<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://dainiknavajyoti.com/sanatan/tag-39931" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>Dainik Navajyoti Rising Rajasthan RSS Feed Generator</generator>
                <title>Sanatan - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
                <link>https://dainiknavajyoti.com/tag/39931/rss</link>
                <description>Sanatan RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>सनातन गर्व फिर से पुनर्निर्मित हो रहा,  जो खो गया था, वह अब और भी मजबूत संकल्प के साथ फिर से बनाया जा रहा है : धनखड़</title>
                                    <description><![CDATA[ पुडुचेरी विश्वविद्यालय में छात्रों और संकाय सदस्यों को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने कहा कि सनातन गौरव पुनर्निर्माण की प्रक्रिया में है]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/sanatan-proud-again-being-rebuilt-which-was-lost-is-now/article-117690"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-06/news41.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। पुडुचेरी विश्वविद्यालय में छात्रों और संकाय सदस्यों को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने कहा कि सनातन गौरव पुनर्निर्माण की प्रक्रिया में है। जो कुछ खो गया था, उसे अब और दृढ़ संकल्प के साथ दोबारा खड़ा किया जा रहा है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि “भारत की शैक्षणिक भूगोल और इतिहास, तक्षशिला, नालंदा, मिथिला, वल्लभी जैसे महान शिक्षा केंद्रों से सजे हुए थे। उस कालखंड में इन संस्थानों ने दुनिया के सामने भारत को परिभाषित किया। दुनिया भर के विद्वान यहां ज्ञान साझा करने और भारतीय दर्शन को समझने आते थे। परंतु, कुछ तो गलत हुआ। नालंदा की 9 मंजिला पुस्तकालय- सोचिए, 1300 साल पहले- धर्मगंज नामक वह पुस्तकालय खगोलशास्त्र, गणित और दर्शनशास्त्र के समृद्ध ग्रंथों से भरा था। दो चरणों की आक्रमण लहरों में- पहले इस्लामी आक्रमण और फिर ब्रिटिश उपनिवेशवाद- भारत की ज्ञान परंपरा को गहरी चोट पहुंची। लगभग 1190 के आसपास बख्तियार खिलजी ने अमानवीयता और बर्बरता का प्रदर्शन किया। उसने सिर्फ किताबें नहीं जलाईं, बल्कि भिक्षुओं की हत्या की, स्तूपों को नष्ट किया और भारत की आत्मा को रौंदने का प्रयास किया- यह जाने बिना कि भारत की आत्मा अविनाशी है। आग कई महीनों तक जलती रही। नौ लाख ग्रंथ और पांडुलिपियाँ जलकर भस्म हो गईं। नालंदा केवल एक विचार का केंद्र नहीं था, वह मानवता के लिए ज्ञान का जीवंत मंदिर था।”</p>
<p>राजनीतिक संवाद और संयम पर ज़ोर देते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि हमें राष्ट्रीय मानसिकता में भी बदलाव लाने की आवश्यकता है। राजनीतिक व्यवस्था की बात करें तो हम केवल मतभेद के लिए मतभेद करते हैं, समाधान के लिए नहीं। किसी और के द्वारा दी गई अच्छी बात भी हमें तभी गलत लगती है, क्योंकि वह हमारे विचार से नहीं आई। यह हमारे वेदांत के अनंतवाद की भावना के विपरीत है। हमें अभिव्यक्ति, वाद-विवाद और संवाद की दिशा में बढ़ना होगा। हम राजनीतिक तापमान बढ़ाने को आतुर हो गए हैं। जलवायु परिवर्तन तो वैसे भी तापमान बढ़ा ही रहा है। फिर हम क्यों अपने धैर्य के हिमखंडों को पिघलाएं? क्यों अधीर होकर अपनी सभ्यतागत और आध्यात्मिक आत्मा से दूर जाएं? मैं सभी राजनीतिक नेताओं से अपील करता हूं- राजनीति का तापमान घटाएं। टकराव की कोई जगह नहीं होनी चाहिए। संविधान सभा ने हमें विघटन और अवरोध का रास्ता नहीं सिखाया है। आज जब भारत उन्नति के मार्ग पर है और सारी दुनिया हमारी ओर देख रही है, ऐसे में हमें राष्ट्रीय हित और विकास की भावना से संवाद करना होगा।”</p>
<p>शिक्षा के बाज़ारीकरण पर चिंता व्यक्त करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि “एक समय था जब शिक्षा और स्वास्थ्य को समाज सेवा का माध्यम माना जाता था। जिनके पास संसाधन होते थे, वे समाज को लौटाने के लिए इन क्षेत्रों में योगदान देते थे, लाभ के लिए नहीं। यह हमारी प्राचीन परंपरा थी। आज शिक्षा के क्षेत्र में बढ़ती वाणिज्यिक सोच के चलते हमें मूल्यों की ओर लौटना होगा। हमारी शिक्षा व्यवस्था भारत के पारंपरिक गुरुकुल मॉडल से प्रेरित होनी चाहिए, जिसे भारतीय संविधान की 22 लघु चित्रों में स्थान मिला है। शिक्षा केवल ज्ञान प्राप्ति नहीं है, उसमें चरित्र निर्माण भी होना चाहिए। आज जो वाणिज्यिक मॉडल उभर रहा है, वह शिक्षा को सेवा के स्वरूप से दूर कर रहा है। मैं कॉरपोरेट जगत से अपील करता हूं- मानसिकता में बदलाव लाएं। भारत हमेशा से परोपकार की भूमि रहा है। अपने CSR संसाधनों को समाहित कर ग्लोबल उत्कृष्टता के संस्थान बनाएं- जो बैलेंस शीट से परे सोचें।”</p>
<p>पूर्व छात्रों के योगदान की महत्ता पर बल देते हुए उन्होंने कहा कि “अगर आप दुनिया के विकसित लोकतंत्रों को देखें तो पाएंगे कि वहां विश्वविद्यालयों के एंडोमेंट फंड अरबों डॉलर में हैं। एक विश्वविद्यालय का फंड 50 अरब डॉलर से अधिक है। माननीय कुलपति जी, शुरुआत कीजिए। इस विश्वविद्यालय के हर पूर्व छात्र से अपील करें कि वे इसमें योगदान दें। बच्चों, राशि का आकार महत्वपूर्ण नहीं है, भावना महत्वपूर्ण है। वर्षों में इसका प्रभाव आप देखेंगे, न केवल फंड बढ़ेगा, बल्कि पूर्व छात्रों में अपने संस्थान के प्रति लगाव भी गहराएगा। यह एक छोटा कदम हो सकता है, लेकिन जैसे नील आर्मस्ट्रांग ने चंद्रमा पर कदम रखते हुए कहा था यह एक छोटा कदम है, पर मानवता के लिए एक विशाल छलांग। वैसे ही यह एक छोटा प्रयास बड़ी उपलब्धि बन सकता है।”</p>
<p>भारतीय भाषाओं की समावेशिता पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि “हम भाषाओं के आधार पर कैसे बंट सकते हैं? कोई देश भारत जितना भाषाई समृद्ध नहीं है। संस्कृत आज वैश्विक स्तर पर महत्वपूर्ण है- तमिल, तेलुगु, कन्नड़, मलयालम, ओड़िया, मराठी, पाली, प्राकृत, बंगाली, असमिया- ये 11 भाषाएं हमारी शास्त्रीय भाषाएं हैं। संसद में 22 भाषाओं में सदस्य संवाद कर सकते हैं। बच्चों, हमारी भाषाएं समावेशिता की प्रतीक हैं। सनातन धर्म हमें साथ रहने की, एकत्व की शिक्षा देता है। तो फिर यह समावेशिता कैसे विभाजन का कारण बन सकती है? मैं सभी से अपील करता हूं- आत्मचिंतन करें, गौरवमयी अतीत को देखें, बच्चों का भविष्य सोचें और इस तूफान से ऊपर उठें।”</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/bharat/sanatan-proud-again-being-rebuilt-which-was-lost-is-now/article-117690</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/bharat/sanatan-proud-again-being-rebuilt-which-was-lost-is-now/article-117690</guid>
                <pubDate>Tue, 17 Jun 2025 17:59:48 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2025-06/news41.png"                         length="444406"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सनातन धर्म और सर्व समाज की एकता के लिए राष्ट्रीय करणी सेना निकालेगी भगवा रैली </title>
                                    <description><![CDATA[राष्ट्रीय करणी सेना द्वारा 11 जनवरी को एक विशाल भगवा रैली और आम सभा का आयोजन किया जाएगा। सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिव सिंह ने बताया कि इस रैली में बड़ी संख्या में लोग भाग लेंगे]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/rashtriya-karni-sena-will-take-out-saffron-rally-for-sanatan/article-100177"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-01/5554-(4)8.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राष्ट्रीय करणी सेना द्वारा 11 जनवरी को एक विशाल भगवा रैली और आम सभा का आयोजन किया जाएगा। सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिव सिंह ने बताया कि इस रैली में बड़ी संख्या में लोग भाग लेंगे। पदाधिकारी जया परमार, लक्ष्मी तंवर और तेज कंवर ने जानकारी दी कि यह रैली हिन्दू सनातन धर्म और सर्व समाज की एकता के लिए आयोजित की जा रही है।</p>
<p>रैली भवानी निकेतन से शुरू होकर चित्रकूट स्टेडियम तक जाएगी। इसमें नारी शक्ति संगठन और हिन्दू समाज के सभी वर्गों के संगठन प्रमुखता से भाग लेंगे। इस रैली का उद्देश्य सर्व समाज को एकजुट कर हिन्दू एकता को मजबूती प्रदान करना है। सभी समाज संगठनों के पदाधिकारी इस कार्यक्रम में शामिल होंगे। आयोजन को लेकर तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/rashtriya-karni-sena-will-take-out-saffron-rally-for-sanatan/article-100177</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/rashtriya-karni-sena-will-take-out-saffron-rally-for-sanatan/article-100177</guid>
                <pubDate>Thu, 09 Jan 2025 18:38:32 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2025-01/5554-%284%298.png"                         length="402665"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>संयम समर्पण सेवा श्रद्धा और समभाव ही सनातन</title>
                                    <description><![CDATA[कौनसा धर्म सनातन है और कैसे, इन सब सवालों पर लोग चर्चा कर रहे हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/restraint--dedication--service--faith-and-equanimity-are-eternal/article-57987"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-09/sanyam-samparn-seva-shraddha-or-smbhav-hi-snatan...kota-news-25-09-2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। सनातन शब्द को लेकर आज देश भर में चर्चा छिड़ी हुई है। सनातम धर्म क्या है। कौनसा धर्म सनातन है और कैसे, इन सब सवालों पर लोग चर्चा कर रहे हैं। इसी मामले को लेकर नवज्योति ने मध्य प्रदेश की भानपुरा पीठ के शंकराचार्य स्वामी ज्ञानानंद महाराज से चर्चा की।    </p>
<p><strong>प्रस्तुत हैं उसके अंश</strong><br /><strong>नवज्योति-  </strong>महाराज देश भर में सनातन शब्द को लेकर चर्चा छिड़ी है। आखिर सनातन धर्म क्या है। <br /><strong>स्वामी ज्ञानानंद जी -</strong> सनातन शब्द हर प्राणी, हर मानव को पोषित करने वाला है। सनातन दान, सनातन सेवा,सनातन श्रद्धा,सनातन त्याग, सनातन सत्संग, सनातन समभाव, सनातन संयम, सनातन समर्पण ही उत्कृष्ठ है।  सनातन शब्द पोषित करता है वंचित नहीं करता। निर्माण करता है। सनातन ही एक ऐसा शब्द है जो जगत कल्याण करता है। इसकी जड़ इतनी गहरी है कि कभी दीमक नहीं लग सकती है। जैसे एक आंवला होता है। उसकी फांखे अलग अलग हो जाती हैं लेकिन यह सब फांके उसके बीज से जुड़ी रहती हैं। ठीक उसी प्रकार सनातन एक ऐसा बीज है जिसमें सभी जुड़े हैं। <br /><strong>नवज्योति- </strong>आप आज के दौर को लेकर क्या कहेंगे। समाज में सब कुछ ठीक चल रहा है क्या?<br /><strong>स्वामी ज्ञानानंद जी - </strong>दरअसल हमारे धर्म में संस्कारों का बड़ा महत्व है। समाज से संस्कार खत्म होते जा रहे हैं। दरअसल गर्भाधन ही बिगड़ा हुआ है। जब शुरुआत ही बिगड़ जाएगी तो आगे क्या होगा यह समझ सकते हैं। हमारे समाज में विवाह संस्कार की महत्वता रही है। लेकिन आजकल गंधर्वर्  विवाह का प्रचलन बढ़ रहा है। अब तो सरकार रजिस्ट्रेशन  करती  है। इससे सामाजिक प्रक्रियाओं में विकृति आ रही है। गंधर्व विवाह पहले भी होते थे लेकिन मर्यादा होती थी। अब मर्यादा का खत्म हो रही है। <br /><strong>नवज्योति- </strong>धर्म का कमर्शियलाइजेशन हो रहा है। क्या यह ठीक है। हर तरफ बाढ़ सी आई हुई है।    <br /><strong>स्वामी ज्ञानानंद जी -</strong> पहली बात तो यह है कि आप जिसे जैसे देखेंगे वह वैसा दिखेगा। जांकि रही भावना जैसी, प्रभु मूरत तिन देखी वैसी, कमर्शियलाइजेशन और अंध विश्वास दोनों ठीक नहीं है। फिर भी मैं कहूंगा कि समय लौट रहा है। यह जगत परिवर्तन शील है। रितु लौट कर आती है, दिन लौट कर आते हैं। माह लौट कर आता है। ऐसे ही समय लौट कर आता है। <br /><strong>नवज्योति-</strong> हमारी शिक्षा पद्द्ति को लेकर आप क्या कहेंगे।<br /><strong>स्वामी ज्ञानानंद जी -</strong> शिक्षा के लिए गुरुकुल पद्द्ति ही ठीक थी। यह पद्द्ति सामाजिक हित में होती थी। अब शिक्षा तो मिल रही है लेकिन संस्कार नहीं मिल रहे है। आज माता पिता की लोग बात नहीं मानते। बड़ों का आदर नहीं करते। वृद्दो को ं गैर जरूरी समझ लिया जाता है।  यह कैसी शिक्षा है। सबसे बड़ी दिक्कत तो यह है कि बच्चों में बोध नहीं है। इसमें सामाजिक हित कहां है।   <br /><strong>नवज्योति-</strong> स्वामी जी अपने बारे में बताइए।<br /><strong>स्वामी ज्ञानानंद जी -</strong> 1998 में सन्यास ग्रहण किया। 1990 में भानपुरा पीठ से जुड़ने के बाद  रामजन्म भूमि आन्दोलन और 1994 में अल कबीर कत्ल खाने के आन्दोलन में अग्रणी भूमिका निभाई। 1995 में  युवाचार्य घोषित किया गया। 2019 में  स्वामी दिव्यानन्द के गौ लोक गमन के पश्चात शंकराचार्य  घोषित किया गया। शंकराचार्य स्वामी ज्ञानानंद महाराज कई दिनों से कोटा के  स्टेशन क्षेत्र स्थित श्री राम मंदिर में चातुर्मास कर रहे है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/restraint--dedication--service--faith-and-equanimity-are-eternal/article-57987</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/restraint--dedication--service--faith-and-equanimity-are-eternal/article-57987</guid>
                <pubDate>Mon, 25 Sep 2023 17:56:39 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2023-09/sanyam-samparn-seva-shraddha-or-smbhav-hi-snatan...kota-news-25-09-2023.jpg"                         length="446124"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        