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                <title>बजट होते हुए भी खर्च नहीं कर पा रहे महाविद्यालय</title>
                                    <description><![CDATA[कॉलेज विकास के लिए छोटी से बड़ी चीज तक खरीद के लिए दूसरों के भरोसे रहता महाविद्यालय प्रशासन।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/despite-having-budget--colleges-are-unable-to-spend/article-91353"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-09/427rtrer-(4)2.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। हाड़ौती के अधिकतर सरकारी कॉलेजों में सहायक लेखाधिकारी की पोस्ट लंबे समय से रिक्त है। जिसकी वजह से महाविद्यालय प्रशासन को वित्तिय संबंधित कार्यों के लिए परेशानियों से जूझना पड़ रहा है। सहायक लेखाधिकारी न होने से महाविद्यालय आवश्यक साधन-संसाधनों की खरीद नहीं कर पा रहे। जिसकी वजह से कॉलेजों में शैक्षणिक व्यवस्थाएं समुचित रूप से सुचारू नहीं हो पा रही। शिक्षाविदें का कहना है, 10 हजार रुपए से अधिक की वस्तु खरीद के लिए महाविद्यालय प्रशासन को टेंडर प्रक्रिया करनी होती है, जो सहायक लेखाधिकारी के अभाव में संभव नहीं हो पाती। चाहे वो फर्नीचर, टेबल-कुर्सियां, कम्प्यूटर क्रय करना हो या फिर विद्या संबल पर लगे शिक्षकों के मानदेय भुगतान बिल, डे-टू-डे कैश बुक मेंटेंन, नोटशीट टिप्पणी, ट्रेजरी संबंधित बिलों सहित अन्य कार्यों के लिए सहायक लेखाधिकारी की आवश्यकता होती है। क्योंकि, इसमें  टेक्निकल आसपेक्ट व उकाउंट्स संबंधी नियमों की समझ शिक्षकों को प्रोपर रूप से नहीं होती। जिसकी वजह से जरूरी संसाधनों का क्रय समय पर नहीं हो पाता। इसका प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से असर विद्यार्थियों की सुविधाओं पर पड़ता है। </p>
<p><strong>कोटा के 11 में से 4 कॉलेजों में ही डबल एओ कार्यरत</strong><br />कोटा जिले के 11 राजकीय महाविद्यालयों में से मात्र 4 में ही सहायक लेखाधिकारी के पद भरे हैं। यहां एक-एक डबल एओ कार्यरत हैं। इनमें गवर्नमेंट आर्ट्स कॉलेज,  गवर्नमेंट साइंस कॉलेज, जेडीबी आर्ट्स कॉलेज व गवर्नमेंट संस्कृत कॉलेज शामिल हैं। वहीं, राजकीय कन्या वाणिज्य व जेडीबी साइंस कॉलेज में संविधा पर रिटायर्ड  लेखाधिकारी रखे हैं। इसके अलावा 7 महाविद्यालयों में पद खाली हैं। </p>
<p><strong>600 स्टूडेंट्स पर 100 टेबल-कुर्सी</strong><br />कनवास कॉलेज के सहायक आचार्य डॉ. ललित नामा ने बताया कि महाविद्यालय में सहायक लेखाधिकारी की बहुत आवश्यकता है। इनके अभाव में फाइनेंस से संबंधित  छोटे-छोटे कार्यों के लिए दूसरे कॉलेजों पर निर्भर रहना पड़ता है। यहां कुल 600 विद्यार्थी हैं, जिनके मुकाबले टेबल-कुर्सियां मात्र 100 ही हैं।  इधर, सांगोद कॉलेज की प्राचार्य प्रो. अनिता वर्मा का कहना है, हमारा महाविद्यालय परीक्षा सेंटर है। सेमेस्टर एग्जाम चल रहे हैं, तो अन्य कक्षों में क्लासें भी लगती हैं। ऐसे में टेबल-कुर्सियों की कमी है। जिसकी खरीद प्रक्रिया  के लिए सहायक लेखाधिकारी की जरूरत होती है, जो नहीं होने से वित्तिय संबंधित कार्य प्रभावित होते हैं। </p>
<p><strong>इन समस्याओं से जूझ रहे कॉलेज प्रशासन  </strong><br />शिक्षकों का कहना है, महाविद्यालयों में फर्नीचर, कम्प्यूटर, इनवर्टर, कूलर-पंखें, टेबल-कुर्सियां खरीद, विद्या संबल व संविदा पर लगे शिक्षकों का वेतन संबंधित,  विद्यार्थियों का फीस स्ट्रेक्चर, स्टेशनरी क्रय, एडमिशन के दौरान आने वाली फीस को विभिन्न मदों में विभाजित करना, कक्षा-कक्ष मेंटिनेंस, अनुमानित बजट बनाना, लाइब्रेरी का सेटअप तैयार करना व किताबें खरीदने सहित सम्पूर्ण वित्तीय कार्य सहायक लेखाधिकारी द्वारा किए जाते हैं। जिनके अभाव में महाविद्यालय प्रशासन आवश्यक साधन-संसाधनों की खरीद नहीं कर पाते।  संभाग में कई महाविद्यालय ऐसे हैं, जहां विद्यार्थियों की संख्या के अनुपात में टेबल-कुर्सियां आधी भी नहीं है। </p>
<p><strong>क्या कहते हैं प्राचार्य</strong><br /><strong>5 लाख का बजट हो गया लैप्स</strong><br />गत वर्ष फर्नीचर खरीद के लिए सरकार ने 5 लाख का बजट जारी किया था। लेकिन, महाविद्यालय में लंबे समय से सहायक लेखाधिकारी का पद रिक्त है। जिसकी वजह से समय पर टैंडर नहीं हो पाए और नतीजन बजट लैप्स हो गया। वर्तमान में यहां करीब 800 स्टूडेंट्स अध्ययनरत हैं, जिनके मुकाबले टेबल-कुर्सियां आधी भी नहीं है। हर कॉलेज में एक सहायक लेखाधिकारी होना चाहिए। इनके अभाव में वित्तिय संबंधित कई कार्यों में परेशानी होती है। <br /><strong>- डॉ. रामदेव मीणा, प्राचार्य राजकीय इटावा महाविद्यालय\</strong></p>
<p><strong>विद्यार्थियों की सुविधाओं पर पड़ता असर</strong><br />कॉलेज में छात्रहित में आवश्यक साधन-संसाधनों की खरीद आवश्यक होता है। लेकिन लेखाधिकारी के नहीं होने से खरीद नहीं पाते। जिसका असर प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से विद्यार्थियों पर पड़ता है। गत वर्ष फर्नीचर खरीद के लिए 3 लाख का बजट मिला था, लेकिन यहां सहायक लेखाधिकारी का पद रिक्त होने से सयम पर टैंडर नहीं हो पाए और वह बजट भी लैप्स हो गया। फिलहाल अभी नया बजट नहीं मिला। <br /><strong>- डॉ. अरविंद सिंह प्रताप, कार्यवाहक प्राचार्य, राजकीय छबड़ा महाविद्यालय</strong></p>
<p><strong>4 लाख रुपए शिक्षकों का मानदेय अटका</strong><br />सहायक लेखाधिकारी के पद रिक्त होने से फाइनेंस संबंधित कार्यों में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। मार्च में विद्या संबल पर 6 शिक्षक लगे थे, जिनका तब से आज तक का करीब 4 लाख रुपए मानदेय नहीं मिला। उनका बिल पास नहीं हो रहा। इसके अलावा 25 से 30 हजार रुपए के स्टेशनरी, स्पोट्स सामग्री, बैनर फलेक्स के बिल भी फरवरी से अटके हुए हैं।  <br /><strong>- बीके शर्मा, प्राचार्य, राजकीय तालेड़ा महाविद्यालय</strong></p>
<p><strong>डबल एओ बिना कैसे खरीदें फर्नीचर</strong><br />फर्नीचर के लिए 5.50 लाख का बजट मिला है। जिसकी खरीद के लिए टेंडर प्रक्रिया की जानी है, जो सहायक लेखाधिकारी के बिना संभव नहीं है। कॉलेज में डबल एओ का पद रिक्त है। हालांकि, नोडल कॉलेज को टैंडर प्रक्रिया करवाने के लिए सहायक लेखाधिकारी की व्यवस्था करवाने की मांग की है। पिछले साल भी बजट मिला था, जो डबल एओ के अभाव में टैंडर प्रक्रिया समय पर नहीं हो पाने से लैप्स हो गया। वित्तिय संबंधी कार्यों के लिए काफी परेशानी होती है। <br /><strong>- डॉ. बुद्धिप्रकाश मीणा, कार्यवाहक प्राचार्य, राजकीय अटरू महाविद्यालय</strong></p>
<p>लेखा नियमों की जानकारी की दृष्टि से महाविद्यालयों में सहायक लेखाधिकारी का होना हितकारी है। बड़े कॉलेजों में डबल एओ हैं। संबंधित कॉलेज के प्राचार्यों द्वारा मांग करने पर दूसरे महाविद्यालयों से व्यवस्था की जाती है। <br /><strong>- प्रो. गीताराम शर्मा, क्षेत्रिय सहायक निदेशक आयुक्तालय कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 23 Sep 2024 14:50:07 +0530</pubDate>
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                <title>न खेलने को मैदान, न सिखाने को शिक्षक, कैसे मिले मैडल</title>
                                    <description><![CDATA[ कॉलेजों में चल रहा इंटर कॉलेज स्पोर्ट्स कॉम्पिटीशन। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/no-ground-to-play--no-teacher-to-teach--how-to-get-medals/article-90678"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-09/630400-size-(11).png" alt=""></a><br /><p>कोटा। कोटा विश्वविद्यालय की ओर से  इंटर कॉलेज स्पोर्ट्स कॉम्पिटीशन का आयोजन किया जा रहा है। विवि से एफीलेटेड सभी कॉलेजों के बीच 4 सितम्बर से खेल प्रतियोगिताएं हो रही हैं। लेकिन कुछ कॉलेज ऐसे भी हैं, जिनके विद्यार्थी बिना प्रशिक्षण व गाइड के खेल रहे हैं। ऐसे में इनका गेम्स में पदक हासिल करना तो दूर जीतना तक मुश्किल हो रहा है।   संभाग के सबसे बड़े कला महाविद्यालय कोटा के छात्र    भी ऐसे ही हालातों से गुजर रहे हैं। हालात यह है, 12 दिन बाद भी छात्रों को गेम्स के तौर-तरीके सीखने के लिए स्पोर्ट्स टीचर तक नहीं लगाए गए। ऐसे में छात्र प्रतियोगिताओं में बेहतर प्रदर्शन नहीं कर पा रहे। महाविद्यालय प्रशासन की अनदेखी से छात्रों में नाराजगी है। </p>
<p><strong>बिना मैदान कैसे करें प्रैक्टिस</strong><br />राजकीय कला महाविद्यालय कोटा के नए भवन में स्पोट्स ग्राउंड नहीं है। चारों ओर झाड़-झंकाड़ का जंगल उगा हुआ है। विद्यार्थियों के खेलने की जगह नहीं होने से उन्हें स्टेडियम या फिर गवर्नमेंट साइंस कॉलेज में जाना पड़ता है। लेकिन वहां भी फुटबॉल कोर्ट, कबड्डी, खो-खो व हॉकी जैसे आउटडोर गेम्स की तैयारी के लिए मैदान नहीं है। ऐसे में विद्यार्थी पहले मैच में ही बाहर हो जाते हैं। <br /><strong>सीखे बिना खेल रहे गेम्स</strong><br />छात्रनेता रिद्वम शर्मा ने बताया कि अंतर महाविद्यालय स्पोर्ट्स प्रतियोगिता के तहत गवर्नमेंट आर्ट्स कॉलेज  के विद्यार्थी बिना ट्रैनिंग के ही शतरंग, टेबल टेनिस, क्रॉसकंट्री से गैम्स खेल चुके हैं। उन्हें न तो खेल के नियमों की जानकारी और न ही बारीकियां सीखने वाला है। नतीजन, इनमें से कई गेम में मुंह की खानी पड़ी। स्पोर्ट्स में रुचि रखने वाले विद्यार्थी स्वयं के स्तर पर ही स्कूल मैदान व स्टेडियम में प्रेक्टिस कर रहे हैं। </p>
<p><strong>3 दिन बाद हॉकी,जूडो व रेसलिंग कॉम्पिटीशन</strong><br />खेल कैलेंडर के अनुसार 19 व 20 सितम्बर से हॉकी, रेसलिंग, जूडो गेम्स शुरू होंगे। लेकिन, महाविद्यालय प्रशासन द्वारा अभी तक स्पोट्स टीचर नहीं लगाया गया। ऐसे में प्रतियोगिता में भाग लेने वाले विद्यार्थी असमंजस्य में हैं कि उन्हें इन गेम्स के नियम-कायदे  व बारीकियां कौन सिखाएगा। जबकि, इंटर कॉलेज में बेहतर प्रदर्शन करने के बाद प्रतिभागियों को स्टेट व नेशनल लेवल पर इंटर विश्वविद्यालय स्पोर्ट्स कॅम्पिटीशन में भाग लेने का मौका मिलता है। लेकिन, पीटीआई के अभाव में प्रतिभाओं को आगे बढ़ने का अवसर नहीं मिल पा रहा।</p>
<p><strong>1992 के बाद नहीं हुई भर्ती</strong><br />सरकारी कॉलेजों में वर्ष 1992 के बाद से ही पीटीआई की भर्ती नहीं हुई। हर साल भर्ती की आस में बड़ी संख्या में युवा बीपीएड की डिग्री ले रहे हैं।  लेकिन, भर्ती के अभाव में उनके सपने चकनाचूर हो रहे हैं। अधिकतर कॉलेजों में पीटीआई का चार्ज भी प्रोफेसरों को सौंप रखा है। जिसकी वजह से वे न तो अपने मूल कार्य कर पाते और न ही छात्रों को स्पोर्ट्स सिखा पाते। हालात यह हैं, सरकारी कॉलेजों में स्पोर्ट्स के नाम पर महज औपचारिकता निभाई जा रही है। </p>
<p><strong>सरकारी कॉलेजों में स्पोर्ट्स के हाल-बेहाल</strong><br />कोटा संभाग में 44 राजकीय महाविद्यालय हैं। जिनमें से गवर्नमेंट कॉलेज बारां में ही एकमात्र पीटीआई हैं। शेष 43 कॉलेजों में शारीरिक शिक्षक नहीं है। कोटा विवि द्वारा जब अंतर महाविद्यालय प्रतियोगिता का आयोजन करवाया जाता है तो महाविद्यालय द्वारा 3 से 4 माह के लिए संविदा पर शिक्षक रख लिया जाता है, जिसे प्रतियोगिता के बाद हटा दिया जाता है। इसके बाद पूरे साल स्पोर्ट्स सीखाने वाला नहीं होता। विद्यार्थी खेलों की बारीकियां व नियम कायदे नहीं सीख पाते। नतीजन, इंटर स्टेट लेवल की प्रतियोगिताओं से बाहर हो जाते हैं। </p>
<p>कॉलेज विकास समिति के माध्यम से स्पोट्स टीचर की नियुक्ति कर ली गई है। 18 सितम्बर से पीटीआई विद्यार्थियों को कैम्पस में स्पोर्ट्स का प्रशिक्षण देंगे, ताकि खेल प्रतिभाएं स्पोर्ट्स में बेहतर प्रदर्शन कर कॉलेज का नाम रोशन कर सके। खिलाड़ियों के लिए साधन-संसाधनों की कमी आड़े आने नहीं दी जाएगी। <br /><strong>-प्रो. रोशन भारती, प्राचार्य, गवर्नमेंट कॉलेज कोटा</strong></p>
<p><strong>क्या कहते हैं विद्यार्थी</strong><br />मैं पिछले कई सालों से वॉलीबॉल खेल रहा हूं। इस साल इंटर कॉलेज टूर्नामेंट में पार्टिसिपेट करुंगा, लेकिन बिना कोच व मैदान के बारीकियां नहीं सीख पा रहे। वहीं इस गेम में टेक्निक की आवश्यकता होती है, जो सीखने के लिए पीटीआई ही नहीं है। ऐसे में हम स्टेट लेवल के गेम्स में कैसे शामिल हो पाएंगे।  <br /><strong>- शाकिब पठान, छात्र द्वितीय वर्ष गवर्नमेंट कॉलेज</strong></p>
<p>देश स्पोर्ट्स को प्रोत्साहन दे रहा है लेकिन कॉलेज स्तर पर अनदेखी की जा रही है। सरकारी कॉलेजों में बुरे हाल है। विद्यार्थियों को मजबूरी में निजी स्पोर्ट्स अकेडमी में कोचिंग करनी पड़ती है। महाविद्यालय प्रशासन को छात्रहित में पीटीआई की व्यवस्था करें। दिसम्बर तक टूर्नामेंट चलेंगे। <br /><strong>- रोहित मालव, छात्रनेता, राजकीय महाविद्यालय</strong></p>
<p>यूनिवर्सिटी के खेल कैलेंडर के अनुसार अब तक स्विमिंग, टेबल टेनिस, शतरंज क्रॉस कंट्री जैसे खेल निकल चुके हैं, लेकिन अभी तक कॉलेज प्रशासन ने स्पोर्ट्स टीचर नहीं लगाए। यह सभी गेम्स छात्रों ने बिना   तैयारी व प्रशिक्षण के खेले हैं। जबकि, आगामी हॉकी, जूडो, रेसलिंग सहित अन्य कई खेल आने वाले हैं, जिनकी प्रैक्टिस करने के लिए न तो खेल मैदान हैं और न ही संसाधन। महाविद्यालय की अनदेखी का खामियाजा छात्रों को भुगतना पड़ रहा है। यदि, दो दिन में स्पोर्ट्स टीचर नहीं लगाए गए तो भूख हड़ताल करेंगे। <br /><strong>- रिद्धम शर्मा, छात्रनेता गवर्नमेंट कॉलेज कोटा</strong></p>
<p>मैं फुटबॉल खिलाड़ी हूं, अगले महीने हमारा इंटर कॉलेज का मैच है, अभी तक हमें सीखाने व प्रेक्टिस करवाने के लिए कॉलेज प्रशासन ने पीटीआई तक नहीं लगाए। न ही कॉलेज में खेल मैदान है। मजबूरन हमें स्कूल या स्टेडियम जाना पड़ता है। <br /><strong>- सिद्धम शर्मा, छात्र, प्रथम वर्ष गवर्नमेंट आर्ट्स कॉलेज </strong></p>
<p>महाविद्यालय में एडमिशन के दौरान विभिन्न मदों में फीस वसूली जाती है, जिसमें स्पोर्ट्स फीस भी शामिल है। इसके बावजूद हमें सुविधाएं नहीं मिल रही। कॉलेज प्रशासन की अनदेखी से खेल प्रतिभाएं दम तोड़ रही है। जबकि, स्पोर्ट्स में रोजगार के कई अवसर मिलते हैं।<br /><strong>- वैभव मिश्रा, छात्रनेता, गवर्नमेंट कॉलेज</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 16 Sep 2024 17:43:49 +0530</pubDate>
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                <title>बाइक स्टंट व फर्राटों पर कॉलेज का पावर ब्रेक</title>
                                    <description><![CDATA[पूर्व में स्टंट दिखाने के फेर में कई छात्र चोटिल भी हो चुके हैं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/college-s-power-brake-on-bike-stunts-and-speeding/article-67811"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-01/bike-stunt-va-farrato-pr-college-ka-power-brake...kota-news-22-01-2024.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। राजकीय महाविद्यालय कोटा में छात्रों के बाइक स्टंट और फर्राटों पर कॉलेज प्रशासन ने पावर ब्रेक लगा दिया है। जिससे मोर्डिफाइड बाइक व साइलेंसर की कानफोडू आवाज का शोर थम गया है। साथ ही 10 हजार से ज्यादा विद्यार्थियों को राहत मिली। दरअसल, नयापुरा स्थित गवर्नमेंट कॉलेज के हरिटेज भवन में साइंस व आर्ट्स दो महाविद्यालय संचालित होते हैं। दोनों कॉलेजों के मुख्य गेट के बीच करीब 300 मीटर का पथ-वे है। जहां कुछ विद्यार्थी मोडिफाइड बुलेट व पावर बाइक पर फर्राटा भरते हुए स्टंट दिखाने की होड़ सी लगी रहती थी। साइलेंस के कानफोडू आवाज से विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित होती थी। स्टूडेंट्स की शिकायत पर आर्ट्स व साइंस कॉलेज प्रशासन ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए पथ-वे के दोनों सिरे पर बेरीकेड्स लगवा दिए। इससे बाइकों का शोर थमने से विद्यार्थियों व शिक्षकों को राहत मिली। </p>
<p><strong>टोकने पर करते झगड़ा</strong><br />अशैक्षणिक स्टाफ महेंद्र जांगिड़, क्षितिज (परिवर्तित नाम) ने बताया कि एक दर्जन से अधिक छात्रों का समूह बुलेट, पल्सर सहित अन्य पावर बाइक इस रोड पर दौड़ाते हैं। जिसकी वजह से पैदल चलने वाले कई छात्र चोटिल हो चुके हैं। वहीं, कैम्पस में खड़ी कारों से टकरा जाते हैं। जिसकी वजह से कई वाहनों को नुकसान पहुंच चुका है। इन्हें रोकने-टोकने पर मारपीट पर उतारु हो जाते हैं। गाली-गलौच करते हुए झगड़ा करने लगते हैं। वहीं, पथ-वे में लगे पत्थर उखड़ गए। सबसे ज्यादा छात्राएं परेशान थी। </p>
<p><strong>स्टंट की होड़ में चोटिल हो चुके छात्र</strong><br />कॉलेज स्टाफ प्रभुलाल ने बताया कि कॉलेज परिसर में डी-पार्क बना है। जिसके सहारे करीब तीन सौ मीटर का पथ-वे है। इसके ठीक सामने हरिटेज भवन है। इस रास्ते का उपयोग विद्यार्थी व शिक्षक साइंस से आर्ट्स कॉलेज की ओर जाने के लिए करते हैं। वहीं, खेल मैदान तक पहुंचने के लिए भी यही मार्ग है। जिस पर कुछ छात्र पावर बाइक पर फर्राटा भरते हुए स्टंट दिखाते हैं। जिसकी वजह से पैदल चलने वाले विद्यार्थी हादसे से आशंकित रहते थे। पूर्व में स्टंट दिखाने के फेर में कई छात्र चोटिल भी हो चुके हैं। </p>
<p><strong>कानफोडू आवाज से पढ़ाई प्रभावित</strong><br />प्रथम वर्ष के छात्र मारू, सीनू व कैलाश ने बताया कि हेरिटेज भवन के पास फिजिक्स व मैथ्स की कक्षाएं संचालित होती हैं। कुछ छात्रों का समूह मोर्डिफाइड बाइक लेकर पथवे पर स्टंट करते हैं, बाइक दौड़ाते वक्त साइलेंसर की कानफोडू आवाज से क्लास में पढ़ नहीं पा रहे थे। इन छात्रों के साथ बाहरी युवकों का आना जाना लगा रहता था। इन्हें मना करने पर मारपीट पर उतारु रहते हैं। ऐसे में प्राचार्य व शिक्षकों से शिकायत के बाद कॉलेज प्रशासन ने एक्शन लेते हुए बेरीकेड्स लगवा दिए। इसके बाद बाइकों का शोर-शराबा थमने से विद्यार्थियों को राहत मिली। </p>
<p><strong>पार्क में बैठ नहीं पाते थे स्टूडेंट्स</strong><br />छात्रा मोनिका नायर, आंचल प्रजापति (परिवर्तित नाम) ने बताया कि बाइकों पर फर्राटा भरते छात्र हो-हल्ला मचाते थे। अपशब्दों का इस्तेमाल करते थे। जिसकी वजह से छात्राएं डी-पार्क में नहीं बैठ पाती थी। कॉलेज आने से पहले सोचना पड़ता था। शोर-शराबा अधिक होने से पढ़ाई में व्यवधान होता है। ऐसे में प्राचार्य से शिकायत की। कॉलेज प्रशासन द्वारा कार्रवाई किए जाने से राहत मिली।</p>
<p><strong>हादसे का डर व पढ़ाई हो रही थी बाधित</strong><br />महाविद्यालय परिसर में पथ-वे पर कुछ छात्र पावर बाइक को स्पीड से दौड़ाते थे, उनमें स्टंट दिखाने की होड़ लगी रहती थी। पथवे में महंगे पत्थर लगे हैं, वो भी जगह-जगह से उखड़ गए। शोर-शराबे के कारण पढ़ाई प्रभावित हो रही थी। विद्यार्थियों की भी लगातार शिकायत  मिल रही थी। ऐसे में कार्रवाई करते हुए पथ-वे के दोनों सिरे पर ब्रेरिकेड्स लगाकर वाहनों का प्रवेश बंद कर दिया। व्यवस्था बिगाड़ने वाले छात्रों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।<br /><strong>- डॉ. अरुण कुमार, कार्यवाहक प्राचार्य, गवर्नमेंट कॉलेज कोटा</strong></p>
<p>पथ-वे पर छात्रों के स्पीड से बाइक दौड़ाने व स्टंट करने की शिकायते मिली थी। बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होने के साथ हादसे की भी आशंका लगी रहती थी। ऐसे में कार्रवाई करते हुए बेरिकेड्स लगाए हैं। साथ ही विद्यार्थियों को नियम तोड़ने पर सख्त कार्रवाई की हिदायत दी है। <br /><strong>- प्रो. रोशन भारती, प्राचार्य, गवर्नमेंट आर्ट्स कॉलेज कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 22 Jan 2024 20:02:56 +0530</pubDate>
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                <title>क्यूआर कोड स्कैन करो और जानो पेड़ों की जन्म कुंडली</title>
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/scan-the-qr-code-and-know-the-horoscope-of-trees/article-57274"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-09/gan-(5)1.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। जेडीबी साइंस कॉलेज की ओर से वनों के महत्व को लेकर अनूठी पहल की गई है। कॉलेज प्रशासन ने अपने कैम्पस में लगे बरसों पुराने पेड़ों की विशेषताएं और उनसे जुड़ी सम्पूर्ण जानकारी को डिजीटिलाइजेशन कर दिया है। हर पेड़ों पर बार कोड लगाए गए हैं, जिसे स्केन करते ही मोबाइल पर उस पेड़ से जुड़ी सम्पूर्ण जानकारी व क्वालिटी पलभर में मोबाइल पर सामने आ जाएगी। वनस्पति ज्ञान को बढ़ावा देने की दिशा में कॉलेज प्रशासन की पहल शोधार्थियों के लिए रिसर्च में मील का पत्थर साबित होगी। </p>
<p><strong>57 छात्राओं ने सूचनाएं की डिजीटलाइज</strong><br />वनस्पति शास्त्र शोधार्थी प्रियल विजयवर्गीय और एमएससी फाइनल बॉटनी की छात्रा सोफिया खान के नेतृत्व में 6 जोन बनाए गए। प्रत्येक ग्रुप में 8 से 10 छात्राओं को मिलाकर कुल 57 छात्राओं ने कैम्पस में लगे सभी पेड़ों की विशेषज्ञाओं व उनके गुणकारी लाभों की जानकारी डिजीटिलाइजेशन कर क्यूआर कोड में तब्दील की। इससे विद्यार्थियों पेड़ों से संबंधित सवालों के जवाब मिल सकेंगे। वहीं उनके फायदों से रूबरू हो सकेंगे। </p>
<p><strong>पेड़ों की जानकारी पीडीएफ फॉरर्मेट में भी </strong><br />छात्राओं ने वनस्पति व पेड़-पौधों की सम्पूर्ण जानकारी को गुगल ड्राइव पर अपलोड किया है। वहां से क्यूआर कोड स्केन करने पर विद्यार्थियों को तमाम जानकारी पीडीएफ फॉरर्मेट में भी उपलब्ध होगी। जिसे गूगल ड्राइव से कॉपी  की जा सकती है। वनस्पति विभाग की प्रो. प्रतिमा श्रीवास्तव, डॉ नितिका सिंह और डॉ नरेश नायक के मार्गदर्शन में अब तक कुल 206 कोड सफलतापूर्वक उत्पन्न करने में सक्षम हुए हैं।  </p>
<p><strong>कॉलेज में जंगल जलेबी से मसालों तक के पौधे </strong><br />डॉ. श्रीवास्तव ने बताया कि महाविद्यालय परिसर में अमलतास, जंगल जलेबी, पीपल, शहतूत, कलम, कदंब, सेमल, भृंगराज, अश्वगंधा, एलोवेरा, शतावरी सहित कई औषधीय गुणों से भरपूर पेड़-पौधे हैं। इसके अलावा फलदार में जामुन, अमरूद, नींबू शामिल हैं। इसी तरह जलीय पादप हाइड्रिला, पाम ट्री की विभिन्न प्रजातियां, वहीं, मसालों में अजवाइन, करी पत्ते के पौधे हैं। इसके अलावा विभिन्न प्रजातियों के जिम्नोस्पर्म वर्ग में एरिकेरियाए थूजा, लघुतम जिम्नोस्पर्म जेमिया, लोअर टैक्सा, शैवाल, फ्लोटिंग फर्न्स,साल्वीनिया, एजोला ब्रायोफाइट्स, रिक्सिया प्रजातियों को भी शामिल किया है। </p>
<p><strong>महाविद्यालय में वनस्पतियों का भंडार </strong><br />विभागाध्यक्ष डॉ प्रतिमा श्रीवास्तव ने बताया कि महाविद्यालय परिसर में  206 प्रजातियों के पेड़ पौधे हैं। जिनका ज्ञान न केवल वनस्पति विज्ञान के विद्यार्थियों बल्कि अन्य संकाय के विद्यार्थियों को भी होना चाहिए। क्यूआर कोड स्केन करने पर कोई भी पेड़ों के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। 206 प्रजातियों के पेड़ व पौधों पर कोड लगाए जा रहे हैं। </p>
<p><strong>महाविद्यालय में बनेगा पौधों का डेटाबेस</strong><br />प्राचार्य डॉ. संजय भार्गव ने कहा, नई पीढ़ी प्रकृति और पेड़ो से दूर होती जा रही है, ऐसे में उन्हें वनों की महत्वता व औषधीय गुणों से रूबरू करने के लिए महाविद्यालय प्रशासन ने यह पहल की है। जिसका लाभ विद्यार्थियों व शौधार्थियों को अपने रिसर्च में उपयोगी साबित होगी। वहीं, महाविद्यालय में पौधों के डाटाबेस की स्थापना की जाएगी। जिससे रिसर्चर को शोध में मदद मिल सकेगी।  </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 16 Sep 2023 17:30:03 +0530</pubDate>
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