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                <title>mawa - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>बड़ा सवाल - कहां से हो रही आपूर्ति ? कोटा में रोजाना खप रहा 3 टन मावा और तीन लाख लीटर दूध ,विभाग कर रहा शुद्धता का दावा</title>
                                    <description><![CDATA[सीएमएचओ बोले- 'बिक्री से लेकर निर्माण तक लगातार मॉनिटरिंग'।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/the-big-question--where-is-the-supply-coming-from--kota-consumes-3-tonnes-of-mawa--condensed-milk-solids--and-300-000-liters-of-milk-daily--the-department-claims-the-products-are-pure/article-163402"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-08/111200-x-600-px)-(3)43.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। महाराष्ट्र व गुजरात दोनों राज्यों में मिलावटी और नकली डेयरी उत्पादों (विशेषकर एनालॉग पनीर,बटर और चीज) के खिलाफ कड़ा प्रतिबंध और छापेमारी की कार्रवाई की गई है। दोनों राज्यों की सरकारों ने सार्वजनिक स्वास्थ्य और खाद्य सुरक्षा के मद्देनजर इन नान डेयरी प्रोडक्ट के निर्माण, भंडारण और परिवहन पर रोक लगा दी है। दोनों राज्यों के खाद्य सुरक्षा विभागों ने विभिन्न डेयरियों और निर्माण इकाइयों पर ताबड़तोड़ छापेमारी कर दूध, नकली पनीर,घी,और खतरनाक रसायन भारी मात्रा में जब्त किया है। महाराष्ट्र में तो मिलावटखोरों पर संगठित अपराध कानून मकोका जैसी सख्त धाराओं के इस्तेमाल पर भी विचार किया जा रहा है।</p>
<p> इसी मामले को लेकर दैनिक नवज्योति ने कोटा शहर के मार्केट पर नजर दौड़ाई तो हालात यहां भी कमतर नजर नहीं आए। कोटा में भी कई प्लांट में सोया पनीर धडल्ले से बनाया जा रहा है । बावजूद इसके खाद्य सुरक्षा अधिकारी यह दावा करते नजर आए कि कोटा में कोई नकली सामग्री नहीं बिक रही है। कोटा शहर में जुलाई 2026 तक विभाग ने कुल 356 कार्यवाहियां की गईं । अकेले डेयरी प्रोडक्ट के 119 सैंपल लिए जिसमें से 26 फीसदी सैम्पल अमानक मिले। हालात यह है कि कोटा में सामान्य दिनों में जहां प्रतिदिन 3 से 5 हजार किलो (5 टन) मावा खपता है, वहीं त्यौहारी सीजन में यह मांग बढ़ जाती है। कोटा में लगभग 1900 से अधिक छोटी बड़ी निजी डेयरियां हैं। यह डेयरियां 1.5 लाख लीटर से अधिक दूध की आपूर्ति कर रही हैं। बड़ा सवाल यह है कि फिर अन्य प्रोडक्ट कहां से बन रहे हैं।</p>
<p><strong>कोटा-बूंदी सरस डेयरी शहर में बड़ा आपूर्ति कर्ता</strong><br />कोटा-बूंदी दुग्ध संघ (सरस डेयरी) प्लांट की क्षमता 1.5 लाख लीटर प्रतिदिन है। दूध आपूर्ति व बाय-प्रोडक्ट्स के रूप में प्रतिदिन 1 से 1.25 लाख लीटर दूध कोटा-बूंदी के शहरी बूथों पर सप्लाई होता है। शेष दूध से घी, बटर, लस्सी, छाछ, श्रीखंड, मिल्क पाउडर व 4 स्वादों में फ्लेवर्ड मिल्क तैयार किया जाता है।</p>
<p><strong>4 क्विंटल पनीर व मावा</strong><br />डेयरी प्रबंधन की और से बताया गया कि मावा बनाने के लिए प्लांट में 6 इकाइयां कार्यरत हैं। प्रतिदिन 400 से 500 किलो (4 से 5 क्विंटल) शुद्ध दुग्ध पनीर तैयार होता है। वही डेयरी चेयरमेंन चैनसिंह राठौर ने बताया कि प्लांट मे किसी रूप में सोया पनीर या कृत्रिम उत्पाद नहीं बनाए जाते है।</p>
<p><strong>बोराबास, रावतभाटा व गांधीसागर से मुख्य आपूर्ति</strong><br />कोटा मावा व्यापार संघ के अध्यक्ष भगवान मित्तल के अनुसार, कोटा संघ में 40 पंजीकृत दुकानदार हैं जो मावे का थोक व खुदरा व्यापार करते हैं। कोटा से मावे की आपूर्ति पूरे हाड़ौती अंचल में की जाती है। मुख्य रूप से मावा कोटा के ग्रामीण व समीपवर्ती क्षेत्रों जैसे बोराबास, रावतभाटा और गांधीसागर से आता है। ये मुख्यतः पशुपालक प्रधान क्षेत्र हैं जहां डेयरी कलेक्शन चेन नहीं होने के कारण मावे का निर्माण व्यापक स्तर पर होता है। मांग बढ़ने पर स्थानीय आपूर्तिकर्ताओं के अलावा बाहर से भी मावा मंगवाया जाता है।</p>
<p><strong>कोल्ड स्टोरेज संचालकों को सख्त निर्देश</strong><br />खाद्य सुरक्षा अधिकारी संदीप अग्रवाल ने बताया कि मावा लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए वातानुकूलित कोल्ड स्टोरेज की आवश्यकता होती है। कोटा में वर्तमान में उपलब्ध दोनों कोल्ड स्टोरेज के संचालकों को सख्त हिदायत जारी की गई है कि वहां रखे जाने वाले प्रत्येक डेयरी प्रोडक्ट की पूरी जानकारी तुरंत विभाग को सूचित की जाए, ताकि शहर में कहीं से भी नकली या मिलावटी मावा प्रवेश न कर सके।<br /> <br /><strong>खाद्य विभाग का एक्शन</strong><br />कोटा में जिला कलेक्टर के निर्देशानुसार एवं सीएमएचओ डॉ. नरेंद्र नागर के पर्यवेक्षण में खाद्य सुरक्षा अधिकारियों में संदीप अग्रवाल, अरुण सक्सेना, चंद्रवीर सिंह जादोन व मौजीलाल कुंभकार की टीम द्वारा लगातार निरीक्षण एवं सेंपलिंग की जा रही है। मिल्क एवं मिल्क प्रोडक्ट के कुल 119 सैंपल लिए गए। जिनमें से 26 प्रतिशत की रिर्पोर्ट फेल हुई है। हालांकि लैब टेस्ट में सेम्पल फेल होने के बाद विभाग ने अदालत में सम्बन्धित दुकानदारों के खिलाफ केस लगाया जिनमें अदालती फैसलाें के बाद जुर्माने की कार्यवाहियां की जा रही है।</p>
<p><strong>356 कार्यवाहियां की गईं</strong><br />-डेयरी प्रोडक्ट के नमूने लिए -119<br />-पास: 88 सैंपल<br />-फेल: 31 सैंपल<br />-निर्णय लंबित: 4 सैंपल<br />-2 महीनों में अदालत में 12 नए केस प्रस्तुत किए गए<br />-26 मुकदमों के निर्णयों में मिलावटखोरों पर कुल 14,25,000 (14.25 लाख रुपये) का भारी-भरकम जुर्माना ठोका</p>
<p>मेरी दुकान मण्ड़ावर में है यहां की मावा मण्ड़ी से मावा ले जाते वर्षो हो गए कभी भी काेई शिकायत नहीं आई। कितने ही दुकानदारों से व्यापार कर चुका हुँ। क्वालिटी में मेरे ग्रहकों को कभी शिकायत का मौका नहीं मिला है।<br /><strong>-दिलीप, दुकानदार मण्ड़ावर झालावाड़</strong></p>
<p>साल भर कार्रवाई की जाती है। लगातार निरीक्षण एवं सेंपलिंग की जा रही है। हमारे चार अधिकारी लगातार नजर रखे हैं। हमारा प्रयास शहर में किसी प्रकार के मिलावटी पदार्थ बनने से लेकर बिक्री तक पर निगरानी रखी जा रही है।<br /><strong>-डा. नरेन्द्र नागर , सीएमएचओ</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 20 Aug 2026 15:02:36 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>घर में करें असली नकली की पहचान, बाजार में बिक रहा नकली घी, पनीर व मावा </title>
                                    <description><![CDATA[अगर आपको खाने में स्वाद नहीं आ रहा है तो मसालों को खरीदने से पहले इनकी जांच जरूर कर लें। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/tthis-news-is-for-women--identify-real-from-fake-at-home--fake-ghee--cheese-and-mawa-are-being-sold-in-the-market/article-61632"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-11/gan-(6).png" alt=""></a><br /><p>कोटा। दिवाली के मौके पर बाजारों में नकली घी, तेल, मावा और पनीर के साथ कई मसाले भी  बिक रहे हैं।  आजकल बाजार में मिलने वाली ज्यादातर चीजों में मिलावट हो रही है, फिर चाहे वो फल हों, अनाज, मसाले या फिर दूध, फल और सब्जियों को तरह-तरह के केमिकल के इस्तेमाल से तैयार किया जा रहा है।  मिलावटी खाद्य पदार्थों का सेवन सेहत के लिए बहुत ज्यादा नुकसानदायक होता है और लगातार इनके सेवन से उल्टी दस्त, लीवर, किडनी सहित पेट संबंधी बीमारियों का भी खतरा रहता है। मिलावटी चीजों के सेवन से न सिर्फ हमारी सेहत पर असर पड़ता है बल्कि यह खाने का स्वाद भी बिगाड़ देती हैं। भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण  भी आए दिन लोगों को अलग-अलग चीजों में मिलावट को पहचानने के तरीका बताता है। अगर आपको खाने में स्वाद नहीं आ रहा है तो मसालों को खरीदने से पहले इनकी जांच जरूर कर लें।  दूध, मावा, घी, दाल और मसालों में मिलावट को कैसे पहचाना जाए। </p>
<p><strong>असली मसालों की ऐसे करें पहचान</strong><br />दुकानदार मसालों में रंग, भूसा, रेत आदि जैसी चीजों की मिलावट करने लगे हैं जिससे इनकी मात्रा को बढ़ाया जा सके।  मसालों को यूज करने से पहले यह चेक कर लें कि कहीं वह मिलावटी तो नहीं।  लाल मिर्च पाउडर में लाल रंग का पाउडर और ईंट का चूरा मिला हो सकता है।  ऐसे में असली नकली की पहचान के लिए लाल मिर्च के 1 चम्मच को पानी में डालकर देखें अगर ऊपर कुछ तैरता नजर आए तो समझिए मिर्च असली है। वहीं, अगर यह पानी में घुल जाए तो इस खाने से बचें। </p>
<p><strong>हल्दी में भी हो रही मिलावट</strong><br />आयुर्वेदिक औषधि से लेकर मसाले के तौर पर इस्तेमाल होने वाली हल्दी भी मिलावटी हो सकती है। इसमें 'मेटामिल येलो' नामक कैमिकल मिलाया जा रहा है जिससे पाउडर भी हल्दी जैसा पीला रंग छोड़ने लगता है। ऐसे में अंतर का पता लगाने के लिए आप हल्दी को पानी में हाइड्रोक्लोरिक ऐसिड की कुछ बूंदों के साथ मिलाएं अगर हल्दी पीला रंग बदलकर गुलाबी, नीली या बैंगनी हो जाए तो समझ जाइए कि हल्दी नकली है। </p>
<p><strong>धनिया में मिल सकता है भूसा</strong><br />धनिया पाउडर में भूसा के साथ हरा रंग मिला हो सकता है ऐसे में धनिया पाउडर की मिलावट को सूंघकर पता लगा सकते हैं।  अगर किसी जंगली पौधे या भूसे की खुशबू आए तो इसे तुरंत फेंक दें। काली मिर्च के दानों को पानी या शराब में डालकर देखें।  अगर यह ऊपर तैरने लगे तो यह पपीते के बीज हो सकते हैं.वहीं, यह डूब जाए तो मतलब काली मिर्च असली है। </p>
<p><strong>मिलावटी घी  को ऐसे पहचानें</strong><br /> खाद्य सुरक्षा अधिकारी संदीप अग्रवाल ने बताया कि पानी के माध्यम से असली देसी घी की पहचान की जा सकती है।  ऐसे में आप एक कटोरी में पानी लें और उसमें दो से तीन बूंद देसी घी की डालें। यदि देसी घी नीचे बैठ जाता है तो समझ जिए कि घी नकली है और यदि देसी घी ऊपर तैरता रहे तो वह असली घी है। आप हथेली पर घी रख कर भी इसकी पहचान कर सकते हैं। ऐसे में आप 5 से 6 मिनट देसी घी को अपनी हथेली पर रखें। उसके बाद 5 से 10 मिनट बाद उसकी खुशबू मधुर आए तो समझ जाए कि असली घी है । यदि कुछ अजीब सी खुशबू आए तो समझ जाएं कि नकली घी है। घी को उबालकर भी ये असली है या नकली, इसकी पहचान की जा सकती है।  </p>
<p><strong>असली दूध की पहचान</strong><br />खाद्य सुरक्षा अधिकारी संदीप अग्रवाल ने बताया कि असली नकली दूध की पहचान करने के लिए एक गिलास में दूध डालें और इसमें बराबर मात्रा में पानी मिला दें।  इसके बाद गिलास को हिलाकर देखें।  अगर अचानक झाग आने लगें तो समझ जाइए कि दूध में डिटर्जेंट मिलाया गया है। </p>
<p><strong>असली और नकली मावे की ऐसे करें पहचान</strong><br />मावा, पनीर और खोया असली है या मिलावटी, इसकी पहचान घर में ही की जा सकती है। मावा को थोड़ा सा हाथ में लेकर अपने अंगूठे से रगड़े। अगर वो असली होगा कि उसमें घी की महक आपके हाथों में काफी देर तक रहेगी। मावा को टेस्ट करें। अगर उसका स्वाद कसैला है तो समझ लें कि वो नकली है। थोड़ा सा मावा हाथ में लेकर उसके लड्डू बनाएं। अगर वो न बने तो समझ लें कि नकली है। सबसे पहले थोड़ा-सा मावा किसी बर्तन में लें और उसमें थोड़ा-सा पानी डालकर गर्म करें। गर्म होने के बाद उसमें टिंचर आयोडीन की कुछ बूंदे डालें। अगर उसका रंग नीला हो जाए तो समझ लें कि इसमें स्टार्च मिला है। वहीं असली खोया पहले जैसा ही रहेगा।</p>
<p><strong>ऐसे करें असली पनीर की पहचान</strong><br />पनीर का छोटा सा टुकड़ा लेकर हाथ में मसलें। अगर वह छोटे-छोटे टुकड़ों में टूटने लगे तो समझ लें कि कि वह नकली है क्योंकि नकली पनीर में स्किम्ड मिल्ड पाउडर मिलाया जाता है। जो ज्यादा प्रेशर नहीं सह पाता है। नकली पनीर खाते वक्त रबड़ की तरह खिंचता है। नकली पनीर काफी टाइट होता है। जबकि असली बिल्कुल सॉफ्ट होता है। </p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br /> त्यौहारी सीजन में  मिलावटखोरों के खिलाफ शुद्ध के लिए युद्ध के लिए अभियान चलाया जा रहा है। जिसके तहत रोज, तेल, घी, मसाले, मावा पनीर और खाद्य पदार्थो के नमूने लिए जा रहे है। इसके अलावा चल मोबाइल वैन भी लगातार नमूने जांच रही है। <br /><strong>-डॉ. जगदीश कुमार सोनी, सीएमएचओ कोटा</strong><br /> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 08 Nov 2023 15:50:04 +0530</pubDate>
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                <title>सावधान: त्यौहारी सीजन शुरू होते ही बाजार में आने लगा नकली मावा पनीर </title>
                                    <description><![CDATA[प्रशासनिक अधिकारी अपने स्तर पर जांच कर रहे हैं, लेकिन अब तक मिलावटी मिठाइयों जब्त नहीं की गई है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/be-careful--as-soon-as-the-festive-season-starts--fake-mawa-paneer-starts-coming-in-the-market/article-60280"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-10/sawadhan--tyohari-season-shuru-hote-hi-bazar-mei-aane-laga-nakli-maava-paneer..kota-news..23.10.2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा । त्यौहारी सीजन शुरू होने के साथ ही मिठाईयों की मांग बढ़ रही है। इसके साथ बाजार में नकली मावा सप्लाई करने वाले मिलावटखोर भी सक्रिय हो गए है। शहर में  मिठाई बाजार सज गए है। खुशी के मौके पर लोग मन पसंद मिठाई खरीद रहे है। यदि आप बाजार से मिठाई खरीद रहे हैं तो सावधान भी रहिए। हो सकता है जो मिठाई आप खरीद रहे है, उसमें मिलावट हो। खुशियों में खलल ना पड़े इसके लिए लोग भी मिलावटी मिठाइयों से दूर होते दिख रहे हैं। स्वास्थ्य व खाद्य विभाग त्यौहारी सीजन में भले ही शुद्धता की जांच के लिए अभियान चला रहा हो, बावजूद इसके शहर में मिलावटी मिठाई के कारोबार से इनकार नहीं किया जा सकता। प्रशासनिक अधिकारी अपने स्तर पर जांच कर रहे हैं, लेकिन अब तक मिलावटी मिठाइयों जब्त नहीं की गई है। अभी नकली, मावा, घी और अन्य खाद्य पदार्थ की पकड़े गए है। शहर में कुछ लोग ज्यादा फायदे के लालच में ग्राहकों की आंख में धूल झोंक कर तेल, घी, या अन्य सामग्री में मिलावट करते हैं। त्यौहार की भीड़ में लोग बिना कुछ जांचे परखे सामान खरीद लेते हैं। </p>
<p>वैसे तो चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग अपने स्तर पर अभियान चला रहा। लेकिन लोगों को भी सावधान रखने की आवश्यकता है। दशहरा दीपावली को देखते हुए खाद्य सुरक्षा विभाग सतर्क है।  वहीं मिलावट खोरों ने कमाई के लिए लोगों के स्वास्थ्य को ताक पर रख दिया है। इसी बीच खाद्य सुरक्षा विभाग भी लगातार छापेमारी कर मिलावटखोरों के खिलाफ कार्रवाई करने में लगा है ।  अभी चार दिन पहले ही 17 अक्टूबर को 90 लीटर नकली घी पकड़ा है।  खाद्य सुरक्षा विभाग की टीमें लगातार कार्रवाई करने में जुटी हुई हैं।  पिछले 15 में करीब आधा दर्जन लोगों के यहां छापे मारकर कार्रवाई को अंजाम दिया गया।  जिसमें  कोल्ड ड्रिंक, घी, मिठाई, मिर्च, धनिया पाउडर, मसाले, मावा को मुख्य रूप से टारगेट किया गया है।  दिवाली पर मिठाईयों में सबसे अधिक मिलावट को देखते हुए मावा पर कार्रवाई को तेज किया जा रहा है। </p>
<p><strong>एक क्विंटल मावा किया जा चुका जब्त</strong><br />अभी हाल ही में  17 अक्टूबर को खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने बारां में छापा मारते हुए एक मिठाई की दुकान से बड़ी मात्रा में मावा, पनीर व सोनपापड़ी जब्त किया है उसके बाद से ही लोगों को और सावधान रहने की आवश्यकता हो गई है।  त्यौहारी सीजन को देखते हुए खाद्य सुरक्षा विभाग की ओर से जिले में शुद्ध के लिए युद्ध अभियान चलाया जा रहा है। इसके तहत 17 अक्टूबर को खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने दीनदयाल पार्क स्थित एक मावे की दुकान पर छापा मारकर एक क्विंटल मावा, पनीर व सोन पापड़ी जब्त की थी। खाद्य सुरक्षा अधिकारी गोवर्धन चौधरी ने बताया कि शुद्ध के लिए युद्ध अभियान वर्ष भर चलता है, लेकिन त्यौहारी सीजन में यह तेज हो जाता है। एक मावा सेंटर पर कार्रवाई की गई, जहां से एक क्विंटल मावा, पनीर व कुछ सोनपापड़ी को सीज किया। </p>
<p><strong>शहर में यहां से आता है मावा </strong><br />मावा व्यवसायी श्याम गुर्जर ने बताया कि कोटा शहर में आसपास के गांवों के अलावा बड़ी मात्रा में मावा बूंदी, दिगोद, बारां,भीमगजमंडी, रामगंजमंडी, रतलाम से आता है। अधिकांश मावा में शक्कर और चिकनाई रहित होता है। ज्यादातर सिन्थेटिक मावा बाहर से ही यहां आता है। कम चिकनाई वाला मावा सस्ता होने से इससे गुलाब जामुन और अन्य मिठाईयां तैयार की जा रही है। </p>
<p><strong>मिलावटी खोए व सिंथेटिक दूध  की ऐसे करें पहचान</strong><br />खाद्य सुरक्षा अधिकारी संदीप अग्रवाल मिलावटी खोए और सिंथेटिक दूध पहचान करने के लिए  इसमें आयोडीन सॉल्यूशन और पराडीमेथील एमिनो बेनजलडीहाइड सॉल्यूशन डाल दें इसके बाद दूध, खोए या पनीर में स्टार्च की मौजूदगी की पहचान करने के लिए एक कांच के बर्तन में थोड़ा सा पनीर या मिठाई को थोड़े गुनगुने पानी में डालें, थोड़ी देर तक इसे घुलने दें। जब यह अच्छे से पानी में घुल जाए तब  इसमें चार से पांच ड्राप आयोडीन सॉल्यूशन डालकर चम्मच से मिला लें।  दूध की भी पहचान भी ऐसे ही की जाती है।अगर मिठाई, दूध या पनीर का रंग नीला हो जाता है तो इसका अर्थ है कि इसमें मिलावट की गयी है।  लेकिन अगर यह रंग नहीं बदलता है तो इसका मतलब है कि यह शुद्ध है। मिठाई में मेटानिल पदार्थ की मिलावट की जाती है। मिठाई में थोड़ा सा सेंधा नमक डालें। अगर मिठाई का रंग गुलाबी पड़े तो मेटानिल पदार्थ की मिलावट समझो। मावे में स्टार्च की मिलावट की आशंका रहती है। थोड़े मावे में पाम तेल मिलाकर उबालें, इसमें आयोडीन के घोल की बूंदें डालें। अगर स्टार्च की मिलावट होगी तो मावे का रंग नीला पड़ जाएगा। </p>
<p><strong>अब तक ये हो चुकी कार्रवाई</strong><br />अप्रैल से लेकर अक्टूबर तक खाद्य सुरक्षा टीम की ओर से मावा, दूध पनीर,घी, कोल्ड ड्रिंक, मसालों के सैंपल लेकर कार्रवाई ही है। मार्च में 109 सैंपल लिए,अप्रैल में 69 सैंपल लिए, मई 39 सैंपल लिए, जून 22 सैंपल, जुलाई में 12 सैंपल, अगस्त में  2767 किलो नकली देशी घी सीज किया। अक्टूबर में कोल्ड ड्रिंक व फ्रूट ज्यूस अविधिपार कोल्ड ड्रिंक जिसमें  स्टिंग केन 143 नग ,7अप केन 24 नग मीरिड़ा केन 7 नग , ट्रोपिकाना लिची ज्यूस 30 नग को सीज किया गया। इसके अलावा 90 लीटर देशी घी, 1 क्विंटल मावा जब्त कर चुके है। </p>
<p>शुद्ध के लिए युद्ध अभियान के तहत लगातार खाद्य सुरक्षा टीम सैंपल लेकर कार्रवाई कर रही है। त्यौहारी सीजन में लगातार नमूने लेकर कार्रवाई की जा रही है। नकली मावा, दूध, मिठाईयों के सैंपल लिए जा रहे है। <br /><strong>-डॉ. जगदीश कुमार सोनी, सीएमएचओं कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 23 Oct 2023 17:22:04 +0530</pubDate>
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