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                <title>qr code - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>ईंधन संकट: श्रीलंका में आपूर्ति बाधाओं के बीच अनिवार्य क्यूआर कोड व्यवस्था लागू, साप्ताहिक ईंधन कोटा भी निर्धारित</title>
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                        <![CDATA[पश्चिम एशिया युद्ध के कारण तेल आपूर्ति बाधित होने पर श्रीलंका ने अनिवार्य क्यूआर कोड प्रणाली फिर से शुरू की है। जमाखोरी रोकने के लिए कारों के लिए 15 लीटर और बाइक के लिए 5 लीटर जैसे साप्ताहिक कोटे तय किए गए हैं। सरकार का लक्ष्य मौजूदा स्टॉक का कुशल प्रबंधन कर आर्थिक स्थिरता बनाए रखना है।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/fuel-crisis-in-sri-lanka-amid-supply-constraints-mandatory-qr/article-146576"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/sri-lanka.png" alt=""></a><br /><p>कोलंबो। पश्चिम एशिया में जारी सैन्य संघर्ष के कारण तेल आपूर्ति मार्गों में आए व्यवधानों को देखते हुए श्रीलंका सरकार ने रविवार से देश भर में वाहनों के लिए अनिवार्य क्यूआर कोड प्रणाली के माध्यम से ईंधन वितरण शुरू कर दिया है। ऊर्जा मंत्रालय की एक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, यह कदम देश के ईंधन भंडार का कुशल प्रबंधन करने और आर्थिक गतिविधियों को सुचारू रूप से चलाने के लिए उठाया गया है।</p>
<p>मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि यह व्यवस्था आज सुबह से प्रभावी हो गई है। अब किसी भी पेट्रोल पंप पर बिना पंजीकृत क्यूआर कोड के वाहनों को ईंधन जारी नहीं किया जाएगा। सरकार ने इस प्रणाली के साथ-साथ वाहनों के लिए साप्ताहिक ईंधन कोटा भी निर्धारित किया है। इसके तहत बसों को 60 लीटर, कारों को 15 लीटर, मोटरसाइकिल को 5 लीटर, वैन को 40 लीटर और भारी वाहनों (लॉरी) को 200 लीटर ईंधन आवंटित किया गया है। इसके अलावा थ्री-व्हीलर्स के लिए 15 लीटर और विशेष प्रयोजन वाहनों के लिए 40 लीटर की सीमा तय की गई है।</p>
<p>ऊर्जा मंत्रालय के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति श्रृंखला में बाधा और घरेलू मांग में अचानक आई तेजी के कारण मौजूदा स्टॉक का सावधानीपूर्वक प्रबंधन करना आवश्यक हो गया था। मंत्रालय ने यह भी बताया कि ईंधन की अवैध जमाखोरी और कालाबाजारी ने भी मांग में वृद्धि में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इस क्यूआर प्रणाली का मुख्य उद्देश्य जमाखोरी पर लगाम लगाना और आम जनता के दैनिक कार्यों को बिना किसी व्यवधान के सुनिश्चित करना है।</p>
<p>उल्लेखनीय है कि श्रीलंका ने इससे पहले वर्ष 2022 के भीषण आर्थिक संकट के दौरान भी इसी प्रकार की क्यूआर प्रणाली का सफल कार्यान्वयन किया था। आवश्यक सेवाओं और उत्पादन गतिविधियों में लगे वाहनों के लिए अलग से वितरण व्यवस्था लागू की जाएगी।</p>]]>
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                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 15 Mar 2026 15:27:53 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Jaipur NM]]>
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            <item>
                <title>महिला सुरक्षा की ओर तकनीक आधारित बड़ा कदम: अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर राजस्थान पुलिस की अभिनव पहल; बस, ऑटो और टैक्सी में ‘राजकॉप सिटीजन एप’ के क्यूआर कोड पोस्टर लगाने की शुरुआत</title>
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                        <![CDATA[अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के उपलक्ष्य में राजस्थान पुलिस ने 'राजकॉप सिटीजन एप' अभियान शुरू किया है। इसके तहत बस, ऑटो और टैक्सियों में क्यूआर कोड लगाए जा रहे हैं। संकट के समय महिलाएं कोड स्कैन कर 'Need Help' फीचर के जरिए अपनी लाइव लोकेशन सीधे पुलिस कंट्रोल रूम भेज सकेंगी, जिससे त्वरित सहायता सुनिश्चित होगी।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/big-step-based-on-technology-towards-womens-safety-innovative-initiative/article-145085"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/jaipur-police.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। आगामी 8 मार्च अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर महिला सुरक्षा को और अधिक सशक्त बनाने की दिशा में राजस्थान पुलिस ने एक महत्वपूर्ण और तकनीक आधारित पहल की शुरुआत की है। पहल के तहत पुलिस महानिदेशक राजीव कुमार शर्मा की मंशा के अनुरूप प्रदेशभर में सार्वजनिक परिवहन साधनों—बस, ऑटो एवं टैक्सी—में ‘राजकॉप सिटीजन एप’ के क्यूआर कोड युक्त पोस्टर एवं स्टीकर चिपकाने का विशेष अभियान प्रारंभ किया गया है।</p>
<p>इस अभियान का उद्देश्य यात्रा के दौरान महिलाओं एवं बच्चियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना तथा किसी भी आपातकालीन स्थिति में उन्हें तत्काल पुलिस सहायता उपलब्ध कराना है। पुलिस मुख्यालय के निर्देशानुसार प्रदेश के विभिन्न जिलों में यातायात पुलिसकर्मियों द्वारा बसों, ऑटो और टैक्सियों पर क्यूआर कोड वाले पोस्टर व्यवस्थित रूप से लगाए जा रहे हैं।</p>
<p>एक स्कैन… और सीधे पुलिस से संपर्क</p>
<p>सार्वजनिक परिवहन में यात्रा कर रही छात्राएं, कामकाजी महिलाएं अथवा अन्य महिला यात्री अपने स्मार्टफोन से वाहन में प्रदर्शित क्यूआर कोड को स्कैन कर सीधे ‘राजकॉप सिटीजन एप’ डाउनलोड कर सकती हैं। इस एप में उपलब्ध ‘Need Help’ फीचर विशेष रूप से संकट की स्थिति को ध्यान में रखकर विकसित किया गया है। आपातकालीन परिस्थिति में एक क्लिक पर महिला की लोकेशन सीधे पुलिस कंट्रोल रूम तक पहुंच जाती है, जिससे त्वरित सहायता सुनिश्चित की जा सके।</p>
<p>तकनीक से मजबूत होगा भरोसा</p>
<p>राजस्थान पुलिस की यह पहल महिला सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्धता का सशक्त उदाहरण है। सार्वजनिक परिवहन में क्यूआर कोड प्रदर्शित होने से छात्राओं एवं कामकाजी महिलाओं में सुरक्षा का भाव और विश्वास बढ़ेगा। यह अभियान तकनीक आधारित सुरक्षा तंत्र को जमीनी स्तर तक पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा। महिला दिवस के अवसर पर शुरू की गई यह पहल न केवल जागरूकता बढ़ाएगी, बल्कि महिलाओं को आत्मविश्वास के साथ यात्रा करने का सशक्त माध्यम भी प्रदान करेगी।</p>
<p>महिला सशक्तिकरण की दिशा में ठोस प्रयास</p>
<p>राजस्थान पुलिस का यह प्रयास दर्शाता है कि महिला सुरक्षा केवल प्राथमिकता ही नहीं, बल्कि सतत मिशन है। समाज में सुरक्षित वातावरण का निर्माण तभी संभव है जब सुरक्षा व्यवस्था आधुनिक तकनीक से लैस होकर आमजन तक सहज रूप से उपलब्ध हो। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर शुरू की गई यह पहल प्रदेश में महिला सुरक्षा के नए अध्याय की शुरुआत मानी जा रही है।</p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 01 Mar 2026 17:44:21 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Jaipur NM]]>
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                <title>एफएसएसएआई ने आसान शिकायत के लिए रेस्टोरेंट में क्यूआर कोड किया अनिवार्य, स्मार्टफोन के जरिए क्यूआर कोड को स्कैन कर आसानी से कर सकते हैं उपयोग </title>
                                    <description>
                        <![CDATA[भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) के द्वारा देश भर के सभी खाद्य व्यवसाय संचालकों (FBO) के लिए एक नया निर्देश जारी किया गया है।]]>
                    </description>
                
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/fssai-can-easily-use-the-qr-code-through-compulsory-smartphones/article-122543"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-08/212142roer-(13).png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) के द्वारा देश भर के सभी खाद्य व्यवसाय संचालकों (FBO) के लिए एक नया निर्देश जारी किया गया है, जिसमें देश के सभी रेस्टोरेंट, कैफे, ढ़ाबे और रेहड़ी-पटरी वाले खाने-पीने की दुकानें शामिल हैं। इसके तहत निर्देश जारी किया गया कि सभी रेस्टोरेंट को अपने FSSAI लाइसेंस या पंजीकरण प्रमाणपत्र को एक क्यूआर कोड के साथ स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करना होगा, जो की फूड सेफ्टी कनेक्ट ऐप से जुड़ा हुआ हो। इस कदम का उद्देश्य उपभोक्ताओं को सशक्त बनाना है और सभी के लिए खाद्य सुरक्षा, स्वच्छता और भ्रामक उत्पाद लेबल के बारे में शिकायत दर्ज करना आसान बनाना है।</p>
<p>क्यूआर कोड, जो अब एफएसएसएआई लाइसेंस का एक अनिवार्य हिस्सा बन गया है, ऐसे क्षेत्रों, जैसे प्रवेश द्वार, बिलिंग काउंटर या डाइनिंग सेक्शन में लगाया जाना चाहिए जहां ग्राहक इसे आसानी से देख पाए। इसका उपयोग करना बड़ा ही आसान है- ग्राहक अपने स्मार्टफोन के जरिए क्यूआर कोड को आसानी से स्कैन कर सकते हैं और उन्हें ऐप पर रीडायरेक्ट कर दिया जाएगा, जहाँ सभी ग्राहक शिकायत दर्ज कर सकते हैं या आउटलेट की पंजीकरण स्थिति के बारे में कोई भी महत्वपूर्ण जानकारी देख सकते हैं।</p>]]>
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                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 04 Aug 2025 12:12:42 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>रेलवे के क्यूआर कोड ने बढ़ाया तत्काल टिकट लेने वाले यात्रियों का सिरदर्द </title>
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                        <![CDATA[नगद वाले काउंटर के साथ क्यूआर कोड वाला काउंटर देने से लोगों को परेशानी हो रही है। ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/railway-s-qr-code-has-increased-the-headache-of-passengers-buying-tatkal-tickets/article-92363"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-10/4427rtrer-(2)5.png" alt=""></a><br /><p>कोटा ।  यात्रियों की सुविधा बढ़ाने के लिए रेलवे ने हाल ही में आॅनलाइन पेमेंट के लिए क्यूआर कोड शुरू किया है, ताकि यात्रियों को आॅनलाइन पेमेंट करने में कोई दिक्कत न हो लेकिन तत्काल टिकट लेने वालों के लिए सिर दर्द बन रहा है। कारण की कैश से टिकट खरीदने वालों की संख्या ज्यादा है। क्यूआर कोड से भुगतान करने वालों की कम। ऐेसे में यात्रियों के लिए क्यूआर कोड काउंटर सिरदर्द बन गया है। क्यूआर कोड काउंटर से  तत्काल की टिकट खरीदने वाले यात्रियों को वेटिंग का टिकट मिल रहा है, नगद वालों को कर्न्फम टिकट मिल रहा है। यात्रियों ने बताया कि  नगद रकम देकर यात्रियों को तुरंत ही तत्काल टिकट मिलती है।  वहीं, तत्काल का क्यूआर कोड के जरिए लिया गया टिकट रद्द कराने पर रकम वापस मिलने में 10 से 15 दिनों का वक्त लगता है।  क्यूआर कोड से बनाई टिकट पर यात्रा की तारीख नहीं बदली जा सकती है।  जबकि, नगद रकम देकर बनाई गई टिकट में ऐसा संभव है। इसके अलावा क्यूआर कोड स्क्रीन कर भुगतान करने के दौरान नेट संबंधी परेशानी आने तक दूसरे व्यक्ति को टिकट नहीं मिलता है। इतने में तत्काल की सीटे बुक हो जाती है और लाइन में खड़े दूसरे लोगों को वेटिंग टिकट मिलती है। ऐसे में लोगों ने क्यूआर कोड के लिए अलग काउंटर की मांग की है। नगद वाले काउंटर के साथ क्यूआर कोड वाला काउंटर देने से लोगों को परेशानी हो रही है। </p>
<p><strong>80 फीसदी कैश वाले यात्री </strong><br /> रेलवे स्टेशन से बड़ी संख्या में यात्रियों का आवागमन होता है।  आरक्षण काउंटर पर दिनभर में 80 फीसदी यात्री कैश से टिकट लेते हैं, दोनों का एक ही काउंटर होने लोगों परेशानी होती है। कैश काउंटर पर लंबी लाइनें लगी रहती है। कैश व क्यूआर कोड काउंटर अलग अलग करने यात्रियों परेशानी कम होगी। </p>
<p><strong>क्यूआर कोड व कैश काउंटर एक होने से यह आ रही परेशानी</strong><br />- क्यूआर कोड से वेटिंग टिकट मिल रही।  <br />- टिकट निरस्त कराने पर सात दिन में खाते में भुगतान आता है। <br />- क्यूआर कोड से बनाई टिकट की तारीख नहीं बदली जा सकती है।<br />- नेटवर्क धीमा होने और भुगतान कर्न्फम होने तक टिकट होल्ड पर रहती है तब तक सीटे फूल हो जाती है।<br /> - तत्काल टिकट में सबसे ज्यादा परेशानी होती है। <br />-  भीड़ से छुटकारा और ट्रांसपेरेंसी में हुआ इजाफा</p>
<p><strong>आॅनलाइन पेमेंट के चक्कर में तत्काल में मिलती वेटिंग टिकट</strong><br />आॅनलाइन भुगतान में सबसे ज्यादा परेशानी तत्काल टिकट निकालने वाले यात्रियों को आती है। यहां कुछ ही देर का खेल होता सीटे जल्दी बुक हो जाती है। आॅनलाइन और कैश काउंटर एक ही होने से विंडो पर खड़े यात्री द्वारा क्यूआर कोड आॅनलाइन पेमेंट करने के दौरान कई बार नेट की समस्या आ जाती कई बार लेनदेन फैल हो जाता है और फिर से प्रोसेस शुरू करता है। इतनी देर में पीछे वाले व्यक्ति को टिकट वेटिंग चला जाताहै। दूसरा आॅनलाइन वाले को भी कर्न्फम टिकट  की जगह वेटिंग टिकट मिलती है। रेलवे को आॅनलाइन भुगतान वालों के लिए अलग से विंडो रखनी चाहिए ताकि नगद भुगतान वालों को समस्या नहीं हो। <br /><strong>-विशाल भट्ट यात्री, निवासी नयापुरा </strong></p>
<p>क्यूआर कोड के जरिए डिजिटल भुगतान की सुविधा से यात्रियों को टिकट काउंटर पर लगने वाली भीड़ से राहत मिल रही। इसके अलावा, कैश की कमी की समस्या और कैश मिलाने में लगने वाला समय भी बच जाता है। तत्काल टिकट लेने वालों को अपने साथ कैश का विकल्प भी रखना चाहिए जिससे ट्राजेक्शन फैल होने या कोई अन्य एरर आने पर नगद देकर तत्काल टिकट ली जा सकती है। इस नई व्यवस्था से टिकट खरीदने की प्रक्रिया में तेजी आई और ट्रांसपेरेंसी को भी बढ़ावा मिलेगा। <br /><strong> -रोहित मालवीय, सीनियर डीसीएम कोटा</strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 05 Oct 2024 16:02:07 +0530</pubDate>
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                <title>Albert Hall Museum : पर्यटकों को क्यूआर कोड स्कैन कर मिल रही दुर्लभ वस्तुओं की जानकारी</title>
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                        <![CDATA[जानकारी के अनुसार आगे संग्राहालय में प्रदर्शित सभी दुर्लभ वस्तुओं के पास भी क्यूआर कोड लगेंगे।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/albert-hall-museum-tourists-are-getting-information-about-rare-objects/article-82872"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-06/u1rer-(1)2.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। प्रदेश में पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग के अधीन आने वाले स्मारकों और संग्रहालयों को हाईटेक करने का कार्य किया जा रहा है। इसके तहत अल्बर्ट हॉल संग्रहालय की विभिन्न गैलरियों में प्रदर्शित अधिकतर पुरा-वस्तुओं के पास क्यूआर कोड लगाए गए हैं। ताकि पर्यटक इन्हें स्कैन कर जानकारी ले सकते हैं। जानकारी के अनुसार आगे संग्राहालय में प्रदर्शित सभी दुर्लभ वस्तुओं के पास भी क्यूआर कोड लगेंगे।</p>
<p>आमेर महल के विभिन्न हिस्सों में भी इस तरह के क्यूआर कोड लगने की तैयारी हो रही है। पुरातत्व विभाग के अधीन आने वाले संग्रहालयों और स्मारकों में क्यूआर कोड लगने की खबर सबसे पहले दैनिक नवज्योति ने 7 मई, 2024 को ‘प्रदेश के स्मारकों और संग्रहालयों पर पहली बार लगाए जाएंगे क्यूआर कोड’ शीर्षक से प्रकाशित की थी। अब पर्यटक जैसे ही मोबाइल से इसे स्कैन करेंगे, वैसे ही पुरा-वस्तुओं के इतिहास की जानकारी स्क्रीन पर आ जाएगी। </p>
<p>अल्बर्ट हॉल संग्रहालय के अधीक्षक मो. आरिफ ने कहा कि म्यूजियम की विभिन्न गैलरियों में अधिकतर पुरा-वस्तुओं के पास क्यूआर कोड लगाए हैं। इन्हें स्कैन करने से पर्यटकों को इनके इतिहास की जानकारी मिलेगी। संग्रहालय में अन्य जगहों पर भी इन्हें लगाया जाएगा। <br /><br /></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 27 Jun 2024 11:02:23 +0530</pubDate>
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                <title>क्यूआर कोड स्कैन करो और जानो पेड़ों की जन्म कुंडली</title>
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                        <![CDATA[सभी पेड़ों की विशेषज्ञाओं व उनके गुणकारी लाभों की जानकारी डिजीटिलाइजेशन कर क्यूआर कोड में तब्दील की। ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/scan-the-qr-code-and-know-the-horoscope-of-trees/article-57274"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-09/gan-(5)1.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। जेडीबी साइंस कॉलेज की ओर से वनों के महत्व को लेकर अनूठी पहल की गई है। कॉलेज प्रशासन ने अपने कैम्पस में लगे बरसों पुराने पेड़ों की विशेषताएं और उनसे जुड़ी सम्पूर्ण जानकारी को डिजीटिलाइजेशन कर दिया है। हर पेड़ों पर बार कोड लगाए गए हैं, जिसे स्केन करते ही मोबाइल पर उस पेड़ से जुड़ी सम्पूर्ण जानकारी व क्वालिटी पलभर में मोबाइल पर सामने आ जाएगी। वनस्पति ज्ञान को बढ़ावा देने की दिशा में कॉलेज प्रशासन की पहल शोधार्थियों के लिए रिसर्च में मील का पत्थर साबित होगी। </p>
<p><strong>57 छात्राओं ने सूचनाएं की डिजीटलाइज</strong><br />वनस्पति शास्त्र शोधार्थी प्रियल विजयवर्गीय और एमएससी फाइनल बॉटनी की छात्रा सोफिया खान के नेतृत्व में 6 जोन बनाए गए। प्रत्येक ग्रुप में 8 से 10 छात्राओं को मिलाकर कुल 57 छात्राओं ने कैम्पस में लगे सभी पेड़ों की विशेषज्ञाओं व उनके गुणकारी लाभों की जानकारी डिजीटिलाइजेशन कर क्यूआर कोड में तब्दील की। इससे विद्यार्थियों पेड़ों से संबंधित सवालों के जवाब मिल सकेंगे। वहीं उनके फायदों से रूबरू हो सकेंगे। </p>
<p><strong>पेड़ों की जानकारी पीडीएफ फॉरर्मेट में भी </strong><br />छात्राओं ने वनस्पति व पेड़-पौधों की सम्पूर्ण जानकारी को गुगल ड्राइव पर अपलोड किया है। वहां से क्यूआर कोड स्केन करने पर विद्यार्थियों को तमाम जानकारी पीडीएफ फॉरर्मेट में भी उपलब्ध होगी। जिसे गूगल ड्राइव से कॉपी  की जा सकती है। वनस्पति विभाग की प्रो. प्रतिमा श्रीवास्तव, डॉ नितिका सिंह और डॉ नरेश नायक के मार्गदर्शन में अब तक कुल 206 कोड सफलतापूर्वक उत्पन्न करने में सक्षम हुए हैं।  </p>
<p><strong>कॉलेज में जंगल जलेबी से मसालों तक के पौधे </strong><br />डॉ. श्रीवास्तव ने बताया कि महाविद्यालय परिसर में अमलतास, जंगल जलेबी, पीपल, शहतूत, कलम, कदंब, सेमल, भृंगराज, अश्वगंधा, एलोवेरा, शतावरी सहित कई औषधीय गुणों से भरपूर पेड़-पौधे हैं। इसके अलावा फलदार में जामुन, अमरूद, नींबू शामिल हैं। इसी तरह जलीय पादप हाइड्रिला, पाम ट्री की विभिन्न प्रजातियां, वहीं, मसालों में अजवाइन, करी पत्ते के पौधे हैं। इसके अलावा विभिन्न प्रजातियों के जिम्नोस्पर्म वर्ग में एरिकेरियाए थूजा, लघुतम जिम्नोस्पर्म जेमिया, लोअर टैक्सा, शैवाल, फ्लोटिंग फर्न्स,साल्वीनिया, एजोला ब्रायोफाइट्स, रिक्सिया प्रजातियों को भी शामिल किया है। </p>
<p><strong>महाविद्यालय में वनस्पतियों का भंडार </strong><br />विभागाध्यक्ष डॉ प्रतिमा श्रीवास्तव ने बताया कि महाविद्यालय परिसर में  206 प्रजातियों के पेड़ पौधे हैं। जिनका ज्ञान न केवल वनस्पति विज्ञान के विद्यार्थियों बल्कि अन्य संकाय के विद्यार्थियों को भी होना चाहिए। क्यूआर कोड स्केन करने पर कोई भी पेड़ों के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। 206 प्रजातियों के पेड़ व पौधों पर कोड लगाए जा रहे हैं। </p>
<p><strong>महाविद्यालय में बनेगा पौधों का डेटाबेस</strong><br />प्राचार्य डॉ. संजय भार्गव ने कहा, नई पीढ़ी प्रकृति और पेड़ो से दूर होती जा रही है, ऐसे में उन्हें वनों की महत्वता व औषधीय गुणों से रूबरू करने के लिए महाविद्यालय प्रशासन ने यह पहल की है। जिसका लाभ विद्यार्थियों व शौधार्थियों को अपने रिसर्च में उपयोगी साबित होगी। वहीं, महाविद्यालय में पौधों के डाटाबेस की स्थापना की जाएगी। जिससे रिसर्चर को शोध में मदद मिल सकेगी।  </p>]]>
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                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 16 Sep 2023 17:30:03 +0530</pubDate>
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