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                <title>vikram lander - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>vikram lander RSS Feed</description>
                
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                <title>ISRO ने चंद्रयान-2 के ऑर्बिटर से ली गई सीएच-3 लैंडर की तस्वीरें जारी की</title>
                                    <description><![CDATA[भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने चंद्रयान-2 ऑर्बिटर पर लगे दोहरे ड्यूल फ्रीक्वेंसी सिंथेटिक एपर्चर रडार (डीएफएसएआर) उपकरण के जरिए ली गयी चंद्रयान-3 लैंडर की तस्वीरें जारी कीं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/isro-releases-pictures-of-ch-3-lander-taken-from-chandrayaan-2-orbiter/article-56699"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-09/isro2.png" alt=""></a><br /><p>चेन्नई। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने चंद्रयान-2 ऑर्बिटर पर लगे दोहरे ड्यूल फ्रीक्वेंसी सिंथेटिक एपर्चर रडार (डीएफएसएआर) उपकरण के जरिए ली गयी चंद्रयान-3 लैंडर की तस्वीरें जारी कीं।</p>
<p>ये तस्वीरें छह सितंबर को चंद्रयान -2 ऑर्बिटर द्वारा खिंची की गई थीं। गौतलब है कि एसएआर उपकरण आवृत्ति बैंड में माइक्रोवेव प्रसारित करता है और सतह से बिखरे हुए समान प्राप्त करता है। रडार होने के कारण यह सौर प्रकाश के बिना भी तस्वीरें खींच सकता है। यह लक्ष्य केंद्र की दूरी और भौतिक विशेषताएँ दोनों बता सकता है। इसलिए, एसएआर का उपयोग पृथ्वी और अन्य खगोलीय ङ्क्षपडों की रिमोट सेंसिंग के लिए किया जाता है।</p>
<p>वहीं, डीएफएसएआर चंद्रयान-2 ऑर्बिटर पर एक प्रमुख वैज्ञानिक उपकरण है। यह एल-और एस-बैंड में माइक्रोवेव का उपयोग करता है। यह अत्याधुनिक उपकरण वर्तमान में किसी भी ग्रहीय मिशन पर सर्वोत्तम रिजॉल्यूशन वाली पोलारिमेट्रिक छवियां प्रदान कर रहा है।</p>
<p>लंबी रडार वेवलेंथ डीएफएसएआर को कुछ मीटर तक चंद्र उपसतह केंद्र का पता लगाने में सक्षम बनाती है। डीएफएसएआर पिछले चार वर्षों से चंद्र सतह की इमेजिंग करके उच्च गुणवत्ता वाले डेटा प्रसारित कर रहा है, जिसका मुख्य ध्यान चंद्र ध्रुवीय विज्ञान पर है।</p>
<p>इसरो ने कहा कि चंद्रयान -2 डीएफएसएआर के उच्च रिजॉल्यूशन पोलारिमेट्रिक मोड ने 6 सितंबर, 2023 को विक्रम लैंडर की छवि ली। लैंडर उच्च तीव्रता के उछाल बिखरने के कारण महत्वपूर्ण है,  जो लंबवत उन्मुख मानव निर्मित संरचनाओं की विशेषता है। लैंडर का पता लगाने के लिए लैंङ्क्षडग से पहले की छवि को भी साथ जोड़ा गया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 09 Sep 2023 19:53:02 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>Chandryaan 3 Update: लैंडर और रोवर को विश्राम देने की प्रक्रिया होगी शुरू</title>
                                    <description><![CDATA[भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) प्रमुख एस सोमनाथ ने कहा कि चंद्रयान -3 मिशन से जुड़ी टीम विक्रम लैंडर और रोवर को विश्राम देने की प्रक्रिया में है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/chandryaan-3-update-the-process-of-resting-the-lander-and/article-56123"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-09/rover.jpg" alt=""></a><br /><p>बेंगलुरु। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) प्रमुख एस सोमनाथ ने कहा कि चंद्रयान -3 मिशन से जुड़ी टीम विक्रम लैंडर और रोवर को विश्राम देने की प्रक्रिया में है।</p>
<p>इसरो प्रमुख ने आज भारत के महत्वकांक्षी प्रोजेक्ट आदित्य एल 1 को सफलतापूर्वक पृथ्वी की इच्छित कक्षा में स्थापित किये जाने के बाद श्रीहरिकोटा में इसरो वैज्ञानिकों को संबोधित करते हुए कहा कि हम दोनों (विक्रम लैंडर और प्रज्ञान रोवर) को विश्राम देने की प्रक्रिया पर काम कर रहे हैं।</p>
<p>इसरो प्रमुख ने कहा कि लैंडर के भीतर रखकर भेजे गये रोवर ने सफलतापूर्वक चंद्रमा की सतह पर कदम रखने के बाद 100 मीटर तक चहलकदमी की है। लैंडर को चंद्रमा पर शिवशक्ति बिंदु पर उतारे जाने के बाद इस हिस्से पर अंधेरा होने से पहले कुछ दिनों का काम और बाकी है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि विक्रम और प्रज्ञान अंधेरे में रहते हुए अपने सौर पैनलों को बिजली बनाने से रोक देंगे और अगर 14 दिन बाद भी वह काम कर पाये तो यह बोनस होगा।</p>
<p>उल्लेखनीय है कि इसरो के वैज्ञानिकों ने 23 अगस्त को चंद्रयान-3 को चांद के दक्षिणी घ्रुव पर उतार कर नया इतिहास रच दिया। दुनिया का कोई भी देश चांद की इस कठिन सतह पर नहीं पहुंचा है। इसके अलावा इसरो ने अपने  पहले सूर्य मिशन के तहत आदित्य-एल1 अंतरिक्ष यान को पृथ्वी की कक्ष में सफलतापूर्वक स्थापित करके अंतरिक्ष के क्षेत्र में बड़ी सफलता हासिल की है।</p>
<p>इसरो सूत्रों के मुताबिक 23 घंटे 40 मिनट की उल्टी गिनती समाप्त होने के साथ ही आज पूर्वाह्न 11.50 बजे पीएसएलवी-सी57 के जरिए शार रेंज से प्रक्षेपित आदित्य एल-1 को अब पृथ्वी की निचली कक्ष में स्थापित कर दिया गया है। इसी के साथ ही 125 दिनों की लंबे सफर में सूर्य के बाहरी वातावरण का अध्ययन करने का सिलसिला शुरू हो गया।</p>
<p>उन्होंने बताया कि मिशन नियंत्रण केंद्र के वैज्ञानिक पूरे अभियान पर नजर रखे हुए हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Sat, 02 Sep 2023 19:11:44 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>प्रज्ञान रोवर ने खींची विक्रम लैंडर की फोटो</title>
                                    <description><![CDATA[ चंद्रयान-3 मिशन के लिए नवकैम को इलेक्ट्रो-ऑप्टिक्स सिस्टम प्रयोगशाला (एलईओएस) द्वारा विकसित किया गया है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/pragyan-rover-captured-the-photo-of-vikram-lander/article-55911"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-08/pragyan-rover-photo-vikram-lander.png" alt=""></a><br /><p>एजेंसी/चेन्नई। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने  चंद्रमा के दक्षिण ध्रुव में उतरने के बाद प्रज्ञान रोवर द्वारा खींची गई विक्रम लैंडर की बुधवार को तस्वीर जारी की। यह तस्वीर रोवर पर लगे नेविगेशन कैमरे (नवकैम) द्वारा ली गई है। इसरो ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ के आधिकारिक हैंडल पर कहा कि चंद्रयान -3 मिशन: कृपया मुस्कुराएं! प्रज्ञान रोवर ने बुधवार सुबह विक्रम लैंडर की एक तस्वीर क्लिक की। ‘मिशन की तस्वीर’ रोवर पर लगे नेविगेशन कैमरे (नवकैम) ने ली है।</p>
<p><strong>एलईओएस ने बनाया है नवकैम</strong><br />चंद्रयान-3 मिशन के लिए नवकैम को इलेक्ट्रो-ऑप्टिक्स सिस्टम प्रयोगशाला (एलईओएस) द्वारा विकसित किया गया है। एलईओएस ने चंद्रयान-3 रोवर पर लेजर प्रेरित ब्रेकडाउन स्पेक्ट्रोस्कोपी (एलआईबीएस) उपकरण भी विकसित किया है, जिसने दक्षिणी ध्रुव के पास चंद्रमा की सतह की मौलिक संरचना पर पहली बार इन-सीटू माप किया है। <br /><br /><strong>सूर्य मिशन लांच करने का पूर्वाभ्यास पूरा </strong><br />एजेंसी/चेन्नई। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने बुधवार को कहा कि श्रीहरिकोटा के अंतरिक्ष स्पेस केन्द्र से दो सितंबर को सूर्य के अध्ययन के लिए प्रक्षेपित किए जाने वाले पहले मिशन की तैयारी प्रगति पर है और इसके लांच करने का पूर्वाभ्यास पूरा कर लिया गया है।    इसरो ने बताया कि आदित्य-एल1 उपग्रह सूर्य का अध्ययन करने वाली पहली अंतरिक्ष आधारित भारतीय वेधशाला होगी। उन्होंने कहा कि वाहन की आंतरिक जांच भी पूरी कर ली गई है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 31 Aug 2023 09:49:04 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>विक्रम लैंडर ने पता किया चांद का तापमान, भेजी अहम जानकारी</title>
                                    <description><![CDATA[ जानकारी को ISRO ने सोशल मीडिया साइट ट्विटर पर शेयर किया है। बतौर इसरो अलग-अलग गहराई पर चांद की सतह के तापमान में भिन्नता पाई गई है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/vikram-lander-found-out-the-temperature-of-the-moon-sent-important-information-chandrayaan-3-latest-update-hindi-news/article-55638"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-08/moon-temperature-isro-chandrayaan-3.png" alt=""></a><br /><p>चंद्रयान-3 ने चांद के रहस्यों के बारें में पता लगाना शुरु कर दिया है। विक्रम लैंडर ने चांद की सतह के तापमान को लेकर अहम जानकारी दी है। इसे चंद्र सरफेस थर्मोफिजिकल एक्सपेरिमेंट (ChaSTE) पेलोड से हासिल किया गया है। ये विक्रम लैंडर पर लगाया गया है।</p>
<p>इस जानकारी को ISRO ने सोशल मीडिया साइट ट्विटर पर शेयर किया है। बतौर इसरो अलग-अलग गहराई पर चांद की सतह के तापमान में भिन्नता पाई गई है।हालांकि इस बारें में अभी भी स्टडी जारी है। इसरो ने एक ग्राफ भी जारी किया है जिसमें देखा जा सकता है कि ChaSTE पेलोड के गहराई में बढ़ने पर चांद की सतह का तापमान भी कम-ज्यादा हो रहा है।<br /><br /></p>
<blockquote class="twitter-tweet">
<p dir="ltr" lang="en" xml:lang="en">Chandrayaan-3 Mission:<br />Here are the first observations from the ChaSTE payload onboard Vikram Lander.<br /><br />ChaSTE (Chandra's Surface Thermophysical Experiment) measures the temperature profile of the lunar topsoil around the pole, to understand the thermal behaviour of the moon's… <a href="https://t.co/VZ1cjWHTnd">pic.twitter.com/VZ1cjWHTnd</a></p>
— ISRO (@isro) <a href="https://twitter.com/isro/status/1695725102166671448?ref_src=twsrc%5Etfw">August 27, 2023</a></blockquote>
<p>

</p>
<p> </p>
<p><strong>कुल 7 पेलोड भेजे गए हैं</strong><br />चंद्रयान-3 मिशन के तीन हिस्से हैं। प्रोपल्शन मॉड्यूल, लैंडर और रोवर। इन पर कुल 7 पेलोड लगे हैं। एक पेलोड, जिसका नाम शेप है, वह चंद्रयान-3 के प्रोपल्शन मॉड्यूल पर लगा है। ये चंद्रमा की कक्षा में चक्कर लगाकर धरती से आने वाले रेडिएशन की जांच कर रहा है। वहीं लैंडर पर तीन पेलोड लगे हैं। रंभा, चेस्ट और इल्सा। प्रज्ञान पर दो पेलोड हैं। एक इंस्ट्रूमेंट अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा का भी है, जिसका नाम है लेजर रेट्रोरिफ्लेक्टर अरे। ये चंद्रयान-3 के लैंडर पर लगा हुआ है। ये चंद्रमा से पृथ्वी की दूरी मापने के काम आता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Sun, 27 Aug 2023 17:34:55 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>भारत आज शाम 06: 04 बजे रचेगा इतिहास   </title>
                                    <description><![CDATA[14 जुलाई को प्रक्षेपित चन्द्रयान 3 आज चांद की सतह पर लैंड कर जाएगा। इसके साथ ही भारत शाम 06: 04 बजे इतिहास रचने जा रहा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/india-will-create-history-today-at-0604-pm/article-55254"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-08/isro1.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। 14 जुलाई को प्रक्षेपित चन्द्रयान 3 आज चांद की सतह पर लैंड कर जाएगा। इसके साथ ही भारत शाम 06: 04 बजे इतिहास रचने जा रहा है। चंद्रमा के दक्षिणी धु्र्व का इलाका काफी उबड़-खाबड़ है, जिससे चंद्रयान.3 के लिए सॉफ्ट लैंडिंग करने में थोड़ी मुश्किल हो सकती है। दक्षिणी ध्रुव पर तापमान बहुत ही कम रहता है। पिछले 4 वर्षों में चांद के दक्षिणी ध्रुव लैंडिंग के तीन प्रयास सतह पर उतरने के कुछ मिनट से ठीक पहले विफल हो गए। इसमें भारत का चंद्रयान-2 मिशन, जापान और एक इजरायली गैर-लाभकारी संस्था का मिशन शामिल है।</p>
<p>चंद्रयान-3 अंतरिक्ष यान को 14 जुलाई को इसरो के सबसे भारी प्रक्षेपण यान एलवीएम 3-एम4 द्वारा सफलतापूर्वक लॉन्च किया गया था। लगभग 16 मिनट की उड़ान अवधि के बाद, इसे 36,500 किमी गुणा 170 किमी की अण्डाकार पार्किंग कक्षा में प्रविष्ट किया गया। चंद्रयान-3 को कक्षा में प्रवेश करने से इसकी 42 दिन की यात्रा समाप्त हो गई। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Wed, 23 Aug 2023 12:28:16 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>चंद्रयान-3 चन्द्रमा पर उतरने के लिए तैयार</title>
                                    <description><![CDATA[चंद्र मिशन, चन्द्रयान 3 सफलतापूर्वक अपने अंतिम चरण में पहुंच गया है और चंद्रयान लैंडर मॉड्यूल (एलएम) 23 अगस्त की शाम छह बजकर 04 मिनट पर चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्र पर उतरेगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/chandrayaan-3-ready-to-land-on-the-moon/article-55179"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-08/chandaryaan.png" alt=""></a><br /><p>चेन्नई। भारतीय चन्द्र मिशन चंद्रयान-3 बुधवार को चंद्रमा पर उतरने के लिए तैयार है। चंद्र मिशन, चन्द्रयान 3 सफलतापूर्वक अपने अंतिम चरण में पहुंच गया है और चंद्रयान लैंडर मॉड्यूल (एलएम) 23 अगस्त की शाम छह बजकर 04 मिनट पर चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्र पर उतरेगा।</p>
<p>अब तक, मिशन पूरी तरह से अच्छा प्रदर्शन कर रहा है और सभी की निगाहें अब लैंडिंग पर हैं, जो सफल होने पर, भारत को उन देशों के विशिष्ट समूह में शामिल कर देगा जिनमें अमेरिका, रूस और चीन शामिल हैं। इसरो वैज्ञानिक आधी रात से ही चंद्रयान-3 मिशन पर नजर रख रहे हैं।</p>
<p>गौरतलब है कि चंद्रयान-3 की लैंडिंग से कुछ ही घंटे पहले इसरो ने एक मील का पत्थर हासिल किया जब ऑर्बिटर ले जाने वाले चंद्रयान-2 ने कल चंद्रयान-3 के लैंडर मॉड्यूल (एलएम) का औपचारिक स्वागत किया। चंद्रयान-2 ऑर्बिटर चंद्रयान-3 लैंडर के साथ इसरो के लिए बैकअप संचार चैनल होगा।</p>
<p>इसरो ने' एक्स' पर एक पोस्ट में कहा कि चंद्रयान -3 मिशन: आपका स्वागत है दोस्त। सीएच-2 ऑर्बिटर ने औपचारिक रूप से सीएच-3 एलएम का स्वागत किया।</p>
<p>इसरो ने 2019 में कहा था कि सटीक प्रक्षेपण और कक्षीय युद्धाभ्यास के कारण, चंद्रयान -2 ऑर्बिटर का मिशन जीवन सात साल तक बढ़ गया था। 22 जुलाई, 2019 को प्रक्षेपित किए गए चंद्रयान -2 मिशन में चंद्रमा के अज्ञात दक्षिणी ध्रुव का पता लगाने के लिए एक ऑर्बिटर, लैंडर और रोवर शामिल थे। चंद्रयान-2 को जुलाई 2019 में लॉन्च किया गया था और रोवर ले जा रहा लैंडर  सितंबर 2019 में लैंडिंग साइट के बहुत करीब एक तकनीकी खराबी के कारण  दुर्घटनाग्रस्त हो गया, जिससे मिशन 99.99 प्रतिशत सफल रहा।</p>
<p>इसरो ने सोमवार को चंद्रयान-3 की लैंडिंग से पहले, लैंडर हैजर्ड डिटेक्शन एंड अवॉइडेंस कैमरा (एलएचडीएसी) द्वारा ली गई चंद्र सुदूर क्षेत्र की तस्वीरें जारी कीं।</p>
<p>इसरो ने कहा कि दूसरा डीबूस्टिंग और अंतिम ऑपरेशन रविवार सुबह 0200 बजे किया गया और एलएम निर्दिष्ट लैंडिंग स्थल पर सूर्योदय का इंतजार करेगा और 23 अगस्त को संचालित लैंडिग शुरू होगी। इस युद्धाभ्यास के बाद, चंद्रयान -3 अंतरिक्ष यान अब लगभग 25 किमी गुणा 134 किमी पर स्थित था।</p>
<p>इसरो ने कहा कि मॉड्यूल को आंतरिक जांच से गुजरना होगा और निर्दिष्ट लैंडिंग स्थल पर सूर्योदय का इंतजार करना होगा।</p>
<p>इसरो, लैंडिंग साइट की पहचान करने के बाद, बुधवार शाम को चंद्रमा की सतह पर सुरक्षित लैंडिंग सुनिश्चित करने के लिए सटीक ब्रेकिंग तकनीक का प्रदर्शन करेगा।</p>
<p>उल्लेखनीय है कि चंद्रयान-3 अंतरिक्ष यान को 14 जुलाई को इसरो के सबसे भारी प्रक्षेपण यान एलवीएम 3-एम4 द्वारा सफलतापूर्वक लॉन्च किया गया था। लगभग 16 मिनट की उड़ान अवधि के बाद, इसे 36,500 किमी गुणा 170 किमी की अण्डाकार पार्किंग कक्षा में प्रविष्ट किया गया। चंद्रयान-3 को कक्षा में प्रवेश करने से इसकी 42 दिन की यात्रा समाप्त हो गई।</p>
<p>इसरो के अध्यक्ष एस.सोमनाथ ने कहा कि चंद्रमा की ओर 3.80 लाख किलोमीटर से अधिक की दूरी तय करके 23 अगस्त को सॉफ्ट लैंडिंग के साथ समाप्त होगी।</p>
<p>चंद्रयान-3 में एक स्वदेशी लैंडर मॉड्यूल (एलएम), प्रोपल्शन मॉड्यूल (पीएम) और एक रोवर शामिल है, जिसका उद्देश्य भविष्य के अंतर-ग्रहीय मिशनों के लिए आवश्यक नई प्रौद्योगिकियों को विकसित करना और प्रदर्शित करना है।</p>
<p>चंद्रयान-3 की सेहत सामान्य है। यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ईएसए) और जेपीएल डीप स्पेस एंटीना के सहयोग से पूरे मिशन के दौरान, अंतरिक्ष यान के स्वास्थ्य की लगातार इसरो टेलीमेट्री, ट्रैकिंग और कमांड नेटवर्क (आईएसटीआरएसी) में मिशन ऑपरेशंस कॉम्प्लेक्स (एमओएक्स), बेंगलुरु के पास बयालू में इंडियन डीप स्पेस नेटवर्क (आईडीएसएन) एंटीना से निगरानी की जा रही है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 22 Aug 2023 13:25:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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                <title>चंद्रयान 2 के ऑर्बिटर ने किया चंद्रयान 3 का स्वागत</title>
                                    <description><![CDATA[ भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के चंद्रमा दक्षिण ध्रुवीय क्षेत्र में 23 अगस्त को सॉफ्ट लैंडिंग करने जा रहे चंद्रयान-3 का चंद्रयान-2 के ऑर्बिटर ने औपचारिक रूप से स्वागत किया। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/chandrayaan-2s-orbiter-welcomes-chandrayaan-3/article-55122"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-08/chandryaan.jpg" alt=""></a><br /><p>चेन्नई। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के चंद्रमा दक्षिण ध्रुवीय क्षेत्र में 23 अगस्त को सॉफ्ट लैंडिंग करने जा रहे चंद्रयान-3 का चंद्रयान-2 के ऑर्बिटर ने औपचारिक रूप से स्वागत किया। इसरो ने एक्स पर प्रेषित किये संदेश में कहा कि दोनों के बीच संचार स्थापित हो गया है।</p>
<blockquote class="twitter-tweet">
<p dir="ltr" lang="en" xml:lang="en">Chandrayaan-3 Mission:<br />‘Welcome, buddy!’<br />Ch-2 orbiter formally welcomed Ch-3 LM.<br /><br />Two-way communication between the two is established. <br /><br />MOX has now more routes to reach the LM. <br /><br />Update: Live telecast of Landing event begins at 17:20 Hrs. IST.<a href="https://twitter.com/hashtag/Chandrayaan_3?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw">#Chandrayaan_3</a> <a href="https://twitter.com/hashtag/Ch3?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw">#Ch3</a></p>
— ISRO (@isro) <a href="https://twitter.com/isro/status/1693549487653048418?ref_src=twsrc%5Etfw">August 21, 2023</a></blockquote>
<p>

</p>
<p>उन्होंने कहा कि चंद्रयान -3 मिशन: 'आपका स्वागत है, दोस्त। चंद्रयान-2 ऑर्बिटर ने औपचारिक रूप से चंद्रयान-3 लैंडर मॉड्यूल का स्वागत किया।</p>
<p>उन्होंने कहा कि दोनों के बीच संचार स्थापित हो गया है। मिशन ऑपरेशंस कॉम्प्लेक्स (एमओएक्स) के पास अब लैंडर मॉड्यूल तक पहुंचने के लिए अधिक मार्ग हैं।</p>
<p>उन्होंने कहा कि भारत के दूसरे चंद्र मिशन चंद्रयान -2 को जुलाई 2019 में लॉन्च किया गया था और सितंबर 2019 में लैंङ्क्षडग साइट के बहुत करीब तकनीकी खराबी के कारण लैंडर दुर्घटनाग्रस्त हो गया। यह मिशन 99.99 प्रतिशत सफल रहा था।</p>
<p>इसरो ने कहा कि चंद्रयान-3 यान 23अगस्त को 1804 बजे चंद्रमा पर उतरेगा।</p>
<p>अंतरिक्ष एजेंसी ने रविवार सुबह लैंडिंग मॉड्यूल का दूसरी और अंतिम बार गति कम करने के लिए डीबूस्टिंग (धीमा करने की प्रक्रिया) ऑपरेशन किया।</p>
<p>उन्होंने बताया कि स्तह उतरने पर रोवर को चंद्रमा पर यथास्थन प्रयोग करने के लिए लैंडिंग मॉड्यूल से बाहर निकाला जाएगा।</p>
<p>उन्होंने बताया है कि दूसरा डीबूस्टिंग अभियान रविवार सुबह 0200 बजे किया गया और लैंडिंग मॉड्यूल निर्दिष्ट लैंडिंग स्थल पर सूर्योदय का इंतजार करेगा और 23 अगस्त को संचालित लैंडिंग शुरू होगी।</p>
<p>उन्होंने कहा कि इसके बाद चंद्रयान -3 अंतरिक्ष यान अब चंद्रमा से करीब 25 किलोमीटर दूर है।</p>
<p>इसरो ने कहा कि मॉड्यूल को आंतरिक जांच से गुजरना होगा और निर्दिष्ट लैंडिंग स्थल पर सूर्योदय का इंतजार करना होगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 21 Aug 2023 17:20:59 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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                <title>चांद को चूमने के लिए लैंडर की गति डीबूस्ट</title>
                                    <description><![CDATA[ चांद से कुछ ही दिनों की दूरी पर चक्कर काट रहे चंद्रयान -3 के लैंडर विक्रम को 30 किमी के निकटतम बिंदु (पेरिल्यून) और 100 किमी के सबसे दूर बिंदु (अपोल्यून) वाली कक्षा में स्थापित करने के लिए इसकी गति को  सफलतापूर्वक कम किया गया। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/lander-deboosted-to-kiss-the-moon/article-54898"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-08/chandrayaan-3.png" alt=""></a><br /><p>चेन्नई। चांद से कुछ ही दिनों की दूरी पर चक्कर काट रहे चंद्रयान -3 के लैंडर विक्रम को 30 किमी के निकटतम बिंदु (पेरिल्यून) और 100 किमी के सबसे दूर बिंदु (अपोल्यून) वाली कक्षा में स्थापित करने के लिए इसकी गति को  सफलतापूर्वक कम किया गया। अब चंद्रयान-3 चांद पर कदम रखने से चंद दिन ही दूर है।</p>
<p>इसरो की ओर से जारी बयान में कहा गया कि सॉफ्ट लैंडिंग की दिशा में एक और कदम बढ़ाते हुए आज शाम चार बजे लैंडर की गति को डीबूस्ट किया गया। इसरो के वैज्ञानिकों का मानना है कि इस बार लैंडर विक्रम सफलतापूर्वक चांद की सतह पर उतर जायेगा।</p>
<p>प्रोपल्शन मॉड्यूल (पीएम) से अलग हुए विक्रम लैंडर की कक्षा को आज घटाकर 113 किमी गुणा 157 किमी कर दिया गया। दूसरा डीबूस्टिंग ऑपरेशन 20 अगस्त की सुबह  दो बजे किया जायेगा। इसरो ने कहा कि लैंडर का स्वास्थ्य सामान्य है।</p>
<p>एक्स पर एक पोस्ट में इसरो ने कहा कि चंद्रयान-3 मिशन: द लैंडर मॉड्यूल (एलएम) का स्वास्थ्य सामान्य है। लैंडर ने सफलतापूर्वक एक डीबूस्टिंग ऑपरेशन किया जिससे इसकी कक्षा कम होकर  113 किमी गुणा 157 किमी हो गयी। दूसरा डीबूस्टिंग ऑपरेशन लगभग 20 अगस्त, 2023 को  सुबह दो बजे निर्धारित है।</p>
<p>इसरो के अध्यक्ष एस सोमनाथ ने चंद्रयान -3 की  लैंडिंग के संबंध में कहा था कि लैंडिंग का सबसे जरूरी हिस्सा लैंडर गी गति को 30 किलोमीटर की ऊंचाई से अंतिम लैंडिंग तक लाने की प्रक्रिया है और व्हीकल को हॉरिजॉन्टल से वर्टिकल डायरेक्शन में पहुंचाने की क्षमता वो प्रक्रिया है जहां हमे पूरी कुशलता देखानी होगी । पूरी प्रक्रिया को कई बार दोहराया गया है। इन सभी चरणों में आवश्यक प्रक्रिया को नियंत्रित करने और उचित लैंडिंग करने की कोशिश के लिए कई एल्गोरिदम लगाए गए हैं। अगर 23 अगस्त को लैंडर चंद्रमा की सतह पर सॉफ्ट लैंडिंग करता है तो ये भारत की बड़ी कामयाबी होगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 18 Aug 2023 18:02:56 +0530</pubDate>
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