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                <title>JKK exhibition - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>JKK exhibition RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>जेकेके की ‘आओ एक्टिंग करें’ कार्यशाला में प्रतिभागी सीख रहे अभिनय से लेकर नेपथ्य प्रबंधन तक के हुनर</title>
                                    <description><![CDATA[जवाहर कला केंद्र में रंग साधना थिएटर ग्रुप की ओर से आयोजित ‘आओ एक्टिंग करें’ कार्यशाला में प्रतिभागी रंगमंच की बारीकियों का व्यावहारिक प्रशिक्षण ले रहे। वरिष्ठ रंगकर्मी उन्हें संवाद अदायगी, भाव-भंगिमा, शारीरिक अभिव्यक्ति, मंच पर आत्मविश्वास, पात्र निर्माण और आवाज के प्रभावी उपयोग की तकनीक सिखा रहे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/in-jkks-lets-act-workshop-participants-are-learning-skills-ranging/article-159318"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-07/1200-x-600-px)-(3)13.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। जवाहर कला केंद्र में रंग साधना थिएटर ग्रुप की ओर से आयोजित ‘आओ एक्टिंग करें’ कार्यशाला में प्रतिभागी रंगमंच की बारीकियों का व्यावहारिक प्रशिक्षण ले रहे हैं। वरिष्ठ रंगकर्मी उन्हें संवाद अदायगी, भाव-भंगिमा, शारीरिक अभिव्यक्ति, मंच पर आत्मविश्वास, पात्र निर्माण और आवाज के प्रभावी उपयोग की तकनीक सिखा रहे हैं।</p>
<p>साथ ही प्रकाश व्यवस्था, संगीत एवं ध्वनि संयोजन, नेपथ्य प्रबंधन और नाट्य प्रस्तुति की संपूर्ण प्रक्रिया से भी अवगत कराया जा रहा है। टीवी, रेडियो और रंगमंच निर्देशक विवेक माथुर तथा लेखक-अभिनेता बिजेंद्र सिंह अपने अनुभव साझा कर प्रतिभागियों की अभिनय क्षमता को निखार रहे हैं। दो माह की यह कार्यशाला 25 अगस्त तक आयोजित की जा रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 09 Jul 2026 14:09:28 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur PS]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>जयपुर की सांस्कृतिक आत्मा के रूप में धड़कता रहा जेकेके : सजा संस्कृति, रचनात्मकता और उत्सवों का यादगार साल</title>
                                    <description><![CDATA[जयपुर के कला प्रेमियों के लिए ये साल केवल एक कैलेंडर वर्ष नहीं, बल्कि स्मृतियों से भरा एक सांस्कृतिक अध्याय बन गया है। जवाहर कला केंद्र के लिए यह वर्ष रचनात्मक प्रयोगों, सांस्कृतिक उत्सवों और व्यापक जनभागीदारी का ऐसा संगम रहा, जिसने इसे फिर से राजस्थान की सांस्कृतिक राजधानी के केंद्र में स्थापित किया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/jkk-saja-continues-to-beat-as-the-cultural-soul-of/article-137135"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/1200-x-600-px-(11)2.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। जयपुर के कला प्रेमियों के लिए ये साल केवल एक कैलेंडर वर्ष नहीं, बल्कि स्मृतियों से भरा एक सांस्कृतिक अध्याय बन गया है। जवाहर कला केंद्र के लिए यह वर्ष रचनात्मक प्रयोगों, सांस्कृतिक उत्सवों और व्यापक जनभागीदारी का ऐसा संगम रहा, जिसने इसे फिर से राजस्थान की सांस्कृतिक राजधानी के केंद्र में स्थापित किया। विश्व प्रसिद्ध वास्तुकार चार्ल्स कोरिया की ओर से नवग्रह मंडल की अवधारणा पर निर्मित यह परिसर पूरे साल कला, साहित्य, रंगमंच, संगीत और लोक परंपराओं से सराबोर रहा।</p>
<p><strong>भाषा-साहित्य का उत्सव: विजयदान देथा की स्मृति</strong><br />21 से 23 मार्च तक आयोजित विजयदान देथा साहित्य उत्सव राजस्थानी भाषा और लोक साहित्य को समर्पित रहा। 10 सत्रों में 35 से अधिक साहित्यकारों ने अपनी रचनात्मक दृष्टि साझा की। लोक और शास्त्रीय संगीत की प्रस्तुतियों ने इस साहित्यिक आयोजन को जनमानस से जोड़ने का काम किया।</p>
<p><strong>राजस्थान दिवस: संस्कृति का भव्य प्रदर्शन</strong><br />25 से 30 मार्च तक आयोजित राजस्थान दिवस समारोह जवाहर कला केंद्र की बहुआयामी गतिविधियों का प्रतीक बना। लोक गायन, नृत्य कार्यशालाएं, तबला जुगलबंदी, भक्ति संगीत, फ्यूजन बैंड और नाट्य प्रस्तुतियों ने हर आयु वर्ग के दर्शकों को आकर्षित किया। सफेद जवारा और कौव्वों की पाठशाला जैसे नाटकों के साथ लोक गायिका बेगम बतूल और भंवरी देवी की प्रस्तुतियों ने विशेष प्रभाव छोड़ा।</p>
<p><strong>स्थापना दिवस और दृश्य कला का विस्तार</strong><br />8 से 10 अप्रैल तक आयोजित स्थापना दिवस समारोह में जेकेके की सांस्कृतिक विरासत का उत्सव मनाया गया। लुप्तप्राय वाद्य यंत्रों की प्रदर्शनी, बाल नाट्य प्रस्तुतियां और पं. विश्व मोहन भट्ट, पं. सलिल भट्ट तथा उस्ताद अनवर खान मांगणियार जैसे दिग्गजों की प्रस्तुतियों ने इसे यादगार बनाया। मई में आयोजित रंगरीत कला महोत्सव में पारंपरिक चित्रकारों की कृतियों ने दृश्य कला प्रेमियों को आकर्षित किया।</p>
<p><strong>नई पीढ़ी की रचनात्मक पाठशाला</strong><br />16 मई से 20 जून तक आयोजित जूनियर समर कैंप में 500 से अधिक बच्चों ने संगीत, रंगमंच, साहित्य और दृश्य कला की 18 विद्याओं में प्रशिक्षण लिया। यह शिविर भविष्य के कलाकारों के लिए प्रेरणादायक साबित हुआ। 11 से 17 जुलाई तक आयोजित नटराज महोत्सव समकालीन रंगमंच का सशक्त मंच बना। छह नाटकों और तीन संवाद सत्रों में मानव कौल, सुमित व्यास, आदिल हुसैन जैसे कलाकारों की सहभागिता ने थिएटर प्रेमियों को समृद्ध अनुभव दिया।</p>
<p><strong>-रामकथा, लोक परंपरा और राष्ट्रीय सहभागिता</strong><br />अक्टूबर में दशहरा नाट्य महोत्सव के तहत तकनीकी रूप से समृद्ध श्रीमानस रामलीला का मंचन हुआ। इसके बाद 7 से 17 अक्टूबर तक आयोजित 28वां लोकरंग महोत्सव लोक कला का महाकुंभ बनाए जिसमें 25 राज्यों के लगभग 2500 कलाकारों और राष्ट्रीय हस्तशिल्प मेले ने लोक परंपराओं को भव्य मंच दिया।</p>
<p><strong>जनवरी से बसंत तक: अभिव्यक्ति और तुराज का स्वागत</strong><br />वर्ष की शुरुआत जनवरी में आयोजित स्पीकिंग स्किल्स वर्कशॉप से हुई, जिसमें युवाओं ने संवाद, आत्मविश्वास और मंचीय अभिव्यक्ति के गुर सीखे। इसके तुरंत बाद 28 से 30 जनवरी तक बसंत बहार उत्सव ने केंद्र को रंग, राग और लय से भर दिया। कथक, ओडिसी और भरतनाट्यम की प्रस्तुतियों में अदिति शर्मा, डॉ. तरुणा जांगिड, पं. हरीश गंगानी, डॉ. रीला होता और शांतनु चक्रवर्ती जैसे कलाकारों ने बसंत के उल्लास को मंच पर जीवंत कर दिया।</p>
<p><strong>लोक संगीत और नारी शक्ति का सशक्त मंच</strong><br />20 फरवरी से 6 मार्च तक पद्मश्री अली-गनी के नेतृत्व में आयोजित मांड गायन कार्यशाला में युवा कलाकारों ने इस लोक गायन शैली की बारीकियां सीखी। वहीं 6 से 10 मार्च तक अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित वसुधा महोत्सव महिला कलाकारों की रचनात्मक शक्ति का उत्सव बना। महिला चित्रकार शिविर, नृत्य, गायन, नाट्य प्रस्तुतियां और संवाद सत्रों ने केंद्र को स्त्री सृजन की ऊर्जा से भर दिया। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 25 Dec 2025 12:07:09 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>सुर-ताल फेस्टिवल : शास्त्रीय, लोकनृत्य और लघु नाटकों की शानदार प्रस्तुतियां, प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र देकर किया सम्मानित</title>
                                    <description><![CDATA[प्रेरणा भूयान की सत्रिया नृत्य कार्यशाला के अंतर्गत प्रस्तुत कृष्ण जन्म और कालिया मर्दन प्रसंग ने असम की समृद्ध नृत्य परंपरा का अद्भुत दर्शन कराया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/sur-tal-festival-classical-folk-dance-and-spectacular-performance-of-short/article-127821"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-09/copy-of-news-(2)25.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। जेकेके और अंजना वेलफेयर सोसाइटी के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित सुर-ताल फेस्टिवल का बुधवार को रंगायन सभागार में उत्साहपूर्ण समापन हुआ। इस अवसर पर शास्त्रीय नृत्य, लोक नृत्य, लघु नाटक, माइम और कठपुतली कला की विविध प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। समापन समारोह में प्रतिभागियों ने कार्यशालाओं के दौरान सीखी कलाओं का मंचन कर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया। इस मौके पर सभी प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र देकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में केंद्रीय राज्य मंत्री एस.पी. सिंह बघेल, केंद्र की वरिष्ठ लेखाधिकारी बिंदु भोभरिया, सोसाइटी की निदेशिका माया कुलश्रेष्ठ, अभिनेता ओम कटारे सहित बड़ी संख्या में कला-प्रेमी उपस्थित रहे। कार्यक्रम की शुरुआत कथक की नवरस आधारित प्रस्तुति से हुई, जिसमें स्त्री-शक्ति और नायिका भेद की झलक देखने को मिली। प्रेरणा भूयान की सत्रिया नृत्य कार्यशाला के अंतर्गत प्रस्तुत कृष्ण जन्म और कालिया मर्दन प्रसंग ने असम की समृद्ध नृत्य परंपरा का अद्भुत दर्शन कराया। सूक्ष्म गतियों और भावपूर्ण मुद्राओं ने प्रस्तुति को और भी आकर्षक बनाया।</p>
<p>थिएटर कार्यशाला, जिसे ओम कटारे ने निर्देशित किया में 20 प्रतिभागियों ने अभिनय की बारीकियों को आत्मसात किया। समापन पर प्रस्तुत लघु नाटक 10 दिन की छुट्टी, लव स्टोरी और क्लासरूम ने सामाजिक जीवन के विविध आयामों को रंगमंच पर सजीव कर दिया। साथ ही विशेष प्रस्तुति में मूक-बधिर बच्चों ने एकलव्य की कथा को माइम के माध्यम से प्रस्तुत कर दर्शकों को भाव-विभोर कर दिया। राजस्थान की लोक धरोहर भी मंच पर खूब सजी। मीना सपेरा और समूह की कालबेलिया व घूमर की मनमोहक प्रस्तुतियां और कठपुतली नाट्य पधारो म्हारे देश ने लोक संस्कृति की आत्मा को जीवंत कर दिया। इसी दौरान चित्रकला और शिल्प कार्यशालाओं में बनी कलाकृतियों की प्रदर्शनी भी दर्शकों को आकर्षित करती रही। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 25 Sep 2025 10:31:25 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur PS]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>जेकेके में देश-विदेश के 22 कलाकारों की रचनाओं का मंच बना 'सर्जना'</title>
                                    <description><![CDATA[सिंगापुर के आर्टिस्ट काइ किंग के बनाए पोट्रेट प्रदर्शित किए गए, जबकि नेपाल के एस.सी. सुमन की पेंटिंग में मिथिला आर्ट वर्क की खूबसूरती देखने को मिली। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/-sarjana--became-a-platform-for-creations-of-22-artists-from-india-and-abroad-in-jkk-hindi-news/article-55774"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-08/jkk-jaipur.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। जवाहर कला केंद्र की चातुर्दिक गैलरी में आज आर्ट एग्जीबिशन 'सर्जना' की शुरुआत हुई। पूर्णिमा यूनिवर्सिटी के फैकल्टी ऑफ डिजाइन एंड आर्ट्स तथा जयपुर आर्ट समिट द्वारा आयोजित इस एग्जीबिशन में देश—विदेश के 22 कलाकारों की करीब 50 पेंटिंग व स्कल्पचर प्रदर्शित किए जा रहे हैं। खास बात यह है कि ये कलाकृतियां इन्होंने गत छह दिनों पूर्णिमा यूनिवर्सिटी में आयोजित इंटरनेशनल आर्ट कैंप में तैयार की हैं। वरिष्ठ कलाकार पद्मश्री श्याम शर्मा ने मुख्य अतिथि तथा कलाविद् आर.बी. गौतम ने गेस्ट ऑफ ऑनर के तौर पर इस दो दिवसीय एग्जीबिशन का उद्घाटन किया।</p>
<p>इसमें अमेरिका के जोंग इल मा, सिंगापुर के काइ किंग, जर्मनी के किंग सोनेनबर्ग, नेपाल के एस.सी. सुमन, लिथुआनिया की जिद्रिजा जनुसाइट, श्रीलंका की मानुषिका बुद्धिनि पथिराना व कुशानी विदुषिका तथा ईरान के हादी सेतायेश के साथ—साथ भारत के महेश अंजरलेकर, नरोत्तम दास, के.के. गांधी, डिम्पल शाह, अमित कल्ला, अमिता खरे सहित अन्य नामचीन कलाकारों की बनाई पेंटिंग्स व स्कल्पचर डिस्प्ले किए जा रहे हैं।</p>
<p>सिंगापुर के आर्टिस्ट काइ किंग के बनाए पोट्रेट प्रदर्शित किए गए, जबकि नेपाल के एस.सी. सुमन की पेंटिंग में मिथिला आर्ट वर्क की खूबसूरती देखने को मिली। इसी प्रकार जम्मू काश्मीर के आर्टिस्ट के.के. गांधी विशाल कैनवास पर पर्वतों के बीच सूर्योदय की पहली किरण की खूबसूरती को रंगों के जरिए साकार किया। मुंबई के महेश अंजरलेकर द्वारा इंटरनेशनल आर्ट कैंप में तैयार किए गए सेल्फ पोट्रेट के स्कल्पचर प्रदर्शित किए गए। इनकी विशेषता यह है कि कलाकार द्वारा इनमें मछली के तत्वों को प्रमुखता दी गई है।</p>
<p>देबावृत्त दास ने बंदर की पेंटिंग के जरिए जीवन के सफर को प्रतिबिंबित किया, वहीं विनोद कुमार की पेंटिंग में मिट्टी के प्राकृतिक रंग का इस्तेमाल कर इसमें गेहूं की बाली को दर्शाया गया। अमित कल्ला की बनाई एब्स्ट्रेक्ट पेंटिंग भी विजिटर्स द्वारा काफी पसंद की गई। लिथुआनिया की जिद्रिजा जनुसाइट द्वारा परफॉर्मिंग आर्ट की प्रभावी प्रस्तुति भी दी गई।</p>
<p>एग्जीबिशन के उद्घाटन के अवसर पर मेजबान पूर्णिमा यूनिवर्सिटी के को- फाउंडर राहुल सिंघी, प्रो—प्रेसीडेंट डॉ. मनोज गुप्ता और रजिस्ट्रार डॉ. चांदनी कृपलानी भी उपस्थित थे। रविवार को इस एग्जीबिशन का अंतिम दिन है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 29 Aug 2023 14:06:51 +0530</pubDate>
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