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                <title>Medical Facilities - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>असर खबर का - खानपुर सीएचसी को मिले डॉक्टर, मिलेगी बेहतर चिकित्सा सुविधा</title>
                                    <description><![CDATA[ दैनिक नवज्योति ने इस मुद्दे को लेकर प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया था। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jhalawar/impact-of-news--khanpur-chc-receives-doctors--better-medical-facilities-now-available/article-146362"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/1200-x-60-px)16.png" alt=""></a><br /><p>खानपुर। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र खानपुर में चिकित्सकों की कमी के कारण मरीजों को हो रही परेशानियों को लेकर 'दैनिक नवज्योति' द्वारा प्रमुखता से समाचार प्रकाशित किए जाने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने त्वरित संज्ञान लिया है। विभाग ने जनहित में कदम उठाते हुए रिक्त पदों की पूर्ति के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की है। खानपुर सीएचसी में कार्यरत एक चिकित्सक का पीजी कोर्स के लिए चयन हो गया है। उच्च शिक्षा के लिए उनके कार्यमुक्त होने से अस्पताल में चिकित्सकों की भारी कमी हो गई थी, जिससे ओपीडी और आपातकालीन सेवाएं प्रभावित हो रही थीं। </p>
<p>दैनिक नवज्योति ने इस मुद्दे को लेकर प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया था। तत्काल नियुक्ति के आदेश समाचार के असर के चलते, विभाग ने सीएचसी असनवार में कार्यरत संविदा चिकित्सक डॉ. भूपेश पहाड़िया को अग्रिम आदेशों तक तत्काल प्रभाव से सीएचसी खानपुर में नियुक्त कर दिया है। कार्यालय द्वारा जारी आदेश के अनुसार, डॉ. पहाड़िया को दोपहर ही असनवार कार्यालय से कार्यमुक्त कर दिया गया है। उन्हें निर्देशित किया है कि वे बिना किसी विलंब के सीएचसी खानपुर में अपनी उपस्थिति सुनिश्चित करें ताकि स्वास्थ्य सेवाएं सुचारू रूप से संचालित हो सकें। क्षेत्र के ग्रामीणों ने 'दैनिक नवज्योति' का आभार जताते हुए कहा कि खबर के माध्यम से उनकी समस्या शासन तक पहुँची, जिससे अब मरीजों को बेहतर इलाज मिल सकेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>झालावाड़</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 13 Mar 2026 14:41:57 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>राजस्थान विधानसभा: देवेंद्र जोशी ने बोला चिकित्सा मंत्री खीवसर पर हमला, कहा-जोधपुर मेडिकल कॉलेज में सोनोग्राफी मशीन लगाने का प्रस्ताव विचाराधीन नहीं</title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान विधानसभा में विधायक देवेंद्र जोशी ने जोधपुर मेडिकल कॉलेज में सोनोग्राफी मशीनों की स्थिति का मुद्दा उठाया। चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने स्पष्ट किया कि वर्तमान में एमबी और टीवी अस्पताल में मशीनें सुचारू रूप से कार्य कर रही हैं। वर्ष 2025 में एक मशीन खराब हुई थी, किंतु फिलहाल नई मशीन का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/rajasthan-legislative-assembly-devendra-joshi-attacked-medical-minister-khivasar-and/article-145337"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/davendra-joshi.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर: राजस्थान विधानसभा में गुरुवार को जोधपुर मेडिकल कॉलेज में होली सोनोग्राफी टेस्ट की सुविधाओं को लेकर सवाल उठा। विधायक देवेंद्र जोशी के सवाल पर चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह खीवसर ने  जवाब दिया। गजेंद्र सिंह खींवसर ने कहा कि एक मशीन वर्ष 2025 में आउट ऑफ ऑर्डर हुई थी, अभी मशीन ऑपरेट कर रही है। नई मशीन लाने के लिए कोई प्रस्ताव नहीं है।</p>
<p>पुलिस सोनोग्राफी टेस्ट की एक मशीन एमबी हॉस्पिटल और एक टीवी हॉस्पिटल में है। दोनों मशीन टेस्ट के लिए अभी सही है। देवेंद्र जोशी ने पूछा कि सोनोग्राफी टेस्ट के लिए कितने केस आते हैं। मंत्री ने कहा कि विभाग के जरिए दो मशीन जोधपुर शहर में चल रही है। जनवरी 2025 से लेकर दिसंबर 2025 तक 6 टेस्ट कंडक्ट किया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 05 Mar 2026 14:08:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>राजस्थान विधानसभा में आमेर में चिकित्सा सुविधाओं को लेकर सदन में विपक्ष का हंगामा, मंत्री गजेंद्र खींवसर और विपक्ष के बीच छिड़ी बहस</title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान विधानसभा में आमेर में चिकित्सा सुविधाओं को लेकर जोरदार बहस और हंगामा हुआ। विधायक प्रशांत शर्मा ने पीएचसी और सैटेलाइट हॉस्पिटल की कमी पर सवाल उठाया। मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने जांच और शिफ्टिंग का आश्वासन दिया, लेकिन अचरोल हॉस्पिटल मुद्दे पर विपक्ष असंतुष्ट रहा।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/opposition-ruckus-in-rajasthan-assembly-over-medical-facilities-in-amer/article-143763"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/vidhan-sabha10.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान विधानसभा में आमेर में चिकित्सा सुविधाओं के मुद्दे पर पक्ष विपक्ष में जमकर बहस और हंगामा हुआ।</p>
<p>आमेर विधानसभा क्षेत्र के चिकित्सालय में उपलब्ध सुविधाओं को लेकर विधायक प्रशांत शर्मा के प्रश्न पर चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने कहा कि आमेर में एक सैटेलाइट सहित अन्य पीएचसी का जवाब भी दे दिया, एक्सरे और सोनोग्राफी की मशीनों को लेकर जहां तक प्रश्न है तो मैं उनकी जांच करवा कर देख लूंगा। मंत्री ने कहा कि इनका सैटेलाइट हॉस्पिटल एक हेरिटेज बिल्डिंग में है, दूसरी जगह इसको हम शिफ्ट करेंगे। जेडीए जब हमें जमीन देगा तब हम बनाएंगे। नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने कहा कि मंत्री कंफ्यूज हो गए, वह आमेर की नहीं अचरोल की पूछ रहे हैं। अचरोल में जो सैटेलाइट हॉस्पिटल मंजूर हुआ, उसको शिफ्ट कर दिया उस पर सवाल है। इस पर मंत्री ने उत्तर नहीं दिया। इस पर विपक्ष के सदस्य उत्तर नहीं मिलने पर हंगामा करने लगे।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 19 Feb 2026 12:51:54 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur KD]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>परियोजनाओं का समयबद्ध क्रियान्वयन करें, कोताही पर होगी सख्त कार्रवाई: सीएम भजनलाल शर्मा</title>
                                    <description><![CDATA[मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने 'राज उन्नति' बैठक में रेल, सड़क और स्वास्थ्य से जुड़ी नौ महत्वपूर्ण परियोजनाओं की समयबद्ध समीक्षा की।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/timely-implementation-of-projects-strict-action-will-be-taken-against/article-139967"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-05/bhajanlal-sharma.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की अध्यक्षता में शनिवार को सीएमओ में राज उन्नति की पहली बैठक हुई। इस दौरान उन्होंने लगभग 2 हजार करोड़ की सात परियोजनाओं और दो योजनाओं पर चर्चा करते हुए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को परियोजनाओं और योजनाओं का समयबद्ध क्रियान्वयन के लिए निर्देशित किया। साथ ही उन्होंने आमजन की परिवेदनाओं पर अधिकारियों से फीडबैक लेते हुए उन्हें राहत पहुंचाई।</p>
<p><strong>परिवेदनाओं की नियमित मॉनिटरिंग हो: </strong></p>
<p>सीएम ने जिला कलक्टर्स को निर्देश दिए कि आमजन की परिवेदनाओं की नियमित मॉनिटरिंग करते हुए उनका समय पर निस्तारण सुनिश्चित किया जाए। लंबित परिवादों के निस्तारण के लिए नोडल अधिकारी नियुक्त किए जाए। परियोजनाओं एवं योजनाओं के क्रियान्वयन में कोताही बरतने पर लापरवाह अधिकारियों और कार्मिकों पर सख्त कार्रवाई की जाए।</p>
<p><strong>कलेक्टरों को शीघ्र कार्य प्रारंभ के निर्देश</strong></p>
<p>मुख्यमंत्री ने जिला कलक्टर्स को विकास कार्यों में आवश्यक भू-आवंटन पर त्वरित कार्यवाही करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि भूमि आवंटन के बाद शीघ्र निविदा जारी कर कार्य प्रारंभ किया जाए। पीएम सूर्यघर योजना में राजस्थान को सिरमौर बनाने के लिए लोगों को प्रोत्साहित करें। साथ ही खराब ट्रांसफार्मर्स को तय सीमा में बदले। </p>
<p><strong>हीरापुरा बस टर्मिनल पर हो सभी सुविधाएं</strong></p>
<p>मुख्यमंत्री ने जयपुर के हीरापुरा बस टर्मिनल में बस रूटों के निर्धारण और यात्रियों के लिए शेड, पेयजल, पार्किंग सहित अन्य मूलभूत सुविधाओं से संबंधित कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने जयपुर जिला कलक्टर, जयपुर विकास आयुक्त एवं जयपुर नगर निगम आयुक्त को बस टर्मिनल से सुचारू यातायात सुनिश्चित करने के क्रम में आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए।</p>
<p><strong>परिवादों के निस्तारण का नियमित हो सत्यापन</strong></p>
<p>मुख्यमंत्री ने राजस्थान सम्पर्क हेल्पलाइन के चयनित परिवादियों से उनके परिवाद निस्तारण पर फीडबैक लिया। उन्होंने कहा कि शासन सचिव, संभागीय आयुक्त, जिला कलक्टर्स राजस्थान सम्पर्क हेल्पलाइन पर प्राप्त परिवादों का नियमित सत्यापन करें। शर्मा ने मुख्य सचिव को अधिकारियों के लिए सत्यापन के प्रकरणों की सीमा तय करने के लिए निर्देशित किया। </p>
<p><strong>ये भी दिए निर्देश...</strong><br />    <br />अजमेर-चंदेरिया ब्रॉडगेज दोहरीकरण परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण हो शीघ्र पूर्ण।<br />इसके लिए अजमेर, ब्यावर, भीलवाड़ा एवं चित्तौड़गढ़ जिलों में भूमि अधिग्रहण से संबंधित प्रक्रिया शीघ्र पूरी की जाएं।<br />श्रीगंगानगर, केसरीसिंहपुरा, श्रीकरणपुर, कोटा उत्तर, कोटा दक्षिण एवं सांगोद में सॉलिड वेस्ट प्रोसेसिंग प्लांट लगाएं।<br />65 निकायों में फिकल स्लेज ट्रीटमेंट प्लांट (एफएसटीपी), लोहावट (फलोदी) में खेल स्टेडियम<br />लाडनूं में उप जिला चिकित्सालय, कोटा, अजमेर और भरतपुर जिलों में बालिका सैनिक स्कूलों की स्थापना की प्रगति के निर्देश।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 18 Jan 2026 18:33:02 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कुशलगढ़ के लोगों को इलाज के लिए जाना पड़ता है 20 किमी दूर</title>
                                    <description><![CDATA[ चिकित्सा के अभाव में ग्रामीणों को झोला छाप डॉक्टर की शरण लेनी पड़ती है। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/people-of-kushalgarh-have-to-go-20-km-away-for-treatment/article-120671"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-07/8842roer30.png" alt=""></a><br /><p>रावतभाटा। रावतभाटा उपखंड के ग्राम पंचायत कुशलगढ़ का प्रधानमंत्री आयुष्मान आरोग्य केंद्र या उप स्वास्थ्य केंद्र एक साल पहले करीब 42 लाख रुपए की राशि खर्च पर बनाकर दिया गया। लेकिन विभाग द्वारा नियुक्त एएनएम और आशा सहयोगिनी कई महीनो से आती ही नहीं। जिस कारण उप स्वास्थ्य केंद्र पर निरंतर ताला जड़ा रहता है। जानकारी के अनुसार यहां करीब 14 छोटे गांवों की लगभग 10 हजार की भील और अन्य पिछड़ी जाति के लोग निवास करते हैं। चिकित्सा के अभाव में ग्रामीणों को झोला छाप डॉक्टर तक की शरण लेनी पड़ती है। कच्चे सड़क मार्ग और 20 किलोमीटर के लंबे सफर को तय कर ग्रामीण मरीजों को लेकर रावतभाटा उप जिला अस्पताल तक आते हैं। कई मर्तबा तो प्राथमिक उपचार कर मरीजों को अधिकांश कोटा रैफर कर दिया जाता है। ऐसे में दैनिक मजदूरी करने वाले गरीबों को ना तो चिकित्सा व्यवस्था गांव में मिलती है ना ही रावतभाटा उप जिला अस्पताल में मरीज और परिजन दर-दर की ठोकरे खाने को मजबूर होते हैं।</p>
<p>मेरी पत्नी सरपंच है और मैं सरपंच प्रतिनिधि हूं। हमारी कुशलगढ़ पंचायत में यह चिकित्सा केंद्र 1 वर्ष पूर्व बन गया है। लेकिन आज तक यहां ना तो कोई जीएनएम आई है और ना ही कोई एएनएम या आशा सहयोगीनी। <br /><strong>- कालू भील, सरपंच प्रतिनिधि</strong></p>
<p>कुशलगढ़ पंचायत में आने-जाने का मार्ग सही नहीं है। साथ ही साथ जब हम यहां से पेशेंट को लेकर रावतभाटा 20 किलोमीटर की दूरी तय करके पहुंचते हैं तो वहां के डॉक्टर उन्हें वहां से कोटा के लिए रेफर कर देते हैं।<br /><strong>- पीरु, ग्रामीण</strong></p>
<p>एएनएम की नियुक्ति की गई है और वो क्षेत्र में कार्य भी कर रही है। <br /><strong>- डॉक्टर अनिल जाटव, मुख्य ब्लॉक चिकित्सा अधिकारी </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 16 Jul 2025 15:08:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>चिकित्सा सुविधाओं की कमी नहीं, रेगुलेटरी सिस्टम में खामियां</title>
                                    <description><![CDATA[डॉक्टर व मरीज के मध्य संबंधों को ठीक करने की जरूरत, सरकारी ही नहीं निजी अस्पताल भी काउंसलर और हेल्प डेस्क को मजबूत करें।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/there-is-no-lack-of-medical-facilities--there-are-flaws-in-the-regulatory-system/article-111836"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-04/news47.png" alt=""></a><br /><p>कोटा । दैनिक नवज्योति कार्यालय में होने वाली मासिक परिचर्चा की श्रंखला में बुधवार को चिकित्सा व्यवस्था पर चर्चा की गई। आर क्वालिटी हेल्थकेयर फैसिलिटी इजीली असेसिबल टू एवरी वन इन कोटा विषय पर आयोजित इस परिचर्चा में गुणवत्ता पूर्ण स्वास्थ्य सेवा आसानी से लोगों को उपलब्ध हो रही हैं अथवा नहीं। पर चर्चा की गई। परिचर्चा में हिस्सा लेने वाले प्रतिभागियों ने सुधार के सुझाव और खराब स्थितियों से होने वाली व्यवस्था पर भी प्रकाश डाला। परिचर्चा में सामने आया कि शहर ही नहीं ग्रामीण इलाकों तक चिकित्सकीय सुविधाएं उपलब्ध हैं। लेकिन सिस्टम की कमी है। पीएचसी,सीएचसी होने के बावजूद लोग बड़े अस्पताल की ओर मुंह करते हैं। इससे सारा भार बड़े अस्पतालों पर पड़ता है और सारी व्यवस्था तहस-नहस हो जाती है। इस व्यवस्था को बिगाडने में केवल आम लोग ही नहीं मरीज, चिकित्सा व्यवस्था से जुड़े  सभी लोग शामिल हैं। इसके लिए जागरुकता आनी चाहिए। अस्पतालों में काउंसलर और हेल्प डेस्क के साथ पूछताछ और इमरजेंसी सेवा की खामियों को भी पुखता करने की आवश्यकता है। इस परिचर्चा में मेडिकल कॉलेज के पूर्व प्राचार्य,आईएमए के अध्यक्ष, पूर्व अध्यक्ष, सीएमएचओ के अधिकृत प्रतिनिधि,श्री राम मंदिर चिकित्सालय के सभापति, नर्सिंंग कॉलेज के डायरेक्टर,सहायक कर्मचारियों के अध्यक्ष, कोटा हार्ट अस्पताल,भाजपा चिकित्सा प्रकोेष्ठ के संयोजक,पैथालाजिस्ट, रेडियोलॉजिस्ट,नर्सिंग सहित मरीज और उनके तीमारदारों ने भी हिस्सा लिया। प्रस्तुत हैं परिचर्चा के अंश... </p>
<p><strong>मुख्य बिंदु</strong><br />- पीएचसी, सीएचसी जिला अस्पताल की सेवाओं को मजबूत करने की आवश्यकता। <br />- अस्पतालों में बने हेल्पडेस्क।  ल्ल मरीज को सिंगल विंडो पर ही मिले सारी सुविधा<br />- इमजेंसी सेवाओं को बेहतर बनाने की आवश्यकता। <br />- डॉक्टर व मरीज के बीच का संवाद बेहतर हो। <br />- अस्पताल की वेबसाइट बने जिस अस्पताल का पूरा विवरण, डॉक्टरों ओपीडी डे, सुविधा हो जानकारी<br />- अस्पतालों में लगने वाली कतार व्यवस्था सुधार हो।<br />- डॉक्टर से मिलने के लिए आॅनलाइन रजिस्टेशन हो साथ ही बैक की तर्ज पर टोकन सुविधा हो।<br />- हेल्पडेस्क के साथ अस्पतालों में काउंसलर लगाए जो मरीजों बीमारी के लिए गाइड कर सकें। <br />- अस्पताल की सुविधाओं को ब्रोशर होना चाहिए।<br />- रेफर सिस्टम में सुधार की आश्यकता है। <br />- प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों का उपयोग कम हो रहा है, जिससे बड़े अस्पतालों भीड़ बढ़ रही है।<br />-  मरीज को डॉक्टर के पहुंचने के लिए एक चेनल की आवश्यकता है।<br />- आम आदमी को बीमार पड़ने नहीं है हक<br />- दवा जांच से चल रहे कमीशन के अंकुश लिए कानून बनना चाहिए। <br />- रजिस्टर्ड व एमडी पैथेलॉजिस्ट से ही जांच हो, बिना लाइसेंस के चल रही जांच केंद्र लगें अंकुश<br />- सरकारी योजनाओं को ठीक से क्रियान्वयन हो तभी आम आदमी तक सुलभ व सस्ता इलाज मिलेगा।</p>
<p><strong>प्राथमिक चिकित्सा व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता</strong><br />कोटा में सस्ती, सुलभ और गुणवत्ता युक्त चिकित्सा व्यवस्था मौजूद है। आम आदमी इन सुविधाओं को ठीक से उपयोग नहीं कर पा रहा है। इसके लिए उचित माध्यम को ठीक करने की आवश्यकता है। जब तक प्राथमिक स्तर की चिकित्सा व्यवस्था में सुधार नहीं होगा तब तक अस्पतालों में लंबी कतारें लगेंगी। प्राथमिक स्तर पर ही लोगों इलाज मिलेगा तो बड़े अस्पतालों में भीड़ कम होगी तो सुपर स्पेशियलेटी सुविधा लोगों को बेहतर तरीके से मिल सकेंगी। अभी लोग प्राथमिक स्तर की बीमारियों के लिए भी बड़े अस्पतालों में दौड़ लगा रहे हैं। अस्पताल में लोगों को इलाज के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। अस्पताल में मरीज को हेल्प डेस्क और काउंसलर की आवश्यकता है। उसको यह ही पता नहीं उसको जाना किस डॉक्टर के पास है। <br /><strong>-डॉ. के श्रृंगी, एमआईए अध्यक्ष कोटा</strong></p>
<p><strong>इमरजेंसी सुविधाओं को बेहतर बनाने की आवश्यकता</strong><br />वर्तमान में कोटा में आमजन के लिए बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध है। यहां मरीज के पास अस्पताल से लेकर स्पेशलिस्ट डॉक्टर चुनने की सुविधा है।  आमजन को बीमारी का इलाज कराने के लिए कई विकल्प उपलब्ध है। सरकार द्वारा चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं और खासतौर से मुख्यमंत्री आरोग्य योजना मां योजना में 85 प्रतिशत लोग कवर है। बाकी शेष लोग आरजीएचएस में कवर, मुख्यमंत्री नि:शुल्क निरोगी योजना में सभी लोग कवर है।  चिकित्सा सुविधा पूरी है लेकिन लोगों का अस्पताल में अनुभव कैसा रहा है इसी पर सारा सिस्टम चलता है। डॉक्टर ने मरीज को इलाज के दौरान कैसा फील कराया यह मायने रखता है। लोगों में कम्युनिकेशन और इमजेंसी में मरीज को ठीक से सुविधा युक्त इलाज मिल जाए तो यहां किसी चीज की कमी नहीं है। इमरजेंसी में आने वाले मरीजों के लिए एमडी स्तर के काउंसर हों जो मरीज से ठीक से संप्रेषण कर सकें। <br /><strong>-डॉ. विजय सरदाना, पूर्व प्रधानाचार्य मेडिकल कॉलेज कोटा।</strong></p>
<p><strong>व्यवस्था में सुधार की जरूरत </strong><br />आमजन को कोटा में और शहरों की अपेक्षा बेहतर चिकित्सा सुविधाएं मिल रही है। यहां संसाधन की कोई कमी नहीं है। मरीज के पास इलाज के लिए मल्टीपल चॉइस है। अलग अलग बीमारी के लिए सर्व सुविधाओं से लेस सरकारी व निजी अस्पताल मौजूद है। अन्य शहरों में कोटा में इलाज सस्ता है। उसके बावजूद मरीज संतुष्ट नहीं हो पा रहा है। मरीज  अपने को  जांच, इलाज के नाम पर ठगा ठगा सा महसूस करता है पीएचसी व सीएचसी स्तर पर सुविधाएं बेहतर करने की आवश्यकता है। सरकार की ओर से कई योजनाए चलाई जा रही जिससे आमजन को सस्ता और सुलभ इलाज मिल रहा है। चिकित्सक व मरीज में संप्रेषण अच्छा करने की आवश्यकता है। निजी व सरकारी डॉक्टर को अपने पैसे को इमानदारी से करने की आवश्यकता है। डाक्टरों पर बेवजह तोहमत लगाई जाती है। व्यवस्था की खामियां चिकित्सकों को भुगतनी पड़ती हैं। <br /><strong>-डॉ. सुधीर उपाध्याय सभापति श्रीराम मंदिर चिकित्सालय</strong></p>
<p><strong>कोटा में स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता आसान</strong><br />विदेशों की तुलना में देश और कोटा में स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता काफी आसान है। यहां मरीज अपनी पसंद के डॉक्टर व अस्पताल में कम से कम खर्च में बेहतर उपचार ले सकता है। डॉक्टर भी आसानी से मरीज की एप्रोच में हैं। कई बार मरीज के एनवक्त पर आने से उसे सही उपचार मिलने में देरी हो सकती है। डॉक्टरों व नर्सिंग स्टाफ के पास कार्यभार अधिक होने से परिस्थितिवश विवाद की स्थिति बन सकती है। जो लोग परेशान होते हैं वह अज्ञानता व जागरूकता की कमी के कारण होते है। अस्पतालों में हैल्प डेस्क बनाई जाएं और सरकारी योजनाओं को सही ढंग से लागू कर दिया जाए तो कोटा जैसी स्वास्थ्य सेवाएं कहीं नहीं हैं। कोरोना में कोटा जैसी मेडिकल सुविधाएं कहीं नहीं मिली। <br /><strong>-डॉ. अमित व्यास, संयोजक, भाजपा चिकित्सा प्रकोष्ठ</strong></p>
<p><strong>प्रशिक्षित स्टाफ की कमी, सुविधाओं का लाभ नहीं</strong><br />कोटा संभागीय मुख्यालय है। यहां मेडिकल कॉलेज व सुपर स्पेशलिटी जैसे अस्पताल है। डॉक्टर भी विशेषज्ञ हैं। लेकिन कई बार सरकारी व प्राइवेट अस्पतालों में नर्सिंग स्टाफ के प्रशिक्षित नहीं होने से मरीजों को सही उपचार नहीं मिल पाता है। जिससे मरीजों को उपचार कम और दर्द अधिक  सहना पड़ता है। साथ ही सरकार की योजनाएं भी हैं लेकिन सरकारी अस्पतालों में अधिकतर समय जांच मशीनें खराब होने से मरीजों को सुविधाएं नहीं मिल पाता है। स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने व आम आदमी की पहुंच तक बनाने के लिए व्यवस्थाओं में सुधार करने की जरूरत है। <br /><strong>-मधु ललित बाहेती, अध्यक्ष लॉयंस क्लब कोटा सेंट्रल</strong></p>
<p><strong> गांव से लेकर शहर तक चिकित्सा सुविधाएं बेहतर हुई</strong><br />चिकित्सा एंव स्वास्थ्य विभाग की ओर से प्राथमिक चिकित्सा सुविधाओं को काफी बेहतर किया है। पीएचसी व सीएचसी पर अब सीजेरियन आॅपरेशन होने लगे हैं। साथ ही शहरी व ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों पर डॉक्टर से लेकर जांचों की सुविधाएं पूरी उपलब्ध है। उपस्वास्थ्य केंद्र,पीएचसी सीएचसी पर जांच इलाज और भर्ती करने सुविधाएं है। लोग बेहतर के चक्कर में शहर के बड़े अस्पतालों की ओर आते है।  प्राथमिक स्तर पर सोनोग्राफी, एक्सरे और सभी प्रकार की जांचे तक उपलब्ध हैं। सरकार ने विशेषज्ञ डॉक्टर भी सीएचसी पीएचसी पर लगा रखे हंै। सरकार की ओर से चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं को आमजन तक बेहतर तरीके से पहुंचाया जा रहा है। टीकाकरण से लेकर बच्चों के स्वास्थ्य गर्भवती महिलाओं सोनोग्राफी के लिए वाउचर जैसी सुविधा से काफी लाभ मिल रहा है। <br /><strong>-डॉ. अनिल मीणा, एसएमडी सीएमएचओ आॅफिस</strong></p>
<p><strong>नर्सिंग स्टाफ का समय-समय पर हो प्रशिक्षण</strong><br />सरकारी और निजी अस्पतालों में कार्यरत नर्सिंग स्टाफ कोर्स करने के बाद ही लगते हैं। लेकिन समय-समय पर उनका रिफ्रेशर कोर्स व प्रशिक्षण किया जाना आवश्यक है। जबकि कोर्स में प्रावधान है। लेकिन कई बार किसी कारणवश स्टाफ की गलती के कारण मरीज को परेशानी का सामना करना पड़ता है तो उससे पूरे अस्पताल की छवि पर प्रभाव पड़ता है। यदि ट्रेनिंग में उन्हें उनके काम के साथ-साथ मरीज को हैंडल करना भी सिखाया जाएगा तो जो छोटी-छोटी समस्याएं आती हैं उनका समाधान हो जाएगा। <br /><strong>-डॉ. सुधीश शर्मा, डायरेक्टर नर्सिंग कॉलेज</strong></p>
<p><strong>लोगों में जागरूकता की कमी</strong><br />कोटा में स्वास्थ्य सेवाएं अन्य शहरों की तुलना में काफी बेहतर है। लेकिन लोगों में जागरूकता की कमी है। जिसके कारण कई बार बीमारी में उन्हें परेशान होना पड़ता है। शहर के लोगों को तो डॉक्टर से लेकर मेडिकल स्टोर तक की जानकारी है। लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले मरीजों को सही जानकारी नहीं होने से वे मेडिकल स्टोर  पर जाकर अच्छे डॉक्टरों की जानकारी लेते है।  वहीं जहां तक दवाई का सवाल है दवाईयां अधिकतर जिस डॉक्टर को दिखाया उसके नजदीक मेडिकल स्टोर पर ही मिलती है।  लेकिन जब मरीज को उसकी सुविधा अनुसार जगह पर दवाई नहीं मिलती तो वह परेशान होता है। दवाईयां ऐसी लिखी जाएं जिनकी उपलब्धता आसान होगी तो मरीज की आधी परेशानी दूर हो जाती है। मरीज पैसा खर्च करने को तैयार है लेकिन वह सही उपचार व दवाई चाहता है जिससे वह समय रहते ठीक हो सके। इसके लिए व्यवस्था  में थोड़े सुधार की जरूरत है। <br /><strong>-भजन भगवानी, मेडिकल शॉप आनर,सह संयोजक चिकित्सा प्रकोष्ठ</strong></p>
<p><strong>ओपीडी क्रिएटिव होनी चाहिए</strong><br />अस्पताल में मरीज ओपीडी में आए तो उसको गुड फिल होना चाहिए। अस्पतालों की ओपीडी क्रिएटिव होनी चाहिए। हेल्दी वातावरण मरीज को मिलेगा तो आधी बीमारी वैसे ही ठीक हो जाएगी। डॉक्टर को मरीज की केस हिस्ट्री लेने के दौरान मरीज को सकारात्क करना जरूरी है। जिससे मरीज का डॉक्टर पर विश्वास बढ़ता है। मरीज बेहतर सुविधा और बेहतर इलाज में विश्वास करता है। वो अस्पताल में शत प्रतिशत अटेंशन की अपेक्षा के साथ आता उसकी अपेक्षा में खरा उतरने की जरुरत है। <br /><strong>-डॉ. अभिषेक राठौड़, न्यूरोलोजिस्ट कोटा हार्ट</strong></p>
<p><strong>शुरुआत में सुविधा मिलेगी तो नहीं होंगे मरीज परेशान</strong><br />सरकारी अस्पतालों में आने वाले मरीजों की संख्या तो काफी अधिक रहती है। उनमें अधिकतर गम्भीर व एक्सीडेंट वाले भी होते है। जिन्हें सबसे पहले स्ट्रेचर की जरूरत होती है। लेकिन वही पर्याप्त नहीं होने से मरीजो की परेशानी उसी से बढ़ने लगती है। जबकि स्ट्रेचर चलाने से लेकर संविदा पर कार्यरत अन्य कर्मचारी कम मानदेय मिलने पर भी सेवाएं देता है। लेकिन संवेदक द्वारा समय पर मानदेय तक नहीं देने से उनकी समस्याएं अधिक हो जाती है। जिस कारण से संविदा कर्मियों को मजबूरन हड़ताल करनी पड़ती है। मरीज को यदि शुरुआत में ही सुुविधाएं बेहतर मिलने लगेंगी तो किसी तरह की समस्या ही नहीं होगी। <br /><strong>-दिलीप सिंगोर, जिलाध्यक्ष ठेका संघ, मेडिकल कॉलेज कोटा </strong></p>
<p><strong>मरीज व डॉक्टर के रिश्ते मधुर होने चाहिए</strong><br />कोटा के सरकारी व निजी अस्पतालों में अन्य जिलों से चिकित्सा व्यवस्थाएं काफी बेहतर है। दिल्ली, मुंबई, अहमदाबाद और जयपुर में होने वाले जटिल आॅपरेशन कोटा में कम खर्च में हो जाते है। जिससे मरीजों की बड़े शहरों की दौड़ कम हुई है। हार्ट, किडनी, कैंसर जैसी बीमारियों का कोटा में मरीजों को बेहतर इलाज मिल रहा है। कोटा में डॉक्टर और मरीज के रिश्ते मधुर होने चाहिए। साथ अस्पतालों काउंसर और नर्सिंग स्टॉफ समय समय पर ट्रेनिंग कराकर चिकित्सा सुविधाओं हुए नवाचार लिए प्रशिक्षत करना चाहिए। <br /><strong>-डॉ. ओमप्रकाश धाकड़, कोटा हार्ट इंस्टीट्यूट</strong></p>
<p><strong>दस साल में स्वास्थ्य सेवाओं में हुआ सुधार</strong><br />देश और विशेष रूप से कोटा में दस साल पहले और वर्तमान की स्वास्थ्य सेवाओं में जमीन आसमान का अंतर है। पहले की तुलना में वर्तमान में स्वास्थ्य सेवाएं कोटा में बेहतर हुई है। केन्द्र व  व राज्य सरकार स्वास्थ्य के क्षेत्र में खूब खर्चा कर रही है। यहां जांच के लिए एक से बढ़कर एक प्रयोगशालाएं हैं। जहां बिना पैथोलोजिस्ट के हस्ताक्षर के जांच रिपोर्ट नहीं दी जाती। यह जरूर है कि लैब अधिक हैं और उनमें प्रशिक्षत टैक् नीशियन की कमी हो सकती है। यह पेशा विश्वास का है। 2014 से पहले जहां देश में 6 करोड़ लोगों की मौत इलाज नहीं मिलने के कारण हो जाती  थी। वैसे स्थिति अभी नहीं है। कोटा में डॉक्टरों की उपलब्धता से लेकर जांच तक की सुविधाएं आसानी से उपलब्ध हो रही हैं।  <br /><strong>-डॉ. गोपाल सिंह भाटी, पैथोलोजिस्ट इंडिपेंडेंट डायरेक्टर सेल इंडिया</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 24 Apr 2025 13:02:56 +0530</pubDate>
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                <title>डॉक्टर नदारद, चिकित्सा सुविधा चौपट</title>
                                    <description><![CDATA[ग्रामीणों ने अस्पताल में कर्मचारियों की मनमानी को लेकर इस मामले की शिकायत प्रभारी मंत्री से की।  
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jhalawar/doctors-absent--medical-facilities-in-shambles/article-103493"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-02/257rtrer-(3)10.png" alt=""></a><br /><p>सुनेल। राजस्थान सरकार ने आमजन को स्वास्थ्य सेवाएं बेहतर मुहैया कराने के लिए करोड़ों रुपए खर्च करके जनकल्याणकारी योजनाएं चलाई जा रही है, वहीं दूसरी ओर अस्पताल में समय से कर्मचारी नहीं पहुंच रहे हैं। रोगियों को खासी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। आलम यह है कि डॉक्टर व नर्सिंगकर्मी अस्पतालों में ड्यूटी पर नहीं जाते है, जिसकी वजह से योजनाओं व गुड़ गवर्नेंस की धज्जियां उड़ती नजर आ रही है। जिससे लोगों को चिकित्सा सेवाओं का फायदा नहीं मिल पा रहा है। ऐसा ही मामला सुनेल क्षेत्र के ढाबला खींची सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में आया है जिसमे 30 बेड का यह बड़ा अस्पताल है यहां पर चार डॉक्टर  नियुक्त  है जिसमें  केवल चिकित्सा अधिकारी प्रभारी डॉ केके वर्मा ही अस्पताल में सेवाएं देते देखा जाता  हैं। बाकी के तीन डॉक्टर ने अपने दिन बांट रखे हैं उनकी मर्जी पड़ती है जब आते हैं उनकी मर्जी पड़ती जब चले जाते है। इनके आने जाने पर कोई रोकने टोकने वाला नहीं है। वही नर्सिंग कर्मियों के हालात इससे भी खराब है। अस्पताल में कार्यरत दो नर्सिंग कर्मी तो महीने में केवल एक बार हाजरी रजिस्टर में साइन करने के लिए ही आते हैं। ऐसे में ढाबलाखींची सहित आसपास के क्षेत्र के लोगों को स्वास्थ्य सेवाओं के लिए दर-दर भटकने को मजबूर होना पड़ रहा है। </p>
<p><strong>ग्रामीणों ने प्रभारी मंत्री को की शिकायत</strong><br />ग्रामीणों ने अस्पताल में कर्मचारियों की मनमानी को लेकर इस मामले की शिकायत प्रभारी मंत्री से की। जिसके बाद चिकित्सा विभाग हरकत में आया। ग्रामीणों ने बताया कि चिकित्सक व नर्सिंगकर्मी अस्पताल में ड्यूटी समय पर नहीं आते है और आते है तो सिर्फ हाजिरी रजिस्टर में साइन करके वापस चले जाते है। </p>
<p><strong>शाम व रात को इमरजेंसी सुविधा नहीं</strong><br />ढाबला खींची अस्पताल में शाम व रात को तो हालात और भी खराब है ना तो कोई डॉक्टर इमरजेंसी में उपलब्ध होता है और ना ही नर्सिंग कर्मी ,ऐसे में क्षेत्र के ग्रामीण इमरजेंसी के समय मजबूरन अस्पताल में कोई नहीं होने की वजह से सुनेल व अन्य जगहों पर जाने को मजबूर होते हैं।</p>
<p>इस मामले की जानकारी उच्च अधिकारियों को अवगत करा रखी है।<br /><strong>- केके वर्मा, चिकित्सा प्रभारी ढाबलाखींचीं</strong></p>
<p>अस्पताल के मामले को लेकर इसकी जांच कर कार्यवाही की जाएगी।<br /><strong>- दिनेश कुमार मीणा, एसडीएम पिड़ावा</strong></p>
<p>ऐसा मामला है तो इसकी जांच कर कड़ी कार्रवाई करवाई जाएगी।<br /><strong>- ममता तिवारी, अतिरिक्त संभागीय आयुक्त कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>झालावाड़</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 07 Feb 2025 17:05:33 +0530</pubDate>
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                <title>चिकित्सा सुविधा देना प्राथमिकता, जनजाति क्षेत्रों के विकास को मिलेगी नई गति : भजनलाल शर्मा</title>
                                    <description><![CDATA[विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों ने जनजाति क्षेत्र में शिक्षा, चिकित्सा स्वास्थ्य, रोजगार, कृषि, जैविक खेती, पशुपालन, संस्कृति संरक्षण एवं पोषण के संबंध में सुझाव साझा किए। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/giving-priority-to-medical-facilities-will-give-new-impetus-to/article-101154"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-01/257rtrer-(1)23.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने सीएमओ में चिकित्सा और स्वास्थ्य तथा जनजाति क्षेत्रीय विकास के प्रतिनिधियों के साथ बजट पूर्व संवाद किया। सीएम ने कहा कि प्रदेशवासियों को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। साथ ही आगामी बजट में जनजाति क्षेत्रों के विकास को नई गति मिलेगी। चिकित्सा के महत्व को समझते हुए हमने गत बजट में चिकित्सा के लिए कुल बजट का रिकॉर्ड 8.26 प्रतिशत आवंटित किया।</p>
<p><strong>स्वस्थ राजस्थान के संकल्प को गति मिलेगी</strong><br />चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेन्द्र सिंह खींवसर ने विश्वास जताया कि हम सभी के सहयोग से स्वस्थ राजस्थान के संकल्प को गति मिलेगी। बैठक में चिकित्सकों ने प्रदेश में ट्रांसप्लांट सर्विस को और विकसित करने, हैल्थ सेक्टर में पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप को और बढ़ाने, हैल्थ रिसर्च में बढ़ोतरी, मेडिकल ट्यूरिज्म और हैल्थ सेक्टर में ट्रेनिंग तथा आमजन में हैल्थ के प्रति जागरूकता बढ़ाने सहित विभिन्न विषयों पर सुझाव दिए।  </p>
<p><strong>अब तक 6 करोड़ लोगों की बनी आभा आईडी</strong><br />सीएम ने चिकित्सा क्षेत्र से जुडे संस्थानों के प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए कहा कि लोगों का हैल्थ रिकॉर्ड डिजीटली सुरक्षित रखने के लिए प्रदेश में करीब 6 करोड़ लोगों की आभा आईडी बनाई जा चुकी है, इसमें राजस्थान देश में दूसरे स्थान पर है। प्रदेश में 11 हजार 571 संस्थान आयुष्मान आरोग्य मंदिर के रूप में क्रियाशील किए जा चुके हैं, इनसे करोड़ों लोग लाभान्वित हुए हैं। प्रदेश की चिकित्सा सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए पिछले एक साल में अनेक कदम उठाए गए हैं। चिकित्सा विभाग में लगभग 50 हजार पदों पर भर्ती का लक्ष्य है, जिसे हम जल्द पूरा करेंगे। आमजन के लिए ई-संजीवनी के माध्यम से टेलीमेडिसिन की सुविधा, एक लाख 67 हजार स्वास्थ्य शिविर का आयोजन और प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि केन्द्रों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी की गई है।</p>
<p><strong>सुझावों का विश्लेषण कर बजट में किया जाएगा शामिल</strong><br />मुख्यमंत्री ने जनजाति क्षेत्रीय विकास विभाग के हितधारकों के साथ बजट पूर्व बैठक को संबोधित करते हुए आश्वस्त किया कि जनजाति क्षेत्र के विकास व उत्थान से संबंधित विषयों पर मिले सुझावों का उचित परीक्षण कर आगामी बजट में शामिल करने का प्रयास किया जाएगा, ताकि आगामी बजट में जनजाति क्षेत्रों के विकास को और गति दी जा सके। राज्य सरकार का प्रयास है कि सभी वर्गों एवं उनके लिए कार्य करने वाली संस्थाओं की भागीदारी सुनिश्चित करते हुए समावेशी बजट तैयार किया जाए। जनजाति समुदाय के योगदान को सम्मानित करने के लिए आदि गौरव सम्मान दिया जा रहा है। जनजाति क्षेत्र का विकास देश और प्रदेश की समावेशी प्रगति का आधार है तथा आदिवासी कल्याण एवं सशक्तीकरण से ही प्रदेश का सर्वांगीण एवं समावेशी विकास सुनिश्चित होता है। जनजाति क्षेत्रीय विकास मंत्री बाबूलाल खराड़ी ने कहा कि सरकार जनजाति क्षेत्र को विकास की धारा से जोड़ने के लिए निरन्तर प्रयास कर रही है। विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों ने जनजाति क्षेत्र में शिक्षा, चिकित्सा स्वास्थ्य, रोजगार, कृषि, जैविक खेती, पशुपालन, संस्कृति संरक्षण एवं पोषण के संबंध में सुझाव साझा किए। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 18 Jan 2025 10:07:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title> हिंडोली अस्पताल में डॉक्टर और स्टाफ की कमी, मरीजों का बढ़ा रहे दर्द</title>
                                    <description><![CDATA[आॅपरेशन थिएटर के समान जंग खा गए लेकिन डेढ़ दशक में एक भी डॉक्टर नहीं लगाए।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/lack-of-doctors-and-staff-in-hindoli-hospital--increasing-the-pain-of-patients/article-86866"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-08/1111444444447888888888888.png" alt=""></a><br /><p>हिंडोली। राज्य सरकार हर बार ग्रामीण अंचल में अच्छी चिकित्सा व्यवस्था उपलब्ध कराने के लिए जनता से वादा करती है लेकिन हिंडोली अस्पताल में तीन दशक से कभी भी पूरा स्टाफ नहीं रहा।  हद तो तब हो गई जब लगभग डेढ़ दशक से आॅपरेशन थिएटर बन चुका है उसके सामान जंग खा रहे हैं लेकिन सरकार एक सर्जन चिकित्सक नहीं लगा पाई। एक भी स्त्री रोग विशेषज्ञ नहीं है। डॉॅक्टरों और स्टाफ  की कमी के चलते मरीजों बूंदी, टोंक और कोटा जाने को मजबूर है। ज्ञात रहे कि हिंडोली कस्बा राष्ट्रीय राजमार्ग 52 पर स्थित है और हिंडोली चिकित्सालय की श्रेणी यहां के नेता समय-समय पर बदलते रहे हैं।  शायद उनके दिमाग में नहीं आई कि जब चिकित्सालय की श्रेणी बदलता है तो चिकित्सक और अन्य स्टाफ की भी जरूरत होती होगी। ऐसा नहीं है कि स्थानीय कार्यकर्ताओं और नेताओं या आम जनता ने उनको समय-समय पर चिकित्सकों की याद नहीं दिलाई हो ? लेकिन इससे लगता है कि सरकार से बड़े तो डॉक्टर हो गए जो अपनी मर्जी से अपनी मनचाही जगह पर रहना चाहते हैं? चेनपुरिया निवासी हरिराम गुर्जर ने बताया कि हिंडोली चिकित्सालय में केवल जुखाम,खांसी बुखार का ही इलाज होता है। छोटे से आॅपरेशन के लिए ही देवली,बूंदी और कोटा जाना पड़ता है  केवल ऐसी चिकित्सालय का भवन बनाने की क्या जरूरत है ,जहां चिकित्सक नहीं हो?</p>
<p><strong>डेढ़ दशक से आॅपरेशन थिएटर के औजार जंग खा रहे </strong><br />डेढ़ दशक से हिंडोली सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में आॅपरेशन थिएटर बनकर तैयार हो गया था। आॅपरेशन थिएटर की आवश्यकता अनुसार मशीनरी और औजार लगा दिए गए थे लेकिन एक सोचनीय प्रश्न है कि राज्य सरकार एक सर्जन चिकित्सक हिंडोली चिकित्सालय में नहीं लगा पाई। जो ग्रामीण समय-समय पर अपने जनप्रतिनिधियों से मांग करते आ रहे हैं।</p>
<p><strong>लाखों की सोनोग्राफी मशीन बनी  शो पीस  </strong><br />ज्ञात रहे की भीलवाड़ा लोकसभा क्षेत्र के सांसद सुभाष बाहेड़िया ने अपने सांसद कोष से बजट स्वीकृत कर आम जनता की मांग पर हिंडोली चिकित्सालय में लाखों रुपए की सोनोग्राफी मशीन लगाई थी लेकिन सरकार है कि एक महिला चिकित्सक भी नहीं लगा पाई और लाखों की सोनोग्राफी मशीन शॉपीस बनकर रह गई है। </p>
<p><strong>ये पद है खाली</strong><br />एक सर्जन चिकित्सक, एक स्त्री रोग चिकित्सक, हड्डी रोग चिकित्सक, एक शिशु रोग विशेषज्ञ, दो प्रथम श्रेणी कंपाउंडर, 10 द्वितीय श्रेणी नर्स स्टाफ के पद रिक्त हैं।</p>
<p>हिंडोली सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का भवन पर्याप्त है। सुविधाओं के संसाधन भी पर्याप्त हैं लेकिन कमी स्टाफ की है सरकार अगर पूरा स्टाफ उपलब्ध करा देती है तो ग्रामीण अंचल के लोगों को कम पैसे में अच्छी स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकती हैं। <br /><strong>- डॉ रमेश कुशवाहा, चिकित्सा प्रभारी हिंडोली</strong></p>
<p>हिंडोली चिकित्सालय में महिला चिकित्सक नहीं होने से महिलाओं को छोटी-छोटी बीमारी के लिए बूंदी कोटा जाना पड़ता है जबकि आधा आबादी के लिए राज्य सरकार एक महिला चिकित्सक भी नहीं लगा पाई। यह सबसे बड़ी शर्म की बात है, जबकि  पूर्व सांसद सुभाष बाहेड़िया की महिलाओं की समस्या को जानते हुए हिंडोली चिकित्सालय में सोनोग्राफी मशीन  लगाई थी। <br /><strong>- अंजना गुर्जर, सुखपुरा निवासी</strong></p>
<p>हिंडोली चिकित्सालय में सुविधाओं का अभाव है पूरे डॉक्टर नहीं होने से ग्रामीण अंचल के लोगों को बूंदी, देवली और कोटा भागना पड़ता है। सुविधा के नाम पर चिकित्सालय का भवन ही है सरकार को चाहिए कि डॉक्टर लगाएं जिससे ग्रामीण अंचल में लोगों को कम पैसे में अच्छी सुविधा और स्वास्थ्य चिकित्सा मिल सके। <br /><strong>- दुर्गा लाल कहार, हनुमान जी का झोपड़ा</strong></p>
<p>हिंडोली सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का भवन पर्याप्त है। सुविधाओं के संसाधन भी पर्याप्त हैं लेकिन कमी स्टाफ की है सरकार अगर पूरा स्टाफ उपलब्ध करा देती है तो ग्रामीण अंचल के लोगों को कम पैसे में अच्छी स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकती हैं। <br /><strong>- डॉ रमेश कुशवाहा, चिकित्सा प्रभारी हिंडोली</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बूंदी</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 05 Aug 2024 18:00:55 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>बांसी सीएचसी महज दो डॉक्टरों के भरोसे, मरीज परेशान</title>
                                    <description><![CDATA[कतार में गंभीर रोगियों के परेशानी होने से कुछ तीमारदार कतार में लगकर रोगी का उपचार करवाते नजर आए है।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/bansi-chc-is-dependent-on-only-two-doctors--patients-are-troubled/article-86284"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-07/photo-size-(5)18.png" alt=""></a><br /><p>भण्डेड़ा। क्षेत्र में बांसी के सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र पर सरकार ने तीन डॉक्टरों को लगा रखे है। जिसमें से एक को अन्यत्र लगा रखा है। मौके पर दो चिकित्सक ही सेवा दे रहे है।  जिस रोज एक चिकित्सक अपने निजी काम या विभाग की मीटिंग में जाने पर महज एक डॉक्टर के भरोसे रहने से रोगियों की समस्या बढ़ जाती है। इस समय मौसम परिवर्तन के साथ ही रोगियों की बढ़ती संख्या से ओपीडी डेढ़ सौ से अधिक संख्या में रोगी पहुंच रहे है। इस केंद्र पर दो दर्जन गांवों से लोग उपचार लेने पहुंचते हैं। पर इस केंद्र के नाम अनुरूप यहां चिकित्सा व्यवस्थाएं नहीं है। स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार यहां समय रहते ध्यान देते तो केंद्र पर आने वाले मरीजों को राहत मिलती। जानकारी के अनुसार बांसी कस्बे में देई रोड पर स्थित सीएचसी पर संबंधित विभाग ने तीन चिकित्सक लगा रखे है। पर एक महिला चिकित्सक को लंबे समय से दुगारी अस्पताल में लगा रखा है। यहां पर एक महिला व एक पुरूष दो चिकित्सक सेवारत है। इनमें से भी जिस रोज विभाग की मीटिंग हो तो एक मीटिंग में जाने पर एक ही चिकित्सक के भरोसे रहना पड़ता है। मौसम परिवर्तन के साथ ही रोगियों की बढ़ती संख्या के कारण सोमवार को पुरूष चिकित्सक ही सेवा दे रहे थे। जो उपचार के लिए आए रोगियों को कतार में अपनी बारी आने का इंतजार करना पड़़ा है। कतार में गंभीर रोगियों के परेशानी होने से कुछ तीमारदार कतार में लगकर रोगी का उपचार करवाते नजर आए है। स्वास्थ्य केन्द्र पर आए महिलाएं रोगियों को पुरूष चिकित्सक से अपनी परेशानी बताने में भी समस्या रहती है। विभाग ने अन्य अस्पताल की व्यवस्था जुटाने के लिए यहां की व्यवस्था बिगड़ती नजर आ रही है। यहां के चिकित्सकों को यही पर रखा जाए, तो ग्रामीण अंचलों से आनेवाले रोगियों को राहत मिले।  </p>
<p><strong>मरीजों की दर्द</strong><br />बुखार आ रहा था। उसके लिए उपचार लेने आया था। कतार में लगने पर बहुत देरी से अपनी बारी आई है। मौके पर दो चिकित्सक होते तो उपचार लेने में राहत मिलती।  <br /><strong>- अशोक बैरवा, रोगी माधोराजपुरा </strong></p>
<p>ओडो के झोपड़े से उपचार के लिए अस्पताल आई हूँ, पर महिला चिकित्सक नही होने से बीमारी बताने में परेशानी हुई है। <br /><strong>- बबीता, महिला रोगी ओड़ो का झोपड़ा</strong></p>
<p>ओडो का झोपडा निवासी प्रेम सिंह ने बताया कि वह पत्नी को लेकर आया था। यहां पर महिला चिकित्सक नही मिलने से महिला की बीमारी बताने की परेशानी रही है।<br /><strong>- प्रेम सिंह, रोगी का पति ओड़ो का झोपड़ा</strong></p>
<p>चिकित्सकों को हटाना व लगाना उच्चाधिकारियों का काम है। इस समय सभी जगहों पर चिकित्सकों की कमी चल रही है। नए चिकित्सक आते ही व्यवस्था सुचारू हो जाएगी।<br /><strong>- संजय मीणा, ब्लॉक सीएमएचओ नैनवां </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बूंदी</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 30 Jul 2024 15:11:23 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>चौमहला अस्पताल वेंटिलेटर पर, मरीज भगवान भरोसे</title>
                                    <description><![CDATA[सोनाग्राफी, ईसीजी की जांच मशीनें खराब, इलाज के लिए दर-दर भटके। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jhalawar/chaumhala-hospital-is-on-ventilator--patients-are-at-the-mercy-of-god/article-85844"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-07/48.png" alt=""></a><br /><p>चौमहला। चौमहला क्षेत्र के 103 गांवों के करीब डेढ़ लाख लोगों को चिकित्सा सुविधा मुहैया करवाने वाला चौमहला सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मात्र दो चिकित्सकों के भरोसे चल रहा है, जिसमें से एक आयुष चिकित्सक है, चिकित्सालय में स्वास्थ सेवाओं व मूलभूत सुविधाओं का अभाव है, यहां सोनाग्राफी ईसीजी की जांच मशीनें खराब पड़ी है। मजबूरन लोगों को जांच बाहर करवानी पड़ती जो मनमाने दाम वसूल करते है। इन दिनों मौसमी बीमारियों का प्रकोप चल रहा है, अस्पताल में मरीजों की भीड़ लगी रहती है। भाजपा मंडल ने पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे, सांसद दुष्यंत सिंह से मुलाकात कर चिकित्सालय को 50 बेड की क्षमता में क्रमोन्नत करने, महिला चिकित्सक सहित अन्य चिकित्सक लगाने,सोनाग्राफी शुरू करने की मांग की है। सामुदायिक चिकित्सालय में महिला चिकित्सक सहित कनिष्ठ विशेषज्ञ सजर्री,कनिष्ठ विशेषज्ञ मेडिसिन  सोनाग्राफी चिकित्सक,डेंटल चिकित्सक का पद रिक्त है। चिकित्सालय में महिला चिकित्सक सहित पांच पद स्वीकृत है लेकिन पिछले तीन सालों से दो ही चिकित्सक कार्यरत है।</p>
<p><strong>कई सालों से सोनोग्राफी बन्द</strong><br />सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र चौमहला में कई सालों से सोनोग्राफी नहीं हो रही है तथा यह मशीन भी खराब है ,मशीन खराब होने के कारण गर्भवती महिलाओं को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है ,सोनोग्राफी के लिए महिलाओ को इधर उधर भटकना पड़ता है,वर्तमान में चिकित्सालय में हीमोग्लोबिन, ब्लड ग्रूप ,शुगर ,यूरिया, क्रिएटिनी, पीलिया, लिवर ,किडनी, टाइफाइड मलेरिया, एचआईवी वीडीआरएल, हैपटिटीज बी,गर्भवती महिलाओ कि सभी जाँच, टीबी की जाँच भी हो रही हैं।</p>
<p><strong>महिला चिकित्सक का पद रिक्त</strong><br />महिला चिकित्सक का पद रिक्त होने से महिलाओं को छोटी छोटी बीमारियों में निकटवर्ती मध्यप्रदेश के चिकित्सालय में जाना पड़ रहा है। महिला नर्सिंग कर्मी का पद भी रिक्त है,महिला चिकित्सक के अभाव में प्रसव के दौरान स्थिति बिगड़ने पर प्रसूताओं को मजबूरन जिला चिकित्सालय झालावाड़ या भवानीमंडी ,मध्यप्रदेश के नागदा,मन्दसौर, उज्जैन की और रुख करना पड़ता है। यहां डेंटल चिकित्सक का पद भी रिक्त है जबकि अस्पताल में डेंटल की आधुनिक मशीन भी लगी हुई है। </p>
<p><strong>ज्ञापन देकर चिकित्सालय को 30 बेड की बजाय 50 बेड का करने की मांग</strong><br />भाजपा मंडल अध्यक्ष ने हाल ही में पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे व सांसद दुष्यंत सिंह से मुलाकात कर एक ज्ञापन देकर चिकित्सालय को 50 बेड क्षमता में क्रमोन्नत करने ,सोनाग्राफी शुरू करवाने,महिला चिकित्सक सहित रिक्त चिकित्सकों की नियुक्ति करने,चिकित्सालय में 108 एंबुलेंस शुरू करने की मांग की है। 30 बेड की क्षमता वाले इस चिकित्सालय में महिला चिकित्सक सहित  कनिष्ठ विशेषज्ञ सजर्री,कनिष्ठ विशेषज्ञ मेडिसिन  सोनाग्राफी चिकित्सक,डेंटल चिकित्सक का पद रिक्त है।</p>
<p>चौमहला चिकित्सालय में शीघ्र ही महिला चिकित्सक सहित चिकित्सको की नियुक्ति होगी। हाल ही पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे व सांसद दुष्यंत सिंह से मुलाकात कर महिला चिकित्सक सहित रिक्त पदों पर चिकित्सको की नियुक्ति,सोनाग्राफी शुरू करने अस्पताल को 50 बेड में क्रमोन्नत करने की मांग की है,पूर्व मुख्यमंत्री ने शीघ्र समाधान का आश्वासन दिया।<br /><strong>- गौतम जैन, भाजपा मंडल अध्यक्ष</strong></p>
<p>चौमहला चिकित्सालय में महिला चिकित्सक सहित विशेषज्ञ चिकित्सको के लिए उच्च अधिकारियों को अवगत कराया जा चूका है, सोनाग्राफी चिकित्सक की उपलब्धता होते ही सोनोग्राफी शुरू करवा दी जाएगी। <br /><strong>- डॉ विकास जैन, ब्लॉक चिकित्सा एवं स्वास्थ अधिकारी डग</strong></p>
<p>चिकित्सालय में महिला चिकित्सक नहीं होंने से महिलाओं को परेशानी होती है, अस्पताल में महिला डॉक्टर होना चाहिए,सोनाग्राफी की जांच शुरू होनी चाहिए। <br /><strong>- प्रेमलता अशोक भंडारी, सरपंच  ग्राम पंचायत कोलवी उर्फ मंडी राजेंद्रपुर चौमहला</strong></p>
<p>चिकित्सालय में महिला चिकित्सक के नहीं होने से छोटी छोटी बीमारियों के लिए महिला को बाहर जाना पड़ता है, जिस कारण काफी समय व धन बर्बाद होता है , यहां महिला चिकित्सक की शीघ्र नियुक्ति हो।<br /><strong>- गुणमाला पिछोलिया संचालक प्रयास ग्रुप</strong></p>
<p><strong>मौसमी बीमारियों का प्रकोप</strong><br />इन दिनों मौसमी बीमारियों का प्रकोप चल रहा है अस्पताल में मरीजों की भीड़ पड़ रही है,दो ही चिकित्सक होने से मरीजों को घंटो इंतजार करना पड़ रहा है इन दिनों ओपीडी 500 के करीब है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>झालावाड़</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 25 Jul 2024 18:30:59 +0530</pubDate>
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                <title>सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र छोटा होने से अव्यवस्थाओं की भरमार </title>
                                    <description><![CDATA[नए भवन निर्माण के लिए भूमि आवंटित हो तो मिले राहत।
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/baran/community-health-center-is-small--due-to-which-there-is-lot-of-chaos/article-85323"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-07/111u1rer13.png" alt=""></a><br /><p>किशनगंज।  किशनगंज कस्बा मुख्यालय पर मौजूद सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र चिकित्सा सुविधाओं के लिहाज से बहुत छोटा होने से आदिवासी अंचल से रोजाना चिकित्सालय आने वाले सैंकडों मरीजों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। चिकित्सालय पहुंचने के रास्ते समेत चिकित्सा भवन,वाहन पार्किंग, इमरजेंसी,लेबर वार्ड,ओपीडी,एक दवा वितरण काउंटर हर जगह सकरी होने से लंबी लाइन लग जाने से रास्ता अवरुद्ध हो जाता है। जिससे चिकित्सालय में आने मरीजों एवं परिजनों को परेशानी झेलनी पड़ती है। चिकित्सा प्रभारी नामदेव ने बताया कि वर्तमान में चिकित्सालय में 25 चिकित्सक, 20 सविदाकर्मी कार्यरत है। जिनके लिए पर्याप्त कमरे चिकित्सालय में मौजूद नहीं हैं। ऐसे में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के लिए नया भवन निर्माण के लिए भूमि आवंटन हो तो कस्बे सहित क्षेत्रवासियों को राहत मिल सकती है।</p>
<p><strong>ओपीडी, इमरजेंसी, लेबर वार्ड, चिकित्सक कक्ष की कमी</strong><br />चिकित्सालय में आने वाले मरीजों को ओपीडी छोटी होने से कई बार लाइन चिकित्सालय से बाहर निकल जाती है। वहीं इमरजेंसी वार्ड के छोटे होने से दो से अधिक घायलों का इलाज एक साथ संभव नहीं है। कई बार दुर्घटना में घायल मरीजों को सीधे बारां रेफर करना पड़ता है।  गैलरी में ही प्राथमिक उपचार करना पड़ता है। यहीं हाल लेबर रूम का है। जहां एक दो से अधिक डिलेवरी एक साथ नहीं हो पाती। साथ ही चिकित्सकों के लिए कमरे छोटे होने के साथ ही कई परेशानियां बनी रहती है।</p>
<p><strong>जगह की कमी से वाहनों की अव्यवस्थित पार्किंग</strong><br />चिकित्सालय परिसर में ही मौजूद वाहन पार्किंग स्थल बहुत छोटा होने के चलते चिकित्सा स्टाप के वाहनों से ही भर जाता है। ऐसे में चिकित्सालय में मरीजों को लेकर आने वाली एंबुलेंस, परिजनों को वाहन खड़े करने में परेशानी खड़ी हो जाती है। पार्किंग भर जाने से लोग अपने वाहन इधर उधर अव्यवस्थित रूप से खड़े कर देते है। जिससे जाम के हालात बन जाते है। कई बार खुद एंबुलेंस चालको को मरीजों की जान पर खेलकर रास्ते में खड़े वाहनों को नीचे उतरकर हटाना पड़ता है।</p>
<p><strong>मुख्य रास्ता,पार्किंग स्थल छोटा, एंबुलेंस चालक परेशान</strong><br />किशनगंज बस स्टैंड से लेकर चिकित्सालय पहुंचने तक मार्ग बहुत ही सकड़ा होने मुख्य बाजार होने से कस्बे में आने वालों लोग अपने  वाहन अव्यवस्थित खड़े कर देते है। जिसे आए दिन जाम के हालात बने रहते है। मरीजों को समय पर चिकित्सालय पहुंचने एंबुलेंस चालको को परेशानी उठानी पड़ती है। </p>
<p>किशनगंज बस स्टैंड से लेकर चिकित्सालय पहुंचने तक मार्ग सकड़ा होने, वाहन अव्यवस्थित खड़े रहने से आए दिन जाम के हालात बने रहते है। मरीजों को समय पर चिकित्सालय पहुंचने में परेशानी बनी रहती है।<br /><strong>- योगेश नागर, एंबुलेंस चालक, किशनगंज। </strong></p>
<p>चिकित्सालय परिसर छोटा होने से मरीजों के साथ-साथ चिकित्सालय में आने वाले परिजनो को भी जगह कम होने से बैठने,खड़े रहने में भी परेशानी उठानी पड़ती है। <br /><strong>- डीके सैनी, कस्बेवासी। </strong></p>
<p>चिकित्सालय भवन आवश्यकता को देखते हुए बहुत छोटा है। जिसमे ओपीडी, इमरजेंसी में ज्यादा समस्या रहती है। नए भवन के लिए अधिकारियों को अवगत कराया हुआ है।<br /><strong>- प्रदीप नामदेव, चिकित्सा प्रभारी सीएचसी किशनगंज</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बारां</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 20 Jul 2024 17:38:42 +0530</pubDate>
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