<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://dainiknavajyoti.com/women-s-rights/tag-40394" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>Dainik Navajyoti Rising Rajasthan RSS Feed Generator</generator>
                <title>women's rights - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
                <link>https://dainiknavajyoti.com/tag/40394/rss</link>
                <description>women's rights RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>जालोर में तुगलकी फरमान लिया वापस : महिलाओं के मोबाइल उपयाेग पर नहीं है अब रोक, जानें पंच-पटेलों ने क्यों लिया यू-टर्न ?</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[राजस्थान के जालोर में 15 गांवों की पंचायत ने भारी विरोध के बाद महिलाओं और लड़कियों के मोबाइल उपयोग पर लगा प्रतिबंध वापस ले लिया है। सामाजिक दबाव के बाद समाज ने इस विवादित प्रस्ताव को पूरी तरह निरस्त कर दिया।]]>
                    </description>
                
                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jalore/tughlaqs-decree-taken-back-in-jalore-women-are-not-allowed/article-137194"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/jalor-samrtphone-case.png" alt=""></a><br /><p>जालोर। संविधान के निर्माता डॉ भीमराव अंबेडकर जी ने महिलाओं के अधिकारों के लिए जीवन भर संघर्ष किया उनको पुरुषों के बराबर सम्मान/हक दिलाया मगर आज भी संविधान के दौर में ऐसी पंचायत का होना दुर्भाग्यपूर्ण हैं। जहां एक तरफ दुनियां तरक्की और तकनीक के दौर में नैनो टेक्नोलॉजी को अपना रही है, तो दूसरी तरफ राजस्थान के जालोर में हाल ही में, एक तुगलकी फरमान जारी किया गया और महिलाओं के मोबाइल उपयोग कर रोक लगा दी गई। इतना ही नहीं, महिलाओं और लड़कियों के घर से बाहर फोन रखने पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया था। बता दें कि ये तुगलकी फरमान जालोर के केवल 15 गांवों पर ही लागू किया गया था बाकी पर नहीं।</p>
<p>जानकारी के लिए बता दें कि इस तुगलकी फरमान में कहा कि समाज में बहू बेटियों के पास कैमरा वाला मोबाइल नहीं रहेगा। पढ़ाई करने वाले लड़कियां पढ़ाई में जरूरी लगे तो वह पढ़ाई करने के बाद घर से बाहर नहीं ला सकती और सार्वजनिक समारोह में नहीं न किसी पड़ोसी के यहां मोबाइल ला सकती हैं। </p>
<p>इसके बाद मामला सोशल मीडिया पर वायरल हुआ तो इसका पूरे राजस्थान में विरोध होने लगा, जिसके बाद सुंधा माता पट्टी के अजना चौधरी द्वारा महिलाओं स्मार्टफोन पर प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव विवादों में घिरा तो पंचायत ने ये तुगलकी फरमान वापस ​ले लिया। समाज के सबसे अग्रणी नथाराम चौधरी ने इस मामले में जानकारी देते हुए कहा कि हमने इस प्रस्ताव को अब पूरी तरह से वापस ले लिया है और अब महिलाएं और बेटियां पहले की तरह अपने स्मार्टफोन का उपयोग कर सकती है।</p>
<p>इस मामले के बारे में समाज के पांच पटेल ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि यह कोई फैसला नहीं था, बल्कि महिलाओं की ओर से दिया गया सुझाव था, जिस पर 26 जनवरी तक समाज की राय मांगी गई थी। बच्चों पर मोबाइल के दुष्प्रभाव को देखते हुए प्रस्ताव रखा गया था, लेकिन सोशल मीडिया पर हुए विरोध के बाद आज हमने इसे वापस ले लिया गया है। </p>
<p> </p>]]>
                    </content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जालोर</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jalore/tughlaqs-decree-taken-back-in-jalore-women-are-not-allowed/article-137194</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jalore/tughlaqs-decree-taken-back-in-jalore-women-are-not-allowed/article-137194</guid>
                <pubDate>Thu, 25 Dec 2025 16:08:26 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2025-12/jalor-samrtphone-case.png"                         length="600517"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator>
                        <![CDATA[Jaipur NM]]>
                    </dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस आज - अधिकारों के लिए महिलाएं चुनौतियों का कर रही मुकाबला</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[दैनिक नवज्योति ने बालिकाओं और बालिकाओं के अधिकारों के लिए काम करने वाली महिलाओं से चर्चा की है।]]>
                    </description>
                
                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/international-girl-child-day-today---women-are-facing-challenges-for-rights/article-59295"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-10/adhikaro-k-liye-mahilaye-chunotiyo-ka-kr-rhi-mukabala...kota-news-11-10-2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर सहित दुनियाभर में 11 अक्टूबर  को अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस  के रूप में मनाया जाता जाएगा। महिलाओं के अधिकारों से लेकर उनकी लैगिंग समानता, अधिकारों पर गोष्ठियां चर्चा और आयोजन होंगे लेकिन वास्तव में बेटियां कितनी सुरक्षित है, समाज में अपने अधिकारों लेकर उनके सामने क्या चुनौतियां आती है। इसको लेकर दैनिक नवज्योति ने बालिकाओं और बालिकाओं के अधिकारों के लिए काम करने वाली महिलाओं से चर्चा की है। इस दिन को मनाने का खास उद्देश्य महिलाओं को उनके अधिकारों और महिला सशक्तीकरण के बारे में बताना है। जिससे वो अपने सामने आने वाली चुनौतियों का डटकर सामना कर सकें और अपनी जरूरतों के साथ ही अपने सपनों को भी पूरे कर सकें। उनकी चुनौतियों और संघर्ष कितनी सफल हुई उनकी कहान उनकी जुबानी। </p>
<p><strong>सरकारी योजनाएं धरातल पर उतरें तभी बेटियों को मिलेगा लाभ</strong><br />हर साल मनाकर बालिकाओं अधिकारों की बात कर इतिश्री हो जाती है। केवल शब्दों, सरकारी योजना और किताबों में ही बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ की बात न हो इसे धरातल पर लाने के लिए वास्तविकता में पूर्ण निष्ठा से काम हो तभी बेटियों का भला हो सकेंगा। हृदय अंदर तक द्रवित हो उठता है जब पता चलता है कि सिर्फ अपनी जिद और दूषित-कुंठित मानसिकता को पूरा करने के लिए बालिकाओं के लैंगिक शोषण इस हद तक किया जाता कि अकारण काल का ग्रास बन जाती। बेटियों को एक ऐसा सभ्य, सुरक्षित और संस्कारी समाज की आवश्यकता है जहां उसे घर से अकेले निकलने में रात 12 बजे भी डर न लगे तभी जाकर हम संविधान द्वारा दिए गए लैंगिक समानता के अधिकार को साकार कर पाएंगे। <br /><strong>- डॉ. निधि प्रजापति, अध्यक्ष-सोसाइटी हैस ईव शी इंटरनेशनल </strong></p>
<p><strong>समाज में लड़कियों को  नहीं मिलती खुलकर जीने की आजादी</strong><br />आज भी लिंग भेद एक बड़ी समस्या है जिसका बालिकाओं को जीवन भर सामना करना पड़ता है। समाज में लड़कियों को लड़कों की तुलना कम स्वतंत्रता  मिलती है, उनके साथ अनेकों पाबंदियां और भेदभाव होता है जिसका असर उनकी शिक्षा, विवाह और खुद के लिए निर्णय लेने पर पड़ता है जिससे अपनी क्षमता के अनुसार अवसर प्राप्त करने से वंचित रह जाती हैं। बालिकाओं की प्रमुख समस्याओं में शिक्षा, पोषण, जबरन बाल विवाह, कानूनी अधिकार और चिकित्सा अधिकार के बारे में जागरूकता की कमी, खेलकूद मनोरंजन का अधिकार बालिकाओं को शारीरिक, मानसिक रूप से चोट पहुचाने और दुर्व्यवहार के विरुद्ध संरक्षण का अधिकार है, पैतृक संपत्ति का अधिकार के लिए संघर्ष करना पड़ता है।<br /><strong>- प्रतिभा दीक्षित, अधिवक्ता कोटा</strong></p>
<p><strong>समाज में महिला सशंक्तीकरण जरूरी</strong><br />लड़के और लड़कियों के बालपन का अनुभव बहुत अलग होता है। लड़कियों की स्वतंत्रता में अनेक पाबंदियां होती हैं । इस पाबंदी का असर उनकी शिक्षा, विवाह और सामाजिक रिश्तों और खुद के लिए निर्णय लेने की अधिकार आदि को प्रभावित करता है। लड़कियों की शिक्षा, कौशल विकास, खेलकूद में भाग लेने ,उन्हें स्वरोजगार से जोड़ने और सुसंस्कारों से सुशोभित कर महिला सशक्तिकरण द्वारा एक सुंदर सभ्य समाज के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं    <br /><strong>- ज्योति सुवालका, परामर्शदाता  </strong></p>
<p><strong>समाज में अभी और बदलाव की जरुरत</strong><br />देश की बेटियां हर क्षेत्र में अपना परचम लहरा रही हैं। पहले जहां बेटियों के पैदा होने पर भी उन्हें बाल विवाह जैसे कुप्रथा में झोंक दिया जाता था, वहीं आज बेटी होने पर लोग गर्व करते है। समाज में बदलाव आ रहा अभी और बदलाव की जरुरत है। <br /><strong>- मनीषा बजाज, छात्रा कोटा</strong></p>
<p><strong>अपने अधिकारों के लिए अभीकरना पड़ता है संघर्ष</strong><br />समाज में बालिका को असमानताओं को मिटाने के लिए लोगों के बीच जागरूकता को बढ़ाना होगा तभी इस दिवस को मनाना सार्थक होगा। अभी बेटियों को अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करना पड़ता है। जबकि बेटियों हर क्षेत्र में अपना परचम लहराया है। लेकिन अभी बालिकाओं के साथ बलात्कार और यौन शोषण नहीं रूक रहा है। इस पर अंकुश लगाना जरूरी है। सभी सभ्य समाज में नारी सुरक्षित रह सकेंगी।<br /><strong>- दीप्ती मेवाड़ा, छात्रा कोटा </strong></p>
<p><strong>ग्रामीण क्षेत्र में अभी बालिकाएं अपने अधिकारों लिए नहीं जागरूक</strong><br />आज की पीढ़ी डिजिटल पीढ़ी है।  हमारी पीढ़ी इस दिन को हर साल इंटरनेशनल स्तर पर मनाती है।  यह दिन पूरे विश्व की लड़कियों को आॅनलाइन होने वाले नुकसान या हानि के बारे में बोलने के लिए एक मंच प्रदान करने का काम करता है। लेकिन आज ग्रामीण क्षेत्र में आज के समय में 25 वर्ष से कम उम्र के 2 बिलियन लोगों के पास इंटरनेट की सुविधा नहीं है। ऐसे में वो अपने अधिकारों प्रति कैसे जागरूक होगी ये यक्ष प्रश्न है।<br /><strong>- विजय लक्ष्मी गुर्जर, छात्रा </strong></p>
<p><strong>योजनाओं का नहीं मिल रहा लाभ</strong><br />आज के समय में लड़कों की तुलना में काफी लड़कियां बेरोजगार और अशिक्षित है।  इसी गैप को भरने के लिए इस तरह के दिवस मनाए जाते हैं।  सरकार की तरफ से भी लड़कियों  और महिलाओं को मजबूत बनाने के लिए कई योजनाएं चलायी जा रही है। लेकिन उनका लाभ उनको नहीं मिल पा रहा है। केंद्र सरकार द्वारा चलायी जाने वाली योजनाएं बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ,सुकन्या समृद्धि योजना,बालिका समृद्धि योजना, सीबीएससी उड़ान स्कीम,माध्यमिक शिक्षा के लिए लड़कियों के लिए प्रोत्साहन की राष्ट्रीय योजना धनलक्ष्मी योजना है लेकिन इनका लाभ बहुत लड़किया उठा पाती है। <br /><strong>- हेमा, छात्रा कोटा </strong></p>]]>
                    </content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/international-girl-child-day-today---women-are-facing-challenges-for-rights/article-59295</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/international-girl-child-day-today---women-are-facing-challenges-for-rights/article-59295</guid>
                <pubDate>Wed, 11 Oct 2023 18:14:58 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2023-10/adhikaro-k-liye-mahilaye-chunotiyo-ka-kr-rhi-mukabala...kota-news-11-10-2023.jpg"                         length="530782"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator>
                        <![CDATA[kota]]>
                    </dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        