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                <title>Chess Game - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>20 साल बाद प्रदेश के भरड़िया बने शतरंज के इंटरनेशनल मास्टर : शतरंज में राजस्थान का ‘यश’ गान</title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान शतरंज एसोसिएशन और चेस पेरेंट्स एसोसिएशन राजस्थान के पदाधिकारियों ने आईएम बनने पर यश भरड़िया को बधाई दी। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/after-20-years-the-yash-anthem-of-rajasthan-in-the/article-116300"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-06/rtroer-(2)7.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। गुलाबी नगर के अंतरराष्ट्रीय शतरंज खिलाड़ी यश भरड़िया चेस के इंटरनेशनल मास्टर बन गए हैं। जयपुर के 15 साल के यश भरड़िया ने सोमवार को ही सर्बिया के बेलग्राद में आयोजित इंटरनेशनल चेस टूर्नामेंट में अपना तीसरा और अंतिम इंटरनेशनल मास्टर (आईएम) नॉर्म हासिल किया। राजस्थान चेस एसोसिएशन के सचिव अशोक भार्गव ने मंगलवार को यह जानकारी मीडिया को दी। यश ने पहला इंटरनेशनल मास्टर नॉर्म पिछले साल ही हासिल कर लिया था। उन्हें दूसरा आईएम नॉर्म इसी साल आर्मेनिया में आयोजित टूर्नामेंट में मिला। और अब तीसरे और अंतिम आईएम नॉर्म के साथ उन्हें आईएम टाइटल की औपचारिकता पूरी कर ली। </p>
<p><strong>राजस्थान का 20 साल का सूखा खत्म</strong><br />यश भरड़िया यह उपलब्धि हासिल करने वाले अभिजीत गुप्ता के बाद राजस्थान के पहले खिलाड़ी बन गए हैं। यश के आईएम बनने से राजस्थान की शतरंज में चला आ रहा 20 साल का सूखा खत्म हो गया। 2005 में भीलवाड़ा के अभिजीत गुप्ता राजस्थान से इंटरनेशनल मास्टर बने थे। इसके बाद अभिजीत 2008 में ग्रैंडमास्टर बने। इतना ही नहीं उन्होंने 5 बार कॉमनवेल्थ चैम्पियनशिप भी जीती। अब अभिजीत के बाद यश राजस्थान से दूसरे आईएम बने हैं।</p>
<p><strong>कोई स्पॉन्सर नहीं, पिता ही करते हैं मदद</strong><br />राजस्थान शतरंज एसोसिएशन और चेस पेरेंट्स एसोसिएशन राजस्थान के पदाधिकारियों ने आईएम बनने पर यश भरड़िया को बधाई दी। बड़ी बात यह है कि यश के पास आज तक कोई स्पांसर नहीं है। उसके पिता ललित भरड़िया और मां वंदना ही बेटे के खेल को सपोर्ट करते रहे हैं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>खेल</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 04 Jun 2025 09:04:27 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur PS]]></dc:creator>
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                <title>जयपुर में फिडे अंडर-1800 रेटिंग शतरंज टूर्नामेंट : भारत, अमेरिका और श्रीलंका से 400 से ज्यादा खिलाड़ी खेलेंगे</title>
                                    <description><![CDATA[तीन दिवसीय अंडर- 1800 फिडे रेटिंग अंतरराष्ट्रीय शतरंज टूर्नामेंट में चार सौ से ज्यादा खिलाड़ी हिस्सा लेंगे। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/khel/fide-under-1800-rating-chess-tournament-in-jaipur-will-play-more/article-115819"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-05/rtroer-(1)31.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। तीन दिवसीय अंडर- 1800 फिडे रेटिंग अंतरराष्ट्रीय शतरंज टूर्नामेंट में चार सौ से ज्यादा खिलाड़ी हिस्सा लेंगे। इनमें भारत के अलावा अमेरिका और श्रीलंका से भी खिलाड़ी हिस्सा लेने आ रहे हैं। प्रतियोगिता के आयोजन सचिव जयेंद्र चतुवेर्दी, अमरीश जोशी और रवि बजाज ने बताया कि इस टूनार्मेंट में 22 राज्यों से लगभग 280 अंतरराष्ट्रीय रेटेड खिलाड़ी खेल रहे हैं, जिनमें जम्मू-कश्मीर से लेकर अंडमान और निकोबार और भारत के पूर्वी प्रांतों का प्रतिनिधित्व शामिल है। </p>
<p>चतुर्वेदी ने कहा कि यह गुलाबी नगर के लिए गर्व की बात है कि 6 महीने के भीतर ही देश के शीर्ष शतरंज खिलाड़ी एक बार फिर 11.5 लाख पुरस्कार राशि के इस टूर्नामेंट में हिस्सा लेने के लिए जयपुर आए हैं। उन्होंने कहा कि पिछले टूनार्मेंट में लगभग 40 खिलाड़ियों ने अपनी अंतरराष्ट्रीय रेटिंग प्राप्त की और 60 प्रतिशत पुरस्कार राशि राजस्थान के स्थानीय खिलाड़ियों ने जीती। जेएसडब्ल्यू के हिम्मत सिंह ने बताया कि जयपुरवासी स्वास्थ्य और विशेष रूप से मेंटल हेल्थ से संबंधित हमारी पहलों के प्रति हमेशा से सहयोगी रहे हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>खेल</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 30 May 2025 11:26:12 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur KD]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जयपुर ओपन फिडे रेटेड शतरंज प्रतियोगिता में दिखे कई रोचक मुकाबले, शतरंज की बिसात पर नन्हें शातिरों की बुजुर्गों को चुनौती</title>
                                    <description><![CDATA[दूसरी जयपुर ओपन फिडे रेटेड शतरंज प्रतियोगिता में कई अद्भुत नजारे देखने को मिल रहे हैं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/khel/many-interesting-matches-seen-in-jaipur-open-fide-rated-chess/article-112088"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-04/rtrer40.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। दूसरी जयपुर ओपन फिडे रेटेड शतरंज प्रतियोगिता में कई अद्भुत नजारे देखने को मिल रहे हैं। प्रतियोगिता में हिस्सा ले रहे नन्हें-नन्हें खिलाड़ी अपने से कई गुना उम्रदराज दिग्गज खिलाड़ियों को टक्कर दे रहे हैं। इस प्रतियोगिता में 4 वर्ष से लेकर 84 वर्ष तक के खिलाड़ी भाग ले रहे हैं। खास बात यह है कि इनमें शामिल कई युवा खिलाड़ी बड़े आत्मविश्वास के साथ बुजुर्ग खिलाड़ियों को चुनौती दे रहे हैं। गुजरात के 77 वर्षीय नारायण एसआर के सामने जब आठ साल के राघव अमर चौधरी मोहरें लेकर बैठे तो वहां मौजूद दर्शकों की निगाहें इस दिलचस्प मुकाबले पर टिक गईं। वहीं 60 साल के अनुभवी महेन्द्र लखियानी के सामने जब 13 साल का अगम सुराणा अपनी चालें चल रहा था, तो नजारा देखने लायक था। एक अन्य रोचक मुकाबला नौ वर्षीय रिधान अग्रवाल और उससे उम्र में कहीं बड़े आदित्य जैसलमेरिया के बीच हुआ। रिधान सूझबूझ और चतुराई के साथ अपने प्रतिद्वंद्वी को हर कदम पर टक्कर देते दिखे। ऐसा ही नजारा कई टेबलों पर नजर आया। </p>
<p><strong>क्या कहते हैं आयोजक :</strong></p>
<p>प्रतियोगिता आयोजक डॉ. जयेन्द्र चतुर्वेदी के अनुसार शतरंज ही एक ऐसा खेल है, जहां बच्चे और बुजुर्ग एक साथ खेलते नजर आएंगे। ये सिर्फ खेल नहीं बल्कि पीढ़ियों के बीच खेल के ज्ञान और अनुभव के आदान-प्रदान का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि जब किसी चाल पर विवाद होता है तो उम्र के फासले के बावजूद इनके बीच रोचक बहस भी देखने लायक होती है। </p>
<p><strong>रेलवे के राहुल और महाराष्ट्र के श्रयन मजूमदार को संयुक्त बढ़त :</strong></p>
<p>प्रतियोगिता में रेलवे के इंटर नेशनल मास्टर राहुल संगमा और महाराष्ट्र के श्रयन मजूमदार ने पांचवें चक्र के बाद 5-5 अंकों के साथ संयुक्त बढ़त बना ली है। वहीं राजस्थान के मानव कुमार ने शीर्ष वरीयता के खिलाड़ी राजस्थान के ही अरुण कटारिया को ड्रॉ पर मजबूर कर उनकी खिताबी उम्मीदों को झटका दे दिया। राष्ट्रीय जूनियर चैंपियनशिप में कांस्य पदक विजेता अरुण कटारिया 4.5 अंकों के साथ संयुक्त रूप से दूसरे स्थान पर चल रहे हैं। उनके साथ अन्य खिलाड़ियों में दिल्ली के जी.बी.जोशी, यूपी के गोपाल महेश्वरी, बिहार के कुमार गौरव, हरियाणा के निमय अग्रवाल, गुजरात के तन्ना कृष्ण अल्पेशभाई, और बिहार के वाय.पी. श्रीवास्तव भी दूसरे स्थान पर हैं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>खेल</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 26 Apr 2025 11:14:53 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>हम्पी ने दूसरी बार विश्व रैपिड शतरंज खिताब जीत रचा इतिहास</title>
                                    <description><![CDATA[ भारत की यह नंबर एक महिला शतरंज खिलाड़ी चीन की जू वेनजुन के बाद एक से ज्यादा बार यह खिताब जीतने वाली दूसरी खिलाड़ी बनीं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/khel/hampi-creates-history-by-winning-the-world-rapid-chess-title/article-99048"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-12/5554-(6)17.png" alt=""></a><br /><p> न्यूयॉर्क। भारत की ग्रैंडमास्टर कोनेरू हम्पी ने रविवार को इंडोनेशिया की इरीन सुकंदर को हराकर दूसरी बार विश्व रैपिड शतरंज चैंपियनशिप का खिताब जीत लिया है। हम्पी ने इससे पहले 2019 में जॉर्जिया में यह प्रतियोगिता जीती थी। भारत की यह नंबर एक महिला शतरंज खिलाड़ी चीन की जू वेनजुन के बाद एक से ज्यादा बार यह खिताब जीतने वाली दूसरी खिलाड़ी बनीं। वह ऐसा करने वाली भारत की पहली महिला शतरंज खिलाड़ी हैं।</p>
<p><strong>अंतिम राउंड में जीत की दरकार थी :</strong></p>
<p>37 वर्षीय हम्पी ने 11 में से 8.5 अंकों के साथ टूनार्मेंट का समापन किया।  यह भारतीय ग्रैंडमास्टर के लिए एक निर्णायक जीत थी। उन्हें चैंपियनशिप जीतने के लिए में सिर्फ जीत की ही दरकार थी। ड्रॉ या हार से उनका सपना टूट जाता। हालांकि, ऐसा नहीं हुआ। </p>
<p><strong>मुर्जिन ने जीता पुरुष वर्ग का खिताब :</strong></p>
<p>रूस के 18 वर्षीय वोलोदर मुर्जिन ने पुरुष वर्ग में यह खिताब जीता। नोदिरबेक अब्दुसत्तोरोव के बाद मुर्जिन दूसरे सबसे कम उम्र के फिडे वर्ल्ड रैपिड चैंपियन हैं। नोदिरबेक ने 17 साल की उम्र में खिताब जीता था।</p>
<p><strong>भारत के लिए शानदार रहा वर्ष :</strong></p>
<p>रैपिड शतरंज के अलावा हम्पी ने अन्य प्रारूपों में भी उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। उन्होंने 2022 महिला विश्व ब्लिट्ज शतरंज चैंपियनशिप में रजत पदक जीता था। वहीं, 2024 में महिला कैंडिडेट्स टूनार्मेंट जीतने के करीब आई थीं, लेकिन चूक गई थीं। उन्होंने रजत पदक हासिल किया था। हम्पी निजी कारणों से बुडापेस्ट ओलंपियाड में हिस्सा नहीं ले सकी थीं, जहां भारत ने छह स्वर्ण पदक जीते थे। इनमें व्यक्तिगत स्पर्धा में स्वर्ण और भारतीय पुरुष-महिला टीम के स्वर्ण पदक शामिल हैं। हम्पी उस महिला टीम का हिस्सा नहीं थीं, लेकिन उन्होंने 2024 के अंत में रैपिड खिताब जीतकर शानदार वापसी की।</p>
<p><strong>हम्पी ने दिखाया वह क्यों हैं चैंपियन :</strong></p>
<p>इस टूनार्मेंट के अंतिम राउंड से पहले हम्पी छह और खिलाड़ियों के साथ संयुक्त रूप से शीर्ष स्थान पर थीं। हम्पी के अलावा जू वेनझुन, कतेरिना लाग्नो, हारिका द्रोणावल्ली, अफ्रूजा खामदामोवा, टैन झोंग्यी और इरीन, सभी के पास 7.5 अंक थे। हम्पी के अलावा बाकी सभी खिलाड़ियों ने ड्रॉ खेला, लेकिन हम्पी ने इरीन के खिलाफ अंतिम राउंड में जीत हासिल कर खिताब पर कब्जा जमाया। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>खेल</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 30 Dec 2024 10:25:09 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>18 वर्ष की उम्र में गुकेश ने रचा इतिहास </title>
                                    <description><![CDATA[गुकेश 12 साल की उम्र में सबसे युवा ग्रैंडमास्टर बन गए थे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/gukesh-created-history-at-the-age-of-18%C2%A0/article-97577"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-12/257rtrer-(14)2.png" alt=""></a><br /><p>मात्र 18 वर्ष की उम्र में डोम्माराजू गुकेश ने 18 वीं विश्व शतरंज चैंपियनशिप जीतकर न केवल इतिहास रचा बल्कि इस खेल में भारत की छवि को वैश्विक शक्ति के रूप में भी प्रतिष्ठित किया है। वे दुनिया में सबसे कम उम्र के ऐसे प्रतिभावान खिलाड़ी बने जिन्होंने भारतीय शतरंज में वर्ल्ड चैंपियन रहे विश्वनाथ आंनद के बाद यह कामयाबी हासिल की। इसके साथ गैरी कास्पारोव का वह रिकॉर्ड तोड़ा, जब उन्होंने 22 वर्ष की उम्र में यह खिताब जीता था। गुकेश ने पिछले चैंपियन रहे चीन के डिंग लिरेन को चौदहवें चक्र में 6.5 के मुकाबले 7.5 अंकों से शिकस्त दी। हालांकि खेल बराबरी की ओर बढ़ रहा था, लेकिन गुकेश का रूक(हाथी)और बिशप(ऊंट)बचा था। जिसे उन्होंने एक दूसरे से गंवाया। अंत में गुकेश के दो प्यादों के मुकाबले लिरेन के पास सिर्फ  एक प्यादा बचा। और चीन के खिलाड़ी ने हार मानकर खिताब झोली में डाल दिया। लिरेन ने 55वीं चाल में यह गलती कर दी और उसके हाथ से ताज फिसल गया। हालांकि मैच का पहला गेम डिंग ने जीतकर अपनी योग्यता साबित की थी। लेकिन बाद में गुकेश ने अपने कौशल से मुकाबले को कड़ा कर दिया। उन्होंने 11 चक्र में शानदार खेल दिखाया और बढ़त हासिल की। डिंग ने 12 चक्र में शानदार जीत के साथ मैच को फिर बराबरी पर ला दिया। तेरहवें चक्र में भी दोनों खिलाड़ियों में 6.5 और 6.5 अंकों से बराबरी रही थी। डिंग की योजना क्लासिकल गेम में गतिरोध को सुरक्षित करने और मैच को छोटे रैपिड और जरूरत पड़ने पर ब्लिट्ज प्रारूप को खींचने और अनुभव के मामले में अपनी ताकत के इस्तेमाल की रही।</p>
<p>जबकि गुकेश की नीति बराबरी की स्थिति में भी आगे बढ़ने की रही, जो जीत का कारण बनी। चिकित्सक पिता और माइक्रो बॉयोलाजिस्ट मां की संतान गुकेश का 7वें वर्ष से ही शतरंज खेल के प्रति गजब का जुनून सवार था। गजब की मानसिक दृढ़ता, बौद्धिक कुशलता परिपक्वता, कड़ी मेहनत, समर्पण और धैर्य के बूते वे इस मुकाम तक पहुंचे। वेस्ट ब्रिज आनंद शतरंज अकादमी के मार्गदर्शन से उन्हें काफी मदद मिली। हाल के वर्षों में विश्व शतरंज के शीर्ष स्तरों पर भारतीय युवा प्रतिभाओं का उदय हुआ है। गुकेश 12 साल की उम्र में सबसे युवा ग्रैंडमास्टर बन गए थे। इस साल भी उन्होंने कई खिताब जीते। टोरंटो में कैंडिडेट्स 2024 टुर्नामेंट और शतरंज ओलंपियाड में स्वर्ण पदक जीते। इसमें अब कोई संदेह नहीं है कि उनकी इस उपलब्धि से देश में शतरंज के प्रति लोकप्रियता में इजाफा होगा। वैसे भी युवा प्रतिभाओं की कमी नहीं है। इस खेल में महिलाएं भी पीछे नहीं हैं। गुकेश के साथ ग्रैंड मास्टर अर्जुन एरिगैसी और आर.प्रज्ञानंद की गिनती विश्व शतरंज के शीर्ष 15 स्थानों में है। जो अपने में विश्व चैंपियन बनने की क्षमता रखते हैं। नई प्रतिभाओं को खोजने, तराशने और प्रोत्साहन देने के लिए सरकार, खेल संघों और आयोजकों के सहयोग और पहल की जरूरत है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 14 Dec 2024 11:45:53 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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                <title>प्रग्नाननंदा और कार्लसन के बीच दूसरी बाजी भी ड्रॉ रही</title>
                                    <description><![CDATA[क्लासिकल प्रारूप की इस बाजी में प्रग्नाननंदा काले मोहरों से खेल रहे थे। दोनों के बीच पहली बाजी 35 चाल के बाद ड्रॉ रही थी और दूसरी बाजी भी 30 चाल के बाद ड्रॉ रही।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/khel/the-second-game-between-praggnananda-and-carlsen-also-ended-in-a-draw/article-55315"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-08/chess-championship.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। रमेश बाबू प्रग्नाननंदा और विश्व नंबर एक नार्वे के मैग्नस कार्लसन के बीच विश्व कप शतरंज के फाइनल में दूसरी बाजी भी बराबरी पर छूटी। क्लासिकल प्रारूप की इस बाजी में प्रग्नाननंदा काले मोहरों से खेल रहे थे। दोनों के बीच पहली बाजी 35 चाल के बाद ड्रॉ रही थी और दूसरी बाजी भी 30 चाल के बाद ड्रॉ रही। अब विश्व चैंपियन का फैसला गुरुवार को टाई ब्रेक के जरिए होगा।<br /><br />एक घंटे तक चले मुकाबले में दोनों खिलाड़ियों ने 30 चालें चलीं, लेकिन मैच बराबरी पर रहा और अंत में दोनों ने ड्रॉ खेलने का फैसला किया। इस मैच में कार्लसन सफेद मोहरों से खेल रहे थे और शुरुआत में वह समय के लिहाज से आगे थे, लेकिन इसका फायदा नहीं उठा सके और अंत में वह खुद समय के मामले में पिछड़ने लगे थे। फाइनल में जगह बनाने के बाद प्रग्नानंदा दिग्गज बॉबी फिशर और कार्लसन के बाद कैंडिडेट्स टूर्नामेंट के लिए क्वालीफाई करने वाले तीसरे सबसे कम उम्र के खिलाड़ी बन गए।<br /><br /><strong>रक्षात्मक रहे कार्लसन</strong><br />इस मैच में सफेद मोहरों से खेलते हुए कार्लसन शुरुआत से ही रक्षात्मक तरीके से खेल रहे थे। उनकी पहली चाल के साथ ही ऐसा लग रहा था कि उन्हें हार का डर है या वह टाई ब्रेक में जाकर ही जीत हासिल करना चाहते हैं। इसी वजह से उन्होंने यह मैच जीतने की कोशिश भी नहीं की और खेल ड्रॉ पर खत्म हुआ। प्रग्नानंदा अगर फाइनल जीत लेते हैं तो इस टूर्नामेंट को अपने नाम करने वाले दूसरे भारतीय बन जाएंगे। <br />दिग्गज खिलाड़ी विश्वनाथन आनंद ने दो बार ऐसा किया था। आनंद साल 2000 और 2002 में चैंपियन बने थे।</p>
<p><strong>बहन से सीखा शतरंज, 12 साल की उम्र में तोड़ा था आनंद का रिकॉर्ड</strong><br />चेन्नई में जन्मे प्रग्नाननंदा 12 साल की उम्र में ही ग्रैंडमास्टर बन गए थे। प्रग्नाननंदा के पिता रमेशबाबू पोलियो से ग्रसित हैं। उन्होंने बड़ी बहन वैशाली को देखकर ही शतरंज खेलना शुरू किया। वैशाली चाहती थीं कि प्रग्नाननंदा टीवी में कार्टून कम देखें। इसी वजह से उन्होंने शतरंज का चालें सिखा दी। उस समय वैशाली को भी यह एहसास नहीं था कि प्रग्नानंदा आगे चलकर शतरंज में कमाल कर देगा। प्रग्नाननंदा की सफलता में उनकी मां का बड़ा योगदान है। बचपन से ही शतरंज से जुड़े हर टूर्नामेंट में खेलने के लिए उन्हें लाने और ले जाने की जिम्मेदारी मां पर थी। प्रग्नाननंदा के लिए साल 2018 खास रहा। वह महज 12 साल की उम्र में ग्रैंडमास्टर बन गए। इस मामले में उन्होंने विश्वनाथन आनंद को पीछे छोड़ा था। आनंद 18 साल की उम्र में ग्रैंडमास्टर बने थे। यही नहीं प्रग्नाननंदा दुनिया के दूसरे सबसे युवा ग्रैंडमास्टर बने थे। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>खेल</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 24 Aug 2023 11:42:08 +0530</pubDate>
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