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                <title>Rakshabandhan 2023 - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                            <item>
                <title>जैन श्रद्धालुओं ने रक्षा सूत्र बांधकर लिया धर्म और साधुओं की सुरक्षा का संकल्प</title>
                                    <description><![CDATA[ मंत्रोच्चार और जयकारों के साथ भगवान श्रेयांसनाथ स्वामी के मोक्ष कल्याणक पर्व के अवसर पर, अर्ध्य के साथ 11 श्रावक परिवारों द्वारा 1 किलो के 11 निर्वाण लड्डू चढ़ाये गये। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/jain-devotees-took-a-pledge-to-protect-religion-and-saints-by-tying-a-defense-thread-rakshabandhan-2023-news-in-hindi/article-55890"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-08/jain-rakshabandhan-2023.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। शहर के प्रताप नगर सेक्टर 8 शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में आचार्य सौरभ सागर महाराज की मौजूदगी में जैन धर्म के 11 वें तीर्थंकर भगवान श्रेयांसनाथ स्वामी का निर्वाण महोत्सव एवं रक्षाबंधन (रक्षासूत्र) पर्व हर्षोल्लास व भक्तिभाव के साथ मनाया गया। इस दौरान श्रीजी का कलशाभिषेक और शांतिधारा कर मंदिर से मुख्य पांडाल स्थल तक भगवान श्रेयांसनाथ स्वामी को पालकी में विराजमान कर यात्रा निकाली गई। जहां पर श्रीजी को पंडुकशीला पर विराजमान कर कलाशाभिषेक किए गए और आचार्य श्री के मुखारविंद वृहद शांतिधारा की गई। पंडित संदीप जैन सेजल के निर्देशन में श्रेयांसनाथ भगवान का अष्ट द्रव्यों के साथ पूजन किया गया। इसके उपरांत मंत्रोच्चार और जयकारों के साथ भगवान श्रेयांसनाथ स्वामी के मोक्ष कल्याणक पर्व के अवसर पर, अर्ध्य के साथ 11 श्रावक परिवारों द्वारा 1 किलो के 11 निर्वाण लड्डू चढ़ाये गये। इस दौरान आचार्य ने कहा की " आज रक्षा सूत्र पर्व है सभी श्रावक और श्राविकाओ को इसके महत्व को समझना चाहिए और धर्म, मंदिर, तीर्थों एवं साधु - संतों की सुरक्षा का भी संकल्प लेना चाहिए। जिसके बाद उपस्थित श्रावक और श्राविकाओं ने मंदिर की वेदियों, मुख्य द्वारों और आचार्य सौरभ सागर महाराज की पिच्छिका पर रक्षा सूत्र बांधकर " धर्म, मंदिर, तीर्थ स्थलों, साधु और संतों " की सुरक्षा का संकल्प लिया। </p>
<p>प्रचार संयोजक सुनील साखुनियां ने बताया की रक्षाबंधन के अवसर पर आचार्य सौरभ सागर महाराज की पूर्व की चारों बहनें विशेष आकर्षण का केंद्र रही, चारों बहनों ने सुबह जिनेन्द्र आराधना के पश्चात आचार्य सौरभ सागर महाराज की भक्ति की और रक्षा सूत्र बांधकर धर्म की रक्षा का संकल्प पूरा किया। इसके अतिरिक्त दिल्ली, हरियाणा, यूपी, एमपी से भी श्रद्धालुगण सम्मिलित हुए।</p>
<p><strong>प्रेम और रक्षा की प्रेरणा देने वाला पर्व है रक्षाबंधन: आचार्य सौरभ सागर</strong><br />रक्षाबंधन के अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने आचार्य सौरभ सागर महाराज के दर्शनों का लाभ प्राप्त किया, इस दौरान  हुई धर्म सभा में आचार्य ने भक्तजनों से कहा की " संसार का प्रत्येक प्राणी प्रेम चाहता है | क्योंकि संसार में प्रत्येक प्राणी का जन्म प्रेम से ही होता है। इसलिए प्राणी प्रेम से पलता है, प्रेम में ही जीता है। जिस व्यक्ति के जीवन से प्रेम विदा हो जाता है, वह जीते जी मुर्दे के समान हो जाता है। प्रेम एक महत्वपूर्ण वस्तु है। वह प्रेम चाहे मां का हो, बहन का हो, भाई का हो मित्र, समाज, साधर्मी, गुरु, धर्म का हो, यह प्रेम आत्मीयता को जन्म देता है। आत्मीयता से सुरक्षा का जन्म होता है, सुरक्षा के लिए संगठन तैयार होता है, जहां संगठन है, वही एकता है, वहीं शांति प्रेम का निर्मल झरना बहता है। प्रेम देहात्मक नहीं, आत्मीय होना चाहिए। देहात्मक प्रेम वासना को जन्म देता है और आत्मीय प्रेम प्रार्थना को जन्म देता है। </p>
<p>आचार्य ने कहा कि नारी प्रेम की पुतली है, प्रेम का सागर है, प्रेम का आलय है, प्रेम की बदली है, उसने सदैव पृथ्वी पर प्रेम की बरसात की है, उसी प्रेम की सुरक्षा के लिए नारी प्रेम के धागे को लेकर पुरुष के समक्ष उपस्थित होती है और कलाई में धागे को बांध देती है क्योंकि प्रेम बांधता है, सुरक्षा चाहता है | अपना बनाता है, जीवनदान देता है। धागा रत्नत्रय का प्रतीक है। परमात्मा से मिलता है। प्रेम जब वासना बनता है तब 'अधोगमन' करता है। पूर्व कालीन समय में इस बंधन को रक्षासूत्र पर्व के रूप में मनाया जाता था किंतु आज यह रक्षा बंधन पर्व हो गया है। पहले प्रेम से बने सभी रिश्तों की सुरक्षा का सूत्र लिया जाता था और आज रक्षा का बंधन बांधा जाता है। यह पर्व प्रेम और रक्षा की प्रेरणा देने वाला सबसे पवित्र पर्व है जिसे प्रत्येक प्राणी को सम्मान देना चाहिए और प्रेम और रक्षा का संकल्प लेकर जीवन जीना चाहिए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 30 Aug 2023 19:20:13 +0530</pubDate>
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                <title>रक्षाबंधन के मुहूर्त का असर, रोडवेज बस में महिलाओं के लिए दो दिन तक फ्री यात्रा</title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान सरकार की ओर से पहले एक दिन यानी बुधवार को ही रक्षाबंधन पर महिला और बालिकाओं को रोडवेज की (एसी और वोल्वो को छोड़कर) समस्त श्रेणी की बसों में नि:शुल्क यात्रा सुविधा प्रदान की थी। लेकिन रक्षाबंधन का मुहूर्त रात्रि कालीन होने के कारण महिलाओं को एक तरफ की यात्रा की ही सुविधा मिल पा रही थी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/impact-of-rakshabandhan-auspicious-time-free-travel-for-women-in-roadways-bus-for-two-days-hindi-news/article-55875"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-08/roadways2.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। रक्षाबंधन के त्यौहार को देखते हुए महिलाओं को 2 दिन राजस्थान रोडवेज की बसों में निशुल्क यात्रा सुविधा प्रदान की है। इसको लेकर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने ट्वीट जानकारी दी है।<br /><br />राजस्थान सरकार की ओर से पहले एक दिन यानी बुधवार को ही रक्षाबंधन पर महिला और बालिकाओं को रोडवेज की (एसी और वोल्वो को छोड़कर) समस्त श्रेणी की बसों में नि:शुल्क यात्रा सुविधा प्रदान की थी। लेकिन रक्षाबंधन का मुहूर्त रात्रि कालीन होने के कारण महिलाओं को एक तरफ की यात्रा की ही सुविधा मिल पा रही थी। ऐसे में रोडवेज प्रशासन ने सरकार को पत्र भेजा था, जिस पर मंजूरी दे दी गई है। अब महिलाओं को गुरुवार को भी निशुल्क यात्रा सुविधा प्रदान की गई है। हालांकि रोडवेज के पास वर्तमान में केवल 2900 ही बसे हैं और 800 अनुमानित बसें संचालित की जा रही है। लेकिन महिलाओं की भीड़ को देखते हुए यह बसें कम पड़ेगी। वहीं रोडवेज प्रशासन भीड़ को देखते हुए अतिरिक्त बसें चलाने की भी तैयारी कर रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 30 Aug 2023 14:41:31 +0530</pubDate>
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                <title>क्या है रक्षाबंधन का इतिहास और महत्व </title>
                                    <description><![CDATA[ जब मध्यकालीन युग में मुस्लिमों और राजपूतों के बीच संघर्ष चल रहा था। उस वक्त चित्तौड़ के राजा की विधवा रानी कर्णावती ने गुजरात के सुल्तान बहादुर शाह से अपनी और अपनी प्रजा की सुरक्षा का कोई रास्ता न निकलता देख हुमायूं को राखी भेजी थी। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/what-is-the-history-and-importance-of-rakshabandhan-hindi-news/article-55847"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-08/rakhi.png" alt=""></a><br /><p>हमारे जीवन में कई रिश्ते होते हैं, लेकिन भाई-बहन का रिश्ता सबसे अनोखा होता है। इसमें रूठना-मनाना,एक-दूसरे को सपोर्ट करना पापा की डांट हो या मम्मी की मार इनसे  बचाना आदि। इन सबकी झलक इस रिश्ते में मिलती है। भाई-बहन के इसी  प्यार को दर्शाता है राखी का त्योहार। हर साल श्रावण मास की पूर्णिमा के दिन रक्षाबधन का त्योहार मनाया जाता है। बहन इस दिन अपने भाई की कलाई पर राखी बांधती है और बदले में भाई अपनी बहन की सदैव रक्षा करने का वचन देता है। ये सब हम जानते हैं और इस त्योहार को कुछ इसी तरह हर साल मनाते हैं। लेकिन क्या आपने ये जाना है कि आखिर इस त्योहार का इतिहास क्या कहता है,इस दिन को मनाने की शुरुआत कब हुई थी।<br /><br /><strong>पुराना है इतिहास</strong><br />राखी के इतिहास पर नजर डालते हैं, तो इसकी शुरुआत को लेकर कोई निश्चित इतिहास तो नहीं मिलता है। लेकिन इतना जरूर है कि इसका इतिहास सदियों पुराना है। भविष्य पुराण में राखी के बारे में वर्णन मिलता है। इसमें बताया गया है कि जब दानवों और देव के बीच युद्ध शुरु हुआ था तब तब देवों पर दानव हावी हो रहे थे।  ऐसे में इंद्र भगवान घबरा गए और भगवान बृहस्पति के पास पहुंचकर सबकुछ बताया, जिसे इंद्र की पत्नी इंद्राणी सब सुन रही थी। इसके बाद उन्होंने रेशम का धागा मंत्रों की शक्ति से पवित्र करके अपने पति इंद्र के हाथ पर बांध दिया और ये दिन श्रावण मास की पूर्णिमा का था। <br /><br /><strong>महाभारत में भी है जिक्र<br /></strong> रक्षाबंधन के तार महाभारत से भी जुड़ते हुए नजर आते हैं। जब भगवान कृष्ण ने राजा शिशुपाल का वध किया था, तब इस दौरान उनके बाएं हाथ की उंगली से खून बहने लगा था जिसे देखकर द्रौपदी ने अपनी साड़ी का टुकड़ा चीरकर कृष्ण की उंगली में बांध दिया। इससे भगवान कृष्ण की उंगली से बह रहा खून बंद हो गया। कहा जाता है कि यहीं से कृष्ण ने द्रोपदी को अपनी बहन बना लिया था। <br /><br /><strong>यहां भी है जिक्र<br /></strong>रक्षाबंधन के तार रानी कर्णावती से जुड़े हुए भी नजर आते हैं। जब मध्यकालीन युग में मुस्लिमों और राजपूतों के बीच संघर्ष चल रहा था। उस वक्त चित्तौड़ के राजा की विधवा रानी कर्णावती ने गुजरात के सुल्तान बहादुर शाह से अपनी और अपनी प्रजा की सुरक्षा का कोई रास्ता न निकलता देख हुमायूं को राखी भेजी थी। इसके बाद ही हुमायूं ने रानी कर्णावती की रक्षा कर, उन्हें अपनी बहन का दर्जा दिया था।  </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 30 Aug 2023 11:05:59 +0530</pubDate>
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                <title>Rakshabandhan 2023: बहनें, जिन्होंने भाइयों की रक्षा की</title>
                                    <description><![CDATA[ करणीमाता और पीरों का यह रिश्ता इतना मजबूत रहा कि 1947 तक यानी सरहद बनने तक मुलतान से मुस्लिम पीर मामा की सिलाड़ के रूप में करणी माता के भक्तों के लिए प्रसाद भेजते थे। करणी माता के भक्त उन्हें मामा कहकर सम्बोधित करते हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/sisters-who-protected-brothers-karni-mata-jeen-mata-rakshabandhan-2023-hindi-news/article-55831"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-08/rakshabandhan-2023.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान में बहन और भाई के रिश्तों की गरमाहट वर्तमान से इतिहास के पन्नों तक पर मौजूद है। आइए रूबरू हों ऐसी तीन कहानियों से।</p>
<p><strong>करणी माता के भाई मुस्लिम पीर</strong><br />पंद्रहवीं सदी। बीकानेर का देशनोक। करणी माता। मुलतान के शासक हुसैन खां लंगा ने करणी माता के धर्मभाई पूगल के राव शेखा को युद्ध में हराने के बाद गिरफ्तार कर मुल्तान ले गया। करणी जी शेखा को रिहा करवाने मुल्तान गईं और वहां के पीरों को राखी बांधी। इसके बाद पीरों ने हुसैन खां लंगा से राव शेखा को रिहा करवाया। हुसैन खां ने राव को रिहा किया और उनके साथ सैनिक भी भेजे। वे शेखा को पूगल छोड़ जाने लगे तो राव ने दोनों को वहीं आजीवन रहने को कहा। उनकी मृत्यु हुई तो राव शेखा ने उनके सम्मान में खानकाहें बनवाई, जहां आज भी उनके सम्मान में पूजापाठ और कव्वालियां होती हैं। करणीमाता और पीरों का यह रिश्ता इतना मजबूत रहा कि 1947 तक यानी सरहद बनने तक मुलतान से मुस्लिम पीर मामा की सिलाड़ के रूप में करणी माता के भक्तों के लिए प्रसाद भेजते थे। करणी माता के भक्त उन्हें मामा कहकर सम्बोधित करते हैं।</p>
<p><strong>जीण और भाई हर्ष की कहानी</strong><br />जीण माता की याद में रैवासा सीकर का मंदिर प्रसिद्ध है। जीण का भाई हर्ष की पत्नी से विवाद हुआ तो वह तपस्या करने लगी। यह तपस्या सिर्फ भाई के लिए नहीं, सबके लिए हुई और जीण एक जाति विशेष के बजाय सभी धर्म और जातियों के लिए पूजनीय हो गई। जीण माता आज भी हर भाई के रक्षा के लिए तत्पर है।</p>
<p><strong>अनजान बहन के घर भर दिया भात</strong><br />नागौर में दो चौधरी थे। बासट गांव के गोपाल जी और खिंयाला के धर्मा जी। दोनों दिल्ली लगान जमा करवाने जा रहे थे। हरमाड़ा पहुंचे एवं विश्राम के लिए रुके तो एक महिला लिछमा रोती मिली। उसकी बेटी का विवाह था लेकिन लिछमा के पीहर में कोई भाई न था। भात कौन भरता? लिछमा की सास, देवरानी और जेठानी ने तंज कसा। वह कुएं पर रोने लगी। दोनों चौधरियों ने पूरी व्यथा सुनी और बोले : आज से हम तेरे भाई। तू क्यों रोती है  बहन। चौधरियों ने अगले दिन 22,000 अशर्फियों का भात भरा। सुबह जब गांव वालों को पता चला कि लिछमा के धर्म के भाई आए हैं और भात भी भरेंगे तो सभी आश्चर्यचकित रह गए। दोनों चौधरियों ने लिछमा को नौरंगी चुनरी उड़ाई और सभी गांव वालों को उपहार दिए और लगान की पूरी राशि का भात भर दिया।<br /><br /><strong>और यह पंक्तियां गाई जाती है-</strong><br />बीरा तू बन जे जायल रो जाट<br />बनजे खियाला रो चौधरी </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 30 Aug 2023 10:19:28 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>नया ट्रेंड: अब राखी, उपहार और मिठाई कुछ घंटों में पहुंचने लगी, ऑफलाइन मार्केट को ऑनलाइन ने कर दिया धीमा</title>
                                    <description><![CDATA[डायरेक्ट.टू.कंज्यूमर (डी2सी) उपहार देने वाले प्लेटफॉर्म, आईजीपी द्वारा किए गए एक व्यापक विश्लेषण के अनुसार, रक्षाबंधन के लिए ऑनलाइन खुदरा परिदृश्य में गैर-मेट्रो ग्राहकों की हिस्सेदारी 50% है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/new-trend-now-rakhi-gifts-and-sweets-started-arriving-in-a-few-hours-online-slowed-down-the-offline-market/article-55832"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-08/rakshabandhan.png" alt=""></a><br /><p>ब्यूरो/नवज्योति,जयपुर। शॉपिंग के रोजाना ट्रेंड बदल रहे हैं, अब सिर्फ नई प्रॉडक्ट रेंज ही नहीं, बल्कि उसे खरीद कर पहुंचाने में भी बदलाव आया है। रक्षाबंधन पर बहन को भाई की पसंद की मिठाई, गिफ्ट और राखी भेजने के लिए अब सिर्फ एक क्लीक कर अपने बजट के अनुसार शॉपिंग कर भेज रही है। मार्केट में ऑनलाइन कंपनियों की संख्याा लगातार बढ़ रही है। ऑफलाइन मार्केट में पचास फीसदी तक गिरावट आ गई।<br /><br /><strong>ऑनलाइन राखी और उपहार खरीदारी में 50% का योगदान</strong><br />डायरेक्ट.टू.कंज्यूमर (डी2सी) उपहार देने वाले प्लेटफॉर्म, आईजीपी द्वारा किए गए एक व्यापक विश्लेषण के अनुसार, रक्षाबंधन के लिए ऑनलाइन खुदरा परिदृश्य में गैर-मेट्रो ग्राहकों की हिस्सेदारी 50% है। शेष 50% ऑनलाइन खरीदार प्रमुख मेट्रो शहरों से हैं। विशेष रूप से, दिल्ली और मुंबई ऑनलाइन रक्षाबंधन उपहार खरीदारी में चार्ट में सबसे आगे हैं, बेंगलुरु, हैदराबाद, पुणे और लखनऊ भी इसी क्रम में हैं। हालांकि, खरीदारों का एक बड़ा हिस्सा भारत भर के विभिन्न गैर-मेट्रो शहरों और कस्बों से आता है।</p>
<p><strong>ये है पूरा पैकेट</strong><br />मिठाई के साथ राखी, इसके बाद सूखे मेवे वाली राखी और चॉकलेट वाली राखी रही। बच्चों के लिए उपहार और भाइयों के लिए उपहार श्रेणियों के अंतर्गत आने वाली वस्तुओं ने भी महत्वपूर्ण ध्यान आकर्षित किया। एक विशेष स्पर्श जोड़ने के लिए वैयक्तित उपहारों का विकल्प चुना।</p>
<p><strong>राखियों का कलेक्शन</strong><br />सेमिप्रेसियस स्टोन राखी, कुंदन और मीना, मोती वाली राखियां, लुंबा, मोली राखियां, चंद्रयान वाली राखियां, छोटा भीम, कार्टून केरेक्टर राखी। प्लांटेबल राखी, सिल्वर राखी, मौली राखी, कस्टमाइज्ड राखी, मिनिमलिस्ट राखी, डिजाइनर राखी और परम्परागत राखी, एवेंजर राखी उपहार सेट भी शामिल है। </p>
<p><strong>ऑनलाइन दुनियाभर में पहुंचाते है राखियां</strong><br />एफएनपी एक्सप्रेस की सुविधा 70 से अधिक देशों में उपलब्ध है। महज 199 रु. से शुरू होकर, ग्राहक एफएनपी की एक्सप्रेस डिलीवरी सेवाओं के माध्यम से अपने भाई-बहनों के लिए स्रेह राखी उपहार आसानी से ऑर्डर कर सकते हैं।<br /><br /><strong>कई कंपनियां उपलब्ध<br /></strong>अमेजन, फ्लिपकार्ट, मिशो, फर्न एंड पेटल, द बॉडी शॉप, पेटीएम जैसी ढेरों कंपनियां ऑनलाइन उपलब्ध है। <br /><br /><strong>ऑनलाइन ने ऑफलाइन मार्केट किया चौपट</strong><br />बढ़ती डिजिटल क्रांति एक ओर जहां काफी फायदेमंद सिद्ध होती होती है, वहीं दूसरी और रिटेल ट्रेड को पीछे धकेलने का काम कर ही है। अब हर फेस्टिवल पर शहर के परम्परागत बाजार में कारोबार में कमी आ रही है। <br />-सुभाष गोयल, अध्यक्ष कैट</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 30 Aug 2023 10:11:22 +0530</pubDate>
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                <title>सीएम गहलोत ने दी रक्षाबंधन की शुभकामनाएं, कहा- सरकार महिलाओं की सुरक्षा, संरक्षण और सशक्तिकरण के लिए प्रतिबद्ध</title>
                                    <description><![CDATA[प्रदेश की 1.35 करोड़ जनाधार महिला मुखियाओं को मय इंटरनेट मोबाइल फोन उपलब्ध कराए जा रहे हैं। प्रथम चरण में 40 लाख महिलाओं को फोन मिलना शुरू हो गया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/cm-gehlot-wished-rakshabandhan--said--government-committed-to-the-safety--protection-and-empowerment-of-women-hindi-news/article-55799"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-08/s-41.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने रक्षाबंधन के पावन पर्व पर प्रदेशवासियों को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दी हैं। गहलोत ने अपने संदेश में कहा कि रक्षाबंधन महिलाओं के प्रति सम्मान और विश्वास के साथ ही पौराणिक एवं सांस्कृतिक महत्व का पर्व है। यह सामाजिक और पारिवारिक एकसूत्रता का प्रतीक है। <br /><br />मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार महिलाओं की सुरक्षा, संरक्षण और सशक्तिकरण के लिए प्रतिबद्ध है। सरकार महिलाओं की आर्थिक एवं सामाजिक प्रगति के लिए संकल्पबद्ध होकर सभी क्षेत्रों में समान अवसर उपलब्ध करा रही है। गहलोत ने इस अवसर पर प्रदेशवासियों का आह्नवान किया कि हमें महिला सशक्तिकरण और उनकी प्रगति की दिशा में मिलकर एक आदर्श समाज का निर्माण करना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रदेश का सर्वांगीण विकास महिलाओं की भागीदारी के बिना संभव नहीं है। <br /><br />गहलोत ने कहा कि राज्य सरकार ने इंदिरा गांधी स्मार्टफोन योजना की अनूठी पहल की है। इसमें प्रदेश की 1.35 करोड़ जनाधार महिला मुखियाओं को मय इंटरनेट मोबाइल फोन उपलब्ध कराए जा रहे हैं। प्रथम चरण में 40 लाख महिलाओं को फोन मिलना शुरू हो गया है। इससे महिलाओं में जागरूकता बढ़ेगी और वे अपने परिवार की समृद्धि एवं प्रगति में भागीदारी निभाएंगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 29 Aug 2023 19:18:07 +0530</pubDate>
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