटेरोजेनिटी'</title>
                                    <description><![CDATA[इसरो के चंद्रयान-3 के विक्रम लैंडर द्वारा किए गए 'हॉप' प्रयोग से चंद्रमा की सतह (लूनर रेगोलिथ) की जटिल संरचना और तापीय गुणों का खुलासा हुआ है। चास्टे (ChaSTE) उपकरण के विश्लेषण से पता चला है कि चांद की ऊपरी परत अत्यधिक छिद्रयुक्त और चिपचिपी है, जो भविष्य के मानव आवास और जल-बर्फ खोज के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/chandrayaan-3s-hop-experiment-exposed-the-hidden-secrets-of-the-moon/article-154352"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/isro-harikota.png" alt=""></a><br /><p>चेन्नई। भारत के तीसरे चंद्र मिशन चंद्रयान-3 के विक्रम लैंडर द्वारा किए गए 'हॉप' प्रयोग ने चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव से जुड़े कई छिपे रहस्यों का खुलासा किया है। वैज्ञानिकों ने इस प्रयोग के जरिए चंद्र सतह की रेगोलिथ विषमता (रेगोलिथ हेटेरोजेनिटी) का पता लगाया है, जो भविष्य के चंद्र अभियानों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इन निष्कर्षों से चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्र में सतही अभियानों को लेकर नई जानकारी मिली है। वैज्ञानिकों का कहना है कि स्थानीय स्तर पर सतह की विविधता को समझना भविष्य में चंद्रमा पर वैज्ञानिक आधार और आवास निर्माण की योजनाओं के लिए आवश्यक है। यह अध्ययन इस प्रकार का पहला अनूठा उदाहरण है।</p>
<p>उल्लेखनीय है कि चंद्रयान-3 का विक्रम लैंडर 23 अगस्त 2023 को चंद्रमा की सतह पर सफलतापूर्वक उतरा था। करीब 10 पृथ्वी दिवस तक चंद्र सतह, निकट-सतही प्लाज्मा और भू-कंपनों से जुड़े प्रयोग करने के बाद, दो सितंबर 2023 को लैंडर ने बचा हुआ ईंधन इस्तेमाल कर 'हॉप' प्रयोग किया था। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन ने मंगलवार को कहा कि यह 'हॉप' भविष्य में चंद्रमा से नमूने पृथ्वी पर लाने वाले अभियानों के लिए एक महत्वपूर्ण तकनीकी क्षमता साबित हुआ है। इसरो ने कहा कि जिसे सामान्य तौर पर 'चंद्र मिट्टी' कहा जाता है, उसका सही वैज्ञानिक नाम 'लूनर रेगोलिथ' है। यह दरअसल चट्टानों के टूटे हुए अत्यंत महीन, नुकीले और कांच जैसे कणों से बना होता है, जो बेहद खुरदरे होते हैं और स्थैतिक विद्युत की तरह हर चीज से चिपक जाते हैं। इसरो के अनुसार चंद्र रेगोलिथ के तापीय और भौतिक गुणों को समझना वैज्ञानिक और तकनीकी दोनों दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसके ताप-भौतिक गुण यह समझने में मदद करते हैं कि चंद्रमा सूर्य से प्राप्त ऊष्मा को किस प्रकार अवशोषित और अंतरिक्ष में विकिरत करता है।</p>
<p>इसी उद्देश्य से विक्रम लैंडर पर 'चंद्रा सरफेस थर्मोफिजिकल एक्सपेरिमेंट' (चास्टे) उपकरण लगाया गया था। यह एक नुकीला, छड़नुमा उपकरण था, जिसमें तापमान मापक सेंसर और अग्रभाग पर हीटर लगाया गया था, जो चंद्र रेगोलिथ में प्रवेश कर उसके गुणों का अध्ययन करता था। लैंडर के 'हॉप' के दौरान चास्टे ने दूसरे स्थान पर भी विश्लेषण किया और यह देखा कि इंजन की गैसों के दबाव से चंद्र सतह किस प्रकार प्रभावित हुई। इससे वैज्ञानिकों को चंद्रमा के 'ट्वाइलाइट' यानी सांध्यकाल के दौरान भी मापन करने का अवसर मिला। इसरो ने कहा कि चंद्रमा पर एक दिन-रात चक्र पृथ्वी के लगभग एक महीने के बराबर होता है। ऐसे में वहां का सांध्यकाल कुछ मिनटों का न होकर कई घंटों तक चलता है, जिससे वैज्ञानिकों को सतह के धीरे-धीरे ठंडा होने की प्रक्रिया का अध्ययन करने का अवसर मिलता है। भौतिक अनुसंधान प्रयोगशाला (पीआरएल) के वैज्ञानिकों ने इन आंकड़ों के आधार पर चंद्रमा के उच्च अक्षांशीय क्षेत्र की रेगोलिथ परत के ताप-भौतिक और भू-तकनीकी गुणों का विश्लेषण किया।</p>
<p>चास्टे द्वारा दर्ज तापमान और प्रवेश बल के आंकड़ों से संकेत मिला कि लैंडर इंजनों के दोबारा प्रज्वलन से रेगोलिथ की ऊपरी कुछ सेंटीमीटर परत प्रभावित हुई और उसकी ऊपरी मुलायम परत हट गयी। यह परिवर्तन प्रत्यक्ष रूप से चास्टे के मापों में दर्ज हुआ, जिसे अन्यथा देख पाना संभव नहीं था। इसके अलावा, चंद्रयान-2 के ओएचआरसी उच्च-रिजॉल्यूशन आंकड़ों पर आधारित त्रि-आयामी मॉडलिंग से यह भी पता चला कि रेगोलिथ की संरचना अत्यंत जटिल है और उसके भू-तकनीकी तथा तापीय गुण विशिष्ट हैं। अध्ययन में पाया गया कि रेगोलिथ की ऊपरी दो से छह सेंटीमीटर परत अत्यधिक चिपचिपी और अत्यधिक छिद्रयुक्त है, जो तापीय कंबल की तरह कार्य कर सकती है। वैज्ञानिकों के अनुसार यह परत उप-सतह में जल-बर्फ अणुओं के संरक्षण तथा भविष्य में चंद्रमा पर वैज्ञानिक केंद्र और आवास निर्माण के लिए उपयुक्त स्थलों के चयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 19 May 2026 15:03:31 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>चंद्रयान-3 चन्द्रमा पर उतरने के लिए तैयार</title>
                                    <description><![CDATA[चंद्र मिशन, चन्द्रयान 3 सफलतापूर्वक अपने अंतिम चरण में पहुंच गया है और चंद्रयान लैंडर मॉड्यूल (एलएम) 23 अगस्त की शाम छह बजकर 04 मिनट पर चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्र पर उतरेगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/chandrayaan-3-ready-to-land-on-the-moon/article-55179"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-08/chandaryaan.png" alt=""></a><br /><p>चेन्नई। भारतीय चन्द्र मिशन चंद्रयान-3 बुधवार को चंद्रमा पर उतरने के लिए तैयार है। चंद्र मिशन, चन्द्रयान 3 सफलतापूर्वक अपने अंतिम चरण में पहुंच गया है और चंद्रयान लैंडर मॉड्यूल (एलएम) 23 अगस्त की शाम छह बजकर 04 मिनट पर चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्र पर उतरेगा।</p>
<p>अब तक, मिशन पूरी तरह से अच्छा प्रदर्शन कर रहा है और सभी की निगाहें अब लैंडिंग पर हैं, जो सफल होने पर, भारत को उन देशों के विशिष्ट समूह में शामिल कर देगा जिनमें अमेरिका, रूस और चीन शामिल हैं। इसरो वैज्ञानिक आधी रात से ही चंद्रयान-3 मिशन पर नजर रख रहे हैं।</p>
<p>गौरतलब है कि चंद्रयान-3 की लैंडिंग से कुछ ही घंटे पहले इसरो ने एक मील का पत्थर हासिल किया जब ऑर्बिटर ले जाने वाले चंद्रयान-2 ने कल चंद्रयान-3 के लैंडर मॉड्यूल (एलएम) का औपचारिक स्वागत किया। चंद्रयान-2 ऑर्बिटर चंद्रयान-3 लैंडर के साथ इसरो के लिए बैकअप संचार चैनल होगा।</p>
<p>इसरो ने' एक्स' पर एक पोस्ट में कहा कि चंद्रयान -3 मिशन: आपका स्वागत है दोस्त। सीएच-2 ऑर्बिटर ने औपचारिक रूप से सीएच-3 एलएम का स्वागत किया।</p>
<p>इसरो ने 2019 में कहा था कि सटीक प्रक्षेपण और कक्षीय युद्धाभ्यास के कारण, चंद्रयान -2 ऑर्बिटर का मिशन जीवन सात साल तक बढ़ गया था। 22 जुलाई, 2019 को प्रक्षेपित किए गए चंद्रयान -2 मिशन में चंद्रमा के अज्ञात दक्षिणी ध्रुव का पता लगाने के लिए एक ऑर्बिटर, लैंडर और रोवर शामिल थे। चंद्रयान-2 को जुलाई 2019 में लॉन्च किया गया था और रोवर ले जा रहा लैंडर  सितंबर 2019 में लैंडिंग साइट के बहुत करीब एक तकनीकी खराबी के कारण  दुर्घटनाग्रस्त हो गया, जिससे मिशन 99.99 प्रतिशत सफल रहा।</p>
<p>इसरो ने सोमवार को चंद्रयान-3 की लैंडिंग से पहले, लैंडर हैजर्ड डिटेक्शन एंड अवॉइडेंस कैमरा (एलएचडीएसी) द्वारा ली गई चंद्र सुदूर क्षेत्र की तस्वीरें जारी कीं।</p>
<p>इसरो ने कहा कि दूसरा डीबूस्टिंग और अंतिम ऑपरेशन रविवार सुबह 0200 बजे किया गया और एलएम निर्दिष्ट लैंडिंग स्थल पर सूर्योदय का इंतजार करेगा और 23 अगस्त को संचालित लैंडिग शुरू होगी। इस युद्धाभ्यास के बाद, चंद्रयान -3 अंतरिक्ष यान अब लगभग 25 किमी गुणा 134 किमी पर स्थित था।</p>
<p>इसरो ने कहा कि मॉड्यूल को आंतरिक जांच से गुजरना होगा और निर्दिष्ट लैंडिंग स्थल पर सूर्योदय का इंतजार करना होगा।</p>
<p>इसरो, लैंडिंग साइट की पहचान करने के बाद, बुधवार शाम को चंद्रमा की सतह पर सुरक्षित लैंडिंग सुनिश्चित करने के लिए सटीक ब्रेकिंग तकनीक का प्रदर्शन करेगा।</p>
<p>उल्लेखनीय है कि चंद्रयान-3 अंतरिक्ष यान को 14 जुलाई को इसरो के सबसे भारी प्रक्षेपण यान एलवीएम 3-एम4 द्वारा सफलतापूर्वक लॉन्च किया गया था। लगभग 16 मिनट की उड़ान अवधि के बाद, इसे 36,500 किमी गुणा 170 किमी की अण्डाकार पार्किंग कक्षा में प्रविष्ट किया गया। चंद्रयान-3 को कक्षा में प्रवेश करने से इसकी 42 दिन की यात्रा समाप्त हो गई।</p>
<p>इसरो के अध्यक्ष एस.सोमनाथ ने कहा कि चंद्रमा की ओर 3.80 लाख किलोमीटर से अधिक की दूरी तय करके 23 अगस्त को सॉफ्ट लैंडिंग के साथ समाप्त होगी।</p>
<p>चंद्रयान-3 में एक स्वदेशी लैंडर मॉड्यूल (एलएम), प्रोपल्शन मॉड्यूल (पीएम) और एक रोवर शामिल है, जिसका उद्देश्य भविष्य के अंतर-ग्रहीय मिशनों के लिए आवश्यक नई प्रौद्योगिकियों को विकसित करना और प्रदर्शित करना है।</p>
<p>चंद्रयान-3 की सेहत सामान्य है। यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ईएसए) और जेपीएल डीप स्पेस एंटीना के सहयोग से पूरे मिशन के दौरान, अंतरिक्ष यान के स्वास्थ्य की लगातार इसरो टेलीमेट्री, ट्रैकिंग और कमांड नेटवर्क (आईएसटीआरएसी) में मिशन ऑपरेशंस कॉम्प्लेक्स (एमओएक्स), बेंगलुरु के पास बयालू में इंडियन डीप स्पेस नेटवर्क (आईडीएसएन) एंटीना से निगरानी की जा रही है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 22 Aug 2023 13:25:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>च्रदयान-3 का अहम पड़ाव पूरा, प्रॉप्लशन मॉड्यूल से अलग हुआ विक्रम लैंडर</title>
                                    <description><![CDATA[भारत का तीसरे चंद्रमा मिशन चंद्रयान-3 का लैंडर मॉड्यूल (एलएम) को प्रोपल्शन मॉड्यूल से लैंडर और रोवर अलग हो गया। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने जानकारी दी।  ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/lander-and-rover-separated-from-the-propulsion-module-of-chandrayaan-3/article-54809"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-08/chandrayaan1.png" alt=""></a><br /><p>चेन्नई। चंद्रमा को फतह करने निकले चंद्रयान-3 ने गुरूवार को अपने मिशन का एक और बेहद अहम पड़ाव पार कर लिया जिसमें  विक्रम लैंडर मॉड्यूल,  प्रॉपल्शन मॉड्यूल से सफलतापूर्वक अलग होकर आगे की यात्रा पर रवाना हो गया है।</p>
<blockquote class="twitter-tweet">
<p dir="ltr" lang="en" xml:lang="en">Chandrayaan-3 Mission:<br /><br />‘Thanks for the ride, mate! 👋’ <br />said the Lander Module (LM).<br /><br />LM is successfully separated from the Propulsion Module (PM)<br /><br />LM is set to descend to a slightly lower orbit upon a deboosting planned for tomorrow around 1600 Hrs., IST.<br /><br />Now, 🇮🇳 has3⃣ 🛰️🛰️🛰️… <a href="https://t.co/rJKkPSr6Ct">pic.twitter.com/rJKkPSr6Ct</a></p>
— ISRO (@isro) <a href="https://twitter.com/isro/status/1692083786895474724?ref_src=twsrc%5Etfw">August 17, 2023</a></blockquote>
<p>

</p>
<p>भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधन संगठन (इसरो) के अनुसार अब लैंडर रोवर को लेकर आगे की यात्रा अकेले तय करेगा और इसके 23 अगस्त शाम को चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव की सतह पर उतरने का कार्यक्रम है। इसके लिए सभी अभ्यास पूरे कर लिये गये हैं। इसरो के अनुसार इस चरण के सफलतापूर्वक पूरा होने का मतलब है कि चंद्रयान 3 की सभी प्रणालियां सही तरीके से काम कर रही हैं। चंद्रयान 3 का प्रक्षेपण 14 जुलाई को आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केन्द्र से किया गया था।</p>
<p>चंद्रमा की सहत पर उतरने के बाद लैंडर से रोवर बाहर निकलेगा और मिशन के उद्देश्यों को पूरा करेगा। इस मिशन के सफल होने के बाद भारत यह उपलब्धि हासिल करने वाला चौथा देश बन जायेगा। अभी तक अमेरिका, रूस और चीन ने ही यह उपलब्धि हासिल की है। चंद्रयान 3 ने पिछले तीन हफ्तों में कई चरणों का पार कर चांद की अलग अलग कक्षाओं में प्रवेश करते हुए इस महत्वपूर्ण चरण को पूरा किया है। </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 17 Aug 2023 14:59:20 +0530</pubDate>
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