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                <title>चाकू से लगाएंगें आंखों में काजल, पलकों से उठाएंगें सूई</title>
                                    <description><![CDATA[यह अखाड़ा कोटा का सबसे पुराना अखाड़ा है जिसकी स्थापना उस्ताद चौथमल द्वारा करीब सौ साल पहले की गई थी। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/will-apply-kajal-in-the-eyes-with-a-knife--will-lift-the-needle-from-the-eyelashes/article-58063"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-09/ch.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। बाइक को आग के गोले से निकालना, चाकू से आँख में काजल डालना या आखों कि पलकों से सूई को उठाना सब सुनकर कैसा लगा बहुत खतरनाक और जोखिम भरा है। आज हम बात कर रहे हैं छोटी समाध स्थित उस्ताद चौथमल अखाड़ा कि जो कोटा शहर सबसे पुराना अखाड़ा है और एक सदी से भी ज्यादा समय से यहां के कलाबाज और उस्ताद कोटा के निवासीयों को दांतों तले उंगली चबाने को मजबूर कर रहे हैं। अखाड़ा और उसमें प्रैक्टिस करने वाले सभी लडकें एक से बढ़कर एक हैरतंगेज करतबों कि जमकर प्रैक्टिस कर रहे हैं जो किसी का भी मुहं खुला का खुला रहने पर मजबूर कर दे। इस बार करने वाले हैं रोंगटे खड़े कर देने वाले करतब व्यायामशाला के संरक्षक उस्ताद बालकिशन बरथूनिया ने बताया कि व्यायामशाला के लड़के सामान्य करतबों को करने के साथ साथ इस बार अपनी क्षमताओं से थोड़ा आगे जाकर कुछ ऐसे करतब करने जा रहे हैं जो दर्शकों कि सोचने पर मजबूर कर देंगे।</p>
<p>उन्होंने बताया कि इस बार अखाड़े से लड़के एक साथ, सात हथियारों को चलाएगा जो बहुत ही मुश्किल होगा और ऐसा अभी तक किसी ने नहीं किया है इसके साथ ही अखाड़े के लड़के आंखों पर काली पट्टी बांध कर हाथौड़े से पत्थर तोड़ने का करतब भी करेंगे। ऐसे ही आग कि रिंग से बाइक पर इस बार एक कि जगह दो कलाबाज बैठकर करतब दिखाएंगें वहीं इसके साथ ही चाकू से आंख में काजल लगाने वाला करतब भी अखाड़े के कलाबाजों द्वारा दिखाया जाएगा। संरक्षक बरथूनिया ने आगे बताया कि लड़के आंखों कि पलकों से सुई भी उठाएंगें जिसकी प्रैक्टिस वो लगातार कर रहे हैं। ये सारे करतब जितने बात करने में मुश्किल हैं उससे कहीं ज्यादा करने में मुश्किल हैं और व्यायामशाला के कलाबाज इन सभी करतबों को प्रशासन द्वारा निर्धारित किए गए सभी चिन्हों पर प्रर्दशित करेंगें। </p>
<p><strong>सहयोगियों के दम पर चल रहा है अखाड़ा</strong><br />अखाड़े के संरक्षक उस्ताद बालकिशन बरथूनिया ने बताया कि इस अखाड़े के संचालन के लिए वो साल भर में एक बार ही सामाजिक सहयोग लेते हैं और साल भर का खर्चा व्यायामशाला कि समिति ही उठाती है उनका कहना है कि अखाड़ा इतना पुराना होने और इतने पहलवान देने के बावजूद भी उन्हें कोई सरकारी मदद नहीं मिलती है। जहां एक ओर अखाड़ा हर बार प्रतियोगिताओं में प्रथम स्थान पर रहता है वहीं दुसरी ओर उसे विजेता के रूप में प्रोत्साहन राशी भी नहीं मिलती। साथ अखाड़े को एक कुश्ती सिखाने के लिए एक कोच कि जरूरत है जिसके लिए भी प्रशासन से अपील कि गई है पर आगे कि कोई कारवाई नहीं है।</p>
<p><strong>व्यायामशाला से जुडे है कोटा के कई मशहूर पहलवान और कलाबाज</strong><br />व्यायामशाला के संचालक शशी नामा ने बताया कि ये अखाड़ा कोटा का सबसे पुराना अखाड़ा है जिसकी स्थापना उस्ताद चौथमल द्वारा करीब सौ साल पहले की गई थी। उस्ताद चौथमल कोटा के पहले उस्ताद थे जिन्होंने कोटा में अखाड़े कि शुरूआत की थी जिसके बाद इसी अखाड़े से निकलकर कई पहलवानों और सदस्यों ने अपनी अपनी व्यायामशाला और अखाडेÞ खोले। नामा ने आगे बताया कि इस अखाड़े के उस्ताद चौथमल कोटा ही नहीं बल्कि भारत में भी प्रसिद्ध थे जिस कारण उनके समय के विश्वविजता पहलवान उस्ताद चौथमल का आशीर्वाद लेने आते थे। इस अखाड़े में प्रसिद्ध पहलवान और विश्वविजेता दारा सिंह, पहलवान चंदगीराम, पहलवान सकपाल सिंह, पहलवान विश्वनाथ भी अपनी मौजूदगी दर्ज करा चुके हैं जो सभी उस्ताद चौथमल का आशीर्वाद और मार्गदर्शन लेकर गए। वहीं इनके साथ ही अखाड़े से कोटा के प्रसिद्ध पहलवान गणेश पहलवान, राम पहलवान, पहलवान सुरेन्द्र भोलू, पहलवान सिकन्दर, पहलवान रामचन्द्र चौहान स्वतंत्रता सेनानी गुलाबचन्द शर्मा और मोहनलाल शर्मा भी निकले जिन्होंने पहलवानी खुब नाम कमाया। वहीं इस अखाड़े के पहलवान गोपाल तलवार को अपनी कमर पर बांधकर हवा में उछाल कर मुंह से पकड़ने का करतब दिखाया करते थे जो आज भी कोई कलाबाज नहीं दिखा पाता है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 26 Sep 2023 11:23:13 +0530</pubDate>
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                <title>महिला अखाड़े जो दिखाते हैं हैरत अंगेज प्रदर्शन</title>
                                    <description><![CDATA[अखाड़े में कलाबाजी के गुर सीख रही युवतियों ने बताया कि उन्हें पहले डर लगता था लेकिन कहते हैं ना कि डर के आगे जीत है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/mahila-akharas-that-show-amazing-performances/article-57600"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-09/mahila-akhade-jo-dikhate-h-heratangez-pradarshan...kota-news-20-09-2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। बल्लम, भाला, तलवार, बनेठी, और चक्कर ये सारे नाम हैं उन हथियारों के जो एक अखाड़े में कलाबाजों द्वारा चलाए जाते हैं।  अखाड़ों को लडकों का खेल माना जाता है लेकिन चलिए आज हम आपको एक ऐसी व्यायामशाला ले चलते हैं जहां लड़कियों ने लडकों को अखाड़े में पीछे छोड़ रखा है। छावनी स्थित मंगलेश्वर महादेव व्यायामशाला वही व्यायामशाला है जहां साल 2011 से ही लडकियां लड़कों को अखाड़े के हर दांव पेंच में कड़ी चुनौती दे रही हैं, और इतना ही नहीं अखाड़े के साथ साथ राष्टÑीय खेलों में भी अपनी प्रतिभा और कुशलता का प्रदर्शन कर रही हैं। साल भर यहां हर दिन शाम होते ही करतब सीखने सिखाने व अभ्यास का दौर शुरू हो जाता है कोई भाले से करतब दिखता है कोई तलवार से तो कोई मल्लखम्ब पर अपनी कला का प्रदर्शन करता है। चाहे गणेश उत्सव हो या नवरात्रा हर साल यहां से महिला अखाड़ा निकाला जाता है जो पूरे इलाके से होकर निकलता है। और इन त्यौहारों के समय व्यायामशाला की रौनक और बढ़ जाती है, लडकियां पूरे जोश के साथ अखाड़े के सारे अस्त्रों का अभ्यास करती नजर आ जाती हैं। व्यायामशाला मंगलेश्वर महादेव और भगवान हनुमान के मंदिर प्रांगण में होने से अखाड़े में अभ्यास के समय माहौल भक्तिमय भी हो जाता है।</p>
<p><strong>डर के आगे जीत है</strong><br />अखाड़े में कलाबाजी के गुर सीख रही युवतियों ने बताया कि उन्हें पहले डर लगता था लेकिन कहते हैं ना कि डर के आगे जीत है। हम उसे ही फोलो करती हैं। अब हमें डर नहीं लगता।  तानिया, लक्ष्मी, गीतांजलि, एकता ने बताया कि उन्हें हर वर्ष गणेश चतुर्दशी का इंतजार रहता है। यह पर्व आने के साथ ही वह अपनी तैयारी परखने लग जाती हैं। लगातार कोशिश से वह ऐसे ऐसे करतब दिखा जाती हैं जिन्हें देख वह खुद दंग रह जाती हैं। इस पर्व पर हमें गर्व तो महसूस होता ही है साथ ही कॉन्फिडेंस में बी इजाफा होता है। पहले घरवाले थोड़ा आनाकानी करते थे। अब वह भी नहीं करते। अब हम कहीं भी जाती हैं तो बेधड़क जाती हैं कोई डर नहीं लगता।</p>
<p><strong>डांडिया खेलते खेलते उतरी अखाड़े में</strong><br />व्यायामशाला के उस्ताद पहलवान नाथूलाल ने बताया कि साल 2011 से पहले यहां बालिकाएं डांडिया खेला करती थीं लड़को को अखाड़ा खेलते देख लड़कियों ने भी अखाड़ा खेलने कि इच्छा जताई तो उन्होंने लड़कियों को भी अखाड़े के गुर सिखाना शुरू किया। और तब से लेकर अब तक यहां से पाँच सौ से ज्यादा लड़कियां अखाड़े के साथ साथ अन्य खेलों में भी नाम कमा चुकी हैं। वहीं इस बार व्यायामशाला कि तरफ से योग के साथ अखाड़ा निकाला जाएगा जिसमें योग करने के साथ साथ कलाबाज करतब दिखाते नजर आएंगें। इस व्यायामशाला में अखाड़े के साथ साथ बच्चों को जूडो भी सिखाया जाता है ताकि बच्चे अखाड़े के साथ साथ दूसरे खेलों में भी अपना दम खम दिखा सके। इसी क्रम में इस अखाड़े से लक्ष्मी नागर ने 2020 में गुवहाटी में आयोजित हुए जुनियर जूडो चैंपिनशिप में रजत पदक, इशिता राठौर ने भोपाल में आयोजित हुए 2022 खेलो इंडिया में जूडो प्रतियोगिता में रजत पदक, तानिया राठौर ने सब जूनियर जूडो चैंपियनशिप 2023 प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक और एकता हाड़ा ने दिल्ली में आयोजित वूमन्स जूडो चैंपियनशिप 2023 के नेशनल में कांस्य व वेस्ट जोन में स्वर्ण पदक जीतकर आखड़े का नाम रोशन किया। वहीं अखाड़े कि बालिका शिवानी गौचर ने कर्नाटक में आयोजित राष्ट्रीय जूडो चैंपियनशिप 2023 में स्वर्ण पदक जीतकर क्रोशिया में आयोजित होने वाले विश्व चैंपियनशिप के लिए क्वालिफाई कर लिया था लेकिन वीजÞा ना लगने के कारण प्रतियोगिता से वंचित रह गई। अखाड़े का सारा खर्चा मंदिर समिति ही उठाती जो आम जन के सहयोग से चल रहा है और बच्चों को प्रतियोगिताओं में भेजने के साथ उनकि तैयारी कि सारी जिम्मेदारी भी मंदिर समिति ही उठाती है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 20 Sep 2023 15:35:37 +0530</pubDate>
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