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                <title>मेला खत्म होने के बाद लगा गंदगी का अंबार, बदबू से श्रद्धालु परेशान</title>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/baran/after-the-fair-ended--there-was-a-pile-of-garbage--devotees-were-troubled-by-the-stench/article-82557"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-06/mela-khtm-hone-k-bd-lga-gandagi-ka-ambar,-badboo-s-shradhhalo-preshan...kelwara,-baran-news-24-06-2024.jpg" alt=""></a><br /><p>केलवाड़ा। आदिवासी लघुकुम्भ सीताबाड़ी धार्मिक मेला 6 जून से लेकर 16 जून तक का लगातार 11 दिनों तक चला। इस दरमियान सीताबाड़ी में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने स्नान, दान व मेला भ्रमण का लुफ्त उठाया।  इसके अलावा सांस्कृतिक कार्यक्रम में दर्जनों लोक कलाकारों ने शानदार प्रस्तुतियों के माध्यम से प्रदेश की लोक संस्कृति को ऊंचा उठाने का महत्वपूर्ण काम किया है। नगर पालिका प्रशासन ने कड़ी मेहनत भी की। मेले की शुरूआत से लेकर मेला खत्म होने तक कलक्टर एवं एसडीएम अधिकारियों की परेड लेते दिखे, मगर मेला खत्म होने के बाद प्रशासन ने इस ओर झांकने की भी जरूरत नहीं समझी। जिसके फलस्वरूप सीताबाड़ी में गंदगी इस तरफ फैली हुई है। मच्छर मक्खी भिनभिना रहे हैं। गौ माता कचरे खा रही है। स्थानीय निवासी हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी मेला समाप्ति के बाद गंदगी परेशान हैं।</p>
<p><strong>साफ-सफाई की तरफ नहीं प्रशासन का ध्यान</strong><br />फटे-पुराने कपड़े बिखरे पड़े हैं। इसके अलावा पॉलीथिन, कागज के टुकड़े इत्यादि से  मेला परिसर प्रदूषित हो गया है। साफ-सफाई को लेकर नगर पालिका प्रशासन ने महज खानापूर्ति की है। मेले के दौरान तो सफाई का ध्यान रखा मेला समाप्त होते ही इस ओर किसी का ध्यान नहीं गया। मेला मैदान क्षेत्र में भी अब दुकानें उठ चुकी हैं। वहां पर तो गंदगी का विकराल दृश्य देखने को मिल रहा है। साफ-सफाई के लिए स्वच्छता अभियान चलाने की जरूरत है। मेला समाप्त होने के बाद भी लोग सीताबाड़ी में स्नान व मंदिर दर्शन करने के लिए बड़ी संख्या में प्रतिदिन पहुंच रहे हैं।</p>
<p>नगर पालिका द्वारा साफ-साफाई में  कोताही के चलते प्राचीन लक्षमण मंदिर के आसपास कचरे का अंबार लगा हुआ है। यहां दूरदराज से आने वाले श्रदालुओं को गंदगी के चलते परेशानी का भी सामना करना पड़ता है लेकिन नगर पालिका प्रशासन इस ओर ध्यान नहीं दे रही है।<br /><strong>- धर्मेंद्र बंसल, स्थानीय दुकानदार, सीताबाड़ी। </strong></p>
<p>सीताबाड़ी में स्थित लक्ष्मण मंदिर एवं राम मंदिर वर्षों से क्षेत्र के लोगों की आस्था का केंद्र बना हुआ है, लेकिन नगर पालिका द्वारा मंदिर के सामने कचरा पेटी न रखकर गंदगी का वातारण निर्मित कर दिया है।<br /><strong>- अशोक शर्मा, महंत राम मंदिर। </strong></p>
<p>नगरपालिका का स्वच्छता अमला यहां नियमित कचरा नहीं उठाता, चारों तरफ कचरे के ढेर लगे हैं। इसके अलावा आसपास घूमने वाले मवेशी कचरे को आसपास बिखेर देते हैं। जिससे चारों तरफ गंदगी का बातावरण बना हुआ है।<br /><strong>- राहुल जोधा, स्थानीय निवासी। </strong></p>
<p>सीताबाड़ी में मेला परकोटा व मेन रोड़ पर प्लास्टिक पॉलिथीन के ढेर लगे हुए है। नगरपालिक द्वारा सफाई नहीं होने के कारण कचरे के ढेर लग गए।  अन्य जानवर कचरे को खा रहे हैं। अगर समय होते सफाई नहीं की गई। आने वाली बारिश से पॉलिथीन नालियों में जाम हो जाएगी।<br /><strong>- राकेश शिवहरे, शिक्षाविद, एबीवीपी पूर्व जिला संगठन मंत्री। </strong></p>
<p>जल्द ही मेला परिसर की साफ-सफाई कराई जाएगी। सफाई के लिए प्रयास किए जा रहे है। <br /><strong>- नागलमल गुर्जर, अधिशासी अधिकारी, नगरपािलका केलवाड़ा। </strong></p>
<p>स्टाफ की कमी है। नगर पालिका में स्टाफ के  लिए हमारे द्वारा प्रयास किया जा रहे हैं। टेंडर प्रक्रिया कर नगर क्षेत्र में साफ-सफाई कराई जाएगी।<br /><strong>- ललित मीणा, विधायक, शाहाबाद किशनगंज। </strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बारां</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 24 Jun 2024 16:57:12 +0530</pubDate>
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                <title>ये कैसा पर्यटन : गंदगी और बदबू से बदरंग इतिहास की तस्वीर</title>
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                        <![CDATA[पैसा देने के बावजूद पर्यटक सुविधाओं को तरस रहे हैं।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/what-kind-of-tourism-is-this--a-picture-of-history-discolored-by-dirt-and-stench/article-55538"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-08/ye-kesa-paryatan--gandagi-or-badbu-s-badrnag-itihas-ki-tasveer...kota-news-26-08-2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। कला, संस्कृति और प्रकृति के अनूठे संगम के बीच चंबल की गोद में बसा अभेड़ा महल चमक खो रहा है। कचरे और गंदगी के ढेर में दबा कोटा का गौरवशाली इतिहास अपनी दुर्दशा पर आंसू बहा रहा। दीवारों से जहां इतिहास के रंग धुंधले हो गए वहीं, रानी महल की तस्वीर बदरंग हो गई। दीवारों पर लिखे अपशब्द पर्यटकों को शर्मसार कर रहे हैं। राजसी वैभव, युद्ध नजारे, शाही विवाह रस्में, हाथी-घोड़ों पर सवार सैनिकों का लश्कर और कला संस्कृति से रुबरू कराती कलात्मक चित्रकारी भी बदहाल है। दरअसल, अभेड़ा महल उपेक्षा का शिकार हो रहा है। पैसा देने के बावजूद पर्यटक सुविधाओं को तरस रहे हैं। महल का संचालन यूआईटी द्वारा किया जा रहा है। टिकट लेने के बावजूद इसके संरक्षण पर ध्यान नहीं दिया जा रहा। जलाशय भी गंदगी से अटे हैं। दुर्गंध से सैलानियों का सांस लेना तक मुश्किल हो जाता है।</p>
<p><strong>17 साल पहले हुआ था महल का रिनोवेशन</strong><br />नेचर प्रमोटर एएच जैदी ने बताया कि यूआईटी ने साढ़े तीन करोड़ की लागत से वर्ष 2003 में अभेड़ा महल का जीर्णोंद्धार शुरू किया था, जो तीन साल बाद 2006 में पूरा हुआ। रिनोवेशन के तहत भवन की मरम्मत, रंग-रोशन, सुलभ कॉम्पलेक्स, मुगल गार्डन, रानी महल की मरम्मत व नक्काशी, झरोखे, तालाब, बाहरी दीवारों पर राज दरबार की सवारी जुलूस व राजसी वैभव को प्रदर्शित करती पेटिंग्स सहित कई कार्य करवाए थे। </p>
<p><strong>खरीदना पड़ रहा पानी</strong><br />केशवरायपाटन से आए बद्रीलाल जांगिड़ ने बताया कि महल में पानी की व्यवस्था नहीं है। मजबूरी में महंगे दामों पर कैंटिन से पानी की बोटलें खरीदनी पड़ती है। वहीं, सुविधा घर भी बदहाल हैं। झूले टूटें हुए हैं। साफ-सफाई पर बिलकुल भी ध्यान नहीं है। </p>
<p><strong>बदरंग हुए इतिहास के रंग  </strong><br />अभेड़ा महल की दीवार पर बनी शाही सवारी, विवाह रस्म व हाथी-घोड़े व भाले लेकर चल रहे सैनिकों की कलात्मक चित्रकारी बदरंग हो चुकी है। वहीं, रानी महल की अंदरुनी दीवारों पर राजसी वैभव को प्रदर्शित करते चित्रों को लोगों ने अभद्र कमेंट लिखकर खराब कर दिए हैं। जबकि, महल देखने आने वाले पर्यटकों से टिकट लिया जाता है लेकिन मॉनिटरिंग नहीं की जाती। जिसका फायदा प्रेमी युगल व अन्य शरारती तत्व उठाते हैं और दीवारों पर नाम व अभद्र कमेंट लिख धरोहर को नुकसान पहुंचा रहे हैं। वहीं, परिवार के साथ आने वाले पर्यटकों को शर्मिंदगी महसूस होती है। </p>
<p><strong>कमल के पत्तों में दबा तालाब का सौंदर्य</strong><br />महल परिसर में बना मुख्य तालाब आकर्षण का केंद्र है। लेकिन, इन दिनों पूरा तालाब कमल के पत्तों से अटा पड़ा है। लंबे समय से तालाब की सफाई नहीं हुई। पानी में काई जमी हुई है, जिससे उठती दुर्गंध से पर्यटक परेशान हैं। वहीं, जलीय जीवों का दम घुट रहा है। देश प्रदेश से आने वाले पक्षियों को ठोर नहीं मिलती। इससे पक्षियों की संख्या में भी लगातार गिरावट बनी हुई है। ऐसे में यूआईटी प्रशासन को तालाब की सफाई करवाकर महल की खूबसूरती बरकरार रखनी चाहिए।</p>
<p><strong>बदबू से पर्यटकों का सांस लेना मुश्किल</strong><br />जैदी ने बताया कि अभेड़ा महल बहुत ही खूबसूरत है। लेकिन, देखरेख के अभाव में बदहाल हो रहा है। यहां आने वाले पर्यटकों ने रानी महल की दीवारें व झरोखों को पान-गुटखों की पीक से बदरंग कर दिया है। वहीं, कोटा शैली की पेंटिंग्स खराब कर  दी है।  इसके अलावा महल के नजदीक बने कुंड में प्लास्टिक की बोटलें फेंक कर गंदा कर रखा है। गंदगी से उठती दुगंध से लोगों का सांस लेना तक मुश्किल हो रहा है। </p>
<p><strong>पर्यटन प्रेमियों ने दिए सुझाव</strong><br />- पर्यटन प्रेमियों के अनुसार, यूआईटी प्रशासन अभेड़ा महल की टिकट दर में बढ़ोतरी की जाए। ताकि, उससे होने वाली आय से महल का मेंटिनेंस किया जा सके। <br />- सुरक्षा गार्ड की संख्या बढ़ाई जाए।<br />- सीसीटीवी कैमरों की संख्या में इजाफा किया जाए। <br />- अधिकारियों द्वारा मॉनिटरिंग की जाए। <br />- कुंड, तालाबों  व परिसर की साफ-सफाई की पुख्ता व्यवस्था हो। <br />- धुंधली होती पेंटिंग्स को रंग रोगन के लिए फिर से जीवंत किया जाए। </p>
<p><strong>पर्यटक बोले-देखने लायक नहीं बचा अभेड़ा</strong><br />बोरखेड़ा निवासी सुरेश सुमन व अजय कुश्वाह ने बताया कि रविवार को छुट्टी का दिन होने से परिवार को लेकर अभेड़ा महल घूमने आए थे। महल में प्रवेश करते ही गंदगी से अटा तालाब दुर्गंध मार रहा था। तालाब के पास खड़ा मुश्किल हो गया। झूले सभी टूटे हुए हैं और फव्वारे भी बंद हैं। सुविधा घरों की हालात खराब है। वहीं, इटावा से आए चंद्रशेखर मीणा, सरीता मीणा ने कहा, अभेड़ा महल का काफी नाम सुना था इसलिए देखने आए, लेकिन यह जगह अब देखने लायक नहीं रहा। यहां पानी के लिए नल तक नहीं है। चारों तरफ गंदगी के ढेर है। </p>
<p>जिला पर्यटन विकास समिति की बैठक में सभी पर्यटन व एतिहासिक स्थलों के रखरखाव  व साफ-सफाई के मामले उठाते हैं। पूर्व में यूआईटी अधिकारियों को महल के मेंटिनेंस से अवगत कराया था। अभेड़ा महल का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का अवलोकन करेंगे और हालातों से अधिकारियों से चर्चा करेंगे। <br /><strong>- संदीप श्रीवास्तव, जिला पर्यटन अधिकारी कोटा</strong></p>]]>
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                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 26 Aug 2023 18:45:55 +0530</pubDate>
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