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                <title>plasma - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>plasma RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>चीन ने कृत्रिम सूर्य में 1300 से अधिक सेकेंड तक प्लाज्मा प्रवाह बनाये रखकर रचा इतिहास, कार्बन उत्सर्जन की चुनौतियों से निपटने के लिए एक प्रमुख उपकरण</title>
                                    <description><![CDATA[चीन के एचएच70 टोकामक ने 1,337 सेकंड तक स्थिर प्लाज्मा प्रवाह बनाए रखा, एआई और सुपरकंडक्टिंग तकनीक से संलयन ऊर्जा को सस्ती व व्यवहार्य बनाने की दिशा में बड़ी सफलता मिली।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/china-created-history-by-maintaining-plasma-flow-in-artificial-sun/article-142197"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/11-(700-x-400-px)-(630-x-400-px)-(14)5.png" alt=""></a><br /><p>शंघाई। चीन के शंघाई शहर में स्थित स्टार्टअप एनर्जी सिंगुलैरिटी ने घोषणा की है कि उसके एचएच70 उच्च तापमान सुपरकंडक्टिंग (एचटीएस) टोकामक (कृत्रिम सूर्य) ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। इस नाभिकीय संलयन उपकरण ने 1,337 सेकंड तक निरंतर, लंबी अवधि के प्लाज्मा प्रवाह को बनाए रखने में सफलता हासिल की है।</p>
<p>सूर्य की नकल करने वाले परमाणु संलयन यंत्र को हमारी उर्जा जरूरतों को पूरा करने और कार्बन उत्सर्जन की चुनौतियों से निपटने के लिए एक प्रमुख उपकरण के तौर पर देखा जाता है।</p>
<p>चीन की पहली निजी संलयन ऊर्जा कंपनी के रूप में 2021 में स्थापित एनर्जी सिंगुलैरिटी ने जून 2024 में दुनिया के पहले एचटीएस टोकामक एचएच70 का निर्माण और संचालन पूरा किया था। इस उपकरण ने अब तक 5,755 प्रयोग किए हैं, जिसमें नवीनतम दौर ने हजार-सेकंड से अधिक तक उर्जा के स्थिर प्रवाह को प्राप्त किया है। इस स्तर तक स्थिर प्रवाह को प्राप्त करना एक शानदार उपलब्धि है क्योंकि प्लाज्मा बहुत गर्म होने के साथ ही बहुत अस्थिर होता है। </p>
<p>उल्लेखनीय है कि टोकामक से स्थाई उर्जा या बिजली प्राप्त करना तभी संभव है जब प्लाज्मा का प्रवाह लगातार स्थिर बना रहे। कंपनी के अनुसार, यह उपलब्धि एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) आधारित प्लाज्मा नियंत्रण प्रणाली के निरंतर अनुकूलन से संभव हुई है।</p>
<p>एनर्जी सिंगुलैरिटी के सह-संस्थापक डोंग गे ने कहा, यह सफलता केवल समय के बारे में नहीं है, बल्कि इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि यह दर्शाती है कि एचटीएस और एआई नियंत्रण प्रौद्योगिकियों का गहरा एकीकरण इंजीनियरिंग स्तर पर व्यवहार्य हो गया है। यह भविष्य के संलयन बिजली संयंत्रों के कम लागत और उच्च दक्षता वाले निर्माण का मार्ग प्रशस्त करता है।</p>
<p>डोंग ने कहा कि हमारा लक्ष्य संलयन ऊर्जा से बिजली की लागत को थर्मल पावर (तापीय ऊर्जा) के बराबर या उससे भी कम करना है। वर्तमान में, चीन सक्रिय रूप से खुद को संलयन ऊर्जा के लिए एक वैश्विक नवाचार केंद्र के रूप में स्थापित कर रहा है और एचटीएस टोकामक एवं लेजर फ्यूजन सहित कई तकनीकों में लगातार प्रयोग कर रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 06 Feb 2026 18:25:33 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>JK Laon Hospital में चोरी हो रहा था प्लाज्मा, ब्लड बैंक कर्मचारियों ने लैब टेक्नीशियन को रंगे हाथों पकड़ा, 76 बैग बरामद</title>
                                    <description><![CDATA[ जयपुर के जेके लॉन अस्पताल के ब्लड बैंक से प्लाज्मा चुराने का मामला सामने आया है। यहां ब्लड बैंक में काम करने वाला लैब टेक्नीशियन लंबे समय से प्लाज्मा चोरी कर रहा था। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/plasma-was-being-stolen-in-jk-lawn-hospital-blood-bank/article-76915"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-05/jl-laon.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। जयपुर के जेके लॉन अस्पताल के ब्लड बैंक से प्लाज्मा चुराने का मामला सामने आया है। यहां ब्लड बैंक में काम करने वाला लैब टेक्नीशियन लंबे समय से प्लाज्मा चोरी कर रहा था। ब्लड बैंक कर्मचारियों ने शनिवार को लैब टेक्नीशियन को रंगे हाथों पकड़ लिया। ब्लड बैंक इंचार्ज ने उससे पूछताछ की तो उसने प्लाज्मा चुराने की बात कबूल की। उधर जेके लॉन अस्पताल प्रशासन ने इस मामले में हाई लेवल कमेटी गठित कर जांच शुरू कर दी है। अस्पताल अधीक्षक डॉ. कैलाश मीणा ने सीनियर प्रो. डॉ. रामबाबू शर्मा की अध्यक्षता में गठित की हाई लेवल कमेटी में सीनियर प्रो. डॉ. कपिल गर्ग, आईएचटीएम एचओडी डॉ. बीएस मीणा, अति. अधीक्षक डॉ. मनीष शर्मा एवं उपाधीक्षक डॉ. केके यादव शामिल है। हाईलेवल कमेटी को तीन दिन में अपनी रिपोर्ट देने के निर्देश दिए हैं। इस गड़बड़ी से अस्पताल की छवि धूमिल हुई है। अस्पताल में बच्चों का इलाज कराने के लिए प्रदेशभर से लोग आते हैं। इस मामले से अस्पताल प्रशासन सवालों के घेरे में आता है कि क्या इतने बड़े अस्पताल के ब्लड बैंक में स्टॉक वैरीफिकेशन की कोई व्यवस्था नहीं थी। </p>
<p><strong>साथी कर्मचारियों ने पकड़ा</strong><br />जेके लॉन ब्लड बैंक इंचार्ज डॉ. सत्येन्द्र सिंह ने बताया कि लैब टेक्नीशियन कृष्णकांत कटारिया लंबे समय से प्लाज्मा चोरी कर रहा था। लैब में काम करने वाले दूसरे कर्मचारियों ने उसे रंगे हाथों पकड़ लिया था। पकड़े जाने के बाद तत्काल प्रभाव से लैब टैक्नीशियन की कार में काली थैली में रखे प्लाज्मा के 76 बैग भी जमा कराए। इसके बाद जब इस पूरे मामले की शुरुआती जांच की तो कृष्णकांत दोषी पाया गया। फिजिकल वैरिफिकेशन किया जा रहा है ताकि पता लग सके कि कृष्णकांत कब से और कितनी यूनिट प्लाज्मा चोरी कर चुका है। गौरतलब है कि प्लाज्मा गंभीर बीमारियों के मरीज के काम में आता है और डॉक्टरों की राय के बाद ही मरीज को चढ़ाया जाता है। </p>
<p>ब्लड बैंक की ओर से पैक में प्लाज्मा कम होने की लिखित शिकायत मिलने के बाद मामले की जांच के लिए हाई लेवल कमेटी गठित कर दी है। दोषियों पर कड़ी कार्रवाई होगी।<br /><strong>-डॉ. कैलाश मीणा, अधीक्षक, जेके लॉन हॉस्पिटल</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 06 May 2024 11:13:19 +0530</pubDate>
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                <title>Chandryaan 3 के रंभा पेलोड को चांद पर विरल प्लाज्मा मिला</title>
                                    <description><![CDATA[भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने कहा कि चंद्रयान-3 अंतरिक्ष यान के विक्रम लैंडर ने चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्र में प्लाज्मा का पता लगाया है, जो अपेक्षाकृत विरल है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/chandryaan-3s-rambha-payload-finds-rare-plasma-on-moon/article-56014"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-09/rambha.jpg" alt=""></a><br /><p>चेन्नई। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने कहा कि चंद्रयान-3 अंतरिक्ष यान के विक्रम लैंडर ने चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्र में प्लाज्मा का पता लगाया है, जो अपेक्षाकृत विरल है।</p>
<p>चंद्रयान-3 के लैंडर पर लगे हुए रेडियो एनाटॉमी ऑफ मून बाउंड हाइपरसेंसिटिव लोनोस्फीयर एंड एटमॉस्फियर- लैंगमुइर प्रोब (रंभा-एलपी) पेलोड ने दक्षिण ध्रुवीय क्षेत्र के ऊपर सतह के निकट चंद्र प्लाज्मा वातावरण का पहली बार माप किया है।</p>
<p>प्रारंभिक आकलन से संकेत मिला है कि चंद्रमा की सतह के पास प्लाज्मा अपेक्षाकृत विरल है। ये मात्रात्मक माप संभावित रूप से उस शोर को कम करने में सहायता करते हैं जो चंद्र प्लाज्मा रेडियो तरंग संचार के दौरान उत्पन्न होते है।</p>
<p>इसरो ने कहा कि इसके अलावा, वे भविष्य में चंद्र आगंतुकों के लिए उन्नत डिजाइन में योगदान दे सकते हैं। रंभा-एलपी पेलोड एक लैंगमुइर प्रोब है जिसे तिरुवनंतपुरम में विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र (वीएसएससी) की अंतरिक्ष भौतिकी प्रयोगशाला (एसपीएल) द्वारा विकसित किया गया है।</p>
<p>यह चंद्रयान-3 लैंडर पर लगा है, जो 23 अगस्त, 2023 को चंद्रमा की सतह पर सफलतापूर्वक उतरा है। रंभा-एलपी पेलोड को चंद्र प्लाज्मा वातावरण के इन-सीटू माप करने के लिए डिजाइन किया गया है। यह अंतरिक्ष का वह क्षेत्र है जो चंद्रमा की सतह के सबसे समीप है और जहां चंद्र प्लाज्मा सबसे घना है।</p>
<p>रंभा-एलपी पेलोड चंद्र प्लाज्मा वातावरण में इलेक्ट्रॉन घनत्व, तापमान और विद्युत क्षेत्र की माप करेगा। रंभा-एलपी पेलोड के आंकड़ों के प्रारंभिक आकलन से संकेत मिलता है कि चंद्रमा की सतह के पास प्लाज्मा अपेक्षाकृत विरल है।</p>
<p>इसका मतलब है कि अंतरिक्ष के इस क्षेत्र में ज्यादा इलेक्ट्रॉन नहीं हैं। चंद्र प्लाज्मा की विरलता महत्वपूर्ण है क्योंकि यह उसी तरीके से प्रभावित करता है जिस तरीके से रेडियो तरंगें अंतरिक्ष के माध्यम से फैलती हैं।</p>
<p>रम्भा-एलपी पेलोड द्वारा किया गया माप वैज्ञानिकों को चंद्र प्लाज्मा वातावरण को बेहतर ढंग से समझने में मदद करेगा। इसरो ने यह भी घोषणा किया कि चंद्रयान-3 इन-सीटू वैज्ञानिक प्रयोगों से पता चला है कि लैंडर पर चंद्र भूकंपीय गतिविधि (आईएलएसए) पेलोड  - पहला माइक्रो इलेक्ट्रो मैकेनिकल सिस्टम (एमईएमएस) प्रौद्योगिकी- चंद्रमा पर आधारित उपकरण - ने रोवर और अन्य पेलोड गतिविधियों को रिकॉर्ड किया है।</p>
<p>आईएलएसए पेलोड को एलईओएस, बैंगलोर द्वारा डिजाइन किया गया है और इसे यूआरएससी, बेंगलुरु द्वारा विकसित किया गया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 01 Sep 2023 13:41:24 +0530</pubDate>
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