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                <title>ncrb data - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>भारत में आत्महत्याओं का बढ़ता ग्राफ : एनसीआरबी डेटा से खुलासा, सुसाइड प्रिवेंशन में परिजनों-मित्रों की बड़ी भूमिका</title>
                                    <description><![CDATA[उन्हें सुनें और स्वीकारें, सहानुभूति रखें, बिना किसी तरह का आंकलन किए बात सुनें और आत्महत्या से जुड़ी किसी भी बात को गंभीरता से लें। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/increased-graph-of-suicides-in-india-revealed-to-ncrb-data/article-126387"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-09/copy-of-news-(3)4.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। आत्महत्याओं और आत्महत्या के प्रयासों का बढ़ता आंकड़ा भारत के लिए एक गंभीर चेतावनी है। एनसीआरबी के आंकड़े बताते हैं कि मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की कमी, सामाजिक कलंक और आर्थिक दबाव इस संकट को और गहरा रहे हैं। आत्महत्याओं के तरीकों में बदलाव और क्षेत्रीय भिन्नताएं इस बात की ओर इशारा करती हैं कि समाज के हर स्तर पर जागरूकता और हस्तक्षेप की जरूरत है। </p>
<p><strong>एक भयावह तस्वीर</strong><br />एनसीआरबी के 2022 के आंकड़ों के अनुसार, भारत में कुल 1.71 लाख आत्महत्याएं दर्ज की गईं,जो 2021 की तुलना में 4.2% अधिक थीं। प्रति लाख जनसंख्या पर आत्महत्या की दर 12.4 तक पहुंच गई,जो देश के इतिहास में सबसे अधिक है। 2023 और 2024 के लिए एनसीआरबी के पूर्ण आंकड़े अभी तक सार्वजनिक नहीं हुए हैं, लेकिन प्रारंभिक पुलिस और अस्पताल के रिकॉर्ड्स के आधार पर अनुमान लगाया जा रहा है कि यह संख्या और बढ़ी है। 2023 में कुछ राज्यों से प्राप्त आंशिक डेटा के अनुसार, आत्महत्याओं की संख्या में लगभग 2-3% की वृद्धि देखी गई।</p>
<p><strong>बदलता पैटर्न</strong><br />एनसीआरबी डेटा के अनुसार, आत्महत्याओं के तरीकों में पिछले तीन वषोंर् में महत्वपूर्ण बदलाव देखे गए हैं। </p>
<p><strong>फांसी</strong> 2022 में आत्महत्याओं का सबसे आम तरीका फ ांसी था, जो कुल आत्महत्याओं का लगभग 55% था। यह तरीका पुरुषों और महिलाओं दोनों में प्रचलित रहा, खासकर 18-45 आयु वर्ग में।</p>
<p><strong>जहर  </strong>जहर खाना दूसरा सबसे आम तरीका रहा, जो लगभग 25% मामलों में देखा गया। ग्रामीण क्षेत्रों में कीटनाशकों का उपयोग और शहरी क्षेत्रों में दवाइयों का दुरुपयोग इसकी प्रमुख वजह रही।</p>
<p><strong>कूदना</strong> ऊंची इमारतों या पुलों से कूदकर आत्महत्या के मामले खासकर शहरी क्षेत्रों में बढ़े हैं। 2022 में यह लगभग 8% मामलों में दर्ज किया गया।</p>
<p><strong>आत्मदाह</strong> आत्मदाह के मामले, विशेष रूप से महिलाओं में 5% से कम रहे, लेकिन सामाजिक और पारिवारिक दबाव से जुड़े होने के कारण ये मामले सुर्खियों में रहे।</p>
<p><strong>अन्य </strong>डूबना, रेलवे ट्रैक पर कूदना और हथियारों का उपयोग जैसे तरीके भी कुछ मामलों में सामने आए,  लेकिन इनका हिस्सा 10% से कम रहा।  </p>
<p><strong>प्रदेश में 6758 आत्महत्या के मामले</strong><br />एनसीआरबी के 2022 के आंकड़ों के अनुसार, राजस्थान में आत्महत्याओं की संख्या 6,758 रही, जो कुल राष्ट्रीय आंकड़ों का लगभग 4% है। आत्महत्या की दर प्रति लाख जनसंख्या पर 8.7 थी, जो राष्ट्रीय औसत (12.4) से कम रही। जयपुर, राजस्थान की राजधानी में 2022 में 1,021 आत्महत्याएं दर्ज की गईं, जो शहरी क्षेत्रों में मानसिक तनाव और आर्थिक दबाव को दर्शाता है। फासी 60% और जहर 20% आत्महत्याओं के प्रमुख तरीके रहे। 2023 और 2024 के लिए पूर्ण एनसीआरबी डेटा उपलब्ध नहीं है लेकिन जयपुर पुलिस के प्रारंभिक आंकड़ों के अनुसार, आत्महत्या के प्रयासों में 10-12% की वृद्धि देखी गई। 2023 में जयपुर में लगभग 1,500 आत्महत्या के प्रयास दर्ज हुए, जिनमें से 70% मामलों में समय पर हस्तक्षेप से जान बचाई गई। ग्रामीण राजस्थान में किसानों और मजदूरों में आत्महत्याएं प्रमुख रहीं, जबकि जयपुर में नौकरी, शिक्षा और रिश्तों से जुड़ा तनाव मुख्य कारण रहा। मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की कमी और सामाजिक कलंक इस संकट को और गहरा रहे हैं। </p>
<p><strong>सुसाइड प्रिवेंशन में परिजनों-मित्रों की बड़ी भूमिका, सकारात्मक संवाद जरूरी</strong><br />सुसाइड प्रिवेंशन में परिजनों-मित्रों की बड़ी भूमिका होती है। यह आवश्यक है कि हमारा ऐसे व्यक्ति के साथ जुड़ाव के साथ साथ एक सार्थक एवं सकारात्मक संवाद बना रहे। उन्हें सुनें और स्वीकारें, सहानुभूति रखें, बिना किसी तरह का आंकलन किए बात सुनें और आत्महत्या से जुड़ी किसी भी बात को गंभीरता से लें। उन्हें भावनाओं को साझा करने के लिए प्रेरित करना एवं इस बात का एहसास दिलाना कि आप उनके साथ हैं, ये एक आत्मविश्वास का भाव पैदा करता है । सुसाइड के कुछ वानिंर्ग साइन जैसे अत्यधिक उदासी या व्यवहार में अचानक परिवर्तन, नकारात्मक बातों पर जोर, अपनी कीमती एवं प्रिय वस्तुओं को अन्य लोगों को बांटना, हीनता एवं असहाय होने के भाव, मूड स्विंग्स इत्यादि का समय पर संज्ञान लेकर हम प्रोफेशनल हेल्प ले सकते हैं। <br />-डॉ. अखिलेश जैन, वरिष्ठ मनोचिकित्सक, ईएसआई हॉस्पिटल।</p>
<p><strong>चेतावनी संकेतों को समझने से आत्महत्या को रोका जा सकता है</strong><br />आत्महत्या के मामले सबसे ज्यादा 15 से 29 वर्ष के युवा, छात्र, किसान, दैनिक मजदूर और गृहिणियों में देखने को मिल रहे हैं। आत्महत्या के प्रमुख कारणों में पढ़ाई व करियर का दबाव, संबंधों-पारिवारिक समस्याएं और आर्थिक असुरक्षा शामिल हैं। चेतावनी संकेतों को अगर समझ लिया जाए तो आत्महत्या को रोका जा सकता है। इसके लिए में सामाजिक अलगाव, आत्मघाती बातें, अचानक व्यवहार में बदलाव और नशे की लत में वृद्धि जैसे संकेतों को समझ कर व्यक्ति से सकारात्मक संवाद और समर्थन जरूरी है। ऐसा करने से किसी का जीवन बचाया जा सकता है। सआशा और समर्थन ही सबसे बड़ी शक्ति है। <br />-डॉ. सुनील शर्मा, मनोचिकित्सक, मनोचिकित्सा केंद्र जयपुर।  </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 10 Sep 2025 09:50:14 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur PS]]></dc:creator>
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                <title>देश में आत्महत्या के 50 फीसदी मामले सिर्फ 5 राज्यों से, जानिए कौनसे राज्य और क्या कारण है इन आत्महत्याओं के </title>
                                    <description><![CDATA[देश में आत्महत्या के 50 प्रतिशत से अधिक मामले पांच प्रमुख राज्यों महाराष्ट्र, तमिलनाडु, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल और कर्नाटक में दर्ज किए जाते हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/ncrb-data-on-suicide-cases-in-india-hindi-news/article-56822"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-09/sucide.png" alt=""></a><br /><p>कोलकाता। देश में आत्महत्या के 50 प्रतिशत से अधिक मामले पांच प्रमुख राज्यों महाराष्ट्र, तमिलनाडु, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल और कर्नाटक में दर्ज किए जाते हैं।</p>
<p>राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के अनुसार, 2021 में देश में आत्महत्याएं के मामलों की कुल संख्या 1,64,033 थी। एनसीआरबी रिपोर्ट ने अगस्त 2022 में इस चौंकाने वाले डेटा का खुलासा किया। सोलास नामक एक गैर-लाभकारी गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) ने यहां एक मीडिया सम्मेलन के दौरान भारत सरकार के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि आंकड़े चिंताजनक हैं, 2021 में देश में दर्ज की गई आत्महत्याओं में 7.2 प्रतिशत की चिंताजनक वृद्धि हुई है और कुल संख्या 1,64,033 मामलों तक पहुंच गई है।</p>
<p>इन दुखद घटनाओं का महत्वपूर्ण हिस्सा मुख्य रूप से पांच राज्यों, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल और कर्नाटक में दर्ज किया गया था। रिपोर्ट में कहा गया है, कुल मिलाकर, सभी आत्महत्याओं के 50.4 प्रतिशत मामले देश के इन पांच राज्यों में दर्ज किए गए। </p>
<p>नई दिल्ली स्थित एनसीआरबी के आंकड़ों के अनुसार, आत्महत्या कई कारकों से हो सकती है, जैसे किसी के पेशे या करियर से संबंधित मुद्दे, अलगाव की भावना, दुव्र्यवहार, हिंसा, पारिवारिक संघर्ष, मानसिक स्वास्थ्य विकार, शराब की लत, वित्तीय असफलताएं, क्रोनिक दर्द, और भी बहुत कुछ।</p>
<p>सोलास संकटग्रस्त लोगों को परामर्श देकर आत्महत्या से निपटने का प्रयास कर रहा है। इसने कहा कि एनसीआरबी केवल पुलिस को रिपोर्ट किए गए मामलों से आत्महत्याओं के बारे में जानकारी इकट्ठा करता है। आत्महत्या के मामलों से निपटने के लिए काम कर रहे गैर सरकारी संगठनों और विशेषज्ञों का मानना है कि आत्महत्या के विचार वाले व्यक्ति अपने जीवन को समाप्त करने की इच्छा के बजाय अपने दर्द से राहत चाहते हैं।</p>
<p>प्रसिद्ध मनोचिकित्सक जय रंजन राम ने विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस के वार्षिक समारोह को चिह्नित करने के लिए लाइफलाइन फाउंडेशन के सोलास का अनावरण किया, जो आत्महत्या से बचे लोगों और उनके परिवारों के लिए एक नई सहायता समूह पहल है।</p>
<p>यहां प्रेस क्लब, कोलकाता में अनावरण कार्यक्रम में एक पैनल चर्चा भी हुई, जिसमें किसी प्रियजन की आत्महत्या के परिणामस्वरूप हुए आघात से निपटने में लोगों की मदद करने में सहायता समूहों की भूमिका पर ध्यान केंद्रित किया गया।</p>
<p>लाइफलाइन फाउंडेशन की ओर से संस्थापक और निदेशक सुक्षम ङ्क्षसह ने कहा कि आत्महत्या की प्रवृत्ति से जूझ रहे व्यक्ति संगठन के अनुभवी स्वयंसेवकों के साथ अपनी भावनाओं को खुलकर साझा कर सकते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 11 Sep 2023 15:37:28 +0530</pubDate>
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