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                <title>jungle safari - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>jungle safari RSS Feed</description>
                
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                <title>जंगल सफारी अब होगी महंगी : प्रदेश में वाइल्डलाइफ सफारी के शुल्क में 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी, एक अप्रैल से लागू होगी नई दरें</title>
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                        <![CDATA[प्रदेश में वन्यजीव प्रेमियों के लिए बड़ी खबर। अब जंगल सफारी का रोमांच पहले से ज्यादा महंगा होने जा रहा। वन्यजीव पर्यटन से जुड़े शुल्कों में 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी कर दी है, जो 1 अप्रैल से लागू होगी। ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/jungle-safari-will-now-be-expensive-10-percent-increase-in/article-148560"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/aranya-bhawan.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। प्रदेश में वन्यजीव प्रेमियों के लिए बड़ी खबर है। अब जंगल सफारी का रोमांच पहले से ज्यादा महंगा होने जा रहा है। वन्यजीव पर्यटन से जुड़े शुल्कों में 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी कर दी है, जो 1 अप्रैल से लागू होगी। नई दरें रणथंभौर टाइगर रिजर्व और सरिस्का टाइगर रिजर्व सहित प्रदेश के सभी वाइल्डलाइफ सफारी स्थलों पर लागू होंगी।</p>
<p>आदेश के अनुसार, यह बढ़ी हुई दरें 31 मार्च 2028 तक प्रभावी रहेंगी। मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक अरुण प्रसाद की ओर से इस संबंध में आदेश जारी किए गए हैं। पर्यटकों को अब जिप्सी और कैंटर सफारी के लिए पहले से अधिक शुल्क देना होगा।</p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 31 Mar 2026 15:23:39 +0530</pubDate>
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                <title>जयपुर पहुंची ‘पैलेस ऑन व्हील्स’: 20वें फेरे में पर्यटकों की संख्या कम, शाही अंदाज में हुआ मेहमानों का स्वागत</title>
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                        <![CDATA[दुनिया की प्रतिष्ठित लग्जरी ट्रेन पैलेस ऑन व्हील्स गुरुवार को अपने 20वें सफर पर जयपुर पहुंची। गांधी नगर स्टेशन पर विदेशी सैलानियों का पारंपरिक राजस्थानी अंदाज में भव्य स्वागत किया गया। शहर के ऐतिहासिक स्थलों का भ्रमण करने के बाद, यह शाही ट्रेन अब रणथंभौर में जंगल सफारी के रोमांचक अनुभव के लिए सवाई माधोपुर की ओर रवाना होगी।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/palace-on-wheels-reached-jaipur-in-its-20th-round-number/article-145349"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/royel-train.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। लग्ज़री ट्रेन पैलेस ऑन व्हील्स अपने 20वें फेरे के तहत गुरुवार को जयपुर के गांधी नगर रेलवे स्टेशन पहुंची। ट्रेन में विभिन्न देशों से क़रीब 10 से 12 पर्यटक सफर कर रहे हैं। इस फेरे में पर्यटकों की संख्या अपेक्षाकृत कम देखने को मिली, फिर भी मेहमानों का स्वागत शाही अंदाज़ में किया गया।</p>
<p>रेलवे स्टेशन पर उनका पारंपरिक तरीके से स्वागत किया गया। इसके बाद उन्हें विशेष बसों के माध्यम से जयपुर के प्रमुख पर्यटन स्थलों के भ्रमण के लिए रवाना किया गया, जहां उन्होंने शहर की ऐतिहासिक विरासत और सांस्कृतिक धरोहर का अनुभव किया।</p>
<p>दिनभर के भ्रमण के बाद शाम को यह लग्ज़री ट्रेन दुर्गापुरा रेलवे स्टेशन से पर्यटकों को लेकर अपने अगले पड़ाव सवाई माधोपुर के लिए रवाना होगी, जहां पर्यटक रणथंभौर के जंगल सफारी का रोमांचक अनुभव करेंगे।</p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 05 Mar 2026 15:40:03 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Jaipur NM]]>
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                <title>कागजों में कैद होकर रह गई जंगल सफारी</title>
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                        <![CDATA[विधायक संदीप शर्मा ने विधानसभा में उठाया था मामला। 
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/jungle-safari-remained-confined-to-papers/article-119719"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-07/rt112roer27.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क से सटे कोटा वनमंडल की 1100 हैक्टेयर वनभूमि पर वाइल्ड लाइफ सफारी शुरू किए जाने की योजना कागजों में कैद होकर रह गई। जबकि, वन्यजीव विभाग ने इस भूमि को वाइल्ड लाइफ में शामिल किए जाने के लिए उच्चाधिकारियों को प्रस्ताव तक भेजे, जिस पर अमल करना तो दूर एक साल बाद भी फाइल आगे नहीं बड़ी। जबकि, सकतपुरा वनखंड में बड़ी संख्या में वन्यजीवों का बसेरा है। ऐसे में यहां जंगल सफारी शुरू किए जाने से सरकार को राजस्व प्राप्त होगा। साथ ही वन्यजीवों की सुरक्षा भी पुख्ता होगी। दरअसल, कोटा वनमंडल का सकतपुरा वनखंड अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क से सटा है, जो प्रस्तावित कोटा ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट शंभुपुरा तक 1100 हैक्टेयर में फैला हुआ है। यहां बड़ी संख्या में शाकाहारी व मांसाहारी वन्यजीवों की मौजूदगी है। ऐसे में यह एरिया कंजर्वेशन रिजर्व घोषित किए जाने से यह वनक्षेत्र संरक्षित हो जाएगा। वाइल्ड लाइफ एक्ट 1972 प्रवाही होने से जंगली-जानवरों व जंगल की सुरक्षा बढ़ जाएगी।   वन्यजीव विभाग इसे कंजर्वेशन रिजर्व में तब्दील किए जाने के प्रयास किए जा रहे हैं। विभाग ने गत 20 जुलाई को विधानसभा सत्र-2 में विधायक संदीप शर्मा द्वारा लगाए सवालों के जवाब से इसकी जानकारी दी थी। </p>
<p><strong>भालू से लेकर पैंथर तक का बसेरा</strong><br />वन्यजीव विभाग के डीएफओ अनुराग भटनागर ने बताया कि सकतपुरा वनक्षेत्र में बड़ी तादात में वन्यजीवों का बसेरा है। यहां भालू से लेकर पैंथर का मूवमेंट रहता है। इस क्षेत्र में चिंकारा की संख्या अच्छी है। साथ ही इंडियन वुल्फ, जैकाल, फॉक्स, नीलगाय, जंगली खरगोश, जंगली बिल्ली, जंगली सूअर, सिवेट, भालू, पैंथर, मोनिटर लिजार्ड सहित कई वन्यजीव शामिल हैं। ऐसे में इसे कंजरर्वेशन रिजर्व बनाकर वाइल्ड लाइफ सफारी शुरू करने की योजना है। इसके लिए प्रस्ताव बनाकर  संभागीय मुख्य वन संरक्षक एवं क्षेत्र निदेशक के माध्यम से मुख्यालय भेजे गए हैं।  </p>
<p><strong>कंजर्वेशन रिजर्व बनने पर बढ़ेगी जंगल और जीवों की सुरक्षा</strong><br />वन्यजीव पे्रमी नरेश कुमार ने बताया कि वर्तमान में सकतपुरा वनक्षेत्र में अवैध गतिविधियां हो रही है। जिससे वन्यजीवों का प्राकृतिक आवास नष्ट हो रहा है। संदिग्ध घुसपैठ होने से जंगली जानवरों का पलायन बढ़ रहा है। अभी तक यह एरिया साधारण वनक्षेत्र है। ऐसे में इसे कंजर्वेशन रिजर्व घोषित किया जाना अति आवश्यक है। वनक्षेत्र का स्टेटस चेंज होते ही यहां वाइल्ड लाइफ प्रोटेक्शन एक्ट 1972 प्रभावी होगा। साथ ही विभिन्न मदों में विभाग को बजट प्राप्त होगा। जिससे सुरक्षा दीवार का निर्माण, वाटर कनजरर्वेशन स्ट्रेक्चर, ट्रैकिंग ट्रेक, ग्रासलैंड विकसित करने सहित अन्य डवलपमेंट कार्य हो सकेंगे।</p>
<p><strong>जंगल सफारी शुरू होने से बढ़ेगा ट्यूरिज्म  </strong><br />नेचर प्रमोटर एएच जैदी ने बताया कि 1100  हैक्टेयर का सकतपुरा वनखंड घना जंगल है। शाकाहारी व मांसाहारी वन्यजीवों की तादाद भी ज्यादा है। सबसे अहम बात शहर के मध्य स्थित होने से लोगों की पहुंच में है। ऐसे में यहां वन्यजीव विभाग की ओर से जंगल सफारी शुरू की जाए तो शहरवासियों को एडवेंचर मिलेगा और ट्यूरिज्म को पंख लगेंगे। </p>
<p><strong>इधर, दम तोड़ रही मुकुंदरा की सफारी </strong><br />पर्यावरणविद् सत्यनारायण कुमार ने बताया कि मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व के दरा अभरारणय में जंगल सफारी शुरू हुए करीब दो साल बीत चुके हैं। फिर भी सफारी परवान नहीं चढ़ सकी।  हालात यह है, शहर से दरा जाने वाले पर्यटकों को 50 किमी का चक्कर काटने के बाद भी वन्यजीवों की साइटिंग नहीं हो रही। मजबूरन उन्हें वापस 50 किमी का तय कर बैरंग लौटना पड़ता है। जबकि, सकतपुरा वनखंड शहर के मध्य स्थित है। यहां टाइगर को छोड़ अन्य मांसाहारी व शाकाहारी जानवरों का  हैबीटाट है। ऐसे में यहां जंगल सफारी परवान चढ़ सकती है। वन विभाग के आला अधिकारियों को प्रस्ताव पर संज्ञान लेना चाहिए। </p>
<p><strong>अवैध खनन व अतिक्रमण पर लगेगी रोक</strong><br />वाइल्ड लाइफ रिसर्चर रवि नागर ने बताया कि वनमंडल का सकतपुरा वनक्षेत्र को सेंचुरी का दर्जा मिलता है तो यह संरक्षित हो जाएगा। चारों ओर सुरक्षा दीवार का निर्माण होने से अवैध खनन, संदिग्ध घुसपैठ व अवैध चराई जैसी गतिविधियों पर लगाम लगेगी। जिससे वहां ग्रासलैंड विकसित होगा। जिसका असर वन्यप्राणियों का प्राकृतिक आवास सुरक्षित होगा और शाकाहारी वन्यजीवों की संख्या में बढ़ोतरी होगी। जिससे फूड  चैन व पारिस्थितिकी तंत्र मजबूत होने के साथ उनकी सुरक्षा भी बढ़ सकेगी।  </p>
<p>सकतपुरा वनखंड का 1100 हैक्टेयर वन क्षेत्र को वाइल्ड लाइफ में शामिल करने के लिए उच्चाधिकारियों को प्रस्ताव भेजे गए हैं। यह एरिया वाइल्ड लाइफ में आ जाए तो इसका मैनेजमेंट बेहतर हो सकेगा। वहीं, इसे अभेड़ा कंजर्वेशन रिजर्व बनवाकर वाइल्ड लाइफ सफारी शुरू करने की योजना है। इस संबध में  मुख्य वनसंरक्षक एवं क्षेत्र निदेशक के माध्यम से प्रस्ताव वन मुख्यालय भेजा गया है। कंजर्वेशन रिजर्व बनने पर अतिक्रमण, अवैध खनन जैसी अवैध गतिविधियों पर लगाम लग सकेगी और ट्यूरिज्म बढ़ सकेगा। <br /><strong>- अनुराग भटनागर, उप वन संरक्षक, वन्यजीव विभाग </strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 07 Jul 2025 15:27:53 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[kota]]>
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            <item>
                <title>कोटा में जंगल सफारी शुरू करने की तैयारी!</title>
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                        <![CDATA[अभेड़ा स्थित 1100 हैक्टेयर वनभूमि को कोटा वन्यजीव में शामिल करने की योजना।
]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/preparations-to-start-jungle-safari-in-kota/article-88490"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-08/1rer-(1)13.png" alt=""></a><br /><p>कोटा । शहरवासियों के लिए खुशखबरी है, उन्हें कोटा में वाइल्ड लाइफ सफारी की सुविधा मिल सकती है। वन्यजीव विभाग की ओर से इसकी तैयारी की जा रही है। इस संबंध में संभागीय मुख्य वन संरक्षक एवं क्षेत्र निदेशक को पत्र भी लिखा जा चुका है। दरअसल, अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क से सटे सकतपुरा वनखंड की 1100 हैक्टेयर वनभूमि को वन्यजीव विभाग में शामिल करने की कार्य योजना है। वर्तमान में यह क्षेत्र कोटा वन मंडल के अधीन है। जिसे कन्जरर्वेशन रिजर्व में तब्दील किए जाने के प्रयास किए जा रहे हैं। वन्यजीव विभाग ने गत 20 जुलाई को विधानसभा सत्र-2 में विधायक संदीप शर्मा द्वारा लगाए सवालों के जवाब से इसकी जानकारी दी।</p>
<p><strong>इंडियन वुल्फ से पैंथर तक का बसेरा</strong><br />वन्यजीव विभाग के डीएफओ अनुराग भटनागर ने बताया कि सकतपुरा वनक्षेत्र में बड़ी तादात में वन्यजीवों का बसेरा है। यहां इंडियन वुल्फ से लेकर पैंथर का मूवमेंट रहता है। इस क्षेत्र में चिंकारा की संख्या बहुत अच्छी है। साथ ही इंडियन वुल्फ, जैकाल, फॉक्स, नीलगाय, जंगली खरगोश, जंगली बिल्ली, जंगली सूअर, सिवेट, भालू, पैंथर, मोनिटर लिजार्ड सहित कई वन्यजीव शामिल हैं।</p>
<p><strong>अवैध गतिविधियों पर लगेगी लगाम</strong><br />मुकुंदरा समिति के अध्यक्ष तपेश्वर सिंह भाटी ने बताया कि वर्तमान में सकतपुरा वनक्षेत्र में अवैध गतिविधियां हो रही है। जिससे वन्यजीवों का प्राकृतिक आवास नष्ट हो रहा है। संदिग्ध घुसपैठ होने से जंगली जानवरों का पलायन बढ़ रहा है। अभी तक यह एरिया साधारण वनक्षेत्र है। ऐसे में इसे सेंचुरी एरिया घोषित किया जाना अति आवश्यक है। वनक्षेत्र का स्टेटस चेंज होते ही यहां वाइल्ड लाइफ प्रोटेक्शन एक्ट 1972 लागू हो जाएगा। साथ ही विभिन्न मदों में विभाग को बजट प्राप्त होगा। जिससे सुरक्षा दीवार का निर्माण, वाटर कनजरर्वेशन स्ट्रेक्चर, ट्रैकिंग ट्रेक, ग्रासलैंड विकसित करने सहित अन्य डवलपमेंट कार्य हो सकेंगे।</p>
<p><strong>अभेड़ा से ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट तक सफारी की तैयारी</strong><br />सकतपुरा वनखंड, अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क से सटा वनक्षेत्र है, जो प्रस्तावित कोटा ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट शंभुपुरा तक 1100 हैक्टेयर में फैला हुआ है। इसमें बड़ी संख्या में शाकाहारी व मांसाहारी वन्यजीवों की मौजूदगी है। कंजरर्वेशन रिजर्व घोषित किए जाने से यह वनक्षेत्र संरक्षित हो जाएगा और वाइल्ड लाइफ एक्ट 1972 लागू होने जंगली-जानवरों व जंगल का प्रोटेक्शन बढ़ जाएगा। ऐसे में अभेड़ा से ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट शंभुपुरा तक वाइल्ड लाइफ सफारी शुरू किए जाने से टयूरिज्म बढ़ेगा। ह्य</p>
<p><strong>अभेड़ा तालाब में 200 प्रजातियों के पक्षियों का बसेरा</strong><br />नेचर प्रमोटर एएच जैदी ने बताया कि अभेड़ा तालाब में 200 से ज्यादा प्रजातियों के पक्षियों का निवास है। जिनमें मुख्य रूप से सारस क्रेन, पेन्टेड स्टार्क, बार हैडेगूज, स्टेपी ईगल, हैरीयर सहित कई तरह के पक्षियों का बसेरा है। उपयुक्त वैटलैंड होने से यहां सर्दी-गर्मी में बड़ी संख्या में देसी-विदेशी पक्षियों का कलरव गूंजता है। इधर, वन्यजीव प्रेमियों ने इस क्षेत्र को संरक्षित करने के लिए कन्जरर्वेशन रिजर्व घोषित किए जाने के वन्यजीव विभाग के प्रयास को सराहा है। </p>
<p><strong>वन्यजीवों का बढ़ेगा जनसंख्या घनत्व</strong><br />पगमार्क फाउंडेशन के अध्यक्ष देवव्रत सिंह हाड़ा का कहना है कि वनमंडल का सकतपुरा वनक्षेत्र को सेंचुरी का दर्जा मिलता है तो यह संरक्षित हो जाएगा। चारों ओर सुरक्षा दीवार का निर्माण होने से अवैध खनन, संदिग्ध घुसपैठ व अवैध चराई जैसी गतिविधियों पर लगाम लगेगी। जिससे वहां ग्रासलैंड विकसित होगा। जिसका असर वन्यप्राणियों का प्राकृतिक आवास सुरक्षित होगा और शाकाहारी वन्यजीवों की संख्या में बढ़ोतरी होगी। जिससे फू्रड चैन व पारिस्थितिकी तंत्र मजबूत होगा। </p>
<p>अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क स्थित कोटा वनमंडल के सकतपुरा वनखंड के 1100 हैक्टेयर वनक्षेत्र को वन्यजीव विभाग में शामिल किए जाने के प्रयास किए जा रहे हैं। इस क्षेत्र में चिंकारा,इंडियन वुल्फ सहित अन्य शाकाहारी व मांसाहारी वन्यजीवों का मूवमेंट है। यहां वाइल्ड लाइफ सफारी शुरू किए जाने ट्यूरिज्म के साथ रोजगार भी बढ़ेगा। संभागीय मुख्य वन संरक्षक एवं क्षेत्र निदेशक को इस संबंध में पत्र भेजा है। हालांकि, प्रस्ताव पूरी तरह से नहीं बना है। कन्जरर्वेशन रिजर्व घोषित होने से यह क्षेत्र संरक्षित होगा और वन्यजीवों की संख्या में इजाफा होगा। <br /><strong>- अनुराग भटनागर, उप वन संरक्षक, वन्यजीव विभाग </strong></p>
<p>वनमंडल का जो वनक्षेत्र है, उसे वन्यजीव विभाग में शामिल करने से वह एरिया संरक्षित होगा। इस क्षेत्र में वन्यजीवों की संख्या अधिक है। ऐसे में यहां वाइल्ड लाइफ सफारी शुरू किए जाने से पर्यटन बढ़ेगा। इसके प्रस्ताव तैयार करवाकर उच्चाधिकारियों को भेजे जाएंगे।<br /><strong>- रामकरण खैरवा, संभागीय मुख्य वन संरक्षक एवं क्षेत्र निदेशक</strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 24 Aug 2024 14:51:31 +0530</pubDate>
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                <title>बेजुबानों की सांसों में घुल रहा जहर, सोलर या ईवी हो सकते हैं मददगार</title>
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                        <![CDATA[प्रदेश के चारों टाइगर रिजर्व में पेट्रोल व डीजल वाहनों से करवा रहे सफारी। ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/poison-is-getting-mixed-in-the-breath-of-the-mute-animals--solar-or-ev-can-be-helpful/article-78344"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-05/bezubano-ki-saanso-me-ghul-rha-zeher,-solar-ya-ev-ho-skte-h-madadgar...kota-news-17-05-2024.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। प्रदेश के टाइगर रिजर्व में ट्यूरिज्म के नाम पर जंगल और वन्यजीवों को प्रदूषण बांटा जा रहा है। जंगल की आबोहवा दूषित हो रही है। वन्यजीवों की सांसों में जहर घुल रहा है और जिम्मेदार बेखबर हैं। </p>
<p>दरअसल, राज्य के चारों टाइगर रिजर्व रणथम्भौर, सरिस्का, रामगढ़ व मुकुंदरा में टाइगर सफारी के लिए पेट्रोल व डीजल वाहनों का उपयोग किया जा रहा है, जिससे कार्बनडाई ऑक्साइड, कार्बन मोनाऑक्साइड जैसी जहरीली गैसें जंगल के वातावरण में फैल रही है। जिसका विपरीत असर वन्यजीवों के स्वास्थ्य पर पड़ता है। ऐसे में जंगल और जानवरों को प्रदूषण के काले साय से बचाने में इलेक्ट्रिक व सौलर वाहन कारगर साबित हो सकते हैं। वन्यजीव प्रेमियों में मध्यप्रदेश की तर्ज पर राजस्थान के टाइगर रिजर्व में इलेक्ट्रिक वाहनों से सफारी करवाए जाने की कार्ययोजना तैयार करने की मांग उठने लगी है। </p>
<p><strong>एक सफारी पर 70 किलो कार्बनडाइ ऑक्साइड </strong><br />प्रदेश के चारों टाइगर रिजर्व में 646 वाहनों से पर्यटकों को टाइगर सफारी करवाई जाती है। इनमें पेट्रोल से चलने वाली जिप्सी व डीजल  चलित कैंटर शामिल हैं। सभी रिजर्व के सफारी रुट की दूरी को मिलाकर औसत एक सफारी राउण्ड ही करीब 120 किमी होता है।  जिसे पूरा करने में औसत 28 से 30 लीटर पेट्रोल की खपत होती है। ऐसे में 30 लीटर पेट्रोल से 120 किमी की दूरी तय करने में 70 किलो कार्बनडाइ ऑक्साइड वाहन के साइलेंसर से हवा में फैलती है। यह स्थिति को एक ही राउण्ड की है। जबकि, प्रतिदिन कई राउण्ड सफारी होती है। ऐसे में प्रदूषण का स्तर बढ़ता ही जाता है। यदि,  इलेक्ट्रिक वाहन चलाए जाएं तो वायु व धवनी प्रदूषण से जानवरों को बचा सकते हैं। रणथम्भौर व सरिस्का रिजर्व में औसत एक रूट 40 किमी तो रामगढ़ व मुकुंदरा में 20-20 किमी होता है। </p>
<p><strong>प्रत्येक राउण्ड पर जंगल में घुल रही 70 किलो कार्बनडाई ऑक्साइड</strong><br />646 - कुल वाहन<br />270 - रणपथम्भौर में जिप्सी<br />287 - रणपथम्भौर में कैंटर<br />50 - सरिस्का में जिप्सी <br />30 - सरिस्का में कैंटर<br />01 - मुकुदंरा में जिप्सी<br />08 - रामगढ़ में जिप्सी</p>
<p><strong>इलेक्ट्रिक वाहनों से यह होगा फायदा</strong><br />टाइगर सफारी के लिए इलेक्ट्रिक व सौलर वाहनों का उपयोग  होने से वायु व ध्वनी प्रदूषण से वन्यजीवों को राहत मिलेगी। वहीं, ईवी वाहनों से शोर नहीं होने से उनका रहवास सुरक्षित रहेगा। प्रदूषण नहीं होगा तो उनकी जीवन शैली स्वस्थ होगी। साथ ही पलायन रुकेगा और धुएं से होने वाली विभिन्न बीमारियों से बच सकेंगे। इसके अलावा वाहन चालकों का पेट्रोल-डीजल पर लगने वाला खर्चा बचने से आर्थिक फायदा होगा। </p>
<p><strong>वन्यजीवों को यह हो रहा नुकसान </strong><br />पर्यटकों को टाइगर दिखाने की होड़ में जिप्सी व कैंटर दौड़ाए जा रहे हैं। धुएं के रूप में निकलती जहरीली गैसें प्रकृति के स्वच्छ वातावरण को दूषित कर ही है। वाहनों के शोर-शराबे से जंगल की शांत फिजा अशांत होती है। वन्यजीव स्ट्रेस में रहते हैं और सुरक्षित रहवास की तलाश में पलायन को मजबूर होते हैं। प्रदूषण से उनकी रोग प्रतिरोधक व प्रजन्न क्षमता घटती है। साथ ही जीवन शैली पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। </p>
<p><strong>यूं समझें प्रदूषण का गणित </strong><br />आरटीयू के प्रोफेसर आनंद चतुर्वेदी ने बताया कि एक लीटर पेट्रोल को जलाने के लिए इंजन को 11 किलो हवा चाहिए होती है। ऐसे में औसत 30 लीटर पेट्रोल को बर्न करने में वाहन के इंजन को 330 किलो हवा की जरूरत होती है। ऐसे में 1 लीटर पेट्रोल  जलने से वाहन का साइलेंसर 2.31 किलो कार्बनडाई ऑक्साइड   हवा में छोड़ता है। वहीं, 30 लीटर पेट्रोल को बर्न करने में करीब 70 किलो कार्बनडाई ऑक्साइड हवा घुल जाएगी। वहीं, 1 लीटर डीजल के बर्न होने पर 2.68 किलो कार्बनडाइ ऑक्साइड जनरेट होती है। इस तरह 30 लीटर डीजल पर करीब 80 किलो से ज्यादा यह जहरीला धुआं जंगल में घुल जाता है। यह गणना चारों टाइगर रिजर्व की एक सफारी ट्रिप की कुल औसत 120 किमी दूरी को तय करने में खर्च होने वाले करीब 30 लीटर पेट्रोल के अनुसार की गई है। </p>
<p><strong>क्या कहते हैं वन्यजीव प्रेमी</strong><br />मध्य प्रदेश में 27 टाइगर रिजर्व और 11 नेशनल पार्क हैं। जहां सफारी के लिए पेट्रोल-डीजल वाहनों को इलेक्ट्रिक व सौलर वाहनों पर शिफ्ट करने की योजना तैयार की जा रही है। पायलट प्रोजेक्ट के रूप में यह बदलाव करने की कोशिश हो रही है। ऐसे में एमपी की तर्ज पर राजस्थान के टाइगर रिजर्व में भी ईवी वाहनों को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। जिससे वन और वन्यजीवों को प्रदूषण से बचाया जा सकता है।                       <strong> - एएच जैदी, नेचर प्रमोटर</strong></p>
<p>नि:संदेह ईवी वाहनों का चलन पर्यावरण संरक्षण के लिए कारगर विकल्प बनेगा। वन्यजीव बेहद संवेदनशील होते हैं, उनकी सुनने की क्षमता इंसानों से अधिक होती है। जब पेट्रोल-डीजल गाड़ियों का काफिला आता है तो इंजन के शोर से वन्यजीव परेशान होते हैं। ध्वनी व वायू प्रदूषण से उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता घटने लगती है। प्रजन्न क्षमता पर भी विपरीत असर पड़ता है। अधिकतर वाहनों का मेंटिनेंस सही नहीं होने से काला धुआं ज्यादा छोड़ते हैं, जिससे जंगल की वायु दूषित होती है। यदि, इलेक्ट्रिक वाहन चलाए जाएं तो इन सभी परेशानियों से निजात मिलेगी और जानवरों को हैल्दी एनवायरमेंट मिल सकेगा।<br /><strong>- अजय दुबे, वाइल्ड लाइफ एक्टिविस्ट भोपाल</strong></p>
<p>जंगल की जमीन समतल नहीं होती, जगह-जगह घाटियां, गड्ढ़े  व उबड़-खाबड़ रास्ते होते हैं। ऐेसे यहां फोर बाई फोर वाहनों की जरूरत होती है। वाहन कम्पनियों को जंगल में चलने लायक वाहन बनाना चाहिए। यह पर्यावरण की दृष्टि से बड़ा कदम साबित होगा।  <br /><strong>- दौलत सिंह शक्तावत, वाइल्ड लाइफ एक्सपर्ट1.    </strong></p>
<p><strong>क्या कहते हैं अधिकारी</strong><br />यह अच्छा सुझाव है। वन्यजीवों की बेहतरी के लिए इन वाहनों को शामिल करना चाहिए। ईवी से जंगल को प्रदूषण और वन्यजीवों को ध्वनी प्रदूषण से बचाया जा सकता है। लेकिन, पावरफुल इंजन के ईवी वाहन जिप्सी के मुकाबले महंगी होने से ऑपरेटर की पहुंच से बाहर हो सकती है।  वाहन कम्पनियों को जंगल में गश्त व सफारी के लिहाज से ऐसे वाहन तैयार करने चाहिए। <br /><strong>- अभिमन्यू सहारण, उप वन संरक्षक, मुकुंदरा टाइगर रिजर्व</strong></p>
<p>सरकार ने ऐसे वाहन ऑर्डर कर रखे हैं। वैसे, टाइगर रिजर्व में इलेक्ट्रिक व सीएनजी वाहन लगा सकते हैं। लेकिन शर्त यह है कि उसका ग्राउंड क्लियरेंस 180 एमएम का होना चाहिए, तभी गाड़ी जंगल में चल पाएगी। सरकार ईवी विहिक्ल को बढ़ावा दे रही है। पर्यावरण संरक्षण में यह अच्छा सुझाव है। इस संबंध में उच्चाधिकारियों से मार्गदर्शन मांगेंगे।<br /><strong>- संजीव शर्मा, उप वन संरक्षक, रामगढ़ टाइगर रिजर्व बूंदी</strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 17 May 2024 14:47:33 +0530</pubDate>
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                <title>100 किमी चक्कर काट कर भी निराश लौट रहे पर्यटक</title>
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                        <![CDATA[पर्यटकों की मांग है कि या तो जिप्सी की संख्या बढ़ाई जाए या फिर शहर से सटे बोराबांस में सफारी शुरू करवाई जानी चाहिए। ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/tourists-returning-disappointed-even-after-traveling-100-km/article-78206"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-05/100km-chakkr-kat-k-bhi-nirash-laut-rhe-pryatak...kota-news-16-05-2024.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व में जंगल सफारी शुरू हुए करीब एक साल बीत चुका है। फिर भी सफारी परवान नहीं चढ़ सकी। वर्तमान में दरा अभयारणय में एक जिप्सी के भरोसे ही सफारी करवाई जा रही है। अधिकतर समय जिप्सी की एडवांस बुकिंग रहती है। ऐसे में कोटा शहर से दरा जाने वाले पर्यटकों को 50 किमी का चक्कर काटने के बाद भी सफारी का मौका नहीं मिल पाता। मजबूरन उन्हें वापस 50 किमी का तय कर बैरंग लौटना पड़ता है। इस तरह दरा आने-जाने में 100 किमी का चक्कर लगाने के बावजूद निराश लौटना पड़ रहा है। जबकि, शहरी सीमा से सटे बोराबांस में भी सफारी का रुट स्वीकृत है। जहां एक साल बाद भी सफारी शुरू नहीं हो सकी। पर्यटकों का कहना है, मुकुंदरा प्रशासन यदि, रावतभाटा रोड स्थित बोराबांस रैंज में स्वीकृत रुट्स पर सफारी शुरू करें तो पर्यटकों को काफी राहत मिलेगी। साथ ही समय की बचत हो सकेगी और ट्यूरिज्म को बढ़ावा मिलेगा। </p>
<p><strong>एक जिप्सी के भरोसे सफारी</strong><br />दरा सेंचुरी में जंगल सफारी के लिए मात्र एक ही जिप्सी है, जो सुबह की पारी में 6.30 से  9.30 तथा दोपहर 3 से 6 बजे तक रहती है। पर्यटकों को एंट्री व टिकट दरा रेंज कार्यालय से लेना होता है। यहीं से बुकिंग आॅफलाइन की जाती है। कोटा शहर से जाने वाले पर्यटकों को वहां जाकर पता लगता है कि जिप्सी एडवांस बुक हैं, ऐसे में उन्हें सफारी का मौका अगले दिन मिल पाएगा या फिर दोपहर की पारी तक इंतजार करना होगा। दोनों ही सूरत में पर्यटकों का समय व्यर्थ हो जाता है। मजबूरन उन्हें बैरंग लौटना पड़ता है। यदि, यहां जिप्सियों की संख्या बढ़ाई जाए तो भी लोगों को राहत मिल सकती है।  </p>
<p><strong>दरा में 4500 से 700 किराया</strong><br />दरा रेंज में मौरूकलां-बंजर-रेतिया तलाई-पटपडिया-सावनभादौ एरिया शामिल है। करीब 21 किमी के जंगल में सफारी करवाई जाती है। 6 पर्यटक होने पर ही जिप्सी सफारी के लिए रवाना होती है। ट्यूरिस्ट की संख्या कम होने पर उनसे 6 सीटों का किराया 4500 से 700 रुपए किराया वसूला जाता है। हालांकि, टिकट दर रणथम्भौर से दोगुनी कम है और वन्यजीवों की साइटिंग व सावनभादौं डेम का विहंग्म दृश्य आकर्षित करते हैं। पर्यटकों की मांग है कि या तो जिप्सी की संख्या बढ़ाई जाए या फिर शहर से सटे बोराबांस में सफारी शुरू करवाई जानी चाहिए। </p>
<p><strong>यह तीन रुट हैं स्वीकृत</strong><br />मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व में सफारी के लिए चार रुट प्रस्तावित हैं। इनमें बोराबांस रेंज शहर के सबसे नजदीक है। इस रैंज में बंधा-बग्गी रोड, अखावा-बलिंडा-बंधा शामिल है। यहां विभिन्न तरह के वन्यजीव व बल खाती चंबल और मुस्कुराती कराइयां मौजूद हैं। ऐसे में यहां सफारी शुरू की जाए तो पर्यटन तो बढ़ेगा ही साथ ही सरकार के राजस्व में वृद्धि हो सकेगी। इसके अलावा कोलीपुरा रेंज में नागनी चौकी पोस्ट, कालाकोट-दीपपुरा घाटा-कान्या तालाब-नागनी चौकी पोस्ट, तीसरा रूट मंदरगढ़ में बेरियर-मंदरगढ़, तालाब-केशोपुरा-रोझा तालाब होते हुए मंदरगढ़ बेरियर शामिल है। </p>
<p><strong>क्या कहते हैं पर्यटक</strong><br />दरा में जंगल सफारी के लिए बुकिंग भी आॅफ लाइन है। जिसे जल्द से जल्द आॅनलाइन किया जाना चाहिए। शहर से 50 किमी का सफर कर दरा पहुंचते हैं तो वहां जाकर जिप्सी एडवांस बुक होने की बात पता चलती है, जिससे आना-जाना मिलाकर 100 किमी का चक्कर व्यर्थ हो जाता है। मुकुंदरा प्रशासन को बोराबास रैंज में सफारी शुरू करनी चाहिए।<br /><strong>- यतिंद्र कुमार, दादाबाड़ी </strong></p>
<p> दरा बहुत दूर पड़ता है। ऐसे में रावतभाटा रोड स्थित बोराबास रेंज में प्रस्तावित रुट पर जंगल सफारी शुरू की जानी चाहिए। ताकि, पर्यटकों का समय व पेट्रोल का पैसा बच सके। साथ ही बुकिंग प्रणाली भी आॅनलाइन होनी चाहिए, जिससे व्यक्ति सफारी से पहले बुकिंग की करंट स्टेटस को देख ट्रैवलिंग प्लान बना सके।<br /><strong>- ललित नामा, महावीर नगर</strong></p>
<p>मैं अपने साथियों के साथ कुछ माह पहले सफारी के लिए दरा गया था। वहां जाकर पता लगा कि जिप्सी एडवांस में ही बुक हो चुकी है। ऐसे में वापस बैरंग लौटना पड़ा। यदि, बुकिंग व्यवस्था आॅनलाइन होती या फिर जिप्सी की संख्या अधिक होती तो उसी दिन सफारी का मौका मिल जाता। विभाग को अपनी कार्यप्रणाली में सुधार करने की जरूरत है। <br /><strong>- चेतन कुमार सैन, कैशवपुरा </strong></p>
<p>बोराबांस रैंज का रुट जंगल सफारी के लिए प्रस्तावित है। यहां सफारी शुरू करवाने के लगातार प्रयास जारी है। हालांकि, बोराबास रैंज में वाहन मालिक  रुचि नहीं दिखा रहे हैं। हमने आवेदन भी मांगे हैं, वाहनों का रजिस्ट्रेÑशन होते ही सफारी शुरू करवा दी जाएगी। पर्यटकों के लिए सुविधाओं में विस्तार कर रहे हैं। <br /><strong>- अभिमन्यू सहारण, डीएफओ, मुकुंदरा टाइगर रिजर्व कोटा</strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 16 May 2024 16:59:25 +0530</pubDate>
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                <title>एक साल बाद भी बोराबास रैंज में शुरू नहीं हुई जंगल सफारी</title>
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                        <![CDATA[वर्तमान में दरा रैंज में ही एक जिप्सी के भरोसे दो पारियों में जंगल सफारी चल रही है।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/even-after-a-year--jungle-safari-did-not-start-in-borabas-range/article-75635"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-04/ek-saal-bd-bhi-borabas-range-me-shuru-nhi-hui-jungle-safari...kota-news-22-04-2024.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व में जंगल सफारी शुरू हुए करीब एक साल बीत गया। लेकिन, अभी तक शहर के बीच बोराबांस रैंज में सफारी शुरू नहीं हो सकी। जिसकी वजह से शहरवासियों को करीब 35 से 40 किमी दूर दरा सेंचुरी जाना पड़ता है। शहर से दूरी अधिक होने के कारण लोग कनवास रोड स्थित दरा अभयारणय में सफारी को नहीं जा पा रहे। हालात यह हैं, दरा में भी एक ही जिप्सी होने से पर्यटकों को बुकिंग नहीं मिलती। जबकि, वन विभाग ने मुकुंदरा में सफारी के लिए 4 रुट तय किए थे। जिसमें से बोराबांस रेंज में बंधा-बग्गी रोड, अखावा-बलिंडा-बांघ शामिल हैं। वन्यजीव प्रेमियों का कहना है कि बोराबांस का जंगल खूबसूरत होने के साथ शहर में नजदीक है। ऐसे में पर्यटकों की पहुंच आसान होगी और सफारी  का उद्देश्य पूर्ण हो सकेगा। मुकुंदरा प्रशासन को इसके सकारात्मक प्रयास करना चाहिए। </p>
<p><strong>इन तीन रुट्स पर सफारी का इंतजार </strong><br />वर्तमान में दरा रैंज में ही एक जिप्सी के भरोसे दो पारियों में जंगल सफारी चल रही है। जहां पर्यटकों को सेम-डे बुकिंग भी नहीं मिलती। ऐसे में उन्हें अगले दिन वैटिंग में इंतजार करना पड़ता है। बता दें, दरा रेंज में मौरूकलां-बंजर-रेतिया तलाई-पटपडिया-सावनभादौ का 21 किमी एरिया में ही सफारी करवाई जा रही है। इसके अलावा पूर्व में प्रस्तावित तीन अन्य रूट बोराबांस रेंज में बंधा-बग्गी रोड, अखावा-बलिंडा-बंधा, दूसरा रूट कोलीपुरा रेंज में नागनी चौकी पोस्ट, कालाकोट-दीपपुरा घाटा-कान्या तालाब-नागनी चौकी पोस्ट, तीसरा रूट मंदरगढ़ में बेरियर-मंदरगढ़, तालाब-केशोपुरा-रोझा तालाब होते हुए मंदरगढ़ बेरियर रुट भी शामिल है। ऐसे में यहां भी सफारी शुरू करने करने के प्रयास तेज किए जाने चाहिए। </p>
<p><strong>बोराबास में इन वन्यजीवों का बसेरा</strong><br />वाइल्ड लाइफ रिसर्चर रवि नागर ने बताया कि बोराबांस का जंगल बेहद खूबसूरत है। यहां हायना, फॉक्स, जेकॉल, भालू, हिरण, चिंकारा, ब्लैक बक, सांभर, नीलगाय, सिविट केट, रेटल, लंगूर, नेवला, झाऊ चूहा, जंगली खरगोश, चिंटीखोर यानी पैंगोलिन, सेही जंगली चूहा सहित कई वन्यजीवों की मौजूदगी हैं। वहीं, सरीसृप व उभयचर में पायथन, रैट स्नेक, बफ-स्ट्राइप, कीलबैक, चेकर्ड कीलबैक, रेड सैंडबोआ, रेसेल्स वाइपर, टिंÑकेट, कोबरा व चंबल में मगरमच्छ बड़ी संख्या में है। </p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />बोराबांस रैंज में जल्द ही सफारी शुरू करेंगे। इसके प्रयास प्रयास किए जा रहे हैं। <br /><strong>- जसवीर सिंह भाटी, रैंजर, दरा रैंज मुकुंदरा टाइगर रिजर्व</strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 22 Apr 2024 15:06:13 +0530</pubDate>
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                <title>प्रकृति की गोद में बसा मुकुंदरा, शहरी रूट पर भी शुरू करें सफारी</title>
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                        <![CDATA[वन विभाग को चाहिए कि बोराबांस व कोलीपुरा रेंज में सफारी शुरू करें ताकि शहरवासियों को पहुंचने में आसानी हो।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/mukundra-situated-in-the-lap-of-nature--start-safari-on-urban-route-also/article-59674"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-10/prakruti-ki-god-me-bsa-mukundara,-shehri-route-pr-bhi-shuru-kre-safari...kota-news-16-10-2023.jpeg" alt=""></a><br /><p>कोटा। मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व में सफारी शुरू होने के साथ ही शहरवासी जंगल और वन्यजीवों के दीदार को उत्साहित हैं। लेकिन, उनकी खुशी में दूरी बाधा बन रही है। वर्तमान में सफारी के लिए जिस रूट को खोला गया है, वह शहर से करीब 62 किमी दूर है। पर्यटकों को एंट्री कनवास नाके से मिल रही है, जबकि, टिकट की बुकिंग दरा रेंज से हो रही है। दरा अभयारण्य भी 48 किमी दूर है। इतना ही नहीं, टिकट की बुकिंग भी आॅफलाइन है। अक्सर पर्यटक अधिक दूरी तय कर दरा रेंज पहुंच तो जाते हैं लेकिन एडवांस बुकिंग के चलते  टिकट नहीं मिलने से उन्हें निराश लौटना पड़ता है। पर्यटकों का मत है कि शहर के नजदीक बोराबांस व कोलीपुरा रेंज में भी सफारी शुरू की जानी चाहिए ताकि शहरवासियों को ज्यादा दूरी से निजात मिल सके। </p>
<p><strong>एंट्री कनवास नाका, दूरी 68 किमी</strong><br />तलवंडी निवासी अक्षत जैन व अंशु विजयवर्गीय ने बताया कि मुकुंदरा में सफारी करना अपने आप में रोमांचित करने वाला अहसास है। लेकिन, पर्यटकों को एंट्री के लिए शहर से 68 किमी दूर कनवास जाना पड़ता है। जबकि, टिकट 48 किमी दूर दरा रेंज से लेना होगा। इतनी दूर जाने के बाद भी एडवांस बुकिंग के चलते सफारी का मौका न मिलने का अंदेशा लगा रहता है। यदि टिकट की व्यवस्था आॅनलाइन मोड पर हो तो ज्यादा सहुलियत होगी। </p>
<p><strong>जिप्सियों की बढ़े संख्या तो मिले राहत</strong><br />महावीर नगर निवासी अरविंद कोली व ब्रजेश कुमार ने बताया कि वर्तमान में दरा अभयारणय में सफारी के लिए एक ही जिप्सी है लेकिन लोगों में सफारी को लेकर क्रेज ज्यादा है। ऐसे में पर्यटकों की सुविधाओं के मध्यनजर जिप्सियों की संख्या बढ़ाई जानी चाहिए। ताकि, एक पारी में बुकिंग न मिले तो दूसरी पारी में बुकिंग मिलने की संभावना तो बनी रहे। वहीं, केशवपुरा निवासी नंदलाल का कहना है कि विभाग को सफारी का दायरा बढ़ाया जाना चाहिए। </p>
<p><strong>शहरी रुट्स पर भी शुरू हो सफारी</strong><br />विज्ञान नगर निवासी अजमत हुसैन, जुल्फीकार व रियाज मोहम्मद का कहना है कि मुकुंदरा टाइगर रिजर्व घोषित होने के 10 साल बाद सफारी शुरू हुई है। यह शहरवासियों के लिए सौगात है लेकिन यह भी सच है कि दूरी अधिक होने के कारण हर कोई दरा अभयारणय नहीं जा सकता। वन विभाग को चाहिए कि बोराबांस व कोलीपुरा रेंज में सफारी शुरू करें ताकि शहरवासियों को पहुंचने में आसानी हो। इधर, शोयब खान, धीरज व राकेश नामा कहते हैं, पूर्व में प्रस्तावित तीन अन्य रूट बोराबांस रेंज में बंधा-बग्गी रोड, अखावा-बलिंडा-बंधा, दूसरा रूट कोलीपुरा रेंज में नागनी चौकी पोस्ट, कालाकोट-दीपपुरा घाटा-कान्या तालाब-नागनी चौकी पोस्ट, तीसरा रूट मंदरगढ़ में बेरियर-मंदरगढ़, तालाब-केशोपुरा-रोझा तालाब होते हुए मंदरगढ़ बेरियर तय किए गए थे। इन रुट्स पर भी सफारी शुरू करने के प्रयास किए जाने चाहिए। </p>
<p><strong>ऐतिहासिक धार्मिक स्थलों से झलकता प्राचीन वैभव</strong><br />नेचर प्रमोटर एएच जैदी ने बताया कि प्राकृतिक छटा के साथ मुकुन्दरा विरासत से भरा पड़ा है। रिजर्व में 12वीं शताब्दी का गागरोन किला, 17वीं शताब्दी का अबली मीणी का महल, पुरातात्विक सर्वे के अनुसार 8वीं-9वीं शताब्दी का बाडोली मंदिर समूह, भैंसरोडगढ़ फोर्ट, 19वीं शताब्दी का रावठा महल, शिकारगाह समेत कई ऐतिहासिक व रियासतकालीन इमारतें, गेपरनाथ, गरड़िया  महादेव मंदिर भी है, जो कला-संस्कृति व प्राचीन वैभव को दर्शाते हैं। ऐसे में इन रुट्स पर सफारी शुरू होने से पर्यटक विरासत से रुबरू हो सकेंगे। </p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 16 Oct 2023 19:16:26 +0530</pubDate>
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                <title>शुद्ध हवा व शांत माहौल में स्वर्ग जैसा हुआ अनुभव</title>
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                        <![CDATA[पहली बार सवार हुए पर्यटकों और जिप्सी चालकों का वन विभाग की टीम ने फूल मालाओं से स्वागत किया।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/heaven-like-experience-in-pure-air-and-peaceful-environment/article-59296"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-10/sudh-hwa.jpg" alt=""></a><br /><p>मोड़क स्टेशन। मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व में सफारी के दूसरे दिन पैंथर नजर आने से पर्यटक काफी उत्साहित हुए। वीरेंद्र, विवेक, नरेंद्र चौधरी, सुदर्शन, योगेंद्र, महेंद्र आदि ने बताया कि जंगल सफारी का अनुभव काफी अच्छा रहा।  हमने सावनभादो डैम के किनारे शीतल, मगरमच्छ और पैंथर देखा। पर्यावरण का यह नजारा देखकर काफी अच्छा लगा। वहीं दूसरी शिफ्ट में जयपुर से आए पर्यटक वीरेंद्र सिंह शेखावत, विवेक तथा नरेंद्र चौधरी, सुदर्शन, योगेंद्र आदि ने बताया कि जंगल शुद्ध हवा व शांत माहौल देखकर हमें स्वर्ग की अनुभूति हुई। पहली बार में ही हमने लकड़बग्घा, पैंथर, चीतल, चिंगारा, नीलगाय व कई तरह के पशु-पक्षी देखे। जानकारी के अनुसार सोमवार से मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व में जंगल सफारी शुरू कर दी गई है। पहले दिन जिप्सी के जरिए कुछ पर्यटकों को मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व का भ्रमण करवाया गया था। इसमें पहली बार सवार हुए पर्यटकों और जिप्सी चालकों का वन विभाग की टीम ने फूल मालाओं से स्वागत किया। मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व के कार्यवाहक वाइल्ड लाइफ वार्डन बीजो जॉय ने बताया कि सोमवार से सफारी दरा रेंज से शुरू की गई है। धीरे-धीरे अब इसे और बढ़ाया जाएगा। उन्होंने बताया कि मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व एरिया को दोगुना करने का फैसला लिया था। इसकी अधिसूचना भी जारी की गई है। जिसमें 759 वर्ग किमी को 35 फीसदी बढ़ाकर 1134 वर्ग किमी किया गया है। इसमें चित्तौड़गढ़ के भैंसरोडगढ़ वन्य जीव अभयारण्य, कोटा में राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य और बूंदी में चार वन ब्लॉक शामिल किए गए हैं। मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व को 2013 में डिनोटिफाई किया गया था। जिसके 10 साल बाद यह फिर से शुरू हुई है। वहीं इसके बाद बने रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व में एक साल में ही जंगल सफारी शुरू हो गई थी।</p>
<p><strong>ऐसे बुक कर सकते हैं पर्यटक </strong><br />बीजो जॉय ने बताया कि मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व के बफर जोन में स्वीकृत सावनभादो टूरिज्म रूट में जिप्सी सफारी शुरू हुई है। इसमें प्रथम पारी में 6 सैलानियों ने वनों की सुंदरता का आनंद लिया। सभी पर्यटक जंगल और वन्यजीव का दीदार कर सकते हैं। फिलहाल सावनभादो रूट ही खुला है। जिसमें सफारी का समय सुबह 6.30 से 9.30 और शाम को 3 से 6 बजे रहेगा। बुकिंग के लिए दरा रेंज कार्यालय से संपर्क करना होगा। </p>
<p><strong>लगातार हो जंगल का भ्रमण</strong><br />बीजो जॉय के अनुसार वन्य जीव प्रेमियों ने भी इस पर खुशी जताई है। वे चाहते हैं कि लगातार लोगों को जंगल का भ्रमण करवाया जाए। मुकुंदरा टाइगर रिजर्व में टाइगर के अलावा भी देखने के लिए काफी कुछ है। फिलहाल पर्यटक मुकुंदरा टाइगर रिजर्व में टाइगर का दीदार अभी नहीं कर पाएंगे। </p>
<p><strong>बाघ-बाघिन की मौत से पिछड़ गया रिजर्व </strong><br />कार्यवाहक वाइल्ड लाइफ वार्डन बीजो जॉय ने बताया कि वर्तमान में मुकुंदरा में एक बाघ और एक बाघिन मौजूद है। यहां चार बाघ और दो शावकों की पूर्व में मौत हो चुकी है। अलग-अलग समय पर बाघ, बाघिन और शावकों की मौत के कारण रिजर्व पीछे रह गया। इसी के चलते टाइगर रिजर्व बाद में बने बूंदी के रामगढ़ विषधारी से भी पीछे रह गया। ऐसे में जंगल सफारी शुरू होने का काम भी बड़ा चुनौतीपूर्ण था। उम्मीद जताई जा रही है कि यह प्रदेश का एक अच्छा टाइगर रिजर्व बनकर उभरेगा। </p>]]>
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                <pubDate>Wed, 11 Oct 2023 18:24:31 +0530</pubDate>
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