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                <title>Waterlogging - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>Waterlogging RSS Feed</description>
                
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                <title>वाराणसी में बाढ़ का खतरा! गंगा का जलस्तर चेतावनी बिंदु से ऊपर, बाढ़ राहत शिविरों में विस्थापित परिवारों को दी जा रही सुविधाएं</title>
                                    <description><![CDATA[वाराणसी में गंगा नदी का जलस्तर बढ़कर 70.28 मीटर पर पहुंच गया है और चेतावनी बिंदु को पार कर गया है। वरुणा नदी के तटवर्ती क्षेत्रों में जलभराव के कारण जिला प्रशासन अलर्ट पर है। प्रभावित परिवारों को राहत शिविरों में स्थानांतरित कर भोजन, पेयजल और अन्य आवश्यक सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं।  ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/flood-threat-in-varanasi-ganga-water-level-above-warning-point/article-164339"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-09/111200-x-600-px)-(4).png" alt=""></a><br /><p>वाराणसी। गंगा नदी का जलस्तर मंगलवार को वाराणसी में चेतावनी बिंदु को पार कर 70.28 मीटर पर पहुंच गया। केंद्रीय जल आयोग की रिपोर्ट के अनुसार नदी का जलस्तर 0.5 सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ रहा है। गंगा का चेतावनी स्तर 70.262 मीटर और खतरे का निशान 71.262 मीटर निर्धारित है। वाराणसी में गंगा का अब तक का उच्चतम बाढ़ स्तर (एचएफएल) 73.901 मीटर दर्ज किया गया है। </p>
<p>जलस्तर में लगातार हो रही वृद्धि और वरुणा नदी के तटवर्ती क्षेत्रों में जलभराव को देखते हुए जिला प्रशासन स्थिति पर लगातार नजर रख रहा है। जलभराव से प्रभावित कुछ परिवारों को एहतियातन पहले ही सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाकर बाढ़ राहत शिविरों में विस्थापित किया गया है। प्रशासन द्वारा प्रभावित परिवारों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए आवश्यक राहत एवं बचाव कार्य किए जा रहे हैं।</p>
<p>बाढ़ राहत शिविरों में प्रभावित परिवारों के लिए सुरक्षित आवासीय व्यवस्था के साथ आवश्यक मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। शिविरों में रह रहे लोगों को स्वच्छ एवं ताजा भोजन दिन में तीन बार उपलब्ध कराया जा रहा है। बच्चों और बुजुर्गों की विशेष आवश्यकताओं को देखते हुए आवश्यकतानुसार दूध और केला भी उपलब्ध कराया जा रहा है।</p>
<p>जिला प्रशासन द्वारा गंगा और वरुणा के जलस्तर के साथ संभावित बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति पर सतत निगरानी रखी जा रही है। संबंधित अधिकारी तटवर्ती और संवेदनशील क्षेत्रों का नियमित स्थलीय निरीक्षण कर रहे हैं तथा आवश्यकता के अनुसार नदी मार्ग से भी स्थिति का जायजा लिया जा रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 01 Sep 2026 13:20:47 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>करोड़ों के दावों के बीच मूलभूत सुविधाओं को तरसते वार्ड, बारिश में नाले बन रहे आफत</title>
                                    <description><![CDATA[नालों की सफाई नहीं होने से ब्रजराज कॉलोनी, मस्जिद चौक और नेहरू कॉलोनी में जलभराव, घरों तक पहुंच रहा गंदा पानी ।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/wards-deprived-of-basic-amenities-despite-claims-of-multi-crore-investments--drains-turn-into-a-menace-during-rains/article-164345"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-09/111200-x-600-px)-(11).png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर के चार वार्डों की ऑडिट में विकास के दावों और जमीनी हकीकत के बीच बड़ा अंतर सामने आया है। वार्ड क्षेत्र में रहने वाले लोग आज भी मूलभूत सुविधाओं के लिए परेशान हैं। कहीं नालों की सफाई नहीं होने से बारिश के दिनों में जलभराव की समस्या विकराल हो जाती है तो कहीं पार्क, डिस्पेंसरी और सामुदायिक भवन जैसी जरूरी सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं हैं। सफाई व्यवस्था की स्थिति भी कई इलाकों में संतोषजनक नहीं है।</p>
<p><strong>नाले जाम, बारिश में घरों तक पहुंचता है गंदा पानी</strong><br />वार्ड क्षेत्र की ब्रजराज कॉलोनी और नेहरू कॉलोनी में नालों की नियमित सफाई नहीं होने की समस्या सामने आई। क्षेत्रवासियों का कहना है कि बारिश के दौरान नालियां और नाले जाम हो जाते हैं। पानी की निकासी नहीं होने के कारण सड़कों पर गंदा पानी भर जाता है और कई बार यह पानी घरों तक पहुंच जाता है। जलभराव के कारण लोगों को आवाजाही में परेशानी होती है। लंबे समय से नालों की सफाई और स्थायी जल निकासी की मांग की जा रही है, लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है।</p>
<p><strong>पार्क, डिस्पेंसरी और सामुदायिक भवन की दरकार</strong><br />ऑडिट के दौरान कई क्षेत्रों में लोगों ने बताया कि वार्ड में बच्चों और बुजुर्गों के लिए पर्याप्त पार्क नहीं हैं। वहीं जरूरत के बावजूद डिस्पेंसरी और सामुदायिक भवन जैसी सुविधाएं भी कई जगह उपलब्ध नहीं हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि छोटी-छोटी समस्याओं के समाधान के लिए भी उन्हें जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। सफाई व्यवस्था को लेकर भी लोगों में नाराजगी है। जगह-जगह गंदगी और नियमित सफाई नहीं होने से परेशानी बढ़ रही है।</p>
<p><strong>करोड़ों के काम हुए तो नजर क्यों नहीं आते?</strong><br />क्षेत्रवासियों का कहना है कि जब वे समस्याओं को लेकर पार्षद से सवाल करते हैं तो जवाब मिलता है कि वार्ड में करोड़ों रुपए के विकास कार्य करवाए गए हैं। लोगों का सवाल है कि यदि इतने बड़े स्तर पर काम हुए हैं तो वे नजर क्यों नहीं आ रहे? उनका कहना है कि पार्षद का चुनाव इसलिए होता है कि वह अपने क्षेत्र की समस्याओं को समझे और प्राथमिकता के आधार पर उनका समाधान करवाए। लेकिन चुनाव जीतने के बाद कई बार जनप्रतिनिधियों का व्यवहार बदल जाता है और लोगों की शिकायतों पर अपेक्षित गंभीरता नहीं दिखाई देती।</p>
<p><strong>पूर्व पार्षद अनूप कुमार</strong><br />वार्ड में सामुदायिक भवन का अभाव है। हालांकि क्षेत्र में सुलभ कॉम्पलेक्स का निर्माण करवाया गया है। उन्होंने कहा कि कार्यकाल समाप्त होने के बाद वार्ड की साफ-सफाई व्यवस्था बिगड़ गई है। कई बार शिकायत करने के बावजूद नगर निगम के अधिकारी समस्याओं के समाधान को लेकर गंभीरता नहीं दिखाते, जिससे लोगों को परेशानी हो रही है।</p>
<p><strong>पूर्व पार्षद नीलोफर</strong><br />वार्ड में करीब 25 वर्षों से अतिक्रमण की समस्या बनी हुई थी, जिसका समाधान करवाया गया। मंदिरों का जीर्णोद्धार कराया गया। वर्षों पुरानी कचरा पॉइंट की समस्या खत्म कर वहां पार्क विकसित करवाया। वहीं करीब 40 वर्षों से सफाई और मरम्मत का इंतजार कर रहे नालों की रिपेयरिंग करवाकर व्यवस्था में सुधार किया गया।</p>
<p><strong>पूर्व पार्षद ममता कंवर</strong><br />पूर्व पार्षद ममता कंवर ने बताया कि वार्ड में पार्क की कमी है। उनके कार्यकाल के दौरान जरूरत के अनुसार नालियों का निर्माण करवाया गया। उन्होंने कहा कि वार्डवासियों की समस्याओं को प्राथमिकता देते हुए समय-समय पर उनके समाधान का प्रयास किया जाता रहा। वर्तमान में वार्ड में कोई बड़ी समस्या नहीं है, हालांकि मूलभूत सुविधाओं को बेहतर बनाने की जरूरत है।</p>
<p><strong>वार्डवासी शिवा मद्रासी</strong><br />क्षेत्र की सबसे बड़ी समस्या नाले की है। नियमित सफाई नहीं होने से नाला जाम हो जाता है। बारिश के दौरान नाले का गंदा पानी ओवरफ्लो होकर घरों तक पहुंच जाता है। वार्ड में सामुदायिक भवन भी नहीं है। इसके अलावा साफ-सफाई व्यवस्था का भी अभाव होने से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।</p>
<p><strong>वार्ड नंबर व क्षेत्र</strong><br />-वार्ड नंबर 21 में काली बस्ती, हनुमान बस्ती, थर्मल पावर स्टेशन, चंबल कॉलोनी, लक्ष्मी मैरिज गार्डन, समय विद्या निकेतन स्कूल, मुन्ना टेलर्स, सीनियर लेडीज टेलर्स, असगर अली का मकान, रोज ब्यूटी पार्लर, हरिजन बस्ती, कुंदकुंद आवासीय योजना, फॉरेस्ट चौकी, पंचशील कॉलोनी, समस्त दुर्गा नगर, सुभाष नगर, सगसजी महाराज, न्यू थर्मल कॉलोनी, जी-मार्ट, मस्जिद, नेवालाल मैरिज गार्डन, बजरंगपुरा एवं आरएसईबी कार्यालय क्षेत्र शामिल हैं।<br />-वार्ड नंबर 41 में हरिजन बस्ती, राजभवन क्षेत्र, जेके लोन अस्पताल, आयुर्वेदिक अस्पताल, इस्माइल चौक, बग्गी खाना, ब्रजराज कॉलोनी, नेहरू कॉलोनी, मस्जिद चौक, एमबीएस अस्पताल, सिविल लाइंस, कोलीपाड़ा का आंशिक क्षेत्र, प्रकाश क्लिनिक सहित आसपास के क्षेत्र शामिल हैं।<br />-वार्ड नंबर 42 में शीतला माता मंदिर, गोरी आश्रम, हरिजन बस्ती, बापू बस्ती, रामदेवजी का मंदिर, देवनारायण मंदिर, बीड़ के बालाजी, सरकारी स्कूल, न्यू सरस्वती विद्या मंदिर, जय अम्बे टेंट हाउस एवं राजपूत किराना स्टोर सहित आसपास का क्षेत्र शामिल है।<br />-वार्ड नंबर 43 में पुरानी कुन्हाड़ी व हवेली, चंबल पुलिया का निचला हिस्सा, रिद्धि राज टावर, बूंदी सिलिका, बिजासन माताजी का मंदिर, डी-मार्ट, विजय वीर स्टेडियम, बालापुरा का संपूर्ण क्षेत्र, सेक्टर कार्यालय, रोडवेज वर्कशॉप, कंकरेश्वर महादेव मंदिर, रजत सिटी ग्रुप मल्टी सहित आसपास के क्षेत्र शामिल हैं।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 01 Sep 2026 12:31:47 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सात वार्डों की ऑडिट में छलका लोगों का दर्द: अरमान था हमकों जिसका, वह गुल खिला नहीं!</title>
                                    <description><![CDATA[ ट्रांसपोर्ट नगर में जलभराव, महावीर नगर में सीवरेज चेंबर बने हादसों का खतरा; सुविधाओं के अभाव पर वार्डवासियों का फूटा गुस्सा]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/residents--anguish-surfaces-during-audit-of-seven-wards--%22the-dream-we-cherished-never-came-to-fruition-%22/article-163980"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-08/1200-x-60-px)-(youtube-thumbnail)-(5)2.png" alt=""></a><br /><p> कोटा। शहर के छह वार्डों की दैनिक नवज्योति की ग्राउंड रिपोर्टिंग में विकास के दावों और जमीनी हकीकत के बीच बड़ा अंतर सामने आया है। चुनाव के समय बेहतर सड़क, पर्याप्त पानी, सफाई व्यवस्था और अन्य मूलभूत सुविधाओं के जो सपने क्षेत्रवासियों को दिखाए गए थे, वे आज भी कई इलाकों में अधूरे नजर आ रहे हैं। लोगों का दर्द साफ शब्दों में सामने आया—“अरमान था जिसका, वह गुल खिला नहीं।” करोड़ों रुपए के विकास कार्यों के दावों के बावजूद वार्डों में लोग आज भी नल, पानी, सफाई और अन्य छोटी-छोटी बुनियादी सुविधाओं के लिए परेशान हैं।</p>
<p>दैनिक नवज्योति की सात वार्डों में की गई जमीनी पड़ताल में सामने आया कि कई क्षेत्रों में पानी की समस्या लंबे समय से बनी हुई है। कहीं नलों में पर्याप्त पानी नहीं पहुंच रहा तो कहीं जलापूर्ति की व्यवस्था को लेकर लोगों में नाराजगी है। इसके साथ ही सफाई व्यवस्था भी वार्डवासियों के लिए बड़ी परेशानी बनी हुई है। कई स्थानों पर नियमित सफाई नहीं होने से गंदगी फैली रहती है और लोगों को दुर्गंध व मच्छरों जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है।</p>
<p><strong>ट्रांसपोर्ट नगर में नालियों के अभाव से जलभराव</strong><br />ट्रांसपोर्ट नगर क्षेत्र में नालियों का समुचित निर्माण नहीं होने से बरसात के दिनों में हालात और अधिक खराब हो जाते हैं। पानी निकासी की व्यवस्था कमजोर होने के कारण कई जगह पानी भर जाता है। लोगों का कहना है कि नालियों के निर्माण और रखरखाव पर गंभीरता से ध्यान नहीं दिया गया। कई नालियां जाम होने के कारण बारिश के दौरान गंदा पानी सड़कों और आसपास के इलाकों में फैल जाता है। इससे आवागमन प्रभावित होता है और क्षेत्रवासियों को भारी परेशानी उठानी पड़ती है। लोगों का कहना है कि हर वर्ष बारिश में यही स्थिति बनती है, लेकिन स्थायी समाधान के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाए गए।</p>
<p><strong>महावीर नगर में सीवरेज चेंबर बने दुर्घटना का खतरा</strong><br />महावीर नगर क्षेत्र में सीवरेज लाइन बिछाने के कार्य में भी खामियां सामने आई हैं। क्षेत्रवासियों के अनुसार सीवरेज चेंबरों के ढक्कन सड़क की सतह के अनुरूप नहीं हैं। कहीं ढक्कन ऊपर हैं तो कहीं नीचे, जिससे वाहन चालकों और राहगीरों के लिए दुर्घटना का खतरा बना रहता है। दोपहिया वाहन चालकों को विशेष रूप से परेशानी होती है। लोगों का कहना है कि विकास कार्यों में केवल निर्माण ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसकी गुणवत्ता और सुरक्षा भी उतनी ही जरूरी है। खराब तरीके से किए गए कार्य लोगों के लिए सुविधा के बजाय परेशानी का कारण बन रहे हैं।</p>
<p><strong>अनंतपुर थाने के पीछे नाले पर अतिक्रमण से बढ़ी परेशानी</strong><br />अनंतपुर थाने के पीछे स्थित नाले में लोगों द्वारा किए गए अतिक्रमण के कारण पानी की निकासी प्रभावित होने की बात भी सामने आई। नाले की चौड़ाई और जल निकासी क्षमता प्रभावित होने से क्षेत्र में जलभराव की समस्या बनी रहती है। बरसात के दौरान स्थिति और गंभीर हो जाती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि समय रहते अतिक्रमण हटाकर नाले की सफाई और उचित व्यवस्था की जाए तो जलभराव की समस्या से काफी हद तक राहत मिल सकती है।</p>
<p>वार्ड में सुविधाओं की कमी को लेकर लोगों का गुस्सा खुलकर सामने आया। कई क्षेत्रों में न तो सामुदायिक भवन है, न लोगों की जरूरत के अनुसार डिस्पेंसरी की व्यवस्था और न ही बच्चों व बुजुर्गों के लिए पर्याप्त पार्क। वार्डवासियों का कहना है कि जनप्रतिनिधियों को केवल बड़े विकास कार्यों के आंकड़े बताने के बजाय लोगों की रोजमर्रा की जरूरतों को समझना चाहिए। लोगों का सवाल है कि यदि पांच साल में वार्डों में पानी, सफाई, सड़क, नाली और अन्य मूलभूत सुविधाएं ही उपलब्ध नहीं कराई जा सकीं तो आखिर विकास किसका हुआ?</p>
<p><strong>करोड़ों के दावों के बीच बुनियादी सुविधाओं की तलाश</strong><br />जनप्रतिनिधि अक्सर करोड़ों रुपए के विकास कार्य करवाने के दावे करते हैं, लेकिन दैनिक नवज्योति की ग्राउंड रिपोर्टिंग में कई जगहों पर अलग तस्वीर दिखाई दी। क्षेत्रवासी आज भी छोटी-छोटी बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं। लोगों का कहना है कि उन्हें आंकड़ों और घोषणाओं से ज्यादा जरूरत धरातल पर काम दिखने की है। साफ सड़क, बेहतर सफाई, सुचारू जलापूर्ति, मजबूत नालियां और सुरक्षित सीवरेज व्यवस्था उनकी प्राथमिक मांग है।<br />छह वार्डों की इस ऑडिट ने साफ कर दिया है कि विकास की तस्वीर केवल दावों से नहीं, बल्कि लोगों के जीवन में आने वाले बदलाव से तय होती है।</p>
<p><strong>पूर्व पार्षद जरीना</strong><br />कार्यकाल में वार्ड में विकास कार्यों को प्राथमिकता दी गई और करीब 9 करोड़ रुपए के कार्य करवाए गए। वार्ड में सड़कों का निर्माण कराया गया, जिससे आवागमन की सुविधा बेहतर हुई है। क्षेत्र में सफाई व्यवस्था भी अच्छी बनी रहती है। हालांकि, अनंतपुर थाने के पीछे नाले की समस्या अभी भी बनी हुई है, जिसके समाधान के लिए प्रयास किए जा रहे हैं।</p>
<p><strong>पूर्व पार्षद कमल मीणा</strong><br />वार्ड की सबसे बड़ी समस्या जगपूरा नाले की है। नाले का आधा काम पूरा हो चुका है, जबकि शेष कार्य अभी प्रगति पर है। उन्होंने बताया कि कार्यकाल में खेल मैदान का निर्माण, पानी की पाइपलाइन सहित कई विकास कार्य करवाए गए। सफाई व्यवस्था में कर्मचारियों की कमी के कारण परेशानी आती है, जिसे दूर करने की जरूरत है।</p>
<p><strong>पूर्व पार्षद विनय कुमार</strong><br />पांच वर्षों के कार्यकाल में वार्ड में कई विकास कार्य करवाए गए और लोगों की मूलभूत सुविधाओं को बेहतर बनाने का प्रयास किया गया। हालांकि, वार्ड के कुछ क्षेत्रों में धीमी गति से पानी आने की समस्या आज भी बनी हुई है। ट्रांसपोर्ट नगर में जलभराव और अन्य परेशानियों को देखते हुए जल्द ही नालियों के निर्माण का कार्य करवाया जाएगा।</p>
<p><strong>पूर्व पार्षद सुनील गौतम</strong></p>
<p>वार्ड की सबसे बड़ी समस्या सीवरेज लाइन को गलत तरीके से डालने के कारण बनी हुई है, जिससे लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। नालों की समस्या भी क्षेत्र में बनी हुई है। उन्होंने बताया कि वार्ड के पांच कचरा पॉइंट में से चार को कचरा मुक्त कराया गया है और एक पर काम शेष है। साथ ही पार्क का निर्माण भी कराया गया।</p>
<p><strong>वार्डवासी मनीष नागर</strong><br />क्षेत्र में आज भी कई मूलभूत समस्याएं बनी हुई हैं। उनका कहना है कि पांच साल पहले लोगों से जो वादे किए गए थे, उनमें से कई आज तक पूरे नहीं हो पाए हैं। वार्ड में पानी और सफाई की समस्या लगातार बनी हुई है। कई अन्य समस्याओं का भी समाधान नहीं हुआ है, जिससे वार्डवासियों में जनप्रतिनिधियों और प्रशासन के प्रति नाराजगी है।</p>
<p><strong>वार्ड नंबर 22 से 28 तक के क्षेत्र</strong><br />वार्ड नंबर 22: टैगोर नगर, चाणक्य नगर, रानी लक्ष्मीबाई नगर, बोम्बे योजना, स्वामी विवेकानंद नगर, दीप श्री, शुभ अटलांटिस अपार्टमेंट्स, विवेकानंद नगर सहित आसपास के क्षेत्र शामिल हैं।<br />वार्ड नंबर 23: विधायक कॉलोनी, विश्व नगर से नाले तक का क्षेत्र, रंगबाड़ी योजना सेक्टर-1 व 2, बालाजी नगर, कृष्णा नगर, नारकोटिक्स कार्यालय एवं पावर हाउस क्षेत्र शामिल हैं।<br />वार्ड नंबर 24: गणपति ट्रेडर्स, रंगबाड़ी का संपूर्ण क्षेत्र, रंगबाड़ी बालाजी मंदिर, विनोबा भावे नगर, अजय आहूजा नगर, मुंबई योजना एवं उड़िया बस्ती शामिल हैं।<br />वार्ड नंबर 25: संपूर्ण बरड़ा बस्ती, क्रेशर बस्ती, ट्रक यूनियन के पीछे का क्षेत्र, मल्टीस्टोरी क्षेत्र, ट्रक यूनियन के सामने का क्षेत्र, बॉम्बे योजना, सुभाष नगर एवं श्मशान क्षेत्र शामिल हैं।<br />वार्ड नंबर 26: संपूर्ण तालाब गांव, घोसी मोहल्ला, अनंतपुरा कच्ची बस्ती, अमीन भाई फार्म हाउस, संपूर्ण सुभाष विहार, पुराना अनंतपुरा थाना, आमिर कॉलोनी, देव कॉलोनी एवं राजपूत कॉलोनी शामिल हैं।<br />वार्ड नंबर 27: दीनदयाल नगर, सुभाष नगर प्रथम व द्वितीय, ट्रांसपोर्ट नगर तथा गोबरिया बावड़ी कच्ची बस्ती का क्षेत्र शामिल है।<br />वार्ड नंबर 28: कॉमर्स कॉलेज चौराहा, झालावाड़ रोड, गोबरिया बावड़ी, रेलवे लाइन क्षेत्र, रेलवे लाइन अंडरपास, कोलीपाड़ा, ओम एनक्लेव, विज्ञान नगर, श्मशान नगर, इंदिरा कॉलोनी, पंचवटी कॉलोनी एवं राजीव गांधी स्पेशल क्षेत्र शामिल हैं।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 27 Aug 2026 14:08:10 +0530</pubDate>
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                <title>आजादी के दशकों बाद भी मूलभूत सुविधाओं को तरसता नयागांव गुजरान: न पक्की सड़क, न सुरक्षित श्मशान घाट</title>
                                    <description><![CDATA[कीचड़ के कारण एंबुलेंस आना बंद, चारपाई पर मरीज ले जाने को मजबूर ग्रामीण।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jhalawar/nayagaon-gujran-deprived-of-basic-amenities-decades-after-independence--no-paved-roads--no-proper-cremation-ground/article-162872"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-08/111200-x-600-px)-(2)41.png" alt=""></a><br /><p>खानपुर। ग्राम पंचायत बेसार के अंतर्गत आने वाले नयागांव गुजरान में आज भी ग्रामीण मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं। ग्रामीणों ने बताया कि आजादी के दशकों बाद भी गांव में विकास कार्य धरातल पर नहीं पहुंच पाए हैं। पक्की सड़क के अभाव और श्मशान घाट की बदहाल स्थिति के कारण लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। गांव में आज तक एक भी पक्की सड़क का निर्माण नहीं हुआ है। बारिश केमौसम में रास्ते कीचड़ और पानी से भर जाते हैं, आवागमन मुश्किल हो जाता है। सबसे अधिक परेशानी स्कूली बच्चों को उठानी पड़ती है, जिन्हें खराब रास्तों से होकर स्कूल जाना पड़ता है। ग्रामीणों के अनुसार सड़क नहीं होने और जलभराव के कारण गांव तकएंबुलेंस और अन्य वाहन पहुंचना मुश्किल हो जाता है। आपातकालीन परिस्थितियों में मरीजों, विशेषकर गर्भवती महिलाओं को चारपाई पर बैठाकर कीचड़ भरे रास्तों से मुख्य मार्ग तक ले जाना पड़ता है। इससे समय पर उपचार मिलना भी चुनौती बन जाता है।</p>
<p><strong>श्मशान घाट पर अतिक्रमण, सुविधाओं का अभाव</strong><br />ग्रामीणों ने बताया कि गांव्र के श्मशान घाट की भूमि पर अतिक्रमण होचुका है। इसके कारण अंतिम संस्कार जैसी महत्वपूर्ण प्रक्रिया में भी परेशानी होती है। ग्रामीणों ने श्मशान घाट से अतिक्रमण हटाने और वहां टीन शेड सहित आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने प्रशासन द्वारा आयोजित विभिन्न शिविरों मेंलिखित आवेदन देकर समस्याओं से अधिकारियों को अवगत कराया है। इसके अलावा ग्राम पंचायत स्तर पर भी कई बार मांग उठाई गई, लेकिन अब तक समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका है। नयागांव गुजरान के ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि गांव में जल्द सेजल्द पक्की सड़क का निर्माण कराया जाए, जलभराव की समस्या का समाधान किया जाए तथा श्मशान घाट से अतिक्रमण हटाकर वहां आवश्यक सुविधाएं विकसित की जाएं। ग्रामीणों का कहना है कि मूलभूत सुविधाओं के अभाव में उन्हें आज भी कई परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।</p>
<p>हमारे गांव में एक पक्की सड़कतक नहीं बन पाई है। बारिश के दिनों में हालात इतने बदतर हो जाते हैं कि बच्चों को स्कूल भेजना और खुद घर से बाहर निकलना दूभर हो जाता है।<br /><strong>- चौथमल गुर्जर, ग्रामीण</strong></p>
<p>हमारे गांव में श्मशान घाट की जमीन पर भी अतिक्रमण हो चुका है। अपनों के अंतिम संस्कार जैसी संवेदनशील घड़ी में भी हमें भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।<br /><strong>-बबलू गुर्जर, ग्रामीण</strong></p>
<p>हमने पंचायत से लेकर प्रशासनिक शिविरों तक कई बार लिखित आवेदन दिए हैं, लेकिन हर बार सिर्फ निराशा ही हाथ लगी है।<br /><strong>- रनजीत गुर्जर,ग्रामीण</strong></p>
<p>रास्ते में कीचड़ और जलभराव के कारण गांव के भीतर एम्बुलेंस का आना तो दूर, किसी सामान्य वाहन का पहुंचना भी असंभव है। आपातकालीन स्थिति में बीमारों और गर्भवती महिलाओं को चारपाई पर लिटाकर मुख्य मार्ग तक ले जाना हमारी मजबूरी बन गया है।<br /><strong>- सोनू गुर्जर, ग्रामीण</strong></p>
<p>स्कूली बच्चों को रोजाना जान जोखिम में डालकर इस कीचड़ भरे रास्ते से गुजरना पड़ता है। जरा सी चूक बच्चों के भविष्य और सुरक्षा के लिए भारी पड़ सकती है। जल्द से जल्द पक्की सड़क का निर्माण करवाया जाए।<br /><strong>- हंसराज गुर्जर, ग्रामीण</strong></p>
<p>विकास के जितने भी दावे किए जाते हैं, वे सब नयागांव गुजरान आकर कागजी साबित हो जाते हैं। जल्द ही श्मशान घाट से अतिक्रमण नहीं हटाया गया तो ग्रामीणों को मजबूरन आंदोलन करना पड़ेगा।<br /><strong>- मुकेश, ग्रामीण</strong></p>
<p>श्मशान की भूमि से अतिक्रमण हटाने को लेकर पूर्व में भी 5 लाख रुपए की सैंक्शन (स्वीकृति) निकाली गई थी, लेकिन प्रशासन द्वारा अतिक्रमण नहीं हटाया जा सका, जिससे वहां आज भी कीचड़ और वैसी ही स्थिति बनी हुई है। इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए सरपंच द्वारा पूर्व में ही प्रस्ताव लिया जा चुका है। आज इस संबंध में सेक्रेटरी से बात कर ली गई है और उन्होंने इस पर सैंक्शन (स्वीकृति) भी निकाल दी है। इस संबंध में आगे की कार्रवाई कर जल्द से जल्द मौके से अतिक्रमण हटवाया जाए, ताकि आमजन को राहत मिल सके।<br /><strong>-  मदन लाल वर्मा, सरपंच बेसार उपखंड खानपुर</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>झालावाड़</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 13 Aug 2026 16:44:03 +0530</pubDate>
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                <title>वार्डों का नक्शा नया, समस्याएं पुरानी</title>
                                    <description><![CDATA[नए नक्शे में शामिल हुए कई इलाके, अब हर बस्ती तक सुविधाएं पहुंचाना निगम के लिए चुनौती।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/new-ward-map--old-problems/article-162846"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-08/111200-x-600-px)-(4)18.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर की सरकार का नक्शा बदल गया है। डेढ़ सौ वार्डों से अब कोटा शहर 100 वार्डों में सिमट गया है। कोटा उत्तर और कोटा दक्षिण की अलग-अलग व्यवस्था खत्म होने के बाद वार्डों की सीमाएं भी बदल गई हैं। कई वार्डों का दायरा पहले की तुलना में काफी बढ़ गया है। ऐसे में एक ही वार्ड में पुरानी कॉलोनियों से लेकर नई बस्तियां, गांव, संस्थान और विकसित हो रहे क्षेत्र तक शामिल हो गए हैं। नवज्योति ने नए वार्डों की जमीनी हकीकत जानने के लिए वार्ड 16 से 20 तक का जायजा लिया तो तस्वीर सामने आई कि वार्ड बदले हैं, सीमाएं बदली हैं, लेकिन नागरिकों की मूलभूत समस्याएं अब भी जस की तस हैं।</p>
<p><strong>दृश्य-1 : वार्ड 16... कॉलोनियों और पुराने मोहल्लों का मेल</strong><br />यहां सड़क, पानी, सफाई और अन्य मूलभूत सुविधाओं की नियमित व्यवस्था सबसे अहम है। बढ़े हुए क्षेत्र के चलते निगम के सामने हर इलाके तक समान रूप से सुविधाएं पहुंचाने की चुनौती रहेगी। वार्ड 16 में सुभाष कॉलोनी, नंदा जी की बाड़ी, तेल वाली गली, सरस्वती कॉलोनी, बालाजी टाउन, विधाता कॉलोनी, श्मशान, घूम चक्कर, गणेश चौक, कुम्हारों का मोहल्ला और सरकारी स्कूल क्षेत्र शामिल हैं। वार्ड में पुराने मोहल्लों के साथ नई कॉलोनियां भी हैं।</p>
<p><strong>दृश्य-2 : वार्ड 17... आवारा कुत्ते और सफाई बनी परेशानी</strong><br />स्थानीय लोगों ने आवारा कुत्तों और साफ-सफाई को लेकर परेशानी बताई। कई जगह नियमित सफाई और कचरा उठाने की व्यवस्था को लेकर भी लोगों में नाराजगी नजर आई। लोगों का कहना है कि आवारा कुत्तों की संख्या बढ़ने से खासकर बच्चों और बुजुर्गों को परेशानी होती है। वहीं सफाई व्यवस्था में सुधार की जरूरत महसूस की जा रही है। वार्ड 17 में मोहन निवास, खंड गावड़ी, पारिवारिक न्यायालय, सिविल लाइन, सुखधाम, दोस्तपुरा और ऑफिसर क्लब क्षेत्र शामिल हैं।</p>
<p><strong>दृश्य-3 : वार्ड 18... टूटी सड़कें और खाली प्लॉटों में पानी</strong><br />इलाके में लोगों की सबसे बड़ी शिकायतों में क्षतिग्रस्त सड़कें, खाली प्लॉटों में भरा पानी और पेयजल की समस्या शामिल है। खाली प्लॉटों में बारिश का पानी जमा होने से मच्छर और गंदगी की समस्या पैदा होने की बात भी सामने आई। वहीं कई स्थानों पर क्षतिग्रस्त सड़कें आवाजाही में परेशानी बढ़ा रही हैं। स्थानीय लोगों की मांग है कि निगम केवल मुख्य सड़कों पर ही नहीं, बल्कि कॉलोनियों की अंदरूनी सड़कों पर भी ध्यान दे। वार्ड 18 में आदर्श नगर, सुमन विहार, बालाजी टाउन प्रथम व द्वितीय, कैलाशपुरी, पार्श्वनाथ एनक्लेव, गिरधर एंक्लेव, पार्वतीपुरम, एग्जॉटिका मैरिज गार्डन, महावीर मिशन हॉस्पिटल, मारडिया बस्ती, रामचंद्रपुर, बालिका ग्राम और स्वीट होम कॉलोनी सहित कई क्षेत्र आते हैं।</p>
<p><strong>दृश्य-4 : वार्ड 19... खाली प्लॉटों का पानी और टूटे रास्ते</strong><br />यहां भी खाली प्लॉटों में पानी भरने, क्षतिग्रस्त सड़कों और विद्युत पोल की समस्या सामने आई। बारिश के बाद खाली प्लॉटों में पानी जमा होने से आसपास रहने वाले लोगों को परेशानी होती है। कई स्थानों पर सड़कें खराब हैं तो विद्युत पोल से जुड़ी समस्याएं भी लोगों के लिए चिंता का विषय बनी हुई हैं। बढ़े हुए वार्ड में इन समस्याओं को चिन्हित कर प्राथमिकता के आधार पर समाधान करना निगम के लिए चुनौती होगी।<br />वार्ड 19 में मित्तल मैरिज गार्डन, हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी, पेट्रोल पंप, राधा-कृष्ण मंदिर, लॉरियट पब्लिक स्कूल, रिद्धि-सिद्धि नगर, चंचल विहार, लक्ष्मण विहार, विकास नगर, रिद्धि-सिद्धि प्रथम, कमला उद्यान, एसजीएन मैरिज गार्डन और लैंडमार्क सिटी जैसे क्षेत्र शामिल हैं।</p>
<p><strong>दृश्य-5 : वार्ड 20... सबसे बड़ा दायरा, समस्याओं की भी लंबी फेहरिस्त</strong><br />इतने बड़े क्षेत्र में समस्याओं का स्वरूप भी अलग-अलग है। यहां क्षतिग्रस्त सड़कें, गंदगी, टे्चिंग ग्राउंड की समस्या और जगह-जगह बस्तियों में जलभराव प्रमुख समस्याओं के रूप में सामने आ रही हैं। कई बस्तियों में बारिश का पानी जमा होने से लोगों की परेशानी बढ़ जाती है। वहीं सड़कें क्षतिग्रस्त होने से आवाजाही प्रभावित होती है।वार्ड 20 का दायरा इन पांच वार्डों में सबसे विस्तृत नजर आता है। यहां मेनाल रेजिडेंसी, गणेश पाल, नांता, वीर दुर्गादास स्टेडियम, भैरूजी मंदिर, तेजाजी मंदिर, नांता गढ़, जेटियों का मोहल्ला, नांता रोड, पार्श्वनार्थ मल्टी स्टोरी, ईदगाह, कोली मोहल्ला, नारी निकेतन, क्रेशर बस्ती, मेंढकी पाल धाम, कालबेलिया बस्ती, गुरुद्वारा, पत्थर मंडी, अभेड़ा महल, करणी माता मंदिर, बायोलॉजिकल पार्क, करणी नगर, बड़गांव, देव नगर, सिलिकॉन सिटी, गोकुलधाम सहित कई क्षेत्र शामिल हैं।</p>
<p>पहले वार्ड छोटे होते थे, इसलिए क्षेत्र सीमित होने के कारण सफाई, सड़क और अन्य मूलभूत सुविधाओं से जुड़ी शिकायतों पर भी तुरंत ध्यान दिया जा सकता था। उन्होंने कहा कि अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने सबसे ज्यादा प्राथमिकता सफाई व्यवस्था को दी। इसके साथ ही वार्ड में जरूरत के अनुसार कई विकास कार्य भी करवाए गए। उनका कहना है कि छोटे वार्ड होने से पार्षद और जनता के बीच सीधा संपर्क बना रहता था और समस्याओं की जानकारी भी समय पर मिल जाती थी।<br /><strong>-हरिओम सुमन, पूर्व पार्षद</strong></p>
<p>शहर में करीब 150 वार्ड थे, जबकि अब वार्डों की संख्या 100 हो गई है। उनका मानना है कि इससे कामकाज पर बहुत ज्यादा फर्क नहीं पड़ेगा। उन्होंने कहा कि अपने कार्यकाल में उन्होंने वार्ड की समस्याओं पर लगातार ध्यान दिया और किसी तरह की बड़ी परेशानी सामने नहीं आई। पार्षद की जिम्मेदारी होती है कि वह उपलब्ध संसाधनों के साथ हर व्यवस्था को बेहतर तरीके से मैनेज करे। उनका कहना है कि इच्छाशक्ति और बेहतर प्रबंधन से वार्ड की समस्याओं का समाधान संभव है।<br /><strong>- उषा ठाकुर, पूर्व पार्षद</strong></p>
<p>शहर में वार्डों की संख्या बढ़ाकर 100 करना व्यवस्था की दृष्टि से एक अच्छा कदम हो सकता है, लेकिन इसके साथ सुविधाओं और संसाधनों का विस्तार भी जरूरी है। अब एक नगर निगम होगा और जवाबदेही तय हो सकेगी। पहले वार्ड सीमा को लेकर असमंजस की स्थिति बनी रहती थी। विकास के कामों को लेकर हम सतर्क हैं।<br /><strong>-लव शर्मा, पूर्व पार्षद</strong></p>
<p>आगामी चुनाव में ऐसे जनप्रतिनिधि का चुनाव होना चाहिए, जो केवल चुनाव जीतने तक सीमित न रहे, बल्कि पूरे कार्यकाल वार्डवासियों के बीच मौजूद रहे। प्रतिनिधि ऐसा हो, जो वार्ड को अपना घर और यहां रहने वाले लोगों को अपने परिवार की तरह समझे। वार्ड की छोटी-बड़ी समस्याओं को अपनी जिम्मेदारी मानकर उनके समाधान के लिए लगातार प्रयास करे। जनता को ऐसे ही सक्रिय और संवेदनशील प्रतिनिधि की जरूरत है।<br /><strong>-शुभम मेहरा, वार्डवासी</strong></p>
<p>परिसीमन के बाद इस बार वार्ड का क्षेत्र काफी बड़ा हो गया है। क्षेत्र बढ़ने के साथ समस्याएं भी बढ़ने की संभावना है। ऐसे में सबसे बड़ी चुनौती यही होगी कि नया वार्ड किस तरह व्यवस्थित होता है और जनप्रतिनिधि हर इलाके की समस्या तक कितनी आसानी से पहुंच पाते हैं। अब देखना होगा कि यह नया परिसीमन वार्डवासियों की उम्मीदों और उनकी जरूरतों पर कितना खरा उतरता है।<br /><strong>-देवेंद्र सिंह, वार्डवासी</strong></p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 13 Aug 2026 15:20:53 +0530</pubDate>
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                <title>कीचड़, गंदगी और बरसाती पानी...खरीदार, किसान और हम्मालों को भारी परेशानी</title>
                                    <description><![CDATA[ कीचड़ और जलभराव के बीच चलता रहा कारोबार।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/mud--filth--and-rainwater----immense-trouble-for-buyers--farmers--and-porters/article-162281"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-08/111200-x-600-px)-(2)21.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। गुरुवार को सुबह आठ बजे का समय। शहर की सबसे बड़ी थोक फल-सब्जी मंडी धीरे-धीरे खरीदारों, किसानों और व्यापारियों से गुलजार हो रही थी। ट्रकों से उतर रही ताजा सब्जियां, फलों की ढेरियां, लगती बोलियां और माल खरीदने की भागदौड़... लेकिन इस पूरे दृश्य के बीच सबसे ज्यादा नजर आ रहा था मंडी परिसर में फैला कीचड़, गंदगी और बरसाती पानी। रातभर हुई बारिश ने मंडी की व्यवस्थाओं की हकीकत फिर उजागर कर दी। परिसर की अधिकांश हिस्सा कीचड़ में बदल चुका था। कहीं पानी भरा था तो कहीं फिसलन भरा कीचड़। खरीदार कपड़ों और जूतों को बचाते हुए रास्ता तलाश रहे थे, जबकि हम्माल सिर और कंधों पर सब्जियों की भारी बोरियां उठाकर कीचड़ से गुजरने को मजबूर थे।</p>
<p><strong>गंदगी के बीच लाखों का कारोबार</strong><br />शहर की सबसे बड़ी थोक मंडी में हर रोज लाखों रुपए का फल और सब्जी कारोबार होता है। गुरुवार को भी कारोबार नहीं रुका। किसानों से माल खरीदने के लिए व्यापारियों की भीड़ लगी रही। होटल, रेस्टोरेंट और फुटकर विक्रेता बड़ी मात्रा में खरीदारी करते रहे, लेकिन हर कदम पर अव्यवस्थाएं उनका रास्ता रोकती नजर आईं। सब्जी लेकर आए किसानों ने बताया कि गांवों से ताजा माल तो समय पर पहुंच गया, लेकिन मंडी के अंदर उसे दुकानों तक पहुंचाना सबसे मुश्किल काम रहा। कीचड़ के कारण हाथ ठेले और छोटी गाड़ियां कई जगह फंस गईं। हम्मालों को अतिरिक्त मेहनत करनी पड़ी और माल उतारने में सामान्य दिनों की तुलना में अधिक समय लगा।</p>
<p><strong>अव्यवस्थाएं रोकती रहीं रास्ता</strong><br />मंडी में खरीदारी करने आए ग्राहक रामहेत व दौलतचंद ने बताया कि विभिन्न तरह की सब्जियों की खरीदारी करने के लिए उन्हें गंदे पानी और कीचड़ से होकर गुजरना पड़ा। कई जगह फिसलन इतनी अधिक थी कि लोग संभल-संभलकर चलते दिखाई दिए। महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों को सबसे ज्यादा परेशानी हुई। लोगों का कहना था कि यदि समय रहते सफाई और जल निकासी नहीं हुई तो बारिश के पूरे मौसम में यही हाल बना रहेगा। इधर व्यापारियों ने कहा कि यह कोई नई समस्या नहीं है। हर बारिश के बाद मंडी की यही तस्वीर बन जाती है। जल निकासी की प्रभावी व्यवस्था नहीं होने से थोड़ी देर की बारिश भी पूरे परिसर को जलभराव में बदल देती है। इसका असर व्यापार की गति पर भी पड़ता है और ग्राहकों को भी भारी असुविधा होती है।</p>
<p>हर बारिश के बाद मंडी की यही स्थिति हो जाती है। कीचड़ और पानी भरने से ग्राहकों की संख्या प्रभावित होती है। माल उतारने और दुकानों तक पहुंचाने में भी काफी परेशानी होती है।<br /><strong>-विजय कुमार, फल-सब्जी व्यापारी</strong></p>
<p> गांवों से ताजा सब्जियां और फल लेकर आते हैं, लेकिन मंडी में प्रवेश करते ही परेशानी शुरू हो जाती है। कीचड़ में माल ढोना मुश्किल हो जाता है। कई बार माल खराब होने का भी डर बना रहता है।<br /><strong>-बिरधीचंद मीणा, किसान</strong></p>
<p>सब्जियां खरीदने के लिए मजबूरी में कीचड़ और गंदे पानी से होकर गुजरना पड़ता है। महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों के लिए सबसे ज्यादा परेशानी होती है। मंडी जैसी महत्वपूर्ण जगह पर ऐसी स्थिति नहीं होनी चाहिए।<br /><strong>-शम्भूदयाल बैरवा, ग्राहक</strong></p>
<p>बारिश के कारण कुछ स्थानों पर जलभराव की स्थिति बन जाती है। जहां-जहां पानी भरता है, वहां निकासी का कार्य कराया जाता है। व्यापारियों किसानों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के प्रयास किए जाते हैं।<br /><strong>-विश्वजीत सिंह, सचिव, थोक फल मंडी</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 07 Aug 2026 15:00:46 +0530</pubDate>
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                <title>लाल बहादुर शास्त्री बस स्टैंड का बदलेगा स्वरूप, सीसी सड़क निर्माण कार्य तेज</title>
                                    <description><![CDATA[जलनिकासी की बेहतर योजना से बारिश में जलभराव की समस्या होगी कम।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/lal-bahadur-shastri-bus-stand-set-for-a-makeover--cc-road-construction-work-accelerates/article-161703"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-08/111200-x-600-px)-(1)4.png" alt=""></a><br /><p>बपावरकला। लाल बहादुर शास्त्री बस स्टैंड पर सीसी सड़क निर्माण कार्य इन दिनों तेजी से प्रगति पर है। निर्माण कार्य पूरा होने के बाद बस स्टैंड क्षेत्र का स्वरूप बदलने के साथ स्थानीय लोगों एवं वाहन चालकों को बेहतर आवागमन सुविधा मिलने की उम्मीद है। निर्माण एजेंसी की ओर से निर्धारित मानकों के अनुरूप कार्य कराया जा रहा है तथा जलनिकासी की व्यवस्था पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। निर्माण कार्य के दौरान बस स्टैंडपरिसर में सीसी सड़क का निर्माण तेजी से जारी है। स्थानीय नागरिकों ने सड़क निर्माण की गुणवत्ता बनाए रखने के साथ वर्षा ऋतु में जलभराव की समस्या से बचाव के लिए समुचित जलनिकासी व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि सड़क के साथ नालियों का निर्माण भी प्रभावी ढंग से किया जाएगा तो भविष्य में लोगों को जलभराव और कीचड़ जैसी समस्याओं का सामना नहीं करना पड़ेगा।</p>
<p>लाल बहादुर शास्त्री बस स्टैंड का सीसी सड़क निर्माण कार्य निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुरूप किया जा रहा है। सड़क निर्माण के साथ पानी की निकासी के लिए नालियों एवं नालों का निर्माण भी समानांतर रूप से कराया जा रहा है, ताकि बरसात के दौरानं जलभराव की स्थिति उत्पन्न न हो। कार्य पूर्ण होने के बाद बस स्टैंड क्षेत्र में यातायात व्यवस्था अधिक सुगम होगी और आमजन को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध होंगी।<br /><strong>- पूजा नामा, कनिष्ठ अभियंता, आरएसआरडीसी।</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 01 Aug 2026 16:31:04 +0530</pubDate>
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                <title>राजपुर के महात्मा गांधी राजकीय विद्यालय में रिक्त पदों ने बिगाड़ी शिक्षा व्यवस्था</title>
                                    <description><![CDATA[बारिश में टपकती छत व जलभराव से विद्यार्थियों की बढ़ी परेशानी
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/baran/vacant-posts-disrupt-education-system-at-rajpur-s-mahatma-gandhi-government-school/article-161559"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-07/111200-x-600-px)-(3)19.png" alt=""></a><br /><p>राजपुर। राजपुर कस्बे के महात्मा गांधी राजकीय विद्यालय में शिक्षकों की कमी और आधारभूत सुविधाओं के अभाव के चलते विद्यार्थियों की पढ़ाई कक्षा पहली से बारहवीं तक संचालित इस विद्यालय में 407 छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं, लेकिन शिक्षकों के स्वीकृत 22 पदों में से केवल 10 शिक्षक ही कार्यरत हैं। 12 पद लंबे समय से रिक्त होने के कारण कई विषयों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। वहीं बारिश के मौसम में भवन की खराब स्थिति और जलभराव की समस्या ने विद्यार्थियों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। शिक्षकों की कमी अब विद्यार्थियों के भविष्य पर असर डालने लगी है।<br /> <br />विद्यालय में कक्षा पहली से बारहवीं. तक बड़ी संख्या में विद्यार्थी अध्ययनरत हैं, लेकिन पर्याप्त शिक्षक नहीं होने से शिक्षण व्यवस्था प्रभावित हो रहीं है। कई कक्षाओं में एक ही कमरे में दो-दो कक्षाओं का संचालन करना पड़ रहा है, जिससे विद्यार्थियों को पढ़ाई में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। विद्यालय में कई महत्वपूर्ण विषयों के शिक्षक उपलब्ध नहीं हैं। इसके चलते कुछ कक्षाओं का पाठ्यक्रम समय पर शुरू नहीं हो पाया है। विद्यार्थियों और अभिभावकों का कहना है कि यदि जल्द ही रिक्त पदों पर शिक्षकों की नियुक्ति नहीं की गई तो इसका असर परीक्षा परिणाम और विद्यार्थियों की शैक्षणिक प्रगति पर पड़ सकता है।</p>
<p><strong>रिक्त पद भरने की मांग</strong><br />क्षेत्र के लोगों और अभिभावकों का कहना है कि विद्यालय में शिक्षकों के रिक्त पदों को जल्द भरा जाना चाहिए, ताकि विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके। अब सभी की नजर शिक्षा विभाग पर है कि कब तक इस समस्या का समाधान कर बच्चों को राहत दी जाती है।</p>
<p><strong>विद्यार्थियों ने बताई समस्याएं</strong><br />विद्यालय के छात्र-छात्राओं योगेश प्रजापति, सोनम सहरिया, चंदू ओझा, मुकेश ओझा, विशाल प्रजापत, बिट्ट कश्यप, पूजा कुमारी और चन्ना कश्यप सहित अन्य विद्यार्थियों ने बताया कि शिक्षकों की कमी के कारण कई विषयों की पढ़ाई नहीं हो पा रही है। उन्होंने बताया कि कई कक्षाओं का सिलेबस अभी तक पूरा शुरू नहीं हुआ है, जिससे परीक्षा की तैयारी को लेकर चिंता बनी हुई है।</p>
<p><strong>प्रिंसिपल के प्रयासों से सुविधाओं में हुआ सुधार</strong><br />विद्यार्थियों ने बताया कि विद्यालय में पहले पेयजल, सफाई और अन्य मूलभूत सुविधाओं की स्थिति संतोषजनक नहीं थी। लेकिन प्रधानाचार्य भूदेव व्यास के कार्यभार संभालने के बाद व्यवस्थाओं में सुधार हुआ है। विद्यालय में पेयजल व्यवस्था, साफ-सफाई और ऑनलाइन कक्षाओं जैसी सुविधाओं को बेहतर किया गया है।</p>
<p><strong>बारिश में टपकती छत, परिसर में जलभराव</strong><br />बरसात के दिनों में विद्यालय भवन की स्थिति और खराब हो जाती है। छत से पानी टपकने के कारण कक्षाओं में बैठना मुश्किल हो जाता है। वहीं परिसर में पानी भरने से विद्यार्थियों को आवागमन में परेशानी उठानी पड़ती है। पर्याप्त कक्षों की कमी के कारण भी शिक्षण कार्य प्रभावित हो रहा है और समय पर पाठ्यक्रम पूरा करने में दिक्कतें आ रही हैं।</p>
<p><strong>इनका कहना है </strong><br /> विद्यालय में अध्यापकों के रिक्त पदों के चलते शिक्षण कार्य प्रभावित हो रहा है। शिक्षा विभाग को विद्यालय में अध्यापक लगाने चाहिए।<br /><strong>-पूर्ति ओझा, छात्रा</strong></p>
<p>विद्यालय में कक्षा कक्षा का अभाव है। एक-एक भवन में दो-दो क्लास संचालित होती हैं। शिक्षण कार्य प्रभावित होता है।<br /><strong>- योगेश प्रजापति, छात्र</strong></p>
<p>विद्यालय में बारिश होते ही जलभराव होजाता है। प्रार्थना और खेलने में परेशानी होती है। पानी निकासी की समस्या है। अध्यापक भीलगाने चाहिए।<br /><strong>अंजली कुमारी जाटव,छात्रा</strong></p>
<p> विद्यालय में कई मूलभूत सुविधाओं काअभाव था। स्कूल प्रिंसिपल ने व्यवस्थाएं दुरुस्त कारवाई है लेकिन अध्यापकों के पद रिक्त होने के चलते शिक्षण व्यवस्था में बेपटरी हो रही है।<br /><strong>- मुकेश ओझा, छात्र</strong></p>
<p> शिक्षकों की कमी को लेकर शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारियों को प्रस्ताव भेजा जा चुका है फिलहाल कुछ शिक्षकों की वैकल्पिक व्यवस्था की गई है, लेकिन कई बार सरकारी बैठकों और अन्य प्रशासनिक कार्यों के कारण शिक्षकों को बाहर जाना पड़ता है, जिससे विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित होती है। विद्यालय में अध्यापकों के पद रिक्त हैं इस संबंध में शिक्षा विभाग की उच्च अधिकारियों को प्रस्ताव बनाकर भिजवा दिया है।<br /><strong>- भूदेव व्यास, प्रिंसिपल, महात्मा गांधी राजकीय विद्यालय, राजपुर</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बारां</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 31 Jul 2026 14:57:19 +0530</pubDate>
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                <title>सुवास पंचायत में स्वच्छता व्यवस्था फेल, गांवों में गंदगी बनी मुसीबत</title>
                                    <description><![CDATA[ नालियों की सफाई और कचरा संग्रहण की व्यवस्था दुरुस्त करने की मांग तेज।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/baran/sanitation-system-fails-in-suvas-panchayat--filth-in-villages-becomes-a-major-issue/article-161428"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-07/111200-x-600-px)-(6)6.png" alt=""></a><br /><p>किशनगंज। केंद्र एवं  राज्य सरकार द्वारा संचालित स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत भले ही स्वच्छत को लेकर लगातार दिशा-निर्देश जारी किए जा रहे हों, लेकिन किशनगंज पंचायत समिति क्षेत्र की ग्राम पंचायत सुवास में जमीनी हकीकत इससे अलग नजर आ रही है। ग्राम ग्राम सुवास, नयागांव सहित पंचायत क्षेत्र के कई गांवों में नियमित सफाई व्यवस्था नहीं होने से जगह-जगह कचरे के ढेर लगे हुए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि गांवों में नालियां गंदगी से अटी पड़ी हैं, जिससे दुर्गंध फैल रही है और मच्छरों का प्रकोप बढ़ने से संक्रामक बीमारियों का खतरा बना हुआ है। स्वच्छता अभियान के तहत लाखों रुपए खर्च होने के बावजूद धरातल पर सफाई व्यवस्था प्रभावी दिखाई नहीं दे रही है।</p>
<p><strong>निर्देशों के बाद भी हालात जस के तस</strong><br />ग्रामीणों के अनुसार पंचायत समिति के अधिकारियों द्वारा समय-समय पर निरीक्षण कर सफाई व्यवस्था सुधारने के निर्देश दिए जाते रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद स्थिति में कोई खास सुधार नहीं हुआ है। इससे पंचायत क्षेत्र में स्वच्छता व्यवस्था को लेकर गंभीर लापरवाही सामने आ रही है।</p>
<p><strong>मंत्री के निर्देशों की नहीं हो रही पालना</strong><br />स्वच्छता को लेकर दिए जा रहे उच्च अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के निर्देशों की प्रभावी पालना नहीं हो रही है। उन्होंने मांग की है कि गांवों में नियमित सफाई कर्मियों की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, नालियों की समय पर सफाई कराई जाए और स्वच्छ भारत मिशन के नियमों का सख्ती से पालन करवाया जाए।</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />सुवास गांव के मुख्य सड़क पर नालिया निर्माण नहीं होने से पानी सड़क पर बहता रहता है। गंदा पानी सड़कों पर बहता रहता है। कई बार शिकायत करने के बाद भी कोई सुनवाई नहीं होती।<br /><strong>-लेखराज, ग्रामीण</strong></p>
<p>बरसात में हालात और खराब हो जाते हैं। घरों के सामने गंदगी और पानी भरने से मच्छर, मक्खी पैदा होने से बच्चो और बुजुर्गों के बीमार होने का डर बना रहता है।<br /><strong>-सुनील, ग्रामीण</strong></p>
<p>स्वच्छ भारत अभियान सिर्फ कागजों तक सीमित नजर आता है। गांव में नियमित सफाई हो और कचरा उठाने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।<br /><strong>- गौरव, ग्रामीण</strong></p>
<p>गांव का निरीक्षण कर नाली निर्माण, कचरा संग्रहण, नियमित सफाई को लेकर ग्राम विकास अधिकारी को निर्देशित किया गया है।<br /><strong>- नवल किशोर मीणा,कार्यवाहक विकास अधिकारी</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बारां</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 30 Jul 2026 15:11:28 +0530</pubDate>
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                <title>बपावरकलां न्यू बस स्टैंड पर बिना नाले के बन रही सीसी सड़क</title>
                                    <description><![CDATA[निर्माणाधीन सीसी सड़क दुकानों के स्तर से  एक फीट ऊंची बन रही ।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/cc-road-being-built-at-bapawarkalan-new-bus-stand-without-a-drainage-channel/article-160646"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-07/1200-x-600-px)-(2)61.png" alt=""></a><br /><p>बपावरकलां। लाल बहादुर शास्त्री न्यू बस स्टैंड पर बन रही सीसी सड़क को लेकर दुकानदारों और ग्रामीणों ने जल निकासी व्यवस्था नहीं होने पर चिंता जताई है।स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क निर्माण से पहले बरसाती पानी की निकासी के लिए नाले या ड्रेनेज की व्यवस्था नहीं की गई है। ऐसे में बारिश के दौरान बस स्टैंड क्षेत्र में जलभराव की समस्या बढ़ सकती है और दुकानदारों को नुकसान उठाना पड़ सकता है।दुकानदारों का कहना है कि निर्माणाधीन सीसी सड़क दुकानों के स्तर से करीब एक फीट ऊंची बनाई जा रही है। ऐसे में बरसात के दौरान पानी निकासी का रास्ता नहीं होने से पानी दुकानों में घुसने की आशंका बनी हुई है। लोगों ने कहा कि यदि सड़क के साथ नालों का निर्माण नहीं किया गया तो सीसी सड़क बनाने का उद्देश्य अधूरा रह जाएगा।<br /> <br />सीसी रोड निर्माण किया जा रहा है, लेकिन इसके साथ पानी निकासी के लिए नाले बनाना भी जरूरी है। यदि ड्रेनेज व्यवस्था नहीं हुई तो भविष्य में बस स्टैंड पर पानी भरने की समस्या बनी रहेगी और दुकानदारों को लाखों रुपए का नुकसान हो सकता है।<br /><strong>-गौरव सिंगला , दुकानदार, न्यू बस स्टैंड,बपावरकलां</strong></p>
<p>पहले भी दुकानों में पानी भरने की समस्या रही है। जनप्रतिनिधियों को भी समस्या से अवगत कराया गया, लेकिन अभी तक समाधान नहीं हुआ है।</p>
<p>न्यू बस स्टैंउ की जल निकासी समस्या का स्थायी समाधान होना जरूरी है। <br /><strong>- प्रमोद पोर्टर, दुकानदार, न्यू बस स्टैंड, बपावरकलां</strong></p>
<p>विभाग के पास वर्तमान में केवल सीसी सड़क निर्माण का कार्य है, नाला निर्माण काप्रस्ताव नहीं है। इस संबंध में उच्च अधिकारियों से संपर्क कर समस्या के समाधान का प्रयास किया जाएगा।<br /><strong>- राज विजयवर्गीय, एईएन, आरएसआरडीए</strong></p>
<p>सीसी सड़क का निर्माण ग्राम पंचायत द्वारा नहीं कराया जा रहा है। फिर भी वे इस समस्या को लेकर ऊर्जा मंत्री सेचर्चा करेंगे और समाधान कराने का प्रयास करेंगे।<br /><strong>- मुरलीधर वैष्णव, ग्राम विकास अधिकारी, बपावरकलां</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 23 Jul 2026 11:03:27 +0530</pubDate>
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                            </item>
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                <title>असर खबर का : अटल सरोवर के सामने जलभराव की समस्या से क्षेत्रवासियों को मिली राहत</title>
                                    <description><![CDATA[पालिका ने विशेष सफाई अभियान चलाकर सड़क से कीचड़ व गंदगी हटाई।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/impact-of-the-report--residents-get-relief-from-waterlogging-issues-in-front-of-atal-sarovar/article-159338"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-07/1200-x-600-px)-(4)8.png" alt=""></a><br /><p>कापरेन। अटल सरोवर के सामने बारिश के बाद सड़क पर जलभराव, कीचड़ और गंदगी की समस्या को लेकर दैनिक नवज्योति में 8 जुलाई के अंक में समाचार प्रकाशित होने के बाद नगर पालिका प्रशासन हरकत में आ गया। बुधवार सुबह पालिका की सफाई टीम मौके पर पहुंची और विशेष सफाई अभियान चलाकर सड़क पर फैले कीचड़ व गंदगी को हटाया।  साथ ही निर्माण कार्य के दौरान बंद किए गए नाले को खुलवाकर जल निकासी व्यवस्था सुचारु कर दी, जिससे क्षेत्रवासियों को राहत मिली।</p>
<p>गौरतलब है कि शक्ति चौराहा पर चल रहे नाला निर्माण कार्य के दौरान शिवनगर की ओर से आने वाले नाले का रास्ता बंद कर दिया गया था। मंगलवार को हुई बारिश के बाद पानी की निकासी नहीं होने से अटल सरोवर के सामने मुख्य सड़क पर जलभराव हो गया। पानी उतरने के बाद सड़क पर कीचड़ फैल गया और आसपास दुर्गंध की स्थिति बन गई थी। स्थानीय लोगों ने इस समस्या से प्रशासन को पूर्व में भी अवगत कराया था। समाचार प्रकाशित होने के बाद नगर पालिका प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए सफाई अभियान चलाया तथा बंद नाले को खुलवाकर जल निकासी व्यवस्था बहाल कर दी। स्थानीय नागरिकों ने उम्मीद जताई कि भविष्य में निर्माण कार्य के दौरान ऐसी लापरवाही नहीं बरती जाएगी, ताकि बारिश के समय आमजन को परेशानी का सामना नहीं करना पड़े।पालिका ने विशेष सफाई अभियान चलाकर सड़क से कीचड़ व गंदगी हटाई।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बूंदी</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 09 Jul 2026 14:41:31 +0530</pubDate>
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                <title>बारिश बनी एमबीएस अस्पताल की सबसे बड़ी परीक्षा : बदहाल ड्रेनेज व्यवस्था बनी मरीजों की मुसीबत</title>
                                    <description><![CDATA[ नई बिल्डिंग, सेंट्रल लैब और अधीक्षक कार्यालय तक जाने वाले रास्तों पर भरता है पानी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/rain-poses-the-biggest-challenge-for-mbs-hospital--poor-drainage-system-causes-trouble-for-patients/article-159324"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-07/1200-x-600-px)-(1)20.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। संभाग के सबसे बड़े एमबीएस अस्पताल में मानसून की पहली बारिश के साथ ही वर्षों पुरानी जलभराव की समस्या फिर सामने आने लगती है। अस्पताल की नई बिल्डिंग के बाहर, सेंट्रल लैब, अधीक्षक कार्यालय तक जाने वाले मार्ग सहित कई स्थानों पर थोड़ी सी बारिश के बाद ही पानी भर जाता है। मरीजों, उनके परिजनों और अस्पताल स्टाफ को पानी से होकर गुजरना पड़ता है। कई बार स्ट्रेचर और व्हीलचेयर निकालने तक में परेशानी होती है, जिससे गंभीर मरीजों को समय पर उपचार तक पहुंचाने में दिक्कत आती है।</p>
<p>अस्पताल प्रशासन ने पिछले कुछ समय में पुरानी बिल्डिंग से पर्ची काउंटर, जांच काउंटर और इमरजेंसी ओपीडी जैसी महत्वपूर्ण सेवाओं को नई बिल्डिंग में स्थानांतरित कर दिया है। इससे मरीजों को आधुनिक सुविधाओं का लाभ मिला है और एक ही स्थान पर अधिकांश सेवाएं उपलब्ध होने लगी हैं। लेकिन बारिश के दौरान नई बिल्डिंग के बाहर जलभराव होने से मरीजों को इन सुविधाओं तक पहुंचने में परेशानी उठानी पड़ती है। हालांकि पुरानी बिल्डिंग में अब मुख्य रूप से भर्ती मरीजों को रखा जाता है, लेकिन बारिश के मौसम में वहां भी सीलन, पानी टपकने और आसपास जलभराव जैसी समस्याएं सामने आती हैं।</p>
<p><strong>मोर्चरी तक पहुंचने वाला रास्ता बना सबसे बड़ी चिंता</strong><br />एमबीएस अस्पताल से मोर्चरी की ओर जाने वाला मार्ग लंबे समय से जर्जर हालत में है। सड़क जगह-जगह से उखड़ चुकी है और बड़े-बड़े गड्ढे बन चुके हैं। बारिश के दौरान इन गड्ढों में पानी भर जाता है, जिससे उनकी गहराई का अंदाजा लगाना भी मुश्किल हो जाता है। ऐसे में एंबुलेंस, शव वाहन, अस्पताल के अन्य वाहन और पैदल आने-जाने वाले लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। हालात इतने खराब हो जाते हैं कि कई बार मोर्चरी तक पहुंचना भी चुनौती बन जाता है। शव लेकर आने वाले परिजनों को भी कीचड़ और जलभराव के बीच से गुजरना पड़ता है। अस्पताल परिसर का यह मार्ग वर्षों से मरम्मत का इंतजार कर रहा है, लेकिन अब तक स्थायी समाधान नहीं हो सका है।</p>
<p>डॉक्टरों की सेवाएं और चिकित्सा सुविधाएं बेहतर हैं, लेकिन बारिश के मौसम में अस्पताल परिसर की स्थिति चिंता बढ़ा देती है।<br /><strong>-सुशिला बाई, मरीज</strong></p>
<p>- नई बिल्डिंग बनने से सुविधाएं तो बढ़ी हैं, लेकिन बारिश के समय बाहर पानी भर जाता है। बुजुर्ग और गंभीर मरीजों को अस्पताल तक पहुंचाने में काफी परेशानी होती है।<br /><strong>सुरज सिंह, मरीज</strong></p>
<p>सेंट्रल लैब और जांच काउंटर तक जाने में पानी और कीचड़ से होकर गुजरना पड़ता है। प्रशासन को ड्रेनेज व्यवस्था स्थायी रूप से सुधारनी चाहिए। मोर्चरी की सड़क इतनी खराब है कि बारिश में गड्ढे दिखाई ही नहीं देते। एंबुलेंस तक हिचकोले खाती हुई गुजरती है। अस्पताल परिसर की सड़कें जल्द से जल्द बनाई जानी चाहिए।<br /><strong>- श्वेता गुर्जर, मरीज</strong></p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />मानसून को देखते हुए अस्पताल परिसर की सभी प्रमुख नालियों की सफाई करवाई जा रही है ताकि पानी की निकासी बाधित न हो। संबंधित विभागों को आवश्यक निर्देश दिए गए हैं और लगातार निगरानी रखी जा रही है। उन्होंने बताया कि स्थायी समाधान के लिए केडीए को ड्रेनेज निर्माण का कार्य सौंप दिया गया है। फिलहाल वर्क ऑर्डर जारी होने की प्रक्रिया चल रही है। जैसे ही कार्यादेश मिलेगा, सबसे पहले अस्पताल परिसर में आधुनिक ड्रेनेज सिस्टम विकसित किया जाएगा। इसके बाद क्षतिग्रस्त और जर्जर सड़कों का पुनर्निर्माण कराया जाएगा, जिससे मरीजों और उनके परिजनों को राहत मिल सके।<br /><strong>- डॉ. आर.के. सिंह, अधीक्षक एमबीएस अस्पताल</strong></p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 09 Jul 2026 14:36:30 +0530</pubDate>
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