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                <title>hindi diwas - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>हिंदी भाषायी एकता का अनमोल गहना : अमित शाह ने हिंदी दिवस के मौके पर देशवासियों को दी बधाई, कहा- हिंदी भाषाई एकता का अनमोल गहना है</title>
                                    <description><![CDATA[ केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने हिंदी दिवस के मौके पर देशवासियों को बधाई देते हुए इसे भाषाई एकता का अनमोल गहना बताया]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/the-precious-jewel-of-hindi-linguistic-unity-amit-shah-congratulated/article-126832"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-04/amit-shah.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने हिंदी दिवस के मौके पर देशवासियों को बधाई देते हुए इसे भाषाई एकता का अनमोल गहना बताया। हिंदी दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ! </p>
<p>शाह ने सोशल मीडिया एक्स पर अपने संदेश में लिखा कि “देश की भाषाओं-बोलियों के बीच सेतु बनकर राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा देने वाली हिंदी तकनीक, विज्ञान और अनुसंधान की भाषा बन रही है। आजादी के आंदोलन से लेकर आपातकाल के मुश्किल दिनों तक, हिंदी ने देशवासियों को एक सूत्र में बाँधने में अहम भूमिका निभाई है। हिंदी सभी भाषाओं को साथ लेकर ‘विकसित’ और भाषाई रूप से ‘आत्मनिर्भर’ भारत के निर्माण में अहम भूमिका निभाती रहेगी।”</p>
<p>उन्होंने इस मौके पर एक्स पर एक वीडियो संदेश भी पोस्ट किया है, जिसमें उन्होंने कहा है, “हिंदी भाषाई एकता का अनमोल गहना है। यह सभी भाषाओं को साथ लेकर आगे बढ़ रही है।”</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 14 Sep 2025 15:13:12 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>हिन्दी सभी को एक-दूसरे से जोड़ती है: शर्मा</title>
                                    <description><![CDATA[उन्होंने कहा कि हिन्दी पर हमें गर्व होना चाहिए और हिन्दी को बोलने व लिखने पर विशेष ध्यान देना चाहिए।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/hindi-connects-everyone-to-each-other-sharma/article-90551"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-09/whatsapp-image-2024-09-14-at-18.16.29.jpeg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। उप मुख्यमंत्री डॉ. प्रेम चन्द बैरवा के ओएसडी प्रो. राजेश शर्मा ने कहा कि वर्तमान दौर को ध्यान में रखते हुए विद्यार्थियों को सभी भाषाओं को सीखना चाहिए, लेकिन अपने खुद की भाषा हिन्दी को कभी भी नहीं भूलना चाहिए। क्योंकि हिन्दी सभी को एक-दूसरे से जोड़ती है। वे एसएसजी पारीक शिक्षा स्नातकोत्तर महाविद्यालय में हिन्दी दिवस पर ‘हिन्दी भाषा: वर्तमान परिप्रेक्ष्य’ विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रहे थे।</p>
<p>उन्होंने कहा कि हिन्दी पर हमें गर्व होना चाहिए और हिन्दी को बोलने व लिखने पर विशेष ध्यान देना चाहिए। इस मौके पर मुख्य वक्ता गुजरात केन्द्रीय विश्वविद्यालय के गांधीवादी विचार एवं शांति अध्ययन विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. जनक सिंह मीणा ने कहा कि हिन्दी को देश में आज भी राष्ट्रभाषा नहीं, बल्कि राजभाषा है। इसलिए सभी को मिलकर इस और प्रयास करना चाहिए। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी ने हिन्दी को बढ़ावा देने के लिए कई प्रयास किए। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कॉलेज प्राचार्य डॉ. प्रमिला दुबे ने कहा कि हिन्दी को हिन्दी दिवस के बजाए हर दिन याद करना चाहिए।</p>
<p>इस मौके पर डॉ. रामभजन कुमावत ने कहा कि आज हिन्दी भारत के अलावा विश्व के 150 देशों में बोली जा रही है और 200 विश्वविद्यालयों में पढ़ाई जा रही है। कार्यक्रम में डॉ. कल्पना पारीक व कुलदीप पारीक सहित बड़ी संख्या में शिक्षक और विद्यार्थी उपस्थित थे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 15 Sep 2024 16:25:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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                <title>हिन्दी तो विविधता में एकता की भाषा है!</title>
                                    <description><![CDATA[ भारत का भाषा परिवार हम से ये उम्मीद करता है कि कोई एक भाषा किसी दूसरी भाषा पर थोपी नहीं जानी चाहिए। क्योंकि हिन्दी भाषा की संरचनाएं प्रांतीय भाषाओं और बोलियों से ही सृजित और समृद्ध हुई है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/hindi-is-the-language-of-unity-in-diversity/article-57080"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-09/hindi-diwas1.png" alt=""></a><br /><p>इस बार भी 14 सितंबर को हिन्दी दिवस मनाया जाएगा और हिन्दी भाषी राज्यों में परम्परा के अनुसार सरकारी खर्च पर सरकारी संस्थानों में खूब तालियां और थालियां बजेगी और बधाइयां भी बंटेगी। मुझे इस बात की खुशी भी है कि साल में एक दिन हिन्दी भाषा के प्रकाश स्तंभ रचनाकारों के चित्र प्रकाशित होते हैं। लेकिन हिन्दी भाषी क्षेत्रों का ये पुराना दर्द भी छलकता है कि हिन्दी भाषा को आजादी के 76 साल बाद भी हम हिन्दी को एक राष्ट्रभाषा का सम्मान क्यों नहीं दे पा रहे हैं। आप जानते ही हैं कि 14 सितंबर 1949 को संविधान सभा ने केवल राजभाषा का दर्जा दे रखा है और तब से हिन्दी भाषा, भारत की राष्ट्रभाषा नहीं मानी जा रही है।<br /><br />इस दर्द को समझने के लिए मैं खुद हिन्दी भाषा का लेखक होने के नाते ये कहना चाहता हूं कि पहले हिन्दी प्रदेशों में, अहिन्दी प्रदेशों की भारतीय भाषाओं के प्रति आदर और अनुराग की भावना भी दिखाई-सुनाई पड़नी चाहिए। भारत का भाषा परिवार हम से ये उम्मीद करता है कि कोई एक भाषा किसी दूसरी भाषा पर थोपी नहीं जानी चाहिए। क्योंकि हिन्दी भाषा की संरचनाएं प्रांतीय भाषाओं और बोलियों से ही सृजित और समृद्ध हुई है। राजभाषा और राष्ट्रभाषा का ये वाद-विवाद और संवाद ही आज भाषाई वर्चस्व की राजनीति का रूप ले चुका है।<br /><br />दूसरे रूप में हिन्दी-हिन्दू-हिन्दुस्तान की राजनीति ने भी इस हिन्दी भाषा को राष्ट्रवाद की सांस्कृतिक अस्मिता से जोड़ दिया है और ये माना जाने लगा है कि जब हिन्दी प्रदेशों (उत्तरप्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार, राजस्थान, हिमाचल, हरियाणा) से ही केंद्र सरकार का भविष्य तय होता है तो फिर भाषाओं का भविष्य भी बहुमत के शासन द्वारा ही तय किया जाएगा। भारत के अधिकतर प्रधानमंत्री इन हिन्दी प्रदेशों की देन हैं और हिन्दी भाषा की सृजन परम्परा इन्हीं हिन्दी प्रदेशों से आती है। यानी कि हिन्दी भाषा को शुरू से ही एक वर्चस्व की भाषा बनाया गया है, जबकि संस्कृत, तमिल तेलगू जैसी अनेक भाषाएं शास्त्रीय भाषा की तरह बहुत समृद्ध हैं। <br /><br />इस भाषाई सत्ता व्यवस्था की राजनीति ने बंगला, असमिया, मलयालम, कन्नड़ और गुजराती, राजस्थानी, बुंदेलखण्डी, भोजपुरी जैसे अनेक समृद्ध भाषाओं को वर्चस्व की हिन्दी मानसिकता ने हाशिए से बाहर धकेल दिया है। मेरा इस पृष्ठभूमि में विनम्र सुझाव है कि हिन्दी भाषा-भाषी हिन्दी को अधिक विवाद रहित बनाने के लिए पहले अहिंदी भाषा-भाषियों के साथ सृजन संवाद और सांस्कृतिक सौहार्द बढ़ाएं और अनुवाद के पुल अधिक बढ़ाएं। उर्दू, अंग्रेजी के साथ हिन्दी का तालमेल लगातार अनुवाद से ही बढ़ रहा है। मेरा ये भी अनुरोध है कि हिन्दी जगत को इस बात का गर्व होना चाहिए कि आज हिन्दी यत्र-तत्र-सर्वत्र है और बाजार और सरकार के साथ टेक्नोलॉजी और शिक्षा के माध्यम के रूप में भी प्राय: सर्वमान्य है। प्रचार के सभी माध्यम, फिल्म उद्योग, प्रसारण तंत्र-हिन्दी को घर-घर ले जा रहे हैं। ऐसा है कि हिन्दी तो खुद एक बहता हुआ पानी है जो खुद अपना रास्ता बना रहा है। आज लाल किला भी हिंदी भाषणों से ही जनता के दिल और दिमाग पर राज कर रहा है और अंग्रेजी से अधिक विश्व मंचों पर कामयाब है।<br /><br />ऐसे में हिन्दी आज बाजार, व्यवहार और बहुमत की राजनीति का सफलतम उदाहरण है। शिक्षा की नई नीति में हिन्दी, अंग्रेजी और तीसरी कोई प्रांतीय भाषा का त्रिभाषा फार्मूला भी यही संवाद और समन्वय बनाता है। अत: हिन्दी भाषा-भाषियों को उदारता और भाषाई-पारिवारिकता की समझ के साथ, सबका साथ-सबका विश्वास और सबका विकास की गैर बराबरी से मुक्त बात करनी चाहिए। क्योंकि हिन्दी प्रथम है किंतु सभी की पंक्ति में समान है। केवल हिन्दी का आग्रह और दुराग्रह एक तरह की संकीर्णता है। अत: हिन्दी को विविधता में एकता का आधार बनाए हैं। हिन्दी के लिए एक दिन का सरकारी कर्मकांड अब बंद होना चाहिए। क्योंकि ये अब जनता के धन का दुरुपयोग है। उचित ये है कि राजभाषा के नाम पर चल रहे सभी अखाड़े अब अहिन्दी भाषी राज्यों में सक्रिय बनाने चाहिए। ताकि प्रांतीय भाषाओं से हमारा भाईचारा बढ़े और सांस्कृतिक आदान.प्रदान विकसित हो। दूसरों को सम्मान देकर ही आप उनसे सम्मान ले सकते हैं। क्योंकि उत्तर की संकीर्ण राजनीति भी बढ़ती है। हिन्दी भाषी लोगों को अन्य भारतीय भाषाओं को पढ़ना-लिखना और बोलना भी चाहिए ताकि हिन्दी भारत में भाषाई एकता का चंदन पानी बन सकें। इसलिए अपना दर्द बताएं तो दूसरों का दर्द भी समझें।<br /><br />-वेदव्यास<br />(ये लेखक के अपने विचार हैं)</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 14 Sep 2023 12:45:49 +0530</pubDate>
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