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                <title>Akhara - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>हेरत अंगेज व परंपरागत करतब दिखाएंगे पट्टेबाज</title>
                                    <description><![CDATA[इस अखाड़े में पहले कुश्ती का दंगल का अखाड़ा हुआ करता था बाद में यहां व्यायामशाला और शस्त्रों के अखाड़े कि शुरूआत हुई और लड़के आने लगे। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/patter-will-show-traditional-and-traditional-stunts/article-58244"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-09/herat-angez-va-parampragat-kartab-dikhayenge-pattebaz...kota-news-28-09-2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। अखाड़े और व्यायामशालाएं जानी जाती हैं उनके द्वारा किए जाने वाले हैरतंगेज करतबों और कलाबाजियों से पर एक अखाड़ा ऐसा भी है जो सिर्फ प्रशासन द्वारा तय किए गए और उसके द्वारा तय किए गए दिशा निर्देशों के अनुसार प्रदर्शन करके भी प्रसिद्ध है। बोट के बालाजी मंदिर स्थित महाबली व्यायामशाला में कल होने वाले प्रदर्शन को शानदार बनाने के लिए लड़के जी जान से लगे हुए हैं और सुबह से ही करतबों और शस्त्रों को चलाने का अभ्यास कर रहे हैं ताकि प्रदर्शन के समय कोई चूक ना हो। व्यायामशाला के व्यवस्थापक अशोक गोयल ने बताया कि इस व्यायामशाला में 250 से भी ज्यादा लड़के हर दिन सभी तरहों के शस्त्रों को चलाने का अभ्यास करते हैं और साथ ही कुश्ती और बुशू कि भी प्रैक्टिस करते हैं। अनंत चतुर्दशी को लेकर लड़कों में इस बार काफी उत्साह है क्योंकि पिछले कुछ सालों से कोरोना के चलते लड़के अपने करतबों का प्रदर्शन खुलकर नहीं कर पा रहे थे। यहां 8 साल के बच्चे से लेकर 40 साल तक के पुरूष भालों तलवारों और चक्करों को अपनी उंगलियों पर घुमाने का हुनर रखते हैं। </p>
<p><strong>170 साल पुराना अखाड़ा</strong><br />अखाड़े के अध्यक्ष सुखदेव सिंह ने बताया कि इस अखाड़े में पहले कुश्ती का दंगल का अखाड़ा हुआ करता था बाद में यहां व्यायामशाला और शस्त्रों के अखाड़े कि शुरूआत हुई और लड़के आने लगे। आज भी इस व्यायामशाला में कलाबाजों और पहलवानों के लिए मिट्टी से बना अखाड़ा और कसरत करने के लिए जिम और योग के लिए प्रांगण बना हुआ है जहां हर दिन सुबह लड़के आकर पहले कसरत करते हैं फिर करतबों का अभ्यास करते हैं। ये अखाड़ा करीब 170 साल पुराना है और इस का नाम बालाजी के नाम महाबली पर रखा गया था। तब से ही इसे ही महाबली अखाड़ा कहा जाता है। </p>
<p><strong>समिति के सदस्य ही संचालित करते हैं</strong><br />अखाड़े के अध्यक्ष सुखदेव सिंह ने बताया कि व्ययामशाला का सारा खर्चा अखाड़ा समिति ही व्यय करती है जिसमें सिर्फ 25 वर्ष से उपर कि आयु वालों से सदस्यता शुल्क के रूप में योगदान लिया जाता है। वहीं अखाड़े के जिम, योगा स्थल और मिट्टी के अखाड़े का व्यय वहां पर अभ्यास करने वालों से सदस्यता शुल्क के रूप में लिया जाता है।</p>
<p><strong>सिर्फ पारम्परिक करतबों का ही प्रदर्शन</strong><br />इस बार अखाड़े के लड़कों द्वारा चाकू , बनेठी को एक उंगली से घुमाने का प्रदर्शन किया जाएगा वहीं इसके साथ ही अखाड़े समिति के द्वारा इस साल कोई भी जानलेवा या जिससे किसी को नुकसान पहुंचे ऐसा करतब या स्टंट नहीं दिखाने का निर्णय लिया गया है, अखाड़े के लड़के सिर्फ पारम्परिक रूप से किए जाने वाले करतबों का ही लोंगों के बीच प्रदर्शन करेंगें जिससे पारम्परिक शस्त्र विद्या के बारे में लोगों को बता सके। </p>
<p><strong>अखाड़े से शस्त्र प्रतियोगिता का पहला हाड़ौती केसरी</strong><br />अखाड़े के व्यवस्थापक अशोक गोयल ने बताया कि इस अखाड़े से तलवार बाज लोकेश शर्मा 2023 में कोटा में आयोजित शस्त्र प्रतियोगिता में हाड़ौती केसरी का खिताब जीतने कामयाब हुए जिसमें लोकेश ने 8 तरह के शस्त्रों का लगातार प्रदर्शन किया। वहीं इसके साथ ही लोकेश 2018 में उदयपुर में, 2019 में श्रीगंगानगर में और 2021 में बाड़मेर में आयोजित वुशु स्टेट चैंपियनशिप में सिल्वर मेडल के विजेता रहे। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 28 Sep 2023 17:40:01 +0530</pubDate>
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                <title>तलवार और अग्नि चक्कर के करतब से चौंकाने की कर रहे तैयारी</title>
                                    <description><![CDATA[इस अखाड़े में करीब 100 लड़के हर दिन प्रैक्टिस करने आते हैं और हर साल अनंत चर्तुदशी से 1 महीने पहले प्रैक्टिस करना शुरू कर देते हैं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/preparing-to-surprise-with-sword-and-fire-tricks/article-58157"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-09/talwar-or-agni-chakkr-k-kartab-s-chokane-ki-kr-rhe-tyyari...kota-news-24-09-2023.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। सारा शहर अनंत चर्तुदशी कि तैयारियों में जुट गया है जिसमें कहीं शोभायात्राओं के स्वागत के लिए गेट खड़े हो गए हैं तो कहीं पूरे बाजारों को सजा दिया गया है और इसी क्रम में अखाड़ों ने भी अपने प्रर्दशन को लेकर तैयारी तेज़ कर दी हैं। कोटा के सबसे पुराने अखाड़ों में से एक पट्टा बुर्ज अखाड़ा के लड़के भी दिन भर अपने प्रर्दशन और करतबों को निखारने में पूरे दम खम से जुटे हुए हैं। अखाड़े में कोई दोनों हाथों में तलवार लेकर करतब कि प्रैक्टिस कर रहा है तो कोई बनेठी को शरीर के चारों तरफ हैरतंगेज ढंग से चला रहा है। वहीं कोई अखाड़े में लौहे के बने पट्टे से रस्सी कूद खेल रहा है। </p>
<p><strong>अग्नि चक्कर का होगा प्रदर्शन </strong><br />अखाड़े के उस्ताद शम्भु सिंह ने बताया कि इस अखाड़े में करीब 100 लड़के हर दिन प्रैक्टिस करने आते हैं और हर साल अनंत चर्तुदशी से 1 महीने पहले प्रैक्टिस करना शुरू कर देते हैं। लड़के कीलों से बने पट्टे पर लेटकर सीने पर पत्थर फोड़ना, निम्बु को पेट पर रखकर तलवार से काटना या तलवारों को चलाते समय आपस में बदलना सभी तरह के करतबों कि यहां प्रैक्टिस कर रहे हैं। अनंत चर्तुदशी से 1 महीने पहले अखाड़े कि रौनक ज्यादा बढ़ जाती है क्योंकि इस महीने में नए लड़कों के साथ पुराने लड़के भी प्रैक्टिस करने के लिए आने लग जाते हैं। जो पुराने हैं वो नए लड़कों को करतब सिखाते हैं और उनका हौसला बढ़ाते हैं। सिंह ने आगे बताया कि इस बार प्रदर्शन में लड़के सिर्फ उनके अखाड़े के द्वारा किया जाने वाला करतब अग्नि चक्कर प्रदर्शन भी करेंगें जिसमें कलाबाज लड़का चक्कर पर लगे 16 गुट्टों को डीजल में भीगोकर उसे जलाकर उससे करतब दिखाएगा जो बहुत मुश्किल करतब है। वहीं कलाबाज धारिया, लौहे का पट्टा, दो हाथ कि बनेठी और लौहे के चक्कर के साथ करतब दिखाते हुए नजर आएंगे। </p>
<p><strong>150 साल पुराना अखाड़ा</strong><br />व्यवस्थापक प्रीतम सिंह ने बताया कि अखाड़ा अनंत चर्तुदशी पर अपनी झांकी और करतबों का प्रर्दशन साल 1984 से करते आ रहे हैं वहीं अखाड़ा लगभग 150 साल पुराना है। अखाड़े नाम के सवाल पर प्रीतम सिंह ने बताया कि अखाड़ा कोटा के पट्टा बुर्ज के पास है और इस अखाड़े कि शुरूआत करने वाले उस्ताद गणपत सिंह अंग्रेजों के जमाने में बुर्ज पर स्थित पतेह जंग तोप का संचालन किया करते थे। उन्होंने इस बुर्ज के पास मन्दिर और अखाड़े कि स्थापना बुर्ज के नाम पर ही की जो आज भी संचालित है। अखाड़े का संचालन अखाड़ा पट्टा बुर्ज समिति के द्वारा किया जाता है और सामिति के द्वारा ही पुरा खर्चा व्यय किया जाता है साल भर में सिर्फ एक बार ही समाज से सहयोग लिया जाता है। </p>
<p><strong>12 मिनट बहुत कम समय</strong><br />वहीं प्रशासन द्वारा तय किए गए पॉइन्टों और समय पर राय जानी जो उनके मुताबिक पॉइन्ट बनाना तो ठीक है लेकिन समय को सीमित करना जायज नहीं क्योंकि एक अखाड़े को लय बनाने और करतबों के लिए पर्याप्त जगह बनाने में ही 10 मिनट लग जाते हैं तो फिर कलाबाज करतब क्या दिखाएंगे। वहीं उनका कहना है कि कोरोना महामारी के बाद से ही निगम ने भी प्रोत्साहन राशि देना बंद कर दिया है जिससे अखाड़े चलाने में परेशानी भी आ रही है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 27 Sep 2023 12:01:44 +0530</pubDate>
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