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                <title>Nobel Prize 2023 - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>Noble Prize 2023: तीन वैज्ञानिकों को भौतिकी का नोबेल पुरस्कार</title>
                                    <description><![CDATA[साल बढ़ाकर 1.1 करोड़ स्वीडिश क्राउन करीब 10 लाख अमेरिकी डॉलर कर दी गई है। यह प्रतिष्ठित पुरस्कार रॉयल स्वीडिश एकेडमी ऑफ साइंसेज की ओर से प्रदान किया जाता है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/noble-prize-2023-nobel-prize-for-physics-to-three-scientists/article-58667"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-10/noble.png" alt=""></a><br /><p>स्टॉकहोम।  भौतिकी में 2023 का नोबेल पुरस्कार पियरे एगोस्टिनी, फेरेंक क्रॉस्ज और ऐनी एल'हुइलियर को प्रदान किया गया है। पदार्थ में इलेक्ट्रॉनों की गतिशीलता का अध्ययन करने के तरीके विकसित करने के लिए इन वैज्ञानिकों को इस प्रतिष्ठित पुरस्कार के लिए चुना गया है।नोबेल समिति ने मंगलवार को यह जानकारी दी।</p>
<p>नोबेल समिति ने एक्स पर कहा, रॉयल स्वीडिश एकेडमी ऑफ साइंसेज ने पदार्थ में इलेक्ट्रॉन गतिशीलता के अध्ययन के लिए प्रकाश के एटोसेकंड पल्स उत्पन्न करने वाले प्रयोगात्मक तरीकों के लिए पियरे एगोस्टिनी, फेरेंक क्रूज और ऐनी एल'हुइलियर को भौतिकी में 2023 का नोबेल पुरस्कार देने का फैसला किया है।</p>
<p>पदार्थ में इलेक्ट्रॉन गतिशीलता के अध्ययन के लिए प्रकाश के एटोसेकंड पल्स उत्पन्न करने के प्रायोगिक तरीकों के लिए  यह पुरस्कार इन वैज्ञानिकों को दिया जाएगा। इस पुरस्कार के तहत दी जाने वाली राशि इस साल बढ़ाकर 1.1 करोड़ स्वीडिश क्राउन करीब 10 लाख अमेरिकी डॉलर कर दी गई है। यह प्रतिष्ठित पुरस्कार रॉयल स्वीडिश एकेडमी ऑफ साइंसेज की ओर से प्रदान किया जाता है।</p>
<p>यह इस सप्ताह यह दूसरा नोबेल पुरस्कार घोषित किया गया है। चिकित्सा का नोबेल पुरस्कार काटालिन कारिको और ड्रयू वीसमैन को एमआरएनए कोविड-19 टीकों के विकास में योगदान के लिए देने की घोषणा सोमवार को की गई थी। हंगरी के वैज्ञानिक कैटालिन कारिको और अमेरिकी सहयोगी ड्रयू वीसमैन को एमआरएनए मॉलीक्यूल की खोज के लिए पुरस्कार जीता है।</p>
<p>वर्ष 1901 से अब तक भौतिकी में 116 नोबेल पुरस्कार दिए गए हैं।इनमें चार महिलाएं शामिल हैं। वर्ष 1903 में मैरी क्यूरी, 1963 में मारिया गोपेर्ट मेयर,  2018 में डोना स्ट्रिकलैंड और 2020 में आंद्रिया घेज को नोबल पुरस्कार से सम्मानित किया गया  था।</p>
<p>नोबेल पुरस्कार डायनामाइट के आविष्कारक और व्यवसायी अल्फ्रेड नोबेल की वसीयत के तहत स्थापित पुरस्कार है। यह पुरस्कार विज्ञान, साहित्य और शांति लाने के लिए हासिल की गई उपलब्धियों के लिए 1901 से निरंतर प्रदान किए जा रहे हैं। यह दुनिया भर में वैज्ञानिकों के लिए सर्वोच्च सम्मान  है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 03 Oct 2023 18:18:37 +0530</pubDate>
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                <title>Nobel Prize 2023: कैटालिन कारिको और ड्रू वीसमैन को मिला नोबेल प्राइज, कोरोना वैक्सीन बनाने से जुड़ी खोज की थी</title>
                                    <description><![CDATA[न्यूक्लियोसाइड बेस संशोधनों से संबंधित उनकी खोजों के लिए ये पुरुस्कार दिया गया है। इसी खोज की मदद से covid​​​​-19 से लड़ने के लिए एमआरएनए वैक्सीन को विकसित करने में मदद मिली थी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/nobel-prize-2023-physiology-medicine-katalin-karik%C3%B3-and-drew-weissman/article-58569"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-10/nobel-prize-20231.png" alt=""></a><br /><p>नोबेल प्राइज 2023 की घोषणा हो चुकी है। फिजियोलॉजी या मेडिसिन के लिए कैटालिन कारिको (Katalin Karikó) और ड्रू वीसमैन (Drew Weissman) को नोबेल प्राइज से सम्मानित किया गया है। इन्हें न्यूक्लियोसाइड बेस संशोधनों से संबंधित उनकी खोजों के लिए ये पुरुस्कार दिया गया है। इसी खोज की मदद से covid​​​​-19 से लड़ने के लिए एमआरएनए वैक्सीन को विकसित करने में मदद मिली थी। बता दें कि पुरस्कार जीतने वाले को एक मिलियन अमेरिकी डॉलर का कैश प्राइज दिया जाता है। नोबेल पीस प्राइज की घोषणा 6 अक्टूबर को की जाएगी। वहीं अर्थशास्त्र के क्षेत्र से जुड़े विजेता की घोषणा नौ अक्तूबर होगी।<br /><br /><strong>नवज्योति ने 18 अप्रैल 2021 के अंक में mRNA तकनीक के बारें में विस्तार से बताया था<br /></strong>किसी भी बीमारी की वैक्सीन तैयार होने में कई वर्ष लग जाते है। पूरी दुनिया में कहर ढा रहे कोरोना वायरस का टीका बनाना भी कोई आसान काम नहीं था। लेकिन वैज्ञानिकों के अथक प्रयास के बल पर एक साल से भी कम समय में इसकी वैक्सीन बनकर तैयार हो गई थी। कोरोना के खिलाफ आई फाइजर और मॉडर्ना कंपनी की वैक्सीन ने एक उजाले की किरण दिखाई थी। इन वैक्सीन को बनाने में नई तकनीक का इस्तेमाल किया गया था। यह दोनों एमआरएनए (mRNA) तकनीक पर आधारित वैक्सीन है। <br /><br />एमआरएनए तकनीक का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसे बहुत कम समय में विकसित किया जा सकता है। फाइजर और मॉडर्ना की वैक्सीन 90 से 95 प्रतिशत तक प्रभावी है। इस तकनीक के द्वारा शरीर के अंदर बॉडी सेल प्रोटीन बनाने के लिए प्रोत्साहित करती है। इसके साथ ही तंत्रिका तंत्र को इस तकनीक के जरिए जरूरी प्रोटीन मिलता है। अर्थात् जब हमारे शरीर पर कोई वायरस या बैक्टीरिया हमला करता है तो एमआरएनए तकनीक हमारी सेल्स को उस वायरस या बैक्टीरिया से लड़ने के लिए प्रोटीन बनाने का मैसेज भेजती है। इससे हमारे इम्यून सिस्टन को जो जरूरी प्रोटीन चाहिए, वो मिल जाता है और हमारे शरीर में एंटीबॉडी बन जाती है। एमआरएनए वैक्सीन में असली वायरस की जरूरत नहीं होती इसलिए इसे पारंपरिक वैक्सीन की तुलना में ज्यादा जल्दी बनाया जा सकता है। इससे शरीर की इम्यूनिटी भी बढ़ती है। ये पहली बार है जब दुनिया में इस तकनीक पर आधारित वैक्सीन बनी है।<br /><br />एमआर तकनीक लॉग लास्टिंग है। यह तकनीक भविष्य में काफी प्रभावी रहेगी। इस तकनीक के जो रिजल्ट आए है उनकी एफीकेसी 90 प्लस प्रतिशत है। उनके ज्यादा बेहतर रिजल्ट है।<br />-डॉ. पुनीत रिजवानी, प्रोफेसर एंड हैड, मेडिसिन विभाग, महात्मा गांधी हॉस्पिटल, जयपुर</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 02 Oct 2023 15:38:49 +0530</pubDate>
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