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                <title>rewilding - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                            <item>
                <title>असर खबर का - मुकुंदरा में री-वाइल्डिंग की बड़ी छलांग - बाघिन एमटी- 7 अब 5 से 21 हेक्टेयर एनक्लोजर में शिफ्ट</title>
                                    <description><![CDATA[रेडियो-कॉलरिंग के बाद विस्तृत वन क्षेत्र में छोड़ा,  हर मूवमेंट पर होगी नजर,नवज्योति की खबरों के बाद चेता वन विभाग तो बाघिन को मिली आजादी की राह ।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impact-of-news--a-major-leap-forward-in-mukundra-s-rewilding-efforts---tigress-mt-7-now-shifted-from-a-5-hectare-enclosure-to-a-21-hectare-enclosure/article-144257"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/mukundra.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। रणथंभोर में कभी मां को खोकर असहाय हुई मासूम शावक आज आत्मविश्वास से भरी युवा बाघिन बन चुकी है। संघर्ष से संकल्प तक की कहानी लिख रही बाघिन एमटी- 7 ने मुकुन्दरा हिल्स टाइगर रिजर्व में री-वाइल्डिंग की दिशा में एक और ऐतिहासिक कदम बढ़ाते हुए बड़े एनक्लोजर में प्रवेश कर लिया है। एमटी- 7 अब आजादी की राह पर और आगे बढ़ गई है। वैज्ञानिक निगरानी और सख्त प्रोटोकॉल के बीच शनिवार को उसे 5 हेक्टेयर से 21 हेक्टेयर के बड़े एनक्लोजर में शिफ्ट कर दिया गया। यह सिर्फ स्थानांतरण नहीं, बल्कि खुले जंगल में उसकी स्वाभाविक वापसी की मजबूत दस्तक है।</p>
<p>दरअसल, मुकुन्दरा हिल्स टाइगर रिजर्व में एक साल से चल रही री-वाइल्डिंग प्रक्रिया के तहत बाघिन को विशेषज्ञों की निगरानी में रेडियो कलरिंग के बाद 5 हेक्टेयर के एनक्लोजर से निकाल 21 हेक्टेयर के बड़े एनक्लोजर में शिफ्ट किया गया। यह कदम बाघ संरक्षण और वैज्ञानिक पुनर्वास की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।</p>
<p><strong>अब खुले जंगल से एक कदम दूर</strong></p>
<p>मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व के मुख्य वन संरक्षक व फील्ड डायरेक्टर सुगनाराम जाट का कहना है कि बाघिन एमटी- 7 निर्धारित टारगेट से दो गुना यानी 100 से ज्यादा शिकार कर चुकी है। वह शिकार करने की कला में निपूर्ण हो चुकी है। ऐसे में जंगल की चुनौतियों व संघर्ष के बीच खुद को ढाल सके, इसके लिए विचरण क्षेत्र बढ़ाना आवश्यक था। एनटीसीए की परमिशन के बाद मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक (सीडब्लूएलडब्ल्यू) से अनुमति मिलने पर शनिवार शाम विशेषज्ञों की निगरानी में बाघिन को चार गुना बड़े एनक्लोजर में शिफ्ट किया गया। अब रेडियो कॉलर के माध्यम से बाघिन के हर एक मूवमेंट पर नजर रखी जा रही है। रिवाल्डिंग को लेकर एनटीसीए के प्रोटोकॉल पूरे होने पर टाइग्रेस को खुले जंगल में रिलीज कर दिया जाएगा। <br /> <br /><strong>मां को खोने के बाद शुरू हुआ संघर्ष</strong></p>
<p>रणथंभोर की बाघिन टी - 114 की मौत के बाद 31 जनवरी 2023 को बाघिन एमटी- 7 को शावक अवस्था में कोटा लाया गया था। तब उसकी उम्र महज ढाई माह थी। अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क में उसकी परवरिश की गई। यहां करीब 22 माह तक नियंत्रित वातावरण में री-वाइल्डिंग की गई। जीवित शिकार के जरिए उसमें शिकार करने की कला विकसित की गई। इसके बाद 2 वर्ष की उम्र के पूरी करने के बाद दिसंबर 2024 को मुकुन्दरा के 5 हेक्टेयर री-वाइल्डिंग एनक्लोजर में शिफ्ट किया गया। पिछले 14 महीनों में उसने सफल शिकार, स्वाभाविक व्यवहार और बेहतर अनुकूलन क्षमता का प्रदर्शन किया।</p>
<p><strong>एनटीसीए की हरी झंडी के बाद बढ़ा कदम</strong></p>
<p>सीसीएफ जाट ने बताया कि री-वाइल्डिंग प्रक्रिया का मूल्यांकन करने के लिए राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) की विशेषज्ञ टीम ने मुकुन्दरा आकर बाघिन के व्यवहार, शिकार क्षमता और स्वास्थ्य परीक्षण का निरीक्षण किया। संतोषजनक रिपोर्ट के आधार पर चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ने की अनुमति दी गई।इसी क्रम में पहले चरण में उसे 5 हेक्टेयर से 21 हेक्टेयर के बड़े एनक्लोजर में स्थानांतरित करने का निर्णय लिया गया।</p>
<p><strong>रेडियो-कॉलरिंग के बाद नई शुरूआत</strong></p>
<p>मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक की अनुमति के बाद गठित विशेषज्ञ दल जिसमें फील्ड अधिकारी, पशु चिकित्सक और वन्यजीव जीवविज्ञानी शामिल थे, उन्होंने शनिवार शाम 5:30 बजे बाघिन को ट्रैंक्वलाइज किया।रेडियो कॉलर लगाने के साथ उसके स्वास्थ्य संबंधी सभी मानक दर्ज किए गए। इसके बाद उसे 21 हेक्टेयर के एनक्लोजर में छोड़ दिया गया, जहां उसकी गतिविधियों पर लगातार निगरानी रखी जा रही है।</p>
<p><strong>अंतिम लक्ष्य: खुले जंगल में स्वतंत्र विचरण</strong></p>
<p>वन विभाग के अनुसार, भविष्य में बाघिन को खुले प्राकृतिक वन क्षेत्र में छोड़े जाने का अंतिम निर्णय उसके व्यवहार, प्रदर्शन और विशेषज्ञों की रिपोर्ट के आधार पर लिया जाएगा। यह पूरी कार्यवाही वैज्ञानिक पद्धति पर आधारित है और बाघ संरक्षण की दिशा में एक प्रेरक पहल मानी जा रही है।</p>
<p><strong> इसलिए खास है यह कदम </strong></p>
<p>अनाथ शावक को सफलतापूर्वक जंगल जीवन के लिए तैयार करना, चरणबद्ध री-वाइल्डिंग का वैज्ञानिक मॉडल,रेडियो-कॉलरिंग से सतत निगरानी और सुरक्षा,<br />मुकुन्दरा में बाघों की स्थायी उपस्थिति की दिशा में मजबूत प्रयास मुकुन्दरा हिल्स टाइगर रिजर्व में एमटी -7 की यह नई शुरूआत न सिर्फ वन विभाग की प्रतिबद्धता को दशार्ती है, बल्कि यह उम्मीद भी जगाती है कि आने वाले समय में वह स्वतंत्र रूप से खुले जंगल की रानी बनकर विचरण करेगी।</p>
<p><strong>नवज्योति बनी आवाज तो आजादी की मंजिल हुई आसान</strong></p>
<p>बाघिन एमटी-7 को री- वाइल्डिंग के नाम पर 14 माह से 5 हेक्टेयर एनक्लोजर में रखा जा रहा था। यह क्षेत्र बाघिन के विचरण के लिहाज से छोटा था। जहां वह टेरिटरी बनाना, शिकार के लिए एक ही तरह के जानवरों की उपलब्धता होने से खुले जंगल में अलग अलग जानवरों का शिकार करने और वास्तविक चुनौतियों से निपटने के गुण विकसित होने के उद्देश्य पूरे नहीं हो पा रहे थे। ऐसे में दैनिक नवज्योति ने लगातार खबरें प्रकाशित कर अधिकारियों का ध्यान इस और आकर्षित किया। इसके बाद वन विभाग ने बाघिन को 5 से 21 हेक्टेयर के वन क्षेत्र में रिलीज करने का निर्णय लिया।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 23 Feb 2026 14:47:28 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>रणथंभौर से बाघ आया और 8 दिन में ही जंगल में छोड़ा लेकिन 13 महीनों से कैद बाघिन अब भी आजादी को तरसी, दो वर्ष पहले बाघ को रामगढ़ और बाघिन को मकुंदरा में किया था शिफ्ट</title>
                                    <description><![CDATA[ 50 की जगह 85 से ज्यादा किए शिकार, फिर भी किस्मत का नहीं हुआ फैसला।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/a-tiger-from-ranthambore-was-released-into-the-wild-in-just-8-days--but-the-tigress--captive-for-13-months--still-longs-for-freedom--two-years-ago--the-tiger-was-shifted-to-ramgarh-and-the-tigress-to-mukundra/article-140112"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/1200-x-600-px)-(1200-x-600-px)-(1)38.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। रणथंभौर टाइगर रिजर्व से मुकुंदरा लाए बाघ को महज 8 दिन में ही खुले जंगल में छोड़ दिया गया लेकिन पिछले 13 महीनो से रिवाइल्डिंग के नाम पर सॉफ्ट एनक्लोजर में कैद बाघिन एमटी-7 को अब तक बंदिशों से आजादी नहीं मिली। जबकि, एनटीसीए की टीम गत वर्ष नवंबर में ही मुकुंदरा और रामगढ़ में रिवाल्डिंग बाघ- बाघिन की वास्तविक स्थिति का भौतिक आकलन कर चुकी है। इसके बावजूद टाइगर और टाइग्रेस की आजादी पर फैसला नहीं हो सका। इधर, वन्यजीव प्रेमियों का तर्क है, हार्ड रिलीज में अनावश्यक देरी से बाघिन के विकास पर विपरीत असर पड़ सकता है।</p>
<p>दरअसल,अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क से रिवाल्डिंग के लिए दिसंबर 2024 में बाघिन को मुकुंदरा व बाघ को रामगढ़ टाइगर रिजर्व के सॉफ्ट एनक्लोजर में शिफ्ट किया था। उस समय वन अधिकारियों ने बाघिन के 40 और बाघ द्वारा 50 शिकार सफलतापूर्वक कर लेने पर खुले जंगल में हार्ड रिलीज किया जाना निर्धारित किया था। लेकिन, टाइग्रेस एमटी-7 और टाइगर आरवीटीआर- 7 टारगेट से ज्यादा शिकार कर चुके है। इसके बावजूद उन्हें 5 हैक्टेयर के सॉफ्ट एनक्लोजर में ही रखा जा रहा है। वर्तमान में दोनों की उम्र करीब 3 वर्ष हो चुकी है। जबकि इस उम्र के अन्य टाइगर- टाइग्रेस अपनी टेरीटरी बनाने के लिए जंगल का चप्पा-चप्पा छान लेते हैं ।</p>
<p><strong>90 से ज्यादा शिकार, फिर भी आजादी नहीं</strong><br />मुकुंदरा से मिली जानकारी के अनुसार, बाधिन एमटी-7 अब तक 85 से 90 के बीच सफलतापूर्वक शिकार कर चुकी है। जबकि, टारगेट 40 का ही था। वहीं बाघ रामगढ़ में करीब 110 शिकार कर चुका है। जिसका टारगेट 50 का ही था। शिकार किए गए वन्यजीवों की संख्या से स्पष्ट होता है कि बाघ बाघिन शिकार करना सीख चुकें है। ऐसे में उसे खुले जंगल में छोड़ दिया जाना चाहिए। ताकि, वह जंगल की विपरीत परिस्थितियों में खुद को ढाल सके।</p>
<p><strong>बाघिन अपने से दो गुना ऊंचे जानवर का कर चुकी शिकार</strong><br />टाइग्रेस एमटी-7 अब तक हिरण ही नहीं बल्कि अपने से आकर में दो गुना ऊंचे वन्यजीव नील गाय का भी शिकार कर चुकी है। जबकि, नील गाय का शिकार आसान नहीं होता है। बाघिन के लगातार शिकार किए जाने से 5 हैक्टेयर के एनक्लोजर में प्रे-बेस की भी कमी होती जा रही है। ऐसे में रिवाइल्डिंग के उद्देश्यों की सफलता के लिए उसे शीघ्र ही खुले जंगल में छोड़ा जाना आवश्यक है।</p>
<p><strong>इधर, ढाई साल के बाघ टेरिटरी बना रहे, उधर 3 वर्ष के पिंजरों में कैद</strong><br />वन्यजीव प्रेमी लोकेश कुमार का कहना है, बाघिन एमटी-7 और आरवीटीआर- 6 को अभेडा बायोलॉजिकल पार्क से पिछले साल दिसम्बर माह में शिफ्ट किया गया था। इस दरमियान दोनों खुले जंगल में विचरण करने की एनटीसीए के निर्धारित मापदंडों को सफलतापूर्वक पूरा कर चुके हैं। वर्तमान में दोनों की उम्र लगभग 3 साल हो चुकी है। इसके बावजूद वह 5- 5 हेक्टेयर के सॉफ्ट एनक्लोजर से बाहर नहीं निकल सके। जबकि, इस उम्र के अन्य बाघ-बाघिन खुद को एक्सप्लॉजर करते हैं और मां से अलग होकर अपनी टेरीटरी बनाने के लिए जंगल को सर्च करते हैं। इस बीच कई परिस्थितियों से गुजरने के दौरान बहुत कुछ सीखते हैं, जो जंगल में उनके सरवाइवल रेट को बढ़ाने में मददगार होते हैं। इसका उदाहरण रामगढ़ टाइगर रिजर्व में मध्य प्रदेश के पेंच रिजर्व से लाई गई बाघिन और मुकुंदरा में हाल ही में लाए बाघ की उम्र 3 साल से कम है दोनों ही खुले जंगल में अपनी टेरिटरी बना रहे हैं । ऐसे में इन दोनों रिवाइल्डिंग बाघ बाघिन को भी जल्द से जल्द हार्ड रिलीज किया जाना चाहिए।</p>
<p><strong>कैसे सीखेंगे शिकार ढूंढना व टेरीटरी बनाना</strong><br />बायोलॉजिस्ट रवि कुमार बताते हैं, पिछले एक साल से बाधिन दरा में 5 हैक्टेयर के सॉफ्ट एनक्लोजर में रह रही है। जहां रिवाइल्डिंग के नाम पर सिर्फ शिकार करना ही सीखा है। लेकिन, शिकार ढूंढना नहीं सीख पा रही है। क्योंकि, सॉफ्ट एनक्लोजर में पहले से ही प्रे-बेस की उपलब्धता सुनिश्चित की जाती है। जबकि, खुले जंगल में ऐसा नहीं होता है। वहां हर दिन चुनौतियों के बीच उन्हें भोजन ढूंढना पड़ता है, जो पिंजरे में कैद होने के कारण इस गुण का विकास नहीं हो पा रहा। वहीं, अनावश्यक देरी से टेरीटरी बनाने में भी उसे परेशानी का सामना करना पड़ेगा</p>
<p><strong>एनटीसीए की रिपोर्ट पर अटकी शिफ्टिंग</strong><br />मुकुंदरा व रामगढ़ टाइगर रिजर्व में रिवाल्डिंग बाघ और बाघिन की खुले जंगल में शिफ्टिंग पर फैसला एनटीसीए की रिपोर्ट पर अटकी हुई है। जबकि नचा की टीम दो माह पहले ही मुकुंदरा और रामगढ़ में टाइगर और टाइग्रेस की फिजिकल एक्टिविटी का भौतिक आकलन कर चुकी है।<br />इसके बावजूद अब तक रिवाल्डिंग बाघ बाघिन की आजादी पर फैसला नहीं हो सका।</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क से दिसम्बर 2024 में रिवाइल्डिंग के लिए मुकुंदरा व रामगढ़ में शिफ्ट किए गए बाघ बाघिन को खुले जंगल में छोड़ा जाना है। हमारी और से सभी तैयारी पूरी है। एनटीसीए की रिपोर्ट का इंतजार है। जिसके आधार पर खुले जंगल में छोड़े जाने को लेकर निर्णय होगा।<br /><strong>सुगनाराम जाट, सीसीएफ मुकुंदरा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
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                <pubDate>Mon, 19 Jan 2026 17:01:11 +0530</pubDate>
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                <title>टारगेट से ज्यादा किए शिकार फिर भी पिंजरे में कैद बाघिन, रिवाइल्डिंग के नाम पर एक साल से सॉफ्ट एनक्लोजर में टाइग्रेस एमटी-7</title>
                                    <description><![CDATA[अब तक बाघिन 60 से ज्यादा कर चुकी शिकार, फिर भी हार्ड रिलीज नहीं कर रहे अधिकारी। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/despite-exceeding-the-target--the-tigress-remains-caged--tigress-mt-7-remains-in-a-soft-enclosure-for-a-year-in-the-name-of-rewilding/article-128894"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-10/copy-of-news-(2)12.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क से रिवाल्डिंग के लिए मुकुंदरा टाइगर रिजर्व की दरा रेंज में शिफ्ट की गई बाघिन एक साल बाद भी पिंजरे में कैद है। जबकि, वन अधिकारियों ने बाघिन द्वारा 50 शिकार सफलतापूर्वक कर लेने पर खुले जंगल में हार्ड रिलीज किया जाना निर्धारित किया था। लेकिन, टाइग्रेस एमटी-7 अब तक टारगेट से ज्यादा शिकार कर चुकी है। इसके बाद भी उसे 5 हैक्टेयर के सॉफ्ट  एनक्लोजर में ही रखा जा रहा है। वर्तमान में उसकी उम्र करीब 3 वर्ष हो चुकी है। इस उम्र के अन्य टाइगर अपनी टेरीटरी बनाने के लिए जंगल का चप्पा-चप्पा छान लेते हैं लेकिन एमटी-7 पांच हैक्टेयर के एनक्लोजर से ही आगे नहीं बढ़ पा रही। इधर, वन्यजीव प्रेमियों का तर्क है, हार्ड रिलीज में अनावश्यक देरी से बाघिन के विकास पर विपरीत असर पड़ सकता है। </p>
<p><strong>60 से ज्यादा शिकार, फिर भी आजादी नहीं</strong><br />मुकुंदरा से मिली जानकारी के अनुसार, बाघिन एमटी-7 अब तक 66 से 70 के बीच सफलतापूर्वक शिकार कर चुकी है। जबकि, टारगेट 50 का ही था। इससे स्पष्ट होता है कि बाघिन शिकार करना सीख चुकी है। ऐसे में उसे खुले जंगल में छोड़ दिया जाना चाहिए। ताकि, वह जंगल की विपरीत परिस्थितियों में खुद को ढाल सके। </p>
<p><strong>चीतल से नीलगाय तक का किया शिकार</strong><br />टाइग्रेस एमटी-7 अब तक चीतल ही नहीं बल्कि बड़े एनिमल नील गाय का भी शिकार कर चुकी है। जबकि, नील गाय का शिकार आसान नहीं होता है। बाघिन के लगातार शिकार किए जाने से 5 हैक्टेयर के एनक्लोजर में प्रे-बेस की भी कमी होती जा रही है। ऐसे में रिवाइल्डिंग के उद्देश्यों की सफलता के लिए उसे शीघ्र ही खुले जंगल में छोड़ा जाना आवश्यक है। </p>
<p><strong>कैसे सीखेगी शिकार ढूंढना व टेरीटरी बनाना </strong><br />बायोलॉजिस्ट रवि कुमार बताते हैं, पिछले एक साल से बाघिन दरा में 5 हैक्टेयर के सॉफ्ट एनक्लोजर में रह रही है। जहां रिवाइल्डिंग के नाम पर सिर्फ शिकार करना ही सीखा है। लेकिन, शिकार ढूंढना नहीं सीख पा रही है। क्योंकि, सॉफ्ट एनक्लोजर में पहले से ही प्रे-बेस की उपलब्धता सुनिश्चित की जाती है। जबकि, खुले जंगल में ऐसा नहीं होता है। वहां हर दिन चूनौतियों के बीच उन्हें भोजन ढूंढना पड़ता है, जो पिंजरे में कैद होने के कारण इस गुण का विकास नहीं हो पा रहा। वहीं, अनावश्यक देरी से टेरीटरी बनाने में भी उसे परेशानी का सामना करना पड़ेगा।  </p>
<p><strong>तीन साल की उम्र में भी खुला जंगल नसीब नहीं</strong><br />नेचर प्रमोटर एएच जैदी बताते हैं, बाघिन एमटी-7 को पिछले साल दिसम्बर माह में शिफ्ट किया गया था। वर्तमान में उसकी उम्र लगभग 3 साल हो चुकी है। इसके बावजूद वह सॉफ्ट एनक्लोजर से बाहर नहीं निकल सकी। जबकि, इस उम्र के अन्य बाघ-बाघिन खुद को एक्सपोलर करते हैं और मां से अलग होकर अपनी टेरीटरी बनाने के लिए जंगल को सर्च करते हैं। इस बीच कई परिस्थितियों से गुजरने के दौरान बहुत कुछ सीखते हैं, जो जंगल में उनके सरवाइवल रेट को बढ़ाने में मददगार होते हैं। बाघिन को जल्द से जल्द हार्ड रिलीज किया जाना चाहिए।</p>
<p><strong>डब्ल्यूआईआई की टीम पर अटकी शिफ्टिंग</strong><br />बाघिन एमटी-7 की शिफ्टिंग पर फैसला डब्ल्यूआईआई  की टीम द्वारा किया जाना है। लेकिन, टीम का इंतजार 6 माह से हो रहा है, जो अब तक खत्म नहीं हुआ। वन अधिकारियों द्वारा  पूर्व में बारिश से पहले टीम का मुकुंदरा आना बताया जा रहा था, फिर बारिश में जंगल के रास्ते खराब होने का हवाला देते हुए विजिट टाल दी गई। अब अक्टूबर माह के अंतिम सप्ताह में आने की बात कही जा रही है। एनटीसीए की टीम  कब आएगी, इसको लेकर कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी जा रही।</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />अभेड़ा बायोलॉजिलक पार्क से गत वर्ष दिसम्बर माह में  रिवाइल्डिंग के लिए मुकुंदरा में शिफ्ट की गई बाघिन एमटी-7 को खुले जंगल में छोड़े जाने का फैसला इसी माह में होगा। क्योंकि, इसी अक्टूबर माह डब्ल्यूआईआई की टीम मुकुंदरा आने की संभावना है। टीम यहां बाघिन के व्यवहार, शिकार सहित फिजिकल वेरिफिकेशन कर हार्ड रिलीज को लेकर रिपोर्ट देगी। जिसके आधार पर खुले जंगल में छोड़े जाने को लेकर निर्णय होगा। <br /><strong>- सुगनाराम जाट, सीसीएफ मुकुंदरा </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 06 Oct 2025 17:06:18 +0530</pubDate>
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                <title>वार्निंग कॉल से पहले ही शिकार दबोचने का हुनर सीख रहे शावक</title>
                                    <description><![CDATA[मुकुंदरा व रामगढ़ में दोनों शावक अब तक आधा दर्जन वन्यजीवों का कर चुके शिकार।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/cubs-learning-the-skill-of-catching-prey-before-the-warning-call/article-102653"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-01/78-(1)20.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क से रामगढ़ व मुकुंदरा में शिफ्ट किए रणथम्भौर की बाघिन टी-114 के दोनों शावक जंगल की चुनौतिपूर्ण परिस्थितियों में खुद को ढाल रहे हैं। दबे पैर शिकार का पीछा करना, घात लगाना, वार्निंग कॉल मिलने से पहले ही शिकार को धर-दबोचना सहित शिकार करने के तौर-तरीके सीख रहे हैं। वहीं, जंगल के दंगल में संघर्षों को पछाड़ पंजों की पकड़ मजबूत कर रहे हैं। दरअसल, दोनों शावकों ने अब तक आधा दर्जन से अधिक वन्यजीवों का शिकार कर चुके हैं। उनकी प्रोग्रेस देखते हुए रिवाइल्डिंग अपने उद्देश्यों में सफल होती नजर आ रही है। यह प्रदेश की पहली बाघ रिवाइल्डिंग है, जिसे सफल बनाने में वरिष्ठ वन्यजीव चिकित्सक व वन अधिकारियों द्वारा सार्थक प्रयास किए जा रहे हैं। </p>
<p><strong>नील गाय से चीतल तक का किया शिकार</strong><br />रामगढ़ व मुकुंदरा टाइगर रिजर्व के सॉफ्ट एनक्लोर में रह रहे दोनों शावक अब तक आधा दर्जन से अधिक वन्यजीवों का सफलतापूर्वक शिकार कर चुके हैं। वहीं, किल करने के बाद शिकार को झाड़ियों में छिपाना, दबे पैर शिकार पर छलांग लगाने सीख चुके हैं। रामगढ़ में नर शावक ने शिफ्ट होने के तीन दिन बाद ही व्यस्क नील गाय का शिकार कर लिया था। वहीं, मुकुंदरा में मादा शावक ने एक सप्ताह बाद किल किया था। अब तक दोनों शावक नील गाय, चीतल का शिकार कर चुकार चुके हैं। </p>
<p><strong>रिवाइल्डिंग पर है विभाग की पूरी नजर</strong><br />शावकों को रिवाइल्ड कर रहे वरिष्ठ वन्यजीव चिकित्सक डॉ. तेजेंद्र सिंह रियाड़ बताते हैं, दोनों शावक तेजी से जंगल की परिस्थितियों में खुद को ढालना सीख रहे हैं। अब इस स्टेप से आगे दबे पैर  शिकार पर घात लगाना, छलांग लगाने की डिस्टेंस, वन्यजीव को वार्निंग कॉल देकर अन्य जानवरों को खतरे के प्रति आगाज करने का मौका न देना, शिकार खुद का बचाव करना सहित  शिकार कला की अन्य बारीकियां सीखने की प्रोसेज पर आ चुके हैं। इसी तरह प्रोगे्रस रही तो जल्द ही दोनों शावकों को पूरी तरह वाइल्ड में रिलीज किए जाने की संभावना बनेगी।  हालांकि, रिवाइल्डिंग पर पूरी नजर रखी जा रही है।</p>
<p>रेडियोकॉलर व कैमरा ट्रैप से 24 घंटे निगरानी<br />दोनों शावकों के गले पर रेडियोकॉर्लर लगा हुआ है। वहीं, सॉफ्ट एनक्लोजर में पेड़ों पर लगे कैमरा ट्रैप से बाघों की 24 घंटे मॉनिटरिंग की जा रही है। शावकों की हर गतिविधियों पर वन्यजीव चिकित्सक व वन अधिकारियों द्वारा नजर रखी जा रही है। पांच हैक्टेयर के एनक्लोजर में पर्याप्त जगह मिलने से शावक करीब 8 से 10 किमी का मूवमेंट कर रहे हैं। जिससे उनका  शारीरिक विकास तेजी से हो रहा है। </p>
<p><strong>एनक्लोजर में पर्याप्त प्रे-बेस</strong><br />चिकित्सक रियाड ने बताया कि रामगढ़ की जैतपुर रैंज में नर शावक व मुकुंदरा की दरा रैंज में मादा शावक को शिफ्ट किया गया है। दोनों ही जगहों पर प्रे-बेस की पर्याप्त व्यवस्था की गई है। वहीं, 5-5 हैक्टेयर के सॉफ्ट एनक्लोजर को ग्रीन नेट से पूरी तरह से कवर किया गया है। रेडियो कॉर्लर, कैमरा ट्रैप व तीन मंजिला वॉच टॉवर से 24 घंटे निगरानी की जा रही है। साथ ही मानव दखल से बिलकुल दूर व जीरो मॉबिलिटी में सुनिश्चित की गई है। </p>
<p><strong>रिवाइल्डिंग केंद्र बनकर उभरेगा मुकुंदरा</strong><br />उन्होंने बताया कि राजस्थान का यह पहला रिवाइल्डिंग का प्रयास है। सफल हुए तो प्रदेश में कोटा रिवाइल्डिंग केंद्र के रूप में उभरकर सामने आएगा।  प्रदेश के अन्य जंगलों में जहां कहीं भी अनाथ शावक होंगे तो भविष्य में उन्हें कोटा में लगाकर रिवाइल्ड किए जा सकेंगे। वनकर्मी व अधिकारी पूरी शिद्दत से सफल रिवाइल्डिंग में जुटे हैं।  </p>
<p>दोनों शावक पहले अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क में टाइगर के नाइट शेल्टर में थे, जो साइज में काफी छोटे थे। अब इन्हें सेमी वाइल्ड में छोड़ा गया है। इनका प्रदर्शन आशानुसार रही रहा है। इसी तरह चलता रहा शीघ्र ही इन्हें वाइल्ड में छोड़ा जाएगा। <br /><strong>- डॉ. तेजेंद्र सिंह रियाड़, वरिष्ठ वन्यजीव चिकित्सक मुकुंदरा </strong></p>
<p>रिवाइल्डिंग सही दिशा में जा रही है। दोनों शावक अब तक आधा दर्जन से अधिक वन्यजीवों का सफलतापूर्वक शिकार कर चुके हैं। मुकुंदरा में मादा शावक दो चीतल व चार नील गाय का शिकार कर चुकी है। रिवाइल्डिंग मापदंडों के अनुसार इनका प्रदर्शन बेहतर रहा है। आगे भी प्रदर्शन ऐसा ही रहा तो उच्चाधिकारियों के दिशा-निर्देश पर जल्द ही हार्ड रिलीज किया जाएगा। <br /><strong>- रामकरण खैरवा, संभागीय मुख्य वन संरक्षण एवं क्षेत्र निदेशक वन विभाग </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 31 Jan 2025 16:36:45 +0530</pubDate>
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                <title>असर खबर का - 2 साल बाद सलाखों से आजाद होंगे बाघिन टी-114 के दोनों शावक</title>
                                    <description><![CDATA[मुकुंदरा व रामगढ़ टाइगर रिजर्व में होगी रिवाइल्डिंग।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/effect-of-news---both-cubs-of-tigress-t-114-will-be-free-from-the-bars-after-2-years/article-96425"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-12/257rtrer3.png" alt=""></a><br /><p>कोटा । अभेड़ा बॉयोलोजिकल पार्क के पिंजरे में कैद बाघिन टी-114 के दोनों शावकों को आखिरकार 2 साल बाद आजादी मिलेगी।  अब उन्हें मुकुंदरा व रामगढ़ टाइगर रिजर्व में रिलीज किया जाएगा। इसके लिए भारत सरकार के पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय वन्यजीव प्रभाग से आदेश जारी हो चुके हैं। इसमें मादा शावक को मुकंदरा टाइगर रिजर्व तो नर को रामगढ़ टाइगर रिजर्व में रिलीज किया जाएगा। रिलीज से पहले इन दोनों शावकों को रेडियो कॉलर लगाया जाएगा। </p>
<p><strong>5-5 हैक्टेयर के एनक्लोजर में होगी रिवाइल्डिंग</strong><br />दो साल से 3 गुना 3 साइज के पिंजरे (नाइट शेल्टर) में रह रहे शावक अब 5-5 हैक्टेयर के एनक्लोजर  में रहेंगे। जहां उनकी रिवाइल्डिंग की जाएगी। मुकुंदरा के दरा अभयारणय में लगभग पोर्टेबल एनक्लोजर का काम पूरा हो चुका है। वहीं, रामगढ़ टाइगर रिजर्व की जेतपुर रेंज में पहले से ही पोर्टेबल एनक्लोजर बना हुआ है।  जहां दोनों शावक जंगल की परिस्थितियों के मुताबिक खुद को ढाल सकेंगे। </p>
<p><strong>इन शर्तों का करना होगा पालन</strong><br />- रेडियो कॉर्लर व रिलीजिंग का कार्य कड़ाई से राज्य वन विभाग की देखरेख में किया जाएगा।<br />- पकड़ने और छोड़ने के बाद की जटिलताओं से बचने के लिए भी उचित सावधानी बरती जाए। -इस आॅपरेशन के दौरान बाघ शावकों को कम से कम नुकसान पहुंचे। <br />- चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन व राज्य वन विभाग द्वारा रेडियो कॉलरिंग व रिलीजिंग के दौरान और बाद में नियमित निगरानी की जाएगी। <br />- एनटीसी प्रोटोकॉल की पालना सुनिश्चित करनी होगी। सहित अन्य जरूरी निर्देश दिए गए हैं।  </p>
<p><strong>नवज्योति ने लगातार उठाया मामला</strong><br />बाघिन टी-114 के दोनों शावकों को ढाई साल की उम्र में गत वर्ष 1 फरवरी को रणथम्भौर से अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क में शिफ्ट किया गया था। तब, 6 माह बाद मुकुंदरा में शिफ्ट किए जाने के आदेश थे। लेकिन, शिफ्टिंग में लगातार देरी होने के कारण इनके जंगल में सरवाइव करने को लेकर अंदेशा बढ़ने लगा और वन्यजीवों की शिफ्टिंग की मांग उठने लगी। 2 साल तक शावकों की शिफ्टिंग को लेकर फैसला नहीं होने पर दैनिक नवज्योति वन्यजीव प्रेमियों की आवाज बना और वाइल्ड लाइफ एक्सपर्ट के नजरिए से लगातार खबरें प्रकाशित कर वन अधिकारियों को शिफ्टिंग में अनावश्यक देरी से रिवाइल्डिंग में बढ़ती चुनौतियां, शावकों का व्यवहार, जंगल में सरवाइवल, शिकार की कला, जंगल की विषम परिस्थितियों में खुद को ढालने को लेकर संशय सहित अन्य चुनौतियों पर ध्यान आकर्षित किया था। </p>
<p><strong>17 को खबर छपी, 26 को आदेश हो गए</strong><br />दैनिक नवज्योति ने हाल ही में 17 नवम्बर को हुक्मदारों के दोहरे नजरिए में फंसी बाघों की तक्दीर... शीर्षक से खबर प्रकाशित कर   2 साल के बाघ को शावक मानना और सरिस्का के ढाई साल के एसटी 2303 को सब एडल्ट मान रामगढ़ टाइगर रिजर्व  में शिफ्ट करने पर एक ही ऐज कैटेगिरी के शावकों के प्रति दोहरा रवैया अपनाने को लेकर विशलेषणात्मक व तथ्यात्मक खबर प्रकाशित की थी। इसके बाद 26 नवम्बर को दोनों शावकों की शिफ्टिंग के आदेश जारी हो गए। हालांकि नवज्योति, अगस्त 2023 से ही लगातार शावकों की रिवाइल्डिंग के लिए पांच हैक्टेयर के एनक्लोजर में शिफ्ट किए जाने की आवाज उठाता रहा है। आखिरकार नवज्योति के प्रयास रंग लाए और 3 गुणा 3 के छोटे पिंजरे से आजादी मिल सकेगी। </p>
<p><strong>अब मुकुंदरा में हो जाएंगे तीन बाघ </strong><br />मादा शावक के मुकुंदरा में शिफ्ट होने के साथ ही यहां बाघों की संख्या 2 से बढ़कर 3 हो जाएगी। यहां नर बाघ एमटी-5 व बाघिन एमटी-6 विचरण कर रही है। वहीं, नर शावक के आने से रामगढ़ टाइगर रिजर्व में बाघों की संख्या 5 से बढ़कर 6 हो जाएगी। </p>
<p>अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क में पल रहे दोनों शावकों की शिफ्टिंग को लेकर आदेश जारी हो चुके हैं। मुकुंदरा व रामगढ़ टाइगर रिजर्व  के डीएफओ से इस संबंध में बात हो चुकी है। दोनों अधिकारियों के कहने पर अभेड़ा से शावकों को शिफ्ट कर दिया जाएगा। हमारी तरफ से तैयारियां पूरी है।<br /><strong>- अनुराग भटनागर, उपवन संरक्षक, वन्यजीव विभाग कोटा </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 02 Dec 2024 15:08:35 +0530</pubDate>
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                <title>रिवाइल्डिंग पर उठ रहे सवाल - हुक्मदारों के दोहरे नजरिए में फंसी बाघों की तकदीर</title>
                                    <description><![CDATA[अभेड़ा के दोनों बाघों को शावक मान पिंजरे में किया कैद। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/questions-being-raised-on-rewilding---fate-of-tigers-stuck-in-double-standards-of-officials/article-95268"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-11/27rtrer-(2)5.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। वन विभाग के हुक्मदारों के दोगले रवैये व नजरिए में बाघों की तकदीर ऐसी फंस की जिंदगी आजादी को तरस गई। एक तरफ सरिस्का के बाघ एसटी-2303 को सब-एडल मान हरियाणा से रामगढ़ शिफ्ट कर दिया। वहीं, दूसरी ओर अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क में रह रहे दोनों बाघों को 2 साल बाद भी शावक मान 3 गुना 3 के पिंजरे में रख जिंदगी बर्बाद की जा रही है। हैरत की बात यह है, सब कुछ जानते हुए भी जिम्मेदार खामोश है। इधर, वन्यजीव प्रेमियों में भी दोनों बाघों के नसीब को लेकर बहस छिड़ गई। </p>
<p><strong>ढाई साल की उम्र में सरिस्का बाघ को मिली रामगढ़ की सल्तनत</strong><br />सरिस्का का बाघ एसटी-2303 की उम्र करीब ढाई से तीन साल के बीच है, जिसे वन अधिकारियों ने सब-एडल मान रामगढ़ टाइगर रिजर्व में शिफ्ट कर दिया। लेकिन, अभेड़ा के दोनों बाघ को 2 साल की उम्र के बाद भी शावक मान पिंजरे में कैद रखा जा रहा। जबकि, बायोलॉजिस्ट के अनुसार, साढ़े 3 साल तक की उम्र के टाइगर सब-एडल की श्रेणी में आते हैं। ऐसे में एक ही कैटेगिरी के बाघों में भेदभाव वन विभाग के हुक्मदारों की कथनी और करनी को दर्शाता है। </p>
<p><strong>कमेटी के प्रस्तावों को नहीं दी तवज्जो</strong><br />एनटीसीए द्वारा गठित कमेटी दर्जनों बारा शावकों को दरा के 28 हैक्टेयर एनक्लोजर में शिफ्ट करने के प्रस्ताव मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक को भेज चुकी है।  जिसे हर बार दरकिनार कर दिया गया। कमेटी में शामिल बाघ विशेषज्ञों का कहना है, दोनों बाघ दो साल के हो चुके हैं। ऐसे में इन्हें शावक नहीं माना जा सकता। जबकि, रणथम्भौर में 2 साल के बाघ को सब एडल मानते हुए नई आईडी दे दी जाती है और वह अपनी  टेरिटरी की खोज में जुट जाता है। लेकिन, अभेड़ा के दोनों बाघों को अब भी शावक माना जा रहा है, जो गलत है।  </p>
<p><strong>इधर, आजादी को तरसे, उधर, हरियाणा तक घूमा</strong><br />अभेड़ा के दोनों बाघ 3 गुणा 3 साइज के पिंजरे में जिंदगी काट रहे हैं। 2 साल से अपनी आजादी को तरस रहे हैं। जबकि, इस उम्र के बाघ जंगल में अपनी टेरीटरी की खोज में 20 से 25 किमी तक प्रतिदिन मूवमेंट करते हैं। जिसका उदारहण बाघ एसटी-2303 है। वह सरिस्का से हरियाणा तक मूवमेंट कर रहा था। इस उम्र के बाघ सब-एडल की श्रेणी में आते हैं और खुद को एक्सप्लोर करते हैं। लेकिन, पिंजरों में कैद कोटा के दोनों बाघ अब भी शावक बनाकर उनकी जिंदगी से खिलवाड़ किया जा रहा है।  </p>
<p><strong>रिवाइल्डिंग के नाम पर कर रहे कू्ररता</strong><br />अभेड़ा के दोनों बाघों को 3 गुना 3 के पिंजरे में रख उनके साथ कू्ररता की जा रही है। भारतीय क्रूरता अधिनियम के तहत इन्हें बहुत गलत तरीके से रखा जा रहा है। इससे बाघ तनाव में रहते हैं। जंगल में जीवन जीने के गुण नहीं सीख पा रहे। लंबे समय तक बंद कमरे में रहने से उनकी हड्डियां व मसल्स का विकास अवरूद्ध होगा। जंगल की विपरित परिस्थतियों में खुद को ढालना, दौड़ना, घात लगाना, दूसरे जानवरों से खुद को बचाना सहित शिकार करने की कला नहीं सीख पाएंगे। इन्हें लंबे समय से एक ही तरह का भोजन दिया जा रहा है जबकि, शरीर के पूर्व विकास के लिए भोजन में विभिन्नता होनी जरूरी है, जो जंगल में मिल सकती है, पिंजरे में नहीं।<br /><strong>- डॉ. अखिलेश पांड्य, वरिष्ठ पशु चिकित्सक कोटा </strong></p>
<p>दो साल की उम्र के शावक सब-एडल की श्रेणी में आ जाते हैं। इस उम्र के शावकों को रणथम्भौर में नई आईडी दे दी जाती है। पिंजरे में रहने से यह शिकार करना नहीं सीख पाएंगे। चलने-फिरने की जगह नहीं होने से भोजन ठीक से पच नहीं पाएगा। जिससे पेट संबंधित बीमारियां हो सकती है। बॉडी में फेट बढ़ने से लीवर खराब हो सकता है। रणथम्भौर के बाघ टी-104 की मौत भी लीवर फेल होने की वजह से उदयपुर के सज्जनगढ़ में हुई थी। इन्हें जल्द से जल्द बड़े एनक्लोजर में शिफ्ट किया जाना चाहिए। जंगल में टेरिटोरियल फाइट व टेरिटोरियल मार्किंग करना भी नहीं सीख पाएगा।<br /><strong>- हरिमोहन मीणा, वन्यजीव एक्सपर्ट, रणथम्भौर टाइगर रिजर्व</strong></p>
<p>चिड़ियाघर में बाघ शिफ्ट करना सरल उपाए है लेकिन जंगल में छोड़ा जाना चुनौतिपूर्ण है। हम यह चुनौति स्वीकार करते हैं और अंतिम क्षण तक हम रिवाइल्डिंग करेंगे। मुकुंदरा में मादा शावक के लिए 6 हैक्टेयर का एनक्लोजर तैयार किया जा रहा है और रामगढ़ में नर शावक के लिए 5 हैक्टेयर का एनक्लोजर है। जल्द ही इन्हें शिफ्ट किया जाएगा। <br /><strong>- रामकरण खैरवा, सीसीएफ कोटा</strong></p>
<p>अभी शावकों को छोड़े जाने के आदेश नहीं हुए हैं। प्रक्रिया चल रही है। भारत सरकार ने कुछ जानकारी मांगी है, जिसका जवाब दे रहे हैं। इसके बाद परमिशन मिलने पर शिफ्टिंग का काम होगा। <br /><strong>- पीके उपाध्याय, प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक</strong></p>
<p><strong>एक्सपर्ट व्यू</strong><br />जंगल में अब इनका कोई भविष्य नहीं है। अब इन्हें चिड़ियाघर में ही रखा जाना चाहिए। यदि, इन्हें रिवाइल्डिंग करनी ही थी तो एक साल पहले करनी चाहिए थी। जबकि, कोटा इसके लिए मुफीद था, क्योंकि यहां दरा में 84 हैक्टेयर का एनक्लोजर है। जिसमें रिवाइल्डिंग बेहतर तरीके से हो सकती थी, लेकिन अच्छा अवसर खो दिया है। चूंकी, यह दो साल के हो चुके हैं, अब यह शावक रिवाइल्ड नहीं हो सकते। इस बारे में सोचना ही बेकार है। क्योंकि, जंगल में सरवाइव के लिए मानव से भय होना जरूरी है। यदि, इंसान से डरेगा नहीं तो उसकी ओर आकर्षित होगा। जिससे इंसान-वन्यजीव में संघर्ष बढ़ेगा। शिकार करने की कला सीख लेनी चाहिए थी, जो अब तक सीखा नहीं पाए। सबसे बड़ी बात है इंसान के साथ कैसा बर्ताव या व्यवहार करना चाहिए, यह मां ही सिखाती है लेकिन इनकी मां नहीं है। ऐसे में वो चीज यह नहीं सीख पाए और कोई इन्हें सीखा भी नहीं सकता। बरहाल, दोनों शावक मानसिक रूप से जंगल में रहने को प्रिपेयर नहीं हो पाए। ऐसे में रिवाइल्डिंग करना उचित नहीं है, चिड़ियाघर में रखा जाना ही सही होगा।<br /><strong>- धर्मेंद्र खंडाल, बायोलॉजिस्ट, टाइगर वॉच संस्था, सवाईमाधोपुर</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 18 Nov 2024 15:41:39 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>मादा शावक रिवाइल्डिंग की तैयारियां जारी</title>
                                    <description><![CDATA[अभेड़ा बायोलॉजिक पार्क में रह रहे शावकों में से मादा शावक को शिफ्ट कर रिवाइल्डिंग की जाएगी। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/preparations-for-rewilding-of-female-cub-continue/article-92880"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-10/6633-copy25.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क में पल रही बाघिन टी-114 की मादा शावक की रिवाइल्डिंग अब प्रदेश के तीसरे पोर्टेबल एनक्लोजर में होगी। 60 लाख रुपए की लागत से मुकुंदरा के दरा अभयारणय में पोर्टेबल एनक्लोजर का निर्माण कार्य शुरू हो गया है। यहां नींव खोदना, साफ-सफाई तथा स्ट्रेक्चर तैयार किए जाने सहित अन्य कार्य तेजी से चल रहे हैं। एनक्लोजर बनने के बाद अभेड़ा से मादा शावक को यहां शिफ्ट किया जाएगा।  हालांकि, एनक्लोजर का निर्माण कार्य अगस्त माह में होना था लेकिन बारिश के कारण कार्य शुरू नहीं हो पाया था। यह एनक्लोजर दरा अभयारणय में 5 हैक्टेयर में बनाया जाएगा। बता दे, मुकुंदरा में बनने वाला पोर्टेबल एनक्लोजर प्रदेश का तीसरा एनक्लोजर होगा। इससे पहले अलवर के सरिस्का और बूंदी के रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व में बनाया गया है। </p>
<p><strong>5 हैक्टेयर में बन रहा पोर्टेबल एनक्लोजर</strong><br />मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व के उप वन संरक्षक मुथू एस ने बताया कि दरा अभयारणय में 38 हैक्टेयर का एनक्लोजर है। जिसमें 5 हैक्टेयर का अलग से पोर्टेबल एनक्लोजर बनाया जा रहा है। इसके लिए पूर्व में ही टैंडर प्रक्रिया कर दी गई थी। बारिश के कारण कार्य में देरी हुई। अब इससे बनने के बाद अभेड़ा बायोलॉजिक पार्क में रह रहे शावकों में से मादा शावक को शिफ्ट कर रिवाइल्डिंग की जाएगी। </p>
<p><strong>नया एनक्लोजर बनाने की नहीं पड़ेगी जरूरत   </strong><br />पोर्टेबल एनक्लोजर के कई फायदे हैं। रिवाइल्डिंग के बाद जब मादा शावक को हार्ड रिलीज कर दिया जाएगा तो इस एनक्लोजर को एक जगह से दूसरी जगह शिफ्ट कर भविष्य में आने वाले अन्य टाइगर को रखने के काम आ सकेगा। साथ ही सरकार को नया एनक्लोजर बनाने के लिए अतिरिक्त पैसा खर्च नहीं करना पड़ेगा। वहीं, दूसरी रेंजों में आवश्यकतानुसार पोर्टेबल एनक्लोजर को शिफ्ट करने में आसानी होगी।  </p>
<p><strong>मादा शावक की होगी रिवाइल्डिंग </strong><br />दरा सेंचुरी में 5 हैक्टेयर में बनने वाले पोर्टेबल एनक्लोजर में मादा शावक की रिवाइल्डिंग की जाएगी। जिसमें एक्सपर्ट्स की मदद भी ली जाएगी। शावक को लाइव शिकार दिए जाएंगे। शिकारी को शिकार के पीछे दौड़ने, घात लगाने, एक-दो किमी मूवमेंट करने के लिए पर्याप्त जगह मिल सकेगी। जिससे वह शिकार  की कला और बारीकी सीख पाएगी। वर्तमान में शावकों को बायोलॉजिकल पार्क में टाइगर के नाइट शेल्टर में रखा जा रहा है। जहां जगह की तंगी होने के कारण रिवाइल्डिंग के उद्देश्य पूर्ण नहीं हो रहे। </p>
<p><strong>नर शावक होगा रामगढ़ शिफ्ट</strong><br />बायोलॉजिकल पार्क से नर शावक को रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व में शिफ्ट किया जाएगा। उसे जैतपुर रेंज में 5 हैक्टेयर के पोर्टेबल एनक्लोजर में रखा रखा जाएगा। गत 5 मई को मुकुंदरा के दौरे पर आए चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन पीके उपाध्याय द्वारा शावकों की शिफ्टिंग को लेकर निर्णय किया गया था। जिसके तहत मेल शावक को रामगढ़ व फीमेल शावक को मुकुंदरा के दरा में शिफ्ट किए जाने का निर्णय हुआ था। </p>
<p><strong>नवज्योति ने लगातार उठाया था मुद्दा</strong><br />शावकों को टाइगर रिजर्व में शिफ्ट किए जाने का मामला नवज्योति लगातार उठाती रही है। बायोलॉजिकल पार्क में जगह की तंगी की वजह से रिवाइल्डिंग अपने उद्देश्य से भटक रही है। नवज्योति ने वन्यजीव प्रेमियों व वाइल्ड लाइफ एक्सपर्ट्स के माध्यम से शिफ्टिंग में अनावश्यक देरी से शावकों पर पड़ने वाले असर से वन अधिकारियों का ध्यान आकर्षित किया था। नवज्योति में लगातार खबरें प्रकाशित होने पर सीडब्ल्यूएलडब्ल्यू ने कोटा प्रवास के दौरान शिफ्टिंग को लेकर निर्णय किया था। </p>
<p>मुकुंदरा की दरा रेंज में 5 हैक्टेयर में पोर्टेबल एनक्लोजर का निर्माण कार्य शुरू हो गया है। पहले बारिश के कारण काम रुक गया था। जल्द ही यह एनक्लोजर बनकर तैयार हो जाएगा। <br /><strong>-मूथू एस, उप वन संरक्षक, मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 12 Oct 2024 14:31:34 +0530</pubDate>
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                <title>रिवाइल्डिंग के नाम पर शावकों की जिंदगी बर्बाद </title>
                                    <description><![CDATA[एनटीसीए द्वारा गठित कमेटी दोनों शावकों को एनक्लोजर में शिफ्ट करने का चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन को साढ़े पांच माह पहले ही प्रस्ताव भेज चुकी है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/lives-of-cubs-ruined-in-the-name-of-rewilding/article-64072"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-12/tiger1.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क में पल रहे बाघिन टी-114 के दोनों शावक 13 माह से ज्यादा उम्र के हो चुके हैं। इसके बावजूद इन्हें दरा अभयारण्य के 28 हैक्टेयर के एनक्लोजर में शिफ्ट नहीं किया गया। वन अधिकारियों की उपेक्षा से शावकों की रिवाइल्डिंग सवालों के घेरे में आ गई। वहीं, वन्यजीव प्रेमियों में शावकों के नसीब पर बहस छिड़ गई। विशेषज्ञों का मत है, रिवाइल्डिंग के नाम पर वन विभाग का टॉप मैनेजमेंट शावकों की जिंदगी बर्बाद करने पर तुला है। जबकि,  एनटीसीए द्वारा गठित कमेटी दोनों शावकों को एनक्लोजर में शिफ्ट करने का चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन को साढ़े पांच माह पहले ही प्रस्ताव भेज चुकी है। इसके बावजूद इनके भविष्य पर निर्णय नहीं लिया गया। </p>
<p><strong>बाघ टी-104 की तरह शावकों की बेकद्री </strong><br />वन्यजीव प्रेमियों का कहना है, रणथम्भौर के बाघ टी-104 की तरह कोटा में शावकों की बेकद्री की जा रही है। जिस तरह टी-104 को ढाई साल तक पिंजरे में रखा फिर अचानक उदयपुर सज्जनगढ़ बायोलॉजिकल पार्क में शिफ्ट करते ही उसकी मौत हो गई। कहीं, अभेड़ा में शावकों के साथ भी यहीं कहानी न हो जाए। ऐसे में वन विभाग को तुरंत शावकों के चिड़िया घर में रहने या जंगल में छोड़े जाने पर निर्णय लेने की आवश्यकता है। निश्चित समय गुजरने के बाद शावकों की दरा में शिफ्टिंग खतरे से खाली नहीं होगी। </p>
<p><strong>मेल शावक का 100 तो फिमेल का वजन 85 किलो </strong><br />अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क से मिली जानकारी के अनुसार दोनों शावकों का तेजी से वजन बढ़ रहा है। मेल शावक का वजन 100 किलो से ज्यादा चल रहा है, वहीं फिमेल शावक करीब 85 किलो की हो चुकी है। वहीं, 13 महीने से ज्यादा की उम्र होने से उनके रहने की जगह छोटी पड़ रही है। उन्हें 25 गुणा 25 साइज के कमरे और कराल में रखा जा रहा है। ऐसे में उनके चलने फिरने के लिए जगह की तंगी बनी हुई है। जबकि, इस उम्र का शावक जंगल में 10 से 15 किमी मूवमेंट करता है, लेकिन यहां इतना चलना नहीं होता।जिससे शारीरिक विकार उत्पन्न होने की संभावना बनी रहती है।</p>
<p><strong>एक्सपर्ट व्यू... अखिलेश पांडे, वरिष्ठ पशुचिकित्स</strong><br /><strong>अब जंगल में छोड़ा जाना उचित नहीं</strong><br />टाइगर के दोनों शावकों को अब जंगल में छोड़ा जाना उचित नहीं है। क्योंकि, यह जंगल में खुद को सरवाइव करने में सक्षम नहीं होंगे। शुरुआती जीवन का अधिक समय चिड़ियाघर में ही बित गया। जबकि, यह समय जंगल की परिस्थितियों को सीखने-समझने का था, जो व्यर्थ गुजर गया। 25 गुणा 25 के कमरे में बकरा व मुर्गा छोड़ रहे हैं, जिसका शिकार के लिए उन्हें मेहनत नहीं करनी पड़ती। नतीजन, शिकार की कला- घात लगाना, शिकार के पीछे दौड़ना, छलांग लगाना, जानवरों का व्यवहार व प्रवृति समझना, गड्ढ़ों को पार करना, टेरिटरी मार्क करना सहित कई चुनौतियों से रुबरू नहीं हो पाए।  इस उम्र के शावक जंगल में 10 से 15 किमी 24 घंटे में मूवमेंट करते हैं, जिससे उनकी मांसपेशियां व हड्डियां मजबूत होती है। जबकि, पिंजरे में 50 मीटर भी नहीं चल पाते। जिससे शरीर में विकार उत्पन्न होने का खतरा है। रोजाना भोजन मिलने से वे आलसी होंगे,जबकि जंगल में हर दिन भोजन नहीं मिलता, उन्हें दौड़भाग करनी पड़ती है। </p>
<p><strong>शिकार की कला से दूर...</strong><br />नाम न छापने की शर्त पर वन अधिकारियों ने बताया कि बायोलॉजिकल पार्क में रिवाइल्डिंग के नाम पर खानापूर्ति की जा रही है। शावकों के कमरानुमा पिंजरे में एक दिन छोड़कर एक दिन 10 से 15 किलो का बकरा (लाइव शिकार) खुला छोड़ देते हैं। ऐसे में शिकार को खुद की जान बचाने के लिए न तो दौड़ने की जगह मिल पाती है और न ही शिकार के पीछे भागने के लिए शावकों को मेहनत करनी पड़ती है। जबकि, जंगल में भोजन के लिए हर दिन संघर्ष करना पड़ता है।  वे शिकार की कला सीख पा रहे। ऐसे में उनके जंगल में सरवाइव करने की संभावना न के बराबर है।</p>
<p><strong>इनका कहना</strong><br />मेल टाइगर का वजन 100 के ऊपर चल रहा है और फिमेल 80 के करीब है। इन्हें लाइव शिकार दिया जा रहा है। चिड़ियाघर के अन्य जानवरों की तरह इनके लिए सर्दी से बचाव के कोई विशेष इंतजाम नहीं किए है। क्योंकि, देर सवेर जंगल में ही छोड़ा जाना है,हालांकि इनके नाइट शेल्टर में पराल बछाई गई है। <br /><strong>- डॉ. तेजेंद्र रियाड़, वरिष्ठ वन्यजीव चिकित्सक, मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व</strong></p>
<p>कमेटी के सभी सदस्यों ने पूर्व में शावकों को दरा वनक्षेत्र में 28 हैक्टेयर के एनक्लोजर में छोड़े जाने पर सहमति जताई थी। इस संबंध में उच्चाधिकारियों से मार्गदर्शन प्राप्त करने के लिए प्रस्ताव भेजा गया है।<br /><strong>- सुनील गुप्ता, उप वन संरक्षक, वन्यजीव विभाग कोटा </strong></p>
<p><strong>क्या कहते हैं विशेषज्ञ</strong><br />उम्र के हिसाब से बायोलॉजिकल पार्क में शावकों के लिए जगह कम पड़ रही है। यहां शिकार करने की कला नहीं सीख पा रहे। वहीं, जंगल की चुनौतियों से भी अनजान है। शिफ्टिंग से वे जंगल के प्राकृतिक आवास में ढल नहीं पाएंगे। इनका सर्वार्गिंण विकास के लिए इनकी शिफ्टिंग बेहद जरूरी है।  <br /><strong>- दौलत सिंह, वाइल्ड लाइफ एक्सपर्ट</strong></p>
<p>शिफ्टिंग में देरी से शावक जंगली जीवन में रहने में सक्षम नहीं होंगे। वाइल्ड में इनका सरवाइव करना मुश्किल है। पार्क में शिकार के नाम पर बकरा ही दिया जा रहा जबकि, यह जंगल में नहीं मिलेगा। ऐसे में इन्हें अपने शिकार व संभावित खतरों को पहचानने में दिक्कत होगी। जंगल की स्किल सीख सके इसके लिए यथाशीघ्र सॉफ्ट रिलीज करना जरूरी है।  <br /><strong>- नागेंद्र सिंह राणावत, वाइल्ड लाइफ रिसर्चर</strong></p>
<p>रिवाइल्डिंग के लिए इन्हें दरा एनक्लोजर में शिफ्ट करना जरूरी है। इससे पहले वहां  चीतल छोड़े जाएं। ऐसे में शावक शिकार करने की कला सीखेंगे और उनका व्यवहार समझ पाएंगे। चीतल की स्पीड मैनेज करने में सक्षम हो जाएंगे। यह प्रक्रिया 6 से 8 माह तक जारी रहे। जब यह जंगल में रहने लायक हो जाए तो  रेडियोकॉर्लर लगाकर हार्ड  रिलीज कर सकते हैं लेकिन 24 घंटे मॉनिटरिंग जरूरी है। <br /><strong>- रविंद्र नागर, वाइल्ड लाइफ रिसर्चर</strong></p>
<p>उम्र के साथ तेजी से वेट बढ़ रहा है। इन्हें चलने फिरने के लिए पर्याप्त जगह नहीं मिल पा रही। पिंजरानुमा कमरे में रहने से इनके चलने फिरने के अंग विकसित नहीं हो पाएंगे। शिफ्टिंग में देरी से यह न तो चिड़ियाघर के रह पाएंगे और न ही जंगल में खुद को ढाल पाएंगे। अभी, भी वक्त है अधिकारियों को तुरंत निर्णय कर इन्हें एनक्लोजर में छोड़ दिया जाना चाहिए।  <br /><strong>- डॉ. सुधीर गुप्ता, वाइल्ड लाइफ एक्सपर्ट</strong></p>
<p>एक कमरे में रिवाइल्डिंग संभव नहीं है। तीन साल तक उन्हें दरा के एनक्लोजर में छोड़ा जाए ताकि उनमें प्राकृतिक शिकार की प्रवृति बढ़ सके। यहां रिवाइल्डिंग में अधिकारियों द्वारा लापरवाही बरती जा रही है, एनटीसीए को पत्र भेज प्रोटोकॉल की पालना सुनिश्चित करवाने का अनुरोध करेंगे। वजन बढ़ने से शावकों में विकार उत्पन्न होंगे। इम्यूनिटी कमजोर होने से उनकी लाइफ लाइन घटने की संभावना है। <br /><strong>- अजय दुबे, वाइल्ड लाइफ एक्टिविस्ट, भोपाल</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 13 Dec 2023 16:43:06 +0530</pubDate>
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                <title>आजादी को तरसे शावक, 9 माह से पिंजरे में काट रहे जीवन</title>
                                    <description><![CDATA[रिवाइल्डिंग के नाम पर बायोलॉजिकल पार्क में शावकों को एक कमरेनुमा पिंजरा व इसी साइज की कराल में रखा जा रहा है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/cubs-yearn-for-freedom-living-in-cage-for-9-months/article-58646"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-10/azadi-ko-tarse-shavak,-9-maah-s-pinjre-me-kaat-rhe-jivan...kota-news-03-10-2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क में पल रहे बाघिन टी-114 के दोनों शावक 11 माह के हो चुके हैं। लेकिन, इन्हें अभी तक भी दरा अभयारण्य के 28 हैक्टेयर के एनक्लोजर  में शिफ्ट नहीं किया गया। जिससे शावकों की रिवाइल्डिंग पर प्रश्नचिन्ह खड़े हो गए।  वहीं, वन्यजीव प्रेमी शावकों के चिड़ियाघर के जानवर बनकर न रह जाने को लेकर आशंकित हैं।  जबकि, गत माह एनटीसीए द्वारा गठित कमेटी दोनों शावकों को दरा एनक्लोजर में शिफ्टिंग पर सहमति जता चुकी है और चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन को जुलाई माह में प्रस्ताव भी भिजवाए दिए, इसके बावजूद स्वीकृति नहीं मिलने से इन शावकों के भविष्य पर सवाल खड़े हो गए। </p>
<p><strong>दो बार प्रस्ताव भेजे, फिर भी निर्णय नहीं</strong><br />शावकों की मॉनिटरिंग के लिए एनटीसीए द्वारा गठित कमेटी की 13 जुलाई को अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क में बैठक हुई थी। जिसमें कमेटी सदस्यों ने स्वीकार किया था कि दोनों शावक बड़े हो चुके हैं और वजन भी तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में बायोलॉजिकल पार्क का पिंजरा व कराल छोटी पड़ रही है, उनके चलने फिरने के लिए जगह की तंगी बनी हुई है। ऐसे में कमेटी ने सर्वसहमति से शावकों को दरा के 28 हैक्टेयर के एनक्लोजर में शिफ्ट किए जाने का निर्णय किया था। जिसके प्रस्ताव चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन अरविंदम तोमर को भेजे लेकिन तवज्जों नहीं दी गई। इसके बाद 25 अगस्त को हुई बैठक में फिर से शिफ्टिंग प्रस्ताव का रिमाइंडर भेजा। इसके बावजूद इस संबंधित कोई निर्णय नहीं हुआ।  </p>
<p><strong>न शिकार के बचने और न शिकारी के दौड़ने की जगह</strong><br />वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, रिवाइल्डिंग के नाम पर बायोलॉजिकल पार्क में शावकों को एक कमरेनुमा पिंजरा व इसी साइज की कराल में रखा जा रहा है। जिनके सामने 13 से 15 किलो का बकरा (लाइव शिकार) खुला छोड़ देते हैं। ऐसे में शिकार को खुद की जान बचाने के लिए न तो दौड़ने की जगह मिल पाती है और न ही शिकार के पीछे भागने के लिए शावकों को मेहनत करनी पड़ती है। वहीं, घात लगाकर शिकार करने के लिए उन्हें छिपने की जगह मिलती है। जबकि, जंगल में भोजन के लिए हर दिन संघर्ष से गुजरना होता है। ऐसी स्थिति में वे न तो शिकार की कला सीख पा रहे और नहीं जंगल की चुनौतियों से रूबरू हो रहे। </p>
<p><strong>...तो चिड़ियाघर के जानवर बनकर रह जाएंगे शावक</strong><br />बाघिन टी-114 की मौत के बाद रणथम्भौर से दोनों शावकों को गत 1 फरवरी को अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क में शिफ्ट किया गया था। उस समय इनकी उम्र करीब दो से ढाई माह की थी। तब उच्चाधिकारियों ने इन्हें 6 माह रिवाइल्ड कर मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व के दरा एनक्लोजर में छोड़ने का हवाला दिया गया था। लेकिन, निर्धारित अवधी बीतने के बाद दो माह का समय और बढ़ाकर बायोलॉजिकल पार्क में रखे जाने के आदेश हुए, वह समय भी बीत गया। इसके बावजूद इनकी शिफ्टिंग पर निर्णय नहीं हुआ। वन्यजीव प्रेमियों ने आशंका जताई है कि शिफ्टिंग में देरी से दोनों शावक चिड़ियाघर के जानवर बनकर रह जाएंगे। </p>
<p><strong>मेल शावक 80 तो फिमेल शावक का वजन 60 किलो </strong><br />अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क से मिली जानकारी के अनुसार दोनों शावकों का तेजी से वजन बढ़ रहा है। मेल शावक का करीब 80 तो फिमेल शावक का वजन 60 किलो के लगभग हो चुका है। वहीं, 11 महीने से ज्यादा की उम्र हो चुकी है। जबकि, उन्हें 25 गुणा 25 साइज के कमरे और कराल में रखा जा रहा है। ऐसे में उनके चलने फिरने के लिए जगल की तंगी बनी हुई है।  जिससे उनके लोको मोटर सिस्टम प्रभावित होने की आशंका बनी रहती है।</p>
<p><strong>क्या कहते हैं वन्यजीव प्रेमी</strong><br />शावकों को दरा एनक्लोजर में शिफ्ट किए जाने का यह सही समय है। शिफ्टिंग में देरी से रिवाइल्डिंग का उद्देश्य पूर्ण नहीं हो सकेगा।  इन्हें सप्ताह में एक दिन मंगलवार को ही टाइगर के एनक्लोजर में छोड़ते हैं, जो पर्याप्त नहीं है। जबकि, इस उम्र के शावक जंगल में प्रतिदिन 15 से 20 किमी मूवमेंट करते हैं। वन विभाग को इस संबंध में जल्द निर्णय करना चाहिए।<br /><strong>- एएच जैदी, नेचर प्रमोटर</strong></p>
<p>लंबे समय तक चिड़ियाघर में रहने से शावकों की प्रवृति प्रभावित होगी। वर्तमान में पिंजरे में ही उन्हें शिकार दिया जाता है, जिसे किल करने के लिए उन्हें मेहनत नहीं करनी पड़ती। ऐसे में  वे आराम करने के  आदी हो जाएंगे। जबकि, यह व्यवस्था जंगल की परिस्थिति से बिलकुट उलट है। ऐसे में देरी से उन्हें जंगल में अपने शिकार व संभावित खतरों को पहचानने में दिक्कत होगी।  <br /><strong>- देवव्रत सिंह हाड़ा, संस्थापक, पगमार्क फाउंडेशन</strong></p>
<p>अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क में गत माह कमेटी की बैठक हुई थी। जिसमें कमेटी सदस्यों ने शावकों को दरा वनक्षेत्र के 28 हैक्टेयर के एनक्लोजर में छोड़े जाने पर सहमति जताई। इस संबंध में उच्चाधिकारियों को प्रस्ताव भी भेजे गए हैं, वहां से जो भी निर्णय होगा उसके अनुरूप कार्य करेंगे। <br /><strong>- सुनील गुप्ता, उप वन संरक्षक, वन्यजीव विभाग कोटा </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 03 Oct 2023 16:13:11 +0530</pubDate>
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                <title>एक दिन की आजादी और 6 दिन सलाखों की बंदिश में शावक</title>
                                    <description><![CDATA[अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क से मिली जानकारी के अनुसार दोनों शावकों का तेजी से वजन बढ़ रहा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/one-day-of-freedom-and-6-days-of-cubs-behind-bars/article-56925"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-09/ek-din-ki-azadi-or-6-din-ki-bandish-me-shavak...kota-news-12-09-2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क में पल रहे बाघिन टी-114 के दोनों शावकों की उम्र 10 माह से ज्यादा की हो चुकी है।  इसके बावजूद वन विभाग इनकी शिफ्टिंग को लेकर कोई फैसला नहीं कर सका। जबकि, एनटीसीए द्वारा गठित कमेटी दोनों शावकों की दरा अभयारणय के 28 हैक्टेयर के एनक्लोजर में शिफ्ट करने पर सहमति जता चुकी है और चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन को जुलाई व अगस्त माह में दो बार प्रस्ताव भी भिजवाए जा चुके हैं, इसके बावजूद स्वीकृति नहीं मिलने से इन शावकों की रिवाइल्डिंग पर प्रश्नचिन्ह खड़े हो गए।  दरअसल, शावक टाइगर के नाइट शेल्टर में करीब 10 माह से रह रहे हैं। उम्र व वजन बढ़ने के साथ उन्हें दौड़भाग के लिए बड़ी जगह की जरूरत है, जो उन्हें नहीं मिल पा रही। इसकी वजह से शावकों का लोको मोटर सिस्टम प्रभावित होने की आशंका बनी हुई है। हालांकि, वन्यजीव विभाग की ओर से सप्ताह में एक दिन दोनों शावकों को टाइगर के एनक्लोजर में खुला छोड़ा जा रहा है। लेकिन इससे रिवाइल्डिंग का उद्देश्य पूरा नहीं हो सकता।  </p>
<p><strong>कमरेनुमा पिंजरे में कट रही जिंदगी </strong><br />अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क से मिली जानकारी के अनुसार दोनों शावकों का तेजी से वजन बढ़ रहा है। मेल शावक का 70 तो फिमेल शावक का वजन 52 किलो हो चुका है। वहीं, 10 महीने से ज्यादा की उम्र हो चुकी है। जबकि, उन्हें 25 गुणा 25 साइज के कमरे और कराल में रखा जा रहा है। ऐसे में उनके चलने फिरने के लिए जगह की तंगी बनी हुई है। </p>
<p><strong>एक दिन बाड़े में तो 6 दिन पिंजरे में कैद शावक</strong><br />बाघिन टी-114 के शावकों को सप्ताह में एक दिन टाइगर के एनक्लोजर में खुला छोड़ा जाता है, जहां उनके सामने 8 से 14 किलो का बकरा छोड़ा जा रहा। जिसका वे लाइव शिकार करते और  रातभर इधर से उधर दौड़ते और शिकार की कला सिखते लेकिन अगले ही दिन तड़के उन्हें फिर से पिंजरों में यानी नाइट शेल्टर में कैद कर दिया जाता है। जहां छोड़े से कमरे में दौड़ना तो दूर ठीक से चल भी नहीं पाते। </p>
<p><strong>खानापूर्ति हो रही रिवाइल्डिंग</strong><br />वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, रिवाइल्डिंग के नाम पर बायोलॉजिकल पार्क में शावकों के कमरानुमा पिंजरे में 10 से 15 किलो का बकरा (लाइव शिकार) खुला छोड़ देते हैं। ऐसे में शिकार को खुद की जान बचाने के लिए न तो दौड़ने की जगह मिल पाती है और न ही शिकार के पीछे भागने के लिए शावकों को मेहनत करनी पड़ती है। जबकि, जंगल में भोजन के लिए हर दिन संघर्ष से गुजरना होता है। ऐसी स्थिति में वे न तो शिकार की कला सीख पा रहे और नहीं जंगल की चुनौतियों से वाकिफ हो पा रहे।  </p>
<p>इस उम्र के शावक जंगल में 15 से 20 किमी प्रतिदिन मूवमेंट करते हंै, जो यहां बिलकुल भी नहीं हो रहा। शिफ्टिंग में देरी से मसल्स ग्रोथ प्रभावित होगी। बॉडी स्टैमिना डवलप नहीं हो पाएगी। एक दिन के लिए टाइगर के एनक्लोजर में छोड़ने से रिवाइल्डिंग के उद्देश्य पूर्ण नहीं हो पाएंगे।  यह बाड़ा इतना बड़ा नहीं है, जिससे वे जंगल के वातावरण से अनुकूल नहीं हो पाएंगे। यह आराम करने के आदी हो जाएंगे। दौड़ना, घात लगाकर शिकार करने की प्रवृति सीख नहीं पाएंगे।<br /><strong>- डॉ. अखिलेश पांडेय, वरिष्ठ पशुचिकित्सक, कोटा</strong></p>
<p>उम्र के वेट बढ़ने से इन्हें चलने फिरने के लिए बड़ी जगह की जरूरत है। पिंजरानुमा कमरे में रहने से इनका लोको मोटर सिस्टम प्रभावित होगा। जिससे चलने फिरने के अंग विकसित नहीं हो पाएंगे। ऐसे में इन्हें तुरंत दरा एनक्लोजर में छोड़ा जाना चाहिए।  <br /><strong>-डॉ. सुधीर गुप्ता, वाइल्ड लाइफ एक्सपर्ट</strong></p>
<p><strong>क्या कहते हैं विशेषज्ञ</strong><br />शावकों को प्राकृतिक आवास में छोड़ने का यह सही समय है। शिफ्टिंग में देरी से उन्हें जंगल में सरवाइव करने में दिक्कत होगी। बायोलॉजिकल पार्क में शिकार के नाम पर बकरा ही दिया जा रहा जबकि, यह जीव जंगल में नहीं मिलेगा। ऐसे में इन्हें अपने शिकार व संभावित खतरों को पहचानने में दिक्कत होगी। जंगल की स्किल सीख सके इसके लिए यथाशीघ्र सॉफ्ट रिलीज करना जरूरी है।  <br /><strong>- सोहिल ताबिश, बॉयोलॉजिस्ट</strong></p>
<p>शावकों को यहां रहते हुए 10 माह से ज्यादा समय बीत चुका है। ऐेस में इन्हें बिना समय गवाए दरा एनक्लोजर में शिफ्ट किया जाना चाहिए। छोटे से पिंजरे में यह न तो शिकार की कला सीख पा रहे और न ही घात लगाना, खुद के छिपने की जगह, अपना बचाव करना, वन्यजीवों की प्रवृति समझना सहित जंगल की चुनौतियों से वाकिफ नहीं हो पाएंगे। <br /><strong>- एएच जैदी, नेचर प्रमोटर</strong></p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />गत 28 अगस्त को ही दोनों शावकों को दरा अभयारणय के 28 हैक्टेयर के एनक्लोजर में शिफ्ट किए जाने के प्रस्ताव चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन को भिजवा दिए हैं। इस संबंध में फैसला वहीं से ही होगा।    <br /><strong>- सुनील गुप्ता, डीएफओ, वन्यजीव विभाग कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 12 Sep 2023 15:29:02 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>टाइगर के बच्चों का नसीब, सलाखें या जंगल!</title>
                                    <description><![CDATA[वन्यजीव प्रेमियों में शावकों के नसीब पर बहस छिड़ गई।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/tiger-s-children-s-fate--bars-or-jungle/article-55699"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-08/tiger-k-bachho-ka-naseeb,-salakhe-ya-jail...kota-news-28-08-2023.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क में पल रहे बाघिन टी-114 के दोनों शावक 10 माह के हो चुके हैं। लेकिन, इन्हें अभी तक भी दरा अभयारण्य के 28 हैक्टेयर के एनक्लोजर  में शिफ्ट नहीं किया गया। इससे शावकों की रिवाइल्डिंग पर प्रश्नचिन्ह खड़े हो गए।  वहीं, वन्यजीव प्रेमियों में शावकों के नसीब पर बहस छिड़ गई। इन्हें जंगल मिलेगा या चिड़ियाघर के पिंजरों की सलाखे...? जबकि, एनटीसीए द्वारा गठित कमेटी दोनों शावकों  की एनक्लोजर में शिफ्टिंग पर सहमति जता चुकी है और चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन को जुलाई माह में प्रस्ताव भी भिजवाए जा चुके हैं, इसके बावजूद स्वीकृति नहीं मिलने से इन शावकों के भविष्य पर सवाल खड़े हो गए। वन्य जीव प्रमियों ने दोनो शावकों को अविलम्ब दरा एन्क्लोजर में छोड़ने की जरुरत बताई। अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क से मिली जानकारी के अनुसार दोनों शावकों का तेजी से वजन बढ़ रहा है। मेल शावक का 69.450 तो फिमेल शावक का वजन 51.750 किलो हो चुका है। वहीं, 10 महीने से ज्यादा की उम्र हो चुकी है। जबकि, उन्हें 25 गुणा 25 साइज के कमरे और कराल में रखा जा रहा है। ऐसे में उनके चलने फिरने के लिए जगल की तंगी बनी हुई है। </p>
<p><strong>प्रस्ताव भेजे, नहीं मिली तवज्जो</strong><br />शावकों की मॉनिटरिंग के लिए एनटीसीए द्वारा गठित कमेटी की 13 जुलाई को अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क में बैठक हुई थी। जिसमें कमेटी सदस्यों ने सर्वसहमति से शावकों को दरा के 28 हैक्टेयर के एनक्लोजर में शिफ्ट किए जाने का निर्णय किया था। जिसके प्रस्ताव चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन अरविंदम तोमर को भेजे लेकिन तवज्जों नहीं दी गई। ऐेसे में 25 अगस्त को हुई बैठक में फिर से शिफ्टिंग प्रस्ताव का रिमाइंडर भेजने पर सहमति बनी। </p>
<p><strong>शिकार के बचने और न शिकारी के दौड़ने की जगह</strong><br />वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, रिवाइल्डिंग के नाम पर बायोलॉजिकल पार्क में शावकों के कमरानुमा पिंजरे में 10 से 15 किलो का बकरा (लाइव शिकार) खुला छोड़ देते हैं। ऐसे में शिकार को खुद की जान बचाने के लिए न तो दौड़ने की जगह मिल पाती है और न ही शिकार के पीछे भागने के लिए शावकों को मेहनत करनी पड़ती है। जबकि, जंगल में भोजन के लिए हर दिन संघर्ष से गुजरना होता है। ऐसी स्थिति में वे न तो शिकार की कला सीख पा रहे और नहीं जंगल की चुनौतियों से वाकिफ हो <br />पा रहे।  </p>
<p><strong>क्या कहते हैं विशेषज्ञ</strong><br />बाघिन टी-114 के दोनों शावक लंबे समय से बायोलॉजिकल पार्क में रह रहे हैं, जिन्हें जल्द से जल्द दरा के 28 हैक्टेयर के एनक्लोजर में छोड़ दिया जाना चाहिए। ताकि, जंगल के परिवेश में खुद को ढाल सके और शिकार की कला सीख सके। शिफ्टिंग में देरी से शारीरिक व मानसिक विकास में विकार उत्पन्न हो सकते हैं। मसल्स व बोन से संबंधित परेशानी हो सकती है। <br /><strong>-कृष्नेंद्र सिंह नामा, वाइल्ड लाइफ एक्सप्लोरर</strong></p>
<p>उम्र के हिसाब से बायोलॉजिकल पार्क में शावकों के लिए जगह कम पड़ रही है। दोनों शावक 9-10 माह के हो चुके हैं, दरा एनक्लोजर में शिफ्ट करने की यह सही उम्र है। ऐसे में शिफ्टिंग से इनका सर्वार्गिंण विकास हो सकेगा। साथ ही जिस उद्देश्य से रिवाइल्डिंग प्रोसेज की जा रही वो बेहतर तरीके से हो पाएगी। <br /><strong>- दौलत सिंह, वाइल्ड लाइफ एक्सपर्ट</strong></p>
<p>शावकों को शिफ्ट करने में देरी से जंगली जीवन में रहने में सक्षम नहीं होंगे। वाइल्ड में सरवाइव करना मुश्किल होगा। पार्क में शिकार के नाम पर बकरा ही दिया जा रहा जबकि, यह जंगल में नहीं मिलेगा। ऐसे में इन्हें अपने शिकार व संभावित खतरों को पहचानने में दिक्कत होगी। जंगल की स्किल सीख सके इसके लिए यथाशीघ्र सॉफ्ट रिलीज करना जरूरी है।  <br /><strong>- सोहिल ताबिश, बॉयोलॉजिस्ट</strong></p>
<p>इस उम्र के शावक जंगल में 15 से 20 किमी प्रतिदिन मूवमेंट करता है, जो यहां बिलकुल भी नहीं हो रहा। शिफ्टिंग में देरी से मसल्स ग्रोथ प्रभावित होगी। बॉडी स्टैमिना डवलप नहीं हो पाएगी। व्यवहारिक बदलाव आएंगे। यह आराम करने के आदी हो जाएंगे। दौड़ना, घात लगाकर शिकार करने की प्रवृति सीख नहीं पाएंगे।  ऐसे में अविलम्ब दरा एनक्लोजर में छोड़ने का निर्णय लेना चाहिए। <br /><strong>- डॉ. अखिलेश पांडेय, वरिष्ठ पशुचिकित्सक, कोटा</strong></p>
<p>उम्र के साथ तेजी से वेट बढ़ रहा है। इन्हें चलने फिरने के लिए पर्याप्त जगह नहीं मिल पा रही। पिंजरानुमा कमरे में रहने से इनका लोको मोटर सिस्टम प्रभावित होगा। जिससे चलने फिरने के अंग विकसित नहीं हो पाएंगे। शिफ्टिंग में जितनी देरी होगी उतना ही रिवाइल्डिंग अपने उद्देश्य से भटकेगी। आगे जाकर यह शावक चिड़ियाघर के ही बनकर रह जाएंगे। ऐसे में इन्हें तुरंत दरा एनक्लोजर में छोड़ा जाना चाहिए। <br /><strong>-डॉ. सुधीर गुप्ता, वाइल्ड लाइफ एक्सपर्ट</strong></p>
<p>एनक्लोजर में छोड़े जाने की यह सही उम्र है। विलम्ब होता है तो इनमें जंगल के वातावरण को स्वीकार करने की प्रवृति का हास होगा और यह प्रदेश का दायित्व बन जाएंगे, सम्पति के स्थान पर।<br /><strong>- तपेश्वर सिंह भाटी, अध्यक्ष, मुकुंदरा वन्यजीव एवं पर्यावरण समिति</strong></p>
<p><strong>प्रस्ताव भेजकर मांगेंगे मार्गदर्शन</strong><br />अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क में हाल ही में कमेटी की बैठक हुई थी। जिसमें कमेटी के सभी सदस्यों ने शावकों को दरा वनक्षेत्र के 28 हैक्टेयर के एनक्लोजर में छोड़े जाने पर सहमति जताई। इस संबंध में उच्चाधिकारियों से मार्गदर्शन प्राप्त करने के लिए प्रस्ताव भेजा जा रहा है।                                  <br /><strong>- सुनील गुप्ता, उप वन संरक्षक, वन्यजीव विभाग कोटा  </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 28 Aug 2023 17:34:28 +0530</pubDate>
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