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                <title>Kharif crops - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>Kharif crops RSS Feed</description>
                
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                <title>असर खबर का  :  नहरों में बढ़ाया जलप्रवाह, मुरझाई फसलों को मिलेगी संजीवनी</title>
                                    <description><![CDATA[मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से चर्चा के बाद हुआ निर्णय।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impact-of-the-report--canal-water-flow-increased--withered-crops-to-get-a-lifeline/article-160441"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-07/1200-x-600-px)-(2)54.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के प्रयासों से कोटा, बून्दी और बारां के किसानों को बड़ी राहत मिली है। खरीफ फसलों के लिए नहरी पानी की कमी को देखते हुए बिरला ने एक बार फिर मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से चर्चा की। इसके बाद गांधी सागर बांध से अतिरिक्त 2000 क्यूसेक तथा राणा प्रताप सागर बांध से 1000 क्यूसेक अतिरिक्त पानी नहरों में छोड़ने का निर्णय लिया गया। वर्तमान में नहरों में 2000 क्यूसेक पानी प्रवाहित हो रहा है, जो इस निर्णय के बाद बढ़कर 5000 क्यूसेक हो जाएगा। महज दस दिनों में यह दूसरी बार है, जब बिरला की पहल पर मध्यप्रदेश सरकार ने गांधी सागर बांध से सीधे कोटा-बून्दी क्षेत्र के किसानों के लिए अतिरिक्त सिंचाई जल उपलब्ध कराने का निर्णय लिया है। इस वर्ष कमजोर मानसून के कारण राणा प्रताप सागर बांध का जलस्तर सामान्य से कम रहने से नहरों में पर्याप्त पानी की आपूर्ति प्रभावित हो रही थी। इस निर्णय के बाद क्षेत्र की नहरों में सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध हो सकेगा, जिससे खरीफ फसलों को समय पर सिंचाई मिल पाएगी।</p>
<p><strong>दायीं में 1500 व बायीं नहर में 1300 क्यूसेक जलप्रवाह</strong><br />जिला प्रशासन के निर्देश पर सीएडी विभाग ने सोमवार देर शाम को बायीं नहर में 1300 क्यूसेक और दायीं नहर में 1500 क्यूसेक पानी छोड़ दिया है। तात्कालिक राहत के रूप में राणा प्रताप सागर बांध से सोमवार को 1000 क्यूसेक अतिरिक्त पानी भी छोड़ा गया है। आगामी दिनों में अच्छी वर्षा होने और राणा प्रताप सागर का जलस्तर बढ़ने पर नहरों में और अधिक पानी उपलब्ध कराया जा सकेगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर मध्यप्रदेश के जल संसाधन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव ने भी सोमवार को क्षेत्रीय विकास आयुक्त सीएडी अनिल कुमार अग्रवाल को शीघ्र गांधी सागर बांध से अतिरिक्त 2000 क्यूसेक पानी उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया। उल्लेखनीय है कि 10 जुलाई को किसानों ने बिरला से मुलाकात कर नहरों में पानी की कमी से खरीफ फसलों के प्रभावित होने की चिंता जताई थी। इसके बाद बिरला ने तत्काल संबंधित अधिकारियों और मध्यप्रदेश सरकार से चर्चा कर गांधी सागर बांध से अतिरिक्त पानी उपलब्ध कराने का आग्रह किया था। उनकी पहल पर उसी समय 1800 क्यूसेक अतिरिक्त पानी नहरों में छोड़ा गया था।</p>
<p><strong>किसानों की सीएडी अधिकारियों से हुई वार्ता</strong><br />इधर किसानों के प्रतिनिधिमंडल और संभागीय आयुक्त, अतिरिक्त संभागीय आयुक्त सहित सीएडी के अधिकारियों से सोमवार को वार्ता हुई थी। वार्ता के बाद दोनों नहरों में जलप्रवाह बढ़ाने का निर्णय किया गया। युवा किसान नेता गिर्राज गौतम ने कहा कि इस समय नहरों में पानी बढ़ाया जाना अत्यंत आवश्यक था क्योंकि नहरें पूरी क्षमता से नहीं चलने के कारण किसानों की फसलें सूखने के कगार पर आ गई थी। भूमि का जल स्तर काफी गिरने के कारण ट्यूबवेल हवा फेंक रहे थे। किसान अपनी फसल बचाने के लिए अतिरिक्त खर्चा करने पर विवश था। अब जब नहरें पूरी क्षमता से चलेंगी तो उम्मीद है कि हर किसान को पानी मिलेगा। उन्होंने किसानों से भी आग्रह किया की पानी का सदुपयोग कर सभी किसानों तक पानी पहुंचाने में सहयोग करे। प्रतिनिधिमंडल में वरिष्ठ किसान नेता दशरथ कुमार, किसान नेता बुधराम चौधरी, हरजिंदर सिंह, सूरजमल नागर, रमेश मीणा, गुरबेज सिंह, सुखविंदर सिंह, रमेश मीणा हिंगोनिया, रामगोपाल मीणा, विरक सिंह आदि मौजूद थे।</p>
<p><strong>नवज्योति ने प्रमुखता से उठाई थी किसानों की पीड़ा</strong><br />बारिश के अभाव में खेतों में बीज खराब होने के सम्बंध में दैनिक नवज्योति में 7 जुलाई को प्रमुखता से समाचार प्रकाशित किया गया था। इसमें बताया था कि मानसून की बेरुखी अब किसानों के लिए बड़ी आर्थिक चुनौती बनती जा रही है। जून के आखिरी सप्ताह और जुलाई के पहले सप्ताह तक अच्छी बारिश की उम्मीद में किसानों ने महंगे दामों पर सोयाबीन का बीज खरीदकर खेतों में बुवाई तो कर दी, लेकिन बादलों की बेरुखी ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया। खेतों में पर्याप्त नमी नहीं होने से कई जगह बीज अंकुरित ही नहीं हो रहा, जबकि जहां अंकुरण हुआ है वहां तेज धूप के कारण नन्हे पौधे सूखने लगे हैं। लगातार बारिश नहीं होने से खेतों की नमी खत्म हो गई।इससे किसानों को काफी नुकसान हो रहा है।</p>
<p>प्रशासन के निर्देश पर दोनों नहरों में पानी का प्रवाह बढ़ाया गया है। मध्यप्रदेश प्रशासन ने गांधी सागर और राणाप्रताप सागर बांध से अतिरिक्त पानी छोड़ने की मांग स्वीकार कर ली है।<br /><strong>-हरेतलाल मीणा, अधीक्षण अभियंता, सीएडी</strong></p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 21 Jul 2026 11:57:28 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>ऑनलाइन गिरदावरी में किसानों की भागीदारी से राजस्थान रच रहा इतिहास, राज्‍य में 1.11 करोड़ से ज्यादा खसरों का डिजिटल क्रॉप सर्वे पूर्ण</title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान राज्‍य खरीफ गिरदावरी 2025 कोलेकर अब पूरे देश के लिए एक प्रेरणादायी उदाहरण बनने जा रहा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/with-the-participation-of-farmers-in-online-girdawari-rajasthan-is/article-126577"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-09/1113.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान ने खरीफ गिरदावरी संवत 2082 में डिजिटल तकनीक और जनभागीदारीसे अभूतपूर्व उपलब्धि अर्जित की है। इस बार गिरदावरी केवल सरकारी कार्य नहीं है, बल्कि यह किसानों, सर्वेयर और पटवारियों का साझा अभियान बन गया है। डिजिटल क्रॉप सर्वे (DCS) के तहत अब तक 42 हजार से अधिक ग्रामों के लक्ष्‍य की कुल 32 फीसदी उपलब्धि अर्जित करते हुए राज्‍य में अब तक एक करोड़ से अधिक खसरों की फोटोयुक्‍त व लोकेशनआधारित गिरदावरी (DCS) की जा चुकी है। राजकिसान गिरदावरी एप के माध्‍यम से विगत एक अगस्‍त को राज्‍य भर में आरंभ हुए ऑनलाइन अभियान के तहत अब तक अकेले किसानों के स्तर से 10 लाख से अधिक खसरों की गिरदावरी की जा चुकी हैजो किसानों द्वारा एप के आधार पर अब तक की गई गिरदावरी का कीर्तिमान है। गूगल प्‍लेस्‍टोर पर राजकिसान गिरदावरी एप डाउनलोड कर कोई भी किसान अपने मोबाइल फोन पर स्‍वयंगिरदावरी कर सकता है।</p>
<p>राज्‍य के सीकर, नागौर, चूरू एवं डीडवाना-कुचामन जिलों में 60 फीसदी से अधिक गिरदावरी की जा चुकी है। इसी प्रकार बाड़मेर, जोधपुर, नागौर, फलोदी तथा सवाईमाधोपुर जिले में किसानों द्वारा स्‍वयं गिरदावरी का उत्कृष्‍ट कार्य किया गया हैं। कृषक स्‍तर से ऑनलाइन गिरदावरी का बढता आंकड़ा आपका खसरा, आपकी गिरदावरी, आपका अधिकार के ध्‍येय वाक्‍य को चरितार्थ कर रहा है। खरीफ संवत 2082 के तहत डीसीएस कार्य 15 अक्‍टूबर 2025 तक किया जा रहा है। सभी ग्रामों में बेरोजगारी भत्ता प्राप्त युवा, पटवार सहायक अथवा ग्राम प्रतिहारी, कृषक मित्र, कृषि सखी, ई-मित्र संचालक व ग्राम के युवाओं कोभी गिरदावरी कार्य से जोड़ा जा रहा है । पटवारी स्तर पर चयनित प्राइवेट सर्वेयर भी गिरदावरी कार्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं । गत रबी गिरदावरी के दौरानलगभग 40 हजार सर्वेयर नियुक्त किए गए थे । खरीफ 2082 में भी प्राइवेट सर्वेयर केसहयोग से राजस्थान में गुणवत्तापूर्ण व सटीक गिरदावरी कार्य किया जा रहा है। यह केवल आँकड़ों की कहानी नहीं है, बल्कि यह प्रदेश के किसानों की मेहनत, भागीदारी और विश्वास की गाथा है। राजस्थान राज्‍य खरीफ गिरदावरी 2025 कोलेकर अब पूरे देश के लिए एक प्रेरणादायी उदाहरण बनने जा रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 11 Sep 2025 18:00:57 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur PS]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>खरीफ की बुवाई का हुआ समय! लेकिन नहीं मिल रहा डीएपी </title>
                                    <description><![CDATA[किसानों में चिंता की लहर, नहीं कर पा रहे बुवाई। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/it-s-time-for-sowing-kharif-crops--but-dap-is-not-available/article-83319"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-07/khairf-ki-buvayi-ka-hua-samaye,-lekin-nhi-mil-rhi-dap...sangod,-kota-news-01-07-2024.jpg" alt=""></a><br /><p>सांगोद। क्षेत्र में प्री मानसून व 25 जून से मानसून की बरसात के साथ ही खरीफ की फसल की बुवाई का समय आ गया है। परंतु डीएपी की भारी किल्लत देखी जा रही है। किसान डीएपी खाद के लिए इधर-उधर भटकने को मजबूर हो रहे हैं। सहकारी अधिकारी व स्थानीय दुकानदारों ने डीएपी खाद की किल्लत के कारण हाथ खड़े कर दिए हैं। डीएपी की कमी हो जाने से किसान खरीफ की फसलों की बुवाई नहीं कर पा रहे हैं। जबकि बुवाई का समय हो चुका है। जिससे किसानों में चिंता की लहर फैली हुई है। किसानों ने बताया कि धान की फसल के लिए बुवाई के साथ डीएपी की जरूरत है। परंतु सहकारी समितियों में डीएपी का स्टॉक खत्म हो चुका है। क्षेत्र की सहकारी समितियों में भी खाद उपलब्ध नहीं है। इस कारण किसानों में बुवाई को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। </p>
<p><strong>स्टॉक खत्म हुए हो चुका है लंबा समय</strong><br />किसानों ने बताया कि नगर में मौजूद खाद की दुकानों का स्टॉक खत्म हुए काफी दिन हो गए हैं। परंतु डीएपी की आपूर्ति नहीं हो पाने के कारण प्राइवेट डीलर भी किसानों को डीएपी उपलब्ध नहीं करवा पा रहे हैं।</p>
<p><strong>अच्छी पैदावार के लिए खाद की जरूरत</strong><br />किसानों ने बताया कि दो बार की अच्छी बरसात के बाद अब किसान सोयाबीन व खरीफ की फसल की बुवाई की तैयारी में हैं। लेकिन फसल के अच्छे उत्पादन के लिए अन्नदाताओं को खाद की जरूरत है। </p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />सोयाबीन की फसल तो बो दी है। लेकिन बिना डीएपी के अच्छी उपज मिलना मुश्किल है। किसानों की रोजी फसल पर ही निर्भर है। प्रशासन और सरकार को इसके लिए प्रयास करने चाहिए।<br /><strong>- पुरुषौत्तम मेहता, किसान, लक्ष्मीपुरा</strong></p>
<p>हर वर्ष इसी तरह डीएपी की किल्लत होती है। सहकारी समिति को पहले से इसकी व्यवस्था रखनी चाहिए या आगे सूचित करना चाहिए। ताकि किसानों को समस्या का सामना नहीं करना पड़े। <br /><strong>- कुलदीप नागर, किसान, ओदपुर</strong></p>
<p>डीएपी की कमी हो जाने से किसान खरीफ की फसलों की बुवाई नहीं कर पा रहे हैं। जबकि बुवाई का समय हो चुका है। जिससे किसानों में चिंता की लहर फैली हुई है।  अगर एक सप्ताह के अंदर डीएपी की कमी पूरी नहीं हुई तो किसानों के सामने बहुत बड़ी समस्या पैदा हो जाएगी।  सारी मेहनत पर पानी फिर जाएगा। <br /><strong>- हंसराज गोचर, खजूरी ओदपुर, किसान</strong></p>
<p>डीएपी खाद को लेकर डिमांड रिपोर्ट भेजी गई है। जल्द ही क्षेत्र में डीएपी की आपूर्ति की जाएगी।<br /><strong>- ओम मेहता, अध्यक्ष, मार्केटिंग सोसायटी</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 01 Jul 2024 16:50:21 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>मोदी कैबिनेट में हुए 5 बड़े फैसले, 14 खरीफ की फसलों की एमएसपी बढ़ाई</title>
                                    <description><![CDATA[लोकसभा चुनाव परिणामों के बाद नई सरकार के गठन के बाद दूसरी मोदी कैबीनेट ने 5 बड़े फैसले लिए है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/5-big-decisions-taken-in-modi-cabinet-msp-increased-for/article-82092"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-06/photo-size-(2)11.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। लोकसभा चुनाव परिणामों के बाद नई सरकार के गठन के बाद दूसरी मोदी कैबीनेट ने 5 बड़े फैसले लिए है। इन फैसलों की जानकारी मीडिया के साथ साझा करते हुए केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने जानकारी दी कि खरीफ की 14 फसलों की एमएसपी बढ़ाई जाएगी। </p>
<p><strong>इन फसलों की बढ़ी एमएसपी</strong></p>
<ul>
<li>रागी की एमएसपी- 4290 रुपए</li>
<li>कपास की एमएसपी - 7521 रुपए</li>
<li>धान की एमएसपी- 2300 रुपए</li>
<li>मूंग की एमएसपी-8282 रुपए</li>
<li>तूर की दाल- 7550 रुपए</li>
<li>मूंगफली- 6783 रुपए</li>
</ul>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 19 Jun 2024 19:44:38 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>बिजली निगम ने उड़ाई धरतीपुत्रों की नींद </title>
                                    <description><![CDATA[ बिजली विभाग में कोई जिम्मेदार अधिकारी किसानों को संतोषप्रद जवाब देने की स्थिति में नहीं है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/electricity-corporation-made-the-sons-of-the-soil-sleepless/article-55095"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-08/bijli-nigam-ne-udayi-dhartiputro-ki-neende...nenva,-bundi-news-21-08-2023.jpg" alt=""></a><br /><p>नैनवां। खेतों में खरीफ की फसल सोयाबीन,उड़द,मक्का सूखने के कगार पर है। इन्द्रदेव मेहरबान होते हुए नजर नहीं आ रहे है। अघौषित कटौती एवं कम वोल्टेज के चलते विद्युत पम्प चल नहीं पा रहे है। बिजली की आपूर्ति सुचारू करने की मांग पर पुलिस किसानों को कहर बरपा रही है। ऐसे में धरतीपुत्र परेशान है। उनका कहना है कि राम भी रूठ गया व राज भी रूठ गया है। ऐसे हालात में उनका कैसे घर खर्च चल पायेगा। किसान हर रोज अपने खेतों में जाते है,वहां तेज धूप में पानी की कमी से सूखती फसलों को देखकर किसान मायूस होकर घर लौट रहा है।  किसान मायाराम मीणा, जोधराज गुर्जर ने बताया कि वर्तमान में जो हालात बने हुए है,ऐसे हालात कभी नहीं देखे गए। सूखती फसलों को बिजली पम्प चला कर पानी पिलाने के लिए दिन भर पैनी निगाहों से लाइट की ओर देखना पड़ रहा है। दिन में कभी दो या तीन घंटे लाइट आने पर बिजली मोटरें चलाने की कोशिश की जाती है,लेकिन वोल्टेज कम होने से उनकी बिजली मोटर चल नहीं पाती। ट्रांसफार्मर पर अधिक लोड़ होने से ट्रांसफार्मर जल रहे है। जले हुए ट्रांसफार्मरों को वैसे तो 72 घंटे में बदले जाने का नियम है,लेकिन बिजली निगम के चक्कर लगाने के बावजूद एक माह तक जले हुए ट्रांसफार्मर नहीं बदले जा रहे है। कई किसानों ने सूखती हुई फसलों को बचाने के लिए नये कनेक्शनों के लिए फाइल लगाई गई थी फाइल प्रमुखता में आने के बाद उनको नए लाइन के सामान उपलब्ध नहीं हो रहे है। बिजली विभाग में कोई जिम्मेदार अधिकारी किसानों को संतोषप्रद जवाब देने की स्थिति में नहीं है। </p>
<p><strong>बिजली विभाग का सिस्टम फेल</strong><br /> रामकिशन माली ने बताया कि नैनवां ब्लॉक क्षेत्र में करीब 150 से अधिक जले हुए  ट्रांसफार्मर है। जिनको बदला नहीं जा रहा है। सिंगल फेज के करीब सौ  ट्रांसफार्मर जले हुए है। ऐसे उपभोक्ताओ के लिए नये  ट्रांसफार्मर उपलब्ध नहीं है। किसान हर रोज नये  ट्रांसफार्मर लेने के लिए डिस्कॉम विभाग के चक्कर लगा रहे है,लेकिन उनको नये  ट्रांसफार्मर नहीं मिल पा रहे है। </p>
<p><strong>इनका कहना है </strong><br />बारिश नहीं होने से किसानों को फसलों में पानी पिलाने के लिए सभी फीडर ओवरलोड है,क्षमता से अधिक बिजली मोटरें चलाने से  ट्रांसफार्मर जल रहे है। किसानों की डिमांड के अनुसार नए  ट्रांसफार्मर मंगवाए जा रहे है। किसानों को फसलों के लिए पर्याप्त बिजली मिले इसको लेकर सभी ग्रेड पर मॉनिटरिंग की जा रही है। बिजली  फीडरों का ब्लॉक बना कर किसानों को दिन की जगह रात्रि में भी बिजली आपूर्ति किया जा रहा है,लेकिन इसको लेकर भी किसान नाराज है। किसान चाहते है,कि उनको केवल दिन में ही बिजली आपूर्ति हो लेकिन वर्तमान हालातों को देखते हुए सभी किसानों को सिर्फ दिन में बिजली आपूर्ति किया जाना संभव नहीं है। उन्होंने सभी किसानों धैर्य बनाये रखे के लिए कहा गया है। विभाग बिजली व्यवस्था का सुचारू किया जाने के लिए भरसक प्रयास किया जा रहा है। <br /><strong>- मोहर मीणा, एक्सईएनबिजली निगम </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बूंदी</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 21 Aug 2023 19:26:02 +0530</pubDate>
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