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                <title>pollution control board - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>pollution control board RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>औद्योगिक इकाइयों में प्रदूषण की जांच को लेकर विधायक ​गीता बरबड़ ने बोला राज्य सरकार पर हमला, कहा-घोड़ावत में संचालित औद्योगिक इकाई द्वारा हो रहा सबसे ज्यादा प्रदूषण</title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान विधानसभा में विधायक गीता बरबड़ ने घोड़ावत में संचालित उद्योगों द्वारा फैलाए जा रहे प्रदूषण का मुद्दा उठाया। पर्यावरण मंत्री संजय शर्मा ने आश्वस्त किया कि प्रदूषण नियंत्रण मंडल द्वारा इकाई का पुन: निरीक्षण कराया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होने पर सख्त कानूनी कार्यवाही सुनिश्चित की जाएगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/regarding-the-investigation-of-pollution-in-industrial-units-mla-geeta/article-145334"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/geeta-barbad.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर: राजस्थान विधानसभा में गुरुवार को घोड़ावत में संचालित औद्योगिक इकाई द्वारा प्रदूषण का प्रश्न उठा।  विधायक गीता बरबड़ ने यह प्रश्न उठाया। विधायक के मुद्दे पर पर्यावरण मंत्री संजय शर्मा ने जवाब देते हुए कहा कि दोबारा निरीक्षण करेंगे। फैसला करेंगे कि उद्योग प्रदूषण फैला रहे हैं या नहीं फैला रहे। संजय शर्मा ने कहा कि प्रदूषण मंडल द्वारा निरीक्षण किया जाता है। कमी पाई जाती है तो नियम प्रक्रिया के अनुसार कार्यवाही की जाती है। अभी तक किसी ग्रामवासी के द्वारा जिलाधिकारी या प्रदूषण मंडल में शिकायत नहीं मिली है। शिकायत मिलने पर कार्यवाही की जाएगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 05 Mar 2026 13:11:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>असर खबर का - पॉलीथिन कैरी बैग का निर्माण करना पड़ेगा भारी</title>
                                    <description><![CDATA[प्रदूषण नियंत्रण मंडल ने पुरस्कार की बढ़ाई राशि।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/effect-of-news---manufacturing-polythene-carry-bags-will-be-costly/article-124675"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-08/1ne1ws-(3)48.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। प्लास्टिक कचरा दुनिया में प्रदूषण फैलाने में सबसे बड़ा खतरा बन रहा है। देश में भी प्लास्टिक पॉलिथीन को कम करने के लिए इस पर अलग-अलग तरीके से बैन किया गया है। आमजन को जागरुक करने के लिए लगातार अभियान चलाया जा रहा है, लेकिन इसके बाद भी प्लास्टिक पॉलिथीन से लोगों का मोह नहीं छूट रहा है। बाहर से हरेक सामान पॉलिथीन में पैक होकर आ रहा है। अब राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल ने सिंगल यूज प्लास्टिक एवं प्लास्टिक कैरी बैग का उपयोग बंद करवाने के लिए प्रभावी कार्रवाई करने का निर्णय किया है। इसके प्रतिबंध पर प्रभावी क्रियान्वयन के लिए प्रदूषण नियंत्रण मंडल ने पुरस्कार योजना लागू की है।  पूर्व में इस योजना के अंतर्गत प्रतिबंधित प्लास्टिक कैरी बैग अथवा सिंगल यूज प्लास्टिक वस्तुओं का निर्माण करने वाले इकाइयों व उद्योगों की सूचना देने पर पांच हजार रुपए का पुरस्कार निर्धारित था। अब मंडल द्वारा इस योजना में संशोधन करते हुए पुरस्कार राशि को बढ़ाकर पंद्रह हजार रुपए कर दिया गया है।  </p>
<p><strong>नवज्योति ने प्रमुखता से उठाया था मामला </strong><br />सिंगल यूज प्लास्टिक सर्वाधिक खतरनाक है। इसकी बिक्री पर बैन लगा हुआ है लेकिन इसके बाद भी यह बाजार में खुलेआम बिक रही है। दैनिक नवज्योति में गत 9 मार्च को प्रमुखता से समाचार प्रकाशित किया था। इसमें बताया था कि शहर की थोक फल सब्जीमंडी में पॉलीथिन का धड़ल्ले से उपयोग हो रहा है। यहां पर सभी विक्रेता पॉलीथिन के साथ ही कारोबार करने में जुटे हुए हैं। मंडी परिसर में दिनभर सब्जियों की बिक्री पॉलीथिन में ही हो रही है। थैलियों में सामग्री लाने और ले जाने सुविधाजनक होने के कारण विक्रेता से लेकर ग्राहक तक इसका उपयोग करता है। दिनभर के कारोबार के बाद ज्यादातर पॉलीथिन कचरे के रूप में तब्दील हो जाती है। देश में 120 माइक्रोन से कम मोटाई वाले प्लास्टिक बैग पर प्रतिबंध है। जबकि 75 माइक्रोन से कम मोटाई वाले प्लास्टिक बैग पर पहले से ही बैन लगा हुआ है। प्रतिबंध के बावजूद थोक फलमंडी का कारोबार पॉलीथिन के बल पर हो रहा है। इसके बावजूद जिम्मेदार विभाग इस सम्बंध में कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं कर रहे हैं। ऐसे में इनका धड़ल्ले से संचालन हो रहा है। </p>
<p><strong>पुरस्कार राशि में किया संशोधन</strong><br />मंडल के अधिकारियों के अनुसार भारत सरकार के  पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार देशभर में चिन्हित सिंगल यूज प्लास्टिक वस्तुओं के निर्माण, आयात, भंडारण, वितरण, बिक्री एवं उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध लागू है। इनमें प्लास्टिक स्टिक वाले ईयर बड्स, गुब्बारों की प्लास्टिक स्टिक, प्लास्टिक झंडे, कैंडी और आइसक्रीम की प्लास्टिक स्टिक, मिठाई के डिब्बों के चारों ओर लपेटने वाली प्लास्टिक फिल्म, आमंत्रण पत्रों और सिगरेट पैकेट पर चढ़ाई जाने वाली प्लास्टिक शीट, 100 माइक्रोन से कम मोटाई वाले प्लास्टिक पर प्रतिबंधित हैं। प्रतिबंध के बाद भी इनका बाजार में धड़ल्ले से उपयोग हो रहा है। अब इस प्रतिबंध के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल ने जनसहभागिता को बढ़ावा देने के लिए पुरस्कार योजना लागू की है। अब मंडल द्वारा इस योजना में संशोधन करते हुए पुरस्कार राशि को बढ़ाकर पंद्रह हजार रुपए कर दिया गया है। प्रतिबंधित प्लास्टिक कैरी बैग अथवा सिंगल यूज प्लास्टिक वस्तुओं का निर्माण करने वाली किसी इकाई की विश्वसनीय सूचना देने पर सूचना दाता को पंद्रह हजार रुपए का पुरस्कार प्रदान किया जाएगा।</p>
<p>अब प्रतिबंधित प्लास्टिक कैरी बैग अथवा सिंगल यूज प्लास्टिक वस्तुओं का निर्माण करने वाले इकाइयों व उद्योगों की सूचना देने पर पंद्रह हजार रुपए का पुरस्कार दिया जाएगा। आमजन सिंगल यूज प्लास्टिक का उपयोग न करें और यदि कहीं इनके निर्माण की जानकारी हो तो इसकी जानकारी तुरन्त विभाग को उपलब्ध  कराएं।<br /><strong>- योग्यता सिंह, क्षेत्रीय अधिकारी, राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मण्डल</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 25 Aug 2025 14:54:23 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>उपलब्धि: अंतरराष्ट्रीय फलक पर चमकेगा हमारा कोटा</title>
                                    <description><![CDATA[अब पर्यावरण जांच रिपोर्ट विश्व के 120 देशों में होगी मान्य।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/achievement--our-kota-will-shine-on-the-international-stage/article-119206"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-07/rtroer-(3)6.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। अंतरराष्ट्रीय फलक पर हमारा कोटा अनूठी छाप छोड़ने जा रहा है। राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल की केंद्रीय प्रयोगशाला सहित 9 प्रयोगशालाएं अंतरराष्ट्रीय मानकों पर खरी उतरी हैं। इनमें कोटा स्थित प्रदूषण नियंत्रण मंडल की क्षेत्रीय प्रयोगशाला भी शामिल है। राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल की सभी प्रयोगशालाओं में वायु, जल, ध्वनि और मिट्टी की जांच अब अंतरराष्ट्रीय मानकों के मुताबिक होगी। इसके लिए मंडल अपनी प्रयोगशालाओं को अंतरराष्ट्रीय मानकों (आइएसओ/आइईसी 17025:2017) के अनुसार अपडेट कर रहा है। अपडेशन के बाद इन प्रयोगशालाओं में की गई पर्यावरण जांच रिपोर्ट भारत सहित विश्व के 120 देशों में मान्य होगी। राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल ने यह कवायद राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (एनजीटी) के निर्देशों के बाद शुरू की है। एनएबीएल प्रमाण-पत्र ने लगाई मुहर: जानकारी के अनुसार जयपुर स्थित राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल की केंद्रीय प्रयोगशाला सहित 9 प्रयोगशालाएं अंतरराष्ट्रीय मानकों पर खरी उतरी हैं। इनमें केंद्रीय प्रयोगशाला जयपुर, क्षेत्रीय प्रयोगशाला कोटा, भिवाड़ी, सीकर, उदयपुर, किशनगढ़, अलवर, चित्तौड़गढ़ और भीलवाड़ा शामिल हैं। जबकि 5 अन्य प्रयोगशालाओं की प्रमाणीकरण के लिए टेस्टिंग चल रही है।  नेशनल एक्रीडिटेशन बोर्ड फॉर टेस्टिंग एंड कैलिब्रेशन लेबोरेटरीज (एनएबीएल) की टीम ने जांच के बाद इन प्रयोगशालाओं को प्रमाण पत्र देकर अंतरराष्ट्रीय मानकों पर खरा उतरने पर मुहर लगाई है। </p>
<p><strong>पांच प्रयोगशालाओं की अगस्त में होगी जांच</strong><br />प्रदेश में पांच अन्य प्रयोगशालाओं के एनएबीएल प्रमाण पत्र के लिए भी कवायद की जा रही है। अगले माह नेशनल एक्रीडिटेशन बोर्ड फॉर टेस्टिंग एंड कैलिब्रेशन लेबोरेटरीज (एनएबीएल) की टीम आएगी, जो इन पांच प्रयोगशालाओं की गुणवत्ता की जांच करेगी। सब कुछ ठीक रहा और ये प्रयोगशालाएं भी अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप खरी उतरी तो अगस्त तक इन्हें भी एनएबीएल सर्टिफिकेट मिल जाएंगे। इनमें भरतपुर लैब सहित बीकानेर, जोधपुर, पाली, बालोतरा की क्षेत्रीय प्रयोगशालाएं शामिल हैं। एनएबीएल प्रमाण-पत्र मिलने के बाद ये प्रयोगशालाएं अंतरराष्ट्रीय मानक प्राप्त लैब हो जाएंगी। हालांकि इसके लिए प्रदूषण नियंत्रण मंडल को एनएबीएल के जरिए अंतरराष्ट्रीय प्रयोगशाला प्रत्ययन सहयोग (आइएलएसी) से अनुबंध करना होगा।  </p>
<p><strong>यह होगा फायदा</strong><br />- प्रयोगशालाओं में जांच के परिणाम सटीक होंगे। इससे जांच की गुणवत्ता और पारदर्शिता में सुधार होगा।<br />- जांच रिपोर्ट का रिकॉर्ड समुचित तरीके से संधारित हो पाएगा।<br />- प्रयोगशालाओं में जांच की प्रक्रिया, नमूने एकत्र करने और उनके रखरखाव की प्रक्रिया बेहतर होगी।<br />- वायु, जल, ध्वनि व मिट्टी प्रदूषण की सभी पैरामीटर्स के अनुरूप जांच होगी।</p>
<p>केंद्रीय प्रयोगशाला जयपुर के अलावा 8 क्षेत्रीय लैब अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार प्रमाणित हैं। प्रदेश की 5 अन्य प्रयोगशालाएं भी अगस्त माह तक एनएबीएल से मान्यता प्राप्त हो जाएंगी। इसके बाद हमारी पर्यावरण जांच रिपोर्ट अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार मान्य हो जाएगी।<br /><strong>- एस.पी.सिंह, सदस्य सचिव, राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 02 Jul 2025 16:27:08 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>लापरवाही: पिपलाद बांध प्रदूषण का शिकार</title>
                                    <description><![CDATA[वर्तमान में पिपलाद बांध से ही नगर व आसपास के दर्जनभर गांवों को पेयजल आपूर्ति की जा रही है।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jhalawar/negligence--piplad-dam-is-a-victim-of-pollution/article-106483"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-03/6622-copy65.jpg" alt=""></a><br /><p>भवानीमंडी। भवानीमंडी का पिपलाद बांध जल प्रदूषण के कारण अपना अस्तित्व खोता जा रहा है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने देश की 14 प्रदूषित नदियों में पिपलाद बांध को भी शामिल किया है। आसपास की फैक्ट्रियों से निकलने वाला केमिकल अपशिष्ट और नालों की गंदगी पिपलाद बांध में मिल रही है। जिससे पानी प्रदूषित कर रहा है। भवानीमंडी में बढ़ते जल प्रदूषण के सामने सरकार, अधिकारी व राजनेता इस कदर नतमस्तक है कि नगर के सबसे बड़े जल स्त्रोत पिपलाद को प्रदूषण मुक्त करवाने की बजाय कोसो दूर से पाने लाने को तैयार है। जो नगरवासियों के लिए किसी विडंबना से कम नही है। </p>
<p><strong>24 किमी दूर राजगढ़ बांध से पानी लाने की तैयारी</strong><br />भवानीमंडी में पेयजल की समस्या को देखते हुए राजगढ़ बांध से पानी लाने की तैयारी पूरी हो चुकी है। सरकार ने पिछले बजट में इसके लिए वित्तीय स्वीकृत दी थी। लगभग 22 करोड़ खर्च करके 24 किमी दूर से पानी लाने के लिए पाइपलाइन डालने का कार्य जल्द ही शुरू होगा। वही पिपलाद बांध का लगातार बढ़ रहे जल प्रदूषण के कारण दिनों दिन अस्तित्व खतरे में है। तत्कालीन मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया ने करोड़ों की लागत से भवानीमंडी वासियों को लगभग 85 करोड़ की लागत से पिपलाद बांध परियोजना की सौगात दी थी, ताकि क्षेत्रवासियों व किसानों को सिंचाई और पेयजल के लिए पर्याप्त व शुद्ध पेयजल आपूर्ति हो सके।  झालावाड़ जिले में कालीसिंध नदी पर बनी यह परियोजना पचपहाड़ तहसील के 19 गांवों की कृषि को सिंचित करती है। पर उद्योगों ने बेरोकटोक छोड़े जा रहे जा रहे केमिकल्स व अपशिष्ट के कारण पिपलाद जलाशय का अस्तित्व खतरें में है। हालात यह है कि पिपलाद का नाम देश की 14 प्रदूषित नदियों में शुमार है। बावजूद इसके इसकी सुध लेने को कोई तैयार नही है।</p>
<p><strong>जलदाय विभाग कर रहा शुद्ध पेयजलापूर्ति का दावा</strong><br />वर्तमान में पिपलाद बांध से ही नगर व आसपास के दर्जनभर गांवों को पेयजल आपूर्ति की जा रही है। जबकि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने प्रदूषित नदी के रूप में चिन्हित किया है। जलदाय विभाग के अधिकारियों का कहना है कि हम पिपलाद से मिल रहे पानी का ट्रीटमेंट करके ही आमजन को शुद्ध पेयजलापूर्ति कर रहे है। ऐसे में सवाल उठता है कि जब जलदाय विभाग के अधिकारी नगर में शुद्ध पेयजल सप्लाई का दावा कर रहे,तो राजगढ़ से पानी लाने की जरूरत ही क्यो है..?</p>
<p><strong>फैक्ट्रियों का अपशिष्ट मिलने से पिपलाद नदी में हो रहा जल प्रदूषण</strong><br />नगर में उद्योगों व फैक्ट्रियों से निकलने वाले केमिकल अपशिष्ठ को पिपलाद में जाकर मिलने वाले नालों में छोड़ा जा रहा है, जिससे लगातार पिपलाद नदी प्रदूषण का शिकार हो रही है। रामटी पुलिया के पास नाले में लम्बे समय से अपशिष्ठ व केमिकल युक्त गंदे पानी की निकासी की जा रही है, जो सीधे पिपलाद में जाकर गिरता है। इसको रोकने के लिए शहरवासियों ने पूर्व में कई जनआंदोलन भी किए पर आखिर बीतते समय के साथ सभी नतमस्तक हो गए और पिपलाद का अस्तित्व खत्म होने की कगार पर है। यह सब शहरवासियों के लिए एक जंग हारने जैसा है।</p>
<p><strong>कभी हुआ करता था पिकनिक स्पॉट, आज पड़ा सुनसान</strong><br />पिपलाद डेम किसी समय पिकनिक स्पॉट के रूप में जाना जाने लगा था। पर बीतते समय, अनदेखी के अभाव व जलप्रदूषण के चलते प्रदूषित नदियों में गिना जाने लगा है। एक समय ऐसा था कि दूर-दराज से यहां लोग घूमते आते थे। पर्यटन स्पॉट के रूप में भी उभरने लगा था। यहा का प्राकृतिक सौंदर्य लोगों का मनमोह लेता है। देखरेख के  अभाव में यह सब धीरे-धीरे विलुप्त होता जा रहा है।</p>
<p><strong>क्षेत्रवासियों का दर्द</strong><br />पिपलाद बांध का पानी प्रदूषित हो रहा है। हम एक फैक्ट्री के पीछे रहते है। हमारी कुंईया के पानी भी खराब हो रहा है। चमनी से निकलने वाली चुरी भी उड़कर घरों तक आती है।<br /><strong>- प्रभुलाल मेघवाल, रहवासी </strong></p>
<p>रात को पिपलाद बांध में आसपास की फैक्ट्रियों से निकलने वाला केमिकल का गन्दा पानी छोड़ा जाता है, मेरे वार्ड में लोगों के घरों में कुआें में तक पीला व काला रंग जैसा पानी आ रहा है, नहाने-धोने में बहुत परेशानी आती है। कई बार उच्च अधिकरियों को शिकायत करी पर निस्तारण नही हुआ।<br /><strong>- राजेश मेघवाल, वार्ड पार्षद </strong></p>
<p>हमने यहां जो ट्यूबवेल लगवाई उसमें भी जमीन से इतना केमिकल निकला और आज भी ट्यूबवेल से गन्दा व दुर्गंध भरा पानी आता है। थोड़ी बहुत फसलें व सब्जियां बोई थी वो भी केमिकल की वजह से नष्ट हो गई। <br /><strong>- अरुण तंवर, शहरवासी </strong></p>
<p>गंदे पानी के फिल्टर का प्लांट तो लगवाया है, पर वास्तविकता में फिल्टर होता नही है। यह गन्दा पानी ही पिपलाद में जाकर मिल रहा और पूरे नगर ने सप्लाई किया जा रहा है। इस केमिकल के कारण कई बार तो मछलियां मरती हुई देखी है।<br /><strong>- राम बैरवा, पार्षद </strong></p>
<p>22 करोड़ से अधिक लागत से राजगढ़ बांध से भवानीमंडी में पानी लाने की योजना  पिछले बजट में स्वीकृत हुई थी। इसके लिए पाइप लाइन डालने का काम जल्द ही पूरा होगा। पिपलाद बांध में जल प्रदूषण को ट्रीटमेंट करके शुद्ध पानी की सप्लाई की जा रही है। अब साथ ही राजगढ़ बांध से पानी लाने की योजना पूरी होते ही पानी की समस्या हल हो जाएगी।<br /><strong>- रमन लाल जाटव, एक्सइएन, जलदाय विभाग </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>झालावाड़</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 05 Mar 2025 15:08:25 +0530</pubDate>
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                <title>Pollution and plastic free state के लिए संकल्पित राज्य सरकार</title>
                                    <description><![CDATA[इस दौरान मौजूद सोसायटी के वरिष्ठ सदस्यों ने मंडल द्वारा चलायी  जा रही मुहिम की सराहना करते हुए कहा कि अन्य लोगों तक मंडल के प्रदूषण मुक्त राज्य के सन्देश को प्राथमिकता से पहुंचना सुनिश्चित करेंगे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/state-government-committed-to-pollution-and-plastic-free-state/article-83995"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-07/21.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में पूरे राज्य को प्रदूषण मुक्त  करने एवं सिंगल यूज़ प्लास्टिक के उपयोग से मुक्त करने के लिए राज्य भर में प्रदूषण नियंत्रण मंडल द्वारा व्यापक स्तर पर जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। एक ओर जहाँ वृहद स्तर पर विभिन्न विभागों, स्वयंसेवी संस्थाओं एवं निजी संस्थाओं  के सहयोग से पौधरोपण का कार्य किया जा रहा है, वही हर घर को प्लास्टिक केरी बैग्स से मुक्त करने के लिए मंडल के अधिकारियों  द्वारा घर- घर जाकर न केवल सिंगल यूज़ प्लास्टिक के वस्तुएं उपयोग नहीं करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है बल्कि कपडे के थैले बाँटकर प्लास्टिक कैरी बैग्स का का उपयोग नहीं करने की भी शपथ दिलवाई जा रही है।</p>
<p>राज्य प्रदूषण नियंणत्र मंडल के सदस्य सचिव एन विजय ने बताया कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की प्रदूषण मुक्त राज्य की संकल्पना को साकार करने के क्रम में राज्य अग्रसर है और सिंगल यूज प्लास्टिक एवं प्लास्टिक कैरी बैग्स का उपयोग न के बराबर हो इसके लिए सार्थक प्रयास धरातल स्तर पर किये जा रहे है। उन्होंने बताया कि कार्यालय कार्यों, नियम- कायदे बनाने के साथ उन्हें समाज के प्रत्येक व्यक्ति तक पहुंचना हमारा मौलिक जिम्मेदारी है, जिसके तहत मंडल के अधिकारी एवं कर्मचारी घर- घर तक इस मुहीम को लेकर जा रहे है और कपड़े के थैलों का वितरण कर प्लास्टिक कैरी बैग्स उपयोग नहीं करने के लिए शपथ दिलवा रहे है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री की प्रदूषण एवं  प्लास्टिक  मुक्त राज्य की व्यापक एवं दूरगामी सोच को साकार करने के हर स्तर पर हर संभव प्रयास किये जा रहे है.</p>
<p><strong>प्रत्येक व्यक्ति के हाथ में हो कपड़े का थैला<br /></strong>सदस्य सचिव ने कहा कि मंडल के सभी अधिकारी एवं कर्मचारियों द्वारा घर-घर जाकर कपड़े के थैले वितरित करने की इस मुहिम का एक ही उद्देश्य है कि राज्य के प्रत्येक नागरिक के हाथ में प्लास्टिक कैरी बैग की जगह कपड़े का थैला दिखाई दे वही व्यापारिक संस्थानों एवं दुकानों पर भी कपड़े के थैले ही उपयोग में लिए जाएं। उन्होंने कहा कि प्रयास किया जायेगा कि मंडल की यह मुहिम तब तक जारी रहे जब तक प्रत्येक व्यक्ति के हाथ में कपड़े का थैला नहीं आ जाता। उन्होंने इस मुहिम में शामिल सभी सार्वजनिक, निजी संस्थानों का धन्यवाद देते हुए कहा कि सभी की भूमिका इस मुहिम का अहम भाग है।</p>
<p>इस दौरान अधीक्षण वैज्ञानिक अधिकारी नेहा अग्रवाल के नेतृत्व  में जगतपुरा  स्थित रिहायशी सोसाइटी में कपड़े के थैलों का वितरण किया गया साथ ही प्लास्टिक कैरी बैग्स उपयोग नहीं करने, कचरे का समुचित प्रबंधन करने और पर्यावरण संरक्षण करने की शपथ दिलवाई गई। इस दौरान मौजूद सोसायटी के वरिष्ठ सदस्यों ने मंडल द्वारा चलायी  जा रही मुहिम की सराहना करते हुए कहा कि अन्य लोगों तक मंडल के प्रदूषण मुक्त राज्य के सन्देश को प्राथमिकता से पहुंचना सुनिश्चित करेंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 07 Jul 2024 17:12:17 +0530</pubDate>
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                <title>हर घर को प्लास्टिक मुक्त करने की मुहिम</title>
                                    <description><![CDATA[राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल के सदस्य सचिव एन विजय ने बताया कि मंडल के अधिकारियों द्वारा न केवल प्रतिबंधित प्रतिबंधित एकल यूज प्लास्टिक वस्तुओं का उपयोग नहीं करने को लेकर व्यापक स्तर पर जागरूक किया जा रहा है]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/campaign-to-make-every-house-plastic-free/article-83272"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-07/u1rer.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। प्लास्टिक मुक्त राजस्थान की सोच को साकार करने के क्रम में राज्य प्रदूषण नियंत्रण की ओर से किए जा रहे सार्थक प्रयासों की दिशा में अब मंडल के साथ निजी संस्थानों एवं स्वयंसेवी संस्थाओं ने भी आगे आकर हर घर को प्लास्टिक केरी बैग्स से मुक्त करने के लिए व्यापक स्तर पर कपड़े के थैलों का वितरण किया। साथ ही प्रतिबंधित एकल यूज प्लास्टिक वस्तुओं के स्थान पर पर्यावरण अनुकूल वस्तुएं उपयोग करने के लिए जागरूक भी किया गया।</p>
<p>राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल के सदस्य सचिव एन विजय ने बताया कि मंडल के अधिकारियों द्वारा न केवल प्रतिबंधित प्रतिबंधित एकल यूज प्लास्टिक वस्तुओं का उपयोग नहीं करने को लेकर व्यापक स्तर पर जागरूक किया जा रहा है बल्कि रिहायशी कॉलोनियों में घर-घर जाकर कपड़े के थैले वितरित किए जा रहे हैं। वहीं प्लास्टिक कैरी बैग उपयोग नहीं करने की अपील भी की जा रही है ताकि प्लास्टिक से होने वाले प्रदूषण से राज्य को शीघ्र ही मुक्त किया जा सके। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 01 Jul 2024 10:20:09 +0530</pubDate>
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                <title>वायु में ट्रेप प्रदूषक, कोटा में जहरीली हवा</title>
                                    <description><![CDATA[प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसार शनिवार को प्रदेश में सबसे खराब स्थिति भिवाड़ी की रही। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/trap-pollutants-in-the-air--poisonous-air-in-kota/article-61452"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-11/vayu-me-trap-pradushan,-kota-me-zehrili-hawa...kota-news-06-11-2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। मौसम में उतार-चढ़ाव का दौर वायु प्रदूषण को भी प्रभावित कर रहा है। कोटा समेत प्रदेश के कई शहरों में हवा में बढ़ते प्रदूषण ने चिंता बढ़ा दी है। वायु प्रदूषण के चलते सांस लेना मुश्किल होने लगा है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के आंकड़ों के मुताबिक शनिवार को कोटा का वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआइ) 215 के स्तर पर पहुंच गया। यानी कोटा की हवा का स्तर काफी खराब हो चुका है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार वेस्टर्न डिस्टरबेंस होने से छाए बादलों से आसमान के अपर लेवल पर हवा की स्पीड बहुत कम है। इस कारण प्रदूषक और कार्बन पार्टिकल्स हवा में ऊपर जाकर ट्रैप (फंस) गए हैं। इससे अधिकांश शहरों में वायु प्रदूषण का लेवल बढ़ गया है। </p>
<p><strong>बचाव के उपाय</strong><br />- निजी वाहनों की जगह पब्लिक ट्रांसपोर्ट को प्राथमिकता दें।<br />- कम भीड़ वाले रास्तों का चुनाव करें।<br />- अपने वाहन के एयर फिल्टर को मेंटेन रखें।<br />- डस्ट फैलाने वाली कंस्ट्रक्शन गतिविधियों पर रोक जरूरी।<br />- खुले में कचरा और बॉयो ईंधन कतई न जलाएं।</p>
<p><strong>एक्यूआई यह देता है संकेत</strong><br />अच्छा यानि कोई दिक्कत नहीं    0-50<br />संतोषजनक हवा    51-100<br />बाहर जाने से बचें    101-200<br />श्वसन के मरीजों को तकलीफ    201-300<br />लम्बे बीमार रोगियों को दिक्कत    301-400<br />बाहर बिलकुल नहीं निकलें    401-500</p>
<p><strong>प्रदूषित शहरों के टॉप टेन में कोटा भी</strong><br />प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसार शनिवार को प्रदेश में सबसे खराब स्थिति भिवाड़ी की रही। यहां पर एक्यूआई लेवल 388 पर पहुंच गया है। भिवाड़ी एरिया एनसीआर क्षेत्र में आता है और दिल्ली से जुड़ा हुआ है। इस कारण यहां पर प्रदूषण का स्तर ज्यादा है। इसके अलावा प्रदेश के भरतपुर में 367, धौलपुर में 337, चूरू में 335, टोंक में 268, जयपुर में 271, सीकर में 245, कोटा में 215, बूंदी में 191 और झालावाड़ में 183 एक्यूआई लेवल हो गया है। मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक वेस्टर्न डिस्टरबेंस का असर बढ़ने के कारण हवा का स्तर खराब होता जा रहा है। सर्दी के मौसम में हवा और जहरीली हो जाती है। जैसे-जैसे सर्दी बढ़ेगी, प्रदूषण का स्तर बढ़ता जाएगा।  </p>
<p><strong>जल्दी ठीक नहीं हो रही बच्चों की खांसी-जुकाम</strong><br />पीडियाट्रिक डॉ. प्रियांशु बताते हैं कि इन दिनों प्रदूषण के कारण बच्चों में खांसी-जुकाम के केस बहुत ज्यादा हो रहे हैं। जिन बच्चों को अस्थमा हैं या वे एलर्जिक हैं उन्हें ज्यादा दिक्कत हो रही है। खास बात यह है कि इस बार  प्रदूषण के कारण हो रही सर्दी-खांसी जल्दी ठीक नहीं हो रही है। इसलिए बच्चों को प्रदूषण बचाना सबसे बेहतर उपाय है। </p>
<p><strong>आंखों पर भी प्रदूषण का वार</strong><br />चिकित्सकों के अनुसार हल्की स्मॉग व धूल कणों की वजह से अस्पतालों में भी आंखों में एलर्जी व सांस के रोगियों की संख्या बढ़ गई है। अस्पतालों की आंखों की ओपीडी में 10 प्रतिशत मरीज आंखों में जलन और खुजली की शिकायत लेकर पहुंच रहे हैं। हवा की गुणवत्ता खराब होने और स्मॉग की वजह से खांसी, सांस फुलना, आंखों में खुजली जलन और अस्थमा अटैक जैसे मामले बढ़ गए हैं। </p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />वेस्टर्न डिस्टरबेंस का असर अभी दो-तीन दिन और रहेगा। जिससे यहां पर हवा की स्पीड कम होगी। इस कारण वायु प्रदूषण का स्तर ज्यादा रहेगा।   पिछले कुछ दिनों से मौसम में उतार-चढ़ाव का दौर बना हुआ है। दिन में तापमान तेज रहता है तो रात को हल्की सर्दी का असर बना हुआ है। इससे वायु प्रदूषण का स्तर काफी प्रभावित होता है।<br /><strong>- एसके मीणा, मौसम वैज्ञानिक</strong></p>
<p>हवा में धूल व कार्बन के महीन कणों के अलावा दूसरा सबसे बड़ा प्रदूषक कार्बन मोनोआॅक्साइड है। शहर में लगातार बढ़ रहे वाहनों की वजह से कार्बन मोनोआॅक्साइड का उत्सर्जन बढ़ रहा है। साथ ही हवा की गति भी धीमी हो गई। जिसकी वजह से संबंधित क्षेत्र के प्रदूषक उसी वायुमंडल में बने हुए हैं।<br /><strong>- अमित सोनी, क्षेत्रीय अधिकारी, प्रदूषण नियंत्रण मंडल कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 06 Nov 2023 16:07:47 +0530</pubDate>
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