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                <title>carbon monoxide - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>जापान के पेपर मिल में भीषण हादसा: गैस रिसाव से छह कर्मचारियों की हालत गंभीर, बचाव व राहत कार्य जारी</title>
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                        <![CDATA[जापान के गिफू स्थित डाइओ पेपर कॉर्प संयंत्र में मंगलवार सुबह संदिग्ध कार्बन मोनोऑक्साइड रिसाव से छह श्रमिक बीमार हो गए। वाल्व बदलने के दौरान हुए इस हादसे में दो कर्मचारियों की हालत गंभीर है। स्थानीय प्रशासन और पुलिस टॉयलेट पेपर बनाने वाली इस मिल में सुरक्षा मानकों की विस्तृत जांच कर रहे हैं।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/horrific-accident-in-japans-paper-mill-condition-of-six-employees/article-146000"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/japan-gus-accident.png" alt=""></a><br /><p>टोक्यो। जापान के गिफू प्रान्त के कानी इलाके में एक कागज मिल में मंगलवार को संदिग्ध गैस रिसाव के कारण छह कर्मचारी प्रभावित हुए । इनमें में से दो की हालत गंभीर बताई जा रही है। रिर्पोट के अनुसार, डाइओ पेपर कॉर्प के संयंत्र में सुबह सूचना मिली कि दो कर्मचारी किसी अज्ञात गैस की चपेट में आने के बाद सांस लेने में तकलीफ महसूस कर रहे हैं। घटना के बाद 20 से 60 वर्ष की आयु के कुल छह घायल श्रमिकों को तत्काल अस्पताल ले जाया गया।</p>
<p>चिकित्सकों के अनुसार, सांस की गंभीर समस्या से जूझ रहे 50 और 60 वर्ष के दो कर्मचारी बोलने की स्थिति में नहीं हैं, जबकि अन्य चार  मामूली रूप से प्रभावित हुए । प्रारंभिक पुलिस जांच में सामने आया है कि ये कर्मचारी कार्बन मोनोऑक्साइड ले जाने वाले एक वाल्व को बदलने का काम कर रहे थे, तभी संभवत: वे इस जहरीली गैस की चपेट में आ गए।</p>
<p>उल्लेखनीय है कि, यह संयंत्र टॉयलेट पेपर जैसे उत्पादों का निर्माण करता है और यहाँ ठेकेदारों सहित लगभग 1,000 लोग कार्यरत हैं। पुलिस और स्थानीय प्रशासन मामले की विस्तृत जांच कर रहे हैं।</p>]]>
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                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 10 Mar 2026 16:50:45 +0530</pubDate>
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                <title>प्रदूषण से बिगड़ने लगा कोटा की हवा का स्वास्थ्य</title>
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                        <![CDATA[वायुमंडल में कार्बन मोनोआॅक्साइड का सर्वाधिक उत्सर्जन गाड़ियों के धुएं और जंगलों की आग से होता है। ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/the-health-of-kota-s-air-started-deteriorating-due-to-pollution/article-59768"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-10/pradushan-s-bigadne-lga-kota-ki-hawa-ka-svasthya...kota-news-17-10-2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। बारिश का दौर समाप्त होने के बाद अक्टूबर माह में गर्मी के तेवर गर्म होते जा रहे हैं। इस कारण कोटा शहर में हवा में धूल कणों (पार्टिकुलेट मैटर) के साथ कार्बन मोनोआॅक्साइड का प्रदूषण बढ़ने लगा है। अक्टूबर माह में शहर का वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 110 के पास पहुंच गया है। हवा में धूल व कार्बन के महीन कणों के अलावा दूसरा सबसे बड़ा प्रदूषक कार्बन मोनोआॅक्साइड है। शहर में लगातार बढ़ रहे वाहनों की वजह से कार्बन मोनोआॅक्साइड का उत्सर्जन बढ़ रहा है। </p>
<p><strong>धीमी हो गई हवा की गति</strong><br />सितंबर के अंतिम सप्ताह से एंटी साइक्लोनिक सरकुलेशन बनने की वजह से कुछ हिस्सों में मानसून की विदाई हो गई थी। उसके बाद 3 अक्टूबर को पूरे प्रदेश से मानसून के विदाई की घोषणा कर दी गई। मानसून जाने के साथ ही हवा में नमी कम होने लग गई। साथ ही हवा की गति भी धीमी हो गई। जिसकी वजह से संबंधित क्षेत्र के प्रदूषक उसी वायुमंडल में बने हुए हैं। इससे वायु की गुणवत्ता खराब हो रही है। चिकित्सकों के अनुसार हृदय रोग से ग्रसित व्यक्तियों के लिए अत्यधिक कार्बन मोनोआॅक्साइड हानिकारक है।</p>
<p><strong>कार्बन मोनोआॅक्साइड क्यों है हानिकारक</strong><br />मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार वायुमंडल में कार्बन मोनोआॅक्साइड का सर्वाधिक उत्सर्जन गाड़ियों के धुएं और जंगलों की आग से होता है। कार्बन मोनोआॅक्साइड शरीर में आॅक्सीजन के परिवहन को बाधित करती है, जिससे शरीर की कोशिकाओं और उत्तकों को आॅक्सीजन नहीं मिलने की वजह से सांस लेने में परेशानी होती है। हृदय रोग से ग्रसित लोगों को सर्वाधिक परेशानी होती है, उन्हें छाती में दर्द सहित अन्य दिक्कत पैदा हो सकती है।</p>
<p><strong>छह प्रदूषक का होता है मापन</strong><br />केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण मंडल की ओर से वायु की गुणवत्ता के लिए छह प्रदूषक का मापन करता है। इसमें हवा के महीन कण यानी पार्टिकुलर मैटर पीएम 10, पीएम 2.5, कार्बन मोनोआॅक्साइड, नाइट्रोजन डाइआॅक्साइड, सल्फर डाइआॅक्साइड और ओजोन शामिल है। वर्तमान में पीएम कणों और कार्बन मोनोआॅक्साइड को छोड़कर सभी प्रदूषक का एक्यूआई 50 के भीतर बना हुआ है।</p>
<p><strong>धूल के कण शरीर को दे रहे रोग</strong><br />वाहनों की रेलमपेल से उड़ते धूल के कण लोगों को श्वांस, चर्म एवं अस्थमा जैसे रोग परोसती दिखाई पड़ती है। यही कारण है कि हर महीने सैंकडों लोग प्रदूषणजनित रोगों के शिकार हो रहे हैं। बारिश के दिनों में सड़कों पर धूल जम जाती है तो वायु गुणवत्ता 50 से नीचे पहुंच जाती है, लेकिन बारिश नहीं होती है तो यही धूल उड़कर एक्यूआई को 100 के पार पहुंचा देती हैं, जो खराब श्रेणी होती है।  वहीं औद्योगिक क्षेत्रों में उद्योगों की चिमनी से निकलने वाला धुआं भी वायु प्रदूषण को बढ़ाने वाला रहा है।</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />वायु प्रदूषण से अस्थमा, श्वांस रोग, दम भरना, एलर्जी, त्वचा जैसे रोग होते हैं। वाहन गुजरते हैं तो धूल उड़ती है। लोगों के फेंफड़ों तक श्वास के माध्यम से पहुंचती है। इस समय शहर में तीन से चार प्रतिशत लोग अस्थमा से पीड़ित हैं। अस्पताल में रोज 15 से 20 मरीज पहुंचते हैं।<br /><strong>- डॉ. विष्णु गोयल, श्वसन रोग विशेषज्ञ</strong></p>
<p>हवा में धूल व कार्बन के महीन कणों के अलावा दूसरा सबसे बड़ा प्रदूषक कार्बन मोनोआॅक्साइड है। शहर में लगातार बढ़ रहे वाहनों की वजह से कार्बन मोनोआॅक्साइड का उत्सर्जन बढ़ रहा है। साथ ही हवा की गति भी धीमी हो गई। जिसकी वजह से संबंधित क्षेत्र के प्रदूषक उसी वायुमंडल में बने हुए हैं।<br /><strong>- अमित सोनी, क्षेत्रीय अधिकारी, प्रदूषण नियंत्रण मंडल कोटा</strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
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                <pubDate>Tue, 17 Oct 2023 20:35:23 +0530</pubDate>
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