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                <title>तलवार, चक्कर और भाला चलाने में माहिर हैं यह लड़कियां</title>
                                    <description><![CDATA[लडकियां तलवार, भाला घुमाने और अखाड़े के साथ साथ मलखम्ब और कुश्ती की भी यहां प्रैक्टिस करती हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/these-girls-are-expert-in-using-sword--javelins-and-spear/article-57988"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-09/talwar-chakkar-or-bhala-chlane-me-mahir-h-yeh-ladkiya...kota-news-25-09-2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। अनन्त चर्तुदर्शी आने को है और शहर के सारे अखाड़े पूरे जोर शोर के साथ तैयारियों में लगे हैं और आज इसी क्रम में हम लेकर आएं है छावनी रामचन्द्रपुरा स्थित श्री मंशापूर्ण हनुमान महिला अखाड़ा। आप इस अखाड़े के अन्दर प्रवेश करते ही पाएंगे कि एक लड़की भाले को हैरतंगेज ढ़ंग से घुमा रही है तो दूसरी तलवार के साथ ऐसे करतब कर  रही होगी जैसे उगंली पर चाबी का छल्ला घुमा रही हो। यहां कि लड़कियां हर कदम पर लड़कों के करतबों को कमतर साबित कर रहीं हैं। महिला संचालिका दीपमाला पंवार ने बताया कि वैसे व्यायामशाला 25 वर्ष पुरानी है और महिला अखाड़े कि शुरूआत 2018 में ती  गई लेकिन आज व्यायामशाला में देखकर लगता है कि लड़कियां लड़कों के पहले से ये सारे करतब करती आ रहीं हैं।</p>
<p><strong>दंगल भी खेलती हैं लड़कियां</strong><br />वहीं व्यायामशाला कि बालिका विनिता राठौर साल 2022 में आयोजित हाड़ौती केसरी दंगल की विजेता रहीं अन्य बालिका मोना राठौर इसी साल मई माह में उज्जैन में आयोजित मलखम्ब प्रतियोगिता कि विजेता रहीं। व्यायामशाला कि बालिका लक्ष्मी गुर्जर ने बताया कि पहले वो अखाड़े में ज्यादा रुचि नहीं लेती थी लेकिन जब साथ कि लडकियों को करते देखा तो उन्हें भी हौसला मिला और आज वो 2 साल से अखाड़े में जा रही हैं और आगे कुश्ती खेलना चाहती हैं। बालिका राठी सोलंकी ने बात करने पर बताया कि वो भी कुश्ती खेलना चाहती हैं मगर आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने से कोचिंग नहीं जा सकती इसीलिए यहां खेलती हैं। वहीं एक बालिका मुस्कान अभी 9 साल कि ही हैं और अखाडेÞ के सारे दांवपेंच और मलखम्ब सीखना चाहती हैं। </p>
<p><strong>करतब देख हैरत में पड़ जाते हैं दर्शक</strong><br />हर दिन लड़कियां ऐसे ऐसे करतब कर रहीं हैं जिन्हें देखकर हम भी हैरत में पड़ जाते हैं। जिस तरह से लडकियां पिरामिड बनाकर उस पर चक्कर और तलवार घुमाती हैं वो कभी कभी हमें भी मुश्किल लगता है। लडकियां तलवार, भाला घुमाने और अखाड़े के साथ साथ मलखम्ब और कुश्ती की भी यहां प्रैक्टिस करती हैं।</p>
<p><strong>दो लडकियों से अखाड़ा किया शुरू</strong><br />व्यायामशाला के महामंत्री जयप्रकाश तुसिया ने बताया कि इस महिला व्यायामशाला कि शुरूआत उस्ताद लालचन्द तुसिया ने दो लडकियों हिना प्रजापति व विनिता राठौर के साथ की थी जहां इस व्यायामशाला का प्रारम्भ इलाके कि लड़कियों को कुश्ती, दंगल और अन्य प्रतियोगिताओं के लिए तैयार करने के उद्देश्य से किया गया था। शुरूआत में दो लडकियों से शुरूआत के बाद आज यहां करीब 70 लडकियां अखाडेÞ के दांव पेंच सीख रही हैं। </p>
<p><strong>खुद उठाती है खर्च</strong><br />महिला संचालिका दीपमाला पंवार ने बताया कि यहां कि अधिकतर लडकियां गरीब परिवार से आती हैं और प्रैक्टिस का सारा खर्चा खुद ही उठाती हैं अपनी बचत के पैसों से ही प्रैक्टिस के सामान लाती हैं। स्थाई जगह नहीं होने के कारण व्यायामशाला को बार बार प्रैक्टिस कि जगह भी बदलनी पड़ती है जिससे लड़कियों कि प्रैक्टिस पर भी असर पड़ता है। इस विषय पर नगर निगम कोटा को भी एक उपयुक्त जगह के लिए पत्र भी लिखा गया पर अभी भी प्रैक्टिस के लिए कोई जगह नहीं है और मंदिर प्रांगण में ही प्रैक्टिस करनी पड़ती है।  </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 25 Sep 2023 18:18:34 +0530</pubDate>
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                <title>तलवार चलाने से लेकर भाला घूमाने तक लौहा मनवा रही नारी शक्ति</title>
                                    <description><![CDATA[पीरामिड बनाना या मटकी फोड़ना हो इन लड़कियों को किसी भी करतब को करने में महारत हासिल है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/from-wielding-a-sword-to-swinging-a-spear--women-s-power-is-making-people-proud/article-57985"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-09/talwar-chakkar-or-bhala-chlane-me-mahir-h-yeh-ladkiya...kota-news-25-09-20231.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। अनंत चतुर्दशी नजदीक आने के साथ ही अखाड़ेबाजों का उत्साह जोश के साथ बढ़ रहा है। हर अखाड़ा अपने हैरतअंगेज करतब से शहरवासियों को रोमांचित करने की तैयारियों में जुटा है। सुभाष नगर द्वितीय स्थित मंगलेश्वर महादेव व्यायामशाला कि लडकियां भी अखाड़े की दुनिया में अपना लौहा मनवाने को पसीना बहा रही हैं। वहीं, करतब के बीच दांव-पेंच की कला निखारने में जुटी हैं। शाम ढलते ही अस्त्र शस्त्र के साथ अखाड़े में उतरती नारी शक्ति का जौहर देख हर कोई अचंभित रह जाता है। यहां 10 से लेकर 30 वर्ष तक कि लडकियां भाला, तलवार, चक्कर घुमाने के साथ ही कुश्ती और दंगल में भी लौहा मनवा रही हैं। वहीं, पीरामिड बनाना या मटकी फोड़ना हो इन लड़कियों को किसी भी करतब को करने में महारत हासिल है। संचालिका गायत्री सुमन ने बताया कि इस व्यायामशाला कि लडकियां वो सारे करतब करने में माहीर हैं जो किसी व्यक्ति को करने में सालों लग जाते हैं। बालिकाओ की दृढ़ इच्छा शक्ति और लगन का ही नतीजा है कि आज हम इतना बड़ा समूह चला रहे हैं और लड़कियां प्रतियोगिताओं में भी जा रही हैं।</p>
<p><strong>2 से 40 लडकियों तक का सफर</strong><br />मंगलेश्वर महादेव महिला व्यायामशाला कि संचालिका गायत्री सुमन ने बताया कि व्यायामशाला कि शुरुआत छावनी स्थित मंगलेश्वर महिला व्यायामशाला से निकलकर उनके द्वारा ही साल 2021 में की थी। तब व्यायामशाला में सिर्फ 2 ही लडकियां थी। शुरूआत में मुश्किलों का सामना करना पड़ा लेकिन धीरे-धीरे राह आसान होती चली गई। वर्तमान में व्यायामशाला में 40 लड़कियां हैं, जो हर दिन प्रैक्टिस करने आती हैं। इस व्यायमशाला को महज दो ही साल हुए हैं और इतनी लड़कियों को जुड़ता देख उम्मीद है कि ये और बढ़ा होगा और हम अखाड़ों के साथ साथ राज्य स्तरीय, राष्टÑीय स्तरीय और अंतररष्टÑीय स्तर पर लड़कियों को भेजेंगे। </p>
<p><strong>समाज के सहयोग से चल रहा अखाड़ा</strong><br />संचालिका सुमन कहती हैं, पहले व्यायामशाला का संचालन घर से ही करती थीं। लेकिन, बाद में समाज के सहयोग से इसे सुभाष नगर में टंकी वाले पार्क में चलाया जाने लगा और आज वहीं संचालित है। व्यायामशाला में आने वाली अधिकतर बालिकाएं मध्यम परिवार से हैं, उनके खर्चे का सारा वहन सुमन खुद करती हैं। बालिका सपना ने कहा, वो पिछले साल से तलवारबाजी और कुश्ती सीखने आ रही हैं और आगे भविष्य में भारत के लिए कुश्ती खेलना चाहती हैं। अच्छा लगता हैं जब लोग उनके करतबों पर दंग रह जाते हैं और तारीफ करते हैं। ज्योति सुमन ने कहा, वो हर दिन शाम को सारे कामों से फ्री होकर अखाडेÞ में आ जाती हैं ताकि प्रैक्टिस के बाद कुछ नया सीख सकें। ज्योति  ने बताया कि वो पहले अन्य अखाड़े में प्रैक्टिस करती थी लेकिन पिछले साल से यहां अखाड़ा शुरू होने के बाद यहीं करती हैं। </p>
<p><strong>लाइसेंस मिले तो बात बने</strong><br />संचालिका गायत्री कहती हैं, नया अखाड़ा होने कि वजह से उन्हें लाइसेंस नहीं मिला है। जबकि, इसके लिए नगर निगम में भी आवेदन किया है। पर्याप्त जगह के अभाव में व्यायामशाला को पार्क में चलाना पड़ रहा है और इस वजह से कई परेशनियों का भी सामना करना पड़ रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
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                <pubDate>Mon, 25 Sep 2023 17:35:46 +0530</pubDate>
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                <title>आंख पर काली पट्टी बांध तलवार से काट देती है केला </title>
                                    <description><![CDATA[लड़कियां अनन्तचतुर्दशी पर निकाले जाने वाले अखाड़े को लेकर काफी उत्साहित हैं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/she-cuts-a-banana-with-a-sword-after-wearing-a-black-bandage-over-her-eyes/article-57826"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-09/ankh-pr-kali-patti-bandh-talwar-s-kaat-deti-h-kela...kota-news-23-09-2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। महिला अखाड़े कि बात करें और  दुर्गावाहिनी अखाड़ा कि बात ना हो ऐसा हो नहीं सकता। स्टेशन क्षेत्र के सोगरिया इलाके में स्थित दुर्गावाहिनी अखाड़ा शहर कि आबोहवा से दूर अनन्तचतुर्दर्शी कि तैयारियों में पूरे जोर शोर से लगा हुआ है। यहां  30 से ज्यादा लडकियां और महिलाएं अपनी कलाबाजियों के प्रदर्शन को गुजरते हुए हर सैकण्ड के साथ बेहतर बनने में जुटी हुई हैं। बात हो आंखों पर पट्टी बांध कर तलवार से साथी के पेट पर रखे केले को एकदम सफाई से काटने की या कीलें लगे हुए लकड़ी के फट्टे पर लेटकर सीने पर पत्थर को हथोड़े से फोड़ना यहां कि लड़कियां हर उस करतब को पूरी ताकत और बिना किसी डर के कर रहीं हैं जिसे देखने भर से ही लोगों के रोंगटे खड़े हो जाएं। अखाडेÞ के संचालक तारा सिंह व महिला उस्ताद पूष्पा सोनी ने बताया कि लड़कियां अनन्तचतुर्दशी पर निकाले जाने वाले अखाड़े को लेकर काफी उत्साहित हैं। </p>
<p><strong>लड़कियां भी वो सब कर सकती हैं जो लड़के कर सकते हैं </strong><br />वहीं लडकियों के अखाड़ा खेलने के सवाल पर उन्होंने कहा कि वो लड़कियों के माता पिता को इस बात के लिए समझाते हैं कि लड़कियां भी वो सब कर सकती हैं जो लड़के कर सकते हैं। हमारी लड़किया बंदूकस गदा, तलवार सब चला रही हैं। इसके लिए मानसिक संतुलन, शारीरिक संतुलन और धैर्य जरूरी है।  अगर आज लड़कियो खुद सशक्त और हर क्षेत्र में सक्षम बनेगी तो वो हर परिस्थिति का सामना कर पाएंगी। वहीं बालिका किरण से बात करने पर उन्होंने बताया कि शुरूआत में तो परिवार को डर लगता था और मुझे भी हिचकिचाहट होती थी लेकिन अब इतने हैरतगैंज करतबों को देख कर हमारे साथ साथ घर वालों को भी खुशी होती है। अन्य बालिका ज्योति का कहना है कि ये उन्हें जीवन में आगे बढ़ने और देश के लिए कुछ अच्छा करने का हौसला देता है।  हम साल भर अनन्तचतुर्दर्शी और नवरात्रों का इन्तजार करते हैं।  कब हम इन अस्त्रों के साथ करतब दिखा सकें। </p>
<p><strong>छोटी सी गलती पड़ सकती है भारी </strong><br />अखाड़े की उस्ताद पुष्पा सोनी बताती हैं कि लड़कियां हर दिन अभ्यास करने में पसीना बहा रही हैं । हर छोटी से छोटी गलती को समझकर उसे ठीक कर रहीं हैं और नए तरह के करतबों को भी सीखने का प्रयास कर रहीं हैं। करतब दिखाते समय छोटी सी गलती भारी पड़ सकती है। इस बार अखाड़ों की प्रतियोगिता को जीतने में सफल हों। छोटी बच्ची से लेकर महिलाओं तक सभी अपनी कुशलता को परख रहीं हैं। आगे उस्ताद पूष्पा सोनी ने बताया कि इस अखाड़े कि शुरूआत उनके द्वारा ही 2001 में लड़कियों को सशक्त और शारीरिकता के हर क्षेत्र में सक्षम बनाने के उद्देश्य से की गई थी ताकि लडकियां किसी भी मुसीबत से अपने आप बाहर निकल आएं और महिलाओं के प्रति अपराध करने वालों को सबक सिखा सकें। वहीं संचालक तारा सिंह ने बताया कि अखाड़े का संचालन आदर्श सेवा संस्थान के द्वारा किया जाता है।  जिसका सारा खर्चा समाजसेवीयों द्वारा दिए गए दान पर निर्भर है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
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                <pubDate>Sat, 23 Sep 2023 15:44:49 +0530</pubDate>
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                <title>बल्लम, चक्कर और तलवार झूमती है इन युवतियों की अंगुलियों पर</title>
                                    <description><![CDATA[व्यायामशाला कि सभी लडकियां बिना किसी तरह कि हिचकिचाहट के सारे करतबों को पलक झपकते ही करने कि अभ्यस्त हो चुकी हैं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/balls--whirligigs-and-swords-swing-on-the-fingers-of-these-girls/article-57753"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-09/ballam,-chakkar-or-talwar,-jhumti-h-in-ladkiyo-ki-ungliyo-pr...kota-news-22-09-2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। कहते हैं कि किसी काम के प्रति जूनून हालातों व पस्थितियों का मजबूर नहीं होता है और इस बात को सच साबित कर रहीं हैं हरदोल व्यायामशाला कि लडकियां, जो हर दिन शाम होते ही व्यायामशाला के प्रांगण में प्रैक्टिस करने पहुंच जाती हैं। शहर में गणेशोत्सव का त्योहार चल रहा है और अनन्त चर्तुदर्शी आने को है । यहां की  लडकियों ने तैयारी पूरे दम खम के साथ शुरू कर दी हैं, व्यायामशाला से हर साल 50 लडकियों का समूह अखाड़े कि प्रतियोगिता में भाग लेता है और इसे लेकर यहां कि बालिकाओं में जोश देखते ही बनता है। बात बल्लम कि हो बात चक्कर कि हो या बात तलवार की हो यहां कि लडकियां हर चीज को मानो पेन्सिल कि तरह घुमाने में माहिर हैं।</p>
<p><strong> डर क्या होता है यह नहीं जानती </strong><br /> डर क्या होता है वो यहां कि लडकियां जानती ही नहीं हैं। व्यायामशाला कि सभी लडकियां बिना किसी तरह कि हिचकिचाहट के सारे करतबों को पलक झपकते ही करने कि अभ्यस्त हो चुकी हैं। वहीं अनन्त चर्तुदर्शी के लिए भी बालिकाएं पूरे जोर शोर से प्रैक्टिस कर रही हैं। यहां कि लडकियों कि माने तो वे पूरे साल इन त्योहारों का इंतजार करती हैं ताकि लोगों का अपनी काबिलियत और हुनर को दिखा सकें। व्यायामशाला के संचालक लोकेश गुर्जर ने बताया कि इस व्यायामशाला कि शुरूआत साल 2017 में लड़कियों व महिलाओं के प्रति बढ़ते अपराधों को देखते हुए की गई थी ताकि वो खुद को आत्मनिर्भर बना सके ।  हर परिस्थिति का डटकर मुकाबला कर सकें।</p>
<p><strong>एक बालिका से शुरू हुआ सफर</strong><br />शुरूआत में यहां सिर्फ एक ही बालिका आती थी पर जागरूकता बढ़ने के साथ आज यहां 150 सेज्यादा लडकियां जूडो, कुश्ती व लठ्ठ चलाना सीख रहीं हैं। व्यायामशाला में प्रैक्टिस करने वाली कविता नायक ने बताया कि वो पूरे साल यहां जूडो सीखती हैं और तलवार और भाला चलाने में माहिर हैं, कविता के परिवार कि आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने के कारण वो यहां ही प्रैक्टिस करने आती हैं। व्यायामशाला कि चंचल कश्यप से बात करने पर उन्होंने बताया कि वो हर दिन बच्चों को ट्यूशन पढ़ाने के बाद यहां प्रैक्टिस करने आती हैं चंचल के पिता का देहांत हो चुका है और घर में वो बड़ी हैं पर अपने कुश्ती और जूडो के प्रति जूनून के कारण वो प्रैक्टिस करने आती ही हैं। वहीं एक और बालिका कीर्ति शाक्या जो 2 साल से लगातार मलखम्ब और तलवारबाजी कि प्रैक्टिस कर रहीं हैं वो भी हर दिन यहां प्रैक्टिस के लिए आती हैं। इन सभी बालिकाओं आगे बढ़कर देश के लिए खेलने का सपना हैं। लेकिन अपर्याप्त साधनों और आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने के कारण आगे नहीं खेल पा रहीं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 22 Sep 2023 17:31:06 +0530</pubDate>
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                <title>नन्ही बेटियां ही नहीं साड़ी पहनकर महिलाएं भी चलाती हैं यहां तलवार</title>
                                    <description><![CDATA[व्यायामशाला में 2 वर्ष से लेकर 40 वर्ष तक कि बालिकाएं व महिलाएं हर दिन शाम होते ही घर के काम खत्म कर अभ्यास में जुट जाती हैं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/not-only-little-daughters-but-women-wearing-saree-also-wield-swords-here/article-57674"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-09/nanhi-betiya-hi-nhi-sari-pehnkr-mahilaye-bhi-chlati-h-yha-talwar...kota-news-21-09-2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। लड़कियों को हर मुसीबत, हर परेशानी का डटकर मुकाबला करने के लिए हमेशा तैयार रहना चाहिए और उस तैयारी के लिए जरूरी है शारीरिक रूप से मजबूत होना । ये मानना था शहर के पहली महिला व्यायामशाला यानि दुर्गाशक्ति व्यायामशाला कि उस्ताद सीतादेवी सुमन का। सीता देवी तो नहीं रहीं लेकिन आज भी उनके द्वारा स्थापित अखाड़ा आबाद है। इस अखाड़ें में पांच साल की बच्ची कोमल से लेकर प्रौढ़ संतोष सुमन तक तलवार, बल्लम और चकरी चला कर सबको अचंभित कर देती हैं। अब संतोष सुमन इस अखाड़े का कार्यभार संभाल रही हैं। स्वर्गीय सीतादेवी के नक्शे कदम पर चलते हुए आज उनकी बेटियां और बहुएं इस परम्परा को आगे बढ़ा रहीं हैं। शहर के केशवपुरा इलाके में स्थित दुर्गाशक्ति व्यायामशाला में हर साल कि तरह इस साल भी अनन्त चतुर्दशी पर निकाले जाने वाले जुलूस को लेकर महिलाओं ने तैयारी शुरू कर दी है और पूरे जोर शोर के साथ अपनी कलाबाजियों को निखार रहीं हैं। व्यायामशाला में 2 वर्ष से लेकर 40 वर्ष तक कि बालिकाएं व महिलाएं हर दिन शाम होते ही घर के काम खत्म कर अभ्यास में जुट जाती हैं। इस बार जुलूस के प्रदर्शन को और अच्छा बनाने के लिए वो त्रिशूल के साथ अभ्यास कर रहीं हैं वहीं त्रिशुल के साथ कलाबाजी व्यायामशाला कि ओर से पहली बार की जाएगी। अखाड़े कि सभी महिलाएं और बालिकाएं सभी तरह के करतब की हर दिन साड़ी पहनकर अभ्यास करती हैं जो अपने आप में ही एक मुश्किल काम है। </p>
<p><strong>सास से बहु ने सीखा व्यायामशाला चलाना</strong><br />व्यायामशाला में गणेश चतुर्थी और नवरात्रा आने के साथ ही उत्साह का माहौल शुरू हो जाता है और महिलाएं दस दिन तक अनन्त चतुर्दशी कि तैयारियों में जुट जाती हैं। उस्ताद संतोष सुमन ने बताया कि उनकि सास ने इस व्यायामशाला कि शुरूआत सन् 1985 में तब की थी जब वो पहली बार एक महिला के तौर पर जिला कुश्ती संघ में शामिल हुई थी। वहां उन्होंने पुरूष पहलवानों को कुश्ती करता देखकर महिलाओं के लिए भी व्यायामशाला चलाने का ठान लिया। शुरूआत में उन्हें काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा पर उन्होंने हार ना मानते हुए इसे चलाए रखा और आज इस व्यायामशाला में करीब 150 बालिकाएं या महिलाएं हर दिन हैरतंगेज करतबों का प्रदर्शन करती हैं। </p>
<p><strong>ताकि महिलाएं आत्मनिर्भर बन सकें </strong><br />व्यायामशाला कि दीपलता सुमन ने बताया कि वो 2005 से इस व्यायामशाला में अभ्यास कर रहीं हैं और शादी के बाद भी उनका अभ्यास जारी है। दीपलता हर साल आयोजित होने वाले अखाड़े में भाग लेती हैं। दीपलता सुमन साल 1992 व 1993 में हिसार में आयोजित हुए नेशनल जूडो चैपिंयनशिप के 26 किग्रा में विजेता भी रहीं है। वहीं सीतादेवी कि दूसरी बेटी पिंकलता का कहना है कि मां ने हमेशा हर मुसीबत और परेशानी से डटकर मुकाबला करना सिखाया है और आज हम भी हमारे बच्चों को यही शिक्षा देते हैं, मां ने घर के काम ना करवाकर हमें अखाड़े और कुश्ती के दांव पेंच सिखाए जिससे हम आत्म निर्भर बन सकें। व्यायामशाला में अभ्यास करने वाली ज्योति सुमन ने बताया कि छोटे होने पर पहले हमें करतबों से डर लगता था पर जब सीतादेवी के बारे में सुना तो हम भी अपने डर को भुलाकर कुश्ती व अखाड़े का अभ्यास करना शुरू कर दिया और आज हम खुदको बहुत मजबूत महसूस करते हैं जो किसी भी परेशानी का सामना कर सकते हैं। </p>
<p><strong>खुदको मजबूत बना पाते हैं</strong><br />बालिका कोमल ने बताया कि यहां आना और अखाड़े कि प्रैक्टिस करना बहुत अच्छा लगता है और पै्रक्टिस से हम खुदको मजबूत बना पाते हैं। वहीं व्यायामशाला में प्रैक्टिस करने वाली महिलाओं का कहना है कि व्यायामशाला कि उस्ताद सीतादेवी शहर कि पहली महिला पहलवान थी जिन्होंने महिला अखाड़े कि शुरूआत की और प्रशासन को उन्हें सम्मान देते हुए शहर में उनकी मुर्ति कि स्थापना करनी चाहिए ताकि और महिलाएं प्रोत्साहित हों।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 21 Sep 2023 15:45:59 +0530</pubDate>
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