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                <title>Waterlogging - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>Waterlogging RSS Feed</description>
                
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                <title>भण्डेड़ा में जलभराव समस्या पर किसानों की मांग तेज, जानें पूरा मामला </title>
                                    <description><![CDATA[पाइप बंद होते ही ऊपरी क्षेत्र के खेतों में जलभराव हो जाता है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/farmers-in-bhandeda-intensify-demands-regarding-waterlogging-issue/article-156656"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/111200-x-600-px)-(4)3.png" alt=""></a><br /><p>भण्डेड़ा। क्षेत्र में आगामी बरसात को देखते हुए किसानों ने मुख्य सड़कों पर बरसाती पानी निकासी के लिए लगाए गए पाइप बंद करने वाले लोगों के खिलाफ समय रहते सख्त कार्रवाई की मांग की है। किसानों का कहना है कि यदि विभाग पहले से ही ऐसे लोगों को पाबंद कर दे, तो खरीफ फसलों को हर साल होने वाले भारी नुकसान से बचाया जा सकता है। जानकारी के अनुसार बांसी-कालानला मार्ग एवं भण्डेड़ा-सादेड़ा मुख्य मार्ग पर सार्वजनिक निर्माण विभाग द्वारा सड़क निर्माण के दौरान पानी निकासी के लिए पाइप लगाए गए थे, ताकि बारिश का पानी खेतों में जमा न होकर आगे निकल सके। लेकिन कई स्थानों पर निचले क्षेत्र के किसान अपने खेतों में पानी जाने से रोकने के लिए इन पाइपों को बंद कर देते हैं। पाइप बंद होते ही ऊपरी क्षेत्र के खेतों में जलभराव की स्थिति बन जाती है और लगातार बारिश के कारण फसलें पूरी तरह खराब हो जाती हैं।</p>
<p> पिछले तीन वर्षों से यही स्थिति बनी हुई है, जिससे हजारों बीघा फसल हर साल बर्बाद हो रही है। किसानों का आरोप है कि शिकायतों के बावजूद विभाग केवल औपचारिक कार्रवाई करता है और मौके पर जाकर स्थिति देखकर लौट जाता है। इससे ऐसे लोगों का हौसला बढ़ता जा रहा है और पाइप बंद करने की घटनाएं बढ़ती जा रही हैं। ग्रामीणों ने मांग की है कि आगामी बरसात से पहले ही ऐसे लोगों को चिन्हित कर पाबंद किया जाए तथा पाइपलाइन व्यवस्था को सुचारू रखा जाए, ताकि किसानों की मेहनत और लाखों की फसल बर्बाद होने से बच सके।</p>
<p><strong>अधिकारी का कहना है </strong><br />क्षेत्र में इस तरह पानी निकासी के पाइप को बन्द करने वाले किसानों को समय से पहले ही पाबंद करवाया जाएगा। फिर भी किसी व्यक्ति ने पाइप बन्द किया, तो उसी समय पुलिस साथ लेकर बंद पाइप को खुलवाया जाएगा। संबंधित व्यक्ति पर कार्यवाही अमल में लाई जाएगी।<br /><strong>- हरिराम मीणा, अधिशाषी अभियंता, सार्वजनिक निर्माण विभाग, नैनवां </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बूंदी</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 11 Jun 2026 14:38:39 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>एमबीएस अस्पताल में जलभराव बना खतरा, मरीजों को मुख्य रास्ते पर  फैले गंदे पानी से होकर गुजरना पड़ रहा</title>
                                    <description><![CDATA[पुराने निकासी मार्गों की मरम्मत नहीं होने से बारिश या सीवरेज का पानी जमा हो जाता है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/waterlogging-at-mbs-hospital-poses-a-threat--patients-have-to-wade-through-dirty-water-on-the-main-pathway/article-142047"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/(1200-x-600-px)-(1)10.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। हाडौती के सबसे बडे एमबीएस परिसर में सीवरेज का गंदा पानी जमा होने से मरीजों और तीमारदारों को काफी परेशानी हो रही है। जानकारी के अनुसार, यह समस्या खराब जल निकासी व्यवस्था, अवरुद्ध नालियों और सीवरेज चैम्बर के ओवर फ्लो के कारण उत्पन्न हुई है। दूषित सीवरेज के पानी में हानिकारक कीटाणु,बैक्टीरिया और औषधीय अवशेष मौजूद होते हैं, जो संक्रमण फैलने का बड़ा कारण बन सकते हैं। अस्पताल में भर्ती कमजोर रोगियों के लिए यह स्थिति और भी खतरनाक मानी जा रही है। लोगों और मरीजों के परिजनों का कहना है कि ओपीडी के बाहर और वार्डों के रास्तों में पानी भरे रहने से स्ट्रेचर और व्हीलचेयर ले जाना मुश्किल हो गया है। मुख्य रास्ते पर ही फैले गंदे पानी से होकर गुजरना पड़ता है, जिससे अस्पताल की स्वच्छता व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।</p>
<p><strong>50 से अधिक बैड संख्या वाले अस्पतालों में प्लांट की जरूरत</strong><br />स्वास्थ्य नियमों के तहत अस्पतालों में सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट होना अनिवार्य है, ताकि गंदे पानी को शुद्ध किए बिना खुले में न छोड़ा जाए। फिलहाल अस्पताल प्रशासन की ओर से इस समस्या के स्थायी समाधान को लेकर कोई स्पष्ट बयान सामने नहीं आया है। हालांकि मरीजों और नागरिकों ने मांग की है कि जल्द से जल्द जल निकासी की व्यवस्था दुरुस्त की जाए और सीवरेज के पानी से होने वाले संक्रमण के खतरे को रोका जाए।वर्तमान में कोटा एमबीबीएस के नई बिल्डिंग में संचालित लीफटो की क्या स्थिति है अस्पतालों में एसटीपी की अनिवार्यता मुख्य रूप से जल (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1974 और पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के अंतर्गत आती है। उढउइ (केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के दिशानिदेर्शों के अनुसार, सभी अस्पतालों को उनके अपशिष्ट जल (सीवरेज) को बाहर छोड़ने से पहले उपचारित करना अनिवार्य है। इसमें बायो-मेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स का पालन करना भी शामिल है।</p>
<p><strong>बेसमेन्ट में सीवरेज का पानी</strong><br />अभी हाल ही में बने आईपीडी भवन के बेसमेंट पार्किंग के लिफ्ट एरिया में भरा हुआ पानी सडा़ंध मार रहा था। सवाल यह है कि हाल ही में तैयार हुए भवनों में यह हाल है तो जब यह इमारतें पुरानी होगीं तब क्या होगा।जानकारों के अनुसार, एमबीएस में सीवरेज से जुड़ा बुनियादी ढांचा पुराना हो चुका है। ऐसे में परिसर में नये भवन भी बन गये है जिससे इन की क्षमता कम  पड़ती जा रही है । वहीं पुराने निकासी मार्गों की पूरी मरम्मत नहीं की जाती, जिससे बारिश या सीवरेज का पानी जमा हो जाता है।</p>
<p><strong>अटी पडी गंदगी</strong><br />करीब महीने भर से जयपुर फुट और आक्सीजन स्टोर रूम वाली सड़क पर भी सीवरेज का पाईप  टूटा हुआ है जिससे यहां सड़क पर  गंदगी फैल गयी है। बडी बात यह है कि यह रास्ता रेजीडेन्ट हॉस्टल के साथ एएनएम जीएनएम सेन्टर के साथ मॉर्चरी की और जाने वाले एक मात्र रास्ता है ।</p>
<p>ओपीडी और नयी इमरजेन्सी के बाहर बरसात का पानी भरा हुआ है। यह मार्ग जेके लोन व एमबीएस के बीच मुख्य सडक पर होने से समस्या का कारण बना हुआ है। यहां एक और लेबोरेट?री के कारण दिनभर लोगों की भीड़ रहती है ऐसे में वहीं दूसरी और गाड़ियां खड़ी रहने के कारण रास्ता संकरा रहता है उपर से यहां जमा पानी के कारण पैदल चलना भी दुश्वार हो गया है।<br /><strong>- दुष्यंत कुमार सुमन, तीमारदार</strong></p>
<p>आज ही हमने जहां पर भी पानी और गंदगी की जानकारी मिली वहां पर स्टाफ को काम पर लगाया है। बडी़ समस्या पुरानी लाईनोें से है एसटीपी प्लांट लगने तक व्यवस्था निगम को कहकर करवा रहे है।<br /><strong>- डॉ. कर्नेश गोयल, उपअध्यक्ष एमबीएस हॉस्पिटल कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 05 Feb 2026 15:34:10 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>सिंचाई के दौरान खेतों के रास्ते में भरा पानी, किसानों को हो रही परेशानी</title>
                                    <description><![CDATA[इस रास्ते पर गत वर्ष कराया गया कंक्रीट कार्य पहली ही बरसात में पूरी तरह खराब हो गया।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/waterlogging-on-the-road-leading-to-the-fields-during-irrigation-causes-problems-for-farmers/article-141904"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/1200-x-600-px)7.png" alt=""></a><br /><p>अरण्डखेडा। अरण्डखेडा पंचायत के घना तलाई से बंधा की ओर खेतों पर जाने वाले रास्ते में सिंचाई के दौरान खेतों का पानी भर जाने से किसानों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। रास्ता अवरुद्ध होने के कारण किसानों को कृषि कार्य के लिए खेतों तक पहुंचने में करीब 10 किलोमीटर का अतिरिक्त चक्कर लगाना पड़ रहा है। स्थानीय किसानों ने बताया कि इसी रास्ते पर गत वर्ष पंचायत प्रशासन द्वारा मनरेगा योजना के तहत ग्रेवल सड़क पर नाममात्र का कंक्रीट कार्य कराया गया था, जो ऊंट के मुंह में जीरे के समान साबित हुआ। पहली ही बरसात में यह रास्ता पूरी तरह खराब हो गया और वर्तमान में खेतों का पानी भर जाने से रास्ता पूरी तरह बंद हो चुका है।</p>
<p><strong>खेती-बाड़ी के कार्य हो रहे प्रभावित</strong><br />किसानों का कहना है कि पंचायत द्वारा किया गया कंक्रीट ग्रेवल कार्य गुणवत्ताहीन था, जिससे समस्या और अधिक बढ़ गई है। मार्ग बंद होने से खेती-बाड़ी के कार्य प्रभावित हो रहे हैं और किसानों को समय व धन दोनों की अतिरिक्त हानि उठानी पड़ रही है। ग्रामीणों ने प्रशासन से शीघ्र समाधान की मांग की है, जिससे किसानों को खेतों तक आवागमन में सुविधा मिल सके।</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />उक्त रास्ते में पूर्व में कार्य कराया गया था, जिसका भुगतान अभी लंबित है। भुगतान की प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद रास्ते का दुबारा निर्माण कार्य कराया जाएगा। ताकि किसानों को राहत मिल सके।<br /><strong>- हिमांशु सिंह, ग्राम विकास अधिकारी</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 04 Feb 2026 14:18:33 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>लोगों की परेशानी : निकासी के अभाव में जलभराव से बस स्टैंड मार्ग बना तालाब ,मकानों को नुकसान का खतरा</title>
                                    <description><![CDATA[दो साल से यह समस्या लाल बहादुर शास्त्री बस स्टैंड के पास स्थित कॉलोनी में  बनी हुई है।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/problems-of-the-people--in-the-absence-of-drainage--the-bus-stand-road-has-become-a-pond-due-to-waterlogging--there-is-a-danger-of-damage-to-the-houses/article-141675"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/(1200-x-600-px)-(3)2.png" alt=""></a><br /><p>बपावरकलां। बपावरकलां के लाल बहादुर शास्त्री बस स्टैंड के पास स्थित कॉलोनी में निकासी की व्यवस्था नहीं होने के कारण पिछले दो वर्षों से लगातार जलभराव की गंभीर समस्या बनी हुई है। भरी हुई नालियों और गंदे पानी के बीच से होकर कॉलोनी वासियों, दुकानदारों एवं राहगीरों को निकलना पड़ रहा है। जिससे आमजन को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।</p>
<p>ग्रामीणों का कहना है कि लाल बहादुर शास्त्री बस स्टैंड आने-जाने का यह प्रमुख मार्ग है। लेकिन यहां तालाब जैसी स्थिति बनी रहती है। बस स्टैंड स्थित सुलभ शौचालय की ट्यूबवेल लगातार चलने तथा कॉलोनी के मकानों से निकलने वाला गंदा पानी गलियों में भर जाने से हालात और बिगड़ गए हैं। नालियों की समुचित निकासी नहीं होने के कारण पूरे मोहल्ले में पानी भरा रहता है।</p>
<p>मोहल्ले वासियों का कहना है कि लंबे समय से पानी भरे रहने के कारण उनके मकानों को नुकसान पहुंचने का खतरा बना हुआ है। पास ही स्थित ग्राम पंचायत की करोड़ों रुपये की संपत्ति महाराणा प्रताप सामुदायिक भवन भी जलभराव की चपेट में आ गया है। पानी भरने से भवन की उपयोगिता लगभग समाप्त हो गई है। जहां पहले सांस्कृतिक कार्यक्रम, सामाजिक आयोजन और शादी-विवाह होते थे, वहीं अब भवन बदहाली का शिकार हो गया है। मजबूरी में ग्रामीणों को शादी-विवाह के लिए महंगे रिसोर्ट बुक करने पड़ रहे हैं।</p>
<p><strong>जनप्रतिनिधियों को कई बार करवा चुके हैं अवगत </strong><br />मोहल्लेवासी मोहन एवं हेमंत कुमार शर्मा ने बताया कि पूरे क्षेत्र की नालियों के पानी की निकासी की कोई व्यवस्था ग्राम पंचायत द्वारा नहीं की गई है। इस समस्या से जनप्रतिनिधियों को कई बार अवगत कराया जा चुका है। वहीं तेज सिंह राजपूत ने बताया कि सामुदायिक भवन के सामने ऊंचा सीसी रोड बना हुआ है, जिससे बरसात के मौसम में स्थिति और अधिक भयावह हो सकती है।</p>
<p>यह समस्या लगातार दो वर्षों से बनी हुई है। सभी जनप्रतिनिधियों को ज्ञापन दिए जा चुके हैं। यहां तक कि पंचायत राज मंत्री मदन दिलावर को भी समस्या से अवगत कराया गया। लेकिन अब तक कोई समाधान नहीं हुआ। चुनाव के समय बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं। लेकिन बाद में कोई सुध नहीं लेता।<br /><strong>- केशव सोनी, दुकानदार</strong></p>
<p>पानी की निकासी नहीं होने के कारण यह समस्या उत्पन्न हुई है और जल्द ही इसका समाधान करने का प्रयास किया जाएगा। <br /><strong>- मुरलीधर वैष्णव, ग्राम विकास अधिकारी </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 02 Feb 2026 16:16:25 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>किराड़ी में जलभराव के लिए 'आप' जिम्मेदार: 11 वर्षो में नहीं बनाई सीवर व्यवस्था, भाजपा मंत्री ने केजरीवाल पर साधा निशाना</title>
                                    <description><![CDATA[पीडब्ल्यूडी मंत्री प्रवेश सिंह ने किराड़ी जलभराव के लिए पूर्व आप सरकार को जिम्मेदार ठहराया, कहा वर्षों तक सीवर और ड्रेनेज नहीं बने, अब परियोजनाएं तेज़ी से पूरी होंगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/aap-is-responsible-for-waterlogging-in-kirari-sewer-system-has/article-140505"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/1200-x-600-px)-(1200-x-600-px)-(2)44.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। दिल्ली के लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) मंत्री प्रवेश साहिब सिंह ने किराड़ी विधानसभा क्षेत्र में लगातार हो रहे जलभराव को लेकर पूर्ववर्ती आम आदमी पार्टी (आप) सरकार को जिम्मेदार ठहराते हुये आरोप लगाया कि पिछले 11 वर्षों में इलाके में न तो सीवर व्यवस्था बनाई गई और न ही समुचित जल निकासी प्रणाली विकसित किया गया।</p>
<p>प्रवेश सिंह ने संवाददाता सम्मेलन में गुरूवार को कहा कि पिछले एक सप्ताह से किराड़ी में जलभराव के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। किराड़ी की कॉलोनियों में नालियों और सीवर का पानी भरने की समस्या बीते 10 वर्षों से लगातार सामने आती रही है, जिसकी मीडिया रिपोर्ट मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि जब अरविंद केजरीवाल मुख्यमंत्री बने थे, तब शर्मा कॉलोनी जैसे इलाकों में जलभराव नहीं होता था, लेकिन वर्ष 2022 तक वहां नालियों का पानी जमा होने लगा। शर्मा कॉलोनी एक निचले क्षेत्र में स्थित है और किराड़ी विधानसभा क्षेत्र में लगभग 10 लाख की आबादी रहती है। यह कॉलोनी वर्ष 2000 से पहले विकसित हुई थी, लेकिन कांग्रेस और आप, दोनों ही सरकारों ने यहां सीवर लाइन बिछाने का कोई ठोस काम नहीं किया।</p>
<p>उन्होंने आरोप लगाया कि वर्षा जल और सीवर के पानी की निकासी के लिए उचित आउटलेट न होने के कारण निचले इलाकों में जलभराव होता है। उन्होंने दावा किया कि आप सरकार ने अपने कार्यकाल में किराड़ी में सीवर से जुड़े कार्यों पर मात्र 43 लाख रुपये खर्च किए। इसके आगे उन्होंने बताया कि दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) ने वर्ष 2020 में 100 करोड़ रुपये की लागत से एक ड्रेनेज परियोजना की योजना बनाई थी, जिस पर अब काम शुरू हो चुका है। इसके बाद दिल्ली जल बोर्ड ने किराड़ी सहित 114 अनधिकृत कॉलोनियों में 480 करोड़ रुपये की लागत से सीवर लाइन परियोजनाएं शुरू कीं, लेकिन सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट से कनेक्टिविटी की योजना नहीं बनाई गई। सीवर का यह कार्य दिसंबर 2024 तक पूरा होना था, लेकिन भुगतान न होने के कारण ठेकेदारों ने काम रोक दिया। उन्होंने कहा हमारी सरकार आने के बाद काम दोबारा शुरू हुआ है और इसे जून 2026 तक पूरा कर लिया जाएगा।</p>
<p>पीडब्ल्यूडी मंत्री ने बताया कि गंदे पानी को रोहिणी सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट तक पहुंचाने के लिए तीन सीवेज पंपिंग स्टेशन बनाए जा रहे हैं। इसके अलावा सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग द्वारा 220 करोड़ रुपये की लागत से 4.5 किलोमीटर लंबा नया नाला बनाया जा रहा है, जिसे डेढ़ साल में पूरा किया जाएगा। उन्होंने बताया कि किराड़ी में जमीन की भराई कर लेवल ऊंचा किया जा रहा है और सीवर लाइनें जमीन के स्तर से ऊपर बिछाई जा रही हैं। उन्होंने दावा किया कि छह महीने के भीतर किराड़ी में सीवर ओवरफ्लो की समस्या नहीं दिखेगी।</p>
<p>उन्होंने कहा कि देओली, बदरपुर, नजफगढ़ और तुगलकाबाद में भी सीवर नेटवर्क परियोजनाएं शुरू की गई हैं। उन्होंने आप पार्टी को चुनौती देते हुए पूछा कि क्या उसके शासनकाल में इन इलाकों में कोई सीवर नेटवर्क, ड्रेनेज सिस्टम या ट्रीटमेंट प्लांट बनाया गया था।</p>
<p>प्रवेश सिंह ने बताया कि किराड़ी से वर्षा जल की निकासी के लिए 112 करोड़ रुपये के अतिरिक्त कार्य भी चल रहे हैं, जबकि शर्मा कॉलोनी में ड्रेनेज का काम सांसद निधि से शुरू किया गया है। उल्लेखनीय है कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने बुधवार को एक्स पर किराड़ी की स्थिति को लेकर टिप्पणी करते हुए आरोप लगाया था आज हर आम भारतीय की जिंदगी नर्क की यातना बन गयी है। देश में लालच की महामारी फैल चुकी है, शहरी सडऩ जिसका सबसे डरावना चेहरा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 22 Jan 2026 17:06:13 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>कापरेन में बदलेगा ड्रेन का स्वरूप, 19 करोड़ की लागत से होगा पक्का निर्माण, मिलेगी जलभराव से राहत</title>
                                    <description><![CDATA[पीडब्ल्यूडी ने पुनर्निर्माण का प्रस्ताव राज्य सरकार को भेज दिया है।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/drain-in-kapren-to-be-revamped--permanent-construction-to-cost-rs-19-crore--providing-relief-from-waterlogging/article-131981"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-11/111-(2)8.png" alt=""></a><br /><p>कापरेन। नगरवासियों के लिए राहतभरी खबर है। कस्बे के बीच से गुजरने वाली मुख्य ड्रेन के पक्के निर्माण को मंजूरी मिल गई है। राज्य सरकार की बजट घोषणा के तहत इस कार्य के लिए 19 करोड़ रुपए स्वीकृत किए गए हैं। नगरपालिका को कार्यकारी एजेंसी बनाया गया है। पालिका प्रशासन ने टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी है, जो 12 नवंबर को खोले जाएंगे। कार्य की समयावधि 18 माह निर्धारित की गई है। पालिका ईओ प्रवीण कुमार शर्मा ने बताया कि शंकर कॉलोनी से लेकर जोस्या खेड़ा की पुलिया तक ड्रेन का पक्का निर्माण किया जाएगा। ड्रेन की खुदाई व गहरीकरण से वर्षा ऋतु में जलभराव की समस्या समाप्त होगी। बरसात में खेतों व छोटे-बड़े नालों का पानी इसी ड्रेन से होकर निकलता है, जिससे तेजाजी मेला ग्राउंड, अस्पताल और शक्ति चौराहे पर जलभराव हो जाता था। अब नगरवासियों को इस परेशानी से राहत मिलेगी और गंदगी की स्थिति में भी सुधार होगा।</p>
<p><strong>सौंदर्यीकरण के साथ बनेगा फुटपाथ</strong><br />निर्माण कार्य के दौरान ड्रेन के दोनों ओर सुरक्षा दीवार बनाई जाएगी। जहां पर्याप्त स्थान रहेगा, वहां फुटपाथ बनाया जाएगा। सौंदर्यीकरण के तहत पौधरोपण और लाइटिंग की भी व्यवस्था होगी। इससे कस्बे का स्वरूप और आकर्षक बनेगा।</p>
<p><strong>शक्ति चौराहे की पुलिया का पुनर्निर्माण प्रस्तावित</strong><br />हाल ही में आई बाढ़ में शक्ति चौराहे की पुलिया बह जाने से आवागमन बाधित हो गया था। इस पर पीडब्ल्यूडी ने पुनर्निर्माण का प्रस्ताव राज्य सरकार को भेज दिया है। स्वीकृति मिलते ही निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा।</p>
<p>मुख्य ड्रेन के पक्के निर्माण की बजट स्वीकृति मिल गई है, तकनीकी प्रक्रिया पूरी होते ही ड्रेन निर्माण शुरू करा दिया जाएगा। जहां जगह रहेगी वहां फुटपाथ भी प्रस्तावित है। साथ ही सौंदर्यीकरण में पौधरोपण व लाइटिंग भी शामिल है।शक्ति चौराहे की टूटी पुलिया को लेकर भी डेढ़ करोड़ का प्रस्ताव पीडब्ल्यूडी ने भेज दिया है। जैसे ही बजट स्वीकृत होगा, निर्माण कराया जाएगा। फिलहाल मुख्य ड्रेन का काम प्राथमिकता में है।<br /><strong>- प्रवीण कुमार शर्मा,ईओ नगरपालिका कापरेन।</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बूंदी</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 10 Nov 2025 16:51:21 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कोटा उत्तर वार्ड 45 -गंदगी, जलभराव और आधारभूत सुविधाओं की कमी से जूझ रहे हरिजन बस्ती के निवासी </title>
                                    <description><![CDATA[वार्ड में सामुदायिक भवन का अभाव, पार्क केवल औपचारिकता के लिए।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/kota-north-ward-45---residents-of-harijan-basti-struggling-with-filth--waterlogging--and-lack-of-basic-amenities/article-130492"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-10/y-of-news-(1)18.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। नगर निगम क्षेत्र के वार्ड नंबर 45 की स्थिति शहर की मूलभूत सुविधाओं की हकीकत बयां करती है। वार्ड के कई इलाकों में नागरिकों को अब भी गंदगी, जलभराव और आधारभूत सुविधाओं की कमी से दो-चार होना पड़ रहा है। प्रशासनिक दावे और योजनाएं कागजों पर तो नजर आती हैं, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और कहानी बयां करती है। वार्ड क्षेत्र में बने पार्क में झूले व अन्य सुविधाएं जोड़ी जाएं ताकि बच्चों और बुजुर्गों दोनों के लिए यह क्षेत्र उपयोगी बन सके। शहर की तरक्की का आईना उसके वार्ड होते हैं, लेकिन वार्ड 45 की यह तस्वीर सवाल खड़े करती है कि क्या विकास केवल शहरी केंद्रों तक सीमित रह गया है?</p>
<p><strong>वार्ड का एरिया</strong><br />आर.ई.टाईप-3 रेलवे कॉलोनी, पुरानी रेल्वे कॉलोनी वर्कशॉप, जे.पी. कॉलोनी, उड़िया बस्ती, हरिजन बस्ती, रेलवे प्लेट फार्म नं. 4 के सामने का क्षेत्र शामिल है।</p>
<p><strong>हरिजन बस्ती में गंदे पानी का साम्राज्य</strong><br />वार्ड में आने वाली हरिजन बस्ती में खाली पड़ी जगहों पर सीवरेज का गंदा पानी लंबे समय से जमा है। यह पानी सड़कों पर फैलकर बदबू और मच्छरों का अड्डा बन चुका है। बरसात के दिनों में स्थिति और भयावह हो जाती है। कई बार शिकायतें करने के बावजूद न तो सीवरेज की सफाई होती है और न ही निकासी की स्थायी व्यवस्था की गई है।<br /><strong>- जितेन्द्र पटोना</strong></p>
<p><strong>जेपी कॉलोनी में टूटी नालियों के पानी की समस्या</strong><br />वार्ड के दूसरे हिस्से में आने वाली जेपी कॉलोनी भी वर्षों पुरानी नालियों के जर्जर होने से जूझ रही है। जगह-जगह नालियां टूट चुकी हैं, जिनसे गंदा पानी सड़कों पर बहता रहता है। इससे स्थानीय लोगों को बदबू और बीमारी का खतरा बना रहता है। इसके अलावा कॉलोनी में जलापूर्ति भी बड़ी समस्या है। यहां पानी बेहद कम दबाव से आता है, जिससे कई घरों तक पर्याप्त पानी नहीं पहुंच पाता।<br /><strong>- बाबू लाल</strong></p>
<p><strong>सामुदायिक भवन का अभाव</strong><br />वार्ड में नगर निगम द्वारा पार्क तो बना दिया गया, लेकिन उसमें झूले और अन्य बच्चों के खेल उपकरण नहीं लगाए गए। इससे पार्क केवल औपचारिकता बनकर रह गया है। वहीं वार्ड में सामुदायिक भवन का भी अभाव है, जिससे सामाजिक कार्यक्रमों, बैठकों और आयोजनों के लिए लोगों को निजी स्थलों का सहारा लेना पड़ता है।<br /><strong>- लक्ष्मण</strong></p>
<p><strong>स्थानीयों की उम्मीदें प्रशासन से जुड़ी</strong><br />वार्डवासियों ने प्रशासन से मांग की है कि जल्द से जल्द सीवरेज व्यवस्था सुधारी जाए, टूटी नालियों का नवीनीकरण किया जाए और जलापूर्ति को सुचारू बनाया जाए। ताकि वार्डवासियों को मूलभूत सुविधाओं का लाभ मिल सके।<br /><strong>- सुरेश कुमार</strong></p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />वार्ड क्षेत्र में हरिजन बस्ती के निवासियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध करवाने के उद्देश्य से उन्हें रहने के लिए नई जगह आवंटित की गई है, लेकिन अधिकांश परिवार वहां जाने के लिए तैयार नहीं हैं। ऐसे में स्थिति हमारे नियंत्रण से बाहर है। वहीं, जेपी कॉलोनी में नियमित रूप से सुबह-शाम सफाई व्यवस्था सुचारू रूप से की जाती है। पानी की बात करें तो सुबह के समय अधिकांश लोग मोटर लगाकर पानी भरते हैं, जिससे निचले क्षेत्रों में जल आपूर्ति धीमी हो जाती है। इस दिशा में नागरिकों को भी थोड़ी जागरूकता और सहयोग दिखाने की आवश्यकता है।<br /><strong>- हिना बानो, पार्षद</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 25 Oct 2025 15:00:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कोटा उत्तर वार्ड 29 - सफाई व्यवस्था ठप, टूटे डिवाइडर से राहगीर परेशान, बारिश में जलभराव से बढ़ी दिक्कतें</title>
                                    <description><![CDATA[ऊंचे ब्रेकर बने होने से दोपहिया वाहन चालक अक्सर इन पर फिसल जाते हैं। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/kota-north-ward-29---sanitation-system-stalled--broken-dividers-cause-problems-for-pedestrians--and-waterlogging-during-rains-increases-difficulties/article-129497"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-10/copy-of-news-(1)35.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर का वार्ड नंबर 29 अव्यवस्थाओं का शिकार बना हुआ है। क्षेत्र में सफाई व्यवस्था पूरी तरह से पटरी से उतर चुकी है। वार्ड के कई हिस्सों में नालियों की सफाई महीनों से नहीं हुई, जिसके चलते गंदगी का अंबार लगा हुआ है। जगह-जगह भरे पड़े खाली प्लॉट्स में कचरा और गंदा पानी जमा होने से बदबू फैल रही है और मच्छरों का प्रकोप बढ़ गया है। रहवासी रोजाना इस गंदगी से जूझ रहे हैं, लेकिन शिकायतों के बावजूद स्थिति जस की तस बनी हुई है। सफाईकर्मी अनियमित रूप से आते हैं, कई बार तो हफ्तों तक कचरा नहीं उठाया जाता। बारिश के दौरान यह गंदगी और परेशानी का सबब बन जाती है। वार्ड के कई इलाकों में सड़कें उखड़ी हुई हैं और जलभराव से लोगों का निकलना मुश्किल हो जाता है। बरसात में पानी सड़कों पर जमा हो जाता है जिससे आवागमन बाधित होता है और वाहन चालकों को भी काफी परेशानी उठानी पड़ती है।</p>
<p><strong>रहवासियों की मांग</strong><br />- नियमित सफाई और कचरा संग्रहण की व्यवस्था<br />- टूटी नालियों की मरम्मत और जलभराव से राहत<br />- पार्क का निर्माण व ऊंचे ब्रेकरों में सुधार</p>
<p><strong>वार्ड का एरिया</strong><br />मेनाल रेजीडेन्सी, गणपति नगर, गणेशपाल सम्पूर्ण, मां त्रिकुटा मंदिर, नान्ता संपूर्ण ग्राम, वीर दुर्गादास स्टेडियम, भैरव जी का मंदिर, तेजाजी का मन्दिर, नान्ता गढ़ , जैठीयों का मोहल्ला, सहकारी भवन, पार्श्वनाथ मल्टीस्टोरी, नेवालाल जी पेट्रोल पम्प, अग्रवाल मैरिज गार्डन, नयाखेड़ा ग्राम सम्पूर्ण, ईदगाह, वर्धमान कॉलोनी, ग्वारियों का मोहल्ल, कोली मोहल्ला तक का क्षेत्र शामिल है।<br /> <br /><strong>ऊंचे ब्रेकरों से परेशान रहवासी</strong><br />वार्ड का क्षेत्रफल बड़ा होने के बावजूद, कर्मचारियों और अधिकारियों की पर्याप्त नियुक्ति नहीं की गई है। इसी कारण वार्ड में सफाई व्यवस्था गंभीर रूप से प्रभावित है। साथ ही, पानी की समस्या भी लंबे समय से बनी हुई है। इन मुद्दों की जानकारी कई बार लिखित और मौखिक रूप से संबंधित अधिकारियों को दी जा चुकी है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। वार्ड में समस्याओं की कमी नहीं, पर समाधान की दिशा में प्रयास नजर नहीं आते।<br /><strong>- कुसुम, पार्षद</strong></p>
<p>वार्ड क्षेत्र में नालियों की हालत सबसे ज्यादा खराब है। कई नालियां टूटी हुई हैं, जिससे गंदा पानी सड़कों पर बहता रहता है। वहीं, ऊंचे-ऊंचे ब्रेकर भी लोगों के लिए मुसीबत बन गए हैं। दोपहिया वाहन चालक अक्सर इन ब्रेकरों पर फिसल जाते हैं। प्रशासन से इनकी ऊंचाई कम करने और नालियों की मरम्मत कराने की मांग है।<br /><strong>- कैलाश सुमन, वार्डवासी</strong></p>
<p>वार्ड में एक और बड़ी समस्या पार्क के अभाव की है। बच्चों को खेलने और बुजुर्गों को टहलने के लिए कोई स्थान नहीं है। इससे क्षेत्र का वातावरण अस्वच्छ और नीरस बना हुआ है। वार्ड की जनसंख्या बढ़ने के बावजूद सुविधाएं नहीं बढ़ाई गईं।<br /><strong>- दुर्गाशंकर, वार्डवासी</strong></p>
<p>नगर निगम से उम्मीद लगाए बैठे हैं कि जल्द ही वार्ड में सफाई व्यवस्था दुरुस्त की जाए, नालियों की मरम्मत और जलनिकासी की समुचित व्यवस्था हो। यदि नियमित सफाई, कचरा निस्तारण और सड़कों की मरम्मत की जाए तो वार्ड की तस्वीर बदल सकती है।<br /><strong>- ललित, वार्डवासी</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 13 Oct 2025 14:17:41 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>कोटा उत्तर वार्ड 7 - वार्ड में नहीं है स्वास्थ्य केंद्र, सुरक्षा और सफाई पर भी उठ रहे सवाल</title>
                                    <description><![CDATA[बरसात में जलभराव वार्ड कि बड़ी समस्या।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/kota-north-ward-7---there-is-no-health-center-in-the-ward--questions-are-also-being-raised-on-security-and-cleanliness/article-125656"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-09/(630-x-400-px)2.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। कोटा उत्तर नगर निगम के वार्ड संख्या 7 में मूलभूत सुविधाओं के अभाव के चलते रहवासियों के लिए परेशानी का सबब बनी हुई है। वार्ड में करीब 1500 लोग रहते हैं, लेकिन मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। बरसात में जलभराव से लेकर स्वास्थ्य केंद्र और सामुदायिक भवन की कमी तक, लोगों को रोजमर्रा की जिंदगी में कई दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। चोरी की घटनाओं और सुरक्षा व्यवस्था की लापरवाही से लोगों में असुरक्षा की भावना बनी हुई है। वार्डवासियों का कहना हैं कि पार्षद जितने के बाद कभी उनके बीच नहीं आए और उनकी समस्याएं सुनने में रुचि नहीं दिखाते। बरसात में जलभराव बनता है बड़ी समस्या। वार्ड में विकास कार्यों के बावजूद यहां की जनता अभी भी सुविधाओं के लिए तरस रही है। स्थायी समाधान तभी संभव है जब प्रशासन और जनप्रतिनिधि मिलकर जमीनी स्तर पर काम करें और जनता के बीच आकर उनकी तकलीफों को गंभीरता से सुनें।</p>
<p><strong>वार्ड का एरिया</strong><br />बल्लभबाडी, हनुमान मंदिर, जैन दिवाकर स्कूल, मंदिर जैन श्वेताम्बर, गुरूद्वारा का क्षेत्र शामिल है</p>
<p><strong>स्वास्थ्य केंद्र और सामुदायिक भवन का अभाव</strong><br /> वार्ड में करीब 1500 लोग रहते हैं, लेकिन आज तक यहां कोई स्वास्थ्य केंद्र नहीं खोला गया। छोटी-सी बीमारी में भी लोगों को काफी दूर जाना पड़ता है। इसके अलावा सामुदायिक भवन न होने से सामाजिक व सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित करने में दिक्कत आती है।</p>
<p><strong>भर जाता है बारिश का पानी</strong><br />वार्ड निवासी ने बताया कि कचरा पॉइंट के बाद वाली गली में बारिश के पानी की निकासी की सुविधा नहीं है। पानी जमा होने पर लोगों का आवागमन मुश्किल हो जाता है। गंदगी और मच्छरों की वजह से बीमारियों का खतरा भी लगातार मंडराता रहता है।<br /><strong>- जगदीश, वार्डवासी</strong></p>
<p><strong>नहीं हो रही वार्ड में साफ-सफाई</strong><br />वार्डवासी बताते हैं कि आए दिन चोरी की घटनाएं सामने आती हैं, लेकिन पुलिस की ओर से कोई पुख्ता इंतजाम नहीं है। गश्त भी नियमित नहीं होती। दूसरी ओर सफाई व्यवस्था भी लचर है। लोगों का आरोप है कि सफाई ठेकेदार पार्षद की बात नहीं मानता और अपनी मनमानी करता है, जिससे वार्ड में गंदगी बनी रहती है।<br /><strong>- रामराज राठौर, वार्डवासी</strong></p>
<p><strong>पार्षद का कहना है</strong><br />वार्ड पार्षद का कहना है कि पार्क और नलों के लिए टेंडर हो चुके हैं और जल्द ही काम शुरू करवा दिया जाएगा। उन्होंने माना कि पुलिस प्रशासन की ओर से वार्ड में ध्यान नहीं दिया जा रहा है, लेकिन यह उनकी जिम्मेदारी के बाहर है। पार्षद ने दावा किया कि वार्ड में कई विकास कार्य पहले ही कराए गए हैं और आने वाले समय में और सुधार होंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 03 Sep 2025 16:07:34 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>लगातार तेज बरसात से दुकानों के तहखानों में पानी भरा, मुहाना मंडी में जलभराव की समस्या </title>
                                    <description><![CDATA[ एशिया की सबसे बड़ी मंडियों में से एक, जयपुर की ज्योतिबा फुले टर्मिनल मार्केट, मुहाना में हर साल की तरह इस बार भी बारिश ने व्यापारियों के लिए मुश्किलें खड़ी कर दी हैं]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/due-to-continuous-rapid-rains-waterlogging-problem-in-the-base/article-124522"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-08/1ne1ws-(1)70.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। एशिया की सबसे बड़ी मंडियों में से एक, जयपुर की ज्योतिबा फुले टर्मिनल मार्केट, मुहाना में हर साल की तरह इस बार भी बारिश ने व्यापारियों के लिए मुश्किलें खड़ी कर दी हैं। शनिवार को लगातार तेज बरसात से दुकानों के तहखानों में पानी भर गया है। व्यापारी अल सुबह से ही पंप लगाकर पानी निकलते रहे। कई व्यापारिक प्रतिष्ठानों के तहखानों (बेसमेंट) में दो-दो फीट तक पानी भर गया है, जिससे व्यापारी वर्ग में भारी रोष और भय व्याप्त है।</p>
<p>यह समस्या पूरे मॉनसून के दौरान बनी रहती है, और व्यापारी पंप लगाकर पानी निकालने को मजबूर हैं। जयपुर फल व सब्जी थोक विक्रेता संघ के अध्यक्ष योगेश तँवर ने बताया कि यह समस्या वर्षों पुरानी है। उन्होंने कहा कि "हम लंबे समय से मंडी प्रशासन से नालियों के पुनर्निर्माण की मांग करते आए हैं। यदि नालियों का पुनर्निर्माण किया जाए, तो प्रतिष्ठानों के तहखानों में पानी भरना बंद हो जाएगा।"</p>
<p>व्यापारियों का कहना है कि जलभराव के कारण उनकी दुकानों की नींव कमजोर हो रही है और इमारतें जर्जर अवस्था में पहुँच रही हैं। यह न केवल आर्थिक नुकसान का कारण बन रहा है, बल्कि मजदूरों, किसानों, व्यापारियों और कर्मचारियों के लिए भी एक बड़ा खतरा है। जयपुर फल व सब्जी थोक विक्रेता संघ ने इस गंभीर समस्या के बारे में आला अधिकारियों और प्रशासन को कई बार ज्ञापन देकर अवगत कराया है, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला है। व्यापारियों का आरोप है कि प्रशासन केवल फौरी कार्रवाई करता है, जबकि समस्या की जड़, यानी खराब ड्रेनेज व्यवस्था, को ठीक करने पर ध्यान नहीं दिया जाता। व्यापारियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इस समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकाला गया, तो भविष्य में कोई बड़ी दुर्घटना हो सकती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 23 Aug 2025 17:31:51 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>हो सकता है लार्वा विस्फोट, डेंगू का खतरा </title>
                                    <description><![CDATA[अस्तपालों की ओपीडी मौसमी बीमारियों को लेकर डेढ़ गुना बढ़ गई है। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/there-can-be-larva-explosion--risk-of-dengue/article-123463"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-08/1ne1ws-(1)30.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। कोटा क्षेत्र संक्रमण की दहलीज पर खड़ा है। क्षेत्र की सड़कों से लेकर कॉलोनियों के हर कोनों तक, जहां जमीन खाली है और बारिश की बूंदे जम गई या जलभराव है, वहां डेंगू के लार्वा पनपने का खतरा भी बढ़ने लगा है। क्षेत्र के कई खाली भूखंड लार्वा हॉटस्पॉट बन रहे है। क्षेत्र की महावीर नगर, दक्षिण विहार, बलिता रोड, संगोद रोड, रामनगर, छावनी व कृष्णा नगर, सुन्दर नगर, कैलाश विहार, चंचल विहार समेत क्षेत्र की कई ऐसी कॉलोनियां है जिनमें खाली पड़े भूखंडों में गंदगी व जलभराव हो रखा है। ऐसे भूखंडों में लार्वा बनने के साथ मच्छर भी तेजी से पनप रहे हैं। डॉ. सुधीर उपाध्याय ने बताया कि शहर में खाली पड़े भूखण्डों, क्षतिग्रस्त सड़कों पर बारिश का जमा पानी, छतों पर रखे सामान में इकट्ठा हुआ पानी में भी लार्वा पनप जाता है। जिससे मलेरिया व डेंगू के मच्छर पनपने का खतरा रहता है। यह कम पानी में भी पनप जाता है। समय रहते इन नियंत्रित करना जरूरी है। अस्तपालों की ओपीडी मौसमी बीमारियों को लेकर डेढ़ गुना बढ़ गई है। बता दें कि शहर में मौसमी बीमारियां डेंगू, मलेरिया, चिगनगुनिया, स्क्रबटायफस की रोकथाम के लिए संबंधित कर्मचारियों को प्रशिक्षण भी दिया गया था।</p>
<p><strong>ऐसे होता है लार्वा विस्फोट</strong><br />बारिश के बाद खाली भूखंडों, गड्ढों या अनुपयोगी वस्तुओं में पानी जमा हो जाता है। जमा हुआ पानी एडीज एजिप्टाई मच्छर पनपने का खतरा बना रहता है। इनसे डेंगू, चिकनगुनिया और जीका वायरस फैलता है। उसके सपंर्क में आने से बीमारी बढ़ने की संभावना ज्यादा रहती है।</p>
<p><strong>संभावित खतरे</strong><br />- लार्वा विस्फोट से मच्छरों की संख्या में तेजी से वृद्धि<br />- एक संक्रमित मच्छर सैकड़ों को कर सकता है संक्रमित<br />- क्षेत्र में डेंगू का प्रकोप बढ़ने का खतरा भी बना रहता है</p>
<p><strong>प्रशासन की आमजन को सलाह</strong><br />- अपने खाली प्लॉट की तुरंत सफाई करें<br />- घर के आसपास पानी न जमने दें<br />- टंकी, कूलर, गमले की नियमित सफाई करें<br />- फुल बाजू कपड़े पहनें, मच्छरदानी का उपयोग करें<br />- बुखार, शरीर दर्द हो तो डॉक्टर से तुरंत संपर्क करें</p>
<p><strong>खाली पड़े प्लॉटों की नहीं हो रही सार-संभाल</strong><br />कई कॉलोनियों में कई प्लॉट खाली है तथा बरसात के दिनों में प्लॉटों में जमा गंदगी व बारिश के पानी से जलभराव हो गया है। लोग अपने प्लॉटों की सार-संभाल नहीं करने से वहां जमा पानी व गंदगी से लार्वा पनपने का खतरा भी बढ़ गया है। वहां निवास कर रहे लोगों में डेंगू व मलेरिया होने का डर भी सता रहा है।<br /><strong>- मनीश उपाध्याय निवासी आकाशवाणी कॉलोनी </strong></p>
<p><strong>स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहें</strong><br />बरसात रूकने के बाद जहां पानी ठहर गया है या जमा हो गया है वहां लार्वा पनपने का खतरा बना रहता है। डेंगू का मच्छर साफ ठहरने हुए कम पानी में भी पनप जाता है। इसके लिए घरों  में आस-पास एवं कंटेनरों में पानी 5 से 7 दिन से ज्यादा जमा न होने देना चाहिए। कूलर, पक्षियों के परिंडे, फ्रिज के पीछे की ट्रे, गमले की ट्रे एवं अन्य पानी के पात्रों की सप्ताह में एक बार रगड़ कर सफाई अवश्य करें। पानी से भरे बर्तनों को ढक कर रखे, छत पर पड़े कबाड़, टीन, कनस्तर, टायर, मटके डिब्बे बोतल को हटा देना चाहिए।<br /><strong>- डॉ. सुधीर उपाध्याय, चिकित्सक</strong></p>
<p>साउथ और नॉर्थ से संबंधित काम निगम के अधीन है। शहर में अभी फोगिंग का कार्य चल रहा है। सेक्रेटरी व स्टेट के आॅर्डर अनुसार फोगिंग का काम, नालियों में तेल डालना ये सभी कार्य नगर निगम करवाता है। नगर निगम हमें कॉलोनीवाइज प्लान देता है, जिसकी हम मॉनिटरिंग भी करते है। कोई पॉजिटिव मरीज आता है तो उससे संबंधित हम देखते है।<br /><strong>- डॉ. घनश्याम मीणा, डिप्टी सीएमएचओ, कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 13 Aug 2025 15:20:14 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>आयुर्वेद अस्पताल में बनी दीवारें भी टूटी, परिसर में भरा पानी</title>
                                    <description><![CDATA[जलभराव होेने से मच्छर पनप रहे हैं, संक्रमण होने का खतरा।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/the-walls-built-in-the-ayurveda-hospital-are-also-broken--the-campus-is-filled-with-water/article-122625"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-08/oer-(8).png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर के तलवटी में स्थित राजकीय आयुर्वेद, योग एवं प्राकृतिक चिकित्सालय  के परिसर में जगह-जगह पानी भरा हुआ है तथा जलभराव होने की स्थिति यहां आने वाले मरीजों को भी असुविधा हो रही है। डॉ. नित्यानंद शर्मा ने बताया कि अस्पताल परिसर में बनी दीवारें भी टूटी हुई है। जिसके कारण बरसात का सारा पानी परिसर में जमा हो गया है। वहीं परिसर के पीछे स्थित गेट भी टूटा हुआ जिसके कारण यहां लगाए गए पौधों को नुकसान पहुंच रहा हे।</p>
<p><strong>पुराना भवन जर्जर व क्षतिग्रस्त</strong><br />उन्होंने बताया कि राजकीय आयुर्वेद, योग एवं प्राकृतिक चिकित्सालय एकीकृत महाविद्यालय का पुराना भवन सवा दो लाख मासिक किराए पर लिया हुआ है। इस महाविद्यालय में अध्ययनरत विद्यार्थियों को बारिश में परेशानी बनी रहती हैं। विद्यार्थियों को आने जाने में भी परेशानी का सामना करना पड़ता है।</p>
<p><strong>महाविद्यालय का नवीन भवन तैयार</strong><br />महाविद्यालय का नवीन भवन तलवंडी स्थित जिला आयुर्वेद चिकित्सालय परिसर में आरएसआरडीसी ने तैयार किया है। विद्यार्थियों की परेशानी को देखते हुए, अस्पताल संबंद्ध प्राचार्य ने नवीन भवन में शिफ्ट करवाने या नवीन भवन में दस कमरें देने की मांग अजमेर स्थित मुख्यालय को पत्र के माध्यम से अवगत करवाया है।</p>
<p><strong>चिकित्सालय में जगह जगह भरा बारिश का गंदा पानी</strong><br />उन्होंने बताया कि यहां आने वाले मौसमी बीमारियों के चलते रोजाना सामान्य दिनों की अपेक्षा 250 से 300 लोग आ रहे हैं। बारिश होने से पेट दर्द, खुजली तथा वायरल फीवर के मरीजों की संख्या बढ़ी है।  मौसमी बीमारियों के चलते रोजाना सामान्य दिनों की अपेक्षा पेट दर्द, खुजली तथा वायरल फीवर के मरीजों की संख्या बढ़ी है।  अस्पताल की मुख्य सड़क पर जगह-जगह जलभराव की स्थिति बनी हुई है। जलभराव होेने की स्थिति में मच्छर भी पनप रहे हैं, संक्रमण होने का भी खतरा बना हुआ है। वहां लगे पेड़-पौधे भी डूब गए है।</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />आयुर्वेद चिकित्सालय परिसर में बने नए भवन के लिए आरएसआरडीसी से बात चल रही हैं। अगले सप्ताह तक शिफ्ट करने का विचार है। इस संबंध में कार्रवाई चल रही है।<br /><strong>- आनंद शर्मा, निदेशक, आयुर्विज्ञान  </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 04 Aug 2025 16:15:32 +0530</pubDate>
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