<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://dainiknavajyoti.com/akhadas/tag-38767" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>Dainik Navajyoti Rising Rajasthan RSS Feed Generator</generator>
                <title>akhadas - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
                <link>https://dainiknavajyoti.com/tag/38767/rss</link>
                <description>akhadas RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>सात  साल की बालिकाओं से लेकर 60 साल के 'पट्टेबाज' बहा रहे पसीना,शोभायात्रा के लिए जोरदार तैयारियां</title>
                                    <description><![CDATA[कोटा के प्राचीन अखाड़ों में दिन-रात अभ्यास, 90 सेकंड में दिखेंगे 22 डिफिकल्टी एलिमेंट्स।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/from-7-year-old-girls-to-60-year-old--pattebaaz---traditional-martial-artists---everyone-is-sweating-it-out--grand-preparations-are-underway-for-the-procession/article-166158"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-09/1200-x-60-px)-(youtube-thumbnail)-(4)9.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। अनंत चतुर्दशी के पावन पर्व पर शहर में निकलने वाली ऐतिहासिक और भव्य शोभायात्रा को लेकर कोटा के पारंपरिक अखाड़ों में इन दिनों जो नजारा देखने को मिल रहा है, वह किसी फिल्मी सीक्वेंस से कम नहीं है। सनातन संस्कृति की इस अनूठी परंपरा को जिंदा रखने के लिए शहर के प्राचीन अखाड़ों में युवा पट्टेबाज दिन-रात एक कर रहे हैं। इस बार शोभायात्रा में केवल मलखंभ का जादू ही नहीं, बल्कि लाठी, बर्नेठी, चकरी और ऐसे साहसिक करतब देखने को मिलेंगे कि देखने वालों की सांसें थम जाएंगी!</p>
<p><strong>संवार रहे माटी की कला</strong><br />पारंपरिक खेल ह्यमलखंभह्ण को राष्ट्रीय पटल पर पहचान दिलाने वाली ह्यहरदौल व्यायामशालाह्ण इन दिनों चर्चा के केंद्र में है। यहां नेशनल कोच व रेफरी गोपाल सिसोदिया के मार्गदर्शन में कड़ा अभ्यास चल रहा है। हैरानी की बात यह है कि कोच सिसोदिया ने ट.ढ.ए.ि की डिग्री और एक शानदार सरकारी नौकरी के अवसर को सिर्फ इसलिए ठुकरा दिया ताकि वे अपना पूरा जीवन इस प्राचीन खेल को समर्पित कर सकें। आज यहाँ 7 साल की नन्हीं बालिकाओं से लेकर नेशनल मेडलिस्ट युवा तक रोज 4 से 6 घंटे पसीना बहा रहे हैं। महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश जैसे पारंपरिक गढ़ों को पछाड़ते हुए कोटा के इन धुरंधर खिलाड़ियों ने नेशनल प्रतियोगिताओं में कांस्य पदक जीतकर शहर का सिर गर्व से ऊँचा कर दिया है। इस बार शोभायात्रा में मात्र 90 सेकंड में 22 डिफिकल्टी एलिमेंट्स और पोल-रोप पर होने वाले हैरतअंगेज करतब मुख्य आकर्षण होंगे।</p>
<p><strong>यहां पर 80 पहलवान</strong><br />स्वामी विवेकानन्द व्यायाम शाला औद्योगिक क्षेत्र डीसीएम चौराहे के पास, दंडवीर हनुमान मंदिर के समीप स्थित स्वामी विवेकानन्द व्यायाम शाला कोटा की पुरानी संस्थाओं में से एक है। लगभग 1987 से संचालित इस व्यामशाला की स्थापना राधावल्लभ शर्मा ने की थी। इस व्यायामशाला में आज भी पारंपरिक अखाड़े की संस्कृति जीवित है। अनंत चतुर्दशी की तैयारियों के तहत यहाँ शाम से रात तक अखाड़े की सामग्रियों की रंगाई और पारंपरिक अभ्यासों का दौर शुरू हो चुका है। दो दर्जन बालिकाओं सहित करीब 80 सदस्य यहाँ लाठी, गदा और आग के गोलों के साथ अपने अदम्य साहस का प्रदर्शन करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।</p>
<p><strong>तड़के ही जुट जाते हैं अखाड़ेबाज</strong><br />अखाड़े के संचालक राजेन्द्र कुमार लक्षकार ने बताया कि शाम 5 बजते ही अखाड़े बाज जुटने लग जाते है। 10 साल से लेकर 60 साल तक के पट्टेबाज शरीर की कसरत करने के बाद लकड़ियों व तरवारों से कलाबाजीयां करते हुए पहले 5 दिन तक पुराने पैंतरों व अपने अपने तरीके के खेलों के लिए तैयारियों पर लग जाते है। अभी केवल 6 दिन बाकि रह गए है ऐसे में कल से लगभग सभी साथी पट्टेबाज पुरी तरह से आने लग जाएंगे।</p>
<p><strong>कोई लकड़ी तो कोई तलवार से बचा रहा वार</strong><br />अखाड़े में एक उपर एक के रूप में मानव पिरामिड़ बनाकर एक साथ 3 खिलाड़ी चकरी चला रहे है। कोई अकेले ही चकरी को हवा में उछाल रहा है तो दूसरा आकर उसे फिर से पकड़ कर घुमा रहा है। आपस में लाठी से भिड़ते पट्टे बाज जैसे एक बार तो लगता है कि मानो किसी एक का तो सिर फूट ही जाएगा पर तभी दूसरा भी अपने सिर पर आए वार को पावों की चाल से हटकर अपना वार चल देता है।</p>
<p><strong>तलवार से नींबू काटना मांगता है 'एकाग्रता'</strong><br />कोटरी स्थित कश्यप बजरंग व्यायाम शाला भी इस परंपरा का एक प्रमुख स्तंभ है। डॉ. रामकुमार द्वारा 1950 में गणेश विसर्जन की परंपरा के साथ शुरू किए गए इस कार्य को 1991 से अखाड़े के रूप में आगे बढ़ाया जा रहा है। उस्ताद ओमप्रकाश कश्यप के सान्निध्य में 200 से अधिक खिलाड़ी यहाँ ट्रेनिंग ले रहे हैं। यह अखाड़ा सीने पर भारी पत्थर फोड़ने और खतरनाक करतबों के लिए जाना जाता है। यहाँ तलवार हत्था 'गतका' और तलवार से नींबू काटने की प्रैक्टिस कर रहे विशिष्ट कश्यप ने बताया कि इस खेल में तलवार और मन को एक साथ चलना पड़ता है, हमारी साधना अपने करतब से ज्यादा सामने वाले की जिंदगी के लिए जरूरी होती है। जब तक सौ प्रतिशत एकाग्रता और विश्वास न हो, यह खेल खेलने की अनुमति नहीं दी जाती।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/from-7-year-old-girls-to-60-year-old--pattebaaz---traditional-martial-artists---everyone-is-sweating-it-out--grand-preparations-are-underway-for-the-procession/article-166158</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/from-7-year-old-girls-to-60-year-old--pattebaaz---traditional-martial-artists---everyone-is-sweating-it-out--grand-preparations-are-underway-for-the-procession/article-166158</guid>
                <pubDate>Mon, 21 Sep 2026 15:13:57 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2026-09/1200-x-60-px%29-%28youtube-thumbnail%29-%284%299.png"                         length="1526994"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अखाड़ों में उतरी नारी शक्ति, शुरु हुआ अभ्यास</title>
                                    <description><![CDATA[दुर्गा शक्ति व्यायाम शाला का अखाड़ा हो या मंगलेश्वरी व्याजाम शाला का अखाड़ा समेत सभी अखाड़ों में चक्कर से लेकर अन्य सभी तरह के करतबों के अभ्यास शुरू हो गए हैं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/women-power-descended-in-the-akhadas--practice-started/article-55440"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-08/akhado-me-utri-nari-shakti,-shuru-hua-abhyas...kota-news-25-08-2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। अनंत चतुर्दशी आयोजन समिति की ओर से सितम्बर में निकलने वाली विशाल व भव्य शोभा यात्रा के दौरान निकलने वाले अखाड़ों में पट्टे बाजों ने अभ्यास शुरू कर दिया है। शहर में महिला-पुरुष व बच्चों के करीब 60 से अधिक अखाड़े हैं। छावनी से लेकर केशवपुरा तक और नए कोटा में भी अखाडों का संचालन किया जा रहा है। उनमें नियमित आने वालों ने शोभा यात्रा में दिखाए जाने वाले करतबों का अभ्यास शुरू कर दिया है। दुर्गा शक्ति व्यायाम शाला का अखाड़ा हो या मंगलेश्वरी व्याजाम शाला का अखाड़ा समेत सभी अखाड़ों में चक्कर से लेकर अन्य सभी तरह के करतबों के अभ्यास शुरू हो गए हैं। नाथूलाल पहलवान व जगदीश सुमन ने बताया कि अखाड़ों में नियमित रूप से पहलवान व बच्चे अभ्यास करते हैं। लेकिन साल में एक बार बड़े स्तर पर निकलने वाली अनंत चतुर्दशी शोभा यात्रा में दोपहर से रात तक अखाड़ों का प्रदर्शन होता है। जिसके लिए अधिक व नियमित अभ्यास की आवश्यकता होती है। उसके लिए अभ्यास शुरू कर दिया है। सभी को तैयार किया जा रहा है।</p>
<p><strong>मिट्टी की मूर्तियों का होगा उपयोग</strong><br />इधर अनंत चतुर्दशी महोत्सव आयोजन समिति के संयोजक दिनेश सोनी ने बताया कि अनंत चतुर्दशी के दौरान निकलने वाली शोभा यात्रा में अधिकतर मिट्टी व अन्य वस्तुओं से बनी गणेश प्रतिमाओं को ही शामिल किया जाएगा। इसके फिए सभी समितियों व आयोजन कर्ताओं को निर्देश दिए जा चुके हैं।  उन्होंने बताया कि आजादी का अमृत महोत्सव मनाया जा रहा है। साथ ही एक दिन पहले ही भारत ने चंद्रयान -3 की सफलता हांसिल की है। इन्हें देखते हुए शोभा यात्रा में भारत माता व चंद्रयान 3 की झांकी भी शामिल हो सकती है। इसकी तैयारियां समितियों में अपने स्तर पर की जा रही है। अगले महीने निकलने वाली शोभा यात्रा के लिए शीघ्र ही समिति की बैठक में कई विषयों पर चर्चा कर उन्हें अंतिम रूप दिया जाएगा। हालांकि गत दिनों समिति की अध्यक्ष महामंडलेश्वर हेमा सरस्वती की अध्यक्षता में बैठक भी हुई थी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/women-power-descended-in-the-akhadas--practice-started/article-55440</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/women-power-descended-in-the-akhadas--practice-started/article-55440</guid>
                <pubDate>Fri, 25 Aug 2023 16:46:08 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2023-08/akhado-me-utri-nari-shakti%2C-shuru-hua-abhyas...kota-news-25-08-2023.jpg"                         length="341429"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ना इनाम, ना सम्मान, तालियों के बल पर भर देते हैं रोमांच</title>
                                    <description><![CDATA[शहर में हर साल अनंत चतुर्दशी पर अखाड़ों का भव्य प्रदर्शन होता है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/no-reward--no-respect--thrill-fills-on-the-strength-of-applause/article-55084"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-08/na-inaam,-na-samman,-taliyo-k-bal-pr-bhr-dete-h-romach...kota-news-21-08-2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा । शहर में लगातार अखाड़ों की संख्या बढ़ती जा रही है। न केवल पुरुषों के वरन् महिलाओं व बच्चों तक के अखाड़े काफी अधिक हो गए हैं। लेकिन हालत यह है कि अखाड़ों को पिछले 11 साल से न तो करतब के सामान मिले हैं और न ही प्रोत्साहन के रूप में इनाम। इस बार भी सितम्बर में अनंत चतुर्दशी पर भी 60 से अधिक अखाड़े शामिल होंगे। शहर में शुरुआत में जहां गिनती के अखाड़े थे वह भी पुरुषों के। महिलाओं के अखाड़े की शुरुआत सीता देवी सुमन ने पहली बार की थी। उसके बाद से शहर में अखाड़ों की संख्या लगातार बढ़ती ही जा रही है। वर्तमान में 60 से अधिक अखाड़े हैं। </p>
<p><strong>अनंत चतुर्दशी पर होता है भव्य प्रदर्शन</strong><br />शहर में हर साल अनंत चतुर्दशी पर अखाड़ों का भव्य प्रदर्शन होता है। पुराने उस्तादों के साथ ही  युवाओं में भी अखाड़ों में करतब दिखाने का क्रेज बढ़ा है। सितम्बर में अनंत चतुर्दशी पर निकलने वाले अखाड़ों की अभी से तैयारी शुरू हो गई है। </p>
<p><strong>2018 के बाद नहीं मिली राशि</strong><br />अनंत चतुर्दशी आयोजन समिति के संयोजक दिनेश सोनी ने बताया कि पहले तो न्यास की ओर से अखाड़ों को सामान दिए गए थे। बाद में अखाड़ों को नकद राशि दी जाने लगी। लाइसेंस  धारी अखाड़ों को 40 हजार व बिना लाइसेंस वाले लेकिन प्रदर्शन के लिए अनुमति वााले अखाड़ों को 11 हजार रुपए नकद दिए जाते थे। यह राशि भी 2018 तक ही मिली। उसके बाद से यह राशि भी नहीं दी जा रही है। </p>
<p><strong>12  में दिए थे अखाड़ों को सामान</strong><br />अखाडों में करतब दिखाने वाले पहलवान जिन सामानों का उपयोग कम रहे हैं उनमें अधिकतर पुराने ही हैं। कांग्रेस नेता अरूण भार्गव, चौथमल अखाड़े के उस्ताद बाल किशन बरथूनिया,मंगलेश्वर व्यायाम शाला के उस्ताद नालूलाल पहलवान और शीता शक्ति व्यायाम शाला के उस्ताद जगदीश सुमन ने बताया कि शहर में पहले गिनती के अखाड़े थे। अब उनकी संख्या बढ़ गई है।  मंत्री शांति धारीवाल के प्रयास से नगर विकास न्यास  ने वर्ष 2012 में अखाड़ों को करीब 80 लाख रुपए के सामान दिए थे। उसके बाद न तो न्यास ने और न ही प्रशासन की ओर से अखाड़ों को सामान दिए। जिससे हर साल प्रदर्शन के समय अखाड़े बााजों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। पुराने सामानों से ही करतब दिखा रहे हैं। अरुण भार्गव ने बताया कि उन्होंने सभी उस्तादों के साथ पीसीसी महासचिव अमित धारीवाल को एक मांग पत्र सौंपा है। जिसमें सभी अखाड़ों को सामान दिलवाने का आग्रह किया गया है। जिससे वे अनंत चतुर्दशी पर बेहतर प्रदर्शन कर सके। </p>
<p><strong>इनाम की घोषणा हुई लेकिन नहीं मिला</strong><br />अनंत चतुर्दशी आयोजन समिति की अध्यक्ष महामंडलेश्वर हेमा सरस्वती ने बताया कि गत वर्ष अनंत चतुर्दशी से पहले अखाड़ों को इनाम देने की घोषणा की गई थी। जिसमें कहा था कि आयोजन के दौरान श्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले तीन अखाड़ों को पुरस्कृत किया जाएगा। इसके लिए एक कमेटी भी गठित की गई थी। उन्होंने बताया कि एक साल होने को है। लेकिन अभी तक भी न तो इनाम की घोषणा हुई और न ही इनाम मिला। </p>
<p><strong>60 से अधिक अखाड़े दिखाएंगे करतब</strong><br />आयोजन समिति के संयोजक दिनेश सोनी ने बताया कि इस बार अनंत चतुर्दशी आयोजन को लेकर समिति की बैठक की गई है। जिसमें उसे भव्य बनाने के साथ ही तैयारियों पर चर्चा की गई। साथ ही महोत्सव में 60 से अधिक अखाड़े करतब दिखाने को तैयार हैं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/no-reward--no-respect--thrill-fills-on-the-strength-of-applause/article-55084</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/no-reward--no-respect--thrill-fills-on-the-strength-of-applause/article-55084</guid>
                <pubDate>Mon, 21 Aug 2023 17:04:40 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2023-08/na-inaam%2C-na-samman%2C-taliyo-k-bal-pr-bhr-dete-h-romach...kota-news-21-08-2023.jpg"                         length="467504"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        