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                <title>Kota Medical College - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>Kota Medical College RSS Feed</description>
                
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                <title>सरकार भी नहीं खोल पाई प्रसूताओं के मौत के कारण, अब तक प्रशासन की जांच अधूरी</title>
                                    <description><![CDATA[एसएमएस, एम्स और कोटा मेडिकल कॉलेज की टीम ने सौंपी सरकार को रिपोर्ट]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/government-unable-to-determine-cause-of-maternal-deaths/article-158045"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/1200-x-600-px)-(1)15.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। कोटा के सरकारी अस्पतालों में प्रसूताओं की मौत का कारण रहस्य बना हुआ है। घटना को 51 दिन बीत चूके हैं, इसके बावजूद चिकित्सा विभाग कारणों को जाहिर नहीं कर सकी। जबकि, दिल्ली एम्स की हाई लेवल कमेटी सहित जयपुर एसएमएस, मेडिकल कॉलेज हॉस्टिल की ने अपनी रिपोर्ट चिकित्सा मंत्री को सौंप दी है, लेकिन मंत्री ने इस मामले में अब तक कोई खुलासा नहीं किया है। हालात यह है कि गंभीर मामले में जिला प्रशासन भी चुप्पी साधे है। गत माह पहले संभागीय आयुक्त के निर्देश पर एडीएम सिटी की अध्यक्षता में मामले की जांच कर सात दिन में रिपोर्ट देनी थी लेकिन वह भी अब तक नहीं दी गई। वहीं, सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में भर्ती प्रसूताओं की हालत भी डायलिसस के भरोसे ही कट रही है। उनकी तबीयत में अभी तक अपेक्षाकृत सुधार नजर नहीं आ रहा।</p>
<p><strong>चार जांच टीमें गठित फिर भी हाथ खाली</strong><br />कोटा मेडिकल कॉलेज अस्पताल में प्रसूताओं की मौत व किडनी फेल्योर मामले ने जब तूल पकड़ा तो शासन-प्रशासन ने चिकित्सा विशेषज्ञों की 4 टीमें गठित कर दी। इनमें दिल्ली एम्स, जयपुर एसएमएस, कोटा मेडिकल कॉलेज की चिकित्सा विशेषज्ञों की टीमों ने दवाइयां, सर्जिकल आइटम, ओटी इंफेक्शन और चिकित्सकों की भूमिका सहित हर एंगल पर जांच-पड़ताल की। इसके अलावा जिला प्रशासन ने भी लॉकल परचेज की दवाओं की जांच व खरीद से संबंधित दस्वाजों की जांच के लिए एडीएम की अध्यक्षता में जांच कमेटी गठित की। इसके बावजूद मौत के कारण उजागर नहीं हो सके।</p>
<p><strong>एक माह बाद भी पुलिस ने नहीं की जांच</strong><br />गत 26 मई को आई दवाओं की जांच रिपोर्ट में फेल मिले इंजेक्शन प्रसूताओं को लगाए गए थे, लेकिन काम नहीं करने से उनकी हालत बिगड़ती चली गई। मामले में अस्पताल अधीक्षक डॉ. आशुतोष शर्मा की ओर से संबंधित फर्म की दवा फेल होने व पूरे घटनाक्रम को लेकर महावीर नगर पुलिस थाने में जांच को लेकर परिवाद भी दिया था लेकिन पुलिस की ओर से भी अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। इधर, थानाधिकारी दिग्विजय सिंह ने बताया कि अधीक्षक की ओर से परिवार मिला था, अभी दवा फेल के सैंपल नहीं दिए गए हैं। जल्द ही सैंपल लेकर आगे की कार्रवाई की जाएगी।</p>
<p><strong>अब तक प्रशासन की जांच अधूरी</strong><br />प्रसूताओं की मौत व किडनी फेल्योर मामले को लेकर संभागीय आयुक्त अनिल अग्रवाल के निर्देश पर एडीएम सिटी की अध्यक्षता में जांच टीम गठित की गई थी, जो अस्पतालों द्वारा लॉकल परचेज पर खरीदी गई दवाओं के दस्तावेज, खरीद रिकॉर्ड, कौनसी दवा और क्यों खरीदी गई, टेंडर, बिल, डिमांड व एनओसी सहित कई बिंदुओं की जांच करनी थी। जिसकी रिपोर्ट 7 दिन में पेश करनी थी लेकिन 20 दिन से ज्यादा समय बीत चुका है, इसके बावजूद अभी प्रशासन की जांच का अता-पता नहीं है।</p>
<p><strong>इन प्रसूताओं की हो चुकी है मौत</strong><br /> प्रिया, पिंकी महावर, ज्योति, पूजा और शिरीन की मौत हो चुकी है।</p>
<p><strong>इनका चल रहा इलाज</strong><br />आरती, रागिनी, धन्नी, सुशीला और पिंकी का उपचार जारी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 25 Jun 2026 14:09:05 +0530</pubDate>
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                <title>मेडिकल कॉलेज में घुसकर बदमाशों ने सुरक्षाकर्मियों को मारे चाकू, एक की हालत गंभीर </title>
                                    <description><![CDATA[हमले के समय अस्पताल की चौकी पर कोई पुलिसकर्मी नहीं था ।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/miscreants-entered-the-medical-college-and-stabbed-security-personnel--one-in-critical-condition/article-86705"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-08/whatsapp-image-2024-08-03-at-14.28.26.jpeg" alt=""></a><br /><p>कोटा। महावीर नगर थाना क्षेत्र में  शनिवार को मेडिकल कॉलेज की सुपरस्पेशलिटी विंग में तैनात सुरक्षाकर्मियों पर चार-पांच बदमाशों ने चाकू से ताबड़तोड़ हमला कर दिया जिसमें तीन सुरक्षा कर्मी घायल हो गए। एक सुरक्षाकर्मी की हालत गंभीर है, जिसका ऑपरेशन किया जा रहा है। सूचना पर पहुंचे थानाधिकारी ने घटना स्थल का जायजा लिया और आरोपियों की तलाश में जुट गए।</p>
<p>हैड कांस्टेबल राजेन्द्र सिंह ने बताया कि सुबह करीब साढ़े सात बजे सूचना मिली कि मेडिकल कॉलेज की सुपरस्पेशलिटी विंग में तैनात सुरक्षाकर्मियों पर चार-पांच बदमाशों ने चाकू से हमला कर घायल कर दिया है। सूचना पर थानाधिकारी महेन्द्र मारू पुलिस जाप्ते के साथ पहुंचे वहीं   डिप्टी एसपी मनीष शर्मा ने भी मौका मुआयना किया। मामले में पीड़ित सुरक्षाकर्मी सुरेंद्र प्रसाद सिंह ने रिपोर्ट  दी जिसमें बताया कि  अस्पताल में आने जाने वालों की रुटीन चैकिंग के लिए सुरक्षाकर्मी तैनात है। अस्पताल की नई बिल्डिंग के  पहले गेट पर तैनात सुरक्षा गार्ड का सुबह करीब 6 सवा छह बजे फोन आया  कि अस्पताल में चार-पांच लोग बिना चैकिंग के सुरक्षाकर्मी को धक्का मार कर घुस आए हैं उनको चैक करने के बाद ही अंदर जाने देना है। उस समय  सुपरस्पेशलिटी के गेट पर मैं खड़ा था तभी वह लोग आए जब उन्हें रोकने का प्रयास किया तो उन्होंने मुझे धक्का दिया और  मारपीट की, तभी पास खड़े सुरक्षाकर्मी शिव सिंह व रामकरण आ गए  उन्होेंने भी उन्हें रोका तो आरोपियों ने चाकू निकाल कर हम तीनों पर हमला किया  रामकरण के पेट में चाकू लगने से उसकी हालत गंभीर है । शिव सिंह और मेरे जांघ व हाथ- पैर पर चाकू से वार किए। इसके बाद आरोपी चाकू को लहराते हुए भाग गए। इस दौरान अस्पताल की चौकी पर कोई पुलिसकर्मी नहीं था और ना ही अस्पताल में मौजूद सैकड़ों लोगों की भीड़ में से किसी ने उन्हें पकड़ने का प्रयास किया । </p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />मेडिकल कॉलेज की सुपरस्पेशलिटी विंग में  सुबह करीब सात बजे चार-पांच बदमाशों ने तीन सुरक्षाकर्मियों पर चैकिंग के दौरान चाकू से हमला कर घायल कर दिया । घायलों का अस्पताल में उपचार चल रहा है।  इस मामले में  मुकदमा दर्ज कर लिया है और आरोपियों को तलाश किया जा रहा है। <br /><strong>- मनीष कुमार शर्मा ,डिप्टी एसपी कोटा सिटी वृत चतुर्थ </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 03 Aug 2024 18:09:23 +0530</pubDate>
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                <title>ठेका कर्मी हड़ताल पर, मरीज परेशान, हर जगह कतारें</title>
                                    <description><![CDATA[अस्पताल में आए दिन की हड़ताल से मरीजों को भारी परेशानी होती है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/contract-workers-on-strike--patients-upset--queues-everywhere/article-58420"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-09/kota-theka.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। कोटा मेडिकल कॉलेज से संबद्ध सभी सरकारी अस्पताल में पिछले 20 दिन से ठेका कर्मी हड़ताल पर चल रहे हैं। व्यवस्थाएं बेपटरी हो रही है। मरीज परेशान हो रहे हैं। लेकिन अस्पताल प्रशासन की ओर से स्थिति नियंत्रण में वैकल्पिक व्यवस्थाएं बेहतर बताई जा रही है। जबकि जमीनी हकीकत ये है कि पर्ची काउंटर से लेकर लैब तक व्यवस्थाएं बिगड़ी हैं। दूसरी तरफ प्रिंसिपल मेडिकल कॉलेज  डा.ॅ संगीता सक्सेना का कहना है कि मेरा काम अधीक्षकों की मॉनिटरिंग करना है। अधीक्षक ही अस्पतालों की व्यवस्था को देखें। सभी पांचो अस्पताल में अधीक्षक को व्यवस्थाएं के लिए लगा रखा है। वो ही अस्पताल में सफाई से लेकर अन्य व्यवस्थाओं के बारे में बता सकते है। इधर मरीजों की जांच रिपोर्ट समय पर नहीं मिल रही। सैंपल देने के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। मेडिकल नर्सिंग स्टूडेंट के भरोसे अस्पताल चल रहा है। लोगों का कहना है कि जनता का पैसा और जनता ही परेशान हो रही है। </p>
<p><strong>हर दो घंटे में होने वाली सफाई सुबह शाम तक सिमटी</strong><br />मेडिकल कॉलेज से जुड़े पांचों अस्पताल के ठेका कर्मी हड़ताल पर चल रहे है। लेकिन मेडिकल कॉलेज प्रशासन की ओर से दावा किया जा रहा है। सभी अस्पतालों में मजदूरों से नियमित सफाई कराई जा रही है। एमबीएस में ही सुबह शाम सफाई हो रही बाकी अस्पतालों में सभी जगह सफाई नियमित  हो रही है। जबकि हकीकत ये है कि अस्पताल में इमरजेंसी, ओपीडी, आॅपरेशन थिएटर, वार्ड और मुख्य शौचालयों की ही सफाई हो पा रही है। सेन्टल लैब में जांचों के लिए मरीजों व तीमारदारों की लंबी कतारें लगी हुई है। लोग घंटों कतार में खड़े होकर जांचों के लिए इंतजार करते दिखे। वैकल्पिक तौर नर्सिंग स्टूडेंट लगा रखे है, लेकिन उनसे व्यवस्था संभल नहीं रही है। इन दिनों मौसमी बीमारियों का प्रकोप बना हुआ है।</p>
<p><strong>हड़ताल करने पर अस्पताल प्रशासन कार्रवाई क्यों नहीं करता</strong><br />एमबीएस में इलाज कराने आए बलोप निवासी रामराज मीणा ने बताया कि अस्पताल में आए दिन की हड़ताल से मरीजों को भारी परेशानी होती है। अस्पताल प्रशासन प्लेसमेंट ऐंजेसी पर कार्रवाई क्यों नहीं करती है। इनके इकरार नामे में हड़ताल करने पर हटाने के नियम क्यो नहीं जोडे जाते। कार्रवाई क्यों नहीं की जाती है। पिछले बीस दिन से मरीज परेशान हो रहे हैं। कोई सुनवाई नहीं। </p>
<p><strong>कॉलेज प्रधानाचार्य से नवज्योति की बातचीत</strong><br /><strong>- प्रश्न 1: </strong>ठेका कर्मियों की हड़ताल से मरीज परेशान हो रहे है। अस्पताल प्रशासन की ओर से क्या व्यवस्थाए कर रखी है। प्लेसमेंट एजेंसियों की  जवाबदेही तय क्यों नहीं है।<br /><strong>उत्तर: </strong>मेडिकल कॉलेज के सभी पांचों अस्पतालों में वैकल्पिक व्यवस्था के तहत नियमित सफाई कराई जा रही है। रामपुरा, जेकेलोन, न्यू मेडिकल अस्पताल सुपर स्पेशलिटी में नियमित सफाई हो रही है। एमबीएस अस्पताल में ही कुछ परेशानी है वहां का अधीक्षक दिन व रात तक लगकर सुबह शाम सभी वार्डो की सफाई करवा रहे हैं। सभी अस्पतालों में प्लेसमेंट एजेंसी के अलग अलग नियम शर्तो के हिसाब से टेंडर निकले हुए है। अधीक्षक ही बेहतर बता सकते है कि प्लेसमेंट ऐजेंसी क्या नियम व शर्ते है। <br /><strong>- प्रश्न:</strong> अस्पताल में सफाई व्यवस्था बिगड़ रही है इसकी जवाबदेही किसकी <br /><strong>उत्तर :</strong> मेडिकल कॉलेज से जुडे सभी सरकारी अस्पताल में अधीक्षक को अस्पताल की व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी दे रखी है। मरीजों की परेशानियों से लेकर सफाई और अन्य कार्य कराने का कार्य उन्हीं का है। मेडिकल कॉलेज के प्रधानाचार्य का कार्य उनके द्वारा किए कार्यो की मॉनिटरिंग का है। <br /><strong>- प्रश्न 3:</strong> एमआरआई जांच के लिए मरीजों को एमबीएस से मेडिकल आना पड़ता है। <br /><strong>उत्तर: </strong>एमबीएस में एमआरआई मशीन लगाने के लिए लेकर 2 मार्च 2023 को कलक्टर की अध्यक्षता  बैठक हुई थी। जिसमें तत्कालीन प्रधानाचार्य सहित एचओडी भी शामिल थे। उस समय 15 करोड़ बजट स्वीकृत हुआ लेकिन वर्तमान में मशीन 22 करोड़ की आ रही है। इसके लिए तीन चार बैंक से लोन की प्रपोजल भी तैयार किए। लेकिन अभी तक बात नहीं बनी है। इसके लिए प्रयास जारी है।<br /><strong>- प्रश्न : </strong>आपके मेडिकल कार्य काल में अस्पताल में व्यवस्थाओं से लेकर विकास को लेकर क्या क्या कार्य हुए। <br /><strong>उत्तर: </strong>अस्पताल में व्यवस्थाओं में कई सुधार किए है। इसके अलावा कई नये नवाचार किए है। इसकी लिस्ट लंबी इस पर विस्तार कभी ओर बात करेंगे। अभी मिटिंग चल रही है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 30 Sep 2023 15:14:35 +0530</pubDate>
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