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                <title>water supply system - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>water supply system RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>जलकुंभी की चपेट में राणा प्रताप सागर बांध, फ्लोटर पंप और टरबाइनों पर बढ़ा खतरा</title>
                                    <description><![CDATA[कम वर्षा, बरसाती नालों की सफाई में देरी और अपस्ट्रीम से बहकर आई जलकुंभी ने बढ़ाई चिंता।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/rana-pratap-sagar-dam-is-plagued-by-water-hyacinth--risks-to-floating-pumps-and-turbines-have-increased/article-161426"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-07/111200-x-600-px)-(3)16.png" alt=""></a><br /><p>रावतभाटा । प्रदेश के प्रमुख जल स्रोतों में शामिल राणा प्रताप सागर बांध इन दिनों जलकुंभी (वॉटर हाईसिन्थ) के बढ़ते प्रकोप से जूझ रहा है। कम वर्षा, बरसाती नालों की समय पर सफाई नहीं होने और अपस्ट्रीम क्षेत्रों से बहकर आई जलकुंभी के कारण बांध का बड़ा क्षेत्र इसकी चपेट में आ गया है। इससे बांध की जल गुणवत्ता, जलीय जीव-जंतुओं के साथ-साथ फ्लोटर पंप, टरबाइन और पेयजल आपूर्ति व्यवस्था पर भी खतरा बढ़ गया है।</p>
<p>विशेषज्ञों के अनुसार जलकुंभी पानी की सतह पर तेजी से फैलने वाला पौधा है, जो पानी में घुलित ऑक्सीजन की मात्रा को कम कर देता है। इसके कारण मछलियों सहित अन्य जलीय जीवों के जीवन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। वर्तमान में मत्स्य प्रजनन काल होने के कारण इसका असर और गंभीर माना जा रहा है। समय रहते नियंत्रण नहीं किया गया तो मत्स्य पालन से जुड़े लोगों की आजीविका भी प्रभावित हो सकती है।</p>
<p><strong>स्थानीय लोगों ने उठाई विशेष सफाई अभियान की मांग</strong><br />स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि बरसात से पहले बरसाती नालों की नियमित सफाई और जलकुंभी हटाने के लिए विशेष अभियान चलाया जाता तो स्थिति इतनी गंभीर नहीं होती। समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो जलकुंभी की समस्या पर्यावरण, जलीय जैव विविधता और शहर की पेयजल व्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है।</p>
<p><strong>धीमे जल प्रवाह से बढ़ा फैलाव</strong><br />राणा प्रताप सागर बांध का वर्तमान जलस्तर 1139.34 फीट दर्ज किया गया है। 28 जुलाई 2026 तक राणा प्रताप सागर क्षेत्र में 235.20 मिमी, गांधी सागर में 199.00 मिमी, जवाहर सागर में 250.10 मिमी और कोटा बैराज क्षेत्र में 195.20 मिमी वर्षा दर्ज की गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि अपेक्षाकृत कम वर्षा और जल प्रवाह की धीमी गति के कारण जलकुंभी को फैलने का अनुकूल वातावरण मिला है।</p>
<p>अपस्ट्रीम क्षेत्रों के बरसाती नालों से बहकर जलकुंभी बांध क्षेत्र में पहुंचती है। यदि मानसून से पहले इन नालों की प्रभावी सफाई कर दी जाए तो जलकुंभी की समस्या पर काफी हद तक नियंत्रण पाया जा सकता है। जलकुंभी के कारण फ्लोटर पंप और टरबाइनों की कार्यक्षमता प्रभावित होती है, जिससे इनके संचालन में बाधाएं उत्पन्न हो सकती हैं।<br /><strong>- आशीष जैन, अधिशासी अभियंता, राणा प्रताप सागर बांध</strong></p>
<p>जलकुंभी के कारण फ्लोटर पंपों के संचालन में परेशानी आती है। इससे पेयजल आपूर्ति व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका बनी रहती है। विभाग की ओर से आवश्यकता के अनुसार सफाई और निगरानी की जाती है, ताकि जलापूर्ति व्यवस्था सुचारू बनी रहे।<br /><strong>- पवन शर्मा, अधिशासी अभियंता,जलदाय विभाग</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 30 Jul 2026 15:09:17 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>111 शहरों में 48 घंटे, 11 में 96 घंटे के अंतराल से पानी की आपूर्ति</title>
                                    <description><![CDATA[जलदाय विभाग की ओर से राज्य के 251 शहरों में पीने के पानी की सप्लाई का सिस्टम बना हुआ है, लेकिन पानी की किल्लत के चलते 11 शहरों में तो चार दिन बाद भी एक बार पानी की सप्लाई बाधित हो रही है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/water-supply-in-111-cities-with-an-interval-of-48/article-76570"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-01/tap-water-bisalpur.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। प्रदेश में गर्मियों की दस्तक के साथ ही पीने के पानी की डिमांड भी पहले के बजाय बढ़ने लगी है। जलदाय विभाग की ओर से राज्य के 251 शहरों में पीने के पानी की सप्लाई का सिस्टम बना हुआ है, लेकिन पानी की किल्लत के चलते 11 शहरों में तो चार दिन बाद भी एक बार पानी की सप्लाई बाधित हो रही है। हालांकि विभाग ने इन शहरों में 96 घंटे के अंतराल में पानी सप्लाई का सिस्टम बना रखा है। इसके साथ ही 12 शहरों में 72 घंटे के अंतराल पर नल से पानी की आपूर्ति की जा रही हैं। 117 शहर ऐसे हैं, जिनमें एक दिन में एक बार ही पानी की आपूर्ति हो रही है।</p>
<p><strong>पांच जिलों में सामान्य से कम वर्षा</strong><br />मानसून 2023 में प्रदेश में सामान्य से 0.8 प्रतिशत अधिक (539.30 एमएम के विरूद्ध 543.73 एमएम) वर्षा हुई। दो जिलों में असामान्य, आठ जिलों में अधिक एवं 18 जिलों में सामान्य वर्षा रिकॉर्ड की गई। 5 जिलों कोटा, बारां, बूंदी, झालावाड़ एवं चित्तौडगढ़ से सामान्य से कम वर्षा रिकॉर्ड की गई।</p>
<p><strong>60 फीसदी भूजल से आपूर्ति</strong><br />पानी डिमांड की 60 फीसदी पूर्ति भूजल से हो रही है, शेष सतही जल परियोजनाओं से की जा रही हैं। 2022 के सर्वे के अनुसार राज्य के 302 ब्लॉक में से 203 ब्लॉक अत्यधिक दोहित, 23 विषम एवं 29 अर्द्ध विषम ब्लॉक हैं। प्रदेश में 85 शहर और कस्बें सतही जल स्रोत एवं 89 शहर भूगर्भीय जल स्रोत पर आधारित है। शेष 77 सतही एवं भूगर्भीय दोनों जल स्रोतों पर निर्भर हैं। सात प्रमुख शहर जयपुर, अजमेर, जोधपुर, बीकानेर, भरतपुर, कोटा एवं उदयपुर में सतही जल स्रोत से पेयजल आपूर्ति की जा रही है।</p>
<p><strong>टैंकरों से आपूर्ति की व्यवस्था</strong><br />जिन शहरों में पानी सप्लाई में व्यवधान पैदा होने पर शिकायतें प्राप्त हो रही हैं, उनमें विभाग की ओर से टैंकरों से पानी की आपूर्ति की जा रही हैं अर्थात 32 शहरों और 2700 गांव-ढाणियों में हर दिन टैंकरों से पानी की सप्लाई हो रही है। इनकी संख्या में तापमान में बढ़ोतरी के साथ ही वृद्धि हो रही है।</p>
<p><strong>72 घंटे में सप्लाई</strong><br />हमीरगढ़, गंगापुर (भीलवाड़ा), डीडवाना, मेडतासिटी, बासनी (नागौर), खेड़ली, बहादुरपुर, कामां (भरतपुर), मुंडावर (दौसा), विराटनगर (जयपुर), बाड़मेर, सम्दड़ी (बाड़मेर)। </p>
<p><strong>यहां 96 घंटे में</strong> <br />बांदीकुई, दौसा एवं बसवा (जिला दौसा), श्रीमाधोपुर (जिला सीकर), बालोतरा, सिवाना (जिला बाड़मेर), भीनमाल (जिला जालौर), आमेट, देवगढ़ (जिला राजसमंद), मकराना, बोरावड (जिला नागौर)।<br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 02 May 2024 15:09:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>हाईटेंशन लाइन में फाल्ट आने से 30 गांव अंधेरे में डूबे</title>
                                    <description><![CDATA[कस्बे में जलापूर्ति की व्यवस्था पर्याप्त मात्रा में बिजली नहीं मिलने पर बिगड़ने लगी है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/30-villages-plunged-into-darkness-due-to-fault-in-high-tension-line/article-60120"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-10/high-tension-line-main-fault-aane-se-30-gaanv-andhere-mein-doobe...bundi-karwar-news...21-10-2023.jpg" alt=""></a><br /><p> करवर। लाखेरी से आ रही 33 केवी बिजली की लाइन में गुरुवार रात अचानक फाल्ट आ गया। इस वजह से रात 10 बजे बिजली बाधित होकर कस्बे को छोड़कर करवर, तलवास व जरखोदा, ग्रिड से जुड़े फीडरों के करीब 30 गांवों की बिजली आपूर्ति करीब 15 घण्टे तक ठप रही। रातभर ग्रामीण अंधेरे में रहे। जिससे शुक्रवार को ग्रामीणों की दिनचर्या बिगड़ गई। गांवों में जलसकंट गहरा गया। काफी परेशानी झेलने के बाद 15 घंटे पश्चात शुक्रवार सुबह 12 बजे बिजली आपूर्ति सुचारू हुई तब जाकर ग्रामीणों को राहत मिली। इसके बाद 132 जीएसएस में आयल चेंज के लिए 1 घण्टे का शट डाउन हुआ। </p>
<p><strong>पूरी रात अंधेरे में गुजारनी पड़ी, रेलनी हुई प्रभावित</strong><br />बिजली आपूर्ति की वजह से कई फीडर की लाइनों में फाल्ट और अन्य व्यवधान के चलते शाम तक आंख मिचौनी बनी रही। बिजली गुल रहने से ग्रामीणों को पूरी रात अंधेरे में रहना पड़ा। काश्तकारों को बड़ी परेशानी हुई। खेतों में रेलनी कार्य प्रभावित हो गया। नलकूप बन्द रहने से लोगों को दूरदराज से आवश्यक पानी जुटाना पड़ा। गुरुवार रात 10 बजे लाखेरी से आ रही 33 केवी विद्युत लाइन में करवर व इंद्रगढ़ के बीच फाल्ट होने से करवर, जरखोदा, तलवास ग्रिड से जुड़े 30 गांवों की बिजली ठप हो गई। जो सुबह 12 बजे सुचारू हो पाई।</p>
<p><strong> गड़बड़ाई पेयजल आपूर्ति </strong><br />बिजली कटौती का असर कस्बे सहित जलापूर्ति पर भी पड़ रहा है। कस्बे में जलापूर्ति की व्यवस्था पर्याप्त मात्रा में बिजली नहीं मिलने पर बिगड़ने लगी है। बिजली कटौती का असर कस्बे के उद्योग धंधे के साथ - साथ जलापूर्ति पर भी पड़ रहा है। कस्बे में जलापूर्ति की व्यवस्था पर्याप्त मात्रा में बिजली नहीं मिलने पर बिगड़ने लगी है। ऐसे में लोगों के कंठ तर करने मुश्किल हो गए हैं।  जलदाय विभाग से मिली जानकारी के अनुसार जलदाय विभाग की बिजली बुधवार रात 10 बजे से गुल हो गई थी जो शुक्रवार को दोपहर 1 बजे के बाद मिली है। इससे जलदाय विभाग और बासला बांध से करवर कस्बे की पेयजल परियोजना की लाइनों पर भी असर पड़ रहा है। जिससे पानी की भंडारण नहीं हो पाया। वहीं जलापूर्ति सप्लाई छोड़ने के समय भी दिक्कत आ रही है।</p>
<p><strong>ग्रामीणों की परेशानी उन्हीं की जबानी</strong><br />बिजली और पानी की समस्या से ग्रसित हैं। कस्बे में कभी भी बिजली गुल होने से बिजली और फिर पानी की समस्या हो आ जाती है। जलदाय विभाग की लापरवाही से आए दिन पानी की मोटरें जल जाती है जिससे पेयजल आपूर्ति बाधित हो जाती है। कस्बे की पेयजल आपूर्ति व्यवस्था को सुधारने की जरूरत है। पर्याप्त पानी होने के बावजूद भी समय पर सप्लाई नहीं होती है। कस्बे में दोनों विभागों के अधिकारी व जनप्रतिनिधि भी इस समस्या की ओर ध्यान देते जिससे बिजली व पानी की समस्या से निजात मिल सकी।<br /><strong>- पवन तिवारी, करवर</strong></p>
<p>जलदाय विभाग को बिजली आपूर्ति समय पर मिलनी चाहिए, जिससे पेयजल आपूर्ति प्रतिदिन सुचारू हो सके। पानी व भंडारण व्यवस्था पर्याप्त होनी पर भी दोनों विभागों की आपसी तालमेल के अभाव में कस्बे वासियों को खामियाजा भुगतना पड़ा रहा है।<br /><strong>- बालमुकुंद जैन, करवर</strong></p>
<p>लाखेरी 132 जीएसएस से आ रही 33 केवी बिजली लाइन में फाल्ट आ गया था। रात को अंधेरे के चलते कार्य में देरी हुई है। सुबह खराबी ठीक कर आपूर्ति सुचारू की जा चुकी है।<br /><strong> - कमलेश मीना,डिस्कॉम एईएन </strong></p>
<p>बिजली व्यवधान से कस्बे में एक दिन छोड़कर दूसरे दिन पानी की सप्लाई की जा रही है जैसे ही बिजली सुचारू रूप से मिलेंगी कस्बे को पेयजलापूर्ति सुचारू हो जायेगी।<br /><strong>- रामखिलाड़ी मीणा ,सहायक अभियंता पीएचईडी नैनवां </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बूंदी</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 21 Oct 2023 20:48:50 +0530</pubDate>
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