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                <title>defence deal - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>भारत-बांग्लादेश तनाव के बीच भारतीय सीमा के पास ड्रोन की फैक्ट्री लगाने जा रहा चीन, जानें क्या है चीन और बांग्लादेश के बीच हो रहा ये समझौता?</title>
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                        <![CDATA[बांग्लादेश ने चीन के साथ ड्रोन फैक्ट्री समझौता किया। तकनीक ट्रांसफर और सिलीगुड़ी कॉरिडोर के पास प्लांट से भारत की रणनीतिक चिंता बढ़ी।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/amidst-india-bangladesh-tension-china-is-going-to-set-up-a/article-142111"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/(1200-x-600-px)13.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। बांग्लादेश ने चीन के साथ मिलकर ड्रोन फैक्ट्री लगाने का बड़ा सौदा किया है। ये सौदा ऐसे वक्त पर हो रहा है जब भारत और बांग्लादेश के रिश्ते में तनाव की लकीरें गहरी होती जा रही है। बांग्लादेश और चीन के बीच ये सौदा भारत को असहज करने वाला है। यह समझौता सिर्फ ड्रोन खरीदने का नहीं, बल्कि उन्नत ड्रोन बनाने, असेंबल करने और भविष्य में खुद डिजाइन करने की तकनीक ट्रांसफर का है। यह डील बांग्लादेश एयर फोर्स (बीएएफ) और चीन की स्टेट-ओन्ड कंपनी चीन इलेक्ट्रॉनिक्स टेक्नोलॉजी ग्रुप कॉपोर्रेशन (सीईटीसी) के बीच गवर्नमेंट-टू-गवर्नमेंट (जी2जी) आधार पर हुई है।</p>
<p>सिलीगुड़ी कॉरिडोर के करीब लगेगा प्लांट: इस डील के तहत, फैक्ट्री बांग्लादेश के बोगरा इलाके में लगेगी। इसमें 2026 के अंत तक काम शुरू हो जाएगा। बांग्लादेश सरकार का कहना है कि ये ड्रोन मुख्य रूप से मानवीय सहायता, आपदा प्रबंधन और सैन्य जरूरतों के लिए होंगे। लेकिन भारत इसे भूराजनीतिक खतरे के तौर पर देख रही हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि यह जगह भारत की संवेदनशील उत्तरी सीमा और सिलीगुड़ी कॉरिडोर (चिकन नेक) के बहुत करीब है।</p>
<p>बांग्लादेश और चीन के बीच 27 जनवरी 2026 को ढाका कैंटनमेंट में ड्रोन डील साइन हुआ। इसमें सीईटीसी पूरी तकनीक ट्रांसफर करेगी। ड्रोन बांग्लादेश पहले असेंबल करेगा, फिर खुद ड्रोन बना सकेगा और अंत में स्वदेशी डिजाइन तक पहुंच जाएगा। शुरूआत में फैक्ट्री दो तरह के ड्रोन बनाएगी। पहले मीडियम अल्टीट्यूड लॉन्ग एंड्योरेंस (एमएएलई) यूएवी। ये लंबी दूरी की निगरानी और हमले के लिए होते हैं और वर्टिकल टेकआॅफ एंड लैंडिंग (वीटीओएल) यूएवी, जो अलग-अलग इलाकों में जल्दी तैनात हो सकते हैं। बीएएफ का बयान है कि यह सौदा बांग्लादेश को यूएवी सेक्टर में आत्मनिर्भर बनाएगा। प्रोजेक्ट की कुल लागत लगभग 608 करोड़ टका (करीब 55 मिलियन डॉलर) है।</p>]]>
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                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 06 Feb 2026 11:22:43 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Jaipur NM]]>
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                <title>रूसी पांचवीं पीढ़ी का लड़ाकू विमान एसयू-57 नहीं खरीदेगा भारत, पुतिन की उम्मीदों पर फिरा पानी</title>
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                        <![CDATA[मॉस्को से आई रिपोर्ट के मुताबिक भारत रूसी पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान एसयू-57 को खरीदने में दिलचस्पी नहीं दिखा रहा है। पुतिन की दिल्ली यात्रा के बाद भी डील आगे नहीं बढ़ी। भारत का जोर स्वदेशी एएमसीए परियोजना पर है।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/india-will-not-buy-russian-fifth-generation-fighter-aircraft-su-57/article-136102"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/india-russia-realtiondhip.png" alt=""></a><br /><p>मॉस्को। रूस पिछले दो सालों से लगातार भारत को अपने पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान एसयू-57 बेचने की कोशिश कर रहा है। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन जब इस महीने दिल्ली दौरे पर आए थे तो बातें की जा रही थी कि भारत और रूस में एसयू-57 को लेकर समझौता हो सकता है। लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। अब रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत, रूसी पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमाम एसयू-57 खरीदने में दिलचस्पी नहीं रखता है। </p>
<p>रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की हाल की भारत यात्रा के बाद भी नई दिल्ली सुखोई एसयू-57 के लिए डील को फाइनल करने के करीब नहीं है, जैसा कि मार्च में था। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत शायद इस पांचवीं पीढ़ी के फाइटर में कम दिलचस्पी ले रहा है, भले ही रूस ने को-प्रोडक्शन डील की पेशकश की हो।</p>
<p><strong>भारत का फोकस स्वदेशी एएमसीए निर्माण पर</strong></p>
<p>पुतिन के दिल्ली दौरे का मकसद भारत के साथ आर्थिक और रक्षा समझौता करना था। लेकिन डिफेंस डील को लेकर दिल्ली की तरफ से चुप्पी देखी गई है। इसकी वजह बताते हुए द हिंदू ने एक भारतीय अधिकारी के हवाले से कहा है कि भारत ने रूस की तरफ से पेश किए गये इक्विपमेंट में ज्यादा दिलचस्पी नहीं दिखाई। रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि रूसी इस दौरे के दौरान बड़ी डील होने की उम्मीद कर रहे थे और अभी भी उन प्रपोजल पर काम कर रहे हैं। हम स्वदेशी प्रोडक्ट के डेवलपमेंट पर बहुत ज्यादा ध्यान दे रहे हैं। यानि भारत का ध्यान स्वदेशी एएमसीए यानि एडवांस मीडिया कॉम्बैट एयरक्राफ्ट के निर्माण पर ज्यादा है और वो रूसी पांचवीं पीढ़ी का लड़ाकू विमान खरीदकर अपना ध्यान भटकाना नहीं चाहता है।</p>
<p>हालांकि, इसका मतलब ये नहीं है कि भारत, रूस के डिफेंस कार्यक्रम से अलग हो जाएगा। भारत को अभी भी रूस से एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम चाहिए। भारत अभी भी टी-90 बैटल टैंक का एक वेरिएंट रूस के साथ मिलकर बनाएगा। लेकिन एसयू-57 की कहानी अलग है। </p>
<p><strong>भारत की प्रतिक्रिया से रूस में उदासी</strong></p>
<p>पुतिन की यात्रा से पहले, रूसी समाचार एजेंसी और क्रेमलिन की तरफ से कंट्रोल किए जाने वाले कई रूसी न्यूज आउटलेट ने दावा किया था कि एसयू-57 के लिए डील लगभग फाइनल हो गई है। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने पुतिन के भारत दौरे से पहले एक प्रेस बयान में कहा था कि यह एजेंडा (एसयू-57) में सबसे ऊपर है, और इस पर चर्चा हो सकती है। हमारा मिलिट्री इंडस्ट्री काफी अच्छा काम कर रहा है। भारतीय सेना में 36 प्रतिशत रूसी हथियार हैं और उम्मीद है कि यह जारी रहेगा। पेस्कोव ने आगे कहा था कि रूस को उम्मीद है कि भारत द्वारा एसयू-57 पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ फाइटर खरीदने की संभावना पर भी चर्चा होगी। उन्होंने कहा था कि एसयू-57 दुनिया का सबसे अच्छा प्लेन है। एसयू-57 एजेंडा में होगा। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। जिससे रूस में एक उदासी है।</p>]]>
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                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 16 Dec 2025 12:15:50 +0530</pubDate>
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                <title>देश में बने 45,000 करोड़ रुपये के विमान, अस्त्र-शस्त्र खरीदने के नौ प्रस्ताव मंजूर</title>
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                        <![CDATA[रक्षा मंत्रालय की एक विज्ञप्ति के मुताबिक रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में डीएसी की बैठक में सेनाओं के लिए 45,000 करोड़ रुपये के पूंजीगत पूंजीगत अधिग्रहण की आवश्यकता की स्वीकृति के नौ प्रस्तावों में को मंजूरी दी।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/nine-proposals-approved-to-buy-indigenously-made-aircraft-and-weapons/article-57229"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-09/defence-deal.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। सेनाओं के लिए अस्त्र-शस्त्र खरीदने के प्रस्तावों पर निर्णय करने वाली रक्षा खरीद परिषद (डीएसी) ने रक्षा आपूर्ति क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने वाले एक निर्णय के अंतर्गत वायु सेना के लिए 12 सुखोई-30 एमकेआई विमान और ध्रुवास्त्र प्रक्षेपास्त्र सहित सेना के तीनों अंगों के लिए कुल लगभग 45000 करोड़ रुपये की हथियार प्रणालियों की खरीद के प्रस्तावों को शुक्रवार को मंजूरी दी।</p>
<p>रक्षा मंत्रालय की एक विज्ञप्ति के मुताबिक रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में डीएसी की बैठक में सेनाओं के लिए 45,000 करोड़ रुपये के पूंजीगत पूंजीगत अधिग्रहण की आवश्यकता की स्वीकृति के नौ प्रस्तावों में को मंजूरी दी।</p>
<p>मंत्रालय ने कहा है कि यह सभी खरीद भारतीय आपूर्तिकर्ताओं से की जाएगी। ये सामान भारत में ही डिजाइन किए गए, देश में ही विकसित और विनिर्मित किए गए रक्षा साजो-सामान की खरीद की नीति के तहत की जाएगी। इससे रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।</p>]]>
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                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 15 Sep 2023 19:03:31 +0530</pubDate>
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